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100 बिस्तर वाले बीएसपी अस्पताल में 30 साल बाद सिर्फ 24 बिस्तर की सुविधा बची

भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा बीएसपी कर्मचारियोें काे तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को ध्यान में रखते हुए 100 बिस्तर अस्पताल की स्थापना की गई थी। जो अब मात्र 24 बिस्तर में सिमट रह गया है। डाॅक्टर व आवश्यक सुविधा नहीं हाेने से रेफर सेंटर बन कर रह गया है। लगभग 30 वर्ष पूर्व अस्पताल को सर्वसुविधायुक्त 100 बिस्तर अस्पताल बनाया गया था। जहां बीएसपी कर्मचारियों व मजदूरों का इलाज बेहतर तरीके से किया जाता था।
यहां पर पर्याप्त सर्जन, विशेषज्ञ चिकित्सक, सहायक चिकित्सक, नर्स, हेड नर्स, वार्ड बाय, ड्रेसर, फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारियों की पदस्थापना की गई थी, लेकिन धीरे-धीरे सभी सुविधाअाें में कटाैती हाे रही है। इस अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर है। पूर्व मेंकिसी भी प्रकार का बड़ा से बड़ा ऑपरेशन इसी अस्पताल में किया जाता था। यहां तक ऑपरेशन के लिए भिलाई सेक्टर 9 से चिकित्सकों को विशेष वाहन से बुलाया जाता था। माइंस क्षेत्र होने के कारण यहां पर आए दिन दुर्घटना व परिवार के सदस्यों को किसी न किसी तरह के बीमारी से ग्रसित होने से इलाज होता था।
यहां गायनोलाॅजिस्ट, आर्थोपेडिक, दंत चिकित्सक तक नहीं
बीएसपी अस्पताल में 7 चिकित्सकों की पदस्थाना है। जिसमें एक मेडिसिन चिकित्सक और अन्य एमबीबीएस चिकित्सक हैं। इतने बड़े अस्पताल में गायनोलाॅजिस्ट, आर्थोपेडिक, दंत चिकित्सक, सोनोग्राफी चिकित्सक की पदस्थाना नहीं की गई। जिससे संबंधित मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। पैथोलाॅजी लैब नाममात्र का रह गया है। लैब टेक्निशियन के अनुभव की कमी के चलते रिपोर्ट में त्रुटियां पाई जाती है जिससे मरीजों के जान को खतरा बना रहता है। इसके लिए मरीज निजी पैथालाॅजी से टेस्ट करा कर चिकित्सक से सलाह लेते हैं।
चिकित्सकों की भर्ती की जा रही: महाप्रबंधक
अस्पताल प्रबंधक मनोज डहरवाल से पूछे जाने पर इस संबंध में किसी प्रकार की चर्चा करने से इंकार कर दिया। खान मुख्य महाप्रबंधक तपन सूत्रधार ने बताया कि चिकित्सकों की नई भर्ती की जा रही है जिसमंे एक गायनोलाॅजिस्ट शामिल है। साथ ही दो नई एम्बुलेंस की खरीदी की जा रही है।
एक हाॅल में मरीजाें का जांच करते हैं डाॅक्टर
चिकित्सकों के लिए पर्याप्त कमरा होने के बावजूद वहां न बैठ कर एक हाॅल में सभी चिकित्सक बिना पर्दा के मरीजों की जांच करते हैं। वहीं जांच के दौरान चिकित्सक को सभी मरीज घेरे रहते हैं। जिस पर कई मरीज संकोच के कारण बिना जांच कराए वापस चले जाते हैं। कई अपनी गुप्त बीमारी को चिकित्सक के सामने साझा करने से कतराते हैं।
यहां की नर्स ठेका श्रमिकोंसे कराती हैं पूरा काम
हेड नर्स व नर्स कुर्सी में बैठे-बैठे इशारे से अपना सारा काम ठेका श्रमिकोंसे कराती हैं। यहां तक मरीजों की ईसीजी जैसे अनेक कार्य अकुशल ठेका श्रमिकोंद्वारा कराया जाता है। ईसीजी से दवाई वितरण केन्द्र में चिकित्सक के पहुंचने से पहले अपना काउन्टर बंद कर चले जाते हैं। जिससे कई मरीजों को दवाई लेने के दूसरे दिन वापस काउंटर में लाइन लगाकर लेना पड़ता है।
मरीजों को घंटाें करना पड़ता है इंतजार
छोटी बीमारी तक के लिए भिलाई रेफर कर देते हैं
धीरे-धीरे बीएसपी अस्पताल अब मात्र 24 बेड पर सिमट कर रह गया। 12 बिस्तर पुरुष व महिलाओं के 12 बिस्तर लगाया गया है। वर्तमान में महिला एवं पुरुष वार्ड में एक भी मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। मरीज को आपातकालीन स्थिति में चिकित्सक बिना जांच के रेफर कर देते हैं। जिसके कारण बेड खाली पड़ा रहता है। छोटी बीमारी के लिए भिलाई रेफर कर दिया जाता है।
एम्बुलेंस बीच रास्ते में ही कभी भी हो जाती है खराब
बीएसपी द्वारा संचालित एंम्बुलेंस कंडम हो चुकी है। जिसके सहारे मरीजों को सेक्टर 9 रेफर किया जाता है। एम्बुलेंस बीच रास्ते में ही खराब हो जाती है। जिससे मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। एक ओर प्रबंधन माइंस क्षेत्र में उत्पादन काे बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से नई-नई मशीन लगा रही है। लेकिन बीएसपी कर्मचारियों के लिए ठेके पर एम्बुलेंस चला रही है।
बीएसपी कर्मचारी अपना इलाज निजी अस्पतालों में कराने में विश्वास रखते हैं। केवल गरीब व मजदूर ही बीएसपी अस्पताल में पहुंचते हैं। उन्हें भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा भिलाई सेक्टर 9 रेफर करने की बात करते हैं। सेक्टर 9 अस्पताल पहुंचता है तो वहां के चिकित्सकों द्वारा जांच करते ही मरीज की हालत सामान्य हाेने पर वापस राजहरा भेज दिया जाता है। एक मात्र मेडिसिन चिकित्सक हेड बन कर बैठे हैं, जो अस्पताल मेें कभी भी समय पर उपस्थित नहीं रहता। इनके अनुशरण में अस्पताल के सभी कर्मचारी अपना टाइम टेबल व कर्तव्य भूल चुके हैं। अस्ताल में मरीजों को घंटाें इंतजार करना पड़ता है। इंताजर में अस्पताल बंद होने का समय आ जाता है जिससे बिना इलाज के मरीज लौट जाते हैं।



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नहीं हो रहा मोतियाबिंद का ऑपरेशन, 500 को आंखों की रोशनी का इंतजार

कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन होने के बाद मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (मेकाहारा) में हर रोज काफी भीड़ लग रही है। यहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हो रहा है। इसे देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस से सहयोग मांगा है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ पीएम लूका ने बताया कि अभी मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में ओपीडी की शिफ्टिंग नहीं कराई जा सकती है। वहां पर अभी कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है, इसे देखते हुए अभी मेकाहारा में भीड़ को डायवर्ट करने के लिए रामभाठा स्थित जिला हॉस्पिटल के ओपीडी में भी कुछ मरीजों को भेजा जा सकता है, वहां पर भी डॉक्टर्स हर रोज बैठते हैं। इसे लेकर मेडिकल सुपरिटेंडेंट से बातचीत करने के बाद इस पर तैयारी करके वहां पर हॉस्पिटल की ओपीडी को भी अच्छे से शुरू करने के लिए कहा जाएगा।
रामभाठा हॉस्पिटल में इलाज की सुविधा नहीं
जिला हॉस्पिटल भवन में मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल खुलने के बाद रामभाठा के पीएचसी में जिला हास्पिटल शिफ्ट किया लेकिन वहां सुविधा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
डीन बोले- रामभाठा हाॅस्पिटल की ओपीडी में भेजेंकुछ मरीज
मेकाहारा में पहले लॉकडाउन से ही मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, नासूर के आपरेशन बंद हैं। इतना ही नहीं मरीजों को चश्मे का नंबर तक नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों ने स्थिति सामान्य न होने तक सभी तरह के आंखों के आपरेशन पर रोक लगा दी। मेकाहारा में सामान्य दिनों में आंखों की जांच कराने के लिए प्रतिदिन 200 से 250 मरीज पहुंचते थे। इनमें प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों की जांच और परीक्षण करने पर मोतियाबिंद, नासूर, सबल बाई (ग्लूकोमा) पाया जाता था। ऐसे मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद निश्चित समय देकर ऑपरेशन के लिए बुलाया जाता था। 24 मार्च से लॉकडाउन हो जाने के कारण इस तरह के मरीजों का आपरेशन रोक दिया गया। ओपीडी में न तो इनका इलाज किया जा रहा है और नहीं इनके आपरेशन हो पा रहे हैं। नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों ने इन्हें लॉकडाउन तक सावधानी के तौर पर लिखी गई दवाइयों का इस्तेमाल करने और धूप, धूल, धुआं से परहेज करने की हिदायत दी है। दो माह का समय बीत जाने के बाद भी लॉकडाउन खुलने की स्थिति साफ नहीं हो सकी है। जिसके चलते अब अस्पताल पहुंच रहे लोगों को बारिश बाद यानी अगस्त में आपरेशन कराने की सलाह दी जा रही है।
500 ऑपरेशन लंबित हैं
"मेकाहारा में सामान्य ओपीडी चल रही है, एलर्जी सहित सामान्य समस्या वाले मरीजों का परीक्षण कर इलाज किया जा रहा है। प्रतिमाह ढाई सौ के करीब आपरेशन हो जाते थे। मार्च और अप्रैल में आपरेशन होने से लगभग 500 मरीजों के आपरेशन लंबित हैं। लॉकडाउन की वजह से सभी तरह के आपरेशन रोक दिए गए हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।"

- डॉ. मीना पटेल, नेत्र सर्जन



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नागपुर से झारखंड पैदल जा रहे मजदूर की हार्ट अटैक से मौत; 400 किमी की दूरी तय करके बिलासपुर तक आ गया था

झारखंड जाने के लिए नागपुर से पैदल निकले रवि मुंडा नाम की श्रमिक की बिलासपुर में हार्ट अटैक से मौत हो गई।उसने 400 किमी की दूरी पैदल तय की थी। बिलासपुर पहुंचने पर उसकी तबियत बिगड़ी। उसेछत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों को सूचना दी गई। उन्होंने आने मेंअसमर्थता जताई तोसिम्स प्रबंधन ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

नागपुर से 8 प्रवासी मजदूरों का ग्रुप झारखंड जाने के लिए पैदल ही निकला था। वह 3 मई को बिलासपुर पहुंचा, लेकिन यहां सरायकेला निवासी रवि मुंडा (40) की तबियत बिगड़ गई। सूचना मिलने पर एंबुलेंस से देर रात सभी को सिम्स लाया गया। रवि में कोरोना के लक्षण दिखने पर उसे अलग वार्ड में भर्ती किया गया। उसके साथ अन्य मजदूरों के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए।

युवक की रिपोर्ट आई निगेटिव, सभी मजदूरों को भेजने की हो रही व्यवस्था
सिम्स की पीआरओ डॉ. आरती पांडेय ने बुधवार कोबताया कि अगले दिन सुबह करीब 7 बजे रवि की मौत हो गई। लक्षण को देखते हुए और रिपोर्ट के इंतजार में उसके शव काे मॉच्यूरी में रखवा दिया गया। उसके परिजनों को सूचना दी गई। बताया कि पॉजिटिव आने पर अंतिम संस्कार के लिए शव नहीं मिलेगा। अगर रिपोर्ट निगेटिव आई तो सिम्स व्यवस्था करा सकता है। परिजनों ने बिलासपुर आने में असमर्थता जताई।

डाॅ. आरती पांडेय ने बताया- बाकी 7 मजदूरों की तबियत ठीक होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। पहल संस्था की मदद से रवि का 6 मई को अंतिम संस्कार किया गया है। सभी 8 मरीजों का कोविड-19 टेस्ट भी कराया था। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। रवि की मौत हार्ट अटैक से हुई है। प्रशासन बाकी मजदूरों को भेजने की व्यवस्था कर रहा है।



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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नागपुर से झारखंड पैदल जा रहे एक मजदूर की हार्ट अटैक से मौत हो गई। तबीयत खराब होने के कारण उसे सिम्स में भर्ती कराया गया था। परिजनों के नहीं आ सकने के कारण सिम्स ने ही अंतिम संस्कार कराया।




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56 हजार मजदूर लौटेंगे बिलासपुर, बहतराई स्टेडियम में होगा स्वास्थ्य जांच, इनके लिए 1066 क्वाॅरेंटाइन सेंटर बनाए गए

विभिन्न राज्यों में फंसे जिले के हजारों छत्तीसगढ़िया श्रमिकों के बिलासपुर पहुंचते साथ उनके स्वास्थ्य का परीक्षण कराने के लिए बहतराई स्टेडियम में व्यवस्था की जा रही है। 120 करोड़ की लागत से बने इस स्टेडियम में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने बेरिकेडिंग कराई जा रही है। श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए नगर निगम स्टाफ को स्वास्थ्य विभाग से समन्वय करने का जिम्मा दिया गया है। बता दें कि पूर्व में विभिन्न राज्यों में जिले के 72 हजार श्रमिकों के फंसे होने की खबर थी। श्रम विभाग ने पंजीयन के आधार पर आज बताया कि 56 हजार श्रमिक बाहर हैं, जिन्हें लाया जाएगा। संख्या इससे अधिक भी हो सकती है, परंतु प्रशासन को फिलहाल इतने ही लोगों को लाने के लिए बस, ट्रेन आदि की व्यवस्था करने कहा गया है।
शहर में 600 लोगों को रखेंगे
डिप्टी कमिश्नर खजांची कुम्हार ने बताया कि निगम के जोन कार्यालयों में 600 लोगों के नाम पते दर्ज कराए गए हैं, जो विभिन्न राज्यों में फंसे हैं। इन्हें वापस लाने के लिए ई पास तथा अन्य व्यवस्था शासन स्तर पर की जा रही है। इनके आने पर 13 सामुदायिक भवनों में 14 दिनों के लिए कोरेंटाइन किया जाएगा। जिन सेंटरों में ठहराने की व्यवस्था की जा रही है, उनमें मिनीमाता सांस्कृतिक भवन सकरी, अधिकारी कर्मचारी निवास कोटा रोड, यदुनंदन नगर सामुदायिक भवन, सिरगिट्टी सामुदायिक भवन, पुत्रीशाला सामुदायिक भवन तिलकनगर, सामुदायिक भवन जरहाभाठा, त्रिवेणी व्यापार विहार, रैन बसेरा व्यापार विहार, मनसुखलाल सोनी सामुदायिक भवन गोंड़पारा, शहीद विनोद चौबे सामुदायिक भवन, गुजराती समाज भवन टिकरापारा, शनि मंदिर सामुदायिक भवन राजकिशोर नगर शामिल है।

28 ट्रेनों से छत्तीसगढ़ आएंगे श्रमिक, इनमें 22 ट्रेनें आएंगी बिलासपुर

परिवहन रिपोर्टर | बिलासपुर
छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूरों को अलग-अलग राज्यों और शहरों से लाने के लिए छत्तीसगढ़ ने 28 ट्रेनों की मांग केंद्र सरकार से की है। ट्रेनों के संबंध में अभी कोई लिखित दस्तावेज जोनल हेड क्वार्टर तक नहीं पहुंचा है इसलिए ट्रेनें कब चलेंगी, कब आएंगी, कैसी व्यवस्था होगी, इसकी कोई तैयारी बिलासपुर में नहीं है।
छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूर दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, इलाहाबाद, हैदराबाद, विशाखापट्टनम, सूरत, अहमदाबाद, जयपुर एवं पटना सहित अन्य शहरों में फंसे हुए हैं। इनकी संख्या हजारों की तादात में है। इधर इस संबंध में कोई फैसला नहीं हो पाया है कि कहां से कितनी ट्रेनें चलाई जाएंगी। छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूरों की सूची भी तैयार हो रही है। उसके मुताबिक ही ट्रेनों के परिचालन की तिथि व स्थान तय हाेंगे। फिलहाल इस संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोनल मुख्यालय में कोई लिखित सूचना या कागज रेल मंत्रालय या बोर्ड से नहीं आया है। छत्तीसगढ़ राज्य के लिए ट्रेन चलने की सूचना रेलवे अफसरों को अवश्य है लेकिन कोई दस्तावेज नहीं होने से तैयारी भी नहीं की जा रही है कौन सी ट्रेन कहां से होकर गुजरेगीयह भी अभी तय नहीं है।
स्पेशल ट्रेनों से 36 हजार मजदूर आएंगे
मजदूरों के लिए चलाई जा रही स्पेशल ट्रेन में अधिकतम 1200 मजदूरों को भेजा जा रहा है इस हिसाब से अगर 28 ट्रेनें चलती हैं तो 36000 के लगभग मजदूर छत्तीसगढ़ आ सकेंगे।
कहां से कितनी ट्रेनें मांगी गई
जयपुर से रायपुर बिलासपुर 7 ट्रेनें
लखनऊ से रायपुर बिलासपुर तीन ट्रेन
कानपुर से रायपुर बिलासपुर दो ट्रेन
चेन्नई से रायपुर बिलासपुर एक ट्रेन
बेंगलुरु से रायपुर बिलासपुर एक ट्रेन
पुणे से रायपुर बिलासपुर एक ट्रेन

इलाहाबाद से बिलासपुर एक ट्रेन
दिल्ली से रायपुर बिलासपुर तीन ट्रेन
हैदराबाद सिकंदराबाद से रायपुर बिलासपुर तीन ट्रेन
विशाखापट्टनम से रायपुर एक ट्रेन
सूरत अहमदाबाद से रायपुर एक ट्रेन
कोलकाता से रायपुर एक ट्रेन
जयपुर से रायपुर एक ट्रेन
पटना से दुर्ग एक ट्रेन



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56 thousand laborers will return to Bilaspur, Bahtarai Stadium to have health checkup




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न्यू लोको कॉलोनी वालों को दिनभर में केवल 40 मिनट मिल रहा पानी, रेलकर्मी हो रहे परेशान

रेलवे की न्यू लोको कॉलोनी में रहने वाले रेल कर्मचारी भरी गर्मी में पानी को तरस रहे हैं जबकि इस वर्ष पेयजल संकट नहीं है। बावजूद इसके परेशान कर्मचारी अपनी व्यथा किसी से नहीं कह पा रहे। कार्रवाई की डर की वजह से लोग गोपनीय शिकायतें कर रहे हैं।
रेलवे लाइन की दूसरी तरफ रेल कर्मचारियों के लिए न्यू लोको कॉलोनी बनाई गई है। लगभग 500 मकानों वाली इस कॉलोनी में पानी सप्लाई के लिए टंकियां बनी हुई हैं। इन टंकियों के जरिए ही पानी की आपूर्ति की जाती है। इसको भी रेल प्रशासन के वाटर डिपार्टमेंट में अलग-अलग ग्रुपों में बांट रखा है। कहीं सुबह 6:00 बजे से 6:30 बजे तक पानी आता है तो कहीं 7:00 बजे से 7:30 बजे तक पानी सप्लाई की जाती है। यह व्यवस्था 12 महीने की है लेकिन गर्मी आते ही समस्या बढ़ जाती है इसलिए क्योंकि कूलर इत्यादि के लिए भी पानी की आवश्यकता कर्मचारियों को पड़ती है। कुछ दिनों पहले कर्मचारियों ने विभाग को शिकायत में कहा था कि कुछ लोग नल आते ही टुल्लू पंप चालू कर लेते हैं जिससे अन्य रेल कर्मचारियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है इस वजह से तकलीफ बढ़ रही है। इलेक्ट्रिकल विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पानी चालू होने से लेकर बंद होने तक लगभग 20 मिनट तक बिजली बंद करना शुरू कर दिया। पानी तो अभी भी 20 मिनट ही मिल रहा है लेकिन किसी के लिए यह पर्याप्त है तो किसी काे
पूरा नहीं पड़ रहा है।
बड़े परिवार वालों कोज्यादा तकलीफ
आमतौर पर रेल कर्मचारी के परिवार में चार या पांच ही सदस्य होते हैं लेकिन न्यू लोको कॉलोनी में कुछ कर्मचारियों के परिवार में 8 से 10 सदस्य भी हैं। उन परिवारों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह 20 मिनट और शाम को 20 मिनट ही पानी मिल पा रहा है जोकि पर्याप्त नहीं है।

