0 जिला प्रशासन का दावा- 80 बसें तैयार खुली पोल, तीन ट्रकों में पहुंचे 324 लोग By Published On :: Wed, 06 May 2020 23:30:00 GMT दंतेवाड़ा के 3000 से ज्यादा मजदूर दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं। लॉकडाउन में ढील दी गई तो दूसरे प्रदेशों से मजदूरों के आने का सिलसिला अब वाहनों के ज़रिए भी शुरू हो गया है। सोमवार को कोंटा बार्डर पर दंतेवाड़ा के करीब 100 मजदूर रोके गए। उन्हें लेने दंतेवाड़ा से बसों को प्रशासन ने रवाना किया। अब बुधवार को 3 ट्रकों में भरकर आंधप्रदेश और तेलंगाना से करीब 324 मजदूरों की वापसी हुई है। इस वापसी ने इस बात को उजागर कर दिया है कि कोरोना और लॉकडाउन की चुनौती के बीच दूसरे राज्यों व स्थानीय प्रशासन के बीच आपस में समन्वय ही नहीं है।इधर जिला प्रशासन का दावा है कि दंतेवाड़ा में मजदूरों को लाने प्रशासन ने 80 बसें तैयार कर रखी हैं। चूंकि मजदूर दूसरे प्रदेशों में फंसे हैं, ऐसे में उन्हें लाने के लिए प्रशासन सरकार के निर्देश का इंतजार कर रही है। बताया जा रहा है पड़ोसी प्रदेशों के प्रशासन ने छत्तीसगढ़ सरकार या स्थानीय जिला प्रशासन को सूचना दिए बिना ही मजदूरों को ट्रकों तो पिकअप में भरकर भेज दिया है।बुधवार को भी दंतेवाड़ा के करीब 300 से ज्यादा मजदूर ट्रकों और पिकअप के जरिए दंतेवाड़ा के अलग-अलग इलाके में पहुंचे। चिलचिलाती धूप में भेड़ बकरियों की तरह ट्रकों में सवार होकर मजदूर घर वापसी को मजबूर हैं। सोशल डिस्टेंसिंग तक नहीं थी। ऐसे में अगर एक भी व्यक्ति संक्रमित होता है तो ग्रीन जोन दंतेवाड़ा को नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस बात की जानकारी जब दंतेवाड़ा के अफसरों को पता चली तो हरकत में आ गए।बसें भेजने के लिए शासन के आदेश का इंतजारएसडीएम लिंगराज सिदार ने बताया कि ट्रकों में सवार होकर मजदूर को आंध्रप्रदेश से आए हैं। हमारे पास बसें तैयार हैं। सूचना मिलने पर हम कोंटा बॉर्डर भेज रहे हैं। लेकिन दूसरे राज्यों में बसें भेजने के लिए शासन स्तर से निर्देश मिलेंगे तभी होगा। मजदूरों को ट्रकों से भेजने की सूचना दंतेवाड़ा पहुंचने पर ही मिली। पहले पता होता तो बसें भेजते।सभी को क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जाएगातहसीलदार विजय कोठारी ने बताया कि जो मजदूर आए हैं उनमें से अधिकतर ग्रामीण डब्बा, गुडसे, पालनार और तेलम के है। ये सभी तेलंगाना के ग्रीन जोन से लौटे हैं। इन सभी ग्रामीणों को ग्रीन जोन धनिकरका, बेंगलूर में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। शिक्षक से लेकर सचिव की ड्यूटी लगाई गई है।जनवरी में हुआ था सबसे अधिक पलायनस्थानीय स्तर पर काम नहीं मिलने से कटेकल्याण और कुआकोंडा के ग्रामीण हर साल बड़ी संख्या में तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में काम करने के लिए पलायन करते हैं। तहसीलदार ने बताया कि पलायन को लेकर पिछले चार महीने की तुलना की जाए तो सबसे अधिक पलायन जनवरी में हुआ था। यही लोग दूसरे राज्यों में काम करने के लिए गए थे जो अब वापस आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में कोरोना संक्रमण को लेकर जो क्वारेंटाइन सेंटन बनाए गए हैं उनमें भी ग्रीन, आरेंज और रेड जोन वाले सेंटर बनाए गए हैं जो जिस जोन से आएगा उसे उसी जोन में रखा जाएगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today District administration claims - 80 buses ready open pole, 324 people arrived in three trucks Full Article
0 ऑनलाइन सब्जी कोई नहीं ले रहा, शराब के लिए 2 दिन में 250 ऑर्डर By Published On :: Wed, 06 May 2020 23:30:00 GMT राज्य सरकार ने सब्जी-फल बाजारों में जुट रही भीड़ से कोरोना के संक्रमण का खतरा दूर करने के लिए पूरे प्रदेश में सब्जी-फल की अॉनलाइन बुकिंग व होम डिलीवरी की सुविधा शुरू की हुई है।तमाम कवायद के बाद भी सिर्फ 45 लोगों ने यहां पंजीयन कराया है। इसमें भी औसतन हर रोज 10-12 लोग ही सब्जी के लिए ऑर्डर कर रहे हैं। गत 14 अप्रैल से शुरू हुई इस योजना में जहां अब तक सब्जी व फल बेचने के लिए केवल 9 व्यापारी ही आगे आए हैं तो वहीं दूसरी ओर इस वेबसाइट के माध्यम से खरीदी के लिए 313 लोगों ने ही पंजीयन कराया हुआ है लेकिन इनमें से भी सिर्फ 45 ही एक्टिव है।उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक और इस योजना के नोडल अधिकारी अजय कुशवाहा ने कहा वेबपोर्टल के माध्यम से सब्जी बेचने के लिए व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा लोगों को जागरूकता का परिचय देते हुए सब्जी खरीदने के लिए कहा जा रहा है।डिलिवरी चार्ज है मुसीबतहोम डिलीवरी चार्ज भी लोगों को ऑनलाइन सब्जी बाजार से दूर कर रहा है। पोर्टल में पंजीकृत व्यवसायियों ने बकायदा शर्तों के साथ इसमें अपनी जानकारी डिस्प्ले कर रखी है और लोगों को ऑनलाइन डिलीवरी करने के लिए कुछ व्यापारी व संस्थाएं जहां मुफ्त में तो वहीं कुछ लोग 5 से 10 प्रतिशत तक होम डिलवरी चार्ज लेने की बात कह रहे हैं। जिसका असर भी इस योजना पर पड़ रहा है।शराब की होम डिलीवरी के लिए ऑर्डर पर ऑर्डरसरकार ने शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलिवरी के लिए सरकार ने वेबपोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल पर लोग शराब के लिए ऑर्डर कर सकते हैं। लोगों ने ऑनलाइन घर पर शराब पाने के लिए बड़ी संख्या में अपने ऑर्डर बुक किए हैं। 2 दिनों में ही सिर्फ बस्तर जिले के लिए 249 लोगों ने ऑनलाइन शराब की मांग करते हुए अपने ऑर्डर बुक किए मंगलवार को 79 लोगों ने और बुधवार को एक साथ 70 लोगों ने शराब पाने के लिए बुकिंग की। बुधवार को इनमें से सिर्फ 17 लोगों को ही शराब मुहैया कराई जा सकी है। विभागीय अफसरों के मुताबिक ऑनलाइन शराब के डिलीवरी का जिम्मा प्राइम वन प्लेसमेंट एजेंसी प्राइम वन को है 24 घंटे में शराब के डिलीवरी करनी है लेकिन 48 घंटे में भी यदि डिलीवरी नहीं हुई तो प्लेसमेंट एजेंसी को फाइन भरना होगा। इधर कई लोग फॉल्स बुकिंग भी कर रहे है।सिर्फ 15 किलोमीटर तक ही होगी सप्लाईऑनलाइन डिमांड पर सिर्फ 15 किमी तक ही शराब पहुंचा कर देने का प्रावधान है। होम डिलीवरी के लिए शराब की कीमत के अलावा 120 रुपए सर्विस चार्ज लेते हैं। आबकारी अफसरों का कहना है कि अधिकतर लोगों ने जिस ब्रांड की मांग की थी वह यहां उपलब्ध नहीं है एक व्यक्ति ने तो 60 किमी दूर मारडुम गांव से शराब के लिए बुकिंग की थी जिसे पहुंचाना संभव नहीं है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 20 हजार लोगों काे क्वारेंटाइन करने सेंटर तैयार By Published On :: Thu, 07 May 2020 00:40:00 GMT लॉकडाउन के चलते कबीरधाम जिले के लगभग 7 हजार श्रमिक दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। उन्हें वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वापसी होने पर उन्हें क्वारेंटाइन करने के लिए सेंटर तैयार किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों की तुलना से ज्यादा 20 हजार लोगों को क्वारेंटाइन करने सेंटर बनाए जा चुके हैं ।समाज कल्याण विभाग और जिले की प्रभारी मंत्री अनिला भेडि़या ने बुधवार को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए तैयारी की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि छग सरकार दूसरे राज्यांे में फंसे श्रमिकाें को वापस लाने प्रयास कर रही है। कबीरधाम जिले के श्रमिक जो लॉकडाउन से दूसरे राज्यों में फंसे हैं, उन सभी से संपर्क करते हुए उन्हें वापस लाना है। वापसी के दौरान उनका हेल्थ चेकअप करते हुए क्वारेंटाइन किया जाना है। कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने बताया कि दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों की तुलना से ज्यादा 20 हजार श्रमिकों को क्वारेंटाइन करने सेंटर बना लिए हैं। क्वारेंटाइन सेंटर्स की निगरानी का जिम्मा एसडीएम, पुलिस, जनपद पंचायतों के सीईओ और नगरीय निकायों के अधिकारियों को दिया है। ग्राम स्तर पर भी विशेष निगरानी की जाएगी।मनरेगा में 1.36 लाख मजदूरों को दिया रोजगारकलेक्टर शरण ने बताया कि कंटेनमेंट जोन में शामिल गांवों को छोड़कर पूरे जिले में मनरेगा के तहत 1.36 लाख पंजीकृत श्रमिकों को गांव स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराएं जा रहे हैं। कोविड- 19 से बचाव के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन बंद है। डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से अनौपचारिक शिक्षा गतिविधि संचालन की जा रही है । कुपोषण और एनीमिया मुक्त जिला बनाने का अभियान सुचारू रूप से चलाया जा रहा है। चिन्हांकित मरीजों के घर जाकर सूखा राशन उपलब्ध करा रहे हैं।तेंदूपत्ता संग्रहण जारीजिले में 40,800 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य है। इसे 16.32 करोड़ रुपए में 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा की दर से खरीदेंगे। जिले के 19 समितियों के अंतर्गत 252 फड़ों पर फड़ मुंशी के माध्यम से खरीदी होगी।15 लाख रुपए भुगतानडीएफओ दिलराज प्रभाकर ने बताया कि वन विभाग ने 450 क्विंटल चरौटा, 40 क्विं. चिरायता, 6 क्विंटल वन तुलसा, 11 क्विं. वन जीरा, 8 क्विं. बहेड़ा व 32 क्विंटल शहद खरीदा है। 15.11 लाख रुपए भुगतान हुआ। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Center ready to quarantine 20 thousand people Full Article
0 हर माह 30 हजार सैलरी पाने वाला जिम ट्रेनर लॉकडाउन में बेच रहा सब्जी, खुद को फिट रखना मुश्किल By Published On :: Thu, 07 May 2020 01:18:35 GMT तालाबंदी के चलते फिटनेस इंडस्ट्री की सेहत बिगड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि इंटरनेशनल फ्रैंचाइजी जिम में काम करने वाला ट्रेनर भी सड़क पर सब्जी-भाजी बेचने को मजबूर है। वहीं बहुत से ट्रेनर खुद की फिटनेस को कायम रखने के लिए दूध, अंडे, प्रोटीन जैसी डाइट तक नहीं जुटा पा रहे हैं। पुराने शहर में छोटे बड़े मिलाकर 100 से भी ज्यादा जिम हैं। इनमें एक हजार से ज्यादा नौजवान बतौर फिटनेस ट्रेनर काम करते हैं। सामान्य तौर पर एक ट्रेनर महीने में 25 से 30 हजार या इससे भी ज्यादा रुपए कमा लेता है, लेकिन तालाबंदी की शुरूआत से ही जिम बंद पड़े हैं। रायपुर में कुछ नौजवान ट्रेनर ऐसे भी हैं जो अपने गांव शहर को छोड़कर यहां ट्रेनर का काम कर रहे हैं। कुछ जिम में सैलरी बेस पर काम करते हैं जबकि कुछ ट्रेनर घरों में जाकर भी पर्सनल ट्रेनिंग देते हैं। आम तौर पर छोटे या बड़े जिम में एक क्लाइंट से औसतन 2-5 हजार महीने तक फीस ली जाती है। शहर में चल रहे बड़े जिमों में एक अनुमान के मुताबिक पंद्रह हजार से ज्यादा क्लाइंट हैं। लॉकडाउन के कारण किसी भी ट्रेनर को बीते दो महीने से सैलरी नहीं मिली है। कुछ ऐसे भी हैं जिनके पास घर का किराया देने तक के पैसे नहीं है। उधर, जिम के सहारे अपनी सेहत बनाने वाले लोगों के सामने भी खुद को फिट रखने का संकट आ गया है।सब्जी-भाजी की दुकान लगाई : पांच लोगों के बड़े परिवार को चलाने वाले ट्रेनर भूपेंद्र नायक के सामने रोटी-रोजी का संकट ऐसा आया कि उन्हें मजबूरी में कटोरा तालाब में सब्जी-भाजी की दुकान लगानी पड़ गई। उनके परिवार में तीन छोटे भाई, मां और मामा रहते हैं।खुद काे फिट रखने के लिए कैसे खाएं खुराकबिहार के रहने वाले आलोक सिंह बीते पांच साल से शहर में फिटनेस ट्रेनर का काम कर रहे हैं। आलोक के मुताबिक हेल्दी डाइट लेने के लिए एक ट्रेनर को औसतन पंद्रह हजार रुपए खुद पर खर्च करने पड़ते हैं। सैलरी नहीं मिल रही है, लिहाजा दूध अंडा प्रोटीन कुछ भी नहीं ले पा रहे हैं। अनहेल्दी खाना खाने और जिम नहीं जाने के कारण उनका वजन दस किलो से ज्यादा बढ़ गया है। राशन कार्ड भी नहीं है, मकान का किराया देने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Gym Trainer, who gets 30 thousand salary every month, is selling vegetables in lockdown, it is difficult to keep himself fit Full Article
0 निजी स्कूलों में आरक्षित आरटीई सीटों के लिए आवेदन 30 मई तक, जून में लॉटरी By Published On :: Thu, 07 May 2020 01:19:34 GMT निजी स्कूलों में आरक्षित शिक्षा का अधिकार (आरटीई) की सीटों के लिए आवेदन 30 मई तक स्वीकार किए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया फिर शुरू हो चुकी है। रायपुर जिले के प्राइवेट स्कूलों में आरटीई की 8678 सीटें हैं। इसके लिए शिक्षा विभाग को 8695 आवेदन मिले हैं। सीटों के आबंटन के लिए जून के पहले सप्ताह में लॉटरी होने की संभावना है।आरटीई के दायरे में आने वाले राज्यभर के निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले के लिए आवेदन की प्रक्रिया मार्च से शुरू हुई। शुरुआत में आवेदन की संख्या अच्छी रही। लेकिन लॉकडाउन की वजह से धीरे-धीरे यह कम हो गई। राज्य के 6480 निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार से 81452 सीटें आरक्षित है। इनके लिए 60678 आवेदन मिले हैं। यानी जितनी सीटें हैं उतने भी आवेदन विभाग को नहीं मिले हैं। रायपुर व कुछ अन्य जिलों को छोड़ दिया जाए तो कई जगह सीटों की तुलना में आरटीई आवेदन कम मिले हैं। कुछ दिन पहले आवेदन की प्रक्रिया को शिक्षा विभाग ने स्थगित किया था। एक बार फिर फार्म स्वीकार किए जा रहे हैं। 30 मई तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग के अफसरों ने बताया कि सरकारी स्कूलों में बने नोडल सेंटर की मदद से भी आरटीई के लिए आवेदन भरे जाते थे। स्कूल अभी बंद है इसलिए आवेदन में पैरेंट्स को परेशानी हो रही है। इसके अलावा साइबर कैफे भी बंद है, इसकी वजह से भी आवेदन में कमी आई है। गौरतलब है कि ऑनलाइन पोर्टल eduportal.cg.nic.in/rte के माध्यम फार्म भरे जा सकते हैं। आवेदन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, पहचान प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र, गरीबी रेखा से नीचे प्रमाण, सरकारी अस्पताल से प्रमाण पत्र, चाइल्ड वेलफेयर समिति की सूची में नाम जरूरी है।रायपुर में सीट से ज्यादा आवेदन : रायपुर के निजी स्कूलों में आरटीई की 8678 सीटें हैं। इनकी तुलना में आवेदन की संख्या कुछ ज्यादा है। जबकि दूसरे अन्य जिलों में सीटों के आवेदन कम मिले हैं। जैसे बिलासपुर में 10578 सीट है। इसके लिए 5169 आवेदन मिले हैं। राजनांदगांव में 4558 सीटों के लिए 3611 आवेदन मिले हैं। जांजगीर चांपा में 6734 सीटों के लिए शिक्षा विभाग को 4796 फार्म मिले हैं। इसके अलावा कई अन्य जिले हैं जहां सीटों से आवेदन कम प्राप्त हुए हैं।उम्र के अनुसार क्लास का होगा चयनशिक्षा के अधिकार के तहत प्राइवेट स्कूलों में आरक्षित सीटों के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। उम्र के अनुसार क्लास का चयन होगा। उसके अनुसार ही सीटों का आबंटन होगा। शिक्षा विभाग के अफसरों ने बताया कि निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली में प्रवेश होगा। 3 से 4 वर्ष तक की उम्र के लिए नर्सरी। 4 से 5 साल के लिए केजी-1 और 5 से साढ़े छह साल तक की उम्र वाले के बच्चों का प्रवेश कक्षा पहली में होगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Application for reserved RTE seats in private schools till May 30, lottery in June Full Article
