& Trump 'very happy for' Flynn on news DOJ dropping charges By feeds.reuters.com Published On :: Fri, 08 May 2020 01:31:19 +0530 U.S. President Donald Trump described his former national security adviser Michael Flynn as an 'innocent man' after learning that the U.S. Justice Department on Thursday abruptly sought to drop the criminal charges against Flynn. Full Article
& Biden's accuser says he should drop out of White House race By feeds.reuters.com Published On :: Fri, 08 May 2020 13:31:20 +0530 Tara Reade, the woman who alleges Joe Biden sexually assaulted her in 1993, said in a video interview on Thursday that he should withdraw from the White House race. Gloria Tso reports. Full Article
& On the hunt for Asian "murder hornets" in Washington By feeds.reuters.com Published On :: Fri, 08 May 2020 14:24:19 +0530 The sting of the Asian giant hornet can kill and that's not just an expression of speech. Since their discovery in 2019 in the US, traps have been set to see if Asian giant "murder hornets" have settled in the state. Libby Hogan has more. Full Article
& Syria's mosques open for prayer as coronavirus lockdown eases By feeds.reuters.com Published On :: Fri, 08 May 2020 22:08:19 +0530 Syria's government allowed mosques to open on Friday for worshipers willing to perform prayers. The mosque had remained closed as part of the measures taken to contain the spread of coronavirus. Full Article
& 'Never give up': Queen praises Britons on Victory in Europe Day By feeds.reuters.com Published On :: Sat, 09 May 2020 03:51:18 +0530 Britain's Queen Elizabeth honored those who died in World War Two on Friday, the 75th anniversary of Victory in Europe Day, and used the occasion to say she was proud of how people had responded to the coronavirus pandemic. Full Article
& Youth recreate Iraq's ancient Nineveh in VR technology By feeds.reuters.com Published On :: Sat, 09 May 2020 14:38:19 +0530 Stone by stone, digital artists and game developers from Mosul are rebuilding Nineveh's heritage sites in the digital world. Francis Maguire reports. Full Article
& सपने और हकीकत के बीच का अंतर ही ‘कर्म’ कहते हैं By Published On :: Thu, 13 Feb 2020 18:33:00 GMT लोग कहते हैं कि अगर आप ‘कर्म’ करेंगे तो किस्मत आपके लिए दरवाजे खोलती जाएगी। ये ऐसे ही दो उदाहरण हैं।पहली कहानी: इस हफ्ते मुझे किसी ने ललिता की तस्वीर भेजी, जिसने विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग शाखा में टॉप करने पर गोल्ड मेडल जीता था। तस्वीर भेजने वाले ने साथ में मैसेज लिखा था, ‘आपको ललिता की कहानी पसंद आएगी, खासतौर पर इसलिए क्योंकि ऐसे लोग जिनके अशिक्षित माता-पिता आजीविका के लिए सब्जी बेचते हैं, वे शायद ही एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग जैसे विषय चुनें।’ मैं उनसे सहमत था इसलिए तय किया कि मैं ललिता का सफर देखूंगा। वह अपने पूरे परिवार में पहली ऐसी व्यक्ति है, जिसे गोल्ड मेडल मिला है।विशेष बात यह है कि उनके पिता राजेंद्र और मां चित्रा कर्नाटक की चित्रदुर्गा म्युनिसिपल काउंसिल के हिरियूर गांव में सब्जी बेचते हैं, जहां आय हमेशा बहुत कम रहती है। वे दोनों पहली कक्षा तक ही पढ़े हैं, बावजूद इसके उन्होंने अपने तीनों बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दिया। ललिता से छोटा बच्चा फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रहा है, जबकि तीसरा बच्चा स्थानीय पॉलिटेक्निक कॉलेज से डिप्लोमा कर रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि तीनों बच्चे बारी-बारी से सब्जी बेचने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।ललिता स्कूल बोर्ड परीक्षाओं से ही टॉपर रही थी। जब उसने ऐसा ही प्रदर्शन कॉलेज में भी जारी रखा तो कॉलेज प्रिंसिपल ने हॉस्टल की फीस पूरी तरह माफ कर दी। ललिता पर काम का कितना भी प्रेशर हो, वो रोज तीन घंटे जरूर पढ़ती थी। उसने कभी ट्यूशन नहीं ली, लेकिन क्लास की एक्टिविटी हमेशा समय पर पूरी करती थी। इन दो अनुशासनों से उसके जीवन में दबाव नहीं रहा और वह परीक्षा के दौरान निश्चिंत रह पाई।क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दो सब्जी बेचने वालों को दीक्षांत समारोह में बैठकर कैसा महसूस हुआ होगा, जब उनकी बच्ची को इस साल 8 फरवरी को कर्नाटक के राज्यपाल ने गोल्ड मेडल से नवाजा?दूसरी कहानी: आपको याद है, कैसे 18 जनवरी 2020 को अभिनेत्री शबाना आजमी के एक्सीडेंट की खबर ने हमें चौंका दिया था। अगली सुबह अखबारों में मुंबई-पुणे एक्सप्रेस हाईवे पर शबाना आजमी की कार से निकलने में मदद करते एक ‘आर्मी मैन’ की तस्वीर नजर आई। क्या कभी सोचा है कि वह आर्मी मैन कौन था, जिसने शबाना को सुरक्षित बाहर निकलने और फिर जल्दी से अस्पताल पहुंचने में मदद की?लाइफ सेविंग फाउंडेशन के संस्थापक देवेंद्र पटनायक भी तस्वीर वायरल होने के बाद से इस युवा आर्मी मैन को ढूंढ रहे थे। उन्होंने महाराष्ट्र के सभी आर्मी हेडक्वार्टर्स से संपर्क किया। लेकिन उन्हें यह जानकर निराशा हुई कि तस्वीर में दिख रहा आदमी किसी भी आर्मी विंग से नहीं है। फिर देवेंद्र ने उस अस्पताल से संपर्क किया जिसमें शबाना भर्ती हुई थीं और वहां से उस एंबुलेंस के बारे में पता किया जो उन्हें हॉस्पिटल लेकर आई थी। इससे वे महाराष्ट्र सिक्योरिटी फोर्सेस के सिक्योरिटी गार्ड विवेकानंद योगे तक पहुंचे, जो एक्सप्रेसवे पर तैनात था।हादसे वाले दिन उस गार्ड ने सबसे पहले शबाना की मदद की थी, जब उनकी कार एक ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई थी। जब उसने आवाज सुनी तो वह दो किलोमीटर दौड़ा और देखा कि घाट वाली सड़क पर हादसा हुआ है। तब उसे यह नहीं पता था कि अंदर कौन है। उसने शबाना के हादसे के बाद वैसा ही किया, जैसा करने का उसे प्रशिक्षण मिला है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि योगे को अब न सिर्फ संस्थानों ने सम्मानित किया, बल्कि अब बड़े लोगों की प्रसिद्धि के बीच में भी वह चमकेगा।फंडा यह है कि जीवन में अनगिनत दरवाजे मिलते हैं। अगर आप मेहनती हैं तो आप उनमें से कुछ दरवाजे खोलेंगे। अगर आप होशियार हैं तो आप कई दरवाजे खोलेंगे और अगर आप जोश से भरे हैं, तो आपके लिए हर दरवाजा खुद खुलेगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रतीकात्मक फोटो। Full Article
& ‘हुं तने प्रेम करूं छुं’ By Published On :: Thu, 13 Feb 2020 18:42:00 GMT आनंद एल राय की फिल्म ‘हैप्पी भाग जाएगी’ के एक दृश्य में इस आशय का संवाद है कि मधुबाला से युवा को प्रेम है और उसके अब्बा को भी मधुबाला से प्रेम रहा है, परंतु सवाल यह है कि मधुबाला किसे प्रेम करती थी? मधुबाला को चाहने वालों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है- नागरिकों के रजिस्टर की तरह। मधुबाला को दिलीप कुमार से प्रेम था और मधुबाला के लालची पिता अताउल्लाह खान भी यह तथ्य जानते थे।खान साहब ने दिलीप कुमार से कहा कि वे एक शर्त पर इस निकाह की इजाजत दे सकते हैं कि शादी के बाद वे दोनों केवल अताउल्लाह खान द्वारा बनाई जाने वाली फिल्मों में अभिनय करेंगे। दिलीप कुमार अपने काम में सौदा नहीं कर सकते थे। उनके पिता भी उनके अभिनय करने से खफा थे।एक दिन पिता अपने पुत्र दिलीप कुमार को गांधीजी के साथी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद से मिलाने ले गए और गुजारिश की कि इसे भांडगीरी करने से रोकें। वे अभिनय को भांडगीरी मानते थे। आजाद साहब ने दिलीप कुमार से कहा कि जो भी काम करो उसे इबादत की तरह करना। मौलाना साहब से वचनबद्ध दिलीप कुमार अताउल्लाह खान की बात कैसे मानते।यह प्रेम कहानी पनपी नहीं। मधुबाला, दिलीप कुमार को कभी भूल नहीं पाईं। जीवन के कैरम बोर्ड में दिलीपिया संजीदगी की रीप से टकराकर क्वीन मधुबाला किशोर कुमार के पॉकेट में जा गिरी। राज कपूर और नरगिस की प्रेम कहानी ‘बरसात’ से शुरू हुई। ‘बरसात’ के एक दृश्य में राज कपूर की एक बांह में वायलिन तो दूसरी बांह में नरगिस हैं।गोयाकि संगीत और सौंदर्य से उनका जीवन राेशन है। इस दृश्य का स्थिर चित्र उनकी फिल्मों की पहचान बन गया। आर.के. स्टूडियो में यही पहचान कायम रखी। अशोक कुमार और नलिनी जयवंत ने कुछ प्रेम कहानियों में अभिनय किया। अशोक कुमार विवाहित व्यक्ति थे। नलिनी जयवंत और अशोक कुमार दोनों ही चेंबूर में रहते थे।अभिनय छोड़ने के बाद कभी-कभी नलिनी जयवंत अशोक कुमार के चौकीदार से अशोक कुमार की सेहत की जानकारी लेती थीं। कभी-कभी एक टिफिन भी दे जाती थीं। भोजन की टेबल पर व्यंजन देखकर अशोक कुमार जान लेते थे कि कौन सा पकवान नलिनी जयवंत के घर से आया है।जल सेना अफसर की बेटी कल्पना कार्तिक ने देव आनंद के साथ कुछ फिल्मों में अभिनय किया। देव आनंद को यह भरम हुआ था कि उनके बड़े भाई चेतन आनंद भी कल्पना की ओर आकर्षित हैं। उन्होंने स्टूडियो में ही पंडित को बुलाकर लंच ब्रेक में कल्पना से विवाह कर लिया। ज्ञातव्य है कि कल्पना कार्तिक बांद्रा स्थित चर्च में प्रार्थना करने प्रतिदिन आती थीं।वह प्रार्थना थी या प्रायश्चित यह कोई नहीं बता सकता। बोनी कपूर ‘मिस्टर इंडिया’ में श्रीदेवी को अनुबंधित करना चाहते थे। चेन्नई जाकर उन्होंने श्रीदेवी की मां से संपर्क किया कि वे पटकथा सुन लें। उन्हें इंतजार करने के लिए कहा गया। हर रोज रात में बोनी कपूर श्रीदेवी के बंगले के चक्कर काटते थे।यह संभव है कि उसी समय श्रीदेवी भी नींद नहीं आने के कारण घर में चहलकदमी करती हों। संभव है कि आकाश में किसी घुमक्कड़ यक्ष ने तथास्तु कहकर यह जोड़ी को आशीर्वाद दे दिया हो। वर्तमान में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की प्रेम कहानी सुर्खियों में है। खबर है कि ऋषि कपूर के पूरी तरह सेहतमंद होते ही शहनाई बजेगी।भूल सुधार : 13 फरवरी को प्रकाशित गुड़-गुलगुले लेख में पहले पैराग्राफ को यूं पढ़ा जाना चाहिए कि- स्मृति ईरानी को फिल्म थप्पड़ की थीम पसंद है, लेकिन फिल्मकार के राजनीतिक विचारों को नापंसद करती हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today ‘हैप्पी भाग जाएगी’ का पोस्टर। Full Article
& मंटो की कहानी ‘नंगी आवाजें’ और टाट के पर्दे By Published On :: Fri, 14 Feb 2020 18:53:00 GMT राहुल द्रविड़ ने लंबे समय तक बल्लेबाजी करके अपनी टीम को पराजय टालने में सफलता दिलाई और कुछ मैचों में विजय भी दिलाई। राहुल द्रविड़ इतने महान खिलाड़ी रहे हैं कि कहा जाने लगा कि राहुल द्रविड़ वह संविधान है, जिसकी शपथ लेकर खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं। राहुल को ‘द वॉल’ अर्थात दीवार कहा जाने लगा। पृथ्वीराज कपूर का नाटक ‘दीवार’ सहिष्णुता का उपदेश देता था।देश के विभाजन का विरोध नाटक में किया गया था। चीन ने अपनी सुरक्षा के लिए मजबूत दीवार बनाई जो विश्व के सात अजूबों में से एक मानी जाती है। मुगल बादशाह शहरों की सीमा पर मजबूत दीवार बनाया करते थे। के. आसिफ की फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ में अनारकली को दीवार में चुन दिया जाता है। यह एक अफसाना था। उस दौर में शाही मुगल परिवार में अनारकली नामक किसी महिला का जिक्र इतिहास में नहीं मिलता।यश चोपड़ा की सलीम-जावेद द्वारा लिखी अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘दीवार’ दो सगे भाइयों के द्वंद की कथा थी। एक भाई कानून का रक्षक है तो दूसरा भाई तस्कर है। ज्ञातव्य है कि दिलीप कुमार ने ‘मदर इंडिया’ में बिरजू का पात्र अभिनीत करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह नरगिस के पुत्र की भूमिका अभिनीत करना नहीं चाहते थे, परंतु बिरजू का पात्र उनके अवचेतन में गहरा पैठ कर गया था। उन्होंने अपनी फिल्म ‘गंगा जमुना’ में बिरजू ही अभिनीत किया।इस तरह ‘मदर इंडिया’ का ‘बिरजू’ दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ के बाद सलीम जावेद की ‘दीवार’ में नजर आया। कुछ भूमिकाएं बार-बार अभिनीत की जाती हैं। एक दौर में राज्यसभा में नरगिस ने यह गलत बयान दिया था कि सत्यजीत राय अपनी फिल्मों में भारत की गरीबी प्रस्तुत करके अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित करते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने नरगिस से कहा कि वे अपना बयान वापस लें, क्योंकि सत्यजीत राय तो मानवीय करुणा के गायक हैं।कुछ समय पश्चात श्रीमती इंदिरा गांधी के विरोधियों ने नारा दिया ‘इंदिरा हटाओ’ तो इंदिरा ने इसका लाभ उठाया और नारा लगाया ‘गरीबी हटाओ’। घोषणा-पत्र से अधिक प्रभावी नारे होते हैं। हाल में ‘गोली मारो’ बूमरेंग हो गया अर्थात पलटवार साबित हुआ। देश के विभाजन की त्रासदी से व्यथित सआदत हसन मंटो ने कहानी लिखी ‘नंगी आवाजें’ जिसमें शरणार्थी एक कमरे में टाट का परदा लगाकर शयनकक्ष बनाते हैं, परंतु आवाज कभी किसी दीवार में कैद नहीं होती।ज्ञातव्य है कि नंदिता बोस ने नवाजुद्दीन अभिनीत ‘मंटो’ बायोेपिक बनाई। फिल्म सराही गई, परंतु अधिक दर्शक आकर्षित नहीं कर पाई। गौरतलब है कि विभाजन प्रेरित फिल्में कम दर्शक देखने जाते हैं। संभवत: हम उस भयावह त्रासदी की जुगाली नहीं करना चाहते। पलायन हमें सुहाता है, क्योंकि वह सुविधाजनक है।दीवारें प्राय: तोड़ी जाती हैं। दूसरे विश्व युद्ध के पश्चात बर्लिन में दीवार खड़ी की गई। एक हिस्से पर रूस का कब्जा रहा, दूसरे पर अमेरिका का। कालांतर में यह दीवार भी गिरा दी गई। कुछ लोगों ने इस दीवार की ईंट को दुखभरे दिनों की यादगार की तरह अपने घर में रख लिया। जिन लोगों ने युद्ध का तांडव देखा है वे युद्ध की बात नहीं करते, परंतु सत्ता में बने रहने के लिए युद्ध की नारेबाजी की जाती है।निदा फ़ाज़ली की नज्म का आशय कुछ ऐसा है कि- ‘दीवार वहीं रहती है, मगर उस पर लगाई तस्वीर नहीं होती है’। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रतीकात्मक फोटो। Full Article
& ‘पैरासाइट’ से बॉलीवुड क्यों शर्मिंदा न हो? By Published On :: Tue, 18 Feb 2020 18:48:00 GMT हॉलीवुड में आज इस बात पर चर्चा बंद नहीं हो रही है कि किस तरह से एक दक्षिण कोरियाई फिल्म पैरासाइट ने सबटाइटिल की एक इंच की बाधा को पार किया और ऑस्कर में सर्वोच्च पुरस्कार पाने वाली पहली विदेशी फिल्म बनी। मेरे जैसे भारत के फिल्मों के शौकीन के लिए पैरासाइट ने फिर एक बार से वही पुराना सवाल खड़ा कर दिया है कि दुनिया में सर्वाधिक फिल्में बनाने वाला भारत क्या एक ऐसी अच्छी फिल्म नहीं बना सकता, जो एकेडमी पुरस्कार के लायक हो?भारत ने कभी सर्वोत्तम विदेशी फिल्म का पुरस्कार भी नहीं जीता है। ऐसा नहीं है कि उसके प्रयासों में कमी रही। 1957 में इस पुरस्कार की स्थापना के बाद से उसने कम से कम 50 बार प्रविष्टि दाखिल की है। केवल फ्रांस और इटली ही ऐसे हैं, जिन्हाेंने भारत से अधिक बार अपनी प्रविष्टियां दाखिल की हैं, लेकिन उन्होंने कई बार पुरस्कार भी हासिल किया है। केवल यूरोपीय फिल्म पॉवरहाउस ही ऑस्कर में चमके हों, ऐसा नहीं है। 27 देशों की फिल्मों को सर्वोत्तम विदेशी फिल्मों का पुरस्कार मिला है। इनमें ईरान, चिली व आइवरी कोस्ट भी शामिल हैं।भारत के समर्थक इसके लिए कई तरह की दलीलें देते हैं कि भारतीय प्रविष्टि को चुनने वाली कमेटी ने कमजोर चयन किया। जो कंटेट भारतीय दशकों को भाता है वह वैश्विक दर्शकों को पसंद नहीं आता। हमारा घरेलू बाजार ही बहुत बड़ा है और हमें अंतराराष्ट्रीय दर्शकों को खुश करने की जरूरत ही नहीं है। इन सबसे ऊपर, भारतीय फिल्में विश्व स्तर की हैं, लेकिन एकेडमी पक्षपाती है और गुणवत्ता की पारखी नहीं है। इनमें से कोई भी दलील मामूली या सामान्य जांच में भी टिक नहीं सकती।भारतीय फिल्में ऑस्कर ही नहीं, बल्कि हर प्रमुख फिल्म समारोह में लगातार मुंह की खा रही हैं। इनमें से बहुत ही कम कान, वेनिस या बर्लिन में मेन स्लेट में जगह बना पाती हैं। कोई भी भारतीय फिल्म आज तक कान में पाम डी’ऑर या फिर बर्लिन में गोल्डन बियर नहीं जीत सकी। इसलिए यह कहना पूरी तरह भ्रामक है कि दुनिया में फिल्मों का आकलन करने वाले सभी जज भारतीय फिल्मों को लेकर गलत हैं।ठीक है, मीरा नायर ने वेनिस में मानसून वेडिंग के लिए सर्वोच्च पुरस्कार जीता दो दशक पहले 2001 में। और उन्होंने अपने अधिकांश कॅरियर में भारतीय फिल्म उद्योग के बाहर ही काम किया है। सच यह है कि भारत विश्व स्तर की फिल्में नहीं बना रहा है और यह सिर्फ कुछ समय से ही नहीं है। दुनिया के प्रमुख फिल्म आलोचकों द्वारा न्यूयॉर्क टाइम्स से लेकर इंडीवायर तक सभी प्रकाशनों में आने वाली सूचियों पर नजर डालेंगे तो पिछले एक साल, एक दशक या फिर एक सदी या अब तक की टाॅप फिल्मों की सूची में एक भी भारतीय फिल्म नहीं दिखेगी।करीब एक साल पहले बीबीसी ने 43 देशों के 200 फिल्म आलोचकों के बीच कराए गए सर्वे के आधार पर 100 विदेशी सर्वकालिक फिल्मों की सूची बनाई थी। इसमें सिर्फ सत्यजीत रे की पाथेर पांचाली ही स्थान बना सकी थी और यह फिल्म भी 1955 में रिलीज हुई थी। इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय निर्देशकोंको विदेशी समीक्षकों और वैश्विक दर्शकों के लिए फिल्म बनानी चाहिए। वे मानवीय भावनाओं को झकझोरने में सक्षम महान फिल्में बना सकें और कम से कम एक भारतीय फिल्म तो कभीकभार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पा सके।चीन, जापान और ब्राजील की फिल्म इंडस्ट्री भी सिर्फ अपने घरेलू दर्शकों को ध्यान में रखकर फिल्में बनाती है, लेकिन ऑस्कर, फिल्म समारोहों और प्रसिद्ध समीक्षकों के बीच उनका प्रदर्शन भारत से कहीं अच्छा रहता है। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों की नजर में आने से पहले ही पैरासाइट दक्षिण कोरिया के सिनेमाघरों में सनसनी फैला चुकी थी। फिर भारतीय सिनेमा के खराब स्तर की वजह क्या है? फिल्में लोकप्रिय संस्कृति से प्रवाहित होती हैं, लेकिन हम सेलेब्रिटी को लेकर इस हद तक जूनूनी हैं कि वह गुणवत्ता खराब कर रहा है।किसी भी अन्य प्रमुख फिल्म इंडस्ट्री मेंसितारे फिल्म के बजट का इतना बड़ा हिस्सा नहीं लेते हैं कि निर्माता के पास स्क्रिप्ट, संपादन और उन बाकी कलाओंके लिए पैसे की कमी हो जाए, जिनसे महान फिल्म बनती है। कई बार स्क्रिप्ट स्टार को ध्यान में रखकर लिखी जाती है न कि कहानी को और यही सबसे बड़ी वजह है कि हमारी फिल्मों के प्रति अंतरराष्ट्रीय आलोचक उदासीन रहते हैं।भारत को इससे बेहतर की उम्मीद करनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में जो भारी भरकम भारतीय दल जाता है, उसका फोकस फिल्म के कंटेट की बजाय इस बात पर अधिक रहता है कि हमारे स्टार रेड कारपेट पर क्या पहन रहे हैं। वहां से लौटकर मीडिया भी उन ब्रांडों की क्लिप चलाते हैं, जो भारत में अपना सामान बेचना चाहते हैं, लेकिन इस बात पर कुछ नहीं कहते कि भारत बार-बार खाली हाथ क्यों लौट रहा है। वे बहुत कम की उम्मीद करते हैं और वही पाते हैं।इसे बदलने के लिए घरेलू फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अधिक से अधिक लोगों को इस मध्यमता को पहचानने की जरूरत है और एक विश्व स्तर का कंटेंट बनाने के लिए भीतर से तीव्र इच्छा जगाने की जरूरत है। ऐसा दबाव बनने के कुछ संकेत भी हैं। पिछले कुछ सालों में बड़े स्टार वाली फिल्में जहां धड़ाम हो गईं, वहीं कम बजट की और अच्छी कहानी वाली फिल्मों का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा।बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की संख्या स्थिर रहने और लाइव स्ट्रमिंग, डिजिटल गेमिंग के साथ ही स्क्रीन मनोरंजन के कई अन्य विकल्पों के उभरने से भारतीय निर्माताओं को यह समझने की जरूरत है कि व्यावसायिक रूप से बने रहने के लिए क्वालिटी ही एक मात्र रास्ता होगा।तब तक न्यूयॉर्क में रहने वाला मुझ जैसा भारतीय सिनेमा का फैन मैनहट्टन के उस एकमात्र थिएटर में जाता रहेगा, जो हिंदी फिल्म दिखाता है। यह उस देश से जुड़े रहने का एक जरिया है, जिसे मैं बहुत प्यार और याद करता हूं। मैं यह उम्मीद करना भी जारी रखूंगा कि भविष्य में एक दिन मुझे पैरासाइट जैसी एक भारतीय फिल्म मिलेगी। (यह लेखक के अपने विचार हैं।) Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today पैरासाइट फिल्म का दृश्य। Full Article