पंप लगाकर कारऔर वाहन धोते हैं
कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ ऐसे भी लोग हैं जो नल चालू होते ही टुल्लू पंप चालू कर अपने वाहन धोते हैं। दरवाजों को धोते हैं और बगीचों में पानी डालने लगते हैं, इनकी वजह से सबसे ज्यादा समस्या है।
जरूरत पड़ी तो पानी सप्लाई का समय बढ़ाएंगे
"न्यू लोको कॉलोनी में पानी कम मिलने की जो शिकायत है उसकी जांच कराएंगे कि जितना पानी मिल रहा है उतना पर्याप्त है या नहीं। अगर आवश्यकता पड़ी तो पानी सप्लाई की टाइमिंग बढ़ाई जा सकती है। जहां तक सवाल बिजली बंद करने का है तो वह टुल्लू पंप से पानी खींचे जाने की वजह से किया जा रहा है।"
-पुलकित सिंघल, सीनियर डीसीएम बिलासपुर



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पहले रायपुर में हुई देरी, फिर बिलासपुर की प्रक्रिया, रात 3.30 बजे स्टूडेंट्स आ पाए घर

राजस्थान के कोटा से बिलासपुर संभाग के 772 स्टूडेंट्स 28 अप्रैल को रायपुर पहुंचे। वहां 7 दिन क्वारेंटाइन रहने के बाद उन्हें मंगलवार की रात अलग-अलग जिलों के लिए रवाना कर दिया गया। रवाना होने से पूर्व सभी स्टूडेंट्स से शपथ-पत्र भरवाया कि वे बाकी 7 दिन हाेम क्वारेंटाइन में रहेंगे। इसके बाद वे निकले और रात 12.30 बजे बिलासपुर के 167 स्टूडेंट्स जैन इंटरनेशनल स्कूल पहुंचे। यहां भी शपथ-पत्र भरवाया गया कि वे 14 दिन के क्वारेंटाइन पीरियड को पूरा करेंगे। इस प्रक्रिया को करते-करते रात 3.30 बज गए। कोटा, सीपत और तिफरा सहित दूर दराज के स्टूडेंट्स को लेने उनके माता-पिता परेशान होते रहे और पूरी रात प्रशासन की प्रक्रिया में चली गई। असल में रायपुर से स्टूडेंट्स को देर से भेजा गया, इसी कारण यहां वे रात 12.30 बजे पहुंचे और पूरी रात परेशान होना पड़ा। जिन पालकों के पास चारपहिया वाहन नहीं है वे अपने बच्चों को लेने बाइक से पहुंचे और ज्यादा सामान देखकर हैरान हो गए। कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी और प्रमोद नायक ने परेशान हो रहे बच्चों को घर तक पहुंचवाने में मदद की।



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First delay in Raipur, then process of Bilaspur, students could come home at 3.30 pm




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दो हाईवा से दीपका आए 40 मजदूरों को रात में झारखंड भेजा

कोयला परिवहन के काम मे लगे दो और वाहनों को मंगलवार की देर शाम सरईसिंगार चेकपोस्ट पर विशेष टास्क फोर्स की टीम ने पकड़ा और दोनों वाहन को जब्त कर लिया गया।
कोयला लोडिंग के लिए चलने वाले ट्रकों में भरकर मजदूरों को लाने का सिलसिला इसके बाद भी थमा नहीं है। बुधवार को फिर अलग-अलग ट्रकों से करीब 135 प्रवासी मजदूर दीपका क्षेत्र पहुंच गए। ये सभी मजदूर तेलंगाना से झारखंड जाने के लिए निकले हैं। प्रशासन उनको उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था में लगा है। मजदूरों के लगातार आवाजाही को देखते हुए खदान क्षेत्र व आसपास के मुख्य मार्गों पर प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। जिसके चलते विशेष टास्क फोर्स ने मंगलवार की देर शाम सरईसिंगार चेकपोस्ट के दौरान वाहन क्रमांक सीजी-13-एलए 4766 और ओडी 23 एफ 0425 से मजदूरों को अवैध रूप से हाइवा में भरकर लाया जा रहा था। दोनों वाहनों में 40 मज़दूर सवार थे। जिनमें 38 झारखंड, 1 ओडिशा और एक एमपी का मजदूर शामिल था। देर शाम इन मजदूरों के पकड़ में आने के बाद उनको झगरहा आईटी कालेज भेजा गया। जहां से उनको झारखंड के लिए रवाना कर दिया गया है।

बाहर से आए मजदूरों को किया जाएगा क्वारेंटाइन

अपने घर जाने की कोशिश में कोरबा तक पहुंच गए दूसरे राज्यों के मजदूरों को प्रशासन सावधानी के साथ उनके घरों के लिए रवाना करने के काम में जुटा है। वहीं ऐसे मजदूर जो जिले के हैं, और दूसरे राज्य व जिले से कोरबा पहुंच रहे हैं। उनको 14 दिनों तक क्वारेंटाइन में अलग से रहना होगा। इसके लिए भी प्रशासन की ओर से अपनी तैयारी की गई है। प्रशासन की ओर से जिले में अलग-अलग स्थानों पर क्वारेंटाइन सेंटर बनाए हैं, जिनमें रुकने के इंतजाम किए हैं।

पुलिस और स्वयंसेवियों ने मजदूरों को खिलाया खाना
बुधवार को रामागुंडम तेलंगाना से झारखंड जाने के लिए अलग-अलग ट्रकों से करीब 135 मजदूर दीपका पहुंचे थे। सीएसपी खोमन लाल सिन्हा के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी अविनाश सिंह ने पहले भूखे मजदूरों को खाने का सामान दिया। वही कुछ समाजसेवी विशाल अग्रवाल, कुश राठौर ने भी मजदूरों को फल, ड्राई फ्रूट व अन्य सामान दिए।



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40 workers from two highways who came to Deepka were sent to Jharkhand at night




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क्वारेंटाइन सेंटर के लिए 800 भवनों को देखा, 86 हुए फाइनल

मजदूरों को वापसी के बाद क्वारेंटाइन करने के लिए बड़ी संख्या में भवनों की जरूरत पड़ेगी। वैसे जिला प्रशासन ने विभिन्न शासकीय हॉस्टल, भवनों, बड़े शासकीय हाईस्कूल व हायर सेकंडरी सहित करीब 800 भवनों को चिह्नांकित किया है। पहले चरण में जहां व्यवस्था पूरी है ऐसे 86 भवनों को फाइनल कर लिया गया है।
एसडीएम चांपा बजरंग दुबे ने अनुविभाग के 26 ग्राम पंचायतों में क्वारेंटाइन सेंटर के लिए 77 भवनों का चयन किया गया है। चांपा एसडीएम के जारी आदेश के अनुसार क्वारेंटाइन किए गए श्रमिकों के भोजन, आवास, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्रामीण क्षेत्र के क्वारेंटाइन सेंटर के लिए बम्हनीनडीह के जनपद सीईओ कुबेर सिंह उरेटी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसी प्रकार सहायक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी बीईओ कमल बंजारे को दी गई है। क्वारेंटाइन सेंटर में भोजन व्यवस्था के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी अमित भारत को सौंपा गया है। सहायक बीईओ हिमांशु मिश्रा भोजन व्यवस्था में सहयोग करेंगे। क्वारेंटाइन सेंटर के स्थल प्रभारी संबंधित क्षेत्र के पटवारी और कोटवार होगें। मॉनिटरिंग के लिए तहसीलदार राम सजीवन शर्मा, नायब तहसीलदार गरिमा मनहर, जयंती देवांगन को क्लस्टर वार नोडल अधिकारी बनाया गया है।
ब्लाक में बनाए जाएंगे 160 क्वारेंटाइन सेंटर - देवरी-चांपा बम्हनीनडीह जनपद पंचायत अंतर्गत प्रवासी मजदूरों के लिए बना 61 क्वारेंटाइन सेंटर को चिह्नांकित किया गया है। जहां 3200 मजदूरों के लिए रहने व खाने की व्यवस्था की जाएगी। सीईओ केएस उरेती ने जनपद पंचायत के 60 ग्राम पंचायतों में 61 क्वारेंटाइन सेंटर बनाया है। इन 61 क्वारेंटाइन सेंटर में लगभग 3200 मजदूरों के रहने की व्यवस्था की गई है।

सक्ती में 118 क्वारेंटाइन सेंटर की व्यवस्था की गई

सक्ती में 118 सेंटर बनाए जा रहे है। एसडीएम सुभाष राज ने बताया स्थानीय सरपंच व सचिवों को स्थल का प्रभार दिया गया है। इसके अलावा क्लस्टर स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। बीईओ पीसी राठौर, एबीईओ ऋषि कवर, श्याम, अनिल नोरगे, स्कूल समन्वयक मदन मोहन जायसवाल, छोटेलाल राव, लेखपाल चौधरी, एमपी सिदार, केके देवांगन, जीके लाठिया, निखिल कश्यप और यशवंत राज सिंह मंडलेकर को क्लस्टर वार नोडल अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है।

मिनी स्टेडियम को बनाया पिकअप पाइंट

कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक ने लाॅकडाउन में फंसे हुए जिले के लोगों के वापस आने के पर जिला मुख्यालय जांजगीर के मिनी स्टेडियम पेंड्री भाठा को पिकअप पॉइंट बनाया है। पिकअप पॉइंट में बैरिकेडिंग व्यवस्था के लिए डीएफओ जेके उपाध्याय आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएंगे। इसी प्रकार सीएमएचओ डॉ.एसआर बंजारे मेडिकल टीम उपलब्ध कराएंगे । पीडब्ल्यूडी के ईई वायके गोपाल बैरिकेडिंग व्यवस्था करेंगे। सीएमओ मनोज सिंह पेयजल एवं टेंट की व्यवस्था करवाएंगें।



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सनबोरा नदी पर पुल तैयार, अब बहरासी से सनबोरा तक 20 करोड़ से बनेगी सड़क

राज्यमंत्री गुलाब कमरो ने भरतपुर सोनहत ब्लॉक में 54 करोड़ के विकासकार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया है। इसमें सनबोरा नदी पर 5 करोड़ 47 लाख से तैयार पुल का लोकार्पण किया। इसके साथ उन्होंने 20 करोड़ 18 लाख से तैयार होने वाले बहरासी से सनबोरा 32 किमी सड़क का भूमिपूजन किया।
सिरखोला में चांटी बैरियर से कुंवारपुर तक 15 करोड़ 20 लाख की 23 किलोमीटर सड़क का भूमिपूजन किया। इसके बाद भरतपुर से डोम्हरा अटल चौक तक 3 करोड़ 83 लाख की 10 किमी सड़क का भूमिपूजन किया। वहीं 5 करोड़ 30 लाख से रापा से बड़गांव कला 33.70 किमी बीटी रोड के नवीनीकरण के लिए भूमिपूजन किया। 2 करोड़ 54 लाख से मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करवा से मैनपुर तक तैयार होने वाली सड़क, 27 लाख का उप स्वास्थ्य केंद्र का भूमिपूजन किया। जनपद पंचायत भरतपुर में मनरेगा योजना से 35 ग्राम पंचायतों में 1 करोड़ 38 लाख से होने वाले 132 कार्यों का भूमिपूजन किया है।



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Bridge on Sanbora River ready, now road from Bahrasi to Sunbora will be built with 20 crores




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मनरेगा में 14 हजार 600 नए मजदूरों को जारी हुआ जॉब कार्ड

कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन के बीच जिले में मनरेगा का कार्य भी चल रहा है। राजनांदगांव जिला अन्य जिलों से मनरेगा के तहत काम दिलाने में नंबर एक पर है। जिले में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक 2 लाख 3 हजार 831 मजदूरों को मनरेगा अंतर्गत ग्रामीणों को अपने ही घर के आस-पास गांव के अंदर रोजगार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जिले में कुल 4 हज़ार 129 कार्य प्रगतिरत है। 11 हजार कार्य पूर्व से स्वीकृत है एवं कुल 772 पंचायतों में लगातार काम चल रहा है। वर्ष 2020 - 21 मे लॉकडॉउन के बावजूद भी लगभग 5 हजार से अधिक नवीन जॉब कार्ड बनाया गए हैं। इसके अंतर्गत लगभग 14,600 नवीन मजदूर रोजगार के लिएरजिस्टर्ड हुए हैं। राजनांदगांव जिले के 9 ब्लॉक जिसमें सबसे अधिक खैरागढ़ ब्लॉक आज 33,995 मजदूर, छुरिया ब्लॉक 32,946 मजदूर, राजनांदगांव ब्लॉक 28,639 मजदूर, अंबागढ़ चौकी ब्लॉक 19,372 मजदूर, डोंगरगढ़ ब्लॉक 21,165 मजदूर, मानपुर ब्लॉक 17,111 मजदूर, छुईखदान ब्लॉक 27,026 मजदूर, डोंगरगांव ब्लॉक 11,572 मजदूर, मोहला ब्लॉक 12,005 मजदूर को रोजगार प्रदान कर रहा है। जिला पंचायत सीईओ तनुजा सलाम ने बताया कि राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों का पालन करते हुए लगातार सोशल एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग, मास्क/गमछा का उपयोग, कार्यस्थल पर हाथ धुलवाने की व्यवस्था करने कहा है।



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Job card issued to 14 thousand 600 new laborers in MNREGA




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प्रदेश सरकार ने शराब दुकान खोलकर जनता की 40 दिन की तपस्या भंग कर दी: डॉ. रमन

लॉकडाउन के बीच शराब की बिक्री के विरोध में भाजपा की ओर से प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक डॉ रमन सिंह ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि देशभर में कोरोना का संक्रमण फैला हुआ है। ऐसे में लोग घरों तक सिमटे हुए हैं और प्रदेश सरकार शराब बिक्री कराकर संक्रमण को बढ़ावा देने का काम कर रही है। डॉ रमन ने कहा कि लॉक डाउन में 40 दिन से लोगों ने तपस्या की। लोग शासन-प्रशासन की बातें मानकर घर तक सीमित रहे पर शराब बिक्री ने जनता की तपस्या को भंग कर दिया। डॉ रमन ने कहा कि प्रदेश का कुल बजट 1 लाख 20 हजार करोड़ है और आबकारी का बजट 5 हजार 500 करोड़ है। अगर सरकार दुकान बंद भी रखती तो केवल 300 करोड़ रुपए का ही नुकसान होता। कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने चुनावी घोषणा पत्र में लिखा है कि प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी करेंगे तो फिर अब क्यों ऐसा नहीं कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के लिए राजस्व से बढ़कर कुछ नहीं है।
लॉक डाउन की धज्जियां उड़ा दी: आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने शराब दुकानों में लोगों की भीड़ लगवाकर लॉक डाउन के नियमों की धज्जियां उड़ाने का काम किया है, इसे बढ़ावा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के मंत्रियों को शराबबंदी के लिए दूसरे राज्यों में दौरा करने की जरूरत नहीं है, मंत्री केवल प्रदेश के शराब दुकानों के सामने 10 मिनट खड़ा होकर देख लें तो पता चल जाएगा कि स्थिति क्या है? प्रदेश सरकार के पास पैसों की कमी तो नहीं है फिर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में कोरोना जांच की व्यवस्था नहीं कर पाएं हैं। यह तो अच्छा हुआ के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन में प्रदेश में एम्स खुल गया। डॉ रमन ने हैरानी जताई कि मजदूर सड़क पर पैदल चलकर गांव पहंुच रहे हैं।



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पानी चाहिए तो डायल करें 07763-223757 या फिर 18002330008

जिले में ग्रीष्मकाल के दौरान संभावित पानी की किल्लत से निपटने एवं हैंडपंपों को निरंतर चालू रखने के लिए जिले एवं उपखंड स्तर पर पानी निगरानी कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इसमें नियुक्त अधिकारी और कर्मी शिकायत मिलने पर तुरंत पानी की समस्या दूर करेंगे। इस कंट्रोल रूम की सेवा 30 जून तक अथवा मानसून आने तक मिलेगी। इसके लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम का नंबर 07763-223757 और राज्य स्तरीय टोल फ्री नंबर 18002330008 जारी किया है।
पीएचई से मिली जानकारी के अनुसार जिला स्तर पर पेयजल निगरानी कंट्रोल रूम प्रभारी का दायित्व होगा कि प्रतिदिन शाम 5.30 बजे तक टेलीफोन एवं अन्य किसी माध्यम से प्राप्त खराब हैंडपंपों एवं पानी संबंधी शिकायतोें का पंजीयन कर उनके समस्याओं के निराकरण संबंधी प्रतिवेदन दर्ज करेंगे।

अधिकारियों के मोबाइल में भी कर सकते हैं शिकायत
कंट्रोल रूम में जिलास्तरीय कंट्रोल रूम के प्रभारी अनुरेखक रामपप्रसाद लिमजे मोबाइल नंबर 7610652310 को नियुक्त किया है। इसी तरह उपखंडस्तर जशपुर में सहायक अभियंता उपखंड जशपुर कमल प्रसाद कंवर 8519064845, जशपुर के लिए उप अभियंता सुरेन्द्र कुमार साय,8319644924 एवं मनोरा के लिए उपअभियंता उत्पल यादव 9340108565 की ड्यूटी लगाई है। इसी प्रकार उपखंड स्तर कुनकुरी के लिए सहायक अभियंता कुनकुरी एनकेएस महतो 9303823121, फरसाबहार ब्लाक के लिए एनकेएस महतो 9303823121, दुलदुला के लिए उप अभियंता बसंत कुमार एक्का 8770748912 एवं कुनकुरी के लिए उपअभियंता प्रमोद कुमार महतो 9479087270 की ड्यूटी लगाई गई है। पत्थलगांव ब्लाक में उप अभियंता संतोष कुमार नायक 9754199570 की ड्यूटी लगाई गई है।



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7200 टन एक्स्ट्रा प्रोडक्शन का टार्गेट, अब हर दिन 21, 600 टन की हो रही है सप्लाई