0 तेज आंधी की वजह से लगभग 100 घरों के छप्पर उड़े, बिजली गिरने से 80 तोते की मौत By Published On :: Thu, 07 May 2020 13:37:00 GMT जिले में बुधवार की देर रात मौसम में आए बदलाव की वजह से बड़ा नुकसान हुआ। मध्यप्रदेश राज्य के बॉर्डर से लगे नेउर, महिडबरा और कुशियारी गांव में बीती रात आंधी ने जमकर तबाही मचाई। लगभग 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली, जिससे इलाके के गांवों में लगभग 100 घरों के छप्पर उड़ गए। 20 से अधिक विशालकाय पेड़ गिर गए। जोरदार आवाज के साथ आकाशीय बिजली के गिरने की वजह से पेड़ पर मौजूद तोतों का झुंड मारा गया। करीब 80 तोते इसकी चपेट में आए।करीब 1 घंटे चली आंधी के डर से ग्रामीण रातभर नहीं सो पाए। बरामदे में बैठकर रात बिताई। इलाके में 14 से ज्यादा बिजली के खंबे भी गिर गए हैं। तार टूटने की वजह से 13 से अधिक गांवों में बुधवार रात से बिजली की सप्लाय बंद है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक दक्षिण पश्चिम राजस्थान में ऊपरी हवाओं में चक्रवात बनने के साथ ही दक्षिण पूर्व मध्यप्रदेश में भी ऊपरी हवाओं में चक्रवात बना हुआ है। पंडरिया के तहसीलदार संजय विश्वकर्मा ने बताया कि महीडबरा में आंधी से घरों को क्षति पहुंचने की जानकारी मिली है,पटवारी को सर्वे के लिये भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर लोगों को मुआवजा दिया जाएगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today मारे गए तोते का लोगों ने अंतिम संस्कार किया, ग्रामीणों के छप्पर टूटने की वजह से आज रात भी वो जागकर ही बिताने को मजबूर हैं। Full Article
0 अरनपुर क्वारैंटाइन सेंटर से 20 ग्रामीण भागे, आंध्रप्रदेश से आए लोगों को नहाड़ी आश्रम में रखे जाने का विरोध भी By Published On :: Thu, 07 May 2020 15:35:33 GMT जिले में आंध्रप्रदेश की ओर से लौटने वाले मजदूर प्रशासन के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। नहाड़ी इलाके में बने क्वारैंटाइन सेंटर से 20 मजदूर भाग गए। भागे हुए मजदूरों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। क्षेत्र के आश्रमों में बने क्वारैंटाइन सेंटर का रहवासी विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि ऐसे में वहां संक्रमण का जोखिम बढ़ेगा। मजदूरों को छोटे वाहनों में भरकर लाया जा रहा है। इनमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हो रहा। जिन वाहनों की क्षमता 10 लोगों की है, उसमें 20 लोग आ रहे हैं।आंध्र प्रदेश के कुनावरम में मिर्च के खेतों में तुड़ाई का काम करने हर बार मजदूर जाते हैं। करीब 46 लोग वहीं से लौटे हैं। क्वारैंटाइन सेंटर का विरोध कर रहे ग्रामीणों को कुआकोंडा के सीईओ एसके टंडन ने समझाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। हंगामा बढ़ने की वजह से मजदूरों को पालनार आश्रम में ले जाया गया । भागे हुए 20 ग्रामीण 5 मई को कवारैंटाइन किया गया था। इन्हें तलाशने के लिए पंचायत सचिव सहित दूसरे कर्मचारियों को जिम्मा सौंपा गया है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today तस्वीर उस वक्त ली गई थी जब इन मजदूरों को क्वारैंटाइन किया जा रहा था दो दिन पहले, यही मजदूर भाग निकले। Full Article
0 10वीं व 12वीं की 92 हजार कॉपियां जांच कर बोर्ड भेजे By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT पहले चरण के मूल्यांकन के लिए आई 92 हजार उत्तरपुस्तिकाओं की जांच पूरी होते ही माध्यमिक शिक्षा मंडल की टीम ने बुधवार को जमा कर बोर्ड ले गई। इधर, दूसरे चरण में मूल्यांकन के लिए आई उत्तरपुस्तिकाओं की जांच जारी है। शिक्षक अपने घरों में गोपनीयता बनाते हुए मूल्यांकन कर रहे हैं। लॉकडाउन के चलते हुए भी मूल्यांकन का काम बड़ी सावधानियां से पूरा हो रहा है।जिला समन्वयक केंद्र प्रभारी एस चंद्रसेन का कहना है कि पहले चरण में मूल्यांकन के लिए आए उत्तरपुस्तिकाओं का जांच पूरा हो गया है और से बोर्ड को सौंप कर दिया गया है। दूसरे चरण का मूल्यांकन कार्य भी सप्ताहभर के भीतर पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण मे 19 हजार 132 कॉपियां भेजी गई है। इनका मूल्यांकन आगामी एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसमें हाई स्कूल के 7954 व हायर सेकेंडरी के 11178 उत्तरपुस्तिका है। बता दें कि जिले में बोर्ड परीक्षा के उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए एक ही केंद्र जिला मुख्यालय स्थित आदर्श उच्चतर माध्यमिक शाला को बनाया गया है।बोर्ड की दोनों कक्षाओं की परीक्षा अभी बाकीजानकारी के अनुसार अभी भी बोर्ड कक्षाओं की परीक्षा बाकी है। पहले व दूसरे चरण की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद तीसरे चरण की भी उत्तरपुस्तिकाएं जांच के लिए केंद्र आएगी। अभी दसवीं व बारहवीं की परीक्षा बाकी है। लॉकडाउन के चलते परीक्षा संपन्न नहीं हो पा रही है। 4 मई से बोर्ड के शेष विषयों की परीक्षा होनी थी, लेकिन तीसरे चरण का लॉकडाउन बढ़ते ही परीक्षा को स्थगित करना पड़ा। अभी नया आदेश नहीं आया है। जिला शिक्षा अधिकारी राबट मिंज ने बताया कि अब लॉकडाउन के बाद ही परीक्षा संपन्न कराई जाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 24 घंटे में 10 मिमी बारिश, 4 डिग्री गिरा तापमान By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT मई में भी बारिश का सिलसिला रुका नहीं है। बीती रात जिले में गरज चमक के साथ बारिश हुई। गुरुवार को इसका असर अधिकतम तापमान पर पड़ा। बुधवार का अधिकतम तापमान 41 डिग्री से गिरकर गुरुवार को 37 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार को भी सुबह6से8बजे के बीच हल्की बूंदाबांदी हुई। बीते24घंटे में10.7मिमी औसत बारिश जिले में हुई है। धमतरी,नगरी व कुरूद ब्लॉक में ही बारिश हुई। मगरलोड ब्लॉक सूखा रहा। बीते साल मई के अंतिम सप्ताह में बारिश हुई थी।गर्मी के इस सीजन में6मई को तापमान41.2डिग्री दर्ज हुआ था।3अलग-अलग चक्रवात के कारण दिनभर सूर्य तपने के कारण शाम4बजे तेज आंधी चली। हल्की बूंदाबांदी हुई। रात में ठंडी हवा के कारण तापमान गिरा और आधी रात के मौसम बदला तो बारिश हुई। गुरुवार तड़के 3से5बजे के बीच हुई तेज बारिश के बाद तापमान कम हो गया। सुबह8बजे फिर बारिश हुई।20अप्रैल को बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से धमतरी ब्लॉक के17गांवों व कुरूद के13गांव के1535.250हेक्टेयर फसल खराब हुई।आज बारिश की संभावनामौसम वैज्ञानिक डॉ.एचपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका दक्षिण तमिलनाडु तक0.9किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। इसके प्रभाव से8मई को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश,गरज-चमक के साथ छींटे या फिर ओलावृष्टि की संभावना है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 10 mm of rain in 24 hours, 4 degrees dropped Full Article
0 5 साल में 300 घायलों की बचाई जान, अब कोरोना से जंग में आगे By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT रेडक्रॉस का मतलब सेवा है। लोगों की जान बचाने, घायलों की सेवा करने से इसकी शुरुआत हुई। जिले में रेडक्रॉस वॉलंटियर्स यह उद्देश्य पूरा भी कर रहे हैं। 32 हजार युवा रेडक्रॉस में जुड़कर असहाय और पीड़ित मानवता की सहायता के लिए काम करते आ रहे हैं। 5 साल में जिले के 300 लोगों की जान सड़क दुर्घटना से बचाई है। वॉलंटियर्स शांति काल में देश के ज्वलंत मुद्दों पर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। आपदा में निरंतर निस्वार्थ भावना से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वच्छता, पर्यावरण में सबसे ज्यादा काम किया। वर्तमान में 465 वॉलंटियर्स लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने जागरूक कर रहे हैं। इन्हें पुरस्कार भी मिले हैं।केस 1: मौके पर दिया सीपीआर, धड़कनें चालू की8 अक्टूबर 2019 की रात नेशनल हाईवे पर पुट्टू ढाबे के पास अंधेरे सड़क में खड़े एक ट्रक से तेज रफ्तार बाइक टकरा गई। बाइक चालक दशरथ सिंह अचेत हो गया। सड़क से गुजर रहे रेडक्रॉस सोसायटी के जिला संगठक प्रदीप साहू ने रुककर राहगीरों की मदद से उसे बाहर निकाला। तुरंत सीपीआर देकर धड़कनें चालू कीं। जिला अस्पताल उपचार के लिए भेजा।केस 2: घायल को ऑटो चालक ने भर्ती करायाजून 19 में रात 10 बजे दुर्घटना हुई। इसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद ऑटो चालक दुर्घटना मित्र साहिल अहमद ने प्राथमिक इलाज दिया। घायलों अस्पताल में भर्ती कराया।केस 3: दुर्घटना मित्रों ने प्राथमिक इलाज दिया21 अक्टूबर 19 को 4 लोग रायपुर से लोग धमतरी की ओर आ रहे थे। मरौद के पास शाम करीब 7 बजे दुर्घटना हो गई। इन्हें मौके पर ही दुर्घटना मित्रों ने प्राथमिक इलाज दिया। भर्ती कराया।केस 4: डुबान क्षेत्र में भी मदद कर रहे वॉलंटियर्सडुबान क्षेत्र के बरपदर में बाइक सवार सुषेन पेड़ से जाकर टकरा गया। उसे फैक्चर हो गया। सिर में भी चोट आ गई। यहां दुर्घटना मित्र गोकरण यादव ने प्राथमिक इलाज दिया। अस्पताल भेजा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 300 injured lives saved in 5 years, now ahead of Corona in battle Full Article
0 रेड जोन में शादी पर पाबंदी लेकिन हम ग्रीन जोन में इसलिए 10 शर्तों के साथ 291 शादियों की अनुमति By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT कोरोना संक्रमण के कारण रेड जोन में विवाह करने की भी अनुमति नहीं है। लेकिन हमारा जिला ग्रीन जोन में है इसलिए यहां शादी के लिए सशर्त अनुमति मिल रही है। मई में शादी के लिए अब तक जिले में 291 परिवारों को अनुमति मिली है। यह सभी विवाह संबंध ग्रीन जोन में हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन 1 और 2 की अवधि में इस साल रामनवमीं, अक्षय तृतीया और विवाह मुहूर्त में करीब 500 शादियां टल गईं। अब लॉकडाउन 3.0 में जिला प्रशासन ने शादी करने वालों को सशर्त अनुमति दी है। जिले के धमतरी, कुरूद और नगरी ब्लॉक के एसडीएम ने करीब 291 लोगों को शादी की सशर्त अनुमति अब तक दी हैं। 10 शर्तो में सामूहिक भोज, सड़क पर बारात निकालने, आतिशबाजी पर रोक लगाई है। शादी में मौजूद हर व्यक्ति सैनिटाइजर और मास्क का हर हाल में उपयोग करेगा। ऐसे में अब लोग बगैर तामझाम के शादी कर रहे हैं। रेड जोन से बारात आने वाले किसी भी को अनुमति नहीं दी है।बाइक से आया दूल्हा, सिर्फ 13 लोग शामिल हुएरावां में 13 लोगों की मौजूदगी मे बुधवार को 1 घंटे में शादी हो गई। भैसबोड़ निवासी युवराज पिता खेलन ढीमर अपने पिता और 3 और रिश्तेदार के साथ बाइक से रांवा बारात लेकर आया। पं. संतोष पाठक ने पुनारद ढीमर की बेटी पूर्णिमा की शादी युवराज के साथ कराई। विवाह की रस्म के दौरान सभी लोग मास्क पहने थे। सैनिटाइज का उपयोग किया। लॉकडाउन में बगैर तामझाम के करीब 15 हजार में शादी हो गई। दूल्हा-दुल्हन के पिता खेलन ढीमर, पुनारद ढीमर ने बताया कि उन्होंने शादी कार्ड भी नहीं छपवाए थे। लॉकडाउन में खर्च कम हुआ। शादी भी सादगी के साथ हुई।कार्ड भी नहीं छपवा रहे, फिजूलखर्च भी रुकाशादी के लगभग सभी मुहूर्त खत्म हो गए। ऐसे में अधिकतर लोगों ने शादियां टाल दी हैं। जो लोग शादी कर भी रहे हैं, उन्हें पहले प्रशासन से अनुमति लेकर मुश्किल से 15 लोग को बुलाना होगा। कई लोग शादी कार्ड भी नहीं छपवा रहे है। कार्ड का खर्च बच रहा है। डीजे, पॉर्टी, बैंड बाजा-धुमाल, सामूहिक भोज, बारात, माइक टेंट, कैमरे का भी खर्च बच रहा है।नियम के विरुद्ध शादी करने पर होगी एफआईआरकुरूद एसडीएम योगिता देवांगन, नगरी एसडीएम सुनील शर्मा ने बताया कि जिन लोगों ने आवेदन कर अपने विवाह की अनुमति मांगी है। उनमें ज्यादातर वे शादियां हैं, जो कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन 1 और लॉकडाउन 2 की अवधि में टाल दी गई थीं। विवाह के लिए महीनेभर में 291 आवेदन आए हैं। इनमें कुरूद में सबसे ज्यादा 225, नगरी में 16 और धमतरी में 50 आवेदन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नियम विरुद्ध शादी की सूचना पर तुरंत एफआईआर की जाएगी।ये शर्तें... सामूहिक भोज भी नहीं होगा शादी समारोह में वर-वधु, पंडित सहित दोनों पक्षों के अधिकतम 15 व्यक्ति शामिल होंगे। शादी समारोह के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य हैं। सड़क पर बारात निकालने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। ध्वनि विस्तारक यंत्र की अनुमति नहीं होगी। विवाह में सामूहिक भोज पर प्रतिबंध होने के साथ ही आतिशबाजी पर रोक है। चार पहिया वाहन में ड्राइवर सहित 3 या 4 लोगों से ज्यादा को बैठाने की अनुमति नहीं है। सैनिटाइजर और मास्क लगाना अनिवार्य है। विवाह में शामिल होने वाले व्यक्तियों की जानकारी थाना, ग्राम व नगरीय निकाय में देना जरूरी हैं। अस्वस्थ व्यक्ति को विवाह में शामिल नहीं किया जा सकता है। दूसरे जिलों से आने वाले लोगों को संबंधित जिला प्रशासन से अनुमति लेकर आना होगा। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन का पालन कराने की बात भी लिखी गई है।नवंबर- दिसंबर के बाद करना होगा 3 महीने इंतजारज्योतिषी पं. होमन शास्त्री के अनुसार 29 मई तक 5 और 30 जून तक 8 दिन मुहूर्त हैं। नवंबर में देवउठनी पर 26 व 27 को व दिसंबर में 1, 2, 6, 7, 8, 9 व 11 को मुहूर्त हैं। जिनके विवाह इन तिथियों में नहीं हो पाएंगे, उन्हें 3 माह बाद 22 अप्रैल 2021 तक रुकना पड़ेगा। 16 फरवरी 2021 को बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त के कारण विवाह हो सकते हैं।अगले साल तक शादी की तारीख टलीशहर में ज्यादातर लोगों ने अब नए साल में शादी करने इस साल शादी को रद्द कर दिया है। होटल संचालकों एवं मैरिज लॉन के मालिकों के अनुसार सारी बुकिंग कैंसिल होने के बाद लॉकडाउन के बीच सरकार की गाइडलाइन के बाद भी मई, जून में लोग शादी नहीं करना चाह रहे है। ज्यादातर लोगों धूमधाम से अगले साल शादी करेंगे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Ban on marriage in red zone but we allow 291 marriages in green zone with 10 conditions Full Article
0 आंधी में 80 घरों के छप्पर उड़े, बिजली गिरने से 100 से ज्यादा तोतों की मौत By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT पंडरिया ब्लॉक के वनांचल गांवों में बुधवार दरमियानी रात आंधी से जमकर तबाही हुई। लगभग 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली, जिससे इलाके के गांवों में लगभग 80 घरों के छप्पर उड़ गए। सबसे ज्यादा नुकसान नेऊर से लगे ग्राम महिडबरा और कुशियारी में हुआ है। यहां 20 से अधिक विशालकाय पेड़ धराशायी हो गए हैं। वहीं गरज के साथ बिजली गिरने से 100 से अधिक तोते व अन्य पक्षियों की मौत हो गई है।करीब डेढ़ तक घंटे चली आंधी के डर से ग्रामीण रातभर नहीं सो पाए। घरों के बाहर आग सेंकते हुए ग्रामीणों ने रात बिताई। यही नहीं, आंधी चलने से 14 से अधिक बिजली खंभे भी गिर गए हैं। लाइन टूटने से कुई सब- स्टेशन अंतर्गत आने वाले 13 से अधिक गांवों में बुधवार रात से बिजली बंद है, जो गुरुवार दोपहर तक बहाल नहीं हो पाई थी। आंधी से क्षेत्र में ग्रामीणों को काफी नुकसान पहुंचा है। आंधी, बारिश से बड़ी संख्या में पेड़ गिर गए हैं।सूचना पर गुरुवार सुबह राजस्व विभाग की टीम सर्वे के लिए ग्राम महिडबरा और कुशियारी पहुंची। पटवारियों ने आंधी से टूटे घरों का सर्वे कर नुकसान का आंकलन किया। पंडरिया तहसीलदार संजय विश्वकर्मा ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट आने पर शासन के नियमानुसार प्रभावितों को मुआवजा देंगे।मैनपुरा में बिजली गिरी, किसी को नुकसान नहींनगर से सटे मैनपुरा में बुधवारा रात करीब 11 बजे तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी। बिजली बस्ती में गिरी, लेकिन रात होने की वजह से किसी को नुकसान नहीं हुई। बिजली गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि सुनकर लोगों भयभीत हो गए। पेड़ गिरने से घर का छप्पर ढह गया, राशन व सामान खराब हो गए, बढ़ी परेशानीग्राम महिडबरा में जागेश्वर धुर्वे व रमेश मरावी के घर पर पेड़ गिर गया। हगरु पन्द्राम के घर का छप्पर गिर गया और घर में रखे समान व राशन में पानी में भीग कर खराब हो गए। ग्रामीण काशीराम, झूल बाई, गुलाबा बाई, झमुराम, नंदराम, गुलाब, पुसाराम समेत कई लोगों के घर का छप्पर उड़ने से रतजगा करना पड़ा। इसी तरह ग्राम कुशियारी में महेश मरावी, सुखराम, मानसिंह बैगा, केवल बैगा और बुधराम समेत 10 घरों के छप्पर उड़ गए हैं।बोड़ला में 8 और पंडरिया में 4 मिमी बारिश दर्जरायपुर के मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि कबीरधाम जिले के बोड़ला तहसील में 8 मिमी और पंडरिया तहसील में 4 मिमी बारिश का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक मौसम पर बदलाव उसकी गतिविधियों में प्रभाव डालने में खासकर 3 सिस्टम बन गए हैं। इनमें दक्षिण पश्चिम राजस्थान में ऊपरी हवाओं में चक्रवात बनने के साथ ही दक्षिण पूर्व मध्यप्रदेश में भी ऊपरी हवाओं में चक्रवात बना हुआ है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today More than 100 parrots died due to lightning in 80 homes Full Article