& क्या हॉलीवुड का ‘जोकर’ भी शहरी नक्सली है? By Published On :: Thu, 20 Feb 2020 00:06:00 GMT मैं निराश हूं। मुझे उम्मीद थी कि ‘जोकर’ को बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड मिलेगा। शुक्र है कि जोकिन फीनिक्स को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिल गया। जोकर न केवल एक महान फिल्म है, बल्कि यह आज के समय में एक साहसिक राजनीतिक बयान भी है। खासतौर से यहां भारत में रहने वालों के लिए। यह एक ऐसे छोटे व्यक्ति की कहानी है, जो अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए बहुत मेहनत कर रहा है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो बिना किसी कारण के लगातार और हर मोड़ पर उस पर धौंस जमाते हैं और परेशान करते हैं, जिससे उसकी निजता भी खतरे में पड़ जाती है।इस फिल्म को देखकर आपको अहसास होगा कि काल्पनिक शहर गॉथम कितना वास्तविक है। अब यह सिर्फ कॉमिक बुक की कल्पना नहीं है। यह वह दुनिया है, जहां आप और मैं रहते हैं। यह सब जगह रहने वाले आम लोगाेंकी कहानी है। जो उस समय आसानी से चोट खा बैठते हैं, जब किसी की परवाह न करने वाली असभ्य दुनिया प्रभुत्व के अपने बेढंगे सपने के पीछे अपनी धुरी पर घूमती है। ये वो हैं जो सबसे असुरक्षित और सबसे हारे हुए हैं। इन्हें सबसे अधिक तनाव यह बात देती है कि उनके अपने लोग ही नहीं समझते की असल में हो क्या रहा है। वे राजनीति द्वारा उनके चारों ओर बनाए गए कल्पना और शक्ति के प्रेत के पीछे भागने में व्यस्त हैं।टाॅड फिलिप्स द्वारा लिखी इस शानदार प्रतीकात्मक कहानी में अंतत: जोकर एक तरह की अनिच्छा से अवज्ञा का एक कदम उठाकर अपनी क्रांति को प्रज्ज्वलित कर देता है, जो उसे खुद के बारे में सोचने की हिम्मत देता है। इससे उसके चारों ओर की दुनिया में यह ज्वाला भड़क उठती है। हर जोकर सड़क पर होता है, लड़ता हुआ, दंगा और आगजनी करता हुआ। वे एक जोशीले हीरो की तलाश में थे, जो परिवर्तन के लिए प्रेरित कर सके, जो इस दुनिया को सभी के लिए रहने का एक अच्छा स्थान बना सके। और अपने नायक जोकर में उन्हें वह नजर आ गया। यहां पर उसे तलाशना नहीं पड़ेगा।हीरो यहीं है, उनके बीच में। वे ही हीरो हैं। जोकर जो भी करता है वह उनके गुस्से और दुखों की छवि है। फिलिप्स ने अपनी फिल्म से यही संदेश दिया है, जिसे भुलाने में हमें लंबा समय लगेगा। यह उस साहस के बारे में है, जो कमजोर में हताशा से पैदा होता है। ऐसा साहस जो अपनी आवाज को पाने के लिए हर तरह के डर और अनिश्चितता को खारिज कर देता है। यह अकेले, हारे हुए, डरे हुए लोगों का साहस है। यह साहस निडर और बहादुर बने रहने के लिए अपने चारों ओर की दुनिया को चुनौती देता है। यही है जो नायकत्व के लिए जरूरी है और जोकर हमारे समय का हीरो है।जोकिन फीनिक्स ने अपने भाषण में पुष्टि की कि जब उन्हें ऑस्कर मिला तो भीड़ ने ठंडी सांस ली। वह पहले भी अपनी अंतरात्मा से बात कर चुके हैं। गोल्डन ग्लोब में उन्हांेने जलवायु परिवर्तन पर बात की थी। बाफ्टा में उन्होंने नस्लवाद पर बात की। अन्य जगहों पर लैंगिक भेदभाव और महिलाओं को उनकी वाजिब पहचान न मिलने पर बात की। उन्होंने दुनिया में बढ़ रही असमानता पर बात की, जहां 2000 अरबपति 4.6 अरब गरीब लोगों से अमीर हैं।जैसा कि ऑक्सफैम ने इस साल दावोस में ध्यान दिलाया था कि 22 अमीर लोगों के पास अफ्रीका की सभी महिलाओं से अधिक संपत्ति है। भारत के एक फीसदी अमीर लोगों के पास हमारे 95.30 करोड़ लोगोंसे चार गुना अधिक संपत्ति है, ये लोग देश की आबादी का 70 फीसदी हैं। लेकिन, इससे हम मुद्दे से हट जाएंगे।फीनिक्स ने बताया कि किस तरह से सिनेमा का मनोरंजन से अधिक एक बड़ा उद्देश्य है। यह उद्देश्य मूक लोगों को आवाज देना है। उन्होंने दुनिया बदलने की ताकत को इस माध्यम का सबसे बड़ा तोहफा बताया। चाहे यह लैंगिक असमानता हो, नस्लवाद हो, समलैंगिकों के अधिकार हों या फिर अन्य सताए लोगों के हक। यह अंतत: एक बढ़ते अन्याय के खिलाफ एक सामूहिक लड़ाई थी। उन्होंने कहा कि ‘हम एक राष्ट्र, एक व्यक्ति, एक जाति, एक लिंग और एक प्रजाति को प्रभुत्व का हक होने और दूसरे का इस्तेमाल और नियंत्रण की बात कर रहे हैं’।उन्होंने धर्म या जाति का जिक्र नहीं किया, लेकिन अगर उनके जहन में भारत होता तो यह जिक्र भी होता। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों की बरबादी के लिए भी लालच को जिम्मेदार ठहराया। करोड़ों पशु-पक्षी गायब हो गए हैं, करोड़ों विलुप्त होने की कगार पर हैं, यह सब हमारी वजह से है, हमने उनसे कैसे बर्ताव किया। उन्होंने दूध और डेयरी इंडस्ट्री और उसकी निर्दयता के बारे में भी बात की। एक पूर्ण शाकाहारी (वीगन) फीनिक्स ने कृत्रिम गर्भाधान, बछड़ों को उनकी मां से दूर करना और चाय व कॉफी के लिए दूध के अनियंत्रित इस्तेमाल पर बात की।उन्हाेंने एक अधिक मानवीय दुनिया बनाने की बात की, जहां पर पशुओं को हमारी दया पर न जीना पड़े। उनका भाषण उनके दिवंगत भाई रिवर फीनिक्स की इस कविता से खत्म हुआ : ‘प्रेम से बचाने दौड़ें और शांति अनुसरण करेगी।’ जब जोकर ने सड़कों पर दंगे देखे तो उसने ठीक यही किया। वह जिसके लिए लड़ रहा था वह केवल शांति थी। उन लोगांंे से शांति, जो उसे अकेला नहीं छोड़ते। उनके और उसके जैसों के लिए शांति जो बढ़ते अन्याय से आहत हो रहे थे।(यह लेखक के अपने विचार हैं।) Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today ‘जोकर’ फिल्म का पोस्टर। Full Article
& कितना ‘उत्कृष्ट’ है हमारा काम और बर्ताव? By Published On :: Thu, 20 Feb 2020 19:53:00 GMT रेल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए 400 करोड़ रुपए की लागत से अक्टूबर 2018 में ‘उत्कृष्ट’ योजना शुरू की गई थी। इसके तहत करीब 300 उत्कृष्ट रेल डिब्बों में कई आधुनिक सुख-सुविधाओं के अलावा एलईडी लाइट्स लगाई गईं और बिना बदबू वाले टॉयलेट्स बनाए गए। अब सीधे 20 फरवरी 2020 पर आते हैं। इन 17 महीनों में डिब्बों के टॉयलेट्स और वॉश बेसिन से स्टील के 5 हजार से ज्यादा नल चोरी हो गए।रेलवे के आंकड़े यह भी बताते हैं कि 80 उत्कृष्ट डिब्बों से स्टील के फ्रेम वाले करीब 2000 आईने, करीब 500 लिक्विड सोप डिस्पेंसर और करीब 3000 टॉयलेट फ्लश वाल्व भी गायब हैं। कुला मिलाकर बदमाशों ने रेलवे के सबसे शानदार उत्कृष्ट डिब्बों में जमकर उत्पात मचाया और टॉयलेट कवर्स और सोप डिस्पेंसर्स तक नहीं छोड़े।जब भी मैं यात्रा कर रही जनता के द्वारा नुकसान पहुंचाने की खबरों के बारे में पढ़ता हूं, मुझे जापान की रेल याद आती है। ये न सिर्फ इसलिए शानदार हैं, क्योंकि साफ हैं, समय पर चलती हैं और सरकार इनमें सबसे अच्छी सुविधाएं दे रही है, बल्कि ज्यादातर जापानी भी यह सुनिश्चित करते हैं कि इन सुविधाओं का कोई भी दुरुपयोग न करे। लेकिन नुकसान पहुंचाने और चोरी को स्पष्ट ‘न’ है! जापान में रेल यात्रा को लेकर एक कहानी है।एक गैर-जापानी ने ट्रेन में सफर करते हुए अपने पैर सामने वाली बर्थ पर रख दिए, क्योंकि वहां कोई नहीं बैठा था। जब स्थानीय जापानी यात्री ने उसे ऐसा करते देखा तो वह उसके पैरों के बगल में बैठ गया और गैर-जापानी यात्री के पैर अपनी गोद में रख लिए। वह यात्री चौंक गया। तब स्थानीय यात्री ने कहा, ‘आप हमारे मेहमान हैं और हमारी संस्कृति हमें मेहमान का अपमान करने से रोकती है, लेकिन हम किसी को अपनी सार्वजनिक संपत्ति का इस तरह अपमान भी नहीं करने देते!’ ऐसी टिप्पणी सुन उस मेहमान की चेहरे की आप कल्पना कर सकते हैं।यही कारण है कि मुझे अहमदाबाद के रीजनल पासपोर्ट ऑफिस (आरपीओ) द्वारा एक साधारण गृहिणी उर्वशी पटेल की खराब स्थिति को देखते हुए एक घंटे के अंदर पासपोर्ट देने जैसे कार्य हमेशा बहुत अच्छे लगते हैं। 51 वर्षीय उर्वशी गुजरात के नडियाड में अपने 21 वर्षीय बेटे और 18 वर्षीय बेटी के साथ रहती हैं।उनके पति 54 वर्षीय विलास पटेल पिछले 8 सालों से केन्या की राजधानी नैरोबी में रह रहे थे। विलास को वहां डायबिटीज के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था और उनकी स्थिति सुधर रही थी। लेकिन अचानक उनका शुगर लेवल गिर गया और सोमवार को वे डायबिटिक कॉमा में आ गए। एक घंटे में उनकी किडनी फेल हो गईं और डॉक्टरों ने उन्हें सोमवार को ही मृत घोषित कर दिया।उर्वशी अपने पति का अंतिम संस्कार करने के लिए केन्या जाना चाहती थीं, लेकिन उनका दिल टूट गया, जब उनका वीज़ा खारिज हो गया, क्योंकि उनके पासपोर्ट की 6 महीने से भी कम की वैधता बची थी और 29 मई को इसकी समाप्ति तारीख थी। उन्होंने मंगलवार को ऑनलाइन वीज़ा फॉर्म भरने की कोशिश की जो वैधता की समस्या के चलते खारिज हो गया था।चूंकि बच्चों के पासपोर्ट में ऐसी कोई समस्या नहीं थी, इसलिए वे नैरोबी चले गए। दु:ख और सदमे के साथ उर्वशी बुधवार को सुबह 11 बजे अहमदाबाद आरपीओ पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों को अपनी परिस्थिति बताई और एक घंटे के अंदर ही उर्वशी को पासपोर्ट जारी कर दिया गया। वे गुरुवार को नैरोबी के लिए निकल गईं।अगर आपके पास शक्ति है तो वैसा ही करें, जैसा अहमदाबाद आरपीओ ने किया। और अगर आप नागरिक हैं तो वैसा करें, जैसा जापानी नागरिक ने मेहमान के साथ किया।फंडा यह है कि देश हर क्षेत्र में दूसरे देशों से बहुत आगे निकल सकता है, अगर हमारा काम और व्यवहार ज्यादा से ज्यादा ‘उत्कृष्ट’ हो। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रतीकात्मक फोटो। Full Article
& हमारे नेता ‘राष्ट्र’ की राजनीति करते हैं, उसे आत्मसात नहीं करते By Published On :: Tue, 25 Feb 2020 00:07:00 GMT 14 अगस्त 1947 की आधी रात को जब अंग्रेजी झंडा उतर रहा था और उसकी जगह अपना तिरंगा ले रहा था, प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने संबोधन में ‘नेशन’ शब्द काम में लिया था। तब से ही देश में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या पंडित नेहरू का ‘नेशन’ वह ‘नेशन’ ही था जो वे विदेश में पढ़ और सीखकर आए थे या उनका ‘नेशन’ भारत का वह ‘राष्ट्र’ था जिसकी छाया में उन्होंने जन्म लिया था। ‘नेशन’ और ‘राष्ट्र’ के ही अनुरूप नेहरू के ‘नेशनलिज्म’ और ‘राष्ट्रवाद’ के प्रति संशय की बात होती है। पंडित नेहरू से लेकर अब तक इस देश के नेता ‘नेशनलिज्म’ और ‘राष्ट्रवाद’ की समझ के प्रति संशय में ही दिखाई देते आ रहे हैं।इन दिनों समाचारों की सुर्खियों में ‘पॉजिटिव नेशनलिज्म’ या ‘सकारात्मक राष्ट्रवाद’ की बात हो रही है। यहां भी वही प्रश्न उपस्थित है जो नेहरू के दौर में उपस्थित था। सही बात यह है जहां ‘राष्ट्र’ की तुलना में ‘नेशन’ शब्द आ जाता है, वहां राजनीति शुरू हो जाती है। हमें समझना चाहिए कि ‘नेशन’ की अवधारणा ‘राष्ट्र’ की अवधारणा से पूरी तरह अलग है। दोनों ही शब्दों को काम लेने वाले लोग इस समय देश में राजनीति कर रहे हैं। इस प्रवृत्ति को ‘पॉलिटिकल नेशनलिज्म’ या ‘राजनीतिक राष्ट्रवाद’ कहा जाना चाहिए।सीधी-सी बात है कि यदि कहीं राष्ट्रवाद (नेशनलिज्म नहीं) होगा तो वह सकारात्मक ही होगा। वह नकारात्मक हो ही नहीं सकता। क्या सत्य नकारात्मक हो सकता है? यदि इन प्रश्नों का उत्तर ना है, तो हमें समझना चाहिए कि राष्ट्र हमारी सांस्कृतिक विरासत है और वह हमेशा सकारात्मक ही होगी। भारत से बाहर दुनिया में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, धर्म, सत्य आदि प्रत्ययों के लिए ये ही शब्द काम में नहीं लिए जाते। वहां इनके अर्थ पूरी तरह अलग हैं।भारत ही इनका विशिष्ट अर्थ जानता है, क्योंकि इनका मूल भारत में ही है। इसी तर्ज पर कहना चाहिए कि हमारा भारत ‘राष्ट्र’ को जानता है, ‘नेशन’ को नहीं जानता। जाहिर है कि जो लोग ‘राष्ट्र’ का अनुवाद ‘नेशन’ करते हैं, वे गलती करते हैं। अपने यहां तो राष्ट्र सकारात्मक अर्थ में ही होगा। उसमें नेशन की तरह भूमि, आबादी और सत्ता ही शामिल नहीं होगी, बल्कि संस्कृति भी शामिल होगी। संस्कृति कभी नकारात्मक नहीं हो सकती। नकारात्मक होती है दुष्कृति।राष्ट्र न तो यूरोपीय और अमेरिकी सत्ताधीशों द्वारा ताकत के बल पर बनाए हुए नक्शों का नाम है, न उग्र भीड़ द्वारा नारे लगाकर विरोधी देश का दुनिया से नक्शा मिटा देने की कसम उठाने का नाम है और न ही यह लोगों को मुफ्त में बिजली-पानी देने का वादा करके उन्हें मूर्ख बनाने का नाम है। यदि राष्ट्रवाद को समझना ही हो तो इस सरल उदाहरण से समझना चाहिए कि राष्ट्रवाद नाम है उस संस्कार का, उस दर्द का जो किसी भारतीय के मन में भारत के लिए तब भी जागता है, जब वह किसी कारणवश भारत का नागरिक न रहकर किसी अन्य देश का नागरिक बन जाता है।‘न भूमि/ न भीड़/ न राज्य/ न शासन.../ राष्ट्र है/ इन सबसे ऊपर/ एक आत्मा’- किसी कवि के कहे इन शब्दों के माध्यम से आप सामान्य बुद्धि के व्यक्ति को तो राष्ट्र का अर्थ समझा सकते हैं, लेकिन धन और सत्ता के लोभी हमारे नेताओं को आप इन शब्दों के माध्यम से राष्ट्र का अर्थ नहीं समझा सकते और सही पूछो तो इस दौर का सबसे बड़ा संकट भी यही है कि हमारे नेता ‘राष्ट्र’ की राजनीति करते हैं, उसे आत्मसात नहीं करते! Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रतीकात्मक फोटो। Full Article
& महज व्यापार के नजरिये से न करें ‘नमस्ते ट्रम्प’ By Published On :: Tue, 25 Feb 2020 00:14:00 GMT सदियों तक याचक रहने के कारण हम मेहमान के आने का लेखा-जोखा फायदे और खासकर तात्कालिक आर्थिक लाभ के नजरिये से करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को ‘नमस्ते ट्रम्प’ के भावातिरेक में सम्मान दिया गया। लेकिन, विश्लेषकों का एक बड़ा वर्ग है, जो इस यात्रा को व्यापारिक लाभ-हानि के तराजू पर तौलने लगा है। यानी अगर कुछ मिला तो ही ‘स्वागत’ सफल। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति को केवल 23 ट्रिलियन डाॅलर की अर्थव्यवस्था (हमसे करीब सात गुना ज्यादा) वाले देश का मुखिया मानना और तब यह सोचना कि दोस्त है तो भारत को आर्थिक लाभ क्यों नहीं देता, पचास साल पुरानी बेचारगी वाली सोच है।भारत स्वयं अब तीन ट्रिलियन डॉलर की (दुनिया में पांचवीं बड़ी) अर्थव्यवस्था है। कई जिंसों का निर्यातक है और शायद सबसे बड़े रक्षा आयातक के रूप में हथियार निर्यातक देशों से अपनी शर्तों पर समझौते करने की स्थिति में है। अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत आना भू-रणनीतिक दृष्टिकोण से भी देखना होगा, क्योंकि हमारे पड़ोस में दो ऐसे मुल्क हैं जो हमारे लिए सामरिक खतरा बनते रहे हैं। सस्ते अमेरिकी पोल्ट्री या डेरी उत्पाद के लिए हम कुक्कुट उद्योग और दुग्ध उत्पादन में लगे किसानों का गला नहीं दबा सकते और अमेरिका हमारा स्टील महंगे दाम पर खरीदे, यह वहां के राष्ट्रपति के लिए अपने देश के हित के खिलाफ होगा।फिर हमारी मजबूरी यह भी है कि हमारे उत्पाद महंगे भी हैं। हमारा दूध पाउडर जहां 320 रुपए किलो लागत का है, वहीं न्यूजीलैंड हमें यह 250 रुपए में भारत में पहुंचाने को तैयार है। स्टील निर्यात को लेकर हमने अमेरिका के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में केस दायर किया और फिर जब हमने उनकी हरियाणा में असेम्बल मशहूर हर्ले डेविडसन मोटरसाइकिल पर 100 प्रतिशत ड्यूटी लगाई तो ट्रम्प ने व्यंग्य करते हुए हमें टैरिफ का बादशाह खिताब से नवाजा और प्रतिक्रिया में उस लिस्ट से हटा दिया, जिसके तहत भारत अमेरिका को करीब छह अरब डाॅलर का सामान बगैर किसी शुल्क का भुगतान किए निर्यात कर सकता था। ट्रम्प-मोदी केमिस्ट्री का दूरगामी असर दिखेगा, रणनीतिक-सामरिक रूप से भी और चीन की चौधराहट पर अंकुश के स्तर पर भी। बहरहाल कल की वार्ता में रक्षा उपकरण, परमाणु रिएक्टर और जिंसों के ट्रेड में काफी मजबूती आने के संकेत हैं जो भारत के हित में होगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प। Full Article
& अशांति के खिलाफ ईमानदार और सख्त ‘राजदंड’ जरूरी By Published On :: Thu, 27 Feb 2020 18:54:00 GMT पूरे देश में दो संप्रदायों के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है। देश की राजधानी जल रही है, लगभग तीन दर्जन लोग मारे गए हैं, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल भी है। पिछले कुछ वर्षों में देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा है। गृह राज्यमंत्री का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के दौरान भड़की दिल्ली हिंसा की घटनाएं किसी साजिश की बू देती हैं।साजिश कौन कर रहा है, अगर कर रहा है तो कहने वाले मंत्री, जो स्वयं इसे रोकने के जिम्मेदार हैं, क्या कर रहे हैं? ऐसे इशारों में बात करके क्या साजिशकर्ताओं को रोक सकेंगे? यही सब तो वर्षों से किया जा रहा है। क्या सत्ता का काम इशारों में बात करना है? अच्छा तो होता जब उसी मीडिया के सामने ये मंत्री साजिशकर्ताओं को खड़ा करते और अकाट्य साक्ष्य के साथ उन्हें बेनकाब करते। जब एक मंत्री बयान देता है कि ‘तुम्हें पाकिस्तान दे दिया, अब तुम पाकिस्तान चले जाओ, हमें चैन से रहने दो’, तो क्यों नहीं उसी दिन उसे पद से हटाकर मुकदमा कायम किया जाता?उसने तो संविधान में निष्ठा की कसम खाई थी और उसी संविधान की प्रस्तावना में ‘हम भारत के लोग’ लिखा था न कि ‘हमारा हिंदुस्तान, तुम्हारा पाकिस्तान’। राजसत्ता के प्रतिनिधियों की तरफ से इन बयानों के बाद लम्पट वर्ग का हौसला बढ़ने लगता है और दूसरी ओर संख्यात्मक रूप से कमजोर वर्ग में आत्मसुरक्षा की आक्रामकता पैदा हो जाती है। फिर अगर मंच से कोई बहका नेता ‘120 करोड़ पर 15 करोड़ भारी’ कहता है तो उसे घसीटकर पूरे समाज को बताना होता है कि भारी लोगों की संख्या नहीं, बल्कि कानून और पुलिस है।लेकिन इसकी शर्त यह है कि सरकार को यह ताकत तब भी दिखानी होती है जब चुनाव के दौरान केंद्र का मंत्री ‘देश के गद्दारों को’ कहकर भीड़ को ‘गोली मारो सा... को’ कहलवाता है। आज जरूरत है कि देश का मुखिया वस्तु स्थिति समझे और एक मजबूत, निष्पक्ष राजदंड का प्रयोग हर उस शख्स के खिलाफ करे जो भावनाओं को भड़काने के धंधे में यह सोचकर लगा है कि इससे उसका राजनीतिक अस्तित्व पुख्ता होगा। भारत को सीरिया बनने से बचाने के लिए एक मजबूत राज्य का संदेश देना जरूरी है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रतीकात्मक फोटो। Full Article
& ‘हुनूज दूर अस्थ’ By Published On :: Fri, 28 Feb 2020 19:01:00 GMT खबर यह है कि हुक्मरान नया संसद भवन बनाना चाहते हैं। इतिहास में अपना नाम दर्ज करने की ललक इतनी बलवती है कि देश की खस्ताहाल इकोनॉमी के बावजूद इस तरह के स्वप्न देखे जा रहे हैं। खबर यह भी है कि नया भवन त्रिभुज आकार का होगा। मौजूदा भवन गोलाकार है और इमारत इतनी मजबूत है कि समय उस पर एक खरोंच भी नहीं लगा पाया है।क्या यह त्रिभुज समान बाहों वाला होगा या इसका बायां भाग छोटा बनाया जाएगा? वामपंथी विचारधारा से इतना खौफ लगता है कि भवन का बायां भाग भी छोटा रखने का विचार किया जा रहा है। स्मरण रहे कि फिल्म प्रमाण-पत्र पर त्रिभुज बने होने का अर्थ है कि फिल्म में सेंसर ने कुछ हटाया है। ज्ञातव्य है कि सन 1912-13 में सर एडविन लूट्यन्स और हर्बर्ट बेकर ने संसद भवन का आकल्पन किया था, परंतु इसका निर्माण 1921 से 1927 के बीच किया गया।किंवदंती है कि अंग्रेज आर्किटेक्ट को इस आकल्पन की प्रेरणा 11वीं सदी में बने चौसठ योगिनी मंदिर से प्राप्त हुई थी। बहरहाल, 18 जनवरी 1927 को लॉर्ड एडविन ने भवन का उद्घाटन किया था। सन् 1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने भवन के ऊपर दो मंजिल खड़े किए। इस तरह जगह की कमी को पूरा किया गया।13 दिसंबर 2001 में संसद भवन पर पांच आतंकवादियों ने आक्रमण किया था। उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। फिल्मकार शिवम नायर ने इस सत्य घटना से प्रेरित होकर एक काल्पनिक पटकथा लिखी है। जिसके अनुसार 6 आतंकवादी थे। पांच मारे गए, परंतु छठा बच निकला और इसी ने कसाब की मदद की जिसने मुंबई में एक भयावह दुर्घटना को अंजाम दिया था। पटकथा के अनुसार यह छठा व्यक्ति पकड़ा गया और उसे गोली मार दी गई।बहरहाल, शिवम नायर ने इस फिल्म का निर्माण स्थगित कर दिया है। विनोद पांडे और शिवम नायर मिलकर एक वेब सीरीज बना रहे हैं, जिसकी अधिकांश शूटिंग विदेशों में होगी। वेब सीरीज बनाना आर्थिक रूप से सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह सिनेमाघरों में प्रदर्शन के लिए नहीं बनाई जाती। आम दर्शक इसका भाग्यविधाता नहीं है। एक बादशाह को दिल्ली को राजधानी बनाए रखना असुरक्षित लगता था। अत: वह राजधानी को अन्य जगह ले गया।उस बादशाह ने चमड़े के सिक्के भी चलाए थे। यह तुगलक वंश का एक बादशाह था, जिसके परिवार के किसी अन्य बादशाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया था। दिल्ली में भगदड़ मच गई थी, परंतु हजरत निजामुद्दीन औलिया शांत बने रहे। उन्होंने कहा ‘हुनूज (अभी) दिल्ली दूर अस्थ’ अर्थात अभी दिल्ली दूर है। सचमुच वह आक्रमण विफल हो गया था। फौजों को यमुना की उत्तंुग लहरें ले डूबी थीं। आक्रमणकर्ता के सिर पर दरवाजा टूटकर आ गिरा और वह मर गया।वर्तमान समय में भी दिल्ली जल रही है। समय ही बताएगा कि यह साजिश किसने रची। मुद्दे की बात यह है कि अवाम ही कष्ट झेल रहा है। देश के कई शहर उस तंदूर की तरह हैं जो बुझा हुआ जान पड़ता है, परंतु राख के भीतर कुछ शोले अभी भी दहक रहे हैं। दिल्ली के आम आदमी में बड़ा दमखम है। वह आए दिन तमाशे देखता है।केतन मेहता की फिल्म ‘माया मेमसाब’ का गुलजार रचित गीत याद आता है- ‘यह शहर बहुत पुराना है, हर सांस में एक कहानी, हर सांस में एक अफसाना, यह बस्ती दिल की बस्ती है, कुछ दर्द है, कुछ रुसवाई है, यह कितनी बार उजाड़ी है, यह कितनी बार बसाई है, यह जिस्म है कच्ची मिट्टी का, भर जाए तो रिसने लगता है, बाहों में कोई थामें तो आगोश में गिरने लगता है, दिल में बस कर देखो तो यह शहर बहुत पुराना है।’ Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today संसद भवन (फाइल फोटो)। Full Article