डेढ़ महीने से लॉकडाउन पीरियड के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के लिए बीएसपी प्रबंधन ने उत्पादन को घटाकर आधा कर दिया है। स्थिति सामान्य होता देख प्रबंधन भी अब सामान्य उत्पादन की तैयारी में जुट गया है। बंद मिलों में रिपेयर के काम को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं भविष्य में आयरन ओर की कमी न हो इसके लिए दल्ली राजहरा में तीसरी पाली में भी माइनिंग का काम शुरू कर दिया गया है। दल्लीराजहरा में दो पाली में माइनिंग होने से 14,400 टन आयरन ओर की सप्लाई बीएसपी को की जा रही थी। अब माइंस प्रबंधन को 7200 टन अतिरिक्त उत्पादन करना होगा।
लॉकडाउन पीरियड लागू होने के बाद से बीएसपी में उत्पादन को क्षमता से आधा कर दिया गया है। इसके कारण बीते डेढ़ महीने से प्लेट मिल, मर्चेंट मिल, वॉयर एंड राड मिल में उत्पादन बंद है। ब्लास्ट फर्नेस में भी सात नंबर को ब्लो डाउन कर दिया गया है। फिलहाल फर्नेस-1 और 8 ही उत्पादन में है।
लॉकडाउन में 5 लाख टन आयरन ओर बीएसपी में जमा
लॉकडाउन के दौरान बीएसपी में उत्पादन आधा किए जाने से आयरन ओर की डिमांड भी घट गई थी। इस दौरान दल्ली से 2 और राजहरा माइंस से दो रैक आयरन ओर बीएसपी को प्रतिदिन सप्लाई किया गया। खपत कम होने से बीएसपी में 5 लाख टन आयरन ओर जमा है। इनमें 4 लाख टन फाइंस और एक लाख टन लंप्स जमा है।
दल्लीराजहरा में दो पाली में हुई माइनिंग शुरू
दल्ली राजहरा में दो पाली में माइनिंग होने से 14 हजार 400 टन आयरन ओर की सप्लाई प्रतिदिन बीएसपी को की जा रही थी। तीसरी पाली में माइनिंग शुरू करने के साथ ही सीईओ ने दो अतिरिक्त रैक की सप्लाई करने का भी टार्गेट माइंस प्रबंधन को दे दिया है। दो अतिरिक्त रैक आयरन ओर का मतलब अब माइंस प्रबंधन को 7200 टन अतिरिक्त उत्पादन करना होगा। इस प्रकार 21600 टन का उत्पादक प्रतिदिन हो रहा है। लॉकडाउन को देखते हुए 7200 का अतिरिक्त टार्गेट लिया गया है।
अधिक उत्पादन के लिए आयरन ओर की डिमांड
प्रत्येक मिलों में उत्पादन पहले से अधिक लेने की स्थिति में आयरन ओर की डिमांड भी बढ़ जाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए बीते सप्ताह सीईओ अनिर्बान दासगुप्ता ने माइंस अफसरों की बैठक ली। जिसमें आयरन ओर की माइनिंग बढ़ाने के लिए तीसरी पाली में भी उत्पादन शुरू करने के निर्देश दिए थे। 4 मई से इसे अमल में लाया गया है। इसे लेकर प्लानिंग की जा रही है।
हर मिलों में उत्पादन पहले से अधिक करने का लक्ष्य
डेढ़ महीने से उत्पादन आधा से भी कम होने की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 में उत्पादन बढ़ाने की योजना पर ग्रहण लग गया है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद प्रबंधन की योजना उस बैकलॉग को क्लियर करने के लिए प्रत्येक मिलों में पहले से अधिक उत्पादन लेने की है। एसएमएस-2 और 3, प्लेट मिल, रेल मिल व यूआरएम में कुछ अपग्रेडेशन भी किया है।
ब्लास्ट फर्नेस में लंप्स की कमी का संकट होगा दूर
आयरन ओर का उत्पादन दो पाली में होने की वजह से लंप्स के उत्पादन में भी कमी आ गई थी। ब्लास्ट फर्नेस के लिए लंप्स की कमी का सामना भविष्य में प्रबंधन को करना पड़ सकता था। दल्ली राजहरा के सीजीएम तपन सूत्रधार ने सीईओ को बताया कि तीसरी पाली में उत्पादन बढ़ने से लंप्स का उत्पादन भी बढ़ जाएगा। मान्यता प्राप्त यूनियन एसकेएमएस के राजेंद्र बेहरा के मुताबिक माइंस बीएसपी प्रबंधन के टार्गेट को पूरा करने के लिए तैयार है। इसे लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है। हमारी तैयारी भी पूरी है।
राजहरा में इस प्रकार आयरन ओर निकालने का काम किया जा रहा है।



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7200 tonne extra production target, now 21, 600 ton is being supplied every day




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पहले 80 हजार तक आता था खर्च, अब 10 हजार में हो रही शादी

लॉकडाउन ने गरीब परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने में भी मदद कर दी है। कोरोना वायरस के कारण शासन-प्रशासन कम लोगों की मौजूदगी में शादी की अनुमति दे रही है। ऐसे में शादी के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची पर तो रोक लग ही गई है तो वहीं सामान्य खर्च पर भी 75 से 80% तक कटौती हो गई है।
एक गरीब परिवार में भी जहां सामान्य शादी में 70 से 80 हजार रुपए तक खर्च हो रहे थे। वहां अब 5 से 10 हजार में भी शादी हो रही है। बालोद क्षेत्र में ही 65 शादियों की अनुमति मिल चुकी है। जिसमें अब तक 15 शादी हो चुकी है। मई और जून में भी शादियां होनी है। बाहर से मेहमान ना बुला कर घर के ही सदस्य शादी की सभी रस्में निभा रहे हैं। तेल, हरदी, मंडप सजावट, चुलमाटी इन सभी रिवाजों को कम लोगों की मौजूदगी में ही पूरा किया जा रहा है।
निषाद परिवार में हुई महज 7000 रुपएमें शादी
बालोद ब्लॉक के ग्राम रेवती नवागांव में दरबारी राम निषाद की बेटी हीना की शादी हुई। पिता मछली पकड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण उन्हें बहुत कम खर्च करना पड़ा। मेहमान नहीं बुलाए थे। घर के ही सदस्यों के बीच शादी हुई। जहां हम पहले 70 से 80 हजार रुपए खर्च का अनुमान लगा रहे थे। वहां लॉकडाउन के कारण भीड़ नहीं होने से 7000 में ही शादी निपट गई। पड़कीभाट से बारात आई थी, लेकिन दूल्हा भी बाइक से अपने पिता सहित छह रिश्तेदारों के साथ ही आया था। एक ही दिन में शादी कराई गई। तेल माटी चुल माटी सभी रस्में एक ही दिन में हुई।
इस तरह होती थी शादी के नाम पर फिजूलखर्ची
डीजे पर 15 से 20 हजार, बफे सिस्टम पर 1 लाख, बैंड बाजा धुमाल पर 15 से 20 हजार, सामूहिक भोज 30 हजार, बारात बस व अन्य साधन 25 हजार, माइक, टेंट 20 हजार, ड्रोन कैमरा 60 हजार, सामान्य कैमरा 25 हजार, शादी कार्ड 10 से 15 हजार रुपए खर्च होते थे। अब ना डीजे लगवा रहे, ना बफे सिस्टम ना बैंड बाजा और ना सामूहिक भोज।
कार्ड भी नहीं छपवा रहे
कई लोग पहले शादी टाल चुके हैं, उस समय शादी कार्ड भी कई परिवार छपवा चुके थे। अब मेहमानों को बुलाना भी नहीं है इसलिए आयोजक शादी कार्ड भी नहीं छपा रहे हैं। इससे कार्ड का भी खर्च बच रहा है।



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जुगेरा में घर के ही सदस्य हल्दी रस्म निभाते हुए




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कोरिया में छेड़छाड़ का विरोध करने पर महिला की हत्या, कुछ दिन पहले ही जेल से छूट कर आया था आरोपी

कोरिया में छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक युवक ने महिला की हत्या का दी। इसके बाद फरार हो गया। आरोपी कुछ दिन पहले ही जेल से छूटकर आया था। इसके बाद से ही महिला को मारने के लिए घात लगाए हुए था। मौका मिलते ही उसने बच्चों के सामने ही उनकी मां को मार डाला। घटना सोनहत थाना क्षेत्र की है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, सोनहत के ग्राम मेंड्राकला निवासी ओम प्रकाश आए दिन गांव की ही सुनीता से छेड़छाड़ करता था। इस पर सुनीता ने पुलिस में शिकायत की तो उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। कुछ दिन पहले ही आेम प्रकाश जेल से छूटकर आया और तभी से सुनीता को धमकी दे रहा था। आरोपी ओम प्रकाश देर रात सुनीता के घर के बाहर झाड़ियों में घात लगाकर बैठ गया।


झाड़ियों में आरोपी को छिपे देख पति ने बुलाई पंचायत
इसी दौरान पड़ोस में जा रहे बच्चों की नजर पड़ी। झाड़ियों में जानवर होने की आशंका से उन्होंने परिजनों को सूचना दी। इस पर परिजनों ने टॉर्च से देखा तो आरोपी वहां से भाग निकला। इसके बाद सुनीता के पति ने सरपंच को घटना की जानकारी दी और पंचायत की बैठक बुलाई। इस दौरान आरोपी को भी बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आया। वहीं वार्ड 4 के पंच भी अनुपस्थित थे।


पंच को बुलाने के लिए जा रही सुनीता पर किया हमला
अनुपस्थित पंच का घर पास में होने के कारण उन्हें बुलाने के लिए सुनीता खुद ही चली गई। पंच के घर बच्चों ने बताया कि वे महुआ बीनने नदी के पास गए हैं। इस पर सुनते भी वहां चली गई, साथ में उसके दो बच्चे भी थे। इसी दौरान जंगल के पास आरोपी ओम प्रकाश ने सुनीता पर हमला कर दिया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात की सूचना मिलने पर पंच वहां पहुंचे, लेकिन आरोपी भाग चुका था।



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छत्तीसगढ़ के कोरिया में छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक युवक ने महिला की हत्या का दी। पहले भी आरोपी महिला से छेड़छाड़ के मामले में जेल गया था। वहां से छूटने के बाद वारदात को अंजाम दिया।




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75 फीसदी उद्योग चालू, 50% उत्पादन, सरकार से उम्मीद- अब फैक्ट्रियां चलाने में न आए बाधा

औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद 75 फीसदी उद्योग चालू हो गए हैं। अभी 50 फीसदी उत्पादन होने लगा है। उद्योग मुख्यधारा में लौट आए हैं और फैक्ट्री संचालक सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि अब संचालन में किसी तरह की बाधा न आए। यदि बाधा आएगी तो समस्या बढ़ेगी। फैक्ट्री संचालकों के लिए अभी कई तरह की मुश्किलें हैं जैसे वे अभी दूसरे राज्यों के बड़े शहरों में माल उतनी तेजी से नहीं भेज पा रहे हैं और वहां मांग भी कम है। वहीं दूसरे राज्यों में मजदूर लॉकडाउन की वजह से फंसे हैं। नहीं आ सके। हालांकि स्थानीय मजदूरों के लौटने और छत्तीसगढ़ के दूसरे जिलों के मजदूरों के धीरे-धीरे वापसी पर उन्होंने राहत की सांस ली है।
जिले में तीन औद्योगिक क्षेत्र हैं, सिरगिट्‌टी, तिफरा और सिलपहरी। यहां दाल मिल, राइस मिल, फेब्रीकेशन, मिनरल वाटर, मशीनों के पार्ट्स बनाने के साथ ही अन्य तरह की फैक्ट्रियां संचालित हैं। वहीं अगर जिले के छोटे व मध्यम उद्योगों को जोड़ दें तो करीब एक हजार उद्योग हैं जिन पर लॉकडाउन का सीधा असर पड़ा है। दैनिक भास्कर ने सिरगिट्‌टी, तिफरा और सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में जाकर उद्योगों का जायजा लिया और उद्योगपतियों से बात की। सिरगिट्‌टी बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, यहां स्थानीय मजदूर काम पर पिछले कुछ दिनों से लौट चुके हैं और फैक्ट्रियां शुरू हो चुकी है। फैक्ट्रियों की चिमनियों से धुआं उड़ता दिखा और मजदूर काम करते नजर आए। वहीं फैक्ट्रियों के बाहर खड़ी गाड़ियां माल लेकर भी आती नजर आईं और माल लेकर जाती भी। कच्चा माल जिले और बाहर के इलाकों से अनलोड किया जा रहा था। दुर्गा आयल मिल में भूसा लेकर आए मजदूरों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वे आने लगे हैं क्योंकि फैक्ट्री शुरू हो चुकी है।
इसी तरह मसाला, मिनरल वाटर, फेब्रीकेशन के उद्योग भी चालू हालत में नजर आए। कुछ दिनों पहले यहां छाई वीरानी अब काफी हद तक दूर हो चुकी है और वहां अच्छी चहल-पहल नजर आई। इसी तरह सिलपहरी और तिफरा के उद्योग भी पटरी पर लौट चुके हैं। वहां दिख रही चहल-पहल से इसका प्रमाण है। हालांकि वहां भी दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर अभी नहीं आ सके हैं क्योंकि वे लॉकडाउन में फंसे हैं। वे आने का प्रयास कर रहे हैं और उनके आने पर उत्पादन और बढ़ेगा। हालांकि बाहर से मांग बढ़ने पर ही उत्पादन अधिक करने की बात फैक्ट्री संचालक कह रहे हैं। एक फ्लाई एश ब्रिक्स में आधे मजदूर हैं लेकिन काम चालू हो चुका है। रेल नीर प्लांट में काम बंद क्योंकि ट्रेनें बंद होने से मांग ही नहीं है। रोजाना पांच हजार लीटर उत्पादन वाले इस प्लांट में लॉकडाउन लगने से ही काम बंद है। लेकिन मजदूरों की कमी की वजह से नहीं। मांग होने पर उत्पादन शुरू हो जाएगा।
मुंबई, पुणे, दिल्ली बंद होने की वजह से माल नहीं भेज पा रहे
पता चला कि यदि 100 ट्रक की जरूरत है तो 10 ट्रक ही माल भेजने के लिए मिल रहा है। उसकी वजह ये कि अभी वे जगह-जगह रोके जाने से परेशान हैं। मुंबई, पुणे, दिल्ली बंद होने की वजह से माल नहीं भेज पा रहे हैं। वहीं माल जा रहा है जहां के लिए ट्रांसपोर्टर तैयार होते हैं।
ऐसे समझिए उद्योगों के नुकसान को
छोटे से लेकर बड़े उद्योगों को लॉकडाउन की वजह से घाटा सहना पड़ा है। मजदूरों को पेमेंट देने के साथ ही बिजली का बिल भी देना पड़ रहा है। रोजाना होने वाली आय नहीं होना भी एक तरह से नुकसान ही है। छोटे उद्योगों को ज्यादा नुकसान हुआ है।
दो महीने का नुकसान साल भर के मुनाफे को खा जाएगा- केडिया
छत्तीसगढ़ लघु उद्योग संघ अध्यक्ष हरीश केडिया बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान दो माह का हुआ नुकसान इस वित्तीय वर्ष में होने वाले मुनाफे को खा जाएगा। उन्होंने शासन से आग्रह किया है कि अब उद्योगों को इसी तरह चलने दें। अब दी गई छूट को कम न किया जाए। यदि ऐसा हुआ तो किसी तरह जो मजदूर फैक्ट्रियों में काम पर लौटे हैं, एक बार फिर घर चले गए तो उन्हें लाना मुश्किल हो जाएगा। मजदूरों का डर काफी हद तक दूर हो चुका है। सप्ताह में दो दिन बंद करने जैसे आदेश से उन्हें परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी पर संपूर्ण नियंत्रण के बाद ही उद्योग पहले की तरह शत-प्रतिशत चल पाएंगे। सरकार को समझना होगा क्योंकि हम ही जीएसटी, आयकर के साथ ही अलग-अलग तरह के कर देते हैं।



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75% industry in progress, 50% production, expectation from government - no hindrance in running factories now




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प्रतिबंध के बावजूद बेच रहे थे कपड़ा व जूता, लगाया 50 हजार का जुर्माना

लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में नगर निगम भिलाई ने चंद्रा-मौर्या के पास स्थित विशाल मेगा मार्ट के खिलाफ कार्रवाई की है। विशाल मेगा मार्ट पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। निगम पीआरओ पीसी सार्वा ने बताया कि चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष गार्गी शंकर मिश्रा व अन्य व्यापारियों ने निगम आयुक्त व जोन आयुक्त से शिकायत की थी।
विशाल मेगा मार्ट में राशन के अलावा कपड़ा, गिफ्ट, व अन्य सामान बेच रहा था। जो लॉकडाउन नियमों का खुला उल्लंघन है। इससे पूर्व भी समय की पाबंदी को लेकर लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के कारण इस दुकान संचालक से 5000 रुपए जुर्माना वसूला जा चुका है। समझाइश भी दी गई थी फिर भी अतिरिक्त आय के लिए इस दुकान के संचालक ने धड़ल्ले से अपना व्यापार जारी रखा जिसकी शिकायत मिलने पर बिना देरी किए फौरन नगर पालिक निगम भिलाई की टीम दुकान पर पहुंच गई। कार्रवाई के दौरान जोन के सहायक राजस्व अधिकारी परमेश्वर चंद्राकर, विनोद चंद्राकर सहित निगम का अमला एवं पुलिस बल मौजूद रहे।
सील की मांग पर अड़े रहे
जिन व्यापारियों ने निगम में इसकी शिकायत की वो विशाल मेगा मार्ट को सील करने की मांग पर अड़े रहे। जवाहर मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष गुरमीत सिंह वाधवा और उपाध्यक्ष परवेज अशरफ ने बताया कि निगम ने सिर्फ दिखावे की कार्रवाई की है। सख्ती के तहत मार्ट को सील करना



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Selling cloth and shoes despite ban, imposed a fine of 50 thousand




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हटाए गए 90 श्रमिक निकालने वाले थे लॉकडाउन में पदयात्रा, प्रबंधन से चर्चा के बाद फैसला वापस

सेक्टर-9 अस्पताल में लॉड्री के नए ठेका को लेकर चल रहा विवाद ने गुरुवार को तूल पकड़ लिया। हटाए गए 90 श्रमिकों ने लॉकडाउन के दौरान सेक्टर-9 चौक से सीईओ से चर्चा के लिए इस्पात भवन पैदल यात्रा का निर्णय लिया। इसकी जानकारी जब बीएसपी प्रबंधन व जिला प्रशासन को मिली, तो अधिकारी श्रमिकों से चर्चा के लिए पहुंच गए। तय किया गया कि 8 मई को प्रशासन की मध्यस्थता में बैठक होगी, इसमें उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। इसके बाद श्रमिकों ने पदयात्रा का निर्णय वापस ले लिया।
श्रमिक नेता योगेश सोनी ने बताया कि जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में वर्षो से कार्यरत 90 श्रमिकों को काम से बैठा दिया गया है। 22 लॉड्री में कार्यरत श्रमिकों के साथ साथ 65 अटेंडेंट शामिल हैं। उनमें ऐसे महिलाएं व पुरुष शामिल है, जिन पर परिवार की सारी जिम्मेदारी है। अचानक काम से बैठा देने के कारण परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया था। प्रबन्धन के तरफ से किसी भी तरह से कोई जवाब नहीं मिलने से उनमें अनिश्चितता बनी हुई थी। इसके बाद श्रमिकों ने निर्णय किया कि नियम कानून का अनुपालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पैदल यात्रा निकाली जाए। सूचना प्रबंधन के तमाम जिम्मेदार अफसरों व प्रशासन को 5 मई को दी जा चुकी है।
श्रमिकों का ठेका एजेंसी पर आरोप: भिलाई प्रशिक्षु व कल्याण समिति को ठेका देने पर सवाल खड़ा करते हुए मजूदूरों ने आरोप लगाया कि अंतिम भुगतान किए बगैर ठेका कैसे दे दिया गया। वही श्रमिकों ने भिलाई प्रशिक्षु के खिलाफ महिलाओं से अभद्रता की शिकायत भी की थी।ठेका मिलते ही 10 से 12 वर्षो से सेक्टर 9 में सेवा दे रहे श्रमिकों की छटनी करने की बात से मजदूरों में आक्रोश बढ़ गया है।

आज बीएसपी व जिला प्रशासन के साथ बैठक
7 मई की सुबह जब बीएसपी प्रबंधन व जिला प्रशासन को मजदूरों के पदयात्रा के लिए एकत्रित होने की जानकारी मिली तो उनकी तलाश की गई। मिलने पर उन्हें समझाया गया। एडीएम गजेंद्र ठाकुर ने हिंदुस्तान इस्पात ठेका श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष जमीन अहमद व महासचिव योगेश सोनी से चर्चा कर बताया कि 8 मई को सुबह 10 बजे से भिलाई निवास में बैठक तय की गई है। बैठक में एडीएम गजेंद्र ठाकुर, बीएसपी प्रबंधन से ईडीपी एसके दुबे सहित श्रम विभाग के अधिकारी रहेंगे।