0 बिना जांच के राजनांदगांव से 3 बसों में भेज दिए 150 मजदूर, बढ़ी फिक्र By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT कोरोना के मामले में कबीरधाम जिला रेड जोन में पहुंच गया है। इस बीच दूसरे राज्यों से प्रवासी श्रमिकों की वापसी का सिलसिला शुरु हो चुका है। इससे भी कहीं अधिक चिंता का विषय यह है कि मजदूरों की घर वापसी को लेकर अफसरों में तालमेल की कमी है। इसकी बानगी बुधवार की रात लगभग दो बजे देखने को मिली। बिना जांच के राजनांदगांव से 3 बसों में 150 मजदूरों को कवर्धा भेज दिए । स्थानीय प्रशासन को इसकी खबर तक नहीं दी गई ।रात के अंधेरे में अचानक मजदूरों के पहुंचने की खबर से अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। कवर्धा एसडीएम विपुल गुप्ता ने बताया कि राजनांदगांव से आए मजदूरों को किसी तरह उनके घर जाने से रोका गया और भागूटोला राहत शिविर में ठहराए।राजनांदगांव से एक बस मजदूरों को भेजने की सूचना थी। लेकिन रात में ही अचानक 2 अन्य बसों में लगभग 100 मजदूर पहुंच गए। कवर्धा-राजनांदगांव बॉर्डर पर मजदूरों को उतारकर बस वापस राजनांदगांव चली गई। बस से उतरने पर कई मजदूर झोला-गठरी लेकर अपने गांवों की ओर चल पड़े। तभी प्रशासन को इसकी खबर मिली। आनन-फानन में मजदूरों को रोका गया और भागूटोला में बने राहत शिविर में लेकर आए।नागपुर और हैदराबाद से लौटे थे सभी मजदूर : बुधवार की रात राजनांदगांव से बसों में कवर्धा पहुंचे सभी मजदूर कमाने-खाने के लिए नागपुर (महाराष्ट्र) और हैदराबाद (तेलंगाना) गए थे। लॉकडाउन के चलते पिछले एक महीने से वहां फंसे थे। उसके बाद पैदल चलकर राजनांदगांव पहुंचे। वहां से इन्हें बसों में बैठाकर कवर्धा भेजा गया। इनमें से ज्यादातर मजदूर कबीरधाम जिले के पंडरिया और मुंगेली जिले के विभिन्न गांवों के रहने वाले थे। कवर्धा पहुंचने पर मुंगेली के मजदूरों को वहां के लिए रवाना कर दिए। वहीं पंडरिया के मजदूरों को संबंधित क्षेत्र में बने सेंटर में क्वारेंटाइन किया गया है। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की घर वापसी का सिलसिला जारी हो गया है। इस दौरान कहीं-कहीं पर अव्यवस्था भी हो रही है।बगैर सूचना के 2 अन्य बसों में भेज दिए मजदूरकवर्धा एसडीएम विपुल गुप्ता ने बताया कि महाराष्ट्र और हैदराबाद से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक राजनांदगांव पहुंचे हैं। वहां से श्रमिकों की लिस्टिंग कर उन्हें उनके जिलों में भेजा जा रहा है। बुधवार को राजनांदगांव से सूचना दी थी कि एक बस में लगभग 40 मजदूरों को भेज रहे हैं, जो पंडरिया और मुंगेली के रहने वाले हैं। उनके आने के बाद अचानक दो अन्य बसों में आए मजदूरों को बॉर्डर पर उतार दिए। उसकी सूचना राजनांदगांव से नहीं दी गई थी।आज 500 मजदूरों को भेजेंगे, बॉर्डर पर निगरानी बढ़ाईराजनांदगांव में बड़ी संख्या में मजदूर पहुंचे हुए हैं। कबीरधाम जिले के 500 मजदूरों को शुक्रवार को राजनांदगांव से रवाना किया जाएगा। इसे लेकर जिले के बॉर्डर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। ताकि बसों से उतरने के बाद मजदूर अपने घर न जा पाएं। एहतियात के लिए पहले उनकी स्क्रीनिंग कराई जाएगी। फिर 21 दिन के लिए अलग-अलग सेंटर में उन्हें क्वारेंटाइन करेंगे ।500 में से 337 लोगों की जांच रिपोर्ट आई निगेटिवरेंगाखार व समनापुर जंगल में एक साथ 6 कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कोविड- 19 की जांच के लिए सैंपल की संख्या बढ़ाई है। जिले में अब तक 500 से अधिक सैंपल भेजे जा चुके हैं। इनमें से 337 की जांच रिपोर्ट निगेटिव आने से राहत है। अब भी 150 से अधिक सैंपल की जांच रिपोर्ट आना बाकी है। सीएमएचओ डॉ. एसके तिवारी के मुताबिक कंटेनमेंट जोन में शामिल रेंगाखार, समनापुर जंगल, चमारी, तितरी गांव में लोगों की रैपिड किट से जांच की जाएगी। जांच के लिए अलग-अलग टीमें बनी है । Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 150 laborers sent in 3 buses from Rajnandgaon without investigation, worry increased Full Article
0 सभी जनपदों में बनाए जाएंगे 10 बिस्तर के क्वारेंटाइन होम By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT जिले के सभी जनपदों में 10-10 बिस्तर के क्वारेंटाइन सेंटर बनाए जाएंगे। संबंधित जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को सेंटर की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को ब्लॉक स्तर के पंचायत के क्वारेंटाइन सेंटर में रहने होंगे।कलेक्टर केएल चौहान ने गुरुवार को नोवल कोरोना वायरस के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर बनाने संबंधी मॉडल कॉलेज कोविड-19 अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ली। कलेक्टर ने जिले के दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस लाने एवं क्वारेंटाइन सेंटर बनाने के लिए चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए।इससे पहले विधायक शिशुपाल शोरी और कलेक्टर केएल चौहान ने मॉडल कॉलेज में कोविड-19 अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में लगाई गई आईसीयू बिस्तरों को भी देखा। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कॉलेज के बीच में पौधारोपणऔर कारपेट घास लगाने सीएमओ को कहा।कलेक्टर ने सेंटर में मजदूरों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, मास्क लगाने, साबुन से हाथ धोने संबंधी जानकारी देने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने कहा गया है। कलेक्टर ने कहा ब्लॉकों में जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने सेंटर के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर सूची जिला कार्यालय में उपलब्ध कराने का आदेश दिया। बैठक में सीएमएचओ डॉ. जेएल उईके, डिप्टी कलेक्टर डॉ. कल्पना धु्रव, सिविल सर्जन डॉ. आरसी ठाकुर, डॉ. डीके रामटेके, नगर पालिका सीएमओ सौरभ तिवारी, डीपीएम डॉ. निशा मौर्य व सभी बीएमओ उपस्थित थे। मजदूरोंको क्वारेंटाइन सेंटर में ही रहना होगा 14 दिनअन्य राज्यों से आने वाले मजदूरों को 14 दिन क्वारेंटाइन सेंटर में ही रहना होगा। क्वारेंटाइन अवधि पूरा किए बिना उन्हें किसी भी कीमत पर घर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। क्वारेंटाइन सेंटर के आस-पास के क्षेत्र को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित होगा। मजदूर कौन से राज्य के किस जोन के जिले से आ रहे हैं। इसकी सूची बनाकर अधिकारियों को दी जाएगी। जनपद स्तर पर वॉलेंटियर्स की व्यवस्था एनसीसी, एनएसएस और रेडक्रॉस के माध्यम से होगा। ब्लॉक स्तर पर सीईओ, बीईओ, बीआरसी एवं अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी होगी। जनपद स्तर पर आश्रम छात्रावासों, स्कूलों एवं पंचायत भवनों में क्वारेंटाइन सेंटर बनाकर सफाई, पेयजल, बिजली, भोजन की व्यवस्था होगी।क्वारेंटाइन सेंटर में कर्मचारियों की लगाई गई ड्यूटीक्वारंटाइन सेंटर बालक छात्रावास एवं विशिष्ट कन्या छात्रावास ईमलीपारा में आदिवासी विकास विभाग के उपायुक्त विवेक दलेला ने कर्मचारियों की क्वारेंटाइन सेंटर आवश्यक व्यवस्था एवं सहयोग के लिए ड्यूटी लगाई है। बालक छात्रावास में प्रीतराम मेरिया, सुशील पटेल, आनंदराम, माखन सलाम, आदि की ड्यूटी लगाई । Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 10 bed Quarantine Homes to be built in all districts Full Article
0 बस्तर में 60 से ज्यादा हैं मरीज, धुरवा और हल्बा समाज में सबसे अधिक By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT बस्तर जिले में थैलेसिमिया के मरीजों की संख्या 60 से ज्यादा है। कुछ साल पहले तक जहां बीटा थैलेसिमिया के रोगियों की संख्या काफी कम थी, वहीं अब ये बढ़कर करीब 60 से ज्यादा हो गए है। मुख्य रूप से ये बीमारी धुरवा और हल्बा समाज के लोगों के देखी जा रही है।थैलेसिमिया से पीड़ित मरीजों में 5 से 10 साल के बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। 2017 में दरभा ब्लाॅक के नक्सल प्रभावित इलाके ककालगुर, पेदावाड़ा, मांझीपाल और कोटमसर में मानव विज्ञान सर्वेक्षण द्वारा धुरवा समाज के लोगों का ब्लड सैंपल लेकर जांच करवाया, जिसमें 225 में से 19 में सिकलसेल और 14 लोगों में बीटा थैलेसिमिया मिला।नियमित रूप से मेकॉज पहुंच रहे 25 मरीजों के लिए मुफ्त दिया जा रहा खून: थैलेसिमिया के 25 मरीज मेकॉज नियमित रूप से आ रहे हैं, जिन्हें मुफ्त में रक्त की व्यवस्था करवाई जा रही है। बताया जाता है कि बस्तर के मधोता में कुछ मामले पिछले महीनों देखने को मिले थे। वहीं दरभा इलाके में भी इसके मरीज खासी संख्या में हैं। जानकारी के मुताबिक मेकॉज पहुंचने वाले 25 मरीजों में पुरूषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है। महारानी अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. बीएस बड़गे बताते हैं कि इन मरीजों को नियमित रूप से खून की जरूरत होती है।क्या है थैलेसिमियाखून में मौजूद प्रोटीन में ग्लोब्यूलिन बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ी से थैलेसिमिया होता है। इसके कारण रेड ब्लड सेल्स (आरबीसी) तेजी से नष्ट होते हैं और खून की कमी होने लगती है। ब्लड की ज्यादा कमी होने पर रोगी को खून चढ़ाना पड़ता है। बार-बार ब्लड चढ़ाने के कारण शरीर में एक्स्ट्रा आयरन जमा होने लगता है। यह दिल, लीवर और फेफड़ों में पहुंचकर जानलेवा बन जाता है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 दो बसों में मुंगेली भेजे गए 70 मजदूर पर दूरी नहीं By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT नगरनार इस्पात संयंत्र में काम कर रहे मुंगेली जिले के मजदूरों को वापस भेजने के लिए प्रशासन ने बस की व्यवस्था की। बताया जाता है कि गुरुवार को 70 मजदूरों को मुंगेली भेजने के लिए 2 बसों की व्यवस्था की गई थी। बसों में हालात ऐसे रहे कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता कहीं नहीं दिखा।तेलंगाना में आए मजदूर दिन-रात चलते रहे, खम्मम में पुलिस ने दिलाई गाड़ी: इधर तेलंगाना के रंगारेड्डी में फंसे दरभा ब्लॉक के 70 में से 27 मजदूर दरभा लौट चुके हैं। ये मजदूर गुरुवार को अलसुबह दरभा के गुमड़पाल पहुंचे। यहां उन्हें डीएवी मॉडल स्कूल में क्वारेंटाइन पर रखा गया है। बताया जाता है कि बाकी मजदूर पीछे ही छूट गए हैं, जो आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे। हालांकि उनकी थर्मल थर्मामीटर से की गई जिसमें तापमान सामान्य मिला, लेकिन ये लोग 14 दिनों के बाद ही अपने गांवा लौट पाएंगे। इससे पहले वे जैसे ही खम्मम पहुंचे, वहां तैनात पुलिस के जवानों ने उनके लिए खाने की व्यवस्था की। फिर बॉर्डर तक छोड़ने गाड़ी भी दिलाई।गोवा में भी फंसे 60 मजदूर: इधर गोवा की एक कंपनी में काम कर रहे दरभा ब्लॉक के ही 60 मजदूर भी फंसे हैं। इन मजदूरों के परिजन उन्हें बार-बार बुला रहे हैं लेकिन कोई भी साधन नहीं होने के कारण वे निकल नहीं पा रहे हैं। छिंदावाड़ा के चक्रो ने बताया कि उसके पिता के बीमार होने के कारण घरवाले बुला रहे हैं, लेकिन वह वापस आ नहीं सकता।एक बस में 33 तो दूसरी बस में भेजे गए 37 मजूदरमुंगेली जिले के 70 मजदूरों को 2 बसों में भेजा गया। बसों के 2 बाय 2 सीटर थी। इसमें एक में जहां 33 और दूसरे में 37 मजदूरों को सवार किया गया। आलम ये रहा कि कही से भी सामाजिक दूरी का पालन होता नहीं दिखा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today No distance for 70 laborers sent to Mungeli in two buses Full Article
0 लॉकडाउन में छूट, 8 दिनाें में 3000 बढ़े हाेम क्वारेंटाइन By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:30:00 GMT लॉकडाउन-3 में आने जाने की छूट मिलने से दूसरे राज्याें से प्रदेश में आने वालाें की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले आठ दिनों में शुक्रवार तक करीब 3000 लोग दूसरों राज्यों से छत्तीसगढ़ लौटे हैं। इन सभी को होम क्वारेंटाइन किया गया है। सरकारी क्वारेंटाइन सेंटरों में भी 100 लोग बढ़ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में क्वारेंटाइन किए गए लोगों के संख्या बढ़ने की संभावना है। इसमें प्रवासी मजदूर शामिल हैं। उनके लिए हर गांव के बाहर क्वारेंटाइन सेंटर बनाया जा रहा है। राज्य में अब तक 20,432 लोगों को होम क्वारेंटाइन किया जा चुका है। 148 सरकारी क्वारेंटाइन सेंटर में 582 कोरोना संदिग्धों को रखा गया है। 30 अप्रैल को 17 हजार होम क्वारेंटाइन थे। अभी इनकी संख्या बढ़ चुकी है। इस बीच सरकारी क्वारेंटाइन सेंटर 138 से बढ़ाकर 148 कर दिए गए हैं। इन सेंटरों में 2,991 लोगों को एक साथ रखने की व्यवस्था है। अधिकारियों के अनुसार अन्य राज्यों में फंसे कई लोग पास लेकर तो कई बिना पास आ रहे हैं। ये महाराष्ट्र के अलावा मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना व झारखंड के रास्ते से आ रहे हैं। एहतियात के तौर पर उन्हें 14 दिनों के क्वारेंटाइन में रखा जा रहा है, ताकि कोरोना का संक्रमण हो तो क्वारेंटाइन के दौरान उसके लक्षण सामने आ जाए और तुरंत इलाज शुरू किया जा सके। इससे कोरोना का संक्रमण फैलेगा भी नहीं। एम्स में ड्यूटी कर रहे अंबेडकर अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों को भी निमोरा में रखा गया है। वे वहीं से ड्यूटी आना-जाना कर रहे हैं। प्रदेश में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को नजदीकी अस्पताल में जानकारी देने व स्वास्थ्य की जांच कराने को कहा जा रहा है। लोग टोल फ्री नंबर 104 पर आने-जाने वालों की जानकारी दे सकते हैं। इस नंबर पर लोग अपने अपने पड़ोस में दूसरे राज्यों से आने वालों की जानकारी भी दे सकते हैं। कोरोना सेल के मीडिया प्रभारी डॉ. अखिलेश त्रिपाठी के अनुसार क्वारेंटाइन लोगाें की सख्ती से मानीटरिंग की जा रही है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 47 दिनाें बाद जिले में खुले पंजीयन कार्यालय दो दिन में मिला 20 लाख रुपए का राजस्व By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:30:00 GMT जमीनों की रजिस्ट्री के लिए जिले के उप पंजीयक कार्यालय बुधवार यानी 6 मई से शुरू हो गए हैं। दो अलग-अलग दिनों में दफ्तर खुलते ही 67 लोगों ने जमीनों की रजिस्ट्री कराई। इससे 20 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। ये पक्षकारों को रजिस्ट्री कराने के लिए ई-अपाइंटमेंट लेना पड़ा था तब जाकर उनकी रजिस्ट्री हो पाई है।कोरोना वायरस के चलते ये दफ्तर 47 दिनों तक बंद थे। ग्रीन जोन जिला घोषित होने के बाद पक्षकारों को जमीनों की रजिस्ट्री कराने राहत दी गई है। इसमें भी अधिक रजिस्ट्री वाले जिले को ए, बी व सी केटेगरी में बांटा गया है। जिला पंजीयक अधिकारी दीपक मंडावी का कहना है कि अ वर्ग वाले उप पंजीयक प्रतिदिन खुलेंगे। बी वर्ग वाले सप्ताह में दो दिन एवं सी वर्ग वाले एक दिन खुलेंगे। बुधवार व शुक्रवार को दफ्तर खुलते ही 67 पक्षकारों ने रजिस्ट्री कराई है। रजिस्ट्री कराने के पूर्व सोशल डिस्टेंसिंग व हस्ताक्षर करने के पूर्व सैनिटाइजर कराया जा रहा है। वहीं दफ्तर खुलने के पूर्व कार्यालय को सैनिटाइज किया जाता है। साथ ही एक पंजीयन के समय एक-एक करके पक्षकारों को हस्ताक्षर के लिए बुलाया जाता है। इसके पूर्व उसे सैनिटाइज किया जाता है। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के कारण क्रेता और विक्रेता अपनी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे थे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 पिछले साल से 500 आवेदन कम आए By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:30:00 GMT निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) की आरक्षित सीटों के लिए आवेदन 30 मई तक स्वीकार किए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया फिर शुरू हो चुकी है। कबीरधाम जिले के 177 प्राइवेट स्कूलों में आरटीई की 1579 सीटें हैं। इसके लिए शिक्षा विभाग को 1671 आवेदन मिले हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस साल ऑनलाइन आवेदन में कमी आई है। गत वर्ष लगभग 2200 आवेदन ऑनलाइन आए थे।सीटों के आवंटन के लिए जून के पहले सप्ताह में लॉटरी होने की संभावना है। आवेदन कम आने की प्रमुख वजह लॉकडाउन है। क्योंकि ऑनलाइन आवेदन होने के कारण कम्प्यूटर सेंटर व सीएससी सेंटर बंद हैं। इस कारण पालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में लाॅकडाउन में कई प्रकार की छूट दी गई है। इसके चलते बीते एक हफ्ते में आवेदन की संख्या बढ़ी है। कुछ दिन पहले आवेदन की प्रक्रिया को शिक्षा विभाग ने स्थगित किया था। अब फिर फॉर्म स्वीकार किए जा रहे हैं। डीईओ केएल महिलांगे के मुताबिक अब भी 30 मई तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं।फॉर्म भरने समस्या हो, तो नोडल से संपर्क करेंडीईओ कार्यालय के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा बीते वर्ष से की गई है। पूर्व में ऑफलाइन आवेदन लिए जाते थे। इस साल ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में बने नोडल सेंटर की मदद से भी आरटीई के लिए आवेदन भरे जाते हैं। स्कूल अभी बंद हैं, इसलिए पालकों को परेशानी हो रही है। फिर भी पालक संबंधित स्कूल में जाकर जानकारी ले सकते हैं। ज्यादातर नोडल सेंटर हाई व हायर सेकंडरी स्कूल को बनाया गया है। ऑनलाइन पोर्टल eduportal.cg.nic.in/rte के जरिए फॉर्म भरें।पिछले वर्ष सर्वर के कारण हुई थी परेशानीबीते साल लॉटरी के दौरान सर्वर की समस्या सामने आई थी, लेकिन एक बार फिर पुरानी प्रक्रिया से ही ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन के साथ लॉटरी भी ऑनलाइन जारी किए जाते हैं। ऐसे में लॉटरी के दौरान सर्वर की समस्या बनी होती है। बीते साल तो लॉटरी जारी करने के दौरान एक ही बच्चे का नाम दो से तीन स्कूल में आ गया था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 चौकी प्रभारी ने मांगे 40 हजार, काम हुआ न ही रुपए लौटाए, अब एसपी से शिकायत By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:30:00 GMT चाकूबाजी में गिरफ्तार आरोपी दुर्गेश साहू के पिता गंगाधर साहू ने दशरंगपुर चौकी प्रभारी मानसिंग पर ठगी का आरोप लगाया है। मामले की लिखित शिकायत पुलिस कप्तान केएल ध्रुव से की गई है।शिकायतकर्ता गंगाधर पिता संतू साहू उमरावनगर जिला बेमेतरा का रहने वाला है। उसने बताया कि उसका बेटा दुर्गेश साहू 21 फरवरी को चाकूबाजी के मामले में पकड़ा गया था। घटना के दूसरे यानी 22 फरवरी को सूचना मिलने पर वह अपने पिता व साला के साथ दशरंगपुर चौकी पहुंचा। उसने आरोप लगाया कि चौकी प्रभारी मानसिंग ने मामला खत्म करने के लिए 40 हजार रुपए की मांग की। बेटे को बचाने व कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसने से बचने के लिए गंगाधर ने पैसे दे दिए। 6 मई को कोर्ट में उसके बेटे की पेशी थी। पेशी के पहले मेडिकल जांच के लिए पैसे लगेंगे करके पुलिस ने 3 हजार रुपए और ले लिए। लेकिन कोर्ट में पेशी के बाद उसके बेटे को जेल भेज दिया गया। अब शिकायतकर्ता रकम वापस मांग रहा है।वकील के बहकावे में आकर की शिकायत: चौकी प्रभारीमामले में चौकी प्रभारी मानसिंग ने सफाई देते हुए कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं। वकील के बहकावे में आकर गंगाधर ने उन पर गलत व झूठा आरोप लगाया है। दरअसल, ग्राम दशरंगपुर में दशरथ तालाब शिव मंदिर के पास एक पान दुकान है। घटना की रात पीड़ित दुकानदार कमलेश साहू अपने दुकान में आए अपने दोस्त से बातचीत कर रहा था। तभी आरोपी दुर्गेश साहू उमरावनगर, जिला बेमेतरा वहां पहुंचा। गुटखा मांगकर खाया। दुकानदार कमलेश ने जब उससे पैसे मांगे, तो आरोपी बहस करने लगा। विरोध करने पर आरोपी दुर्गेश ने जेब से चाकू निकाला और दुकानदार कमलेश के पेट में मार दिया था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 हर माह घरेलू उत्पीड़न के 20 केस आते थे लेकिन लॉकडाउन में दस मामले ही आए By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:30:00 GMT सिंगारभाठ के सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू उत्पीड़न सहित अन्य केस आते हैं। यहां घरेलू उत्पीड़न और अन्य केस का निराकरण परामर्श के माध्यम से किया जाता है, लेकिन लाॅकडाउन की वजह से दूरस्थ जगह से आने वाले लोग पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। लाॅकडाउन की अवधि में घरेलू उत्पीड़न के 10 नए केस आए, जबकि सेंटर में हर माह 20 केस पहुंचते थे। लॉकडाउन खत्म होने के बाद केस बढ़ने की संभावना है।सखी वन स्टॉप सेंटर का संचालन मार्च 2017 से हो रहा है। यहां घरेलू हिंसा सहित अन्य केस से पीड़ित महिलाओं को कुछ माह का आश्रय दिया जाता है और संस्था के परामर्श केंद्र में उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाता है। अभी तक 504 प्रकरण आ चुके हैं, जिसमें 351 केस का निराकरण हुआ है और 153 केस लंबित है। 22 मार्च से लाॅकडाउन लगा है।फिर भी सखी वन स्टाॅप सेंटर कार्यालय खुल रहा है, लेकिन अभी शिकायत करने वालों के साथ पुराने केस का निपटारा कराने काफी कम लोग पहुंच रहे हैं। लाॅकडाउन के दौरान 32 केस के पक्षकारों को बुलाया गया था, लेकिन इसमें से सिर्फ 7 पक्षकार ही पहुंचे। 25 केस में परामर्श के लिए कोई पक्षकार नहीं पहुंचा। इसमेें पखांजूर, केशकाल, चारामा, भानुप्रतापपुर, कोरबा के लोगों को पहुंचना था। उन्हें मार्च और अप्रैल में बुलाया गया था, लेकिन दूरी अधिक होने व लॉकडाउन के चलते नहीं पहुंच पाए।आसपास गांव के लोग पहुंच रहे, फोन से ही समझाइश दे रहे : सखी वन स्टॉप की आईटी वर्कर प्रीति निर्मलकर ने कहा आसपास गांव के लोग जरूर पहुंच रहे हैं, लेकिन दूरस्थ गांव से पहुंचने वाले लोग लाॅकडाउन की वजह से नहीं पहुंच पा रहे हैं। फिर भी उन्हें फोन से ही उचित समझाइश दी जा रही है। शहर और आसपास गांव के लोग ही सेंटर के परामर्श केंद्र में अपनी समस्या का निराकरण कराने पहुंच रहे हैं। अब सिर्फ 2 को ही अनुमतिकिसी भी पक्ष में अब दो ही लोगों को बुलाया जा रहा है। पहले किसी मामले में काफी सारे लोग सखी वन स्टॉप सेंटर पहुंचते थे, लेकिन अब दो ही लोगों को पहुंचना है। इसमें लोगों को मास्क लगाकर काम करना है और सैनिटाइजर भी कार्यालय में रखा गया है। सखी सेंटर पहुंचने वाले लोगों का हाथ सैनिटाइजर से धुलाया जा रहा है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 ट्रक से 210 किमी तक लाने के वसूले 8 साै, फिर रास्ते में छोड़ा By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:30:00 GMT आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से बड़ी संख्या में यहां के मजदूरों का वापस आना जारी है। सरकार इन्हें वापसी के लिए साधन मुहैया कराने का दावा कर रही है। लेकिन असलियत कुछ और बयां कर रही है। इन्हें आने के लिए बस की कोई व्यवस्था नहीं है। ये लोग सामान के साथ किसी तरह ट्रकों और पिकअप वाहन में बैठकर यहां पहुंच रहे हैं। इसमें भी इन मजदूरों से मनमाना किराया भी वसूल किया गया है। गुरुवार रात को आंध्रप्रदेश के तेलीपाका से 1 ट्रक, 2 मैजिक वाहन और 2 पिकअप वाहन से नकुलनार लौटे 164 मजदूरों से हर व्यक्ति का 8 सौ रुपए किराया वसूला गया, जबकि तेलीपाका से नकुलनार की दूरी करीब 200 किलोमीटर ही है।88 मजदूर 1 ट्रक और 2 मैजिक वाहन से नकुलनार पहुंच गए थे जिन्हें प्रशासन ने पोंदुम के क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया गया। लेकिन बाकी 76 मजदूरों को 2 पिकअप वाहन के चालक कुछ किलोमीटर पहले ही जंगल में छोड़कर वापस चले गए। ये 76 मजदूर रातभर नकुलनार के अासपास जंगल में ही भटक रहे थे। सुबह ही इन मजदूराें काे ठिकाना मिल सका और इन्हें कुआकाेंडा के पाेटाकेबिन-2 में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर में शिफ्ट किया गया। ये सभी मजदूर टेटम, कोटरीपाल और ऐटेपाल गांव के हैं जो आंध्रप्रदेश में मजदूरी करने गए थे।76 मजदूरों ने जंगल में बिताई रात, सुबह सिर पर सामान लादकर पैदल गांव तक आएआसपास के जंगल में भटक रहे टेटम पंचायत के गंगा, काेसा, पांडू, मंगलू और साेमड़ू ने बताया कि ट्रक वाले ने हर व्यक्ति का किराया 8-8 साै रुपए वसूल किया है। इसके बाद भी उन्हें रास्ते पर ही छाेड़ दिया। जहां से उन्हें सिर पर सामान काे लादे पैदल ही गांव तक आना पड़ा। रात में हितावर के हुर्रापारा के जंगल में उन्होंने रात बिताई और सुबह उन्हें ठिकाना मिल सका। तहसीलदार विद्याभूषण साव ने बताया कि इन सभी मजदूरों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था कराई गई है। रात में कोंटा बार्डर पार करने पर रोक लगाई जाएगी।सूचना मिलने पर कोंटा बॉर्डर भेजी जा रही बसेंकलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि मजदूरों को सीधे दूसरे राज्यों से वापस लाने शासन स्तर से ही निर्णय लिया जा रहा है। वहां से जो भी निर्देश मिलेंगे कार्रवाई होगी। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना की सरकारें व ठेकेदार ट्रकों व पिकअप वाहनों में मजदूरों को कोंटा बॉर्डर पर लाकर छोड़ रहे हैं। सूचना मिलने पर दंतेवाड़ा से बसें भेजी जा रही हैं। कोंटा बॉर्डर पर तहसीलदार व एसडीएम यह देख रहे हैं कि ये किन जिलों के हैं। पास के साथ मजदूरों को उन्हीं गाड़ियों में दंतेवाड़ा भेज रहे हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 8 sacks recovered from the truck for 210 km, then left on the way Full Article
0 अब मौके पर कोरोना जांच, रोज 90 सैंपल जरूरी By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:44:00 GMT राजधानी में अब हेल्थ विभाग का अमला फोन पर मिलनेवाली सूचनाओं और शिकायतों पर मौके पर जाकर कोरोना जांच के लिए स्वाब के सैंपल लेगा। अभी एम्स और मेडिकल कालेज में कोरोना जांच की जा रही है, लेकिन यह जांच उनसे अलग होगी। इसके लिए अलग-अलग टीमें बनाकर रोजाना 90 सैंपल कलेक्ट करना और जांच करवाना हेल्थ अमले के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।यह प्रयोग इसलिए किया जा रहा है, ताकि राजधानी के ज्यादा से ज्यादा लोगों को जांच के दायरे में लाया जा सके और यहां कोरोना का पैनिक कम हो। जिले के सीएमएचओ दफ्तर ने इसके लिए अलग टीमें बनाई हैं, जो अन्य राज्यों से अाए मजदूर, ट्रैवलर्स, मेडिकल स्टाफ और सर्वे करनेवाले स्वास्थ्य कर्मी और पुलिसकर्मियों के साथ-साथ जो भी कोरोना के लक्षण की शिकायत करेंगे, उनका सैंपल लेंगी। टीमों को साफ कर दिया गया है कि उन्हीं के सैंपल लिए जाएं, जिनमें कोई न कोई लक्षण दिखाई दे रहे हों। अफसरों का कहना है कि शहर में तीन कोरोना सैंपलिंग सेंटर हैं, जिनमें से दो जगह लोग खुद जाकर वहां के डाक्टरों को संतुष्ट करने के बाद सैंपल दे सकते हैं। लालपुर टीबी सेंटर में वही सैंपल जांचे जाएंगे, जिन्हें हेल्थ विभाग पहुंचाएगा।कोरोना की जांच के लिए अलग पैमाने तयसीएमएचओडॉ. मीरा बघेल ने बताया कि मौके पर जाकर इन टीमों ने प्रयोग के तौर पर आरडी किट से शुक्रवार से जांच शुरू कर दी है। इस जांच में अगर किसी की रिपोर्ट पाजिटिव आए तो उसे फाइनल नहीं माना जाएगा, बल्कि फिर संबंधित का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाएगा। मापदंड यह रखा गया है कि टीमें रोज 40 ऐसे मजदूर या प्रवासियों का आरडी टेस्ट करेंगी, जिनमें कोरोना के लक्षण हों। ऐसेलोगों का टेस्ट करना है जो पिछले कई दिन से सर्दी-खांसी, सांस में तकलीफ और बुखार की शिकायत कर रहे हों। बचे हुए 10 लोगों में 3 लक्षण वाले हेल्थ वर्कर या सर्विस प्रोवाइडर होंगे और बाकी 7 कोई भी हो सकते हैं।ज्यादा टेस्ट होने से फायदाअभी एम्स और मेडिकल कालेज की लैब में राजधानी के रोजाना औसतन 70 से 80 लोगों के सैंपल जांचे जा रहे हैं। मौके पर होने वाले टेस्ट को मिलाकर रोजाना डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों को जांच के दायरे में लाया जाएगा। ज्यादा टेस्ट होने का फायदा यह होगा कि राजधानी में संक्रमण का फैलाव रोका जा सकेगा। अस्पतालों के अलावा टारगेट के 90 टेस्ट होने से संदिग्ध लोगों की जांच हो पाएगी अौर रिपोर्ट भी जल्दी आएगी।यही नहीं, कई मामलों में अब तक संक्रमण का स्रोत नहीं मिल पाया है, जो इस तरह की जांच से संभव हो सकेगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 जिले में 50 हजार संग्राहकों ने 8 करोड़ से अधिक के तेंदूपत्ते का किया संग्रहण By Published On :: Sat, 09 May 2020 00:55:00 GMT हरे सोने के रूप में तेंदूपत्ता वनवासियों के लिए अमूल्य संपदा है। यह ग्रामीणों के लिए आजीविका की अपार संभावनाएं ले कर आता है। जिले के दूरस्थ अंचलों में लगभग 50 हजार ग्रामीण इन दिनों तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटे हुए हैं।अब तक 8 कराेड़ रुपए से अधिक का तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है। राज्य शासन ने समर्थन मूल्य पर 23 प्रकार के वनोपजों का संग्रहण किया जा रहा है परन्तु तेंदूपत्ता का पुरातन काल से वनवासियों के अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व रहा है। क्योंकि तेंदूपत्ता यहां लगभग हर ओर मिलता है। इसमें अधिक मजदूरों की आवश्यकता होती है ऐसे में गांवों में बच्चे-बूढ़े और जवान सभी मिलकर तेंदूपत्ते के संग्रहण से आय अर्जित कर पाते हैं। समर्थन मूल्य पर समितियों द्वारा खरीदी से उनको उनका हक प्राप्त हो रहा है। कलेक्टर नीलकण्ठ टीकाम ने बताया कि इन दिनाें ग्रामीण इमली, महुआ के साथ ही अन्य 11 प्रकार के वनोपजों के संग्रहण में जुटे हुए हैं। जिले में अब तक 6 करोड़ से अधिक राशि के वनोपज का विक्रय वनवासी कर रहे हैं। वर्तमान में 4 मई से तेंदूपत्ता संग्रहण प्रारम्भ हुआ है। इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य 4000 मानक बोरा होने से संग्राहकों में विशेष उत्साह है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 50 thousand collectors collected more than 8 crore tendu leaves in the district Full Article
0 सूरत से 1200 मजदूर पहुंचे धनबाद, श्रमिकों ने कहा- ट्रेन में टिकट के पैसे देने पड़े By Published On :: Wed, 06 May 2020 05:48:51 GMT सूरत से 1200 मजदूरों को लेकर एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन बुधवार सुबह धनबाद पहुंची। सभी मजदूरों की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाते हुए स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद उनके संबंधित जिलों के लिए बसों से रवाना कर दिया गया। इस दौरान मजदूरों ने बताया कि उन्हें ट्रेन में टिकट खरीदकर बैठना पड़ा। इधर, धनबाद में पुलिस-प्रशासन लॉकडाउन को सख्ती से लागू कराने में जुटी हुई है। हालांकि कई जगहों पर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करते हुए भी नजर आए।बुधवार काे सूरत से स्पेशल ट्रेन संख्या से प्रवासी श्रमिक सुबह धनबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे। स्पेशल ट्रेन में कुल 22 बाेगियां थी, जिसमें विभिन्न जिलाें के प्रवासी मजदूर थे। इधर, पुलिस की सख्ती जारी है। सड़क पर बिना वजह निकलने वालों से जुर्माना वसूला गया।सूरत से धनबाद पहुंचे मजदूरों ने बताया कि उन्हें टिकट खरीदने में 720 रुपए खर्च करने पड़े।इधर, इलाहाबाद और रांची से अलग-अलग ट्रेन से मंगलवार को 46 श्रमिक धनबाद पहुंचे थे। 16 श्रमिक प्रयागराज से धनबाद पहुंचे, जबकि 30 मजदूर रांची से आएं। गाेल्फ ग्राउंड में सभी की मेडिकल जांच कराई गई। जांच के बाद उन्हें हाेम क्वारैंटाइन की स्याही लगाकर बस से घर भेज दिया गया।रणधीर वर्मा चौक पर वाहनों की जांच करती पुलिस। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today ट्रेन का टिकट दिखाता श्रमिक। Full Article