& ‘अनलाइकली हैंडशेक्स’ बिजनेस के लिए, जिंदगी के लिए नहीं By Published On :: Mon, 02 Mar 2020 21:25:00 GMT रविवार को देर शाम मैं भोपाल एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन जा रहा था, जहां से मुझे एक कार्यक्रम के लिए सतना पहुंचना था। तब वहां तेज बारिश हो रही थी। मेरी आदत है कि जब मैं ट्रेन से सफर करता हूं तो ज्यादा वजन लेकर नहीं चलता, क्योंकि मुझे रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर अपना सूटकेस खींचना कई कारणों से पसंद नहीं है। इनमें से एक कारण स्वच्छता भी है। मैं यह हल्की अटैची भी कुली से उठवाता हूं, न सिर्फ इस अच्छी मंशा के लिए कि इससे उस कुली की कुछ आय हो जाएगी, बल्कि इसलिए भी कि मेरी अटैची के व्हील्स को गंदे रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर न खींचना पड़े।मैं बेमौसम तेज बरसात के बीच जब भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर चल रहा था, तभी मैंने एक खबर पढ़ी। लिखा था कि टेक्सटाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, इंसानों के लिए दवाओं से लेकर पौधों के लिए कीटनाशकों तक और जूतों से लेकर सूटकेस तक, भारत सरकार ऐसे करीब 1,050 आइटम्स दुनियाभर में तलाश रही है, क्योंकि चीन से आने वाली सप्लाई कोरोना वायरस की वजह से प्रभावित हुई है। भारत के आयात में 50 फीसदी हिस्सेदारी चीन से होने वाली सप्लाई की होती है।खबर के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में सरकार खरीदी में ज्यादा प्राथमिकता दिखाएगी, लेकिन जहां संभव हो, वहां स्थानीय उत्पादन को भी बढ़ावा देगी। और यही भारतीय व्यापार के लिए अनपेक्षित व्यापार उद्योगों से ‘अनलाइकली हैंडशेक्स’ (हाथ मिलाने के असंभव लगने वाले अवसर) का मौका है। जैसा कि 53 वर्षीय कुमार मंगलम बिड़ला भी सलाह देते हैं। करीब 6 अरब डॉलर की नेटवर्थ वाले उद्योगपति बिड़ला ने हाल में सोशल मीडिया पर 10 पेज लंबा लेख साझा किया है, जिसमें उन्होंने पिछले कुछ सालों में जो कुछ सीखा है, उसका सार बताया है।बिड़ला मानते हैं कि उनके सभी बिजनेस की ग्रोथ का अगला चरण ‘अनलाइकली हैंडशेक्स’ से आएगा। वे लिखते हैं, ‘बिजनेस में वैल्यू बनाने का नए युग का तरीका ग्रोथ के ऐसे बेमेल साधनों से आएगा, जो बहुत अलग तरह के ‘लगने वाले’ उद्योगों और कंपनियों से उत्पन्न होंगे।’ वे अपनी बात समझाने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस का उदाहरण देते हैं, जो फिटनेस वियरेबल कंपनीज, जिम, फार्मेसी, डायटिशियंस और वेलनेस कोच का इकोसिस्टम बना रहा है।जहां बिजनेस में ज्यादा से ज्यादा ‘अनलाइकली हैंडशेक्स’ की सलाह दी जा रही है, वास्तविक जीवन में न सिर्फ सरकार और प्राइवेट संस्थाएं, बल्कि चीन, फ्रांस, ईरान और दक्षिण कोरिया जैसे देश लोगों से मिलने के दौरान ‘हाथ मिलाने’ के विरुद्ध चेतावनी दे रहे हैं। कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में लोग हाथ मिलाना बंद कर रहे हैं।पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (पीएमसी) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे संस्थान लोगों से दोस्तों, सहकर्मियों और रिश्तेदारों का अभिवादन करने के लिए पारंपरिक नमस्ते अपनाने पर जोर देने को कह रहे हैं। पीएमसी स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास से जुड़े सार्वजनिक महकमों में काम कर रहे लोगों के बीच हाथा मिलाना, फिस्ट बंप (मुटि्ठयां टकराना) और गले लगना बंद करने को लेकर जागरूकता लाने का काम रहा है। उनकी प्राथमिकता न सिर्फ कोरोना वायरस से बल्कि स्वाइन फ्लू और अन्य वायरस व कीटाणुओं से बचना है, जो श्वास संबंधी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। मुंबई में कई संस्थानों ने साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाई है और अपने कर्मचारियों में स्वच्छता की आदत को बढ़ावा देने के लिए बार-बार साबुन से हाथ धोने पर जोर दे रहे हैं।इससे मुझे याद आया कि कैसे हमारे माता-पिता छोटी-छोटी बात पर भी हमसे हाथ धोने को कहते थे। मेरी मां इस मामले में इतनी सख्त थीं कि मुझे स्कूल जाते समय जूतों के फीते बांधने के बाद भी हाथ धोने पड़ते थे। उनका तर्क था कि मैं इन्हीं हाथों से किताबें पकड़ूंगा, जिससे मां सरस्वती का अपमान होगा। अब पीछे मुड़कर देखता हूं तो सोचता हूं कि वे दरअसल बैक्टीरिया को हाथों के जरिये किताबों तक जाने से रोक रही थीं, क्योंकि किताबें कभी-कभी तकिए के पास या बिस्तर पर भी रखी जाती हैं। मेरे घर में न सिर्फ खाने का कोई सामान छूने से पहले हाथ धोना जरूरी था, बल्कि किचन के अंदर जाने से पहले पैर और हाथ धोने का भी नियम था, यहां तक कि मेरे पिता के लिए भी। वे भी इन नियमों का पूरी तत्परता से पालन करते थे।फंडा ये है कि बिजनेस की ग्रोथ के लिए ‘अनलाइकली हेंडशैक्स’ करने होंगे, जबकि खुद की देखभाल के लिए इनसे बचना होगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 'Unlicensed handshakes' for business, not for life Full Article
& ‘गुड न्यूज’ और ‘परवरिश’ का लिंक By Published On :: Mon, 02 Mar 2020 21:33:00 GMT कुछ महीने पूर्व प्रदर्शित फिल्म ‘गुड न्यूज’ में स्पर्म प्रयोगशाला में समान सरनेम होने के कारण स्पर्म की अदला-बदली हो जाती है। यह फिल्म ‘विकी डोनर’ नामक फिल्म की एक शाखा मानी जा सकती है। मेडिकल विज्ञान की खोज से प्रेरित फिल्में बन रही हैं। ‘गुड न्यूज’ साहसी विषय है। चुस्त पटकथा एवं विटी संवाद के कारण दर्शक प्रसन्न बना रहता है। समान सरनेम होने से प्रेरित एक अन्य कथा में तलाक लिए हुए पति-पत्नी को रेल के एक कूपे में आरक्षण मिल जाता है। वे एक-दूसरे की यात्रा से अनजान थे। ज्ञातव्य है कि भारतीय रेलवे के प्रथम श्रेणी में कूपे का प्रावधान होता था, जिसमें दो-दो यात्री सफर करते हैं। कूपे के इस सफर के दौरान उन दोनों के बीच की गलतफहमी दूर हो जाती है और वे पुन: विवाह करके साथ रहने का निर्णय लेते हैं।किसी भी रिश्ते का आधार समान विचारधारा नहीं वरन् परस्पर आदर और प्रेम होता है। एक ही राजनीतिक विचारधारा को मानने वालों में भी मतभेद हो सकता है, परंतु पहले से तय किए समान एजेंडा के लिए वे साथ मिलकर काम कर सकते हैं। वैचारिक असमानता का निदान हिंसा में नहीं वरन् आपसी बातचीत द्वारा स्थापित करने में निहित है। आचार्य कृपलानी और उनकी पत्नी की राजनीतिक विचारधारा परस्पर विरोधी थी, परंतु इस कारण उनके विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। शौकत आज़मी सामंतवादी परिवार में जन्मी थीं, परंतु उनका प्रेम विवाह वामपंथी कैफी आज़मी से हुआ था।विगत सदी के छठे दशक में एक फिल्म ‘परवरिश’ में राज कपूर, महमूद और राधा कृष्ण ने मुख्य भूमिकाएं अभिनीत की थीं। कथासार यूं था कि एक अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में एक समय दो शिशुओं का जन्म होता है। एक शिशु की माता संभ्रांत परिवार की सदस्य थी तो दूसरी एक तवायफ थी। दोनों की पहचान गड़बड़ा जाती है और विवाद का यह हल निकाला जाता है कि दोनों शिशुओं का लालन-पालन सुविधा संपन्न परिवार में होगा। वयस्क होने पर उनकी पहचान कर ली जाएगी। तवायफ का भाई कहता है कि वह अपने भांजे के हितों की रक्षा के लिए संपन्न परिवार में ही रहेगा। कथा में यह पेंच भी था कि वह तवायफ उसी साधन संपन्न व्यक्ति की रखैल थी। अतः पिता एक ही है, परंतु माताएं अलग-अलग हैं। ज्ञातव्य है कि परवरिश के पहले महमूद ने कुछ फिल्मों में एक या दो दृश्यों में दिखाई देने वाले पात्र अभिनीत किए थे। गुरु दत्त की एक फिल्म में उन्होंने मात्र दो दृश्य अभिनीत किए थे। अपने संघर्ष के दिनों में महमूद कुछ समय तक मीना कुमारी के ड्राइवर भी रहे।‘परवरिश’ में वयस्क होते ही राज कपूर अभिनीत पात्र समझ लेता है कि पहचान के निर्णय के बाद महमूद अभिनीत पात्र का जीवन अत्यंत संघर्षमय हो जाएगा। अत: वह पात्र शराबी, कबाबी और चरित्रहीन होने का स्वांग रचता है। ज्ञातव्य है कि इस फिल्म का संगीत शंकर-जयकिशन के सहायक दत्ता राम ने रचा था। इस फिल्म में हसरत जयपुरी का लिखा और मुकेश का गाया गीत-‘आंसू भरी हैं जीवन की राहें, उन्हें कोई कह दे कि हमें भूल जाएं’ अत्यंत लोकप्रिय हुआ था।रणधीर कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘धरम-करम’ में भी दो शिशुओं का जन्म एक ही समय में होता है। एक का पिता संगीतकार है तो दूसरे का पिता पेशेवर मुजरिम है। मुजरिम संगीतकार के शिशु को अपने बच्चे से बदलकर भाग जाता है। उसे विश्वास है कि संगीतकार के घर पाले जाने पर उसका पुत्र एक कलाकार बनेगा। वह अपने साथियों से कहता है कि संगीतकार के शिशु को बचपन से ही अपराध के रास्ते पर अग्रसर होने दो। प्रेमनाथ अभिनीत ये पात्र कहता है कि उसने शिशुओं की अदला-बदली करके ‘ऊपर वाले का डिजाइन बदल दिया है’। कालांतर में अपराध जगत के परिवेश में पला बालक संगीत विधा में चमकने लगता है और प्रेमनाथ का पुत्र संगीतकार के घर में पलने के बावजूद अपराध प्रवृत्ति की ओर आकर्षित हो जाता है।यह आश्चर्य की बात है कि राज कपूर ने प्रयाग राज की लिखी ‘धरम-करम’ का निर्माण किया था, जबकि कथा उनकी सर्वकालिक श्रेष्ठ रचना ‘आवारा’ की कथा के विपरीत धारणा अभिव्यक्त करती है। ख्वाजा अहमद अब्बास की लिखी ‘आवारा’ का आधार यह है कि परवरिश के हालात मनुष्य की विचारधारा को ढालते हैं। फिल्म में जज रघुनाथ का बेटा गंदी बस्ती में परवरिश पाकर आवारा बन जाता है। जज रघुनाथ ने एक फैसला दिया था जिसमें एक निरपराध व्यक्ति को वे केवल इसलिए सजा देते हैं कि उसका पिता जयराम पेशेवर अपराधी था। उन्हें गलत सिद्ध करने के लिए उनके अपने पुत्र का पालन पोषण अपराध की दुनिया में किया जाता है। दरअसल ख्वाजा अहमद अब्बास की प्रगतिवादी पटकथा ‘ब्लू ब्लड’ मान्यता की धज्जियां उड़ा देती है कि अच्छे व्यक्ति का पुत्र अच्छा और बुरे का पुत्र बुरा होता है। इस तरह ‘धरम-करम’ राज कपूर की श्रेष्ठ फिल्म ‘आवारा’ के ठीक विपरीत विचारधारा को अभिव्यक्त करती है।मनुष्य पर कई बातों के प्रभाव पड़ते हैं। जब हम प्याज की सारी परतें निकाल देते हैं तो प्याज ही नहीं बचता, परंतु हाथ में प्याज की सुगंध आ जाती है जो प्याज का सार है। मनुष्य व्यक्तित्व भी प्याज की तरह होता है और उसका सार भी प्याज की सुगंध की तरह ही होता है। व्यक्तिगत प्रतिभा अपनी परंपरा से प्रेरणा लेकर अपने निजी योगदान से उस परंपरा को ही मजबूत करती हुई चलती है। बहरहाल, गुड न्यूज यह है कि विज्ञान की नई खोज से प्रेरित फिल्में बन रही हैं और अवाम उन्हें पसंद भी कर रहा है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Link to 'Good News' and 'Upbringing' Full Article
& ‘मध्य प्रदेश वायरस’ महाराष्ट्र में भी पहुंचेगा क्या? By Published On :: Thu, 12 Mar 2020 18:58:00 GMT दुबई से प्रवास कर लौटी पुणेकर दंपति में कोरोना वायरस के लक्षण सामने आए हैं। उनके बाद उनकी बेटी, उन्होंने जिस कैब में सफर किया उसका चालक, विमान के सहयात्री में भी कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद पुणे सहित महाराष्ट्र दहल गया। सभी ओर यह चर्चा है, लेकिन राजकीय उठापटक की चर्चा का स्तर अलग ही है।कोरोना वायरस से भी ज्यादा ‘एमपी वायरस’ के बारे में महाराष्ट्र में ज्यादा बोला जा रहा है। विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद से महाराष्ट्र में दहशत का माहौल है। 21 अक्टूबर 2019 को वोटिंग हुई, 24 अक्टूबर 2019 को परिणाम आया। सरकार ने शपथ ली 28 नवंबर को। मंत्रिमंडल ने आकार लिया 30 दिसंबर को। यानी 21 सितंबर को आचार संहिता लागू हुई और 30 दिसंबर तक, यानी पूरे 100 दिन तक महाराष्ट्र में सरकारी कामकाज ठप ही रहा। इस अवधि में सरकार स्थापित हुई और इस दौरान एक सरकार अस्तित्व में आने के साढ़े तीन दिन में ही ढह गई।भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं। लेकिन, वह आज विरोधी पक्ष बना हुआ है। शिवसेना ने भाजपा के साथ चुनाव लड़ा, उसका अब मुख्यमंत्री है। मणिपुर, मेघालय, गोवा जैसे छोटे राज्यों में भाजपा ने सत्ता स्थापित करने के लिए पूरा जोर लगा दिया, ऐसे में महाराष्ट्र जैसा बड़ा राज्य कैसे छोड़ दिया, यह प्रश्न सबको परेशान कर रहा है। इस पर उत्तर यही है कि ऐसा प्रयत्न उन्होंने करके देखा है। लेकिन रात में बनी सरकार के गिरने से देवेंद्र फड़नवीस औंधे मुंह गिरे। तब भाजपा ने कोशिशें बंद कर दीं और इस सरकार में ‘ऑल इज वेल’ है, ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है।मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद राजस्थान, महाराष्ट्र में भी पुनरावृत्ति हो सकती है, ऐसी चर्चा शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में भाजपा ही ‘सिंगल लार्जेस्ट पार्टी’ है। इस वजह से यहां यह कोशिश तो होगी ही, ऐसा कइयों को लगता है। ऐसी चर्चा करने से पहले आंकड़ों को ध्यान में रखना होगा। मध्य प्रदेश में कुल 230 सीटें हैं। दो विधायकों के निधन की वजह से सदन की प्रभावी संख्या है 228 सीटों की। ऐसे में जादुई नंबर 115 हो जाता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायक हैं, जिससे प्रभावी संख्या रह गई- 206 सीटें। ऐसे में 104 जादुई अंक होगा और भाजपा के पास अपने 107 विधायक तो हैं ही।ऐसा प्रयोग महाराष्ट्र में करना आसान नहीं। भाजपा सिंगल लार्जेस्ट पार्टी है जरूर, लेकिन बहुमत से काफी दूर है। जादुई अंक है 145 सीटों का और भाजपा के पास 105 विधायक ही हैं। इस वजह से 40 विधायक जुटाना अथवा सदन की प्रभावी सदस्य संख्या को इस कदर घटाना संभव नहीं है। किसी भी पार्टी में तोड़फोड़ मचाने के लिए दो-तिहाई विधायक साथ लाना होंगे। पर्याय है तो विधायकों के इस्तीफे लेने का। इसके लिए विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या को 210 तक लाना होगा।इसके लिए 78 विधायकों से इस्तीफा लेना असंभव है। महाविकास आघाड़ी सरकार में नाराजगी भरपूर है। मंत्री पद न मिलने से कांग्रेस के विधायक संग्राम थोपटे ने बवाल मचाया था। शिवसेना में दिवाकर रावते नाराज हैं। राकांपा में अजित पवार, जयंत पाटिल जैसे दो गुट हैं। चुनावों में आयाराम-गयाराम का जो दौर चला और भाजपा में ‘इनकमिंग’ का दौर सभी ने देखा है। इस वजह से कोई धोखा नहीं देगा, यह सोचना भी संशय पैदा करता है। किसी पार्टी ने अधिकृत तौर पर भाजपा के साथ जाने का स्टैंड लिया तो ही महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार आ सकती है। फिर भी इसकी संभावना काफी कम है। लेकिन पिक्चर अभी बाकी है!’ Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रतीकात्मक फोटो। Full Article
& बस्ती की पहचान इतनी सख्त हो चली है कि गूगल पर ‘रविदास कैंप’ सर्च करो तो निर्भया के दोषियों के चेहरे दिखाई पड़ते हैं By Published On :: Fri, 20 Mar 2020 08:43:17 GMT दिल्ली के रविदास कैंप से. आरके पुरम इलाके में साफ-सुथरी और चौड़ी सड़कों से सटी एक छोटी-सी झुग्गी बस्ती है- रविदास कैंप। 90 के दशक की शुरुआत में बसी इस बस्ती की आज सबसे बड़ी पहचान एक ही है- निर्भया के 6 दोषियों में से 4 इसी बस्ती में रहते थे। बस्ती की यह पहचान इतनी सख्त हो चली है कि गूगल पर भी ‘रविदास कैंप’ सर्च करने पर निर्भया के दोषियों के चेहरेही दिखाई पड़ते हैं।आरके पुरम सेक्टर-2 स्थित यह बस्ती ‘बिजरी खान के मकबरे’ से बिलकुल सटी हुई है और इसमें करीब ढाई सौ परिवार रहतेहै। बेहद पतली-संकरी गलियों और खुली नालियों वाली इस बस्ती में रहने वाले अधिकतर लोग उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आए हुए हैं। बस्ती की शुरुआत में कुछ दुकानें और कुछ फास्ट-फूड के स्टॉल लगे हुए हैं। इनमें एक स्टॉल राजवीर यादव का भी है, जो इसी बस्ती के रहने वाले हैं। वे कहते हैं, ‘निर्भया मामले के बाद इस बस्ती की पहचान यही हो गई कि वो अपराधी यहां के रहने वाले थे। अब हम चाहें भी तो इस पहचान को मिटा नहीं सकते।’2012 में जब निर्भया के साथ बर्बरता हुई थी और पड़ताल में सामने आया था कि दोषी इस बस्ती के रहने वाले हैं तो लोगों का आक्रोश बस्ती के अन्य लोगों पर भी फूटने लगा था। यहां के निवासी विश्वकर्मा शर्मा बताते हैं, ‘उस घटना के कुछ ही दिनों बाद एक दिन एक आदमी यहां बम लेकर चला आया था। उसने आरोपी राम सिंह का पता पूछा और घर के पास पहुंचकर बम लगा दिया। लोगों को जब इसकी भनक लगी तो पुलिस बुलाई। फिर बम निरोधक दस्ते ने आकर हालात को काबू में लिया। उसके बाद काफी समय तक यहां पुलिस सुरक्षा रखी गई।’16 दिसंबर की उस कुख्यात घटना के बाद इस बस्ती की पहचान पूरी तरह से बदल गई। यहां के रहने वाले, जहां कहीं भी जाते। लोग उनसे निर्भया मामले पर ही तरह-तरह के सवाल पूछने लगते। विश्वकर्मा शर्मा कहते हैं, ‘उस वक्त तो कई बार ऐसा होता कि मैं किसी सरकारी दफ्तर जाता तो अधिकारी पहचान पत्र पर मेरा पता देखते ही मुझे अलग बुला लेते और पूछने लगते कि उस घटना के बारे में बताओ, दोषियों के बारे में बताओ, वो कैसे लड़के हैं आदि। लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा। अब इन दोषियों को फांसी हो रही है तो मीडिया का आना-जाना एक बार फिर बढ़ गया है।’गुरुवार की शाम, जब निर्भया के दोषियों को फांसी होने में 12 घंटे से भी कम समय रह गया था, बस्ती का माहौल आम दिनों जैसा ही बना हुआ था। हालांकि, पुलिस की आवाजाही यहां बीते कुछ दिनों से कुछ बढ़ ज़रूर गई थी। पुलिस कई बार बस्ती में आकर दोषियों के परिजनों को तिहाड़ जेल लेकर जाती रही ताकि वे आखिरी समय में उनसे मिल सकें।पतली-संकरी गलियों और खुली नालियों वाली इस बस्ती में रहने वाले अधिकतर लोग उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आए हुए हैं।निर्भया के दोषियों को फांसी होने के बारे में बस्ती के लोग मिली-जुली राय रखते हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि दोषियों को फांसी होना सही है तो वहीं कई लोग यह कहते भी मिलते हैं कि इन दोषियों को फांसी सिर्फ इस वजह से हो रही है क्योंकि ये सभी बेहद गरीब परिवारों से आते हैं। इन लोगों का मानना है कि अगर ये दोषी अमीर होते तो बलात्कार और हत्या के तमाम अन्य अपराधियों की तरह इन्हें भी ज्यादा से ज्यादा उम्र कैद की सजा हो सकती थी, लेकिन फांसी नहीं।बस्ती के अधिकतर लोग मीडिया से बात करने से कतराते हुए भी नजर आते हैं। बस्ती के शुरुआती घरों में ही बिहारी लाल का घर है जो यहां के प्रधान भी हैं। घर का दरवाजा खटखटाने पर उनकी बेटी बाहर आती हैं और बताती है कि उनके पिता घर पर नहीं है। वो कब तक लौटेंगे, यह सवाल करने पर वो कहती हैं कि उनके लौटने का कोई निश्चित समय नहीं। बिहारी लाल का फोन नम्बर मांगने पर उनकी बेटी कहती हैं, ‘पापा ने कल ही नया नंबर लिया है, जो मेरे पास भी नहीं है। उनका पुराना नंबर अब काम नहीं कर रहा।’बिहारी लाल के घर के बाहर उनके नाम के साथ ही एक फोन नंबर दर्ज है। इस पर फोन करने से मालूम होता है कि वे घर से बमुश्किल सौ मीटर दूर ही फास्ट-फूड का ठेला लगाते हैं और इस वक्त भी वहीं मौजूद हैं। न तो उनका पुराना फोन बदला है और न ही वो काम के लिए घर से कहीं ज्यादा दूर जाते हैं। बिहारी लाल की बेटी जब देखती हैं कि उनका झूठ पकड़ा गया है तो वे बिना कुछ कहे बस घर के अंदर चली जाती हैं।