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90 workers removed were on foot in lockdown, after discussion with management, decision returned




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30 दिन में 5 हजार जरूरतमदों को खिलाया खाना

लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के साथ ही शहर में रहने वाले गरीब और बेसहारा लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में कई समाज सेवी संस्था, व्यापारी संगठन और दानवीरों ने मोर्चा संभाला। शहर में गायत्री परिवार है जो 30 दिनों से लगातार लोगों की मदद के लिए डटा हुआ है। परिवार से जुड़े सदस्य, अनुयायी महिला, बुजुर्ग हर रोज छूट के वक्त चक्रधरनगर के सिंधु भवन में इकट्ठा होते हैं। सब मिलकर 150 पैकेट्स भोजन बनाते हैं ताकि कम से कम कुछ जरूरतमंदों की मदद हो सके। महीनेभर में गायत्री परिवार लगभग 5 हजार लोगों को भोजन करा चुका है। भोजन बनाकर ये लोग पुलिस के जरिए बंटवाते हैं।
मानव सेवा परमो धर्म...यह शब्द जितना छोटा है, इसके अर्थ उतने ही व्यापक है। जीवन का वह दौर चल रहा है, जहां इंसान अपना सब कुछ छोड़कर बस घर पहुंचने की आस में लगा हुआ है। पेट की भूख से परेशान लोगों की मदद के लिए गायत्री परिवार देवदूत बनकर कार्य कर रहा है। कोरोना लॉकडाउन में लोगों की परेशानी देखकर गायत्री परिवार ने रोजाना 150 लोगों को भोजन कराने की फैसला किया। मानवसेवा योजना की शुरुआत 4 अप्रैल से हांडी चौक स्थित गायत्री शक्तिपीठ मंदिर से शुरू हुई। वहा 10 दिनों तक लगातार हर रोज गायत्री परिवार के लोग भोजन बना कर पुलिस को देते रहे।
फिर 14 अप्रैल के बाद कुछ कारणों से मंदिर समिति ने वहां मना कर दिया। इसके बाद भी इनके हौसले कम नहीं हुए। समाजसेवा की सच्ची भावना रखने वाले इन लोगों को योग वेदांता सेवा समिति का सहयोग मिला। जिन्होंने 18 अप्रैल से नि:शुल्क सिंधु भवन उपलब्ध करा दिया। इसके साथ टेंट के सामान सहित 4 से 5 सदस्यों को भी इस काम के लिए लगा दिया। अब यह स्थिति है जहां रोजाना सुबह पटेलपाली से सब्जियां आती हैं। इसके बाद 8 बजे से 12 बजे तक चार घंटे में महिलाएं, पुरुष, मिलकर भोजन तैयार करते है। बंशीधर पटेल ने बताया कि हम 17 मई के बाद यदि फिर से लॉकडाउन लगाता है तो उसके आगे भी अपना कार्य जारी रखेंगे।



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Food fed to 5 thousand needy people in 30 days




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हर रोज 2 हजार 500 मास्क और 200 पेटी सैनिटाइजर की खपत

कोरोना के संक्रमण के डर से शुरुआत में लोगों ने जरूरत से ज्यादा मास्क और सैनिटाइजर खरीदे। 18 मार्च से 10 अप्रैल तक जिले में हर रोज औसतन 10 हजार मास्क और 500 पेटी सैनिटाइजर बिके। लोगों में डर था कि ये सामान मिलने बंद ना हो जाएं, लोगों के डर का फायदा शुरुआत में व्यवसायियों ने उठाया भी, मास्क और सैनिटाइजर दोगुना कीमत पर बेचे गए। अब बिक्री 25-30 फीसदी रह गई है। खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग के साथ ही व्यापारी मानते हैं कि अब सप्लाई सही हो गई है, लोगों को आसानी से मिल रहा है इसलिए कोई जरूरत से ज्यादा नहीं खरीद रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर रोजाना खपत की जानकारी मेडिकल होल सेलरों से ले रहे हैं। एक दिन में अब ढाई हजार मास्क और 200 पेटी सैनिटाइजर की खपत है। होलसेलरों से लेकर रिटेलर तक सभी के पास अब मास्क और सैनिटाइजर के पर्याप्त स्टॉक है। छत्तीसगढ़ में हैंड सैनिटाइजर और मास्क बनाने की अनुमति राज्य शासन द्वारा मिलने के बाद इनकी किल्लत पूरी तरह समाप्त हो गई है। 15 से 20 मार्च तक बाजार से ये दोनों उत्पाद गायब हो गए। बाजार में सिंगल यूज सर्जिकल मास्क की कीमत 3 से बढ़कर 30 रुपए तक पहुंच गई। शासन ने इसे आवश्यक वस्तु घोषित करते हुए सभी कलेक्टरों को कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन और ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने कार्रवाई शुरू की तब कहीं जाकर बाजार में बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण हुआ।
अब होलसेलर कर रहे काम
शुरुआत में इसकी सप्लाई सिर्फ सर्जिकल मेडिसिन के व्यवसायी करते थे, लेकिन बाजार में मांग बढ़ने के बाद दूसरे दवा के थोक विक्रेता भी इस काम से जुड़ गए। जिले में करीब 480 रिटेलर और 70 होलसेलर हैं। इसमें 14 बड़े होलसेलर सैनिटाइजर और मास्क का कारोबार बड़े पैमाने पर कर रहे हैं।

बाजार में मांग घटी है
सर्जिकल मेडिसिन के होलसेलर और ड्रग एसोसिएशन के सचिव असीम अग्रवाल बताते हैं कि मास्क और सैनिटाइजर की सप्लाई अब सतत बनी हुई है। 7 सर्जिकल होलसेलर शुरुआत में एक दिन में 10 हजार तक मास्क और 500 पेटी सैनिटाइजर की सप्लाई करते थे, अब इनकी मांग बाजार में बिल्कुल नहीं है।



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Consumption of 2 thousand 500 masks and 200 abdominal sanitizers everyday




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6 साल के शोध के बाद किसानों को दिए बीज, 2.5 एकड़ में 200 क्विंटल तक पैदावार, सामान्य से ज्यादा गुणकारी भी

अखिल भारतीय मसाला अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत रायगढ़ सेंटर में सन् 2013-14 से सीजी हल्दी-2 पर शोध किया जा रहा है। शोधकर्ताओं को अब जाकर पूरी सफलता मिली है।
जब राज्य उप समिति ने इसे किसानों को लगाने के लिए अनुमोदित कर दिया है। नोटिफिकेशन के लिए केंद्र उप समिति के पास इसे भेजा गया है। परीक्षण कर रहे जानकारों ने बताया कि एक हेक्टेयर में 180-200 क्विंटल हल्दी पैदा हो जाएगी। औसतन एक किलो सूखी हल्दी तैयार करने पर 220 ग्राम निकलेगा। हार्टिकल्चर सहित कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों को बीज दिए जा रहे हैं।

ऐसे देते हैं प्रशिक्षण

शोधकर्ता डॉ. एके सिंह और डॉ. श्रीकांत सावरगावकर ने बताया कि हल्दी की कई प्रकार के बीजों को लेकर प्रारंभिक आकलन ट्रायल पर तीन साल तक देखा जाता है। इसमें बीमारी, उत्पादन, कीट समस्या कैसी है। यहां 20 डिसमिल में टेस्टिंग कर 15-18 क्विंटल उत्पादन किया गया। खासकर जो उत्तम पैदावार होती है। उस पर विशेष ध्यान दिया जाता, फिर देश के अन्य अनुसंधान केंद्रों में 3 साल के लिए हर प्रदेश के बीज एक दूसरे को भेजे जाते है। इससे उस बीज की प्रमाणिकता का पता चलता किस किस राज्य में इसका उत्पादन हो जाएगा। इसके बाद सारी जानकारी केंद्रीय बीज उप समिति और राज्य बीज उप समिति को दी जाती है, जो इसे अनुमोदित करती है।

हल्दी की खासियत- हल्दी में फिंगर गाठ सीधी होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है। कीड़े लगने और बीमारी की आशंका कम है। धब्बा की दो बीमारियों कोलेटोट्राइकम और टेफरिना लिफब्लाच से पत्तियों को नुकसान पहुंचता है। इसमें करक्यूमिन (पीला) 4.1 है। नार्थ ईस्ट के कुछ जिलों में 5-6 तक होते हैं। आवश्यक तेल 6.3 %, ओलियो रेजिन 11.54 % की अच्छी है।

धनिया देश में पहले स्थान पर रहा - इससे पहले पिछली बार सीजी चंद्रहासिनी धनिया-2 के शोध काफी सफल रहा। सेन्ट्रल उप समिति ने देशभर के अनुसंधान केंद्रों में इसके अच्छे नतीजे को देखते हुए पहले स्थान पर रखा। जिले में धरमजयगढ़ सहित अन्य जगहों पर इसका उत्पादन भी देखने को मिल रहा है। जिसमें एक हेक्टेयर में 13-14 कुंटल पैदावार होती है।



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Seeds given to farmers after 6 years of research, yield up to 200 quintals on 2.5 acres, also more efficient than normal




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नशीली दवा की 2250 टैबलेट के साथ पकड़ा गया युवक, बोला; इसे मेडिकल स्टोर में बेचने जा रहा हूं

लॉकडाउन काल में जिले में शराब की अवैध बिक्री धड़ल्ले से चलती रही। अब शराब दुकानें खोल दी गई हैं तो नशीली दवा का अवैध कारोबार फिर शुरू होने लगा है। गुरुवार को घरघोड़ा पुलिस ने अलप्राजोलम टेबलेट (चिंतामुक्ति या तनाव दूर करने की दवा जिससे नींद आती है) बेचने जा रहे युवक को पकड़ लिया। छानबीन के बाद पुलिस ने युवक को मादक पादर्थ की तस्करी करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
घरघोड़ा थाना प्रभारी कृष्णकांत सिंह ने बताया कि गुरुवार सुबह 9.30 बजे उन्हें सूचना मिली की ग्राम भेंगारी मेन रोड अंडा फैक्ट्री के सामने एक व्यक्ति नशीली टेबलेट लेकर बिक्री करने जा रहा है। जानकारी मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए युवक के पास मौजूद थैले की तलाशी ली गई। जिसमें अल्प्राजोलम टेबलेट 0.5एमजी की 2250 नशीली टेबलेट बरामद हुई। पकड़े गए युवक ने अपना नाम बलराम गुप्ता पिता कन्हाई निवासी नवापारा टेंडा थाना घरघोड़ा बताया। पूछताछ में उसने बताया कि वह मेडिकल स्टोर पर दवा बिक्री करने जा रहा था। पुलिस नशीली दवा बिक्री के मामले में उन लोगों का पता लगा रही है। जो लोग नशीली दवाइयों की बेरोक टोक बिक्री कर रही है।
थाना प्रभारी ने बताया कि पकड़े गए युवक के खिलाफ धारा 21(सी) एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर रिमांड पर लेकर जेल भेजा गया है।



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Young man caught with 2250 tablets of drugs, said; Going to sell it in the medical store




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निगम के 2000 कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन

कोरोनावायरस फिर शहर वासियों को बचाने से शहरवासियों को बचाने तथा जरूरतमंदों को राशन सामग्री पहुंचाने के मामले में नगर निगम कर्मचारियों ने बेहतर बेहतर सेवा की। विषम परिस्थितियों में स्वयं की चिंता ना कर स्वयं की चिंता ना कर शहर की सफाई में योगदान देने वाले सफाई कर्मियों का सम्मान किया गया। ऐसे नगर निगम के करीब 2000 कर्मचारियों को अप्रैल महीने का वेतन अर्थ संकट के कारण नहीं मिल पाया है। बता दें कि नगर निगम नगर निगम के 1150 नियमित तथा 950 दैनिक और टास्क कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर प्रति माह 5 करोड रुपए खर्च किया जाता है।। लाॅकडाउन के दौरान निगम टैक्स की वसूली नहीं हो पाने के कारण कर्मचारियों को वेतन देने के लिए निगम के पास धनराशि का अभाव है। नगर निगम के आयुक्त प्रभाकर पांडे ने बताया कि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए यदि पैसे की कमी होगी तो शासन की सहायता ली जाएगी। गत माह शासन के निर्देश पर अधोसंरचना मत की राशि से कर्मचारियों को वेतन भुगतान किया गया था। निगम टैक्स की वसूली की जा रही है। आवश्यकतानुसार वेतन भुगतान के लिए शासन से सहयोग लिया जाएगा।



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नया जिला अस्पताल 100 बेड का बनेगा, डाॅक्टरों व स्टाफ सहित 133 पद मंजूर

मेडिकल काॅलेज के अलावा अब जिले के लिए एक नया जिला अस्पताल भी बनेगा। इसके लिए शासन ने विशेषज्ञ डाॅक्टर सहित 133 पद स्वीकृत कर दिए हैं। इसके बजट के लिए डीडीओ एकाउंट भी शासन से जारी हो गया है।
अभी पुराने जिला अस्पताल के मेडिकल काॅलेज में समायोजित होने से यह कार्यरूप में नहीं रह गया था। यहां के पदस्थ डाॅक्टर व अन्य कर्मचारी भी मेडिकल काॅलेज का स्टाफ बन गए थे। इससे इनका वेतन भी मेडिकल कॉलेज के डीडीओ से निकलता है। नया जिला अस्पताल बनने से अब इसी के डीडीओ से इनका वेतन आने वाले समय में निकलेगा। नया जिला अस्पताल 100 बेड का होगा।
हालांकि नए जिला अस्पताल के पूरी तरह अस्तित्व में आने तक इसके डाॅक्टर व अन्य स्टाफ मेडिकल काॅलेज में अटैच रहेंगे, ताकि यहां का सेटअप में प्रावधान न हो। मेडिकल काॅलेज अस्पताल के एमएस सह सीएमएचओ डाॅ. पीएस सिसोदिया ने बताया कि जिला अस्पताल के लिए शासन का आदेश आ गया है।
10 स्पेशलिस्ट और 11 मेडिकल ऑफिसर होंगे

नए जिला अस्पताल में मेडिसिन, सर्जरी, शिशु रोग, गाइनिक, ईएनटी, निश्चेतना में विशेषज्ञ डाॅक्टर के दो-दो पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा 11 मेडिकल ऑफिसर व 45 नर्सिंग स्टाफ सहित 133 कर्मचारी रहेंगे। आने वाले समय में इसका ओपीडी शुरू होगा। संभव है एमसीएच में इसका अलग से सेटअप तैयार कर दिया जाए।

शासन ने की थी घोषणा लेकिन पद अब हुए मंजूर

राज्य शासन ने अंबिकापुर में नया जिला अस्पताल के लिए घोषणा की थी, लेकिन पद अब तक स्वीकृत नहीं हुए थे। इसको लेकर एमएस सह सीएमएचओ डाॅ. पीएस सिसोदिया द्वारा शासन को पत्र लिखा गया था। फिर 4 मई को डीडीओ के लिए प्रस्ताव भेजा गया। इसके बाद शासन से पद भी स्वीकृत कर डीडीओ एकाउंट चालू कर दिया गया। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।



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50 साल में मई का पहला हफ्ता इस बार सबसे कम तपा

लॉकडाउन का मौसम पर खास असर दिख रहा है। इस बार अप्रैल पिछले पचास सालों में सबसे कम गर्म रहा। वहीं मई के पहले हफ्ते के अधिकतम तापमान का रिकार्ड भी पिछले सभी मई महीनों से न्यूनतम पर है।
पिछले 50 सालों में मई के पहले 7 दिनों का अधिकतम तापमान औसत 39.0 डिग्री सेल्सियस रहा है। जबकि इस बार तक 33.5 है। अमूमन मई के पहले सप्ताह में दिन का तापमान 40 डिग्री पार हो जाता था। इस बार तीन मई को पारा 35.9 तक चढ़ा था फिर घट गया था। न्यूनतम तापमान के लिहाज से भी देखें तो मई के पहले 7 दिनों का औसत न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि इस वर्ष अभी तक यह 21.0 है। इस तरह से अभी तक मई का महीना भी अन्य वर्षों की तुलना में कम तपा है। अंबिकापुर मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी एएम भट्ट के अनुसार जब तापमान में आई कमी का कारण ढूंढने का प्रयास करता हूं तो इसमें निश्चित ही लॉकडाउन का प्रभाव दिखता है। वहीं लगातार एक निश्चित अंतराल पर सुदर मेडिटेरियन सी, रेड सी आदि प्रशांत के सागरों से आने वाले पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता के कारण भी पारा नियंत्रित रहा है। आंधी, ओलावृष्टि और वर्षा के कारण वातावरण में नमी की उपस्थिति ने वायु को गर्म होने से रोके रखा है। आने वाले 3- 4 दिनों में भी तापमान बढ़ने के आसार नहीं हैं। अभी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मध्य और उत्तर भारत पर द्रोणिका और चक्रवात के कारण मौसमी घटनाओं की आशंका बनी हुई है।
50 सालों में इस बार अप्रैल भी था सबसे ठंडा
पिछले सालों की तुलना में मार्च, अप्रैल और मई के अब तक के दिनों की तुलना करें तो लॉकडाउन का खासा असर दिखा है। अप्रैल का अधिकतम तापमान पिछले 50 सालों में सबसे ठंडा था।

मौसम का लॉकडाउन: भट्‌ट
मौसम विज्ञानियों के अनुसार डेढ़ माह से लगातार लॉकडाउन के कारण नियंत्रित वाहनों के आवागमन, ठप्प पड़े चिमनियों के मुहाने और सड़कों पर मानव पदचाप में आई न्यूनता के कारण वायु मंडल में स्थानांतरित होने वाले प्रदूषक कणों में कमी से पर्यावरण का शोधन हुआ है, जिसे मनुष्यों के साथ-साथ अन्य जीव और वनस्पति भी महसूस कर रहे हैं। वास्तव में यांत्रिक साधनों के प्रयोग से जो दूषित और रासायनिक कण वातावरण में घुलते हैं वे ही एरोसोल पाॅर्टिकल कहलाते हैं। ये दूषित कण हवा में तैरते रहते हैं और वायु मंडल के ग्रीन हाउस प्रणाली को बल देते हैं।



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First week of May in 50 years, this time the lowest temperature




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दूसरे राज्यों में काम करने गए 30355 मजदूर फंसे

बेमेतरा जिले से दूसरे राज्यों में मजदूरी करने 30355 मजदूर गए हुए हैं जो लॉकडाउन के कारण फंसे हैं। जिला पंचायत सीईओ रीता यादव के मुताबिक ये आंकड़े जिला प्रशासन द्वारा शासन को भेजा गया है। इसमें मुख्य रूप से जिले के करीब 15 हजार मजदूर महाराष्ट्र के पुणे शहर में फंसे हैं।
महाराष्ट्र में कोरोना महामारी फैली हुई है। एहतियात के तौर पर महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश के लखनऊ से आने वाले मजदूरों के ठहरने के लिए जिला प्रशासन ने अलग से व्यवस्था बनाई है। शासन द्वारा ऐसे मजदूरों को घर वापसी की अनुमति दी गई है जो धीरे-धीरे अपने गांव पहुंचने लगे हंै।
राज्य शासन को स्थानीय प्रशासन द्वारा मजदूरों की जानकारी भेज दी गई है। मजदूरों को क्वारेंटाइन सेंटर में रखने के लिए ग्राम पंचायत, सामुदायिक भवन व स्कूल में रखने की व्यवस्था की गई है। जहां 14 दिन तक क्वारेंटाइन में रखा जाएगा। व्यवस्था बनाने को लेकर जिला प्रशासन द्वारा पंचायत भवन, स्कूल की साफ-सफाई कर सैनिटाइज करने कहा गया है।
सचिव, पुलिस व पंचायत पदाधिकारी करेंगे मजदूरों की निगरानी: जिला पंचायत सीईओ रीता यादव ने बताया कि बेमेतरा जिले से 30355 मजदूर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने गए है। जिसकी जानकारी राज्य सरकार को भेजी गई है। इसमें करीब 15000 मजदूर महाराष्ट्र के पुणे शहर में है। मजदूरों के लौटने पर उन्हें ग्राम पंचायत, सामुदायिक भवन में 14 दिन तक क्वारेंटाइन पर रखा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे मजदूरों का स्वास्थ्य जांच किया जाएगा। मजदूरों की निगरानी रखने सचिव, पुलिस बल के साथ कोटवार और पंचायत प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ताकि कोई भी व्यक्ति क्वारेंटाइन सेंटर से बिना अनुमति के बाहर ना निकल सके।