0 40 बोतल अंग्रेजी शराब के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, नदी के रास्ते बंगाल से ला रहे थे शराब By Published On :: Wed, 06 May 2020 11:08:46 GMT पुलिस नेलॉकडाउन के दौरानचल रही शराब तस्करी कापर्दाफाश करते हुए बुधवार को दो लोगों को गिरफ्तारकर लिया। जबकि इनके दो साथी भागने में कामयाब रहे।इनके पास से पुलिस ने40 अंग्रेजी शराब की बड़ी बाेतलें बरामद की। तस्कर लॉकडाउन का उल्लंघन कर पश्चिम बंगाल से नदी के रास्ते झारखंड आ रहे थे। पुलिस नेमामला दर्ज कर गिरफ्तार तस्करों कोजेल भेज दिया है।एसडीपीओ,निरसा विजय कुशवाहा ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी किबंगाल के बराकर से भारी मात्रा में शराब लाई जा रही है। इसके बाद पुलिस टीम बराकर नदी से आने वाले सभी रास्तों पर गुप्त रूप से निगरानी कर रही थी। तभी कुंदन साव व राजेश ठठेरा को पुलिस ने दबोच लिया।पुलिस पूछताछ में उन्होंनेबताया कि वे लोग सूरज ठठेरा के यहां से शराब लेकर आ रहे थे।एसडीपीओ ने बताया कि पकड़ा गयाकुंदन,सरसा पहाड़ीस्थितएक होटल का संचालक है।कई बार उसके होटल मेंशराब को लेकर छापेमारी की गई पर हर बार वो भाग निकलता था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today गिरफ्तार तस्करों के बारे में जानकारी देती पुलिस। Full Article
0 बाड़ेदा के 211 ग्रामीणों को दिया 10-10 किग्रा चावल By Published On :: Wed, 06 May 2020 23:37:00 GMT कोरोना वायरस से बचाव को लेकर किए गए लॉक डाउन में गरीबों को राहत पहुंचाने के लिए बुधवार को फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के सुदूरवर्ती जंगलों के बीच में बसे गाँव बाड़ेदा में 211 गरीब ग्रामीणों के बीच 10-10 किलोग्राम चावल विधायक रामदास ने एमओ सिद्धेश्वर पासवान के उपस्थिति में वितरण किया। इससे ग्रामीणों के चेहरे में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस संबंध में विधायक रामदास सोरेन ने बताया कि लॉक डाउन में गरीबों को काफी मुश्किल हो रही है। ऐसे सुदूरवर्ती गाँव के ग्रामीणों को पिछले सरकार ने राशन कार्ड से वंचित कर दिया था। जिससे गरीबों को राशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। जबकि मुसाबनी प्रखंड में कुल 3,346 ग्रामीणों ने राशन कार्ड बनवाने को लेकर ऑन लाईन पंजीकरण कराया है। वहीं फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के 211 ग्रामीणों ने भी राशन कार्ड बनाने हेतु पंजीकरण कराया है।लेकिन इन लोगों को राशन की सुविधा नहीं मिल रही थी। इस अवसर पर विधायक रामदास सोरेन के सौजन्य से 100 ग्रामीणों को फेस मास्क और छोटे छोटे बच्चों को बिस्कुट का भी वितरण किया गया। चावल वितरण कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रखंड प्रमुख पान मुनी मुर्मू,झामुमो नेता कान्हू सामंत, के बी फरीद,प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन,जिप सदस्य बाघराय मार्डी,जिला उपाध्यक्ष सागेन पूर्ति,सोमाय सोरेन,गोरांगो माहाली,कानू टुडू,राम चन्द्र मुर्मू,रविन्द्र नाथ मार्डी,पंसस पावर्ती सिंह,सुनील किस्कु,लखी हाँसदा,सुनील हाँसदा,प्रियनाथ बास्के,गोविंद बास्के सहित ग्रामीण उपस्थित थे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 211 villagers given 10-10 kg rice to Badeda Full Article
0 ईंट भट्ठा मालिक ने छत्तीसगढ़ से आए 50 मजदूरों को मारपीट कर निकाला, प्रदर्शन By Published On :: Wed, 06 May 2020 23:57:00 GMT पोटका थाना के बांगो गांव में आरबीपी ईंट भट्ठा में छत्तीसगढ़ से आए 15 मजदूरों समेत करीब 50 लोगों को भट्ठा मालिक ने बुधवार को मारपीट कर वहां से निकाल दिया। इसके बाद बांगो गांव के ग्रामीणों के सहयोग से उन्हें गांव के स्कूल में शरण दिया गया। ग्रामीणों में भट्ठा मालिक के प्रति भारी आक्रोश है। ग्राम प्रधान फटिक गोप के नेतृत्व में ग्रामीणों ने भट्ठा में जाकर विरोध प्रदर्शन भी किया। ग्राम प्रधान फटिक गोप ने कहा- नवंबर से भट्ठा में काम करने के लिए 15 मजदूर समेत 50 लोग छत्तीसगढ़ के विलासपुर से आए थे। इसमें 12 महिलाएं एवं 12 बच्चे भी शामिल हैं। उनको भट्ठा के मैनेजर ममता ने बुधवार को मारपीट कर बाहर निकाल दिया है। उनको मंगलवार से खाना पीना का राशन भी नहीं दिया जा रहा है। सभी को ग्रामीणाें की मदद से खाना खिलाया भी जा रहा है। इसमें एक महिला गर्भवती भी है उसके साथ मारपीट भी की है। ग्रामीणों ने कहा- अगर भट्ठा मालिक ने मजदूरों को खाना नहीं उपलब्ध कराया, ताे ईंट भट्ठा बंद कर दिया जाएगा। वहीं भट्ठा मालिक राजेश सिंह ने कहा कि ये लोग ब्लैकमेल कर रहे हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Brick kiln owner killed 50 laborers from Chhattisgarh, demonstrating Full Article
0 राज्य के 1233 श्रमिक परिवार सूरत से पहुंचे धनबाद, कहा - 29:30 घंटे के सफर में पानी तक नहीं मिला By Published On :: Thu, 07 May 2020 00:06:00 GMT सूरत से स्पेशल ट्रेन से 1233 प्रवासी श्रमिक परिवार बुधवार काे धनबाद पहुंचे। 29:30 घंटे का सफर तय करने के बाद जब वे अपने राज्य पहुंचे ताे उनके चेहरे पर खुशी के साथ थकान और परेशानियाें का सबब भी था। सूरत से धनबाद की 1775 किमी यात्रा के लिए उन्हें 750-720 रुपए चुकना पड़ा। पैसे दिए तो ट्रेन की टिकट मिली। साेचा था सरकार की ओर से खाने-पीने का उत्तम व्यवस्था हाेगी, लेकिन खिचड़ी और बिरयानी खाकर भूख मिटानी पड़ी। चाय और नाश्ता तक नहीं मिला। इस तपती गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए।तमाम मुश्किलों के के बीच सुबह 4:35 बजे प्रवासी परिवार धनबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे। सेनेटाइजर से हैंड वॉश कराया गया। मेडिकल जांच हुई, जिसमें सभी स्वस्थ्य पाए गए। इसके बाद फूल देकर स्वागत किया गया। सभी काे अल्पाहार दिया गया। स्टेशन परिसर में ही बसाें में बैठाकर गृह जिला के लिए भेज दिया गया। माैके पर उपायुक्त अमित कुमार एसएसपी अखिलेश बी वारियार और सीनियर डीसीएम अखिलेश कुमार पांडेय सहित प्रशासन, पुलिस विभाग व धनबाद रेल मंडल के अधिकारी और कर्मचारी माैजूद थे। सबसे अधिक 1157 यात्री गिरिडीह के थे | सूरत से आने वाली ट्रेन से प्रवासी श्रमिकों को सबसे आगे और सबसे पीछे की बोगी से प्लेटफॉर्म पर उतारा गया। सूरत से अाने वाले कामगाराें में सबसे अधिक 1157 प्रवासी गिरिडीह जिला के थे। जबकि देवघर के 40, धनबाद के 2, दुमका एवं हजारीबाग के 1- 1, कोडरमा के 5 तथा रांची के 27 श्रमिक थे।सूरत से 1198 लोगों काे लेकर आज भी आएगी ट्रेनगुजरात से धनबाद के लिए दूसरी ट्रेन भी खुल गई है। सूरत से खुली यह दूसरी स्पेशल ट्रेन गुरुवार को 1198 प्रवासी मजदूरों को लेकर सुबह 3:15 बजे धनबाद स्टेशन पहुंचेगी। डीसी अमित कुमार ने बताया कि सूरत से 22 बोगियों के साथ आने वाली ट्रेन में झारखंड के गिरिडीह, देवघर, कोडरमा, हजारीबाग, जामताड़ा, सिमडेगा, सरायकेला, पलामू, लातेहार, गढ़वा तथा चतरा जिले के प्रवासी मजदूर हैं। ट्रेन में सबसे अधिक गिरिडीह के 1094 मजदूर हैं। जबकि देवघर के 7, कोडरमा के 30, हजारीबाग के 11, जामताड़ा, सिमडेगा और सरायकेला के 1-1, पलामू के 29, लातेहार के 3, गढ़वा के 2 तथा चतरा के 5 श्रमिक ट्रेन में सवार हैं। सभी काे उनके गृह जिला पहुंचाने के लिए स्टेशन पर 56 बसाें की व्यवस्था की गई है।वेल्लाेर से ट्रेन चलाने की विधायक ने की मांगलाॅकडाउन के कारण वेल्लाेर में फंसे झारखंड के लाेगाें काे वापस लाने के लिए विधायक राज सिन्हा ने पीएम अाैर सीए को पत्र लिखा है। विधायक ने वेल्लाेर से धनबाद के लिए ट्रेन चलाने की मांग की है। विधायक ने कहा कि हजाराें की संख्या में लाेग वेल्लाेर में फंसे हुए हैं। वहां फंसे लाेगाें का जीवन-यापन मुश्किल हाे गया है।तेलंगाना से 1400 लोगों को लेकर आएगी ट्रेनतेलंगाना राज्य के लिंगमपाली से एक विशेष ट्रेन चलेगी। यह ट्रेन लगभग 14 साै मजदूराें काे लेकर शुक्रवार काे दाेपहर 12:30 बजे धनबाद पहुंचेगी। कुल 24 काेच हाेंगे। ट्रेन लिंगमपाली से खुलकर बल्हारशा, नागपुर, इटावा, कटनी, मानिकपुर, प्रयागराज, पंडित दीन दयाल उपाध्याय, गया हाेते हुए धनबाद पहुंचेगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 1233 laborers of the state reached Dhanbad from Surat, said - no water was found in 29:30 hours journey Full Article
0 मीडिया कर्मियों का ~50 लाख का बीमा कराए केंद्र : इरफान By Published On :: Thu, 07 May 2020 01:01:00 GMT प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारिणी अध्यक्ष डॉ इरफान अंसारी ने राज्य के मीडिया कर्मियों को 50 लाख का निबंधन बीमा करने की मांग भारत सरकार से किया है। इस संबंध में विधायक ने कहा कि देश के संविधान के चौथे स्तंभ मीडियाकर्मी है। कहा कि मीडिया के लोग दिन रात समाज की अच्छाई और बुराई का आईना जनता के बीच लाते हैं। ऐसे में उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षित रखना राज्य सरकार व भारत सरकार का कार्य है। बता दें कि डॉ इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार से मीडियाकर्मियों और उनके परिवार की सुरक्षा की दृष्टि से 50 लाख रुपये का बीमा कराने की मांग दोनों सरकार से किया। डॉ इरफान अंसारी ने बताया कि वे डॉक्टर हैं इस नाते आम जनता, स्वास्थ्य कर्मी, सुरक्षाकर्मी व मीडिया कर्मी सफाई कर्मी की रक्षा करना उनका कर्तव्य है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Center to insure media workers ~ 50 lakh: Irfan Full Article
0 एर्नाकुलम से स्पेशल ट्रेन के जरिए देवघर पहुंचे 1084 मजदूर, थर्मल स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारैंटाइन में भेजा By Published On :: Thu, 07 May 2020 13:54:00 GMT केंद्र और राज्य सरकार के पहल के बाद लॉकडाउन के वजह से बाहर फंसे झारखंड के विभिन्न जिलों के 1084 श्रमिक गुरुवार को स्पेशल ट्रेन के जरिए से एर्नाकुलम से जसीडीह स्टेशन पहुंचे। इस दौरान उपायुक्त नैंन्सी सहाय एवं वरीय अधिकारियों के द्वारा सभी श्रमिकों का अभिनंदन किया गया एवं उनके सकुशल घर वापसी के लिए शुभकामनाएं दी गयी। यहां आने वाले सभी श्रमिकों को ट्रैन से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उतारा गया एवं स्टेशन परिसर में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बने काउंटर परथर्मल स्क्रीनिंगव स्वास्थ्य जांच संबंधी अन्य सभी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद उन्हें उनके गंतव्य तक जाने के लिए अलग-अलग जिलों की बस में बैठाकर रवाना किया गया।सुरक्षित व्यवस्था व विधि-व्यवस्था संधारण हेतु जसीडीह स्टेशन परिसर में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की टीम के साथ दण्डाधिकारी एवं सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पूर्व से ही की गई थी।गौरतलब है कि 24 जिलों के 1084 श्रमिकों में पलामू के 154 श्रमिक, देवघर के 130, कोडरमा के 120, बोकारो के 117, गढ़वा के 90, दुमका के 72, गिरीडीह के 59, जामताड़ा के 56, धनबाद के 46, लातेहार के 41, पाकुड़ के 37, सिमडेगा के 33, हजारीबाग के 31, गोड्डा के 15, रामगढ़ के 12, पश्चिमी सिंहभूम के 12, चतरा के 10, गुमला के 10, सरायकेला के 10, साहेबगंज के 9, खूंटी के 8, राँची के 6, पूर्वी सिंहभूम के 3 एवं लोहरदग्गा के 3 श्रमिक शामिल हैं।इस दौरान उपायुक्त नैंसी सहाय द्वारा एर्नाकुलम से आने वाले सभी श्रमिक बंधुओं के बीच नास्ता, पानी का वितरण करते हुए सभी को 14 दिनों तक होम क्वारैंटाइन के पालन का निर्देश दिया गया। इसके अलावे उन्होंने कहा कि मास्क का उपयोग कर व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करके ही हम कोरोना महामारी को हराकर इस पर जीत हासिल कर सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन एवं चिकित्सकों द्वारा दिए गए चिकित्सकीय परामर्श का पालन करें एवं स्वस्थ, सतर्क व सुरक्षित रहें।स्वास्थ्य संबंधी जांच के बाद मजदूरों कोउनके गंतव्य तक जाने के लिए अलग-अलग जिलों की बस में बैठाकर रवाना किया गया।इसके अलावे उपायुक्त ने बताया कि एर्नाकुलम से यहां आने वाले सभी मजदूरों एवं यहां के लोगों के स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से जिला प्रशासन द्वारा सभी एहतियाती उपाय अपनाये गए हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति को घबराने या पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से एर्नाकुलम से आने वाले सभी मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान तक भेजने के लिए प्रयोग किये जाने वाले बसों को पूरी तरह से सेनेटाइज्ड कर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया है।सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे स्टेशन पर एहतियातन उठाये गए सभी कदमश्रमिकों के आगमन को लेकर जसीडीह रेलवे स्टेशन परिसर को पूर्ण रूप से सैनेटाइजड किया गया था एवं सोशल डिस्टेंसिंग के अनुपालन हेतु जगह-जगह बेरिकेड्स कर गोल घेरा का निर्माण कराया गया था। इसके अलावे सुरक्षित व्यवस्था व विधि-व्यवस्था संधारण हेतु जसीडीह स्टेशन परिसर में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की टीम के साथ दण्डाधिकारी एवं सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पूर्व से ही की गई थी।श्रमिकों के आगमन को लेकर जसीडीह रेलवे स्टेशन परिसर को पूर्ण रूप से सैनेटाइजड किया गया था।व्यवस्थित रूप से श्रमिकों को सेनेटाइजेड बस से भेजा गया अपने-अपने गृह जिला की ओरश्रमिकों के आने के बाद सबसे पहले स्वास्थ्य जांच के बाद सभी के लिए भोजन की व्यवस्था रेलवे स्टेशन पर ही की गई थी, जिसके उपरांत स्टेशन परिसर से अपने-अपने जिलों के लिए निर्धारित सेनेटाइज्ड बसों में बिठाकर मजदूरों को उनके घरों के लिए रवाना किया गया। वहीं इस दौरान सभी प्रवासी श्रमिकों को भोजन का पैकेट, पानी का बोतल आदि भी उपलब्ध कराया गया।कोविड-19 से बचाव के इस जंग में बेहतर टीम भावना के साथ कार्य करने हेतु सभी अधिकारियों व कर्मियों का आभारसाथ ही उपायुक्त द्वारा देवघर जिला के सभी अधिकारियों, चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मियों, सुरक्षाकर्मियों, सफाई कर्मियों, समाजसेवियों व अन्य सभी कर्मियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा गया कि कोविड-19 से बचाव के इस जंग में जिस प्रकार सभी ने बेहतर टीम भावना के साथ कार्य किया है। सभी के सहयोग से हम कोरोना का डटकर मुकाबला कर पा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में सभी बेहतर कार्य कर रहे हैं।स्टेशन परिसर में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बने काउंटर पर मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग व स्वास्थ्य जांच संबंधी अन्य सभी प्रक्रिया पूरी की गई। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today लॉकडाउन के वजह से बाहर फंसे झारखंड के विभिन्न जिलों के 1084 श्रमिक गुरुवार को स्पेशल ट्रेन के जरिए से एर्नाकुलम से जसीडीह स्टेशन पहुंचे। Full Article