बस्ती से लगी हुई मेन रोड के पास ही बिहारी लाल स्टॉल लगाए खड़े हैं। उनके साथ उनका बेटा भी है जो ऑटो भी चलाता है और फास्ट फूड बनाने में अपने पिता की मदद भी करता है। मीडिया वालों को देखते ही बिहारी लाल का बेटा कहता है, ‘अब आप क्या लिखने आए हैं। अब तो सब खत्म हो रहा है। उन्हें फांसी हो रही है। जिनके जवान बेटे मरने वाले हैं, उनका दर्द आप नहीं समझ सकते। विनय तो मेरा बचपन का दोस्त था। हम साथ में…’ अपने बेटे को बीच में रोकते हुए और लगभग डपटते हुए बिहारी लाल कहते हैं, ‘कोई दोस्त नहीं था वो तुम्हारा। जो जैसा काम करेगा, वैसा भरेगा।’ बिहारी लाल के इतना कहने और गुस्सा करने पर उनके बेटे उठकर वहां से चल देते हैं।बस्ती में रहने वाले अधिकतर लोग छोटी-मोटी दुकान चलाते हैं या ऑटो ड्राइवर हैं।बिहारी लाल बताते हैं, ‘इन लड़कों ने जो किया, उसकी सजा इनको मिल गई। अब इस बस्ती वालों का या इन लड़कों के परिवार का तो इसमें कोई दोष नहीं है। हम बस यही चाहते हैं कि लड़के के परिवार को इसकी सजा न मिले। उन्हें अब बार-बार इसके लिए परेशान न किया जाए।’ बिहारी लाल के स्टॉल पर ही मौजूद एक अन्य व्यक्ति फांसी के इस फैसले और मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘आप लोग जैसे लगातार निर्भया के दोषियों को फांसी देने का सवाल उठाते रहे ऐसे ही आप बाकी मामलों को क्यों नहीं उठाते? आप आसाराम को फांसी देने की मांग क्यों नहीं करते? उसने भी बलात्कार किया है, बल्कि एक से ज्यादा किए हैं। उसके आश्रम में छोटे-छोटे बच्चों की लाश निकली हैं। उसके कई गवाहों की तो हत्याएं भी कर दी गईं। इस सब के बाद भी आपने कभी उसे फांसी देने की मांग की है? संसद में बलात्कार के कितने आरोपी बैठे हैं? क्या आपने कभी उन्हें फांसी देने की मांग उठाई? ये लड़के अगर गरीब नहीं होते तो न तो इन्हें फांसी होती और न आप लोग भी ऐसी कोई माँग उठा रहे होते। हम ये नहीं कह रहे कि इन्होंने अपराध नहीं किया। लेकिन अगर कानून सबके लिए एक है तो फांसी सिर्फ इन्हें ही क्यों? सारे बलात्कारियों या हत्यारों को क्यों नहीं?’रविदास बस्ती के अधिकतर लोग इन दोषियों के परिजनों से सहानुभूति भी जताते हैं। दोषी पवन के घर के ठीक सामने रहने वाली महिला कहती हैं, ‘जिनके जवान बच्चे फांसी पर लटकाए जा रहे हैं, उनका दर्द हम कैसे नहीं समझेंगे। उस मां का तो कोई दोष नहीं। और बच्चा चाहे जितना भी नालायक हो मां कभी उसका बुरा नहीं सोच सकती।’ ये महिला आगे कहती हैं, ‘पवन और विनय तो बहुत छोटे बच्चे हैं। घटना के समय ये दोनों 20 साल के भी पूरे नहीं थे। ये बाकियों के चक्कर में फंस गए।’पवन और विनय से विशेष सहानुभूति इस बस्ती के अधिकतर लोगों में दिखती है। बस्ती के लोग साफ कारण नहीं बताते लेकिन इतना जरूर कहते हैं कि पवन और विनय का मुख्य दोष ये था कि वो गलत समय, गलत संगत में थे। 16 दिसंबर की घटना के लिए बस्ती के अधिकतर लोग पवन और विनय को कम जबकि मोहल्ले के बाकी दो लड़कों को ज़्यादा दोषी मानते हैं।निर्भया मामले के चलते सुर्खियों में आई इस बस्ती में रहने वाले अधिकतर लोग छोटी-मोटी दुकान चलाते हैं या ऑटो ड्राइवर हैं। करीब 900 वोटरों वाली इस बस्ती में शायद ही कोई सरकारी नौकरी वाला है। बस्ती के लोग बताते हैं कि यहां के जिन लोगों की सरकारी नौकरी लगी, वो फिर बस्ती छोड़कर कहीं बेहतर जगह चले गए। बस्ती में कुछ ऐसे भी उदाहरण हैं, जिन्होंने यहीं रहकर बेहद गरीबी में पढ़ाई की और फिर अपनी अलग पहचान बनाई। ऐसा ही नाम अंकित का भी सुनने को मिलता है, जिनका बचपन इसी बस्ती की गरीबी में बीता लेकिन वो आज क्राइम ब्रांच में अधिकारी हैं। बस्ती के लोग अब यही चाहते हैं कि उनकी पहचान अंकित जैसे उदाहरणों के साथ जोड़ी जाए और निर्भया के दोषियों से उनकी पहचान जोड़ने का सिलसिला खत्म हो। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today रविदास कैंप: दक्षिणी दिल्ली का स्लम एरिया। यहीं विनय, पवन, मुकेश और रामसिंह रहते थे। Full Article
& ‘जनता कर्फ्यू’ के दौरान अपने जीवन में मूल्य जोड़ें By Published On :: Fri, 20 Mar 2020 20:01:00 GMT कोई भी शिक्षक अपने बेटे या बेटी को शिक्षा दिलाए तो इसमें कोई नई बात नहीं है। लेकिन शिक्षा पूरी करने के दौरान ही शिक्षक की मृत्यु हो जाए तो क्या होगा? आरजे लिनज़ा के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ, जब वह 2001 में बैचलर डिग्री की पढ़ाई कर रही थी। उसके पिता, संस्कृत के शिक्षक राजन केके का निधन हो गया। किसी भी दौर में संस्कृत शिक्षक की तनख्वाह कितनी होगी, इसका अंदाजा कोई भी लगा सकता है। स्कूल ने उसे केरल के कासरगोड जिले में स्थित उसी स्कूल में अनुकंपा के आधार पर सफाईकर्मी की नौकरी का प्रस्ताव दिया। यह ‘लीव वैकेंसी’ का प्रस्ताव था, यानी उसे सिर्फ तभी काम पर बुलाया जाता, जब कोई कर्मचारी छुट्टी पर जाता। उसने इस प्रस्ताव को इसलिए मान लिया क्योंकि उसपर परिवार की और खासतौर पर भाई की जिम्मेदारी थी, जो तब 11वीं कक्षा में था। स्कूल में काम करने के दौरान बचे हुए समय में वह पढ़ाई करती, ताकि वह बीए और फिर एमए कर सके। चूंकि समय गुजरता जाता है और उम्र के साथ शादी भी जरूरी होती है। लिहाजा, लिनज़ा ने 2004 में सुधीरन सीवी से शादी कर ली, जो एक कॉलेज में क्लर्क था। लिनज़ा का पद और उसकी आय, जो वह पीहर में साझा करती थी, कभी भी उसके वैवाहिक जीवन में आड़े नहीं आई। कुछ सालों में वह दो बच्चों की मां बन गई।लेकिन लिनज़ा ने 12 साल तक स्कूल में सफाईकर्मी का काम करते हुए भी व्यवस्थित ढंग से अपनी पढ़ाई की योजना बनाई और केरल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट और स्टेट एलिजिबिलटी टेस्ट पास किए, जो कि शिक्षक बनने के लिए जरूरी होते हैं। फिर 2018 में जब एक शिक्षक की जगह खाली हुई तो उसने आवेदन दिया और उसे नौकरी मिल गई। आज इस अंग्रेजी की शिक्षिका को अपने जीवन में मूल्य जोड़ने की इच्छा शक्ति के लिए सलाम किया जाता है। अब उसे पदोन्नति का भी इंतजार है।एक और शख्सियत है, जो कॅरिअर के शिखर पर पहुंचने के बाद भी अपनी शिक्षा में मूल्य जोड़ना नहीं भूली। ये हैं सेबर इंडिया, हैदराबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की निदेशक प्रिया ढंडपानी। आज वह 93 प्रोफेशनल्स की एक वैश्विक टीम को लीड कर रही हैं, जिसमें टेक्निकल आर्किटेक्ट, डेवलपमेंट मैनेजर, क्वालिटी एनालिस्ट, प्रोडक्ट ओनर्स और डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर शामिल हैं।सेबर में 40 वर्षीय प्रिया पर नौ उत्पादों के पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी है, जिनमें से अधिकांश उत्पाद ‘मिशन-क्रिटिकल’ हैं। प्रिया हिस्सेदारों और ग्राहक प्रतिनिधियों के साथ काम करती हैं। वह सॉफ्टवेयर विकास को तकनीकी दिशा देती हैं, उत्पादों से जुड़ी योजनाएं बनाती हैं, निष्पादन और क्लाउड पर माइग्रेशन को पूरा करती हैं। इस टेक्नो-फंक्शनल भूमिका को आमतौर पर पुरुषों का कार्यक्षेत्र माना जाता है, लेकिन प्रिया को यह काम पसंद है। दो बच्चों की इस मां ने चार संस्थानों के साथ काम किया है। सेबर के साथ उनका यह दूसरा कार्यकाल है, जो चार अरब अमेरिकी डॉलर की ट्रैवल टेक्नोलॉजी कंपनी है। उन्होंने बैचलर ऑफ साइंस (एप्लाइड साइंस एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी) के बाद एमसीए किया। इसके बावजूद उन्होंने खुद को और सीखने से रोका नहीं। प्रिया ने हाल ही में एमआईटी स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिजनेस स्ट्रैटजी में इसके इंप्लीकेशंस पर एक ऑनलाइन कोर्स किया है। उनका मानना है कि हर चीज में सुधार की गुंजाइश होती है।अपने आप को अधिक मूल्यवान बनाना पूरी तरह स्वार्थ नहीं है। जब आप ज्ञान प्राप्त करते हैं, एक नया कौशल सीखते हैं या नया अनुभव प्राप्त करते हैं, तो आप न केवल खुद को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दूसरों की मदद करने की आपकी क्षमता भी बढ़ती है। जब तक आप खुद को और अधिक मूल्यवान नहीं बनाते, आप दूसरों के जीवन में मूल्य नहीं जोड़ सकते। दूसरों को आगे बढ़ाने की क्षमता पाने के लिए, पहले खुद आगे बढ़ना होगा।इन दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने सभी को जितना ज्यादा हो सके, घर पर रहने के लिए कहा है, जिसे ‘जनता कर्फ्यू’ कहा गया है (जो कि वर्तमान में कोरोनावायरस के हमले से लड़ने के लिए आवश्यक है)। हमें इसे खुद में मूल्य जोड़ने के तरीके खोजने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। इस समय का उपयोग नया कौशल सीखने, अच्छी पुस्तकें पढ़ने या ऐसी तकनीक सीखने में कर सकते हैं, जो आपको दुनिया से अलग तरीके से जोड़ता है। मर्जी आपकी है।फंडा यह है कि ‘जनता कर्फ्यू’ जैसी स्थिति का लाभ उठाएं और योजना बनाएं कि आप जीवन में मूल्य कैसे जोड़ सकते हैं क्योंकि आवश्यक कौशल नहीं होने पर आप दूसरों को कुछ नया नहीं दे सकते। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Add value to your life during 'Janata Curfew' Full Article
& ‘कहां-कहां से गुजर गया मैं’ By Published On :: Fri, 20 Mar 2020 20:06:00 GMT अनिल कपूर अभिनीत पहली फिल्म एम.एस. सथ्यु की थी जिसका टाइटल था ‘कहां-कहां से गुजर गया मैं’। अपनी पहली फिल्म के नाम के अनुरूप ही अनिल कपूर आंकी-बांकी गलियों से गुजरे हैं। सफर में बहुत पापड़ बेले हैं। जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही अनिल कपूर को सुनीता से प्रेम हो गया। सुनीता योग करती हैं और सेहत के लिए क्या, कब, कितनी मात्रा में लेना है, इस क्षेत्र की वह विशेषज्ञ हैं।उन्होंने लंबे समय तक व्यावसायिक रूप से इस जीवन शैली का प्रशिक्षण भी दिया है। उनके जुहू स्थित बंगले की तल मंजिल पर सुनीता की कार्यशाला है।सुरेंद्र कपूर ‘मुगल-ए- आजम’ में सहायक निदेशक नियुक्त हुए थे। उन्होंने 1963 से ही फिल्म निर्माण प्रारंभ किया। दारा सिंह अभिनीत ‘टार्जन कम्स टू देहली’ में उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हुआ। दोनों कपूर परिवार चेंबूर मुंबई में पड़ोसी रहे हैं। सुरेंद्र कपूर के जेष्ठ पुत्र अचल उर्फ बोनी कपूर ने युवा आयु में ही पिता की निर्माण संस्था में काम करना शुरू कर दिया था। सुरेंद्र कपूर की ‘फूल खिले हैं गुलशन गुलशन’ के निर्देशक सुरेंद्र खन्ना की अकस्मात मृत्यु से फिल्म काफी समय तक अधूरी पड़ी रही। बाद में इस फिल्म को येन केन प्रकारेण पूरा किया गया। बोनी कपूर ने दक्षिण भारत के फिल्मकार के. बापू से उनकी अपनी फिल्म का हिंदी संस्करण बनाने का आग्रह किया। अनिल कपूर, पद्मिनी कोल्हापुरे और नसीरुद्दीन शाह के साथ ‘वो सात दिन’ फिल्म बनाई गई। पद्मिनी कोल्हापुरे को राज कपूर की ‘प्रेम रोग’ में बहुत सराहा गया था। इस सार्थक फिल्म ने खूब धन कमाया। अनिल कपूर के अभिनय को सराहा गया, परंतु वे भीड़ में उन्माद जगाने वाला सितारा नहीं बन पाए।गौरतलब है कि ‘वो सात दिन’ तथा संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में बहुत साम्य है। दोनों में पति अपनी पत्नियों को उनके भूतपूर्व प्रेमी से मिलाने का प्रयास करते हुए एक-दूसरे से प्रेम करने लगते हैं। बोनी कपूर ने महसूस किया कि अनिल को सितारा बनाने के लिए भव्य बजट की फिल्म बनाई जाए। उन्होंने शेखर कपूर को अनुबंधित किया ‘मिस्टर इंडिया’ बनाने के लिए। फिल्म के आय-व्यय का समीकरण ठीक करने के लिए उन्होंने बड़े प्रयास करके शिखर सितारा श्रीदेवी को फिल्म में शामिल किया। यह भी गौरतलब है कि फिल्म में कभी-कभी दिखाई न दिए जाने वाले पात्र को अभिनीत करके अनिल कपूर ने सितारा हैसियत प्राप्त की।जब अनिल को ज्ञात हुआ कि राज कपूर तीन नायकों वाली ‘परमवीर चक्र’ बनाने का विचार कर रहे हैं और अनिल को एक भूमिका मिल सकती है तब उसने खड़कवासला जाकर फौजी कैडेट का प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह बात अलग है कि राज कपूर ने ‘परमवीर चक्र’ नहीं बनाई, परंतु इस प्रकरण से हमें अनिल की महत्वाकांक्षा और जुझारू प्रवृत्ति का आभास होता है।अनिल कपूर की घुमावदार कॅरिअर यात्रा में विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ एक यादगार फिल्म साबित हुई। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने कोई चमत्कार नहीं किया, परंतु आर.डी.बर्मन के मधुरतम संगीत के कारण यह फिल्म यादगार बन गई। यश चोपड़ा की फिल्म ‘लम्हे’ में भी अनिल कपूर को बहुत सराहा गया, परंतु इसे भी बड़ी सफलता नहीं मिली। नायक-भूमिकाओं की पारी के बाद अनिल कपूर ने चरित्र भूमिकाओं में भी प्रभावोत्पादक अभिनय किया। अनिल कपूर को डैनी बॉयल की अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ में महत्वपूर्ण भूमिका मिली। उनकी भूमिका कौन बनेगा करोड़पतिनुमा कार्यक्रम में एंकर की है। इस फिल्म में एंकर जान-बूझकर गरीब प्रतियोगी को एक प्रश्न का उत्तर देने में गुमराह करता है।साधन संपन्न व्यक्ति साधनहीन व्यक्ति को सफल होने का अवसर ही नहीं देना चाहते। इस दृश्य के द्वारा फिल्मकार बड़े लोगों के ओछेपन को उजागर करता है। एंकर की कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और न ही इसमें उसका अपना कोई आर्थिक जोखिम भी नहीं था, परंतु समाज में आर्थिक वर्गभेद हमेशा कायम रहे। इसके लाख जतन किए जाते हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today अभिनेता अनिल कपूर- फाइल । Full Article
& दूरदर्शन पर "बुनियाद' By Published On :: Tue, 07 Apr 2020 21:20:00 GMT आजकल दूरदर्शन अपने पुराने कार्यक्रमों का पुन: प्रसारण कर रहा है। मनोहर श्याम जोशी की लिखी और रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित ‘बुनियाद’ देश के विभाजन के समय एक परिवार की कथा प्रस्तुत करता है। आलोकनाथ एवं अनिता कंवर ने केंद्रीय भूमिकाएं अभिनीत की हैं। कार्यक्रम में प्रस्तुत कालखंड विभाजन पूर्व से प्रारंभ होकर स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद के पहले दशक तक जाता है। रमेश सिप्पी ने इसके 40 एपिसोड निर्देशित किए थे। उनके सहायकों ने शेष एपिसोड्स निर्देशित किए थे। व्यापारी परिवार के मुखिया हवेलीराम हैं। उनकी संपत्ति में निरंतर इजाफा हो रहा है। मुखिया के दो पुत्र और एक पुत्री है। पुत्री का नाम वीरांवाली है और पुत्र हवेलीराम, रलिया राम हैं। भाई आत्मानंद स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लेता है। उसकी भांजी लाजवंती का विवाह उसके लालची चाचा उम्रदराज व्यक्ति से करा देते हैं। दूल्हा इतनी बड़ी उम्र का है कि विवाह की रात ही लाजवंती विधवा हो जाती है।विधवाओं के साथ हमारा व्यवहार कभी अच्छा नहीं रहा। दीपा मेहता की फिल्म ‘वॉटर’ में इसका मार्मिक चित्रण है। वीरांवाली लाजवंती की सहेली है, आत्मानंद के अनुयायी हवेलीराम लाजवंती को पढ़ाने जाते हैं। हवेलीराम के परिवार को इस पर सख्त ऐतराज है। उसकी मां उसे समझाती है कि लाजवंती के सम्मान के लिए उसे उससे दूर रहना चाहिए, अन्यथा अफवाहें फैलेंगी। ज्ञातव्य है कि दूरदर्शन पर मनोहर श्याम जोशी का लिखा ‘हमलोग’ दिखाया गया था। इस सीरियल में निम्न, मध्यम वर्ग के पात्रों की कठिनाइयों को प्रस्तुत किया गया था। बड़ी पुत्री को बड़की कहा जाता है और उसके विवाह के प्रसंग को प्रसारित किए जाने वाले दिन अवाम अपनी दुकानें बंद करके घर लौट आए थे। दूरदर्शन ने मनोहर श्याम जोशी को ‘सोप ओपेरा’ विधा के अध्ययन के लिए ब्राजील भेजा। घर की कामकाजी स्त्रियों के मनोरंजन के लिए यह दोपहर में प्रसारित किया जाता था। संभवत: साबुन बनाने वाली कंपनी प्रायोजक थी। सोप ओपेरा रेडियो पर प्रसारित किए जाते थे। ब्राजील में इसे ‘टेलीनावेला’ कहा गया। इस विधा का प्रारंभ 1931 में हुआ था।मनोहर श्याम जोशी ने अपनी विदेश यात्रा में इस विधा का अध्ययन किया। उन्हें यह लगा कि विधा मुर्गी के दड़बे की तरह है और पात्र चूजों की तरह बाहर आते हैं। मुर्गी को आसानी से पकड़ा जा सकता है। ज्ञातव्य है कि किशोर कुमार की फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ के एक दृश्य में नायिका मधुबाला किशोर कुमार को मुर्गी पकड़ने के लिए कहती है। यह अत्यंत मनोरंजक दृश्य रहा। रलिया राम और हवेलीराम के पिता का नाम लाहौरी राम है। सुधीर पांडे ने इस पात्र को अभिनीत किया था।उन्होंने ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ में परंपरावादी और जिद्दी ब्राह्मण की भूमिका अभिनीत की थी। मनोहर श्याम जोशी का उपन्यास ‘कसप’ अत्यंत लोकप्रिय हुआ। उनके आत्म कथात्मक उपन्यास ‘कुरु कुरु स्वाहा’ में उन्होंने अपने तीन स्वरूप प्रस्तुत किए। मनोहर चंचल है, जोशीजी संस्कृत के विद्वान हैं और श्याम प्रेमालू व्यक्ति है। उपन्यास विधा में यह अभिनव प्रयास माना गया। दरअसल हर आदमी में दस आदमी मौजूद रहते हैं। इस उपन्यास की नायिका को ‘पहुंचेली’ कहकर संबोधित किया गया है। मनोहर श्याम जोशी को शास्त्रीय संगीत का ज्ञान था। खाकसार का उनके साथ परिचय था। ‘बुनियाद’ बनते समय उन्होंने रमेश सिप्पी से आग्रह किया कि खाकसार से संपर्क करा दें। रमेश सिप्पी ने रणधीर कपूर के माध्यम से मुझसे संपर्क किया। खाकसार मनोहर श्याम जोशी को राज कपूर के घर ले गया। मनोहर श्याम जोशी के संगीत ज्ञान से राज कपूर प्रभावित हुए और उनसे पटकथा लिखने का अनुरोध भी किया। ‘मैं कौन हूं’ नामक इस प्रस्तावित फिल्म का कथासार यह था कि मुंबई के ठाणे स्थित पागलखाने में एक महिला हमेशा यही बात कहती है कि ‘कत्ल उसने नहीं किया’।मनोहर श्याम जोशी को बंगाल के बाउल गीतों की जानकारी थी। कुछ कारणों से पटकथा नहीं लिखी गई। ‘बुनियाद’ में सोनी राजदान ने अभिनय किया था। महेश भट्ट और सोनी की पुत्री आलिया आज लोकप्रिय सितारा है और रणबीर कपूर से उसका विवाह हो सकता है। व्यापारी लाहौरी राम की हवेली ‘कूचा ए राधाकिशन’ में स्थित है और आत्मानंद का घर ‘बिछौलीवाली गली’ में है। इस घर में एक तहखाना है। देश के विभाजन के समय हवेलीराम तलघर में छिप गए थे। दंगे-फसाद के समय घर में उनकी घड़ी और चश्मा मिलता है। उन्हें मृत मान लिया जाता है, परंतु कथा के अंत समय वे दिल्ली के शरणार्थी कैंप में मिलते हैं।बहरहाल, पुन: प्रसारण के दौर में कुंदन शाह और अजीज मिर्जा का ‘नुक्कड़’, सतीश शाह एवं रत्ना पाठक अभिनीत ‘सारभाई वर्सेस साराभाई’ और शरद जोशी का लिखा ‘यह जो है जिंदगी’ भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today ‘बुनियाद’ में अनिता कंवर और आलोकनाथ Full Article