इधर गांव में रह रहे लोग संक्रमण की आशंका से डरे
महाराष्ट्र में कोरोना महामारी के फैलने व मजदूरों के लौटने से गांवों के लोग दहशत में है। इसके साथ ही सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीण मजदूरों को क्वारेंटाइन सेंटर से बाहर नहीं निकलने की मांग कर रहे हैं। ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। शहरी क्षेत्र में क्वारेंटाइन सेंटर में एक साथ बड़ी संख्या में मजदूरों को ठहराने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होने के कारण प्रशासन फिलहाल गांव गांव में सरकारी भवनों को क्वारेंटाइन सेंटर बनाने व स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर व्यवस्था बनाई गई है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवा के अलावा रहने की समुचित सुविधाएं मिल सके।



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निजी स्कूलों में आरटीई सीटों के लिए आवेदन 30 तक

निजी स्कूलों में आरक्षित शिक्षा का अधिकार (आरटीई) की सीटों के लिए आवेदन 30 मई तक स्वीकार किए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया फिर शुरू हो चुकी है। सीटों के आबंटन के लिए जून के पहले सप्ताह में लॉटरी होने की संभावना है।
आरटीई के दायरे में आने वाले राज्यभर के निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले के लिए आवेदन की प्रक्रिया मार्च से शुरू हुई। शुरुआत में आवेदन की संख्या अच्छी रही। लेकिन लॉकडाउन की वजह से धीरे-धीरे यह कम हो गई। राज्य के 6480 निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार से 81452 सीटें आरक्षित है। इनके लिए 60678 आवेदन मिले हैं। यानी जितनी सीटें हैं उतने भी आवेदन विभाग को नहीं मिले हैं। रायपुर व कुछ अन्य जिलों को छोड़ दिया जाए तो कई जगह सीटों की तुलना में आरटीई आवेदन कम मिले हैं। कुछ दिन पहले आवेदन की प्रक्रिया को शिक्षा विभाग ने स्थगित किया था। एक बार फिर फार्म स्वीकार किए जा रहे हैं। 30 मई तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग के अफसरों ने बताया कि सरकारी स्कूलों में बने नोडल सेंटर की मदद से भी आरटीई के लिए आवेदन भरे जाते थे। स्कूल अभी बंद है इसलिए आवेदन में पैरेंट्स को परेशानी हो रही है। इसके अलावा साइबर कैफे भी बंद है, इसकी वजह से भी आवेदन में कमी आई है।
गौरतलब है कि ऑनलाइन पोर्टल eduportal.cg.nic.in/rte के माध्यम फार्म भरे जा सकते हैं। आवेदन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, पहचान प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र, गरीबी रेखा से नीचे प्रमाण, सरकारी अस्पताल से प्रमाण पत्र, चाइल्ड वेलफेयर समिति की सूची में नाम जरूरी है।
सिर्फ रायपुर में ही सीट से ज्यादा आवेदन
रायपुर के निजी स्कूलों में आरटीई की 8678 सीटें हैं। इनकी तुलना में आवेदन की संख्या कुछ ज्यादा है। जबकि दूसरे अन्य जिलों में सीटों के आवेदन कम मिले हैं। जैसे बिलासपुर में 10578 सीट है। इसके लिए 5169 आवेदन मिले हैं। राजनांदगांव में 4558 सीटों के लिए 3611 आवेदन मिले हैं। जांजगीर चांपा में 6734 सीटों के लिए शिक्षा विभाग को 4796 फार्म मिले हैं। इसके अलावा कई अन्य जिले हैं जहां सीटों से आवेदन कम प्राप्त हुए हैं।
उम्र के अनुसार क्लास का होगा चयन
शिक्षा के अधिकार के तहत प्राइवेट स्कूलों में आरक्षित सीटों के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। उम्र के अनुसार क्लास का चयन होगा। उसके अनुसार ही सीटों का आबंटन होगा। शिक्षा विभाग के अफसरों ने बताया कि निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली में प्रवेश होगा। 3 से 4 वर्ष तक की उम्र के लिए नर्सरी। 4 से 5 साल के लिए केजी-1 और 5 से साढ़े छह साल तक की उम्र वाले के बच्चों का प्रवेश कक्षा पहली में होगा।



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2085 लोग अब तक ट्रेस हुए सैंपल सिर्फ 799 का ही ले पाए

कोरोना वायरस के बीच स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार की देर शाम तक 2085 लोगों को ट्रेस किया लेकिन सैंपल लेने की कोई रुचि विभाग में नहीं है। अभी तक सिर्फ एक तिहाई यानी 799 लाेगाें के सैंपल ही लिए जा चुके हैं। इनमें 741 लाेगाें की रिपाेर्ट मिली है जिनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी निगेटिव पाए गए। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने 58 लोगों के सैंपल लिए। वहीं 1580 लोगों का पता लगाया गया जिन्होंने घरों में अपनी 28 दिन की क्वॉरेंटाइन अवधि को पूरा कर लिया है। इसके बावजूद भी इन सभी से घर में रहने के लिए कहा गया है। सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन के अनुसार बिलासपुर में कोराेना को लेकर स्थिति पूरी तरह ठीक है और पिछले 1 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोरोना को लेकर कोई नया मरीज सामने नहीं आया है।



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पिछले साल 48, इस वर्ष सिर्फ 47 दिन निर्माण, 2021 में भी बहतराई स्टेडियम पूरा होना मुश्किल

सरकारी दुर्दशा से जूझ रहा बहतराई स्टेडियम 12 साल बाद भी अधूरा है। 2019 और 2020 में जिस गति से निर्माण हुआ अगर निर्माण की गति यही रही तो स्टेडियम 2021 में भी पूरा होना मुश्किल है। पीडब्ल्यूडी के जानकार खुद इस बात को मान रहे हैं। वर्ष 2019 में सिर्फ 48 दिन निर्माण कार्य चला और फिर बंद हो गया। इसी तरह 2020 में सिर्फ 47 दिन निर्माण कार्य चला और अब 18 मार्च से बंद है। इस वर्ष तो लॉकडाउन में निर्माण नहीं करा पाने का बहाना अफसरों ने बता दिया। पिछले वर्ष गर्मी और फिर बारिश में निर्माण नहीं करा पाने का बहाना बताकर बच गए थे। लेकिन दैनिक भास्कर ने पीडब्ल्यूडी के जानकारों से पूछा कि जिस गति से निर्माण चल रहा है, इस हिसाब से स्टेडियम पूरा कम बनेगा? जानकारों ने कहा कि इस वर्ष तो पूरा नहीं होगा। अगर काम की रफ्तार नहीं बढ़ी तो 2021 में भी बहतराई स्टेडियम पूरा होने की संभावना नहीं है। 2008 से बिलासपुर और प्रदेश के खिलाड़ी स्टेडियम के पूरे होने की आस लेकर बैठे हैं लेकिन उनका इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। वर्ष 2018 में 8 महीने निर्माण चला और बारिश के कारण चार महीने बंद रहा। इस आठ महीनों में हॉकी स्टेडियम बनकर तैयार हो गया था लेकिन उसमें भी गैलरी और फ्लड लाइट नहीं लग पई। इसके अलावा इंडोर और आउटडोर में कुछ छोटे काम हुए।
2019 में इंडोर में एसी और हॉकी में लगा था गोल पोस्ट
बीते वर्ष 2019 में 31 मार्च से निर्माण कार्य शुरू हुआ और फिर 10 मई को पूरी तरह बंद हो गया। इन 48 दिनों में आउटडोर स्टेडियम में डामरीकरण का काम हो पाया था। इंडोर में एसी का काम पूरा हुआ। फायर फाइटिंग और एकास्टिंग का काम पूरा हो पाया। हॉकी मैदान में गोल पोस्ट लगाया गया था। इसके अलावा अन्य छोटे काम हुए।
2018 में हॉकी मैदान बनाया गया
वर्ष 2018 में शुरू से निर्माण कार्य चला और बीच में चार महीन ले बारिश में बंद रहा। इन आठ महीनों में हॉकी स्टेडियम पूरा बनकर तैयार हुआ लेकिन गोल पोस्ट लगाया और फिर इसे निकालना पड़ा। फिर 2019 में इसे व्यवस्थित तरीके से लगाया गया। इसी वर्ष इंडोर में कुछ छोटे मोटे काम हो पाए। लेकिन आउटडोर में कोई काम नहीं हुआ।
इस वर्ष सिर्फ सिंथेटिक का काम हो पाया
2020 में 1 फरवरी से आउटडोर में एथलेटिक ट्रैक पर सिंथेटिक गाेंद बिछाने का काम शुरू हुआ और 18 मार्च तक यह काम पूरा हो पाया। इसके बाद लॉकडाउन की घोषणा हो गई और निर्माण पूरी तरह बंद हो गया। दिल्ली से आए एक्सपर्ट की टीम ने ट्रैक पर सिंथेटिक बिछाया। अभी ट्रैक पर मार्किंग का काम बचा है तो दिल्ली की टीम ही करेगी। जानकारों ने बताया कि यह काम इस वर्ष पूरा होना मुश्किल है।
पैसों का इंतजार, मिलते ही जल्द होगा निर्माण
पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एके मंधाना स्टेडियम कब पूरा होगा यह बताने से पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तो लॉकडाउन में निर्माण रुका है। ठेकेदार का भुगतान नहीं हाेने के कारण कुछ काम रुके हैं। स्टीमेंट रिवाइज हुआ है, जिसकी स्वीकृति अभी तक शासन से नहीं मिली है। जब हमारे पास पैसे नहीं है तो निर्माण कैसे होगा। शासन की स्वीकृति हमारे हाथ में नहीं है। रह गई बात स्टेडियम की तो जो काम बचे हैं उन्हें जल्द किया जाएगा। स्टेडियम पूरा होने की निर्धारित निर्धारित तिथि इसलिए नहीं बता पा रहा हूं कि कुछ काम शासन स्तर के हैं जिन्हें पूरा होने में समय लगता है।



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Construction last year 48, just 47 days this year, completion of Bahtarai Stadium in 2021 is difficult




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रिकवरी 0.37% बढ़ी पर शक्कर उत्पादन 40% घटा, सीएम ने प्रबंधन से मांगे जवाब

जिले के एकमात्र शक्कर कारखाना करकाभाट में इस सीजन पेराई सत्र खत्म होने के बाद भी आय-व्यय कितना हुआ है, इसको लेकर बैठक नहीं हो पाई है। अफसर तर्क दे रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण अभी हिसाब नहीं कर पाए हैं। जबकि राज्य शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कारखाना घाटे में चल रहा है इसलिए प्रबंधन से जवाब मांगा गया है। खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संज्ञान लेकर दो सप्ताह में जवाब देने कहा है, ताकि वास्तविकता जान सकें।
पिछले साल की तुलना में इस सीजन रिकवरी 0.37% बढ़ा है पर शक्कर उत्पादन 40% कम हुआ है। लिहाजा नुकसान तय है। महाप्रबंधक पीतांबर ठाकुर कह रहे हैं कि फायदा नहीं होगा लेकिन घाटा भी कम होगा। फिलहाल शक्कर कारखाना 48 करोड़ 41 लाख 99 हजार रुपए के घाटे में चल रहा है। जिसकी पुष्टि खुद कारखाना महाप्रबंधक व संचालक बोर्ड अध्यक्ष कर रहे हैं। जबकि वर्ष 2009 में कारखाना तैयार होने में ही 50 करोड़ रुपए की लागत आई थी। अब नए सिरे से जवाब प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं।

1 किलो शक्कर बनाने में खर्च 37 रु., बेच रहे 31 में
कारखाना प्रबंधन के अनुसार एक किलो शक्कर बनाने में 37 रुपए खर्च हो रहा है। जिसमें गन्ना से लेकर कर्मचारियों के मजदूरी लागत शामिल है, जबकि एक किलो शक्कर 31 रुपए या इससे कम में बिक रहा है यानि आय और व्यय में ही 6 रुपए का अंतर है। यह इसलिए हो रहा है कि क्योंकि रिकवरी प्रतिशत 10 के नीचे ही है।
पांच महीने लगातार पहुंचे गन्ना तब दूर होगी समस्या
कारखाना में लगातार पांच माह तक पेराई के लिए 3500 हेक्टेयर यानि दो लाख मीट्रिक टन गन्ने की जरूरत है। लेकिन 5 जिले से गन्ना मंगाने के बाद भी यह कोटा पूरा नहीं हो पाता। बालोद से 1703.02 हेक्टेयर रकबे में लगा गन्ना कारखाना पहुंचता है। यहां 1803.02 हेक्टेयर में गन्ना लगाने रकबा तय है।
इस बार गन्ने की कमी के कारण उत्पादन कम
कारखाना में 48 करोड़ रुपए से ज्यादा घाटा ही है। कारखाना महाप्रबंधक पीतांबर ठाकुर ने कहा कि शासन ने जवाब मांगा है, देंगे। इस बार गन्ने की कमी के कारण उत्पादन कम हुआ है, इसलिए फायदा नहीं होगा हालांकि नुकसान भी कम होगा। अभी आय-व्यय का आकलन नहीं किए हैं।
गन्ना के बजाय धान को ज्यादा महत्व दे रहे किसान
जिले में सवा लाख किसान हैं। जिसमें एक लाख 11 हजार किसान धान की खेती करते हैं। कुछ ही किसान धान के अलावा शौक के लिए गन्ना लगाते हैं। किसान नेता छगन देशमुख, चंद्रेश हिरवानी ने कहा कि गन्ने का सही दाम मिले तो हालात सुधर सकते हैं। गन्ना किसानों की कमी हो रही है।
अफसरों से मांगेंगे जवाब: संचालक मंडल बोर्ड अध्यक्ष बल्दू राम साहू ने कहा कि अफसरों से जवाब मांगेगे कि इस साल कारखाना घाटे में रहा या घाटे में, अब तक बैठक नहीं हो पाई है। इसलिए मुझे जानकारी नहीं है। वैसे शासन ने जवाब मांगा है। इसी आधार पर सब तय होगा।
यह 6 सवालों का जवाब देगा प्रबंधन
1. कारखानों का शक्कर उत्पादन, लागत शक्कर के विक्रय मूल्य से हमेशा अधिक रहा है, उत्पादन लागत अधिक होने के क्या कारण हैं?
2. उत्पादन लागत कम करने के लिए प्रबंध संचालकों ने क्या कार्रवाई की है?
3. कारखानों में कर्मचारियों व श्रमिकों की संख्या आवश्यकता से अधिक नियुक्ति क्यों की गई है? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
4. शक्कर कारखानों में प्रबंध संचालकों ने स्थापना व्यय कम करने के लिए क्या क्या प्रयास किए हैं?
5. शक्कर कारखाने के प्रबंधन ने भारत सरकार से विक्रय के लिए प्राप्त आवंटन कोटे का विक्रय निर्धारित समय सीमा में की है या नहीं? यदि नहीं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
6. सहकारी शक्कर कारखाना द्वारा आवंटित निर्यात कोटे का शक्कर विक्रय निर्धारित समयावधि में की गई है या नहीं? यदि नहीं तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाए। सहकारी शक्कर कारखानों का वैधानिक अंकेक्षण पूरा किया गया है या नहीं? यदि नहीं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? सहकारी शक्कर कारखानों के वित्तीय हानि को दूर करने के उपायों पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।
ऐसे समझें- रिकवरी और उत्पादन को
कारखाना संचालक मंडल के अनुसार पिछले साल 83 हजार 200 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल 52 हजार 740 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ है। पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत उत्पादन कम हुआ है। वहीं पिछले साल की अपेक्षा इस बार रिकवरी प्रतिशत 0.37 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले साल रिकवरी 9.12 प्रतिशत तो इस बार 9.49 प्रतिशत रहा।



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90 पक्षकारों ने लिया ई-अपाइंटमेंट, 45 ही पहुंच पाए कार्यालय, 43 की हुई रजिस्ट्री

सैंतालीस दिनों बाद जिले के उपपंजीयक कार्यालय शुरू हुए। रजिस्ट्री कराने के लिए आइंटमेंट अनिवार्य होने के कारण 90 लोगों ने ई-अपाइंटमेंट के लिए आवेदन किया था, लेकिन रजिस्ट्री कराने केवल 45 लोग ही पहुंचे। सरकार को इससे पहले ही दिन 16 लाख 69 हजार 930 रुपए राजस्व प्राप्त हुए।
पिछला वित्तीय वर्ष मार्च माह समाप्त होने के अंतिम दिनों में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण देश भर में लॉकडाउन हो गया। वैसे मार्च के अंतिम दिनों में ही रजिस्ट्री अधिक होती है, लेकिन सभी कार्यालय बंद होने के कारण 20 मार्च के बाद से कहीं रजिस्ट्री नहीं हो सकी। इसके बाद 45वें दिन उप पंजीयक कार्यालय खोलने का आदेश हुआ। 4 मई से कार्यालय खुलने थे, लेकिन उप पंजीयक कार्यालयों को भी अ, ब और स श्रेणी में विभाजित कर उनके खुलने के लिए अलग अलग दिन निर्धारित किए गए। अ वर्ग के उप पंजीयक कार्यालय रोज खोले जा रहे हैं वहीं ब वर्ग के लिए दो दिन बुधवार और शुक्रवार निर्धारित किया गया है तथा स वर्ग के उप पंजीयक कार्यालय में केवल एक दिन बुधवार को ही रजिस्ट्री होगी।
अपाइंटमेंट लेकर एक मिनट भी लेट पहुंचने पर नहीं हो सकेगी रजिस्ट्री
जमीन की खरीदी बिक्री के लिए ई आइंटमेंट अनिवार्य किया गया है। विक्रेता को संपूर्ण दस्तावेज के साथ पंजीयक कार्यालय में उनके लिए निर्धारित समय से कम से कम दस मिनट पहले पहुंचना होगा। ताकि उनके दस्तावेजों की जांच की जा सके। इसे ऐसे समझें यदि किसी व्यक्ति को 12 बजे का समय मिला है तो उसे 11:50 बजे तक हर हाल में उपपंजीयक के सामने दस्तावेजों सहित उपस्थित होना पड़ेगा। क्योंकि दस्तावेजों की जांच पहले उप पंजीयक करेंगे, फिर उन पेपर्स की जांच के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा उसकी स्कैनिंग की जाएगी। इसके बाद फिर रजिस्ट्री का प्रोसेस शुरू होगा, यदि नियत समय पर नहीं पहुंचे तो आइंटमेंट का वह समय स्वयं ही कैंसिल हो जाएगा।
जिले के 7 कार्यालयों में हुई रजिस्ट्री, ये आज भी खुलेंगे
जिले में कुल नौ उप पंजीयक कार्यालय हैं। इनमें से सात जांजगीर, चांपा, अकलतरा, सक्ती, पामगढ़, जैजैपुर और नवागढ़ को रजिस्ट्री की संख्या के आधार पर ब वर्ग में रखा गया है। ये सभी रजिस्ट्रार कार्यालय सप्ताह में दो दिन यानि बुधवार और शुक्रवार को खुलेंगे। वहीं मालखरौदा और डभरा को स वर्ग में रखा गया है। इन दोनों कार्यालयों में केवल बुधवार को ही रजिस्ट्री होगी।
कहां कितनी रजिस्ट्री हुई पहले दिन
तहसील ईअपाइंटमेंट उपस्थित रजिस्ट्री राजस्व
जांजगीर 18 05 05 4,30,440
सक्ती 12 07 07 1, 67, 085
चांपा 02 02 02 1, 06, 280
डभरा 08 06 06 3, 27, 410
पामगढ़ 08 04 04 77,490
मालखरौदा 01 0 0 0
जैजैपुर 19 09 07 1,69,730
नवागढ़ 17 08 08 2,75, 800
अकलतरा 05 04 04 1, 15, 695
डेटा स्त्रोत: जिला पंजीयक कार्यालय
एक-एक कर तीन को ही प्रवेश की अनुमति
जांजगीर के उप पंजीयक अमित शुक्ला ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सरकार के गाइडलाइन के अनुसार सेनिटाइजेशन की पूरी व्यवस्था की गई है। फिजिकल डिस्टेंसिंग के लिए रस्सी भी लगाई गई है। अधिक लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। पहले विक्रेता को बुलाया जाता है फिर क्रमश: क्रेता व एक गवाह को ही बारी बारी से प्रवेश की अनुमति है।
लेना होगा ई अपाइंटमेंट, आरोग्य सेतु एप भी जरूरी, तभी हो सकेगी कार्यालय में एंट्री
जिला पंजीयक बीएस नायक ने बताया रजिस्ट्री कराने वाले पक्षकार को विभाग के पोर्टल https://epanjeeyan.cg.gov.in/IGRPortalWeb में जाकर ई आइंटमेंट लेना होगा। कार्यालय में प्रवेश करने वालों केलिए यह भी अनिवार्य है कि वे अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड रखें ताकि उनके स्वास्थ्य की जानकारी हो सके।