0 तेलंगाना के घटकेसर से 905 श्रमिकों को लेकर टाटानगर पहुंचे स्पेशल ट्रेन, स्क्रीनिंग के बाद सभी को भेजा घर By Published On :: Thu, 07 May 2020 15:17:41 GMT तेलंगाना के घटकेसर स्टेशन से झारखंड के 905 मजदूरों के लेकर गुरुवार को स्पेशल ट्रेन टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंची। प्लेटफॉर्म पर बैरिकेडिंग की गई थी। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के लिए जमीन पर गोला बनाया गया था। इसके बाद सभी श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच कर संबंधित जिलों में बस से भेज दिया गया। ट्रेन में रांची के दो, हजारीबाग के आठ, चतरा के 122, गुमला के चार, देवघर के दो, पलामू के 398, गढ़वा के 231, खूंटी के पांच, लातेहार के 92, बोकारो के दो, जामताड़ा के एक और अन्य स्थानों के 38 मजदूर सवार थे।स्क्रीनिंग के बाद मजदूरों को स्टेशन से जिलावार बाहर निकाला गया। सबसे पहले चतरा के मजदूरों को सुबह 6.30 बजे बस में बैठाया गया और सबसे अंत में सुबह 8 बजे पलामू के मजदूर भेजे गए। पलामू की बस देर से स्टेशन पहुंची इस कारण उन्हें भेजने में देरी हुई। मौके पर डीसी रविशंकर शुक्ला, एसएसपी एम तमिल वाणन समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। आरपीएफ के जवान तड़के तीन बजे से ही मुस्तैद थे।रेलवे ने टिकट दिया पर नहीं लिया पैसा, 1449 किमी का सफर 28 घंटे में तय हुआतेलगांना के घटकेसर रेलवे स्टेशन से ट्रेन के रवाना होने के पहले आरपीएफ के जवानों ने मजदूरों को टाटानगर रेलवे स्टेशन तक का टिकट दिया और उनके पहचान पत्र के साथ उनकी डिटेल रजिस्टर में दर्ज की। लेकिन टिकट के बदले मजदूरों से पैसा नहीं लिया गया। टिकट पर स्लीपर क्लास व सुपर फास्ट ट्रेन लिखा था। घटकेसर से टाटानगर की 1449 किलोमीटर दूरी 28 घंटे में तय कर ट्रेन टाटानगर पहुंची। यात्रियों ने बताया कि रास्ते में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। रेलवे की ओर से नाश्ता, भोजन व पानी की व्यवस्था की गई थी।घर लौटने की खुशी, लेकिन वेतन नहीं मिलने से थी नाराजगीमजदूरों में अपने घर लौट की खुशी जरूर थी, लेकिन उन्हें इस बात का मलाल था कि लॉकडाउन के कारण उन्हें वेतन नहीं मिला है। मजदूरों ने बताया कि वे लोग तेलगांना में कंपनी, एयरपोर्ट सहित अन्य स्थानों पर मजदूरी का करते थे। लॉकडाउन के कारण उन्हें वेतन नहीं मिला था।गुरुवार को टाटानगर स्टेशन पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन के यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग के तहत स्टेशन के बाहर और फिर बसों तक पहुंचाया गया। बस के अंदर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रमिकों को उनके घरों तक भेजा गया।प्रशासन ने धारा 144 की मियाद बढ़ाई, 5 से अधिक लोगों के जुटने पर मनाहीलॉकडाउन को सख्ती से लागू करने के लिए प्रशासन ने निषेधाज्ञा (144) की मियाद एक बार फिर दो सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। इस संबंध में धालभूम के एसडीएम चंदन कुमार की ओर से आदेश जारी किया गया। प्रशासन ने लॉकडाउन के दौरान शाम सात से सुबह सात बजे तक सड़क पर निकलने वालों के साथ सख्ती से निपटने का आदेश पुलिस व दंडाधिकारियों को दिया है। एक स्थान पर पांच से ज्यादा व्यक्तियों के जमा होने पर रोक लगा दी गई है। बिना मास्क घर से बाहर निकलने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, गर्भवती महिला व 10 साल के कम उम्र के बच्चे के घर से बाहर निकलने पर रोक रहेगी। उन्हें सिर्फ चिकित्सा कार्य के लिए बाहर निकलने की अनुमति दी जाएगी।एमजीएम सहित सभी सरकारी डॉक्टर्स, स्टाफ की छुट्टियां 30 तक रद्दस्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने एमजीएम सहित पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, टेक्निशियन सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियां 30 मई तक रद्द कर दी है। स्वास्थ्य सचिव ने इस संबंध में एमजीएम अधीक्षक व सिविल सर्जन को पत्र जारी भेजा है। विभिन्न जिलों से शिकायत मिलने के बाद विभाग ने निर्णय लिया है।गुरुवार को शहर के कई चौक चौराहों पर बैरिकेडिंग लगायी गई। इस दौरान आने-जाने वालों से सख्ती से पूछताछ की गई। साथ ही ज्यादा जरुरी काम न होने पर घरों से बाहर न निकलने की अपील की गई।215 सैंपल की हुई जांच सभी की रिपोर्ट निगेटिवएमजीएम में बुधवार को 215 सैंपल की जांच हुई। इसमें सभी रिपोर्ट निगेटिव आई है। सर्विलांस टीम ने बुधवार को 173 सैंपल डुमरिया, घाटशिला, मुसाबनी, मानगो, कदमा समेत विभिन्न क्षेत्रों से लिया है। इस तरह जिले में अब तक 2069 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिसमें 1833 की रिपोर्ट आ चुकी है। 236 सैंपल ऑन प्रोसेस है, जिसकी रिपोर्ट गुरुवार को आने की संभावना है।उधर, कोरोना को लेकर एक ओर सरकार किसी भी कर्मचारी को काम से नहीं हटाने की बात कह रही है। वहीं दूसरी ओर एमजीएम अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्स एजेंसी शिवा प्रोटेक्शन फोर्स ने कर्मचारियों को हटा दिया है। इसकी शिकायत आउटसोर्स कर्मचारी अजय कुमार ने डीसी से की है। इसकी कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री झारखंड, अधीक्षक एमजीएम को भी भेजा है।जमशेदपुर में गुरुवार को भी शहर की सड़कों पर बैरिकेडिंग कर पुलिस ने आने-जाने वालों से पूछताछ की। जरुरी कागजात व कारण बताने के बाद ही उन्हें आगे के लिए छोड़ा गया। कारण व कागजात नहीं दिखाने पर वाहन सवारों को घर वापस भेज दिया गया।शुक्रवार से कोर्ट में ऑनलाइन काम, वकील नहीं आएंगे कोर्टजमशेदपुर कोर्ट में 8 मई से काम शुरू होगा। अब सभी काम ऑनलाइन, एप या ई-मेल पर किए जाएंगे। कोर्ट कर्मचारी सुबह 6.30 बजे से 12.00 बजे तक काम करेंगे। जज सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक उपस्थित रहेंगे। कोई भी वकील कोर्ट नहीं जाएंगे। कोर्ट के बाहर दो ड्रॉप बॉक्स लगेंगे। एक बॉक्स में जिला जज और दूसरे में मजिस्ट्रेट जज का आवेदन जमा होगा। सूची तैयार कर मेल के माध्यम से वकील को खबर भेजी जाएगी। नए मामले में फैमिली कोर्ट संबंधी फाइल हो सकते हैं। गवाही की प्रक्रिया चलेगी। वकील ऑनलाइन या ई-मेल पर जमानत, अग्रिम जमानत या फिर किसी भी तरह की अर्जी दाखिल करेंगे। फाइल की गई अर्जी की हार्ड कॉपी ड्रॉप बॉक्स में जमा करेंगे। 24 घंटे में सुरक्षा के साथ बॉक्स खुलेगा। कोर्ट कैंपस के बाहर एफीडिवेट का काम होगा।दूसरे राज्यों व जिलों के पास के लिए अब ऑनलाइन आवेदनलॉकडाउन में दूसरे जिला व राज्यों में जाना है, तो वाहन पास के लिए अब ऑनलाइन आवेदन देना होगा। ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया बंद कर दी गई है। लोगों को पास के प्रशासन की ओर से जारी ई-पास का लिंक http://epassjharkhand.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन देना होगा। यह लिंक 24 घंटे चालू रहेगा। इसके जरिए दो पहिया व चार पहिया वाहनों का ई-पास जारी किया जाएगा। लेकिन व्यावसायिक वाहनों के लिए पास नहीं जारी किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन अपने कंप्यूटर व लैपटॉप या प्रज्ञा केंद्र से दे सकते हैं। दूसरे राज्यों में फंसे पूर्वी सिंहभूम जिले के 713 लोगों ने अब तक पास के लिए आवेदन दिया है। इनमें से 72 लोगों का पास जारी किया गया है। साथ ही 20 में से पांच लोगों को एनओसी भी जारी किया गया है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today गुरुवार सुबह तेलंगाना के घटकेसर से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन में राज्य के विभिन्न जिलों के श्रमिकों की स्क्रीनिंग की गई और फिर उन्हें उनके घर बसों के जरिए भेज दिया गया। Full Article
0 दिल्ली पहुंचे माड़ के झाड़ू, महिलाओं ने कमाए 5.80 लाख By Published On :: Thu, 07 May 2020 23:30:00 GMT जिले की महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर कर आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम करने में वन विभाग का प्रयास सफल होने लगा है। जिला लघुवनोपज सहकारी संघ द्वारा मां दंतेश्वरी, दुर्गा मंडली एवं गणेश मंडली समूह की महिलाओं को 1.75 लाख रुपए प्रति समूह के हिसाब से तीन समूहों को 5 लाख 25 हजार रुपए कच्चा फूल झाड़ू घास खरीदने के लिए दिया गया था। इन महिला समूहों द्वारा निर्मित झाड़ू की मांग छत्तीसगढ़ के अलावा दिल्ली में की गई थी, जिसे समय रहते पूरी की गई। माड़ की झाड़ू का उपयोग दिल्ली को चकाचक करने में किया जा रहा है।नाफेड दिल्ली से 35 हजार नग माड़ की झाडू़ की मांग आई थी, जिसे 34 रुपए प्रति नग के मान से बेचा गया। इससे 11 लाख 90 हजार की राशि प्राप्त हुई थी। इसमें से समूह ने करीब 5 लाख 79 हजार 457 रुपए का मुनाफा कमाया। अधिक लाभ होने से चालू वर्ष में अधिक मात्रा में कच्चा फूल झाड़ू घास खरीद कर बड़ी संख्या में झाड़ू निर्माण की योजना है। समूह की महिलाओं ने राज्य सरकार और वन विभाग के अधिकारियों की तारीफ करते कहा है कि उनकी मदद के बिना यह काम संभव नहीं है।3 समूह की 33 महिलाएं बना रही हैं फूल झाड़ूओरछा में प्रत्येक महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष और सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी का संयुक्त खाता कोआपरेटिव बैंक में खोला गया है। इसमें दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर कर खाता से पैसा निकालकर ओरछा के समूह कच्चे फूल झाड़ू की खरीदते हैं। वन विभाग द्वारा नारायणपुर में प्रसंस्करण केंद्रों की शुरुआत की गई है। दूरस्थ इलाके के 10-12 अंचल के करीब 1500 संग्राहकों द्वारा फूल झाड़ू का संग्रहण कर इसे महिला स्वसहायता समूह को बेचा जाता है। प्रसंस्करण केंद्र में 3 महिला स्वसहायता समूह की लगभग 33 महिलाएं काम कर रही हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Maad's brooms reached Delhi, women earned 5.80 lakhs Full Article
0 पश्चिमी सिंहभूम में 22 में से 20 योजनाओं का काम पड़ा है अधूरा By Published On :: Fri, 08 May 2020 01:12:00 GMT लाॅकडाउन के कारण जिले में कराेड़ोंरुपए की याेजनाएं पेंडिंग पड़ी हैं। इसमें ऐसी कई महत्वपूर्ण याेजनाएं भी शामिल हैं जाे लाेगाें के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। जिले में ग्रामीण पेयजलापूर्ति याेजना के पाइप लाइन के जरिए घर-घर तक पीने के लिएस्वच्छ पानी पहुंचाने का काम चल रहा है।इस याेजना के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडाें के कुल 22 जगहाें पर करीब 400 कराेड़ रुपए की लागत से काम चल रहा है। लेकिन लाॅकडाउन के वजह से यह काम ठप पड़ा हुआहै। इसमें से मात्र दाे जगह सदर प्रखंड के गायसुटी पंचायत एवं जगन्नाथपुर प्रखंड के जैंतगढ़ में पेयजलापूर्ति याेजना बनकर तैयार है और चालू भी हाे गया है। लेकिन बाकी जगहाें पर निर्माण का कार्य चल रहा है। लेकिन लाॅकडाउन के कारण यह कार्य भी ठप पड़ा हुआहै। जिले के मझगांव, सदर प्रखंड के कुरसी, मंझारी प्रखंड के जलधर, तांतनगर प्रखंड के सेरेंगबिल एवं चक्रधरपुर के छोटानागरा में करीब-करीब बनकर तैयार है। लेकिन लाॅकडाउन के कारण शेष काम नहीं हाे पा रहा है। लाॅकडाउन की स्थिति ऐसी ही रही ताे गरमी के माैसम में भी यहां के लाेगाें काे पीने का पानी नसीब नहीं हाेगा।छह कराेड़ की लागत से बन रहा जाेड़ा तालाब का काम भी ठपनगर परिषद की एक बड़ी याेजना जाेड़ा तालाब का जीर्णाेद्धार व साैंदर्यीकरण का कार्य भी लाॅकडाउन के वजह से रूका हुआ है। जाेड़ा तालाब का जीर्णाेद्धार व साैंयदयीकरण का कार्य करीब 6 कराेड़ की जा रही है। कुछ माह पहले ही इस तालाब के जीर्णाेद्धार व साैंदर्यीकरण का कार्य शुरू हुआथा। जीर्णाेद्धार का कार्य काफी तीव्रगति से चल रहा था। इसी बीच काेराेना वायरस के बढ़ते संक्रमण काे देखते हुए जिले काे लाॅकडाउन किया गया। जिस वजह से यह काम ठप पड़ गया।पेयजलापूर्ति के लिए 1200 चापाकल लगने थे, अब तक 300 ही लग सकेपेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रभु मंडल ने बताया कि कुछ जगहाें पर योजना बनकर तैयार है। लाॅकडाउन समाप्त हाेते ही इसे चालू कर दिया जाएगा। जिले में कुल 1200 साेलर आधारित पेयजलापूर्ति याेजना के तहत नलकूप बनाने का काम चल रहा है। इसमें से 300 नलकूप बनकर तैयार हैं। लेकिन लाॅकडाउन के कारण अन्य साेलर नलकूप का निर्माण कार्य रूका हुआहै।रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य ठपइधर, लाॅकडाउन के कारण करीब 40 कराेड़ के लागत से बन रही रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का कार्य भी ठप पड़ा है। यहां कार्य कर रहे मजदूर लाॅकडाउन वजह से अपने अपने घराें में दुबक गए हैं। निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के कारण लाेगाें काे काफी परेशानी हाे रही है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 20 out of 22 schemes in West Singhbhum are unfinished Full Article
0 सूरत व बेंगलुरु से 1094 प्रवासी घर लौटे, होम क्वारेंटाइन में भेजा गया By Published On :: Fri, 08 May 2020 01:51:00 GMT वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार से बचाव और रोकथाम के लिए सूरत, गुजरात में फंसे गिरिडीह जिला के 1094 श्रमिकों की घर वापसी हुई। सभी श्रमिकों को लेकर सूरत, गुजरात से विशेष ट्रेन से 3.15 बजे धनबाद स्टेशन पहुंची। बैंगलोर, कर्नाटक से विशेष ट्रेन से गिरिडीह जिला के फंसे 62 व्यक्ति बड़काकाना, स्टेशन रामगढ़ पहुंचे। जसीडीह, देवघर से श्रमिकों को लाने के लिए 2 बसों तथा डालटेनगंज, पलामू से श्रमिकों को लाने के लिए 2 बसों को भेजा गया था।जिला प्रशासन द्वारा धनबाद स्टेशन से सभी श्रमिकों को लाने केलिए प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी धीरेंद्र कुमार, कार्यपालक दंडाधिकारी के साथ 9 दंडाधिकारियों के नेतृत्व में 45 सैनेटाइज बड़ी बस सम्मान रथ तथा बड़काकाना, रामगढ़ से श्रमिकों को लाने के लिए प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी लोकेश सिंह के नेतृत्व में 2 बड़ी बसों के साथ तथा डालटेनगंज पलामू से श्रमिकों का लाने के लिए प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी धर्मदेव मंडल सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, गिरिडीह के साथ 2 बसों के साथ तथा जसीडीहए देवघर से श्रमिकों को लाने के लिए प्रतिनियुक्त पदाधिकारी अनिल कुमार, जिला भू-अर्जन कार्यालय के साथ 2 बसों की व्यवस्था की गई थी।सूरत से धनबाद स्टेशन से गिरिडीह जिला के गिरिडीह प्रखंड के 70, बिरनी के 106, बेंगाबाद के 116, बगोदर के 03, देवरी के 280, गांडेय के 23, गांवा 17, जमुआ 156, राजधनवार 208, सरिया 6, तिसरी 70 और डुमरी के 24 लोग शामिल थे। डीसी ने कहा कि जिले में वापस लौटे सभी श्रमिकों का रिसीविंग सेंटर ताराटांड़ में स्वास्थ्य जांच व स्वास्थ्य विभाग का क्वारेंटाइन मुहर लगाकर सभी का निबंधन करते हुए होम क्वॉरेंटाइन में रहने के निर्देश के साथ जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया गया। देवरी प्रखंड के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय देवरी में बाहर से आए प्रवासी मजदूरों को गुरुवार को जांच कर होम क्वारेंटाइन में भेज दिया गया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 1094 expatriates returned home from Surat and Bengaluru, sent to home quarantine Full Article
0 अपराधी लॉक, क्राइम डाउन: चोरी-छिनतई में 70-72% कमी, सीतारामडेरा गैंगवार पुलिस की बड़ी चूक By Published On :: Fri, 08 May 2020 06:46:00 GMT लॉकडाउन में चोरी-छिनतई में 70-72, सड़क हादसे में 60, जबकि हत्या में 33 फीसदी की कमी आई है। फायरिंग में कोई अंतर नहीं आया है। सीतारामडेरा में गैंगवार पुलिस की सबसे बड़ी चूक है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक जनवरी से 23 मार्च तक अपराधी ज्यादा सक्रिय रहे। इस दौरान हत्या की 6, चोरी की 18, छिनतई की 10 और फायरिंग की तीन घटनाएं हुईं। सड़क हादसों में पांच लोगों की मौत हुई।वहीं, 24 मार्च से 30 अप्रैल तक हत्या की 4, चोरी 5, छिनतई और फायरिंग की तीन-तीन घटनाएं हुईं। सड़क हादसों में दो लोगों की मौत हुई। सीतारामडेरा में गैंगवार को छोड़कर कोई संगीन अपराध नहीं हुआ है। एक जनवरी से लेकर 23 मार्च तक जहां शहर के 18 थानों में 355 से अधिक मामले दर्ज हुए। वहीं, 24 मार्च से 30 अप्रैल तक महज 170 मामले ही दर्ज हुए। इनमें सबसे अधिक 40 केस लॉकडाउन तोड़ने के हैं।लॉकडाउन में लूट, डकैती, छिनतई जैसे अपराध का आंकड़ा नहीं के बराबर रहा। सड़क हादसे, हत्या, साइबर ठगी सहित अन्य मामलों में भी कमी आई है। लॉकडाउन में कोरोना को लेकर फेसबुक पर जारी पोस्ट में धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के 4 केस हुए। तीन बिष्टुपुर साइबर थाना में और एक कदमा थाना में दर्ज हुआ है। लॉकडाउन के पहले की घटनाएं लॉकडाउन के पहले के मामले साइबर ठगी- 23 साइबर ठगी- 04 हत्या- 06 हत्या- 04 चोरी- 18 चोरी- 05 सड़क दुर्घटना- 05 सड़क दुर्घटना- 02 छिनतई- 10 छिनतई- 03 फायरिंग- 03 फायरिंग- 03 वाहन चोरी- 30 वाहन चोरी- 04 Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Coronavirus Lockdown In Jamshedpur (Jharkhand) Crime Rate and Statistics News Updates Full Article