& कोरोना के सबसे ज्यादा असर वाले 20 देशों में से भारत ने सबसे कम मामले रहते हुए लॉकडाउन लगाया, 6 देशों में अब तक टोटल लॉकडाउन नहीं By Published On :: Sat, 18 Apr 2020 12:31:26 GMT भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को आया था। 4 मार्च को इसके मरीजों की संख्या 7 से बढ़कर 29 हो गई थी। इसी दिन के बाद से केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने एहतियात के तौर पर कदम उठाने शुरू कर दिए। दिल्ली ने सबसे पहले स्कूल कॉलेज बंद किए। 10 मार्च को जब मामले दोगुने (60) हुए तो अलग-अलग राज्य सरकारों ने भी स्कूल-कॉलेजों बंद करने के आदेश जारी करदिए।15 मार्च आते-आते मरीजों की संख्या 100 पार हुई तो देश के धार्मिक स्थलों पर तालाबंदी होने लगी। 22 मार्च को पूरे देश में जनता कर्फ्यू लगाया गया और इसी दिन से देशभर के अलग-अलग शहरों में लॉकडाउन का ऐलान होने लगा। इसके बाद 25 मार्च से पूरे देश में ही लॉकडाउन कर दिया गया।कोरोना के सबसे ज्यादा असर वाले 20 देशों में से भारत ही ऐसा देश है, जिसने महज 500 मामले सामने आने के बाद ही टोटल लॉकडाउन कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी का यह फैसला चौंकाने वाला था। न ही देश में और न ही बाहर किसी को उम्मीद थी कि 135 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश में महज 536 मामले आने के बाद ही पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया जाएगा।भारत के अलावा ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड और पुर्तगाल में भी 1000 मामले होते ही फौरन टोटल लॉकडाउन लगा दिया गया था। हालांकि इन देशों की जनसंख्या भारत की10% भी नहीं थी। समय रहते लॉकडाउन के बाद इन चारों देशों में हालात ठीक हैं, जबकि जिन देशों में लॉकडाउन लगाने में देरी हुई या जिनमें अब तक लॉकडाउन नहीं लगाया गया, वहां हालात काबू से बाहर है।20 सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से अमेरिका समेत 6 देशों में अब तक नेशनल लेवल का लॉकडाउन नहीं है। अमेरिका में कुल संक्रमितों की संख्या 7 लाख के करीब पहुंच गई है, मौतों का आंकड़ा भी यहां 35 हजार हो गया है। उधर, यूरोप के सबसे ज्यादा प्रभावित 5 देशों में 5-5 हजार मामले सामने आने के बाद लॉकडाउन लगाया गया था, वहां अब संक्रमण के लाखों मामले हैं। इन 5 देशों में मौतों का आंकड़ा 10-10 हजार से ज्यादा है।10 सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से 3 में अब तक टोटल लॉकडाउन नहीं1. अमेरिकास्टेटस: टोटल लॉकडाउन नहींपहला केस: 23 जनवरीकुल कोरोना संक्रमित : 6.8 लाख+, कोरोना से कुल मौतें: 33 हजार+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 29 फरवरी को वॉशिंगटन के 2 स्कूलों को बंद किया गया। इसके बाद 5 मार्च को वॉशिंगटन के सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया। 12 मार्च को ओरिगन राज्य में 250 से ज्यादा लोगों की भीड़ पर प्रतिबंध लगा। 13 मार्च को न्यूयॉर्क में 500 से ज्यादा लोगों की भीड़ पर पाबंदी लगी। इसके बाद 19 मार्च से लेकर 3 अप्रैल तक 17 राज्यों ने स्टे एट होम पॉलिसी लागू की। यहां लॉकडाउन का फैसला राज्यों पर छोड़ा गया है। नेशनल लेवल पर अब तक लॉकडाउन की घोषणा नहीं हुई है।अमेरिका में नेशनल लेवल पर लॉकडाउन नहीं है। अलग-अलग राज्यों और शहरों के एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी जरूरत के हिसाब से लॉकडाउन कर रखा है। तस्वीर अमेरिका के सिएटल शहर की है। यहां सड़कें इन दिनों खामोश हैं।2. स्पेनस्टेटस: टोटल लॉकडाउनपहला केस: 1 फरवरीकुल कोरोना संक्रमित: 1.8 लाख+ , कोरोना से कुल मौतें: 19 हजार+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 14 मार्च से टार्गेटेड लॉकडाउन शुरू हुआ। 16 मार्च से सभी स्कूल, कॉलेज और एजुकेशन सेंटरों को बंद करने का आदेश दिया गया। 31 मार्च तक सभी गैरजरूरी सेवाओं और दुकानों को बंद कर दिया गया।तस्वीर स्पेन के मैड्रिड शहर की है। यहां लॉकडाउन के बीच रोजाना काम पर जाने वालों के लिए मेट्रो सर्विस चालू है।3. इटलीस्टेटस: टोटल लॉकडाउनपहला केस: 31 जनवरीकुल कोरोना संक्रमित: 1.7 लाख+, कोरोना से कुल मौतें: 22 हजार+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 22 फरवरी को इटली के वेनेटो और लोम्बॉर्डी में कुछ शहरों को लॉकडाउन किया गया। इनके बाद उत्तरी हिस्से के कई शहरों में लॉकडाउन लगाया जाने लगा। 4 मार्च को सभी स्कूल और कॉलेज को बंद किया गया। इटैलियन फुटबॉल लीग सीरी-ए समेत सभी स्पोर्ट्स एक्टिविटी भी बंद कर दी गईं। 10 मार्च से टोटल लॉकडाउन लागू किया गया। फिलहाल यहां, 14 अप्रैल से स्टेशनरी और बुक स्टोर को खोला जाने लगा है।लॉकडाउन के बीच इटली के ज्यादातर शहरों में वॉलेंटियर्स ही लोगों के घरों तक खाना पहुंचा रहे हैं।4. फ्रांसस्टेटस: टोटल लॉकडाउनपहला केस: 24 जनवरीकुल कोरोना संक्रमित: 1.5 लाख+, कोरोना से कुल मौतें: 18 हजार+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 29 फरवरी को 5 हजार से ज्यादा की भीड़ पर बैन लगाया। 16 मार्च से फ्रांस के सभी स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए गए। इसके 2 दिन पहले ही बार, रेस्टोरेंट और सभी गैरजरूरी दुकानों और सेवाओं को बंद करने के आदेश आ चुके थे। 17 मार्च को फ्रांस ने अपनी सीमाएं भी सील कर लीं।फ्रांस में हर दिन कैबिनेट मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है। यहां 11 मई तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है।5. जर्मनीस्टेटस: टोटल लॉकडाउनपहला केस: 27 जनवरीकुल कोरोना संक्रमित: 1.4 लाख+ , कोरोना से कुल मौतें: 4 हजार+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 10 मार्च को जर्मनी के कई राज्यों ने 1000 से ज्यादा की भीड़ को बैन किया। 16 मार्च से स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए गए। 20 मार्च को जर्मनी के सभी राज्यों ने सोशल इवेंट और हर छोटी-बड़ी भीड़ पर पाबंदी लगाई। 22 मार्च से देश में टोटल लॉकडाउन लागू हुआ।म्यूनिख के बीयर गार्डन में इन दिनों टेबलें खाली हैं।6. यूकेस्टेटस: टोटल लॉकडाउनपहला केस: 31 जनवरीकुल कोरोना संक्रमित: 1 लाख+ , कोरोना से कुल मौतें: 13 हजार+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 21 मार्च को कुछ वेन्यू और बिजनेस को बंद करने को कहा गया। 23 मार्च से सभी स्कूल, कॉलेज बंद करने का ऐलान हुआ। 24 मार्च से टोटल लॉकडाउन लागू हुआ।मैनचेस्टर का एम-60 मोटरवे पर इन दिनों इक्का-दुक्का गाड़ियां नजर आती हैं।7. चीनस्टेटस: टोटल लॉकडाउन नहींपहला केस: 31 दिसंबर 2019कुल कोरोना संक्रमित: 83 हजार+, कोरोना से कुल मौतें: 4,500+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 23 जनवरी को वुहान लॉकडाउन किया गया, इसके बाद हुबेई राज्य और फिर कई अन्य शहरों को भी लॉकडाउन किया गया। 9 फरवरी से कुछ और राज्यों में लॉकडाउन लागू किया गया। फिलहाल, 16 मार्च से यहां स्कूल खुलने लगे। हुबेई प्रांत को छोड़कर 90% लोग काम पर लौटे। 26 मार्च से वुहान शहर में भी कमर्शियल आउटलेट खुल रहे हैं।चीन का वुहान शहर 76 दिन तक लॉकडाउन रहा। 8 अप्रैल को यहां से लॉकडाउन हटा लिया गया।8. ईरानस्टेटस: टोटल लॉकडाउनपहला केस: 19 फरवरीकुल कोरोना संक्रमित: 78 हजार+ , कोरोना से कुल मौतें: 4,800+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 22 फरवरी को किसी भी तरह के आर्ट और फिल्म से जुडे़ इवेंट कैंसिल किए गए। 24 फरवरी से स्पोर्टिंग इवेंट कैंसिल हुए और 1 मार्च से जुमे की नमाज बैन कर दी गई। 5 मार्च को सभी स्कूल, कॉलेज बंद कर दिए गए। 13 मार्च से लॉकडाउन लागू हुआ। ईरान रिवॉल्युशनरी गॉर्ड्स को सड़के और दुकानों को खाली कराने की जिम्मेदारी दी गई। फिलहाल यहां 11 अप्रैल से देश के बाहरी हिस्से में बिजनेस और कामकाज फिर से शुरू हुआ है।ईरान में लॉकडाउन के बीच जरूरी काम के लिए बाहर जाने की छूट है। तस्वीर तेहरान के तजरीस बाजार की है।9. तुर्कीस्टेटस: टोटल लॉकडाउन नहींपहला केस: 12 मार्चकुल कोरोना संक्रमित: 70 हजार+ , कोरोना से कुल मौतें: 1500+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 16 मार्च को स्कूलों को बंद किया गया। कैफे, स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट वैन्यू भी बंद किए गए। हाल ही में 11-12 अप्रैल को यहां कुछ शहरों में दो दिन का कर्फ्यू भी लगाया गया। यहां अभी तक टोटल लॉकडाउन नहीं है।तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में दो दिन के कर्फ्यू लगने के पहले की तस्वीर। यहां 70 हजार से ज्यादा कोरोना मरीज होने के बावजूद अब तक लॉकडाउन नहीं किया गया है।10. बेल्जियमस्टेटस: टोटल लॉकडाउनपहला केस: 4 फरवरीकुल कोरोना संक्रमित: 35 हजार+ , कोरोना से कुल मौतें: 4800+लॉकडाउन से जुड़े कदम: 14 मार्च को स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया गया। इसके साथ ही रेस्टोरेंट, जिम, सिनेमा और अन्य जगहें भी बंद किए गए। 18 मार्च से टोटल लॉकडाउन शुरू हो गया। भारत की तरह ही बेल्जियम ने भी कम मामले सामने आते ही टोटल लॉकडाउन लगाया।तस्वीर बेल्जियम के लाईग शहर के नेशनल थियेटर की है। बेल्जियम में कोरोना संक्रमण के 1000 से ज्यादा मामले होते ही लॉकडाउन लागू कर दिया गया था।(सोर्स: ऑक्सफोर्ड कोविड-19 गवर्मेंट रिस्पोंस ट्रैकर, जॉन हॉपकिंस कोरोनावायरस रिसोर्स सेंटर) Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Coronavirus India US Italy | Coronavirus India Latest Update Vs Italy Spain USA Canda COVID-19 Cases Death from COVID-19 Virus Pandemic Full Article
& शरबती की पैदावार तो खूब हुई, पर लॉकडाउन के कारण यह बाकी राज्यों में नहीं जा पा रहा; किसानों को कीमत भी कम मिल रही By Published On :: Sat, 25 Apr 2020 05:43:39 GMT अपने खास स्वाद, सोने जैसी चमक और एक समान दाने के कारण पूरे देश में पहचान बनाने वाले शरबती गेहूं की इस बार सीहोर में बंपर पैदावार हुई है। पूरे मध्य प्रदेश का 50-60%शरबती गेहूं सीहोर में ही होता है। किसान खुश हैं कि इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार हुई, लेकिन इस बात से मायूस भी हैं कि कहीं लॉकडाउन के चलते शरबती का भाव कमजोर न रह जाए। यह मायूसी इसलिए क्योंकि हर साल सीहोरी शरबती गेहूं तमिलनाडु, गुजरात, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश भेजा जाता है, लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से इन राज्यों में गेहूं भेज पाना मुश्किल लग रहा है।फिलहाल यहां की मंडियों मेंगेहूं की इस खास किस्म की कीमत 3300 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल चल रही है। आमतौर पर इसका भाव 4000 से 4500 तक होता है।सीहोर में शरबती के साथ-साथ बाकी किस्म का गेहूं भी अच्छा हुआ है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, यहां इस बार गेहूं का कुल उत्पादन 13 लाख मीट्रिक टन पहुंच सकता है। पिछले साल जिले में 9 लाख मीट्रिक टन गेहूं की पैदावार हुई थी। इस साल यहां करीब 2 लाख 90 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया गया। इसमें करीब 15-20%जमीन यानी 60 हजार हेक्टेयर पर शरबती गेहूं की बुआई हुई और इसका उत्पादन1.5 लाख मीट्रिक टन रहा।सबसे महंगा बिकता है शरबतीशरबती गेहूं की खासियत यह है कि इसकी चमक के साथ ही इसके दाने एक जैसे होते हैं। गेहूं की सभी किस्मों में यह सबसे महंगा बिकता है। लोकमन, मालवा शक्ति और अन्य किस्म के गेहूं जहां 2000से 2500 रुपए प्रति क्विंटल बिकते हैं, वहीं शरबती का न्यूनतम भाव ही 2800 रुपए होता है। यह आमतौर पर 3500 से 4500 रुपए तक बिकता है। 2018 में सीहोर जिले की आष्टा कृषि उपज मंडी में शरबती गेहूं 4701 रुपए क्विंटल बिका था।क्यों खास है शरबती गेहूं?देश में गेहूं की सबसे प्रीमियम किस्म शरबती ही है। इसे 'द गोल्डन ग्रेन' भी कहा जाता है, क्योकि इसका रंग सुनहरा होता है। यह हथेली पर भारी लगता है और इसका स्वाद मीठा होता है। इसलिए इसका नाम शरबती है। गेहूं की अन्य किस्मों की तुलना में इसमें ग्लूकोज और सुक्रोज जैसे सरल शर्करा की मात्रा अधिक होती है। सीहोर में इसकी सबसे ज्यादा पैदावार होती है। सीहोर क्षेत्र में काली और जलोढ़ उपजाऊ मिट्टी है, जो शरबती गेहूं के लिए सबसे बेहतर होती है।प्रदेश में शरबती गेहूं सीहोर के साथ ही नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, अशोकनगर, भोपाल और मालवा क्षेत्र के जिलों में बोया जाता है। प्रदेश सरकार शरबती गेहूं को ब्रांडनेम यानी भौगोलिक संकेतक (जीआई) दिलाने का प्रयास कर रही है। ब्रांडनेम मिलते ही प्रदेश के शरबती गेहूं के नाम से कोई कंपनी या संस्था अपना नाम नहीं दे पाएगी।बारिश अच्छी हुई तो लोगों ने 60 हजार हेक्टेयर में शरबती गेहूं की बुआईकीकृषि उपसंचालक एसएस राजपूत के मुताबिक, जिले में रबी सीजन में करीब 3 लाख 50 हजार हेक्टेयर में खेती होती थी, लेकिन अच्छी बारिश के कारण इस बार 3 लाख 90 हजार हेक्टेयर में बोवनी की गई। इसमें गेहूं की खेती 3 लाख हेक्टेयर के आसपास रही, इसमें शरबती का हिस्सा 60 हजार हेक्टेयर रहा। पानी भरपूर मिलने से शरबती की चमक भी बढ़ी है। शरबती की पैदावार गेहूं की अन्य किस्मों के मुकाबले कम होती है, इसलिए लोग कम जमीन पर शरबती की बोवनी करते हैं, लेकिन अच्छी बारिश और सिंचाई की सुविधा के कारण जहां चने की बोवनी की जाती थी, वहां भी शरबती बोया गया था।शरबती की बेस्टकिस्म हैसी- 306शरबती गेहूं में सी-306 किस्म बेस्ट मानी जाती है। इसकी क्रॉस वैरायटी भी बाजार में उपलब्ध है। इसका एक-एक दाना एक समान और सोने जैसा चमकता है। इस बार कठिया गेहूं की एकदम नई वैरायटी 'दूरम' को लेकर भी यहां किसान काफी उत्साहित हैं। इस गेहूं का उत्पादन 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया है।सीहोर का शरबती गेहूंसात राज्यों में जाता हैतमिलनाडु, गुजरात, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से कई कंपनियां सीजन के समय सीहोर में आकर खुद शरबती गेहूं की खरीदी करती हैं, इस साल लॉकडाउन के कारण यह व्यापारियों के जरिए शरबती की खरीदी कर रही हैं। आईटीसी ने सोया चौपाल सेंटर पर शरबती गेहूं खरीदने के लिए काउंटर बनाया है। कई किसान मंडी से अधिक कीमत पर यहां अपना गेहूं बेच रहे हैं। इस बार गेहूं खरीदी के लिए प्रशासन ने 164 केंद्र बनाए हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today मध्य प्रदेश सरकार शरबती गेहूं पर अपना जीआई टैग हासिल करने की कोशिश कर रही है। यह मिलते ही शरबती गेहूं पर तमाम कानूनी अधिकार राज्य सरकार के पास आ जाएंगे। Full Article
& राजनीति से ऊपर पीएम By Published On :: Mon, 27 Apr 2020 21:43:00 GMT कोरोनावाइरस के द्रुत परीक्षण (रैपिडटेस्ट) उपकरण राजस्थान सरकार ने अस्वीकार कर दिए। राजस्थान के बीजेपी नेताओं ने दलील दी कि ममता बनर्जी सरकार की तरह अशोक गहलोत सरकार भी मेडिकल किट पर राजनीति करने की कोशिश कर रही है। लेकिन पीएम की प्रतिक्रिया भिन्न थी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से इन किट्स पर तथ्यात्मक रिपोर्ट पता करने को कहा। स्वास्थ्य मंत्री ने तुरंत आईसीएमआर से बात की। आईसीएमआर ने पहले 2 दिनों के लिए परीक्षणबंद कर दिया और फिर इन किट्स को लौटाने का निर्देश दे दिया।छोटे उद्योगों पर नजरए. के. शर्मा गुजरात कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। 2001 से मोदीजी के साथ हैं। पहले सीएमओ में उनके सचिव रहे और बाद में पहले दिन से पीएमओ में उनके साथ रहे हैं। लेकिन अब उन्हें एमएसएमई में सचिव बनाया गया है। 18 वर्ष से प्रधानमंत्री के सबसे प्रिय अधिकारी को एमएसएमई में भेजे जाने का अर्थ है कि प्रधानमंत्री एमएसएमई को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। एमएसएमई को एडीबी और वर्ल्ड बैंक के साथ-साथ बहुत सारी अन्य क्रेडिट स्कीमों से फंड मिलने वाला है, जहां बजट एक लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। ए. के. शर्मा के लिए भी यह एक नया अनुभव होगा, और माना जा रहा है कि इससे भविष्य में शर्मा की बड़ी भूमिका का भी रास्ता खुल जाएगा।एस. अपर्णा की वापसीगुजरात कैडर की 1988 बैचकी एक अन्य आईएएस अधिकारी हैं एस. अपर्णा। फिलहाल वह विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक हैं। अब वह पीएमओ या अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालय ज्वाइन कर सकती हैं। लेकिन वाशिंगटन डीसी से उनकी वापसी लॉकडाउन के कारण अटकी हुई है।कला का पारखी चाहिए!महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को 28 मई के पहले-पहले माननीय बनना जरूरी है, वरना...। अब चुनाव तो हो नहीं सकते, लिहाजा सीएम चाहते हैं कि वह विधानपरिषद में मनोनीत हो जाएं। लेकिन परिषद का मनोनीत सदस्य कला थिएटर या फिल्म जैसे पेशेवर क्षेत्र से होना चाहिए। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फाइल रोक रखी है। गवर्नर सलाह ले रहे हैं। सरकार का कहना है कि आखिर उद्धव भी कलाकार हैं। वह मराठी नाटक में अभिनय करते थे और अपने पिता की तरह कार्टून भी बनाते हैं। लेकिन यह तभी होगा, जब गवर्नर उनकी कला को स्वीकार करें। वो कहावत है ना- कार्टून बना तब मानिये, जब हस्ताक्षर हो जाएं।काले हाथों की धुलाई जारीकोरोनावाइरस महामारी के भारी दबाव के बावजूद प्रधानमंत्री कार्यालय भ्रष्टाचार पर सख्ती में ढील देने के लिए जरा भी तैयारी नहीं है। कोयला वाशरी के माफियाओं पर नकेल डाली जा रही है, और जल्द ही बड़े नतीजे देखने को मिलेंगे। वरिष्ठ कैमरा रोग विशेषज्ञ!कोरोनावाइरस का पहला निशाना वे चिकित्सक बने हैं, जो वास्तव में इन मामलों के विशेषज्ञ हैं। वॉइरोलॉजिस्ट, इम्यूनोलाजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और इंटेंसिविस्ट तो गुमनाम हो गए हैं, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग सर्जन और अन्य विशेषज्ञ कोरोना विशेषज्ञ बन बैठे हैं। खैर, टीवी पर ही तो बैठना है।सुन भई सीएमएक छोटा सा राज्य। छोटी-छोटी सीटें। और वहां सत्तारूढ़ पार्टी के लगभग 42 विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में काम नहीं हो रहा है। मतलब साफ है।दामाद जी का संकटअवधेश नारायण सिंह बिहार बीजेपी के बड़े नेता हैं। वह विधान परिषद के सभापति और पूर्व मंत्री रह चुके हैं। मई में सभापति का पद ख़ाली हो रहा है। लेकिन अवधेश नारायण सिंह दावेदार नहीं हैं। बाकी बातों के अलावा मामला यह है कि उनके दामाद विधान परिषद के स्नातक क्षेत्र से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। वह सीट फिलहाल जदयू के पास है। अब पार्टी बदली जा सकती है, दामाद तो नहीं बदला जा सकता है।बाहर घूम रहा है ‘यमराज’लॉकडाउन का उल्लंघन करेंगे, तो पुलिस क्या कर लेगी? ज्यादा से ज्यादा डंडा शस्त्र और डंडास्त्र? लेकिन दक्षिण भारत का अंदाज देखें। तमिलनाडु में पुलिस वाले एक एम्बुलेंस लेकर खड़े रहते हैं, और आवारा घूमते लोगों को उसमें बैठाने की कोशिश करते हैं। उस एम्बुलेंस में एक पुलिसकर्मी पहले से लेटा होता है, जिसके बारे में कह दिया जाता है कि वह कोरोना पीड़ित है। फिर उस एम्बुलेंस में बैठने के नाम पर बड़े-बड़े सूरमाओं की हालत खराब हो जाती है। कर्नाटक में पुलिस टीम बाकायदा ‘यमराज’ को साथ लेकर चलती है। भयंकर दाढ़ी मूंछें, ड्रेस वगैरह सब कुछ। साथ में एक यमदूत भी। जो प्रतिबंधों का पालन नहीं करता, यमराज उसे बाकायदा गिरफ्तार कर लेते हैं। संदेश यह कि प्रतिबंधों का उल्लंघन किया, तो यमराज आपके पास आया। तेलंगाना पुलिस यह पहले ही कर चुकी है।दिग्विजय का गुगली लेखनदिग्विजय सिंह ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा। अरे भई, कुछ तो खुराफात होगी ही, तभी तो लिखा है। हां, तो लिखा कि आपने रामायण और महाभारत दिखा दी, अच्छा किया, इससे नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति का प्रबोधन मिलेगा, लेकिन अब नेहरू की लिखी भारत एक खोज भी दिखा दीजिए। किरपा रहेगी।खिल गया ‘कमल’कोरोना के मध्य, मध्य प्रदेश में बने एक मंत्री को पार्टी के एक बड़े नेता की पत्नी के साथ लंबे समय काम करने का लाभ मिल ही गया। वरना मुख्यमंत्री और उनके बीच 36 का आंकड़ा किसी से छुपा नहीं था। पिछले कार्यकाल में तो बॉस के ख़िलाफ़ उन्होंने ख़ूब चिट्ठीबाजी भी की थी। फिर उनके दिल्लीवाले आका भी सक्रिय हुए। उन्होंने ज़ोर का झटका धीरे से दिया और कमल खिल गया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today PM above politics Full Article