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जिले में लौटे 147,00 मजदूरों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं

दूसरे राज्यों से लौट रहे मजदूरों से कोराेना संक्रमण के खतरे के बीच राहत वाली खबर सामने आई है। जिले में अब तक लौटे 14 हजार 700 मजदूरों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं पाया गया है। इन मजदूरों को किसी तरह के सर्दी, खांसी या बुखार की भी शिकायत नहीं है। वहीं अब तक 9 हजार से अधिक लोगों ने 28 दिन का क्वारेंटाइन पीरियड भी पूरा कर लिया है। इनमें मजदूरों के अलावा ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो दूसरे राज्यों से जिले में लौटे हैं।
जिले में रोजाना बड़ी संख्या में मजदूरों की आमद जारी है। आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में 21 हजार से अधिक मजदूरों की इंट्री हो चुकी है। इन मजदूरों से संक्रमण के खतरे की आशंका भी बनी हुई है। लेकिन अब तक जिले में ऐसी स्थिति निर्मित नहीं हुई है। सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि दूसरे राज्यों से पहुंच रहे मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच लगातार जारी है। अब तक 14,700 मजदूरों की जांच की जा चुकी है। शेष मजदूरों की जांच भी जारी है। पंचायत लेवल में ही स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात है, शिकायत मिलने पर जांच कर रहे हैं।
अतिसंवेदनशील क्षेत्र को निरंतर सैनिटाइज करने कहा
राजनांदगांव जिला बागनदी बॉर्डर से लगा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 6 आवागमन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। जिले में महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों के साथ ही अन्य राज्य के मजदूर भी अपने राज्यों को जाने के लिए निरंतर आने लगे। उनका आश्रय स्थल रैनबसेरा बनाया गया। कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य रैनबसेरा जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस अतिसंवेदनशील क्षेत्र को निरंतर सैनिटाइज करने के लिए निर्देश दे रहे हैं। यहां स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जा रहा है।
गांव के भीतर एंट्री पर रोक, स्कूलों में क्वारेंटाइन किए
जिले में रोजाना मजदूरों की आमद जारी है। प्रशासनिक अमले ने अब तक 14 से अधिक मजदूरों की जांच तो कर ली है। लेकिन आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और दूसरे हिस्सों से आने वाले मजदूरों की संख्या 21 हजार के पार पहुंच गई हैं। इनकी जांच भी पंचायतों में जारी होने का दावा किया जा रहा है, सभी की निगरानी भी हो रही है। लेकिन जब तक इन मजदूरों की जांच की रिपोर्ट और स्वास्थ्य की स्थिति की पुष्टि नहीं हो जाती, संशय रहेगा। स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल यूनिट को अब तक किसी भी पंचायत से मजदूरों के सेहत बिगड़ने या रैपिड टेस्ट की स्थिति के लिए कॉल नहीं मिला है।
क्वारेंटाइन टाइम पूरा होते ही मिली राहत
मजदूरों सहित दूसरे राज्यों से लौटे लोगों को तत्काल क्वारेंटाइन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक अब तक ऐसे 9 हजार लोगों ने अपना 28 दिन का क्वारेंटाइन पीरियड पूरा कर लिया है। इन 28 दिनों में 9 हजार लोगों में किसी तरह की स्वास्थ्यगत कोई शिकायत सामने नहीं आई है। इससे भी स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली हैं। वर्तमान में जो क्वारेंटाइन सेंटर में मौजूद हैं, वहां भी सतत निगरानी जारी है, लेकिन अब तक किसी की सेहत नहीं बिगड़ी है। स्वास्थ्य अमला इन पर नजर रखे है।
गांव जाने की खुशी कहा अब जान में जान आई
हैदराबाद से आए श्रमिक गोवर्धन एवं उनकी पत्नी संतोषी की बातों से खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि हमर अपन गांव जाए के अब्बड़ खुशी लगथे। वहां सरकार मदद कर रही थी लेकिन परेशान होने लगे थे। कल वे विचारपुर रवाना होंगे। हैदराबाद से आए श्रमिक देवराज कोशले ने कहा कि अब जब वापस छत्तीसगढ़ आ गए हैं, तब जान में जान आई है। जैसे ही जानकारी मिली कि लॉकडाउन में वापस घर जा सकते हैं, पत्नी दृष्टि कोशले एवं अपनी नन्ही बच्ची नीतू कोशले को लेकर निकल पड़े। उन्होंने यहां की व्यवस्था को बेहतर बताया।

आप भी रहें अलर्ट
लापरवाही जारी जो बढ़ा सकती है दिक्कतें
मनमानी: गांवों में मजदूरों काे स्कूल या भवनों में क्वारेंटाइन किया गया है। लेकिन कई जगहों पर मजदूरों की मनमानी भी जारी है। क्वारेंटाइन सेंटर से बाहर निकल कर गांव में घूम रहे हैं। इसकी शिकायत भी पुलिस व प्रशासन तक पहुंच रही है। ऐसे मामले में एफआईआर तक हो चुकी है। ऐसी हरकतें संक्रमण का खतरा बढ़ा रही है।
अनदेखी: ग्रीन जोन के चलते बाजार में राहत दी गई है। लेकिन लोगों की भीड़ अब संक्रमण के खतरे की अनदेखी कर रही है। बाजार से लेकर सभी व्यावसायिक हिस्से में सामान्य दिनों की तरह भीड़ जुट रही है। पुलिस की समझाइश के बाद भी लोग बेवजह घरों से बाहर आ रहे हैं।
सूचना दें: शहर सहित जिले के कई हिस्सों में लोग दूसरे राज्यों से लौटने के बाद भी प्रशासन को सूचना नहीं दे रहे हैं। ऐसी कई शिकायतें हाल ही में सामने आ चुकी है।



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147,00 laborers returned to the district with no signs of corona




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भिलाई तीन में 350 लीटर केरोसीन से भरा टैंकर जब्त

भिलाई-3 पुलिस ने गुरुवार को केरोसीन से भरा टैंकर जब्त किया है। टैंकर में करीब 350 लीटर पीडीएस केरोसीन होने की संभावना हैं। शंका है कि टैंकर के जरिए मिट्टी तेज की कालाबाजारी की जा रही थी। पुलिस को टैंकर लावारिश हालत में क्षेत्र में खड़ा मिला है।
पुलिस टैंकर के चालक और मालिक की तलाश कर रही है। टीआई संजीव मिश्रा के मुताबिक कोवित्रम इंजीनियरिंग वर्क के सामने टैंकर के खड़े होने की सूचना मिली थी। इंजीनियरिंग वर्कस में ट्रक की बॉडी बनाने का काम होता है। टीम पहुंची तो वहां पर ना मालिक मिला और न ड्राइवर का पता चला।
रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, 11 की जब्ती
दुर्ग | शहर में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी शुरू हो गई है। यह सिलेंडर कहां से और कैसे पहुंच रहे हैं, फिलहाल इसका खुलासा नहीं हो पाया है। खाद्य विभाग ने केलाबाड़ी क्षेत्र से करीब 11 नग सिलेंडर जब्त किया है। मामले में आरोपी जेठूराम साहू के विरुद्ध घरेलू सिलेंडरों का अवैध भंडारण एवं परिवहन के मामले में द्रवित पेट्रोलियम गैस प्रदाय एवं वितरण अधिनियम आदेश 2000 की धारा (3)(4)(6) व (7) के तहत कार्रवाई की। खाद्य नियंत्रक सीपी दीपांकर ने बताया कि मामले में आगे की कार्यवाई जारी है।



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सरकारी आदेश के खिलाफ प्राइवेट स्कूल संचालक पहुंचे हाईकोर्ट, कहा- ट्यूशन फीस लेने की मिले अनुमति 

छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों के फीस लेने पर लगाई गई रोक के खिलाफ प्रबंधकों ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया है कि उन्हें ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी जाए। इसको लेकर बिलासपुर के 22 प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों के संगठन ने हाईकोर्ट से राहत की मांग की है। याचिका अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव के माध्यम से प्रस्तुत की गई है।


प्राइवेट स्कूल के संचालकों के संगठन बिलासपुर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने संचालक लोक शिक्षण की ओर से जारी आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में संचालक ने कहा है कि निजी स्कूल लाॅकडाउन अवधि में स्कूल फीस स्थगित रखें। साथ ही आदेश दिया है कि संस्थान के सभी शिक्षक और कर्मचारियों को वेतन देना सुनिश्चित करें। संचालक ने शाला प्रबंधकों को अभिभावकों से फीस नहीं मांगने का आदेश दिया है।


इन आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत की गई है। याचिका में बताया गया है कि निजी स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हैं। उनकी तरफ से संचालक को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया है। इसमें जो अभिभावक सक्षम हैं उनसे ट्यूशन फीस लेने की अनुमति देने की भी मांग की गई है। अगर वे फीस नहीं ले पाएंगे तो कर्मचारियों और शिक्षकों का वेतन कहां से देंगे।



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कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में छत्तीसगढ़ के सभी प्राइवेट स्कूलों में फीस लेने पर रोक लगा दी गई है। इसको लेकर अब बिलासपुर के प्राइवेट स्कूलों के संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।




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दोपहर बाद छाए काले बादल तो तापमान 50 घटा

शुक्रवार की दोपहर तक सूर्य लोगों को जमकर तपाया फिर शाम 4 बजे अचानक आसमान में बादल छा गए और देखते ही देखते मौसम बदल गया और नमी युक्त तेज हवा चलने लगी। इससे पारा 5 डिग्री घटकर 33 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे में क्षेत्र में बारिश होने और तेज हवा चलने का अनुमान है।
शहर में शुक्रवार को दोपहर तक तेज धूप खिली थी, लेकिन उसके बाद अचानक आसमान में काले बादल छाने लगे। गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने लगी। हवा के साथ नमी और बारिश के छींटों से शाम का मौसम खुशनुमा बना रहा। दोपहर 2 बजे दिन का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा, मौसम बदलने के बाद यह शाम चार बजे 35 और छह बजे 33 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। चार घंटे के अंतराल में तापमान में 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 38 और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री रिकार्ड किया गया। देर शाम को जिले के कुछ हिस्सों में एक दो बार बारिश भी हुई।
मौसम विभाग ने एक दिन पहले ही उत्तर छत्तीसगढ़ के जशपुर, जांजगीर, बिलासपुर, रायगढ़ समेत अधिकांश हिस्सों में अगले चार दिनों का मौसम भी जारी करदिया है, ताकि जिले के रहवासी बदलते मौसम से सतर्क और सुरक्षित हो सके।
उत्तर छग में बंगाल से आ रही नमीयुक्त हवा
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार एक टर्फ उत्तर पश्चिम मध्य प्रदेश से दक्षिणी कर्नाटक तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है। छत्तीसगढ़ में बंगाल की खाड़ी से बहुत अधिक मात्रा में नमी आ रही है। इसके प्रभाव से शनिवार और रविवार को रायगढ़ जशपुर समेत उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ मध्यम वर्षा हो सकती है।



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Black clouds prevailed in the afternoon, the temperature decreased by 50




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सेल में 10000 अप्रेंटिसशिप भर्ती की ऑनलाइन प्रक्रिया हुई शुरू

बीएसपी सहित सेल की सभी इकाइयों में 10000 अप्रेंटिसशिप भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदकों को नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (एनएटीएस) के वेबसाइट में आवेदन की औपचारिकता पूरी करनी होगी। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने 29 अप्रैल को डायरेक्टोरेट आफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (डीपीई) को पत्र लिखकर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों में वर्तमान मैनपावर क्षमता का 10 से 15% अप्रेंटिसशिप भर्ती के लिए कहा है। जिसके मुताबिक, सेल में करीब 10000 अप्रेंटिस की भर्ती की जानी है। अप्रेंटिसशिप करने वालों को शैक्षणिक योग्यता के मुताबिक 5 से 9000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।



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3 करोड़ रु. बिल वसूलने 200 को बीएसपी ने थमाया नोटिस

बीएसपी के नगर सेवाएं प्रशासन की बिजली विभाग ने 3 करोड़ से अधिक बकाया बिजली बिल वसूलने के लिए इनकम टैक्स, बीएसएफ, पुलिस प्रशासन सहित 200 उपभोक्ताओं को नोटिस जारी किया है। इन्हें बकाया बिजली बिल का भुगतान करने 15 दिनों का समय दिया है। इस अवधि में भुगतान नहीं करने की स्थिति में बीएसपी प्रबंधन ने बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी है।
बिजली विभाग ने ऐसे करीब 400 उपभोक्ताओं की सूची तैयार की है, जिन्होंने वर्षों से बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है। इनमें इनकम टैक्स विभाग (9 लाख), बीएसएफ ( साड़ी 5 लाख) और पुलिस प्रशासन (7 लाख) जैसे उपभोक्ता शामिल हैं।

नोटिस देकर ली जा रही है रिसिप्ट, चेतावनी भी दी
बिजली विभाग पूर्व में बकायादारों को नोटिस तो जारी करता था लेकिन रिसीव कॉपी नहीं लेता था। इस बार विभाग ने इस प्रैक्टिस को बदलते हुए नोटिस थमाने के साथ ही रिसिप्ट भी ले रहा है। नोटिस में भुगतान के लिए 15 दिनों का समय दिया जा रहा है। कनेक्शन काटने की भी चेतावनी दी है।
दोबारा लाइन जोड़ने पर भी वसूली जाएगी पेनाल्टी
बिजली विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करने पर लाइन तो काटी जाएगी, इसके बाद भुगतान करने पर दोबारा लाइन जोड़ने के लिए भारी भरकम जुर्माना वसूला जाएगा।



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गरीबों के चावल में हेराफेरी, कई लोगों को 40 किलो तक कम मिला चावल, महिलाओं ने की है शिकायत

उचित मूल्य दुकानों से गरीबों को मुफ्त में बांटे जा रहे राशन में हेराफेरी शुरू हो गई है। अप्रैल और मई का राशन एक साथ पिछले महीने बांटा गया था। बाद में प्रति परिवार 5 किलो कोटा बढ़ा दिया गया। मई में जून के राशन के साथ अप्रैल और मई का बढ़ा राशन एक साथ वितरण किया जाना है। कई दुकानदार लोगों को पूरा राशन नहीं दे रहे हैं। अग्रसेन वार्ड के बरेजपारा के लोगों ने खाद्य विभाग में शिकायत की है। आयशा को 65 किलो चावल दिया गया है, जबकि उसे एक क्विंटल 10 किलो मिलना था। शबाना परवीन को 1 क्विंटल 10 किलो की जगह 65 किलो ही दिया है। इसी तरह से कई परिवारों को कम राशन दिया गया है।

अफसरों ने जांच कर कार्रवाई करने के लिए कहा है

वार्ड के लोगों की शिकायत पर नगर निगम में मेयर इन कौंसिल के सदस्य शफी अहमद ने मामले की शिकायत फूड ऑफिसर से की है। अहमद ने कहा कि जांच कर कार्रवाई करने को कहा गया है। सरकार कोरोना संकट में गरीबों को राहत दे रही है और इसमें गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह की हैं शिकायतें
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत आ रही है। जिले में दो लाख से अधिक परिवारों को उचित मूल्य दुकानों से राशन दिया जाता है। कोरोना संकट में गरीबों को मुफ्त में राशन दिया जा रहा है।

जांच के लिए पहुंचे अधिकारी
शिकायत पर शुक्रवार को खाद्य विभाग के अधिकारी जांच के लिए पहुंचे थे। अधिकारियों ने शिकायत करने वालों का बयान लिया। अधिकारियों ने कहा कि गड़बड़ी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।



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Fraud in poor rice, many people got less than 40 kg rice, women have complained




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फसल ली ही नहीं और उठा रहे बीमा का फायदा, 25 से 30 हजार रुपए तक भुगतान

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उन किसानों को भी बीमा की राशि मिल गई है जिन्होंने धान की फसल ली ही नहीं। पटवारी ने फसल नुकसान की ऐसी रिपोर्ट बनाई कि अपात्रों को भी फायदा हो गया। ऐसा ही मामला लिटिया गांव में सामने आया है। यहां 6 किसानों को खेती के बिना ही बीमा योजना का लाभ मिल गया है।
ग्रामीणों ने इसकी शिकायत भी कर दी है और हल्का पटवारी पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कृषि विभाग के उप संचालक जीएस ध्रुव ने बताया कि ग्रामीणों को इस संबंध में बीमा कंपनी से शिकायत करनी होगी। बीमा राशि कंपनी के माध्यम से जारी हुई है। लिटिया में फसल बीमा की राशि आने के बाद जब चर्चा छिड़ी तब इस बात का खुलासा हुआ कि कुछ ऐसे किसान भी हैं जो कि तीन से चार साल से खेती नहीं कर रहे हैं और जमीन बेकार पड़ी है पर इन किसानों को बीमा की राशि मिली है। जबकि कुछ किसानों को नुकसान झेलने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है।

बीमा लाभ के लिए पटवारी की रिपोर्ट जरूरी

गांव के राजेन्द्र वर्मा ने बताया कि पटवारी के रिपोर्ट के आधार पर ही फसल बीमा का लाभ मिलता है। यह खुद पटवारी ने ही बताया है। पटवारी के पास जब कोई छोटा किसान बीमा संबंधित काम के लिए संपर्क करता हैं तो उसे टाल दिया जाता है। जबकि बड़े किसानों को पूरा तवज्जो दिया जा रहा है। ग्रामीण वीरेंद्र जंघेल ने बताया कि पटवारी की मिलीभगत से ही बड़े किसानों को खेती नहीं करने के बाद भी बीमा की राशि मिली है। इस संबंध में बताया कि जिस किसान को फायदा हुआ है, उसकी जमीन पांच साल से बेकार पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार इसकी शिकायत कर रहे हैं पर अफसर जांच करने सामने नहीं आ रहे हैं। बताया कि कृषि विभाग के अफसरों से संपर्क किया गया था पर लॉकडाउन का बहाना कर गांव ही नहीं आए।



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कोरोना के बीच महाराष्ट्र में फंसे हैं बालाेद जिले के 1725 लोग