0 सूरत से आए 1208 श्रमिकों का जसीडीह रेलवे स्टेशन पर स्वागत, स्वास्थ्य जांच के बाद 14 दिन के होम क्वारैंटाइन में भेजा By Published On :: Fri, 08 May 2020 12:16:00 GMT केंद्र और राज्य सरकार के पहल के बाद लॉकडाउन की वजह से बाहर फंसे श्रमिकों, छात्रों और अन्य लोगों की घर वापसी का सिलसिला लगातार जसीडीह स्टेशन पर जारी है। शुक्रवार को गुजरात के सूरत में फंसे झारखंड के विभिन्न जिलों के 1208 मजदूरों को स्पेशल ट्रेन से जसीडीह स्टेशन लाया गया। इस दौरान स्टेशन पर ट्रेन को पहले पूरी तरह से सैनिटाइज्ड किया गया, जिसके बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक-एक कर सभी श्रमिकों का स्वागत उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी नैंसी सहाय एवं वरीय अधिकारियों के द्वारा किया गया एवं उनके सकुशल घर वापसी के लिए शुभकामनाएं दी गयी। इसके अलावे स्टेशन परिसर में स्वास्थ्य जांच के लिए बने काउंटर पर श्रमिकों की थर्मल स्कैनिंग भी की गई।स्टेशन पहुंचने के बाद सभी श्रमिकों को प्रशासन की ओर से नाश्ता, पानी उपलब्ध कराया गया जिसके बाद उन्हें घर भेजा गया।उपायुक्त ने सभी श्रमिकों को 14 दिनों तक होम क्वारैंटाइन के नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया। साथ ही सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन एवं चिकित्सकों द्वारा दिए गए चिकित्सकीय परामर्श का भी पालन करते हुए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। उपायुक्त ने बताया कि श्रमिकों को उनके गंतव्य स्थान तक भेजने के लिए प्रयोग किये जाने वाले बसों को पूरी तरह से सैनिटाइज्ड कर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया। इसके अलावे ट्रेन के भीतर से लेकर प्लेटफॉर्म तक हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है।श्रमिकों को ट्रैन से उतारे जाने के बाद स्टेशन परिसर में स्वास्थ्य जांच के लिए बनाए गए काउंटर पर सभी की स्क्रीनिंग की गई।चिकित्सकों की विशेष टीम की थी तैनातीश्रमिकों के आगमन को लेकर उपायुक्त के निर्देशानुसार चिकित्सकों की विशेष टीम की प्रतिनियुक्ति भी की गयी थी, ताकि थर्मल स्कैनिंग और स्वास्थ्य जांच के साथ किसी भी अपात स्थिति में आने वाले लोगों के अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांच भी किये जा सके।श्रमिकों को घर भेजने से पहले सभी बसों को प्रशासन ने सैनिटाइज्ड कराया था। बस के अंदर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रमिकों को बैठाया गया।सुरक्षा के दृष्टिकोण से उठाये गए सभी कदमश्रमिकों के आगमन को लेकर जसीडीह रेलवे स्टेशन परिसर को पूर्ण रूप से सैनिटाइज्ड किया गया। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए बैरिकेडिंग कर जगह-जगह पर गोल घेरा का निर्माण कराया गया है। इसके अलावे सुरक्षित व्यवस्था व विधि-व्यवस्था के लिए जसीडीह स्टेशन परिसर में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की टीम के साथ रेलवे के अधिकारी, जिला स्तर के दण्डाधिकारी एवं सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी की गई थी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन एवं चिकित्सकों द्वारा दिए गए चिकित्सकीय परामर्श का भी पालन करते हुए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। Full Article
0 प.बंगाल-केरल से 79 मजदूर लाए गए सरायकेला, पांच दिन में 500 की वापसी By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:30:00 GMT जिला मुख्यालय सरायकेला के सामुदायिक भवन में बने लेबर रिसिविंग सेंटर में पिछले 24 घंटे के अंदर 79 मजदूरों को रेस्क्यू कर सरायकेला लाया गया। सभी मजदूरों का स्वास्थ्य जांच करते हुए उन्हें होम क्वारिन्टाइन के लिए अपने-अपने घर भेज दिया गया है। बेंगलुरु से बीती रात 51 मजदूर सरायकेला लाए गए। इसके अलावा बंगाल के दुर्गापुर से 16 व केरल से 12 मजदूरों को रेस्क्यू कर लेबर रिसीविंग सेंटर लाया गया। सामुदायिक भवन में प्रवासी मजदूरों को खाद्य सामग्री, फेस मास्क व सैनीटाइजर भी उपलब्ध कराया गया। जानकारी हो कि पिछले 5 दिनों में जिला प्रशासन द्वारा लगभग 500 मजदूर और विद्यार्थियों को विभिन्न राज्यों से रेस्क्यू कर सरायकेला लाने का काम किया गया है।सामुदायिक भवन में 3 चिकित्सा टीम ने मजदूरों की जांच कीडॉ. विशाल कुमार के नेतृत्व में, एएनएम लीली कुजूर एवं एमपीडब्ल्यू राजेश वर्मा ,डॉक्टर संगीता करकेट्टा के नेतृत्व में एएनएम आशा कश्यप एवं एमपीडब्ल्यू मदन मिंज तथा डॉक्टर अमित कुमार दास के नेतृत्व में एएनएम कुंती सोय तथा एमपीडब्ल्यू श्यामसुंदर महतो द्वारा सभी आने वाले मजदूरों की स्वास्थ्य जांच की गई। स्वास्थ्य जांच के बाद मजदूरों के कलाई पर स्टांप लगाते हुए उन्हें अपने-अपने घर भेज दिया गया।72 कोरोना संदिग्धों का लिया गया सैंपलकोरोना संक्रमण से निपटने व संदिग्धों के पहचान के लिए शुक्रवार को जिला 72 संदिग्ध लोगों के स्वाब का सैंपल लिया गया और जांच हेतु एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर भेजा गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए डीसी ए दाेड्डे ने बताया कि सरायकेला खरसावां जिला में 139 लोग विदेश से आये हैं। जिसमें सभी क्वारिन्टाइन अवधी को पुरा कर चुके हैं जबकि दूसरे प्रदेशों से 3959 लोग आये हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इतने घरों के बहार क्वारेंटाइन से संबंधित पोस्टर लगा दिया है। डीसी ने बताया कि जिला में कुल 12 क्वारेंटाइन केंद्र बनाये गये हैं जिसमें 14 लोगों को रखा गया है।जिला में अब तक 340 लोगों का सैंपल कलेक्शन किया गया है जिसमें से 223 का रिपोर्ट नेगेटिव है व 117 का वेटिंग में है।बिलासपुर से कुचाई लाए गए दो मजदूरनागपुर से छत्तीसगढ के बिलासपुर होते हुए कुचाई पहुंचें दो मजदूरों को काेविड केयर सेंटर में 14 दिनों के क्वारेंटाइन में रखा गया है। दाेनाें मजदूरो की कोरोना जांच किया गया। दोनों में कोरोना के कोई लक्ष्ण नही पाया गया। चाईबासा जिला प्रशासन के सहयोग से दोनों कुचाई पहुचे। बताया गया कि नागपुर से कुचाई लौटने के क्रम में दो मजदूरों के साथ में कुचाई के जनालाॅग बाडेडीह गांव का एक युवक शामिल था। विगत चार मई को बिलासपुर पहुंचने पर युवक रवि मुंडा की तबीयत बिगड़ी और छत्तीसगढ के इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेस अस्पताल में उसकी मौत हो गयी। मृतक का बिलासपुर में अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के मौत के कारणों का पता नही चल सका है। अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नही मिला है।ऐप के जरिए मजदूराें की हाेगी निगरानीघर जाने वाले सभी मजदूरों के मोबाइल पर कोविड-19 पीपल ट्रैकिंग ऐप डाउनलोड किया गया है। इस ऐप की मदद से जिला प्रशासन क्वॉरेंटाइन किए गए सभी लोगों पर नजर रखेगी । एप के मदद से जिला प्रशासन को क्वॉरेंटाइन किए गए व्यक्ति के संबंध में जानकारी मिलती रहेगी। क्वॉरेंटाइन के नियम का अनुपालन नहीं करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।ए दोड्डे, डीसी, सरायकेला-खरसावां। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Seraikela brought 79 laborers from West Bengal, Kerala, 500 returns in five days Full Article
0 टाटा स्टील फाउंडेशन ने 250 जरूरतमंदों में बांटा राशन By Published On :: Fri, 08 May 2020 23:34:00 GMT खरसावां प्रखंड के प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय परिसर जोरडीहा में शुक्रवार काे टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से कृष्णापुर और जोरडीहा के 250 जरूरतमंदों के बीच खाद्य सामग्री का वितरण किय। खरसावां विधायक दशरथ गागराई के हाथों से सामाजिक दूरी का पालन करते हुए कृष्णापुर पंचायत के 120 और जाेरडीहा पंचायत के 130 जरूरतमंद लोगों के बीच खाद्यान्न का वितरण किया। मौके पर श्री गागराई ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण जारी लॉकडाउन में कोई भी व्यक्ति भूखा नही रहेगा। इसके लिए सरकार द्वारा काफी प्रयास किया जा राह है। इस दौरान मुख्य रूप से विधायक के धर्मपत्नी बासंती गागराई, प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन उर्फ नायडू गोप, पंचायत के मुखिया दशरथ सोय, निर्मल महतो, नियती महतो, प्राण मेलगांडी, सानगी हेम्ब्रम, दिलीप तांती, परमेश्वर तांती आिद मौजूद थे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 10 साल में पहली बार मई में भरपूर पानी, घाटशिला प्रखंड में 20 मीटर की गहराई पर भी मिल रहा पानी By Published On :: Sat, 09 May 2020 00:13:00 GMT पश्चिमी विक्षोभ के कारण अप्रैल व मई में कई दिन बारिश हुई है। मई में आसमान में भादो महीने जैसा बादल छाए हुए हैं। थोड़े अंतराल में तेज बारिश हो रही है। इस बेमौसम बारिश की बदौलत बीते दस साल में इस वर्ष मई में ग्राउंड वाटर लेवल सबसे अच्छा है। प्रखंड भर में 12 से 20 मीटर की गहराई में पानी मिल रहा है। हर साल गर्मी के दिनों में वाटर लेवल 35 से 50 मीटर तक चला जाता था। इस वर्ष बारिश ने गर्मी में न तो नदियों को सूखने दिया और न ही तालाब व कुएं सूखे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इस साल कहीं भी अब तक हैंडपंप सूखने की समस्या नहीं सुनी गई है। गर्मी में हो रही बारिश के चलते पूरे इलाके में भू-जल रिचार्ज हुआ है। इसका फायदा आने वाले कई सालों तक मिलेगा। शहर की बात करें तो इन दिनों शहर के तालाब में पानी कम जरूर हुए पर सूखे नहीं हैं। कटिंगपाड़ा व गोपालपुर के दोनों मुख्य तालाब भरे हुए हैं। शहर के कई इलाके ऐसे हैं, जहां 15 मीटर की खुदाई के बाद ही पानी निकल जा रहा है। इस वर्ष निजी कुओं से लोगों को पर्याप्त पानी मिल रहा है। हर साल गर्मी में सूख जाने वाले कुओं में भी पर्याप्त पानी है। ग्राउंड वाटर के रिचार्ज होने का सबसे अधिक फायदा जल व स्वच्छता विभाग को पहुंचा है।इस वर्ष शहर में जलापूर्ति नहीं हो रही बाधितहर साल गर्मी के दिनों में शहर में जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा जाती थी। इसकी मुख्य वजह सुवर्णरेखा नदी में पानी कम हो जाना था। बीते साल नदी की धार पतली हो जाने के कारण दाहीगोड़ा स्थित इंटकवेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इससे शहर में जलापूर्ति बार-बार ठप हो रही थी। इसके अलावा नलों में पर्याप्त पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही थी। इस वर्ष नदी में पर्याप्त पानी होने से ऐसी समस्या नहीं है। शहर में जलापूर्ति के लिए फिल्टर प्लांट में नदी से पानी लाया जाता है। नदी के पानी की धार को इंटेकवेल की अोर करने के लिए बालू भरकर बोरियां नदी में डाली जाती थी। इस बार ऐसी स्थिति नहीं है।मार्च और अप्रैल में बारिश होने से गर्मी का नहीं हो रहा अहसासवर्ष 2020 में ऐसा कोई महीना नहीं है, जिसमें बारिश न हुई हो। जनवरी में पहले दस दिन बारिश का मौैसम बना रहा। फरवरी में भी करीब 20 दिन बारिश हुई। मार्च व अप्रैल में भी बारिश होने से इस वर्ष गर्मी का एहसास नहीं हुआ। शहर सहित जिले के कई इलाकों में बुधवार की शाम को जमकर बारिश हुई थी। मौसम वैज्ञानिकों ने 10 मई तक बारिश की संभावना जताई है।बीते दस साल में पहली बार हैंडपंप मरम्मत की नौबत नहींबीते दस साल में यह पहली बार हुआ है जब हैंडपंप सुधारने के लिए मिस्त्री को किसी गांव में नहीं जाना पड़ा हो। हर साल मार्च से ही हैंडपंप सूखने की समस्या पैदा हाेने लगती थी। एक दो अपवाद को छोड़कर कहीं भी पानी की समस्या नहीं है। हालांकि हैंडपंप खराब होने की सूचना प्राप्त करने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर नंबर जारी किया गया है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today For the first time in 10 years, water is available in May, Ghatsila block is getting water even at a depth of 20 meters Full Article
0 काशीडीह स्कूल में 100 ग्रामीणों को मिला चावल By Published On :: Sat, 09 May 2020 00:25:00 GMT शुक्रवार को सोमयडीह के काशीडीह स्कूल परिसर में फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के बीहड़ क्षेत्र के 100 ग्रामीणों को विधायक रामदास सोरेन द्वारा दस-दस किलो चावल का वितरण किया गया। विधायक ने बताया कि वैसे ग्रामीणों को चावल बांटा गया, जिनके पास राशन कार्ड नहीं था। राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया है। लॉकडाउन के कारण दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों को काम नहीं मिलने से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे राशन से वंचित गरीब लोगों के लिए सरकार सकारात्मक सोच रखते हुए राशन मुहैया करा रही है। मौके पर झामुमो नेता कान्हू सामंत, के बी फरीद, प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन, जिप सदस्य बाघराय मार्डी, सोमाय सोरेन, गोरांगो महाली, रामचंद्र मुर्मू, रवींद्रनाथ मार्डी, कालीपद गोराई, पंसस पावर्ती सिंह सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Full Article
0 मोदी-राहुल अपराधियों को टिकट देने पर सवाल खड़े करते हैं, लेकिन 5 साल में भाजपा और कांग्रेस ने 30-30% टिकट दागियों को बांटे By Published On :: Sat, 15 Feb 2020 13:38:00 GMT नई दिल्ली. आज से 5 साल 10 महीने और 8 दिन पीछे चलें तो तारीख आती है- 7 अप्रैल 2014। यह वो तारीख है जब भाजपा ने 2014 के आम चुनावों के लिए घोषणा पत्र जारी किया था। इस घोषणा पत्र मेंवादा किया "भाजपा चुनाव सुधार करने के लिए कटिबद्ध है, जिससे अपराधियों को राजनीति से बाहर किया जा सके।' लेकिन 2014 के ही आम चुनाव में भाजपा के 426 में से 33% यानी 140 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले थे। इन 140 में से 98 यानी 70% जीतकर भी आए। इसके बाद 2019 के आम चुनावों में भी भाजपा के433 मेंसे 175 यानी 40% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज थे।जिसमें से 116 यानी 39% जीतकर भी आए थे।इतना ही नहीं, 2014 के आम चुनाव के बाद से अब तक सभी 30 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हो चुके हैं। इन विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 3 हजार 436 उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 1 हजार 4 दागी थे। मोदी अकेले ऐसे नेता नहीं है जो चुनाव सुधार की बातें करते हैं। बल्कि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी राजनीति से अपराधियों को दूर रखने की बात अक्सर कहते रहते हैं। 2018 में ही कर्नाटक चुनाव के दौरान राहुल ने दागियों को टिकट देने पर मोदी पर सवाल उठाए थे। लेकिन, आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने भी 2014 के चुनाव में 128 तो 2019 में 164 दागी उतारे थे। भाजपा-कांग्रेस ही नहीं बल्कि कई पार्टियां चुनावों में दागियों को टिकट देती हैं और जीतने के बाद राजनीति के अपराधिकरण को रोकने की बातें करती हैं।