& डॉक्टरों का मनोबल बढ़ाने के लिए दें अवॉर्ड, हर मरीज भर्ती करें अस्पताल By Published On :: Thu, 30 Apr 2020 23:30:00 GMT स्वास्थ्य सेवाओं में शीर्ष पदों पर रहे 4 लोग और कोरोना से लड़ रहे अस्पतालों के प्रमुखों से बात करने, दूसरे शहरों की बेस्ट केस स्टडी देखने के बाद इन समस्याओं का समाधान ढूंढने की काेशिशभास्कर हेल्थ एक्सपर्ट पैनल1. कोरोना और नॉन कोरोना मरीजों को अस्पताल आते ही तवज्जो मिले, अभी ऐसा नहीं हो रहा, भटक रहे हैं लोगहिना अंसारी को प्रसूति के लिए परिजन आयशा नर्सिंग होम ले गए। वहां बताया कि अस्पताल बंद है। पीसी सेठी अस्पताल चले जाओ, जबकि नौ महीने से हिना का इलाज वहीं की डॉ. नफीसा कर रही थीं। प्रसूति के ऐसे कई मामले हैं, जिनमें निजी अस्पताल वाले गर्भवती को सरकारी अस्पताल भेज रहे हैं। कोरोना और अन्य बीमारियों के मरीजों को भी कई अस्पतालों में भटकना पड़ रहा हैं। कुछ मामलों में तो मरीज की मौत भी हो गई। इनमें अस्पतालों पर लापरवाही का इल्जाम लगाया गया।भास्कर सुझाव : कॉल सेंटर सिस्टम मजबूत हो, खाली बेड की जानकारी तुरंत मिलेसीएमएचओ कार्यालय सहित पुलिस, मेडिकल कॉलेज, एमवाय अस्पताल, कलेक्टोरेट में कॉल सेंटर व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है। प्रशिक्षित कर्मचारियों की सेवाएं लेना होंगी। यलो और रेड कैटेगरी के अस्पतालों में बेड ऑक्यूपेंसी की जानकारी रोज स्वास्थ्य कार्यालय तक पहुंचना चाहिए, ताकि विभागीय अधिकारियों को पता रहे कि किस अस्पताल में कितने बेड खाली हैं। जिन लोगों के सैंपल लिए, उनकी रिपोर्ट जल्द मिले, ताकि संक्रमित मरीजों के साथ उन्हें अनावश्यक नहीं रुकना पड़े। वहीं, जगह-जगह लगे प्रदूषण बताने वाले डिस्प्ले बोर्ड पर अस्पतालों में मरीज, बेड की जानकारी दिखाई जाए।2.डॉक्टर और नर्स को अद्भुत मनोबल, समर्पण से कोरोना से लड़ना चाहिए, अभी छुट्टी लेने जैसी बातें आ रही सामनेइसमें कोई शक नहीं कि डॉक्टर, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ इस वक्त कोरोना से लड़ रहे हैं, लेकिन कई डॉक्टर इस लड़ाई में आगे ही नहीं आए। किसी ने अधिकारियों के फोन नहीं उठाए तो किसी ने छुट्टी ले ली। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के करीब 20 डॉक्टरों का वेतन रोकने और पांच आयुष डाॅक्टरों के पंजीयन निरस्ती के आदेश जारी हुए। वहीं, निजी डॉक्टर इसलिए इलाज करने नहीं जा रहे क्योंकि बिना लक्षण वाले मरीजों को पहचानना मुश्किल है। निजी अस्पतालों में आधा स्टाफ नहीं है। भास्कर सुझाव : मेडिकल टीम को पुरस्कार दिए जाएं, अतिरिक्त भत्ते की व्यवस्था होहरियाणा में सरकार ने फ्रंट लाइन वर्कर्स के लिए प्रोत्साहन राशि का एेलान किया, लेकिन बाद में वहां के डॉक्टर और अन्य ने ही मना कर दिया। जबकि कोरोना वार्ड और फील्ड में काम करने वाले डॉक्टर और कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त भत्ते की व्यवस्था होना चाहिए। हालांकि बात सिर्फ धन की नहीं है, लेकिन उन्हें यह अहसास करवाना अहम है कि वे हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। यह भी अहसास करवाना जरूरी है कि वे सुरक्षित हंै। मेडिक्लेम की सुविधाएं मिलना चाहिए।उनके ठहरने के लिए अच्छे होटल का इंतजाम हो। पुरस्कार के जरिये उनका मनोबल बढ़ाया जा सकता है।3. डॉक्टरों को पूरी सुरक्षा, भरोसा, प्रोत्साहन और हमारा समर्थन मिलना चाहिए, अभी इसमें भारी कमी हैअब तक 10 से ज्यादा डॉक्टर और आधा दर्जन नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ संक्रमण की चपेट में आ चुका है। एमवायएच और स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों से ड्यूटी लगाने में पक्षपात करने की शिकायतें आ रही हैं। दबे-छिपे हर कोई विरोध कर रहा है। ओपीडी में काम करने वाले स्टाफ को सिर्फ ग्लव्स और मास्क मिल पा रहा है। क्वारेंटाइन सेंटर में भी यही स्थिति है। नए स्टाफ को प्रशिक्षण दिए बिना ड्यूटी पर लगा दिया। डॉक्टर, नर्सों ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई।भास्कर सुझाव : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी मिले पीपीई किट, सुरक्षा का भरोसा देंकई अस्पतालों के मेडिकल स्टाफ में सुरक्षा इंतजाम को लेकर डर का माहौल है। डर यह कि पीपीई किट केवल वार्ड में ड्यूटी करने वालों को मिल रहे हैं, जबकि जरूरत यह है कि सभी अस्पतालों में डॉक्टर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को यह किट मिलना चाहिए। स्टाफ को यह भरोसा दिलाएं कि किट से संक्रमण होने कीआशंका जीरो हो जाती है। यानी, किट पहनने के बाद वे सुरक्षित हैं। सरकारी अस्पतालों में अच्छा वातावरण, वाशरूम और पानी की बेहतर सुविधाएं मिलनाचाहिए। सामान की खरीदी प्रक्रिया में फील्ड में काम करने वालों को शामिल किया जाना चाहिए।4. नॉन कोरोना मरीज उपेक्षित नहीं हों, ये ध्यान रखना पड़ेगा, अभी ऐसे कुछ लोगों की इलाज न मिलने से मौत की खबरें108 और अन्य एम्बुलेंस को कोरोना के मरीजों को शिफ्ट करने के काम में लगाया है, जबकि जरूरत 50 से ज्यादा एम्बुलेंस की है। एम्बुलेंस 108 की लाइन बिजी मिलती है। मरीजों की शिफ्टिंग भी इन्हीं से की जा रही है, जबकि दूसरी बीमारियों के मरीजों को एम्बुलेंस नहीं मिल पा रही है। उन्हें संक्रमण के डर से संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है। साेमवार को ही गंभीर रूप से बीमार पांडुराव चांदवे को परिजन क्लॉथ मार्केट अस्पताल लेकर पहुंचे। बताया गया कि यहां इलाज नहीं होगा। एम्बुलेंस नहीं मिली तो स्कूटी से लेकर एमवायएच पहुंचे। पांडुराव की तब तक मौत हो चुकी थी।भास्कर सुझाव : एम्बुलेंस के लिए ऑनलाइन बुकिंग की जाए, अस्पतालों के अनिवार्य हो कि हर मरीज के लिए करें व्यवस्थाशहर के अस्पतालों में 85-90 एम्बुलेंस हैं। जिस तरह जुगनू, ओला और उबर कैब में यात्रियों की ऑनलाइन बुकिंग की जाती है, इसी तरह एम्बुलेंस में मरीजों को ले जाने के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था की जाना चाहिए। अस्पताल में एक डेस्क बनाई जाए, जहां इनकी बुकिंग हों। अस्पतालों के लिए अनिवार्य होना चाहिए कि वे एम्बुलेंस मुहैया करवाएं।5. कोरोना वार्ड ऐसे होने चाहिए कि मरीज को वहां रहना सजा न लगे, अभी बिस्तर और यूरिनल ही खस्ताहालशैल्बी अस्पताल के संक्रमित डॉक्टर को दूसरे अस्पताल में भर्ती किया तो वहां की हालत देख उन्होंने सोशल मीडिया पर पीड़ा बताई। कहा कि मैं यहां रहा तो बीमार हो जाऊंगा। टीबी अस्पताल से चार पॉजिटिव मरीज भाग गए और कई लोगों को संक्रमित किया। एमवाय के चेस्ट वार्ड से करीब छह संदिग्ध मरीज भाग गए। अमूमन सभी की पीड़ा यही है कि वार्ड में पीने के लिए गरम पानीनहीं है। वॉशरूम गंदे हैं। बेडशीट नहीं बदली जाती। बेड के बीच दूरी नहीं है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।भास्कर सुझाव : मॉल-शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी सफाई हो अस्पतालों में, मनोरंजन के साधन हों, मरीजों में हो दूरीजिस तरह मॉल्स और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में हजारों लोगों की आवाजाही के बावजूद सफाई रहती है, उसी तरह अस्पतालों में भी रहना चाहिए। वार्ड में मनोरंजन के साधन हों। स्वस्थ मरीजों के लिए अलग-अलग गतिविधियां होना चाहिए। वार्ड में जहां मरीजों को रखा जाता है, वहां पार्टिशन होना चाहिए। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today भास्कर हेल्थ एक्सपर्ट पैनल Full Article
& लॉकडाउन बढ़ने के साथ ही हाईकोर्ट और अधीनस्थ कोर्ट में 17 मई तक नहीं होगी नियमित सुनवाई By Published On :: Sat, 02 May 2020 13:33:00 GMT मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शनिवार कोनई एडवाइजरी जारी कर प्रदेश की सभी अदालतों में 17 मई तक नियमित सुनवाई नही किए जाने के निर्देश दिए है। हाईकोर्टके रजिस्ट्रार जनरल राजेंद्र कुमार वाणी ने आज हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसएके मित्तल के आदेश पर एकपरिपत्र जारी किया है। जिसके मुताबिक,हाईकोर्ट की मुख्य बेंच जबलपुर के अलावा इंदौरऔर ग्वालियर बेंचमेंकिसी का भी प्रवेश पर बैन लगा दिया गया है। कोई भी प्रशासनिक या न्यायिक कार्य ई-मेल के जरिए जबलपुरके रजिस्ट्रार जनरल या रजिस्ट्रार ज्यूडीशियल द्वारा दोनों बेंचोंके प्रिंसिपल रजिस्ट्रारों को भेजे जाएंगे।निचली अदालतों में आगामी आदेश तक प्रवेश पूरी तरह से बैननिचली अदालतों में भी आगामी आदेश तक प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। अर्जेन्ट मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या जिला अदालतों में संबंधित जिला सत्र न्यायाधीशों या फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज की अनुमति के बिना नहीं हो सकेगी। अर्जेन्ट मामलों की अनुमति मिलने पर संबंधित वकील या उनके पक्षकार को बताया जाएगा कि उन्हें किस जगह पर जाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष रखना है।न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन एक्टिव रखना होगापूर्व आदेश के अनुसार हाईकोर्टकी इंदौर बेंचमें अर्जेंट मामलों की सुनवाई नहीं किए जाने के संबंध में पारित आदेश को निलंबित कर दिया गया है। प्रदेश के सभी न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने मोबाईल फोन को एक्टिव मोड में रखना होगा। ऐसा इसलिए ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सेवाएं ली जा सकें। किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में ऊपर दिए गए निर्दशों के तहत हाईकोर्ट या अन्यनिचली अदालतों में कामकाज हो सकेगा, लेकिन उसके पहले चीफ जस्टिस से अनुमति लेना जरूरी होगा। समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों का सभी संबंधितों को अक्षरशः पालन करना होगा। किसी भी रूप में इन निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today हाईकोर्ट ने लॉकडाउन दो हफ्ते बढ़ने के साथ नई एडवाइजरी जारी की है। Full Article
& सोमवार से ऑरेंज और ग्रीन जोन में कुछ राहत मिलेगी, इंदौर और भोपाल के रेड जोन में पहले जैसी सख्ती बनी रहेगी By Published On :: Sun, 03 May 2020 16:47:11 GMT लॉकडाउन फेज-2 का आज आखिरी दिन है। प्रदेश में शनिवार देर रात तक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 2811 पर पहुंच गई। इनमें 153 की मौत हो गई है। इंदौर में 1568 और भोपाल में 539 मरीज हैं। सोमवार से फेज-3 शुरू हो जाएगा। आगे कहां क्या रियायतें और क्या बंदिशें रहेंगी यहतय करने का जिम्मा राज्य सरकार ने कलेक्टरों को सौंपा है। कलेक्टर जिला स्तर पर स्थिति की समीक्षा करकेदेर शाम तक आदेश जारी करेंगे। इधर, भोपाल और इंदौर कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि दोनों ही स्थानों पर सख्ती जारी रहेगी। बेवजहलोग घरों से बाहर न निकलें।राज्य सरकार ने 4 मई के बाद कंटेनमेंट क्षेत्र के बाहर प्रदेशभर में छूट देने का प्लान बना लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कोरोना समीक्षा के दौरान कलेक्टरों से कहा कि वे तीन दिन में नए सिरे से अपने जिलों का आकलन कर रिपोर्ट दें। आज फिर मुख्यमंत्री एक बार चर्चा करेंगे, इसके बाद जिलों को ढील के लिए अधिकृत किया जाएगा। लेकिन, शराब औरगुटखा शॉप को 4 मई के बाद शर्तों के साथ खोला जाएगा। आबकारी विभाग ने सभी कलेक्टरों को इसके निर्देश भेज दिए हैं। ग्रीन जोन में शराब की दुकानें खुल जाएंगी।ऑरेंज औररेड जोन में कहां दुकानें खुलनी हैं, कहां नहीं, इसका फैसला कलेक्टर लेंगे।ये मजदूर बिहार के हैं। राजधानी में भदभदा के पास बन रहे एक होटल में काम कर रहे थे। घर जाने की खुशी में स्टेशन के लिए पैदल ही चल दिए।शादी में 50 और अंत्येष्टि में 20 लोग शामिल हो सकेंगेराज्य सरकार ने सिनेमाघरों को दो सप्ताह के लिए और बंद कर दिया है। इधर, शादी-समारोह के लिए 4 मई से प्रस्तावित ढील को बढ़ा दिया गया है। पहले दूल्हा-दुल्हन के साथ 5 से 10 लोगों को मंजूरी थी, लेकिन अब इसे 50 किया जा रहा है। अंत्येष्टि में अधिकतम 20 लोग शामिल हो सकेंगे।सभी जोन में ये सब बंद रहेगा स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक कार्य, कोचिंग बंद रहेंगी। पुलिस, शासकीय अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी और लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए हॉस्पिटेलिटी सेवाओं को छोड़कर बाकी हॉस्पिटेलिटी सेवाएं बंद रहेंगी। सिनेमाहॉल, शॉपिंग मॉल, जिम्नेजियम, स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थिएटर, बार, सभागृह। सामाजिक, राजनीतिक, एकेडमी, सांस्कृतिक, धार्मिक गतिविधियां भी बंद रहेंगी। गैर जरूरी गतिविधियों के लिए आवाजाही पर शाम 7 से सुबह 7 बजे तक पाबंदी रहेगी। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, 10 साल से छोटे बच्चे बाहर नहीं निकलेंगे। कंटेनमेंट जोन में ओपीडी औरक्लीनिक बंद रहेंगे।रेड जोन में इनकी अनुमति बाजार में आवश्यक सामान बेचने वाली दुकानें खुलेंगी। एकल दुकानें, मोहल्ले की दुकानें और आवासीय परिसर की दुकानें खुलेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी दुकानें खुलेंगी। ऑनलाइन बाजार में सिर्फ आवश्यक वस्तुओं को ही अनुमति रहेगी। निजी ऑफिस 33 फीसदी क्षमता के साथ चलेंगे। सरकारी दफ्तर उप सचिव स्तर तक के 100 फीसदी अफसर रहेंगे। शेष 33 फीसदी को अनुमति। दोपहिया पर एक, चार पहिया में ड्राइवर औरदो लोगों की अनुमति। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधि। जूट उद्योग, औषधि, फार्मास्यूटिकल इकाइयां।ऑरेंज जोन-एक से दूसरे जिले में निजी परिवहन सशर्त मंजूर। कैब-टैक्सी ड्राइवर औरदो यात्री की अनुमति।ग्रीन जोन-50% बैठने की क्षमता के साथ बसें चल सकती हैं। ग्रामीण औरशहरी इलाकों में ऑफिस खुलेंगे।कोरोना अपडेट्स भोपाल के बैरागढ़ में लॉकडाउन का उल्लंघन करके टहलने निकले 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ केसदर्ज किया है। 25 से 30 लोग भागने में सफल हो गए। बैरागढ़ पुलिस ने बताया कि वन ट्री हिल्स इलाके में शाम को लोग टहलने निकलते थे, लेकिनपुलिस की गाड़ी देखकर घरों में छिप जाते थे। भोपाल मेंपिछले एक सप्ताह से बंद नगर निगम का आईएसबीटी स्थित कॉल सेंटर रविवार से काम करना शुरू कर देगा। 27 अप्रैल को कॉल सेंटर की दो कॉलर की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद इसे बंद कर दिया गया था। इस कॉल सेंटर के नंबर 18002330014 पर सफाई, सीवेज, अतिक्रमण, अवैध निर्माण आदि से संबंधित शिकायतें दर्ज होती हैं। पन्ना: यहां पहला कोरोना संक्रमित मिलने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इलाके को सील कर दिया गया है। सीएमएचओ डॉ. एलके तिवारी ने बताया कि 10 लोगों के सैम्पल जांच के लिए भेजे गए थे। पॉजिटिव मरीज का शुरुआती उपचार बनौली कोविड सेंटर में शुरू किया गया। इसके संपर्क में आए लोगों के सैम्पललिए गए हैं। जिले में अब तक 214 सैम्पलजांच के लिए भेजे गए। बाहर से आए 15345 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। श्योपुर: कोतवाली पुलिस ने बताया कि पोस्ट ऑफिस के पास शनिवार शाम बाबूलाल विजयवर्गीय की दुकान में शटर डालकर ग्राहकों को कपड़ा बेचे जा रहे थे। पुलिस को मौके पर 15 ग्राहक और 10 से ज्यादा कर्मचारी मिले। दुकान सील कर दीगई। यहां से प्रमोद विजयवर्गीय और विनोद को हिरासत में ले लिया। दोनों के खिलाफ धारा 188 के तहत केस भी दर्ज किया गया।ये तस्वीर भोपालके जहांगीराबाद इलाके की है। यहां सबसे ज्यादा संक्रमित मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाया है।स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 2837संक्रमित: इंदौर 1568, भोपाल 532, उज्जैन 156, जबलपुर 96, खरगोन 77, धार 55, खंडवा 47, रायसेन 57, होशंगाबाद 36, बड़वानी 26, देवास 26, बुरहानपुर 18, रतलाम16, मुरैना 16, विदिशा 13, आगर मालवा 12, मंदसौर 36, शाजापुर 7, सागर और छिंदवाड़ा 5-5, ग्वालियर 5, श्योपुर 4, हरदा-अलीराजपुर-शहडोल में 3-3, रीवा-शिवपुरी और टीकमगढ़ में 2-2, अनूपपुर 2,बैतूल, डिंडोरी, अशोकनगर, पन्ना-निवाड़ी में एक-एक संक्रमित मिला। अन्य राज्य के 2 मरीज हैं। अब तक 156 की मौत: इंदौर 76, उज्जैन 30, भोपाल 15, खरगोन और देवास में 7-7, खंडवा 5, होशंगाबाद में 4, रायसेन 2, मंदसौर 3, धार, जबलपुर, आगर मालवा, शाजापुर, छिंदवाड़ा, अशोकनगर में एक-एक की मौत हो गई। स्वस्थ्य हुए 798 मरीज: इंदौर 350, भोपाल 237, उज्जैन 18, जबलपुर 10, खरगोन 24, रायसेन 3, धार 11, खंडवा 32, होशंगाबाद 19, मंदसौर 5, बड़वानी 22, देवास 11, रतलाम 11,मुरैना और विदिशा 13-13, शाजापुर 6, सागर-अलीराजपुर और बैतूल 1-1, छिंदवाड़ा-ग्वालियर, शिवपुरी2-2, श्योपुर में 4मरीज स्वस्थ हुए।(स्वास्थ्य विभाग द्वारा 3मई को शाम 6 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार) Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today गुना में लॉकडाउन और संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस ने मार्च निकाला। इसमें एक आरक्षक ने कोरोनावायरस का रूप रखा। Full Article
& किसान के साथ हुई मारपीट के विरोध में युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनशन पर बैठे By Published On :: Sun, 03 May 2020 23:30:00 GMT युवाकांग्रेस के प्रदेश सचिव परितोष सिंह राठौड़ पिछले 8 वर्ष से श्योपुर में रह रहे हैं। पिछले महीने अपने गृह गांव काछीबड़ौदा आए थे। लाॅकडाउन में यहीं फंसने से गेहूं खरीदी केंद्र पर किसान के साथ तहसीलदार द्वारा मारपीट करने के विराेध में काछीबड़ौदा में शनिवार सुबह 9 बजे से अनशन पर बैठ गए हैं। किसान से मारपीट करने वाले तहसीलदार को सस्पेंड करने की मांग कर रहे है। परितोष सिंह राठौर ने बताया पिछले दिनों गेहूं उपार्जन केंद्र सलमान्या साइलो पर उपज लेकर गए किसान रमेश माली को प्रबंधक ने क्वालिटी अच्छी नहीं होना बताकर गेहूं का नमूना फेल कर दिया था। किसान को अपनी उपज वापस घर पर ले जाने के लिए कहा था। जिस पर कई किसानों ने केंद्र पर हंगामा किया था। हंगामे की सूचना तहसीलदार शिवराज मीणा को दी थी। तहसीलदार ने मंडला के किसान रमेश माली के साथ मारपीट की है। जिसके कारण उसके हाथ में चोट आई थी। घटना को लेकर किसानों में आक्रोश बढ़ने पर कलेक्टर ने तहसीलदार को तुरंत वहां से हटा दिया। राठौड़ इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। जहां तक तहसीलदार को सस्पेंड नहीं किया जाता वहां तक अनशन पर बैठे रहने की बात कही। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today State Secretary of Youth Congress sat on hunger strike in protest against the fight with farmer Full Article
& मरीज ठीक हो घर जाते हैं तो तसल्ली होती है, थांदला रोड की सिमरन इंदौर में कर रही कोरोना मरीजों का इलाज By Published On :: Sat, 09 May 2020 00:15:00 GMT इंदौर मेंस्टाफ नर्स के पद पर काम करते हुए सिमरन पाल कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज कर रही है। पीपीई किट में कभी 6 तो कभी 12 घंटे तक कामकरती है।भास्कर से मोबाइल पर चर्चा में उसने बताया कि अभी मेरी ड्यूटी कोविड केयर सेंटर दि चंद्रकला होटल में है। यहां 28 अप्रैल से पॉजीटिव मरीजों का आना शुरू हो गया। तब से काम की चुनौती और बढ़ गई। मरीजों का इलाज करने के साथ खुद काे संक्रमण से बचाने की बड़ी चुनाैती रहती है, लेकिन इन सबके बीच जो भी मरीज ठीक होकर घर जाता है तो बड़ी तसल्ली मिलती है। यहां से अभी तक 15 मरीज ठीक होकर गए हैं। उनमें दो बहनें भी हैं, जो लगातार मैसेज करती है। उनसे एक रिश्ता बन गया है। सिमरन कहती हैं, किसी की जान बच जाए। इससे बढ़कर कोई काम नहीं।पीपीई किट पहनने के बाद पानी भी नहीं पी सकतेसिमरन ने बताया कोरोना मरीजों के बीच बिना पीपीई किट पहनकर जाना पड़ता है। कोरोना मरीज के पास जाने से पहले पीपीई किट, एन-95 मास्क, ग्लव्स पहनना पड़ते हैं। किट पहनने के बाद कुछ खाना तो दूर पानी भी नहीं पी सकते हैं। गर्मी में लगातार छह घंटे किट पहनकर काम करना मुश्किल होता है। क्योंकि किट पूरी तरह से टेप से चिपकी होती है। यह एक बार ही उपयोग होती है। सिमरन ने बताया ड्यूटी खत्म करने के बाद हम अपने रूम होटल श्रीनिवास में चले जाते हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today It is comforting when patients go home, and Corona patients doing treatment in Simran Indore of Thandla Road Full Article
& Mountain biker hard at work from 'home office' during lockdown By feeds.reuters.com Published On :: Wed, 06 May 2020 19:44:20 +0530 With a home office like no other, when Red Bull mountain biker Fabio Wibmer 'works', you can expect an array of insane tricks and stunts to keep his roommates company. Full Article
& Mountain biker hard at work from 'home office' during lockdown By feeds.reuters.com Published On :: Wed, 06 May 2020 20:10:18 +0530 With a home office like no other, when Red Bull mountain biker Fabio Wibmer 'works', you can expect an array of insane tricks and stunts to keep his roommates company. Full Article
& Trump contradicts nurse who says PPE has been 'sporadic' By feeds.reuters.com Published On :: Thu, 07 May 2020 00:46:20 +0530 At a ceremony honoring nurses at the White House on Wednesday, U.S. President Donald Trump contradicted a New Orleans nurse who said the availability of personal protective equipment has been 'sporadic.' Full Article
& Artist Banksy pays superhero tribute to Britain's NHS staff By feeds.reuters.com Published On :: Thu, 07 May 2020 04:58:18 +0530 A young boy chooses a nurse as the superhero he wants to play with over Batman and Spiderman in a new artwork by Banksy that encapsulates the gratitude Britons have felt toward the country's National Health Service during the coronavirus crisis. Full Article
& Trump had 'little' contact with valet who tested positive By feeds.reuters.com Published On :: Fri, 08 May 2020 01:43:19 +0530 U.S. President Donald Trump on Thursday described a valet of his reportedly testing positive for the coronavirus as "one of those things" and said that he and Vice President Mike Pence have since been tested and they are both negative. Full Article