देश के 22 राज्यों में फंसे 4 हजार 227 लोगों ने ग्राम पंचायत में संपर्क कर और फोन से सूचना देकर घर वापसी के लिए जिला प्रशासन से लगाई गुहार है। जिसमें सिर्फ महाराष्ट्र राज्य में फंसे एक हजार 725 लोग शामिल हैं यानी जितने अब तक दूसरे राज्यों से पहुंचे है, उससे ज्यादा और पहुंचेंगे। जिला प्रशासन के अनुसार मार्च से 7 मई तक 3 हजार 953 लोग दूसरे राज्यों से पहुंचे हैं। वहीं 7 अप्रैल तक दूसरे राज्यों में फंसे 1308 लोगों की पहचान कर सूची तैयार की गई थी। इस हिसाब से एक माह में ही 2 हजार 919 लोगों की और पहचान हुई है। जो कोरोना के कहर के बीच घर वापस आना चाह रहे है।
स्थानीय अफसरों का कहना है कि जिले के कितने लोग दूसरे राज्यों में फंसे है, इसकी जानकारी राज्य शासन को रोजाना दी जा रही है। घर कब तक पहुंचेंगे, इस संबंध में राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। कोरोना को लेकर देशभर में महाराष्ट्र संवेदनशील है, यहां 18 हजार से ज्यादा पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। वहां फंसे लोग चाह रहे हैं कि जल्द गृह जिला पहुंचे। महाराष्ट्र के चिखलोली गांव में फंसे माहुद बी के तिलकराम, चितरंजन ने बताया कि किसी तरह भोजन मिल रहा है लेकिन अब हमें घर आना है, यहां केस बढ़ते ही जा रहे है, काम बंद है। प्रशासन, शासन से उम्मीद है कि जल्द हमें घर पहुंचाएंगे।
स्कूल, सामुदायिक भवन आश्रम में ठहराया जा रहा
दूसरे राज्यों से वापस आने वाले श्रमिकों एवं परिवार के सदस्यों को क्वारेंटाइन में रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां जिला स्तर पर चल रही है। ताकि संक्रमण का खतरा न रहें। ग्राम स्तर पर गांव से दूर उपयुक्त भवन जैसे स्कूल, सामुदायिक भवन, आश्रम, छात्रावास को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। मजदूरों की संख्या के आधार पर ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्र स्तर पर व्यवस्था की गई है। इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शहर में सीएमओ, ग्रामीण क्षेत्र में जिपं सीईओ नोडल अफसर

छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने कलेक्टर को पत्र भेजकर निर्देश दिए है कि घर वापसी के लिए इच्छुक लोगों की जानकारी उपलब्ध कराएं। ताकि आगे की कार्रवाई कर सकें। कितनी संख्या में लोग, किस प्रदेश के किस जिले से कब आ रहे हैं या आने की संभावना है। अन्य राज्यों से प्राप्त डाटा जानकारी को कलेक्टर तत्काल राज्य नोडल अधिकारी से साझा करेंगे। कार्य योजना बनाने एवं क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जिपं सीईओ को, शहरीक्षेत्र में नपा सीएमओ को नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।

स्वास्थ्य परीक्षण कर क्वारेंटाइन में रखेंगे
स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करें और क्वारेंटाइन सेंटर में रखें। श्रमिकों की अधिकता की स्थिति में प्रदेश की सीमा क्षेत्र या नजदीकी जिले के अन्य निर्धारित स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अपर कलेक्टर एके वाजपेयी ने बताया कि दूसरे राज्यों में 4 हजार से ज्यादा लोग फंसे है। जो घर वापस आना चाह रहे है। राज्य शासन के आदेशानुसार जरुरी कार्रवाई चल रही है।



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1725 people stranded in Balade district in Maharashtra between Corona




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कोरोना के बीच महाराष्ट्र में फंसे हैं बालाेद जिले के 1725 लोग

देश के 22 राज्यों में फंसे 4 हजार 227 लोगों ने ग्राम पंचायत में संपर्क कर और फोन से सूचना देकर घर वापसी के लिए जिला प्रशासन से लगाई गुहार है। जिसमें सिर्फ महाराष्ट्र राज्य में फंसे एक हजार 725 लोग शामिल हैं यानी जितने अब तक दूसरे राज्यों से पहुंचे है, उससे ज्यादा और पहुंचेंगे। जिला प्रशासन के अनुसार मार्च से 7 मई तक 3 हजार 953 लोग दूसरे राज्यों से पहुंचे हैं। वहीं 7 अप्रैल तक दूसरे राज्यों में फंसे 1308 लोगों की पहचान कर सूची तैयार की गई थी। इस हिसाब से एक माह में ही 2 हजार 919 लोगों की और पहचान हुई है। जो कोरोना के कहर के बीच घर वापस आना चाह रहे है।
स्थानीय अफसरों का कहना है कि जिले के कितने लोग दूसरे राज्यों में फंसे है, इसकी जानकारी राज्य शासन को रोजाना दी जा रही है। घर कब तक पहुंचेंगे, इस संबंध में राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। कोरोना को लेकर देशभर में महाराष्ट्र संवेदनशील है, यहां 18 हजार से ज्यादा पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। वहां फंसे लोग चाह रहे हैं कि जल्द गृह जिला पहुंचे। महाराष्ट्र के चिखलोली गांव में फंसे माहुद बी के तिलकराम, चितरंजन ने बताया कि किसी तरह भोजन मिल रहा है लेकिन अब हमें घर आना है, यहां केस बढ़ते ही जा रहे है, काम बंद है। प्रशासन, शासन से उम्मीद है कि जल्द हमें घर पहुंचाएंगे।
स्कूल, सामुदायिक भवन आश्रम में ठहराया जा रहा
दूसरे राज्यों से वापस आने वाले श्रमिकों एवं परिवार के सदस्यों को क्वारेंटाइन में रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां जिला स्तर पर चल रही है। ताकि संक्रमण का खतरा न रहें। ग्राम स्तर पर गांव से दूर उपयुक्त भवन जैसे स्कूल, सामुदायिक भवन, आश्रम, छात्रावास को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। मजदूरों की संख्या के आधार पर ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्र स्तर पर व्यवस्था की गई है। इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शहर में सीएमओ, ग्रामीण क्षेत्र में जिपं सीईओ नोडल अफसर

छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने कलेक्टर को पत्र भेजकर निर्देश दिए है कि घर वापसी के लिए इच्छुक लोगों की जानकारी उपलब्ध कराएं। ताकि आगे की कार्रवाई कर सकें। कितनी संख्या में लोग, किस प्रदेश के किस जिले से कब आ रहे हैं या आने की संभावना है। अन्य राज्यों से प्राप्त डाटा जानकारी को कलेक्टर तत्काल राज्य नोडल अधिकारी से साझा करेंगे। कार्य योजना बनाने एवं क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जिपं सीईओ को, शहरीक्षेत्र में नपा सीएमओ को नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।

स्वास्थ्य परीक्षण कर क्वारेंटाइन में रखेंगे
स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करें और क्वारेंटाइन सेंटर में रखें। श्रमिकों की अधिकता की स्थिति में प्रदेश की सीमा क्षेत्र या नजदीकी जिले के अन्य निर्धारित स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अपर कलेक्टर एके वाजपेयी ने बताया कि दूसरे राज्यों में 4 हजार से ज्यादा लोग फंसे है। जो घर वापस आना चाह रहे है। राज्य शासन के आदेशानुसार जरुरी कार्रवाई चल रही है।



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कोरोना के बीच महाराष्ट्र में फंसे हैं बालाेद जिले के 1725 लोग

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स्थानीय अफसरों का कहना है कि जिले के कितने लोग दूसरे राज्यों में फंसे है, इसकी जानकारी राज्य शासन को रोजाना दी जा रही है। घर कब तक पहुंचेंगे, इस संबंध में राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। कोरोना को लेकर देशभर में महाराष्ट्र संवेदनशील है, यहां 18 हजार से ज्यादा पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। वहां फंसे लोग चाह रहे हैं कि जल्द गृह जिला पहुंचे। महाराष्ट्र के चिखलोली गांव में फंसे माहुद बी के तिलकराम, चितरंजन ने बताया कि किसी तरह भोजन मिल रहा है लेकिन अब हमें घर आना है, यहां केस बढ़ते ही जा रहे है, काम बंद है। प्रशासन, शासन से उम्मीद है कि जल्द हमें घर पहुंचाएंगे।
स्कूल, सामुदायिक भवन आश्रम में ठहराया जा रहा
दूसरे राज्यों से वापस आने वाले श्रमिकों एवं परिवार के सदस्यों को क्वारेंटाइन में रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां जिला स्तर पर चल रही है। ताकि संक्रमण का खतरा न रहें। ग्राम स्तर पर गांव से दूर उपयुक्त भवन जैसे स्कूल, सामुदायिक भवन, आश्रम, छात्रावास को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। मजदूरों की संख्या के आधार पर ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्र स्तर पर व्यवस्था की गई है। इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शहर में सीएमओ, ग्रामीण क्षेत्र में जिपं सीईओ नोडल अफसर

छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने कलेक्टर को पत्र भेजकर निर्देश दिए है कि घर वापसी के लिए इच्छुक लोगों की जानकारी उपलब्ध कराएं। ताकि आगे की कार्रवाई कर सकें। कितनी संख्या में लोग, किस प्रदेश के किस जिले से कब आ रहे हैं या आने की संभावना है। अन्य राज्यों से प्राप्त डाटा जानकारी को कलेक्टर तत्काल राज्य नोडल अधिकारी से साझा करेंगे। कार्य योजना बनाने एवं क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जिपं सीईओ को, शहरीक्षेत्र में नपा सीएमओ को नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।

स्वास्थ्य परीक्षण कर क्वारेंटाइन में रखेंगे
स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करें और क्वारेंटाइन सेंटर में रखें। श्रमिकों की अधिकता की स्थिति में प्रदेश की सीमा क्षेत्र या नजदीकी जिले के अन्य निर्धारित स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अपर कलेक्टर एके वाजपेयी ने बताया कि दूसरे राज्यों में 4 हजार से ज्यादा लोग फंसे है। जो घर वापस आना चाह रहे है। राज्य शासन के आदेशानुसार जरुरी कार्रवाई चल रही है।



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1725 people stranded in Balade district in Maharashtra between Corona




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50 दिन से खड़ी हैं बसें, संचालक बोले- सरकार टैक्स में दे छूट

लॉकडाउन की वजह से पिछले 50 दिनों से पूरे प्रदेश में यात्री बसों का संचालन नहीं हो रहा है। उसके बावजूद बसों के संचालक से टैक्स और बीमा की राशि भराई जा रही। खड़ी हुई बसों के ऋण का किश्त भी बस मालिकों को जमापूंजी से चुकाने की नौबत आ गई है। इस चौतरफा आर्थिक मार से बचने के लिए बस संचालकों ने सरकार से रियायत की मांग की है।
जिला बस मालिक संघ के अध्यक्ष केदार मिश्रा ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और सरगुजा संभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर रियायत देने का अनुरोध किया है। पत्र में उन्होंंने बताया ​है कि लॉकडाउन की वजह से 20 मार्च से बसों का संचालन बंद है, लेकिन इस अवधि में संचालकों को निर्धारित टैक्सों से राहत देने की कोई घोषणा नहीं हो पाई है। साथ ही खड़ी बसों के बीमा की प्रीमियर राशि और ऋण किश्तों का बोझ भी बस मालिकों को वहन करना पड़ रहा है। बस चालक, परिचालक और सहित अन्य स्टाफ के वेतन का भुगतान भी ​मालिकों द्वारा किया जा रहा है। इस चौतरफा आर्थिक दबाव से बस संचालकों की कमर टूटने लगी है। इसका सीधा असर लॉकडाउन खुलने के बाद यात्री बसों के संचालन में पड़ना तय है। पत्र में अध्यक्ष ने बताया है कि लॉकडाउन में जो बस संचालन की अनुमति शासन द्वारा दी गई है, उससे भी वाहन संचालकों को अधिक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अंतरराज्यीय सीमाएं अब भी पूरी तरह से सील है। लॉकडाउन की वजह से तमाम वैवाहिक और धार्मिक गतिविधियां ठप पड़ चुकी है। बसों की होने वाली बुकिंग शून्य है। आने वाले कुछ दिनों में बारिश का मौसम शुरू हो जाएगा। यह बस संचालन की दृष्टि से आफ सीजन होता है। बसों में यात्रियों की संख्या एक तिहाई से भी कम रह जाती है। ऐसे में लॉक डाउन खुलने की स्थिति में बस संचालकों कोई राहत
नहीं मिलेगी।
शर्तो का पालन मुश्किल
पत्र में बस मालिक संघ के अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार प्रदेश सरकार ने ग्रीन जोन में बस संचालन करने के लिए जो शर्ते रखी है,उसका पालन आर्थिक लिहाज से संभव नहीं है। शर्तों के मुताबिक बस को पचास प्रतिशत यात्री के साथ ही चलाया जाएगा। साथ ही यात्रियों और रनिंग स्टाफ के लिए मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था करना, संचालक की जिम्मेदारी होगी। बस की क्षमता से आधे क्षमता के यात्रियों के साथ संचालित करने पर नुकसान होना तय है।

अंतरराज्यीय परमिट के लिए भरते हैं अधिक टैक्स
झारखण्ड और ओडिशा के अंतरराज्यीय सरहद में स्थित जशपुर जिले में रोजाना तकरीबन 5 सौ छोटे बड़े यात्री वाहन संचालित होते हैं। उनमें वातानुकूलित लग्जरी बसों से लेकर लोकल बस शामिल है। जशपुर से झारखंड के रांची, लोहरदगा, गुमला और ओडिशा के सुंदरगढ़,राउरकेला और झारसुगड़ा के लिए बसें रवाना होती है। अंतरराज्यीय परमिट के लिए बस संचालकों को अधिक टैक्स चुकाना पड़ता है।



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रायकेरा की 100 एकड़ जमीन पर बनेगा मॉडल ऑर्गेनिक फार्म

सामुदायिक सहभागिता से किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके लिए मॉडल ऑर्गेनिक फार्म को विकसित करने की योजना तैयार कीहै। इसका जिले के किसानों को लाभ मिलेगा। रायकेरा में बेलजोरा व्यपवर्तन के कारण सिंचाई की बेहतर सुविधा है। किसानों की सहमति से लगभग 100 एकड़ कृषि योग्य भूमि में फलदार पौधे, औषधीय पौधे विभिन्न किस्म की सब्जियां आदि लगाई जाएगी, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह पर माडल सफल होने पर इसको जिले के अन्य जिलों पर लागू किया जाएगा।

जिले के लिए बनेगा एक मॉडल

कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने बताया कि किसानों के भूमि में शासन की योजनाओं के तहत कार्य कराया जाएगा और रायकेरा में मॉडल ऑर्गेनिक फार्म विकसित करने के योजना बनाई है। रायकेरा गांव मे पर्याप्त भूमि है और सिंचाई की भी व्यवस्था है। मार्च 2021 तक इसे मूर्त रूप दे दिया जाएगा। इस मॉडल ऑर्गेनिक फार्म से किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जिला पंचायत के सीईओ केएस मंडावी ने कहा कि इस मॉडल ऑर्गेनिक उद्यान के विकास में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में भी काम कराया जाएगा। किसानों की भूमि खेती के लिए योग्य बनाया जाएगा। योजनबद्ध तरीके से तालाब डबरी कुआं बनाए जाएंगे।

मॉडल उद्यान में लगेंगे औषधीय पौधे
वनमंडलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव ने कहा कि यह उपयुक्त स्थल है, जिसे मॉडल उद्यान के रूप में विकसित किया जा रहा है इस जिले में औषधीय पौधे के लिए अनुकूल मौसम है। विभिन्न औषधीय वन तुलसी, बेल, तेजपत्ता, पुर्ननवा, गिलोय, मुनगा तेजबल लेमनग्रास भुईंनीम, आंवला केसर, सफेद मूसली हर्रा, बेहरा, हड़जोड़ जैसे अनेक औषधि है। इनको उद्यान के रूप में विकसित कर उसका व्यवसायिक उत्पादन करने से किसानों को लाभ होगा।वनविभाग की योजनाओं के तहत इनके विकास में सहयोग किया जाएगा।

जगह का अफसरों ने किया निरीक्षण
कुनकुरी ब्लाक के रायकेरापंचायत में उद्यानिकी एवं वानिकी के प्रोत्साहन के लिए मॉडल आर्गेनिक फार्म विकसित करने के लिए कुनकुरी विधायक यूडी मिंज, कलेक्टर , डीएफओ , जिला पंचायत सीईओ एवं उप संचालक कृषि समेत अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया और कार्ययोजना को तैयार करने पर चर्चा की ताकि कृषि,वानिकी एवं उद्यानिकी के बड़े प्रोजेक्ट माध्यम से एक मॉडल तैयार कर ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ कटाई रोकी जा सके।



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Model Organic Farm to be built on 100 acres of Raikera land




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यूएस व जर्मनी से आएगी कोरोना जांचने की मशीन, 4 करोड़ 60 लाख में टेंडर, बिलासपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में लगेंगी

सरकार ने बिलासपुर, राजनांदगांव और अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज में कोरोना लैब की स्थापना के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली है। 4 करोड़ 60 लाख रुपए में एक निजी कंपनी को मशीन लाने का ठेका सौंप दिया गया है। छत्तीसगढ़ के डीएमई डॉ. एसएल आदिले के अनुसार यह मशीन जर्मनी और यूएएस से आएगी। उनके मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में महीने भर का वक्त लग सकता है। बिलासपुर के सिम्स में कोरोना जांचने की लैब का निर्माण होना लगभग तय माना जा रहा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार प्रदेश के उन मेडिकल कॉलेज को निरीक्षण कर रहे हैं जहां यह व्यवस्था नहीं है। इससे पहले डॉक्टर आदिले ने सिम्स का निरीक्षण किया था। वे कुछ निजी अस्पतालों को भी देखने गए थे। पर पहले चरण में कुछ भी तय नहीं हो पाया था। कुछ दिन पहले ही उन्होंने सिम्स का फिर से निरीक्षण किया और यही कोरोना जांचने की लैब बनाने का फैसला कर लिया गया। इसके अलावा अंबिकापुर और राजनांदगांव में भी मेडिकल कॉलेज के कैंपस में मशीन लगाने की बात कही जा रही है। इससे एक और जहां संदिग्ध मरीजों में कोरोना जांचने का दायरा बढ़ेगा। वहीं दूसरी ओर इसके लिए तीनों ही मेडिकल कॉलेज को रायपुर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। डॉक्टर आदिले का कहना है कि वे लगातार खुद ही इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
मरीज की जांच रिपोर्ट के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार
बिलासपुर में कोरोना लैब बनने के बाद संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यहां के जनप्रतिनिधि लगातार इसकी मांग करते आ रहे हैं। पूर्व में कुछ बड़े अस्पतालों में इसके निर्माण की चर्चा थी पर बाद में यह सिम्स में ही फाइनल कर दिया गया है। अभी स्वास्थ्य विभाग को मरीजों की रिपोर्ट के लिए रायपुर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। लैब बनने के बाद या परेशानी भी दूर हो जाएगी।
दूसरे चरण में बिल्डिंग और नियुक्तियों पर फोकस
कोरोना जांचने की लैब में कुछ दूसरी तरह की जांच की सुविधा भी रहेगी। इसे वायरोलॉजी पैथोलैब का नाम भी दिया गया है। इस लैब में कोरोना जांचने की लैब के अलावा और क्या-क्या जांच होगी अभी यह स्पष्ट नहीं है। सरकार ने मशीन खरीदी के अलावा बिल्डिंग और एक्सपर्ट डॉक्टरों की नियुक्तियों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। माइक्रोबायोलॉजी के एक्सपर्ट पर भी हेल्थ के अधिकारियों की नजर है। मशीन खरीदी के बाद अधिकारी इन्हीं चीजों पर फोकस कर रहे हैं।