& Class of 2020 graduates with 'robot ceremony' By feeds.reuters.com Published On :: Fri, 08 May 2020 22:26:19 +0530 Arizona State University's Thunderbird School of Global Management utilizes robots to give its students a virtual graduation ceremony. Freddie Joyner has more. Full Article
& औरंगाबाद एयरपोर्ट का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी महाराज एयरपोर्ट हुआ, शहर का नाम संभाजीनगर' करने की तैयारी By Published On :: Thu, 05 Mar 2020 16:14:58 GMT औरंगाबाद. महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने औरंगाबाद एयरपोर्ट का नाम बदल दिया है। अब यह छत्रपति संभाजी महाराज एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा। गुरुवार को इसकी घोषणा की गई। बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग उठाई थी, जिसको लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में काफी विवाद हुआ था।सरकार जल्द ही औरंगाबाद का नाम बदलकर 'संभाजीनगर' करने वाली है। शिवसेना बाला साहब ठाकरे के समय से ही इसे संभाजीनगर कहती रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शहर का नाम बदलने की अपनी पार्टी की मांग को पिछले हफ्ते दोहराया था।नाम बदलने की कागजी कार्रवाई शुरूकार्यवाहक कलेक्टर भानूदास पालवे ने कहा कि राज्य सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदलने के लिए जिला प्रशासन से रेलवे और डाक विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने को कहा था। पालवे ने कहा- "मंडलीय आयुक्त के कार्यालय नेएनओसी लेने को कहा है। जैसे ही हमें दस्तावेज मिलते हैं, हम उन्हें उच्च अधिकारियों को भेज देंगे।" Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today औरंगाबाद एयरपोर्ट-फाइल फोटो Full Article
& महिला टीम का विराट कोहली कहलाती हैं 'ब्यूटी विद टैलेंट' के नाम से प्रसिद्ध स्मृति मंधाना By Published On :: Sat, 07 Mar 2020 17:49:00 GMT सांगली. रविवार को विश्व महिला दिवस पर भारतीय महिला टीम पहली बार टी-20 वर्ल्ड कप का फाइनल जरूर खेली, लेकिन जीत का स्वाद नहीं चख पाई। इस मैच में वह महज 11 रन बनाने वालीभारतीय टीम की ओपनर स्मृति मंधाना महाराष्ट्र के छोटे शहर सांगली की रहने वाली हैं। 'ब्यूटी विद टैलेंट' के नाम से प्रसिद्ध 23 साल की स्मृति को बेहतरीन बैटिंग के साथ उनकी स्माइल और लुक्स की वजह से उन्हें विराट कोहली से कम्पेयर किया जाता है।पिता और भाई भी हैं क्रिकेटरस्मृति मंधाना का जन्म 18 जुलाई 1996 को मुंबई में हुआ। वे जब 2 साल की थीं तब उनका परिवार मुंबई से सांगली शिफ्ट हो गया और वहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। उनके पिता श्रीनिवास मंधाना और भाई श्रवण मंधाना दोनों डिस्ट्रिक्ट लेवल के अच्छे क्रिकेटर हैं। उन्हीं को देख मंधाना ने क्रिकेट खेलना शुरू किया। फाइनल को लेकर पूरी फैमिली स्मृति की अच्छी परफॉर्मेंस कि दुआएं कर रही है। उनके पिता ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया कि उनकी देर रात स्मृति से फोन पर बात हुई। वे फाइनल को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं। अगर भारत जीतता है तो घर पर जश्न की तैयारियां की गई हैं।ऐसे हुआ क्रिकेट से जुड़ावस्मृति के भाई श्रवण मंधाना ने बताया कि स्मृति 6 साल की उम्र से क्रिकेट खेल रही हैं। वे जब भी प्रैक्टिस के लिए जाते तो स्मृति भी उनके साथ जाती थीं। उन्हें खेलता देख अक्सर बैटिंग की जिद करती। स्मृति ने जब बैट थामा तो उनके स्टाइल को देख श्रवण को लगा कि वह अच्छा क्रिकेट खेल सकती हैं और इस तरह स्मृति को क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया गया।सेमीफाइनल जितने के बाद खुशी से रोने लगी स्मृतिस्मृति 2017 में हुए महिला वर्ल्डकप का हिस्सा भी रह चुकी हैं। टीम इंडिया ने भले ही यह कप अपने नाम नहीं किया लेकिन स्मृति ने उस दौरान खूब सुर्खियां बटोरी थी। वर्ल्डकप से ठीक पहले 2017 जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के साथ खेलते हुए स्मृति को बड़ी इंजरी हो गई थी। जिसके चलते उन्हें काफी दिनों तक व्हील चेयर पर पर रहना पड़ा था। उनके पिता ने बताया, 'पूरी परिवार बेहद डर गया था। लेकिन, मंधाना ने हिम्मत नहीं हारी और आज वे टीम की एक स्टार प्लेयर हैं।' रिकवर करने के बाद मंधाना ने महिला वर्ल्ड कप के पहले दो मैचों में 90 और नॉटआउट 106 रनों की पारी खेल सभी को हैरत में डाल दिया था।9 साल की उम्र में हुआ सिलेक्शन9 साल की उम्र में उन्हें महाराष्ट्र की अंडर-15 टीम के लिए चुना गया। जब वो 11 साल की हुईं तब उन्हें महाराष्ट्र की अंडर-19 टीम के लिए चुन लिया गया। साल 2013 में वेस्ट जोन अंडर-19 टूर्नामेंट में स्मृति ने वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाकर सनसनी मचाई थी। स्मृति ने 150 बॉल पर 224 रन बनाए थे। मंधाना ने अपना पहला टेस्ट मैच वर्मस्ली पार्क में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। इस मैच में पहली पारी में 22 और दूसरी में 51 रन बनाया था।पढ़ाई में भी होनहार हैं स्मृतिक्रिकेट के साथ-साथ स्मृति पढ़ाई में भी होनहार रही हैं। दसवीं क्लास में उन्हें 85% मार्क्स मिले थे। उन्होंने चिंतामनराव कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रैजुएशन किया है।पंजाबी गानों की दीवानी हैं स्मृतिस्मृति को कार ड्राइविंग काफी पसंद है। विराट कोहली, ए बी डिविलियर्स और सचिन तेंदुलकर उनके रोल मॉडल हैं। उन्हें पंजाबी गाने सुनना पसंद है। वे क्लासिक हिन्दी फिल्मों की भी दीवानी हैं। ट्रैवलिंग की शौकीन मंधाना के लिए महाबलेश्वर, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया फेवरेट टूरिस्ट डेस्टिनेशन हैं। स्मृति को ट्रेडिशनल इंडियन ड्रेस की जगह जींस और टी शर्ट पसंद हैं। स्मृति को कभी मिरर के आगे खड़ा होना पसंद नहीं है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Smriti Mandhana | Women Day Mahila Diwas 2020 Special, IND W AUS W T20, World Cup Opener Smriti Mandhana Success Story and Life-History Smriti Mandhana | Women Day Mahila Diwas 2020 Special, IND W AUS W T20, World Cup Opener Smriti Mandhana Success Story and Life-History Smriti Mandhana | Women Day Mahila Diwas 2020 Special, IND W AUS W T20, World Cup Opener Smriti Mandhana Success Story and Life-History Smriti Mandhana | Women Day Mahila Diwas 2020 Special, IND W AUS W T20, World Cup Opener Smriti Mandhana Success Story and Life-History Smriti Mandhana | Women Day Mahila Diwas 2020 Special, IND W AUS W T20, World Cup Opener Smriti Mandhana Success Story and Life-History Full Article
& 63 साल की शैलजा आदिवासी और ग्रामीण इलाकों की लड़कियों को सिखा रही कबड्‌डी; मैदान का भी कराया निर्माण By Published On :: Mon, 09 Mar 2020 08:37:53 GMT नासिक. ईरान की महिला कबड्डी टीम को एशियन चैंपियन बना चुकीं महाराष्ट्र की शैलजा जैन अब ग्रामीण और आदिवासी इलाके में इंटरनेशनल कबड्डी प्लेयर तलाश रही हैं। 63 साल की शैलजा नासिक से 150 किमी दूर गुही इलाके में लड़कियों को कबड्डी की ट्रेनिंग दे रही हैं। इसी इलाके की मिट्टी ने देश को ओलिंपियन मैराथनर कविता राऊत, मोनिका आथरे और ताई बामणे जैसी खिलाड़ी दी हैं।बच्चों को लाने के लिए माता-पिता को समझायाशैलजा ने एक साल पहले ट्रेनिंग देना शुरू किया था। उन्होंनेखुद गुही गांव जाकर बच्चों को खेलने के लिए प्रेरित किया। उनके माता-पिता को भी मोटिवेट किया। कुछ पेरेंट्स अपनी लड़कियों को खेलने नहीं भेजना चाहते थे तो शैलजा ने उन्हें समझाया। इसके बाद जिन खिलाड़ियों में टैलेंट दिखा, उन्हें अपनी एकेडमी में लाकर ट्रेनिंग देना शुरू किया। वे खिलाड़ियों को सभी जरूरी सामान्य उपलब्ध कराती हैं। किट से लेकर डाइट तक की सुविधा देती हैं। शैलजा 5 साल खेलीं, 1983 से कोचिंग करिअर की शुरुआत कीशैलजा 5 साल तक विदर्भ टीम, नागपुर यूनिवर्सिटी और नेशनल टीम से खेलीं। इसके बाद 1983 से कोचिंग करिअर शुरू किया। अपने कोचिंग करिअर में वे भारतीय महिला कबड्डी टीम, नेपाल और ईरान की टीम को भी ट्रेनिंग दे चुकी हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today ट्रेनिंग के दौरान खिलाड़ी। Full Article
& वर्ली में जलाया गया 'कोरोनासुर' का पुतला, लोगों को उम्मीद इसे जलाने से खत्म होगा कोरोनावायरस By Published On :: Tue, 10 Mar 2020 05:33:55 GMT मुंबई. वर्ली में कोरोनावायरस की थीम पर आधारित 'कोरोनासुर' का पुतला जलाया गया। नीले रंग के बड़े से पुतले में COVID-19 लिखा था। इसके हाथ में एक सूटकेस था, जिसमें आर्थिक मंदी लिखा था। लोग उम्मीद कर रहे हैं इस पुतले के जलाने पर कोरोनावायरस का भी खात्मा हो जाएगा।इस साल होली 10 मार्च को मनाई जा रही है। होलिका दहन 9 मार्च को हुआ। इस होली लोगों में कोरोनावायरस को लेकर डर भी है। लोग रंग खेलने से हिचकिचा रहे हैं। दरअसल, लोगों में डर है कि कहीं रंग और पिचकारी चाईना मेड न हो। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि कोरोनावायरस को लेकर वे भी डरे हुए हैं, इसीलिए चाईना से माल आया ही नहीं है।भारत में अब तक 43 मामले सामने आएस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक देश में अब तक कोरोनावायरस के 43 मामले सामने आए हैं। तीन पॉजिटिव मरीजों को अब डिस्चार्ज कर दिया गया है। नए मामले दिल्ली, यूपी, केरल और जम्मू-कश्मीर से आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में अब तक कोरोनावायरस संक्रमण के 2,241 नए मामलों की पुष्टि हुई है। संक्रमित लोगों की संख्या 95,333 हो गई है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today वर्ली इलाके में बना 'कोरोनासुर' का पुतला। Full Article
& यूपी-एमपी समेत 7 राज्यों में स्कूल-कॉलेजों की छुट्‌टी, इंदौर प्रशासन ने गेर और बजरबट्‌टू की अनुमति रद्द की By Published On :: Fri, 13 Mar 2020 17:01:14 GMT लखनऊ/ जयपुर/ पुणे/ पटना/ पानीपत/ जालंधर. कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण का असर अब देश के विभिन्न राज्यों की व्यवस्थाओं पर दिखने लगा है। ज्यादातर राज्यों में स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी कर दी गई है। हालांकि, परीक्षा कार्यक्रम स्थगित नहीं किए गए हैं। इंदौर में रंगपंचमी पर निकलने वाले गेर (जुलूस) और बजरबट्टू हास्य सम्मेलन की अनुमति प्रशासन ने रद्द कर दी है।बिहार में अनिश्चितकाल के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया है। वहीं, अटारी-बाघा बार्डर से पाकिस्तानी नागरिकों और मालवाहकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुंबई के अलाना हाउस ने नमाज पर रोक लगा दी है। दुनियाभर में जहां भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम से बचा जा रहा है, वहीं राजस्थान में नगर निगम चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है।यूपी में 22 मार्च तक स्कूल-कॉलेजों की छुट्टीलखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोरोनावायरस से संक्रमित 11 मरीजों की पुष्टि हुई है। कोरोना के बढ़ते हुए प्रकोप को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सभी स्कूल-कॉलेज 22 मार्च तक बंद रखने का निर्णय लिया है। मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई भी नहीं होगी। जिन विद्यालयों में परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, वे जारी रहेंगी। सीएम योगी ने कहा-यूपी में अब तक कुल 11 पॉजिटव केस पाए गए हैं, जिनमें 10 का उपचार दिल्ली में व एक का केजीएमयू लखनऊ में उपचार चल रहा है। इनमें आगरा के सात, गाजियाबाद के दो और नोएडा व लखनऊ में एक-एक केस हैं। यह बीमारी पैनिक न हो, इसके लिए एपेडमिक एक्ट के तहत इसे फारवर्ड किया है। लेकिन, इसे महामारी घोषित नहीं किया गया है।एमपी में 12वीं तक के स्कूल-कॉलेजऔरसिनेमाघरबंद, हॉकी टूर्नामेंट टलाभोपाल.कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने सभी स्कूल-कॉलेजबंद कर दिए हैं। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभागरश्मि अरुण शमी ने आदेश जारी करते हुए बताया- 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं यथावत जारी रहेंगी। सिनेमाघरों को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।इसके अलावा 15 मार्च से भोपाल के ऐशबाग, ध्यानचंद स्टेडियम और साई सेंटर पर होने वाले नेशनल हॉकी टूर्नामेंट को भी टाल दिया गया है।नहीं मनेगा बिहार दिवस, सभी स्कूल-कॉलेज और सिनेमाघर 31 मार्च तक बंदपटना. बिहार सरकार ने 31 मार्च तक सभी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और सिनेमाघरों को बंद रखने का आदेश दिया है। सीबीएसई की परीक्षाएं जारी रहेगी। दूसरे स्कूलों में चल रही परीक्षाओं के संबंध में सरकार ने संबंधित अथॉरिटी से कहा है कि परीक्षाओं की तारीख आगे बढ़ाने को लेकर विचार करें। 22 से 24 मार्च तक आयोजित बिहार दिवस कार्यक्रम को भी स्थगित कर दिया गया है। बिहार से लगी नेपाल सीमा पर कड़ी चेकिंग का आदेश दिया गया है। सरकारी कर्मियों को अल्टरनेट-डे बुलाने पर विचार हो रहा है। ज्ञान भवन, एसके मेमोरियल हॉल और बापू सभागार समेत सभी हॉल में आयोजित कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है। 31 मार्च तक सभी तरह के कार्यक्रमों की बुकिंग पर रोक लगा दी गई है। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बंद रखने का फैसला किया गया है। खेल और कल्चरल प्रोग्राम पर भी रोक रहेगी। म्यूजियम, चिड़ियाघर के साथ ही पटना के सभी पार्कों को भी बंद रखा जाएगा।दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, मल्टीप्लेक्स बंदनई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए सभी स्कूल, कॉलेज, मल्टीप्लेक्स 31 मार्च तक बंद करने के आदेश जारी किए हैं।मुंबईके अलाना हाउस में नमाज बंदमुंबई. कोरोनावायरस के डर के चलते मुंबई के कोलाबा के अलाना हाउस में नमाज को बंद कर दिया गया। यह जानकारी अलाना हाउस की ओर से बयान करके दी गई। इसमें कहा गया- जब तक वायरस का असर पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता, यहां नमाज बंद रहेगी। महाराष्ट्र में अब तक 11 लोग कोरोना से संक्रमित मिले हैं। इसके अलावा सरकार ने भी सभी कार्यक्रम रद्द करने तथा आम आदमी से 15-20 दिन के लिए धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम टालने की अपील की है। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्टेशन पर बना हेरिटेज संग्रहालय 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है।हरियाणा के सभी यूनिवर्सिटी व कॉलेज 31 मार्च तक बंदपानीपत. हरियाणा सरकार ने कोरोनावायरस के प्रभाव के कारण प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी व कॉलेजों को 31 मार्च तक बंद करने का आदेश जारी किया है। 13 मार्च को हरियाणा हायर एजुकेशन विभाग द्वारा सभी यूनिवर्सिटी व कॉलेजों को पत्र जारी किया गया। कोरोनावायरस को महामारी घोषित करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है। वहीं, रोहतक में कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में 2 हफ्ते की छुट्टी करने के आदेश दिए हैं।विदेश से लौटे चार अफसरोंको घर में रहने का आदेश, स्कूल-कॉलेजबंदचंडीगढ़/जालंधर. पंजाब सरकार ने कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते सभी सरकारी तथा प्राइवेट स्कूल कॉलेज तथा यूनिवर्सिटी 31 मार्च तक बंद करने का फैसला किया है। यह जानकारी उच्च शिक्षा मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा ने दी है। प्रदेश में अभी तक सिर्फ एक ही केस पॉजिटिव आया है, लेकिन, इसके बावजूद ऐहतियात बरता जा रहा है। इस फैसले का असर परीक्षाओं पर नहीं होगा। परीक्षाएं चलती रहेंगी। कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए विदेश से लौटे दो आईएएस और दो आईपीएस अधिकारियों को 14 दिन तक अपने घरों में रहने के आदेश दिए हैं। इनमें मोहाली के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) गिरीश दयालन, फतेहगढ़ साहिब की एसएसपी अमनीत कौंडल, संगरूर के एसएसपी संदीप गर्ग और पटियाला डेवलपमेंट अथॉरिटी की मुख्य प्रशासक सुरभि मलिक शामिल हैं।अटारी-वाघा बार्डर के जिरए नहीं आ सकेंगे पाकिस्तानीअमृतसर. कोरोनावायरस से बचाव के लिए एहतियातन देश में विदेशियों के प्रवेश पर लगाई गई रोक शुक्रवार से प्रभावी कर दी गई है। अटारी-वाघा बार्डर से आने वालों पर भी रोक लग गई है। इनमें पाकिस्तानी नागरिकों के अलावा अफगानिस्तान से माल लेकर आने वाले ट्रक ड्राइवर भी शामिल रहेंगे। कस्टम विभाग का कहना है- सरकार की एडवाइजरी का पालन किया जा रहा है। गुरुवार को अफगानिस्तान से ड्राई फ्रूट लेकर आखिरी 12 गाड़ियों को आईसीपी के जरिए भारत लाया गया। इसके साथ ही 90 यात्री पाकिस्तान से यहां पहुंचे। इनमें ज्यादातर पाकिस्तानी हिंदू हैं।छत्तीसगढ़ में स्कूल-कॉलेज बंद, हॉस्टल खाली कराया; परीक्षाएं जारी रहेंगेरायपुर. देश में कोरोनावायरस के चलते छत्तीसगढ़ में सभी स्कूल, कॉलेज 31 मार्च तक बंद कर दिए गए हैं। बोर्ड की परीक्षाएं यथावत चलती रहेंगी। कॉलेज की परीक्षाओं को भी स्थगित नहीं किया गया है, लेकिन प्रशिक्षण से संबंधित सारे सेंटर इस दौरान बंद रहेंगे। इसी तरह दिल्ली से लौटीं दो छात्राओं में सर्दी-खांसी की शिकायत मिली तो हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल खाली करवा दिया और 18 मार्च तक छुट्टी का ऐलान किया। स्टूडेंट्स की घर वापसी के लिए यूनिवर्सिटी ने बसें भी लगवा दीं। हालांकि जांच में दोनों छात्राओं के सैंपल नेगेटिव निकले।राजस्थान में नगर निगम चुनाव की अधिसूचनाजयपुर. दुनियाभर में महामारी घोषित हो चुके कोरोनावायरस से राजस्थान अछूता नहीं है। कोरोना के कारण दुनियाभर में भीड़भाड़ वाले समारोह व कार्यक्रम स्थगित किए जा रहे हैं, वहीं राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर सहित तीन शहरों के 6 निगमों के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जयपुर, जोधपुर और कोटा में पिछले साल अक्टूबर में नव सृजित 2-2 नगर निगमों में वार्ड पार्षदों के लिए 5 अप्रैल को एक साथ वोटिंग कराई जाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Coronavirus Jaipur, Pune, Patna, Updates: Schools, Colleges, Closed In UP Lucknow, Rajasthan Nagar Nigam Election 2020 Notification Full Article
& महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए 'दिशा एक्ट' लागू करने की तैयारी, विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया By Published On :: Sat, 14 Mar 2020 11:23:34 GMT मुंबई. महिलाओं के खिलाफहोने वाले अपराध को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार कड़े कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। इसमें आंध्रप्रदेशमें लागू हुए 'दिशा एक्ट' जैसे कानून को पास किया जाएगा। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शनिवार को यह जानकारी दी। दरअसल, कोरोना संक्रमण के चलतेइस बार तय समय से पहले शनिवार कोविधानसभा का बजट सत्र खत्म कर दिया जा रहा है। पहले यह 20 मार्च तक चलने वाला था। गृह मंत्री अनिल देशमुखने कहा, 'कोरोना वायरस संकट के कारण, हमें विधानसभा के बजट सत्र में कटौती करनी होगी। विधेयक को मंजूरी देने के लिए हम कोरोना वायरस का संकट समाप्त होने के बाद दो दिन का सत्र बुलाने पर विचार कर रहे हैं।'देशमुख ने कहा, 'हम अधिनियम का अध्ययन करने के लिए आंध्र प्रदेश गए थे और इस पर गौर करने के लिए एक टीम बनाई गई है। हम जल्द ही विशेष सत्र के बारे में कार्यक्रम की घोषणा करेंगे।'उद्धव ने वर्धा की घटना के बाद कड़े कानून लागू करने की बात कही थीफरवरी में महाराष्ट्र के वर्धा में एकतरफा प्यार में जिंदा जलाई गई महिला लेक्चरर की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा था कि राज्य में जल्द ही एक ऐसे कानून बनेगा, जिसमें महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए सजा के कड़े प्रावधान होंगे। माना जा रहा है कि 'दिशा कानून' उसी ओर सरकार का बढ़ाया एक कदम है।क्या है दिशा एक्ट?साल 2019 में आंध्रप्रदेश विधानसभा ने आंध्र प्रदेश क्रिमिनल लॉ संशोधन बिल (आन्ध्र प्रदेश दिशा बिल, 2019 अथवा दिशा बिल) को पारित किया था। इस बिल के द्वारा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। इस बिल के मुताबिक मामला दर्ज होने के21 दिन के भीतर ही सजा दी जाएगी।इसमेंदुष्कर्मऔरतेजाब हमलों जैसे अपराधों मेंमृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है।दिशा के तहतबच्चों के विरुद्ध यौन शोषण के अपराधों के लिए दोषियों को 10 से 14 वर्ष कैद की सजा दी जा सकती है। इस कानून के तहत उन लोगों के विरुद्ध भी कड़ी कारवाई की जायेगी जो सोशल मीडिया पर महिलाओं के विरुद्ध अभद्र पोस्ट अपलोड करते हैं, इस मामले में पहली बार अपराध करने वाले व्यक्ति को दो वर्ष की जेल की सज़ा तथा दूसरीबार अपराध करने वाले व्यक्ति को चार वर्ष कैद की सजा दी जा सकती है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Uddhav Thackeray Minister Anil Deshmukh On Vidhan Sabha Special Session Over Crimes Against Women In Mumbai Maharashtra Full Article