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60 हजार से ज्यादा मजदूर यहां रुकेंगे

जिला प्रशासन अब तक दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों की सूची फाइनल नहीं कर पाया है। कितने मजदूर अन्य राज्यों में है यह सूची तो तैयार है लेकिन कितने मजदूर किस ट्रेन से आएंगे यह अब तक तय नहीं हो पाया है। इतना तय है कि 60 हजार से ज्यादा मजदूर बिलासपुर जिले में ही लौटेंगे। मजदूरों को रखने के लिए जिले में 1066 क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। सबसे अधिक बिल्हा मेें 278 हैं। इसके बाद मस्तूरी जनपद में 131 हैं। बिलासपुर नगर निगम में 6 क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए हैं।
सबसे ज्यादा यूपी में: सबसे अधिक 30000 मजदूर उत्तर प्रदेश में फंसे हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में 4000, गुजरात में 6000, तेलंगाना में 1000 समेत अन्य राज्यों में भी मजदूर फंसे हुए हैं। इन मजदूरों में सबसे ज्यादा मस्तूरी जनपद में 36927 मजदूर आएंगे।
480 मजदूरों के लिए शहर में बनाए गए 8 क्वारेंटाइन सेंटर : बिलासपुर में 480 मजदूरों को रुकवाने के लिए 8 सेंटर बनाए गए हैं। शहर के बीच में अधिकांश सेंटर हैं इसलिए लोगों में डर का माहौल है। मजदूरों में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की वजह से लोग भयभीत हो रहे हैं। इसके लिए 4 सेंटर बनाए गए हैं। जहां 2000 बेड का इंतजाम किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक बिलासपुर शहर के 480 मजदूर देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे हुए हैं जो ट्रेन से यहां एक दो दिनों के भीतर आ जाएंगे। उन्हें ठहराने के लिए पुत्री शाला सामुदायिक भवन, यदुनंदन नगर सामुदायिक भवन, त्रिवेणी भवन, जरहाभाठा सामुदायिक भवन, गोड़ पारा सामुदायिक भवन, गुजराती समाज भवन, कोनी आईटीआई हॉस्टल, रेन बसेरा व्यापार विहार सहित 8 सेंटर बनाए गए हैं। एसडीएम देवेंद्र पटेल ने बताया कि नगर निगम को मजदूरों के रुकवाने की जिम्मेदारी दी गई है।
मजदूरों की व्यवस्था करने सांसद साव की मांग
बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण साव ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी एस सिंह देव एवं राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल तथा मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर प्रत्येक ग्राम पंचायत को छत्तीसगढ़ लौटने वाले श्रमिकों की व्यवस्था करने के लिए एक ₹लाख देने की मांग की है । विभिन्न राज्यों से जिले में 65000 मजदूर लौटने वाले हैं। इन्हें ठहराने की व्यवस्था ग्राम पंचायतों को दी गई है।
टीकमगढ़ के मजदूरों को अमरकंटक तक भेजा आप ने
ओडिशा के संबलपुर में संचालित एक गुटखा फैक्ट्री में काम करने गए मध्य प्रदेश के मजदूरों को आज आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रथमेश मिश्रा ने अपने खर्च पर बिलासपुर से अमरकंटक बस से भेजा। धनपत राय, कैलाश हरिराम सहित अन्य मजदूर और उनका परिवार जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, किसी तरह संबलपुर से बिलासपुर पहुंचे। इन्हें कई किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा। यहां से निजी स्कूल की बस में उन्हें भेजा गया।
ट्रेनों में खाने का झगड़ा क्योंकि पैकेट कम पड़ रहे
स्पेशल ट्रेनों में सफर कर रहे श्रमिकों को सिर्फ 25 रुपए की वेज बिरयानी और एक पानी का बोतल दिया जा रहा है। ऑर्डर सिर्फ 1000 पैकेट का ही है। इससे 1200 यात्रियों के बीच खाने को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। कुछ तो भूखे पेट ही सफर कर रहे हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि जिस बेस किचन से भोजन के पैकेट तैयार हो रहे हैं, वहां हर ट्रेन के लिए सिर्फ 1000 भोजन के पैकेट और 1000 पानी का बोतल ही देने के निर्देश दिए गए हैं। धनबाद जा रही एक ट्रेन जब बिलासपुर से छूटकर 40 -50 किलोमीटर आगे पहुंची तब एक कोच में खाना कम पड़ा तो खूब झगड़ा हुआ। राजेंद्र बोरबन, क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी ने पूछने पर कहा कि हमें जो सदस्य संख्या बताई गई उससे 50 पैकेट भोजन ज्यादा दिया गया। ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूशन करने वाला गड़बड़ कर रहा होगा।

हर जुबां पर चिंता है कहीं बाहर से आ रहे मेहमानों से संक्रमण न फैल जाए और इधर जिला प्रशासन ने कोई इंतजाम ही नहीं किए
अब्दुल रिजवान |संक्रमण रोकने के लिए जिला प्रशासन कितना संजीदा है यह बता रहे हैं शहर के क्वॉरेंटाइन सेंटर। दैनिक भास्कर देर रात उन जगहों पर पहुंचा तो पता चला जहां पर श्रमिकों को क्वॉरेंटाइन रखना है वहां कोई व्यवस्था नहीं है। बहतराई स्टेडियम से लेकर राजकिशोर नगर और टिकरापारा स्थित गुजराती समाज भवन में कहीं कोई इंतजाम दिखाई नहीं दिए। खाने-पीने रहने की व्यवस्था कैसे होगी कुछ पता नहीं।
गुजराती समाज भवन
रात 11:00 बजे। भवन के मुख्य द्वार पर ताला लगा था। अध्यक्ष से बात करके खुलवाया गया तो उन्होंने बताया 1 सप्ताह पहले नगर निगम के अफसर भवन देखने आए जरूर थे लेकिन उन्होंने आगे की कोई प्लानिंग नहीं बताई। अंदर तीन-चार बड़े हॉल वह कमरे हैं यहां पर रुकवाने की पर्याप्त व्यवस्था है प्रशासन की ओर से काेई व्यवस्था नहीं है।

राजकिशोर नगर सामुदायिक भवन
रात 10:30 बजे। सामुदायिक भवन के सामने सड़क पर तीन चार युवक टहल रहे थे वे निगम की ओर से तैनात किए गए हैं। एक हॉल व दो कमरे हैं। इसमें महिला और पुरुष की व्यवस्था अलग अलग बनाई जाएगी। मजदूरों के सोने के लिए सिर्फ 15 गद्दे, चादर वह तकिए उपलब्ध कराए गए हैं बाकी और कोई व्यवस्था वहां पर नहीं है।

बहतराई स्टेडियम
रात 9:30 बजे। स्टेडियम के मुख्य द्वार पर 3-4 पुलिस के जवान खड़े थे पूछने पर बताया हमें सूचना दी गई कि मजदूर आने वाले हैं, इसलिए हम पहुंच गए। स्टेडियम के अंदर केयरटेकर श्रीवास अपने कक्ष में आराम कर रहा था। उसे नहीं पता मजदूर कब आएंगे। उसने कहा क्या व्यवस्था करना है यह तो साहब लोग ही बता सकते हैं।



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More than 60 thousand workers will stay here




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साइकिल, मोपेड और बाइक से 10 परिवार के 40 लोग निकले, हजार किमी की यात्राकर पहुंचेंगे अपने घर

सड़क पर लूना और साइकिल से पत्नी व बच्चों को बैठाकर जा रहे ये लोग वो ठेले और खोमचे वाले हैं, जाे लगभग 20 साल से शहर में रोजी-रोटी कमाते थे। गर्मी में ठंडी कुल्फी और बर्फ तो बाकी दिनों में गुपचुप और चाट बेचते थे। कोरोना से इतने बेबस हुए कि यहां कमाया हुआ सब कुछ बेचकर 1000 किलोमीटर दूर झांसी के लिए निकलना पड़ा। रविवार की रात 2 बजे भास्कर की टीम को असहाय हुए इन लोगों का काफिला घरघोड़ा रोड पर उर्दना के नजदीक दिखा।
कोई साइकिल पर टूटी आस लिए चल रहा था तो कोई लूना पर तीन लोगों बैठाकर जाते नजर आया। झांसी से दो दशक पहले आए 10-12 परिवार के 40 महिला, पुरुष, बच्चे इंदिरा नगर में रहते थे। कोरोना ने काम छीन लिया और अब कोई उम्मीद भी नहीं बची। बिना धंधे के गुजारा संभव नहीं लगा। यहां पसीना बहाकर 2 रोटी कमाते और अपने बूढे मां-पिता के लिए कुछ रुपए भी भेजते थे। कई दिनों से काम बंद था। रास्ते में खाने के लिए पैसों की जरूरत होगी, इसलिए अपने सामान भी बेच दिए। मजबूरी कहिये या हौसला, कहते हैं कुछ महीनों में सब ठीक होगा तो वापस आएंगे। यूपी के झांसी जिले के ये लोग फरवरी से जून तक गांव-गांव जाकर आइसक्रीम बचते थे। सितंबर से दिसंबर तक गुपचुप बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। 10 दिनों तक घर जाने की अनुमति मांगते रहे। प्रशासन ने आवेदन तक नहीं लिया तो मजबूर होकर अपने देश निकल पड़े।
गांव पहुंच जाएंगे तो पड़ोसी हमें खाने को तो दे ही देंगे
नईम कहते हैं कि यहां मां बहन, भाई के साथ रहता हूं। हर तरफ दौड़ लिया कहीं से खाने को नहीं मिल रहा है। पिछले 45 दिनों में केवल 5 किलो का राशन मिला, जो कब खत्म हो गया मालूम नहीं। घर से बूढ़े पिता से पैसे 2 बार लिया, अब तो वह भी असमर्थ है। यूपी में अपने जनपद जालौन चले जाएंगे तो लोग खाने के लिए दे ही देंगे।
भाेजन की व्यवस्था में बेचनी पड़ी पुरानी बाइक
रफीक बताते हैं कि वह 10 साल से आइसक्रीम और गुपचुप बेच रहे है। उनके साथ परिवार के पांच सदस्य बहन, 2 भाई, भतीजे रहते है। यूपी में घर पर पत्नी बच्चे, मां बाप की सेवा करती है। खाने की परेशानी बढ़ी तो पुरानी बाइक को चार हजार में बेच दी। साइकिल से किसी तरह घर पहुंच गया तो वहां खेती-किसानी या कुछ भी कर लेंगे।
साहब... और रुकते तो बिन खाए ही मर जाते
जब भास्कर की टीम ने उनसे पूछा तो साइकिल रोक कर कहने लगे, साहब। आप नहीं जानते है। एक दिन बीत रहा था तो लग रहा एक साल हो गया। दो दिन बिन खाएं भी रहना पड़ा। किसी दिन सुबह नमक चावल खा लिया पर इन छोटे बच्चों को क्या खिलाएं जहां खाना ही देने वाला कोई नहीं। कलेक्टर ऑफिस, नगर निगम, सिटी कोतवाली हर जगह अपनी लाचारी बयान की, पर किसी ने सुना नहीं। यहां भूखों मरने से अच्छा है, घर जाते हुए मर जाएंगे। और पहुंच गए तो घर पर भूखे भी रह लेंगे।
क्यों बनी ऐसी मजबूरी
परदेस में कमाने आये इन लोगों पर 2 परिवारों की जिम्मेदारी है। यहां पेट भरकर घर के लिए भी पैसे भेजते हैं। इनका व्यवसाय बंद हुआ। लॉकडाउन में दूसरा रोजगार भी नहीं मिला। कुछ रोज घर पर रखा अनाज खा लिया। फिर दूसरों के भरोसे हो गए। सरकारी व्यवस्था इनका पेट नहीं भर सकती। बड़े साहबों के पास जाकर खाने के लिए बोला तो कहते है कि हम कहां से दें। दफ्तरों में कोई यह नहीं बता सका कि उनको घर भेजने का कोई इंतजाम कब होगा।



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40 people of 10 families left by bicycle, moped and bike, will travel to their home after traveling thousands of km




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जिले में 70 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे, माह में 2 बार होती है खून की जरूरत, परेशानी न हो इसलिए संस्था ने लिया गोद

थैलेसीमिया बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला रक्त रोग है। जिससे शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती है। जिससे पीड़ित बच्चे के शरीर में रक्त की कमी होने लगती है। इस कारण बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। वर्तमान में जिले में लगभग 70 बच्चे थैलेसीमिया पीड़ित हैं। जिनमें 3 माह से लेकर 10 साल के बच्चे हैं। बीमारी के कारण प्रत्येक पीड़ित बच्चे को माह में 2 बार रक्त चढ़ाना पड़ता है। रक्त की जरूरत के समय परिजन परेशान न हो और बच्चों की जान मुसीबत में न पड़े इसके लिए सामाजिक संस्था छत्तीसगढ़ हेल्प वेलफेयर सोसाइटी ने थैलेसीमिया पीड़ित सभी बच्चों को गोद लिया है। बच्चों को जब भी रक्त की जरूरत पड़ती है संस्था द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। जिला अस्पताल पहुंचने पर इन बच्चों समेत परिजनों के नाश्ता-खाना की व्यवस्था भी संस्था करती है। शुक्रवार को विश्व थैलेसीमिया दिवस के मौके पर संस्था द्वारा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान किया गया।
इस तरह थैलेसीमिया से हो सकता है बचाव
डॉक्टरों के अनुसार खून की जांच करवाकर रोग की पहचान कर सकते हैं। शादी का रिश्ता तय करने से पहले लड़के व लड़की के खून की जांच कराई जा सकती है। नजदीकी रिश्ते में शादी करने से बचना और गर्भ ठहरने के 4 माह के अन्दर भ्रूण की स्वास्थ्य जांच करवाने बीमारी से बच सकते हैं।
3 माह बाद नजर आते हैं थैलेसीमिया के लक्षण
जिला अस्पताल के एमडी (मेडिसीन) डॉ. प्रिंस जैन ने बताया कि थैलेसीमिया बीमारी से ग्रसित बच्चों में जन्म के 3 माह बाद ही लक्षण नजर आते हैं। कुछ बच्चों में 5 -10 साल के मध्य लक्षण दिखाई देते हैं। त्वचा, आंख, जीभ व नाखून पीले पड़ने लगते हैं। दांतों को उगने में दिक्कत और बच्चे का विकास रुक जाता है। थैलेसिमिया की गंभीर अवस्था में खून चढ़ाना जरूरी हो जाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने रक्तदान के लिए किया प्रोत्साहित
लॉकडाउन के कारण स्वैच्छिक रक्तदाताओं के कम आने के साथ ही रक्तदान शिविर का आयोजन नहीं हो पाने की वजह से ब्लड बैंक में रक्त की कमी को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा एनएसएस व स्काउट गाइड समेत अन्य समाज सेवी संस्थाओं से संपर्क करके रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिससे 3-4 दिनों के भीतर युवा वर्ग आगे आकर रक्तदान करने लगा है।



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होल सेल व्यापारी से 200 पैकेट पान मसाला जब्त 47 दिन में 50 लाख का गुटखा 2 करोड़ में बिका

लॉकडाउन के दौरान 47 दिनों में प्रतिबंध के बावजूद 50 लाख का पान मसाला ब्लैक में 2 करोड़ में बिका, जबकि लॉकडाउन के कारण सभी पान दुकानें बंद हैं। मुख्यालय में पान मसाला के होल सेलर अब्दुला के यहां कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 200 पैकेट पान मसाला जब्त किया गया है।
बताया जा रहा है अब्दुला पान मसाला विक्रेता के 5 अलग-अलग जगह गोदाम है, लेकिन पुलिस को पान मसाला कार में रखने की जानकारी मिली थी, जिसे पुलिस ने जब्त कर खाद्य और औषधि विभाग के अफसर को सत्यापन के लिए सौंप दिया है। पान मसाला की बड़ी खेप व्यापारी के यहां उतारी गई थी, लेकिन मौके पर पुलिस को 200 पैकेट पान मसाला ही कार से मिले। लोगों में इस बात की चर्चा है कि मामले को दबाया जा रहा है, जबकि लॉकडाउन के दौरान हर दिन प्रतिबंध के बाद भी पाउच सप्लाई की जा रही थी। जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने गुटखा, पान मसाला समेत अन्य कई एैसे उत्पाद की बिक्री पर कलेक्टर ने रोक लगाई है, जिसे खाने के बाद लोगों को द्वारा सार्वजनिक जगह व सड़कों पर थूंका जाता है। इससे कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहता है। पुलिस विभाग की कार्रवाई के बाद खाद्य व औषधि विभाग की टीम मामले की जांच करने में जुटी है। मध्यप्रदेश के कटनी छत्तीसगढ़ कोरिया से लगे बार्डर से आसानी से पान मसाला की सप्लाई लग्जरी गाड़ियों से की जा रही है। वहीं फुटकर दुकानों में पान मसाला के 5 रुपए का पाउच 20 रुपए में बिक रहा है। यहीं नही होल से में एक पाउच की कीमत 10 रुपए तक हो गई।
पुलिस विभाग को सौंपेंगे प्रतिवेदन: एफएसओ
एफएसओ सागर दत्ता ने बताया कि पकड़े गए पान मसाला की जांच करने के बाद पुलिस विभाग को सौंपा जाएगा। यदि यह आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत शामिल नहीं होगा तो इसके खिलाफ धारा 188 के तहत कार्रवाई होगी।



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 थार के रेगिस्तान में आसमान से बरसने लगे अंगारे, लू के थपेड़ों ने झुलसाया, 45 डिग्री के पास पहुंचा तापमान 

अपनी प्रकृति के अनुरूप थार का रेगिस्तान एक बार फिर तपना शुरू हो गया है। आसमान से बरसती आग और अंगारों के समान तपती धरा पर लोगों के लिए बाहर निकलना दुभर हो गया है। मौसम में आए बदलाव के कारण लगातार हो रही बारिश के कारण गर्मी को अपना रौद्र रूप दिखाने का अवसर ही नहीं मिल पा रहा था, लेकिन मौसम साफ होते ही प्रचंड गर्मी का दौर शुरू हो गया है। इस मौसम में पहली बार बाड़मेर-जैसलमेर में तापमापी का पारा 45 डिग्री के निकट पहुंच गया। वहीं जोधपुर में 43 डिग्री की गर्मी में लू के थपेड़े तन को झुलसा रहे है।

अप्रैल के पहले पखवाड़े में गर्मी बढ़ने लगी थी, लेकिन दो-दो दिन के अंतराल से हो रही बारिश के कारण तापमान पर ब्रेक लगा हुआ था। इस कारण अब तक लू के प्रकोप से राहत मिली हुई थी। लेकिन अब मौसम साफ होते ही तापमापी का पारा तेजी से उछाल मारता नजर आ रहा है। जैसलमेर में गुरुवार को तापमान इस गर्मी के मौसम में पहली बार पारा 45 डिग्री के पास 44.9 पहुंच गया है। गुरूवार का दिन अब तक का सबसे गर्म दिन रहा। वहीं बाड़मेर में 44.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। जबकि जोधपुर में 42.8 डिग्री तापमान रहा।

लॉक डाउन के कारण बहुत कम लोग ही घरों से बाहर निकल रहे है। जैसलमेर व बाड़मेर में सुबह से आसमान से अंगार बरसना शुरू हो जाते है। दोपहर तक सड़कें तवे के समान तप जाती है और लू के थपेड़ों के कारण घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिन तक गर्मी का असर बरसरार रहने के आसार है। तापमान बढ़ने के साथ लू के थपेड़े चलेंगे।

फोटो एल देव जांगिड़



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जोधपुर में भीषम गर्मी में छतरी पकड़ सड़कों पर डटे है पुलिस के जवान।