& कबूतर न रह जाएं भूखे, इसलिए एक कपल ने तोड़ा 'जनता कर्फ्यू' By Published On :: Sun, 22 Mar 2020 10:37:00 GMT पुणे. शहर के सभी इलाके 'जनता कर्फ्यू' के चलते लॉकडाउन हैं। सड़कों पर न के बराबर लोग नजर आ रहे हैं। इस बीच पुणे में एक कपल शहर के कसबापेठ इलाके में कबूतरों को खाना खिलाता नजर आया। इस कपल ने कबूतरों को दाना खिलाने के लिए पुलिसवालों से स्पेशल मंजूरी भी ली थी।25 साल से खिला रहे हैं दानाकसबापेठ में रहने वाले अमित पिछले 25 साल से लगातार कबूतरों को दाना खिला रहे हैं। वे हर दिन मॉर्निंग वाक पर अपनी पत्नी के साथ जाते हैं और सैंकड़ों कबूतरों को दाना खिलाते हैं। अमित ने बताया कि 'जनता कर्फ्यू' में इंसानों ने अपने खाने का इंतजाम तो कर लिया था, लेकिन मेरे भोजन की आस में बैठे ये कबूतर कैसे दाना चुगते। इसलिए मैंने इन्हें आज भी दाना खिलाने के लिए यह जनता कर्फ्यू में भी बाहर आने का निर्णय लिया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today पिछले 25 साल से हर दिन यह कपल इसी तरह कबूतरों को दाना खिला रहा है। Full Article
& आज सड़कों पर नजर आई भारी भीड़, संजय राउत बोले-पीएम मोदी ने इसे 'त्यौहार' बना डाला, सरकार गंभीर होगी, तभी जनता गंभीर होगी By Published On :: Mon, 23 Mar 2020 07:10:00 GMT मुंबई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवाहन के बाद रविवार को पूरे राज्य में सुबह 7 बजे से शाम 9 बजे तक 'जनता कर्फ्यू' लगा। लोगों ने घरों से बहार नहीं निकलकर इसे सफल बनाने का प्रयास किया। हालांकि, सोमवार को स्थिति इसके विपरीत नजर आई। पूरे राज्य में धारा 144 लागू होने के बावजूद कई शहरों में सड़कों पर गाड़ियों की भीड़ नजर आई। मुंबई एक वेस्टर्न-एक्सप्रेसवे पर भी भारी संख्या में लोग सड़कों पर नजर आये। इसमें ज्यादातर वे लोग थे जो बंदी के चलते घरों का राशन खरीदने के लिए बाहर निकले थे।सरकार गंभीर, तभी जनता होगी गंभीर'जनता कर्फ्यू' के मुद्दे पर राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र पर निशाना साधा है। सोमवार को ट्वीट कर संजय राउत ने लिखा,'हमारे प्रधानमंत्री की चिंता है की,'लॉकडाऊन' को अभी भी लोग गंभीरता से नहीं ले रहे है। प्रिय प्रधानमंत्री जी, आपने डर और चिंता के माहोल मे भी 'त्यौहार' जैसी स्थिती पैदा कर दि तो ऐसा ही होगा। सरकार गंभीर होगी, तो जनता गंभीर होगी। जय हिंद, जय महाराष्ट्र'आज की भीड़ से पीएम हुए नाराज आज सड़कों पर आई भीड़ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी व्यक्त की है। पीएम मोदी ने सोमवार को ट्वीट करके कहा है कि लॉकडाउन को अभी भी कई लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कृपया करके अपने आप को बचाएं, अपने परिवार को बचाएं, निर्देशों का गंभीरता से पालन करें। राज्य सरकारों से मेरा अनुरोध है कि वे नियमों और कानूनों का पालन करवाएं।##मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे बंद भीड़ को रोकने के लिए मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को सरकार ने अगले आदेश तक बंद रखने का फैसला किया है। यह देश का सबसे पहला एक्सप्रेसवे हैं। आम दिनों में यहां लगभग हर दिन दो से पांच किलोमीटर का जाम लगता है।महाराष्ट्र के ये जिले लॉकडाउनकोरोना के बढ़ते केसों के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने अहमदनगर, औरंगाबाद, मुंबई, नागपुर, मुंबई सब-अर्ब, पुणे, रत्नागिरी, रायगढ़, ठाणे, यवतमाल जिलों को लॉकडाउन कर दिया है। यानी जरूरी सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद है।महाराष्ट्र में कहां-कितने करोनावायरस संक्रमितकुल संख्या-89 जिले संक्रमित पिंपरी 12 पुणे 16 मुंबई 39 नागपुर 04 यवतमाल 03 नवी मुंबई 03 कल्याण 04 अहमदनगर 02 रायगढ़ 01 ठाणे 01 उल्हासनगर 01 औरंगाबाद 01 रत्नागिरी 01 Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today मुलुंड टोल नाके पर लगा गाड़ियों का लंबा जाम। Full Article
& कोरोना की पहली स्‍वदेशी टेस्टिंग किट के कमर्शियल प्रोडक्शन को मंजूरी, दावा- इससे प्राइवेट लैब में एक दिन में 1000 टेस्ट हो सकेंगे By Published On :: Tue, 24 Mar 2020 10:31:09 GMT पुणे. शहर की मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस कंपनी कोकोविड-19 (कोरोनावायरस) की टेस्ट किट के लिए सोमवार को कमर्शियलप्रोडक्शन की अनुमति मिल गई। परमिशन पाने वाली यह देश की पहली कंपनी है। कंपनी ने बताया कि कोरोनावायरस की जांच करने वाली उसकी ‘मायलैब पैथोडिटेक्ट कोविड-19 क्वॉलिटेटिव पीसीआर किट’ को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अनुमति दीहै।कंपनी का दावा है कि वे एक टेस्टिंग किट से 100 लोगों की जांच कर सकते हैं। इसके बाजार में आ जाने से एक प्राइवेट लैब में दिन में कोरोना के एक हजार टेस्ट किए जा सकेंगे। अभी एक लैब में औसतन दिनभर में 100 नमूनों की कोरोना जांच हो पाती है।'मेक इन इंडिया' है यह किटकंपनी के प्रबंध निदेशक हसमुख रावल ने कहा, 'स्थानीय और केंद सरकार से मिले सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर देते हुए उसने कोविड-19 की जांच के लिए एक किट तैयार की है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) के दिशानिर्देशों के अनुरूप रिकॉर्ड समय में विकसित किया गया है। कोरोना वायरस की जांच किट को स्थानीय स्तर पर बनाने से इसकी मौजूदा लागत घटकर एक चौथाई रह जाएगी।'ब्लड जांच से लेकर एचआईवी जांच के लिए किट बना चुकी है मायलैबमायलैब वर्तमान में ब्लड बैंकों, अस्पतालों, एचआईवी जांच की किट बनाती है।मायलैब के कार्यकारी निदेशक शैलेंद्र कावडे ने कहा- हम अपने देश को अत्याधुनिक तकनीक, उचित और सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। चूंकि यह परीक्षण संवेदनशील तकनीक पर आधारित है, इसलिए प्रारंभिक चरण के संक्रमण का भी पता लगाया जा सकता है। इस किट से की गई जांच के परिणाम काफी सटीक हैं।कोरोना जांच के मामले में भारत सबसे पीछेवर्तमान में, भारत प्रति मिलियन जनसंख्या पर किए गए परीक्षण के मामले में सबसे नीचे है। यह आंकड़ा सिर्फ6.8 काहै। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिएभारत सरकार ने जर्मनी से लाखों टेस्टिंगकिट आयातकी हैं। मायलैब का दावा है कि आने वाले समय मेंएक हफ्ते में एक लाख किट का बनाई जा सकेंगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today कोरोना टेस्टिंग की एक किट में 100 मरीजों की जांच हो सकती है। इसे किट को बनाने वाली कंपनी ने दावा किया है कि वह एक हफ्ते में एक लाख किट बना सकती है। Full Article
& पुणे पुलिस ने कोरोना से जुड़े 'अप्रैल फूल' वाले जोक्स भेजने पर लगाई रोक, नियम तोड़ा तो हो सकती है 6 महीने की जेल By Published On :: Tue, 31 Mar 2020 07:18:40 GMT पुणे. एकअप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल डे' मनाया जाता है। इस दौरान लोग एक दूसरे को जोक्स भेजते हैं और उनके साथ प्रैंक करते हैं। पूरा देश इस समय कोरोना की चपेट में है। महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण् से सबसे ज्यादा प्रभावित है। लोग डरे हुए हैं। ऐसे में अफवाहपुलिस की मुश्किल बढ़ा सकती है। इसे देखते हुएपुणे पुलिसने एक अप्रैल को कोरोना से जुड़ेप्रैंक्स और जोक्स पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। नियमों का उल्लंंघन करने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें 6 महीने की सजा और 1000 रुपएके जुर्माने का प्रावधान है।व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन को भी पुलिस ने चेतायाइसे लेकर पुणे पुलिस ने एक नोटिफिकेशन भी जारी किया है। पुणे ग्रामीण पुलिस के सब-डिवीजनल ऑफिसर नारायण शिरगांवकर ने कहा कि एक अप्रैल को लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को झूठे फोन कॉल और मैसेज भेजकर उनके साथ प्रैंक करते हैं। हालांकि, वर्तमान स्थिति में इससे लॉकडाउनप्रभावित हो सकता है और लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने व्हाट्सएपग्रुप एडमिन को भी अलर्ट रहने के लिए कहा है। क्योंकि,व्हाट्सएप पर अगर कोई व्यक्तिइस तरह के मैसेज भेजता है तो उसके ग्रुप एडमिन पर कार्रवाई की जाएगी। ग्रुप एडमिन को यह भी कहा गया है कि वे मैसेज भेजने के ऑप्शन को सिर्फ एडमिन के लिए खुला रखें।पूरे शहर की ड्रोन सेनिगरानी, अब तक 45 मामले सामने आएपुणे में मंगलवार सुबह तक 45 कोरोना संक्रमित सामने आ चुके हैं, जिसमें से 10 लोगों ठीक होकर घर भी जा चुके हैं।सोमवार को यहां एक 52 वर्षीय शख्स की मौत हुई है। यहां के सभी इलाके पूरी तरह से लॉकडाउन है। पूरे शहर की ड्रोन से निगरानी हो रही है, जिन इलाको में भी लोग बाहर नजर आ रहे हैं। वहां पर पुलिस जाकर उन्हें घर के अंदर रहने की हिदायत दे रही है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today पुणे में मंगलवार तक संक्रमण के 45 मामले सामने आ चुके हैं। Full Article
& आज चार की मौत, संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 526 तक पहुंची, शहर के दो बड़े हॉस्पिटल कंटेनमेंट जोन घोषित By Published On :: Mon, 06 Apr 2020 13:32:46 GMT कोरोना मरीजों का हॉटस्पॉट बन चुके मुंबई में हर दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सोमवार को यहां 57 नए मामले सामने आए हैं। इसी के साथ यहां मरीजों की संख्या बढ़कर 526तक पहुंच गई है। वहीं अगर इसमें ठाणे और वसई को मिला लिया जाए तो यह संख्या 609 तक पहुंच जाती है। वहीं यहां मरने वालों की संख्या भी बढ़कर 41(34 मुंबई+7 एमएमआरडीए) हो गई है। मुंबई के दो बड़े प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी डॉक्टर और नर्सों में कोरोना पॉजिटिव केस मिले हैं। जिसके बाद दोनों अस्पतालों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है।आज इनकी हुई मौत..1. मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में 29 मार्च को भर्ती हुए 80 वर्षीय बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया है। उसे बुखार और लूज मोशन था साथ ही सांस लेने में भी तकलीफ थी। डॉक्टरों के मुताबिक उसे हाइपरटेंशन भी था। मरीज की मौत 5 अप्रैल की शाम को हुई है उसमें कोरोना की पुष्टि 3 अप्रैल को हुई थी।2. मुंबई के एचबीटी हॉस्पिटल में 2 अप्रैल को भर्ती हुए 41 वर्षीय पुरुष की करुणा के चलते मौत हो गई है। इसे भी बुखार और लूज मोशन था। जांच में सामने आया है कि यह क्रॉनिक एल्कोहलिक भी था। इसमें कोरोना की पुष्टि 1 अप्रैल को हुई है।3. 1 अप्रैल को मुंबई के एचबीटी हॉस्पिटल में भर्ती हुए 62 वर्षीय पुरुष की मौत 4 अप्रैल को हुई है। इनमें कोरोना की पुष्टि 31 मार्च को हुई थी, इन्हें हाइपरटेंशन एपिलेप्सी और पैरालाइसिस था।4. मुंबई के सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल में 1 अप्रैल को कब और सांस लेने में दिक्कत के बाद भर्ती हुए 52 वर्षीय पुरुष की 4 अप्रैल को मौत हो गई। इनमें कोरोना की पुष्टि 4 अप्रैल को ही हुई थी।15 लाख लोगों का सर्वे किया गयाग्रेटर मुंबई मुंसिपल कॉरपोरेशन ने अब तक 15 लाख लोगों का सर्वे किया है, जिसमें से 665 लोगों को चिंहित किया गया और उनके टेस्ट करवाए गए हैं। इसी के साथ 1400 सैंपल भी घर जाकर टेस्टिंग के लिए कलेक्ट किए गए हैं।मुंबई में 226 कंटेनमेंट जोन चिन्हित किए गए हैं और पूरे इलाके को क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है।10 कंटेनमेंट जोन में डॉक्टरों , नर्सों और लैब टेक्नीशियन द्वारा द्वारा स्पेशल स्क्रीनिंग क्लीनिक शुरू किया गया है।वॉकहार्ट अस्पताल में 26 नर्सों और 3 डॉक्टरों को कोरोना संक्रमणबीएमसी ने 26 नर्सों और तीन डॉक्टरों में कोरोनावायरस का टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल को एक निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है। मुंबई सेंट्रल में स्थित इस अस्पताल में किसी नए मरीज की भर्ती करने पर रोक रहेगी। आयुक्त सुरेश काकानी ने कहा कि हॉस्पिटल में कैसे इतने ज्यादा लोगों में संक्रमण फैल गया, इसकी जांच के लिए टीम गठित की गई है। उन्होंने कहा- "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वायरस इतने ज्यादा डॉक्टरों और नर्सों में फैल गया। सभी को सावधानी बरतनी चाहिए थी।" हॉस्पिटल में काम करने वाले 270 से अधिक कर्मचारियों और डॉक्टरों की जांच कराई जा रही है।जसलोक हॉस्पिटल भी क्वारैंटाइन जोन घोषितमुंबई के जसलोक हॉस्पिटल को भी रेड जोन घोषित कर दिया गया है। जसलोक अस्पताल की छह नर्सों समेत 19 कर्मचारियों में कोरोना की पुष्टि हुई है। इसके बाद इन अस्पतालों में आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई। इसके साथ ही इन मरीजों के संपर्क में आए लोगों को भी क्वारैंटाइन किया जा रहा।ऐसे वॉकहार्ट अस्पताल में फैला कोरोना27 मार्च को वॉकहार्ट अस्पताल में 70 वर्षीय एक बुजुर्ग भर्ती हुआ था। उसका एंजियोप्लास्टी होना था। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इस दौरान उनका कोरोना टेस्ट का रिजल्ट आया, जिसमें वह पॉजिटिव निकला। इनके संपर्क में आने वाले स्टाफ भी पॉजिटिव मिले। हाल में ही वॉकहार्ट में काम कर रहे धारावी में रहने वाले एक सर्जन में भी कोरोना की पुष्टि हुई थी। इसके बाद अस्पताल के सभी स्टाफ का चेकअप किया गया और 26 नर्स और 3 डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव निकले हैं।मुंबई में मृत्यु दर 6.66 % तक पहुंचीमुंबई में कोरोना वायरस के कारण मृत्युदर 6.66 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो देश की औसत दर 3 प्रतिशत से दोगुने से भी अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बीमारी में मृत्युदर 3 प्रतिशत से ज्यादा होना चिंता की बात है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today वॉकहार्ट अस्पताल के बाहर लगा नो एडमिशन का बोर्ड। Full Article
& सीएम के बंगले 'वर्षा' तक पहुंचा कोरोना, वहां तैनात महिला पुलिस अधिकारी कोरोना संक्रमित By Published On :: Wed, 22 Apr 2020 06:52:25 GMT मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सरकारी आवास 'वर्षा' के बाहर तैनात एक महिला पुलिस अधिकारी को कोरोना संक्रमित पाया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री ठाकरे 'वर्षा' में नहीं रहते हैं, लेकिन सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकों के लिए लगभग हर रोज वर्षा आते हैं। कोरोना संकट को लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी कई अहम बैठके वर्षा बंगले पर आयोजित करते रहे हैं। बंगले पर वीडियो कांफ्रेसिंग समेत कई अन्य सुविधाएं उपलब्ध है। इसलिए मुख्यमंत्री इन दिनों अपना अधिकांश समय यहां बिताते हैं।सुरक्षा में तैनात सभी पुलिसकर्मियों को क्वारैंटाइन किया गयामहिला पुलिस अधिकारी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनके संपर्क में आने वाले अन्य पुलिसकर्मियों को क्वारैंटाइन कर दिया गया है। इससे पहले मुख्यमंत्री ठाकरे के बांद्रा स्थित निवास मातोश्री के पास एक चाय वाले में भी कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद मातोश्री पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को पास में स्थित उत्तर भारतीय संघ भवन में क्वारंटाइन किया गया था। हालांकि, बाद में उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। समाचार एजेंसी पीटीआई से एक आईएएस ऑफिसर ने बात करते हुए इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया,"एक महिला पुलिस कांस्टेबल में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद कांटेक्ट ट्रेसिंग जारी है।' हालांकि, मुंबई पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनके बंगले पर तैनात एक महिला सब इंस्पेक्टर में कोरोनो पॉजिटिव पाया गया है।कोरोना मरीजों के लिए तैयार होंगे ऑक्सीजन स्टेशनकोरोना के मरीजों के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन स्टेशन तैयार किए जाएंगे। कोरोना के उपचार के विशेष अस्पतालों और क्वारंटाइन में ऑक्सीजन स्टेशन की सुविधा होगी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने यह जानकारी दी। टोपे ने कहा कि अस्पतालों में हर बेड के पास ऑक्सीजन मॉस्क लगाए जाएंगे। टोपे ने कहा कि कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की बजाय अब ऑक्सीजन स्टेशन की सुविधा देने के लिए जोर दिया जाएगा। इससे इलाज के दौरान जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन का इस्तेमाल हो सकेगा। टोपे ने कहा कि मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति को जारी रखने के लिए उत्पादकों को निर्देश दिए गए हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today एक बक्त में बंगले के बाहर एक पुलिस अधिकारी समेत 7 लोग तैनात रहते हैं। फिलहाल सभी को क्वारैंटाइन कर दिया गया है। Full Article
& घटना में गिरफ्तार कोई भी आरोपी मुस्लिम नहीं, विपक्ष 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने' देख रहा: महाराष्ट्र के गृहमंत्री By Published On :: Wed, 22 Apr 2020 07:26:53 GMT महाराष्ट्र के पालघर में पीट-पीटकर दो साधू समेत तीनलोगों की हत्या को सांपद्रायिक रंग देने वाले को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देखमुख ने आड़े हाथों लिया है। बुधवार को उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए लोगों से बात की। इस दौरान देशमुख ने कहा किपालघर मामले मेंगिरफ्तार किए गए 110 लोगों में से कोई भी मुस्लिम नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहा था।मुंगेरीलाल के हसीन सपनेदेख रहा विपक्ष: देशमुखदेशमुख ने कहा, "इस घटना के संबंध में गिरफ्तार किया गया कोई भी आरोपी मुस्लिम नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस घटना के बाद साम्प्रदायिक राजनीति की जा रही है।"किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा, "कुछ लोग 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' देख रहे हैं। यह राजनीति करने का नहीं बल्कि एक साथ मिलकर कोरोना वायरस से लड़ने का समय है।"महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देखमुख नेफेसबुक लाइव के जरिए लोगों से बात की।बच्चा चोरी के संदेह में ग्रामीणों ने किया था हमलापालघर की घटना16 अप्रैल की रात की है। यहां दो साधू और उनके ड्राइवर मुंबई सेगुजरात अपने गुरु केअंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कार से जा रहे थे। लॉकडाउन के चलते हाइवे पर पुलिस ने वाहन को रोक दिया। इसके बाद वह लोग गांव के रास्ते जाने लगे। इसी दौरान पालघर जिले के एक गांव के पास रोक लिया। वहां भीड़ ने बच्चा चोरी करने के संदेह में तीनों को कार से बाहर निकाला और उनकी लाठियों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। मृतकों में महाराज कल्पवृक्षगिरी (70), सुशीलगिरी महाराज (35) और चालक निलेश तेलगड़े (30) के रूप में की गई। महाराष्ट्र सरकार ने घटना की उच्चस्तरीय सीआईडीजांच के आदेश दिए और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में सोमवार को पालघर के दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इस मामले में 9 नाबालिगों समेत 110 लोगों को पकड़ा गया है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 16 अप्रैल को यह घटना हुई थी। इसमें भीड़ ने साधू और उनके ड्राइवर को गाड़ी से खींच कर पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। Full Article