2014 में भाजपा के घोषणा पत्र में चुनाव सुधार की बात कही गई थी। लोकसभा चुनाव : 2014 में 34% दागी चुने गए, 2019 में 43% हो गए2014 के आम चुनावों में 545 सीट पर 8 हजार 163 उम्मीदवार खड़े हुए। इनमें से 1 हजार 585 उम्मीदवार अकेले 6 राष्ट्रीय पार्टियों में से थे। इन 6 राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, बसपा, भाकपा, माकपा और राकांपा है। इस चुनाव में खड़े हुए 1 हजार 398 यानी 17% उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। जब मई 2014 में नतीजे आए तो 185 सांसद आपराधिक रिकॉर्ड वाले भी चुनकर लोकसभा आए। यानी 34%। भाजपा के 281 में से 35% यानी 98 सांसद दागी थे। कांग्रेस में ऐसे सांसदों की संख्या 44 में से 8 थी। पार्टी कुल उम्मीदवार दागी उम्मीदवार जीते दागी जीते भाजपा 426 140 (33%) 281 98 (35%) कांग्रेस 462 128 (28%) 44 8 (18%) बसपा 501 114 (23%) 00 00 सीपीएम 93 33 (35%) 9 5 (56%) सीपीआई 68 19 (28%) 0 00 राकांपा 35 18 (51%) 6 5 (83%) अन्य/निर्दलीय 6578 946 (14%) 202 71 (35%) 2019 के आम चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों की संख्या 2014 की तुलना में घट तो गई, लेकिन दागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ गई। 2019 में कुल 7 हजार 928 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 19% यानी 1500 दागी उम्मीदवार थे। इस चुनाव में इन सभी 6 राष्ट्रीय पार्टियों ने 1 हजार 384 उम्मीदवारों को उतारा, जिनमें से 496 पर आपराधिक मामले थे। नतीजे आए तो 233 यानी 43% दागी उम्मीदवार चुनकर लोकसभा आए। पार्टी कुलउम्मीदवार दागी उम्मीदवार जीते दागी जीते भाजपा 433 175 (40%) 301 116 (39%) कांग्रेस 419 164 (39%) 51 29 (57%) बसपा 381 85 (22%) 10 5 (50%) सीपीएम 69 40 (58%) 9 5 (56%) सीपीआई 48 15 (31%) 00 00 राकांपा 34 17 (50%) 5 2 (40%) अन्य/निर्दलीय 6544 1004 (15%) 169 79 (47%) कुल 7928 1500 (19%) 539 233 (43%) विधानसभा चुनाव : 30 राज्यों के चुनाव में 1476 दागी चुने गए, सिक्किम में एक भी दागी नहींपिछले 5 साल में सभी 30 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। सभी राज्यों को मिलाकर 4 हजार 33 सीटें होती हैं। इन सीटों के लिए 39 हजार 218 उम्मीदवार खड़े हुए, जिसमें से 7 हजार 481 उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। इन 7 हजार 481 उम्मीदवारों में से 1 हजार 476 यानी 20% उम्मीदवार जीतकर विधानसभा भी पहुंचे। इस हिसाब से हर 4 में से एक विधायक पर आपराधिक मामला दर्ज है। अगर बात 6 राष्ट्रीय पार्टियों की करें, तो अकेले इन 6 पार्टियों की टिकट पर 2 हजार 762 दागी उतरे, जिसमें से 840 यानी 30% दागी उम्मीदवार जीते।30 राज्यों के चुनाव, 1476 दागी चुने गए; सिक्किम में एक भी दागी नहीं2014 के आम चुनाव से लेकर अब तक सभी 30 राज्यों के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। सभी राज्यों को मिलाकर 4 हजार 33 सीटें होती हैं। इन सीटों के लिए 39 हजार 218 उम्मीदवार खड़े हुए, जिसमें से 7 हजार 481 उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। इन 7 हजार 481 उम्मीदवारों में से 1 हजार 476 यानी 20% उम्मीदवार जीतकर विधानसभा भी पहुंचे। इस हिसाब से हर 4 में से एक विधायक पर आपराधिक मामला दर्ज है। अगर बात 6 राष्ट्रीय पार्टियों की करें, तो अकेले इन 6 पार्टियों की टिकट पर 2 हजार 762 दागी उतरे, जिसमें से 840 यानी 30% दागी उम्मीदवार जीते। राजनीति के अपराधिकरणपर रिसर्च कर चुके और"व्हेन क्राइम पेज़ : मनी एंड मसल इन इंडियन पॉलिटिक्स' किताब लिख चुके मिलन वैष्णव का ओपिनियन पार्टियां दागियों को इसलिए उतारती हैं, ताकि वे अपना खर्चा खुद उठाएं राजनीतिक पार्टियों की तरफ से चुनाव में आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को इसलिए उतारा जाता है, ताकि वे पैसे का इंतजाम कर सकें। आजकल चुनाव लड़ना वैसे भी महंगा होता जा रहा है, इसलिए पार्टियां ऐसे उम्मीदवार उतारती हैं, जो खुद पैसा खर्च कर सकें। आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों न सिर्फ अपने कैंपेन का खर्चा उठा सकते हैं, बल्कि पार्टी को भी पैसा दे सकते हैं। इसके साथ ही अगर किसी उम्मीदवार के पास पैसा नहीं है, तो उसका भी खर्च उठा सकते हैं। क्योंकि ऐसे उम्मीदवारों के पास संसाधन जुटाने के लिए लोग भी होते हैं। दागी खुद को 'रॉबिन हुड' की तरह पेश करते हैं, इसलिए जीत जाते हैं जहां कई लोग मानते हैं कि वोटर आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार को गरीबी और नादानी की वजह से वोट देते हैं, वहीं मेरा मानना है कि लोग उन्हें सरकार के खराब कामकाज (पुअर गवर्नेंस) की वजह से ऐसा करते हैं। भारत जैसे देश में जहां कानून काफी कमजोर है और लोग सरकार को पक्षपाती माना जाता है, वहां उम्मीदवार अपनी आपराधिकता को काम कराने की क्षमता और विश्वसनीयता के तौर पर पेश कर लेते हैं। यह ऐसी जगहों पर ज्यादा देखा जाता है, जहां लोग जाति और धर्म के नाम पर बंटे हैं। यानी इन जगहों पर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग खुद को रॉबिन हुड (गुंडई से काम कराने वाले) की तरह दिखाते हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today BJP Vs Congress Vs All Parties {Criminal Candidates}; Dainik Bhaskar Research On Candidates With Criminal Cases List In Vidhan Sabha Lok Sabha Election BJP Vs Congress Vs All Parties {Criminal Candidates}; Dainik Bhaskar Research On Candidates With Criminal Cases List In Vidhan Sabha Lok Sabha Election Full Article
0 मोदी-राहुल अपराधियों को टिकट देने पर सवाल खड़े करते हैं, लेकिन 5 साल में भाजपा और कांग्रेस ने 30-30% टिकट दागियों को बांटे By Published On :: Sun, 16 Feb 2020 10:00:59 GMT नई दिल्ली.आज से 5 साल 10 महीने और 8 दिन पीछे चलें तो तारीख आती है- 7 अप्रैल 2014। यह वो तारीख है जब भाजपा ने 2014 के आम चुनावों के लिए घोषणा पत्र जारी किया था। इस घोषणा पत्र मेंवादा किया "भाजपा चुनाव सुधार करने के लिए कटिबद्ध है, जिससे अपराधियों को राजनीति से बाहर किया जा सके।' लेकिन 2014 के ही आम चुनाव में भाजपा के 426 में से 33% यानी 140 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले थे। इन 140 में से 98 यानी 70% जीतकर भी आए। इसके बाद 2019 के आम चुनावों में भी भाजपा के433 मेंसे 175 यानी 40% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज थे।जिसमें से 116 यानी 39% जीतकर भी आए थे।इतना ही नहीं, 2014 के आम चुनाव के बाद से अब तक सभी 30 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हो चुके हैं। इन विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 3 हजार 436 उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 1 हजार 4 दागी थे। मोदी अकेले ऐसे नेता नहीं है जो चुनाव सुधार की बातें करते हैं। बल्कि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी राजनीति से अपराधियों को दूर रखने की बात अक्सर कहते रहते हैं। 2018 में ही कर्नाटक चुनाव के दौरान राहुल ने दागियों को टिकट देने पर मोदी पर सवाल उठाए थे। लेकिन, आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने भी 2014 के चुनाव में 128 तो 2019 में 164 दागी उतारे थे। भाजपा-कांग्रेस ही नहीं बल्कि कई पार्टियां चुनावों में दागियों को टिकट देती हैं और जीतने के बाद राजनीति के अपराधिकरण को रोकने की बातें करती हैं।2014 में भाजपा के घोषणा पत्र में चुनाव सुधार की बात कही गई थी। लोकसभा चुनाव : 2014 में 34% दागी चुने गए, 2019 में 43% हो गए2014 के आम चुनावों में 545 सीट पर 8 हजार 163 उम्मीदवार खड़े हुए। इनमें से 1 हजार 585 उम्मीदवार अकेले 6 राष्ट्रीय पार्टियों में से थे। इन 6 राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, बसपा, भाकपा, माकपा और राकांपा है। इस चुनाव में खड़े हुए 1 हजार 398 यानी 17% उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। जब मई 2014 में नतीजे आए तो 185 सांसद आपराधिक रिकॉर्ड वाले भी चुनकर लोकसभा आए। यानी 34%। भाजपा के 281 में से 35% यानी 98 सांसद दागी थे। कांग्रेस में ऐसे सांसदों की संख्या 44 में से 8 थी। पार्टी कुल उम्मीदवार दागी उम्मीदवार जीते दागी जीते भाजपा 426 140 (33%) 281 98 (35%) कांग्रेस 462 128 (28%) 44 8 (18%) बसपा 501 114 (23%) 00 00 सीपीएम 93 33 (35%) 9 5 (56%) सीपीआई 68 19 (28%) 0 00 राकांपा 35 18 (51%) 6 5 (83%) अन्य/निर्दलीय 6578 946 (14%) 202 71 (35%) कुल 8163 1398 (17%) 542 187 (35%) 2019 के आम चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों की संख्या 2014 की तुलना में घट तो गई, लेकिन दागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ गई। 2019 में कुल 7 हजार 928 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 19% यानी 1500 दागी उम्मीदवार थे। इस चुनाव में इन सभी 6 राष्ट्रीय पार्टियों ने 1 हजार 384 उम्मीदवारों को उतारा, जिनमें से 496 पर आपराधिक मामले थे। नतीजे आए तो 233 यानी 43% दागी उम्मीदवार चुनकर लोकसभा आए। पार्टी कुलउम्मीदवार दागी उम्मीदवार जीते दागी जीते भाजपा 433 175 (40%) 301 116 (39%) कांग्रेस 419 164 (39%) 51 29 (57%) बसपा 381 85 (22%) 10 5 (50%) सीपीएम 69 40 (58%) 9 5 (56%) सीपीआई 48 15 (31%) 00 00 राकांपा 34 17 (50%) 5 2 (40%) अन्य/निर्दलीय 6544 1004 (15%) 169 79 (47%) कुल 7928 1500 (19%) 539 233 (43%) विधानसभा चुनाव : 30 राज्यों के चुनाव में 1476 दागी चुने गए, सिक्किम में एक भी दागी नहींपिछले 5 साल में सभी 30 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। सभी राज्यों को मिलाकर 4 हजार 33 सीटें होती हैं। इन सीटों के लिए 39 हजार 218 उम्मीदवार खड़े हुए, जिसमें से 7 हजार 481 उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। इन 7 हजार 481 उम्मीदवारों में से 1 हजार 476 यानी 20% उम्मीदवार जीतकर विधानसभा भी पहुंचे। इस हिसाब से हर 4 में से एक विधायक पर आपराधिक मामला दर्ज है। अगर बात 6 राष्ट्रीय पार्टियों की करें, तो अकेले इन 6 पार्टियों की टिकट पर 2 हजार 762 दागी उतरे, जिसमें से 840 यानी 30% दागी उम्मीदवार जीते।30 राज्यों के चुनाव, 1476 दागी चुने गए; सिक्किम में एक भी दागी नहीं2014 के आम चुनाव से लेकर अब तक सभी 30 राज्यों के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। सभी राज्यों को मिलाकर 4 हजार 33 सीटें होती हैं। इन सीटों के लिए 39 हजार 218 उम्मीदवार खड़े हुए, जिसमें से 7 हजार 481 उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। इन 7 हजार 481 उम्मीदवारों में से 1 हजार 476 यानी 20% उम्मीदवार जीतकर विधानसभा भी पहुंचे। इस हिसाब से हर 4 में से एक विधायक पर आपराधिक मामला दर्ज है। अगर बात 6 राष्ट्रीय पार्टियों की करें, तो अकेले इन 6 पार्टियों की टिकट पर 2 हजार 762 दागी उतरे, जिसमें से 840 यानी 30% दागी उम्मीदवार जीते। राजनीति के अपराधिकरणपर रिसर्च कर चुके और"व्हेन क्राइम पेज़ : मनी एंड मसल इन इंडियन पॉलिटिक्स' किताब लिख चुके मिलन वैष्णव का ओपिनियन पार्टियां दागियों को इसलिए उतारती हैं, ताकि वे अपना खर्चा खुद उठाएं राजनीतिक पार्टियों की तरफ से चुनाव में आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को इसलिए उतारा जाता है, ताकि वे पैसे का इंतजाम कर सकें। आजकल चुनाव लड़ना वैसे भी महंगा होता जा रहा है, इसलिए पार्टियां ऐसे उम्मीदवार उतारती हैं, जो खुद पैसा खर्च कर सकें। आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों न सिर्फ अपने कैंपेन का खर्चा उठा सकते हैं, बल्कि पार्टी को भी पैसा दे सकते हैं। इसके साथ ही अगर किसी उम्मीदवार के पास पैसा नहीं है, तो उसका भी खर्च उठा सकते हैं। क्योंकि ऐसे उम्मीदवारों के पास संसाधन जुटाने के लिए लोग भी होते हैं। दागी खुद को 'रॉबिन हुड' की तरह पेश करते हैं, इसलिए जीत जाते हैं जहां कई लोग मानते हैं कि वोटर आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार को गरीबी और नादानी की वजह से वोट देते हैं, वहीं मेरा मानना है कि लोग उन्हें सरकार के खराब कामकाज (पुअर गवर्नेंस) की वजह से ऐसा करते हैं। भारत जैसे देश में जहां कानून काफी कमजोर है और लोग सरकार को पक्षपाती माना जाता है, वहां उम्मीदवार अपनी आपराधिकता को काम कराने की क्षमता और विश्वसनीयता के तौर पर पेश कर लेते हैं। यह ऐसी जगहों पर ज्यादा देखा जाता है, जहां लोग जाति और धर्म के नाम पर बंटे हैं। यानी इन जगहों पर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग खुद को रॉबिन हुड (गुंडई से काम कराने वाले) की तरह दिखाते हैं। (सोर्स- एडीआर रिपोर्ट्स। नोट- विधानसभा और लोकसभा चुनावों के डेटा में उपचुनावों के आंकड़े शामिल नहीं है।) Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today BJP Vs Congress Vs All Parties {Criminal Candidates}; Dainik Bhaskar Research On Candidates With Criminal Cases List In Vidhan Sabha Lok Sabha Election BJP Vs Congress Vs All Parties {Criminal Candidates}; Dainik Bhaskar Research On Candidates With Criminal Cases List In Vidhan Sabha Lok Sabha Election Full Article
0 360 करोड़ लीटर पानी सहेजने को 4 घंटे में बना डाली 40 हजार जल संरचना By Published On :: Mon, 02 Mar 2020 03:54:20 GMT Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today यह फोटो झाबुआ के हाथीपावा की पहाड़ी का है। यहां रविवार को शिवगंगा संस्था ने शिवजी का हलमा कार्यक्रम किया। गांवों से आए हजारों कार्यकर्ताओं ने चार घंटे तक पहाड़ी पर श्रमदान कर 40 हजार के लगभग कंटूर ट्रेंच बनाए। इस अभियान के तहत लगभग 360 करोड़ लीटर पानी सहेजने का लक्ष्य रखा गया है। बारिश का पानी पहाड़ पर इन कंटूर ट्रेंच के जरिये जमीन में उतरेगा। बारिश का पानी पहाड़ पर इन कंटूर ट्रेंच के जरिये जमीन में उतरेगा। इस तरह से वर्षाजल को सहेजकर भूजल स्तर बढ़ेगा। परमार्थ की इस परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से विद्यार्थी, पर्यावरणविद्, समाजसेवी और ब्यूरोक्रेट्स पहुंचे। Full Article
0 मेघालय में 30% परिवार की जिम्मेदारी सिंगल वुमन के कंधों पर, सब्जी-फल बेचकर खर्च चलाती हैं By Published On :: Sun, 08 Mar 2020 08:13:05 GMT शिलॉन्ग. इस साल जनवरी में नॉर्थ-ईस्ट के एक न्यूज चैनल पर खबर चल रही थी कि असम भारत में महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगह है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि असम में महिलाओं के ट्रैप होने के सबसे ज्यादा 66 मामले दर्ज हुए। 265 महिलाएं साइबर अपराध की शिकार हुईं। 2018 में असम में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 27,728 मामले दर्ज हुए, जो भारत के कुल अपराध का 7.3 % है।इससे भी ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े मां की पूजा करने वाले मेघालय के हैं। मेघालय पुलिस के हालिया आंकड़े बताते हैं कि यहां महिलाओं के खिलाफ अपराध के 481 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि बच्चों के खिलाफ 292 केस दर्ज हुए। महिलाओं के खिलाफ दर्ज हुए 481 मामलों में से 58 दुष्कर्म के इरादे से की गई मारपीट के थे, 67 दुष्कर्म के थे। इसके अलावा 17 केस दुष्कर्म के प्रयास, 36 अपहरण, 14 केस सम्मान को ठेस पहुंचाने को लेकर थे।मेघालय में करीब 30% परिवार की जिम्मेदारी सिंगल वुमन (अकेली रहने वाली महिला) के जिम्मे है। ये वे महिलाएं हैं, जिन्हें उनके पति ने छोड़ दिया या तलाक दे दिया है। बच्चे इन्हीं के साथ रहते हैं। 29% आबादी इन्हीं घरों में रहती है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि महिलाएं घर चलाती हैं, वे बाजार के बड़े हिस्से पर प्रभाव रखती हैं, लेकिन वे सब्जियों और फल जैसे जल्दी खराब हो जाने वाले सामान ही बेचती हैं।शिलॉन्ग की ज्यादातर महिलाएं सब्जी और फल बेचती हैं।नगालैंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध दो साल में तीन अंकों से दो अंकों में पहुंचाबात नगालैंड की करें तो यहां 2016 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा 105 केस दर्ज हुए थे। पर यह दो साल के अंदर ही दो अंकों में पहुंच गए। एनसीआरबी के मुताबिक, 2018 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 75 केस दर्ज हुए, 2017 में 79 केस थे। आंकड़े 90 के पार जा सकते थे, पर कई ऐसे मामले भी थे, जो दर्ज ही नहीं किए गए। वास्तव में मणिपुर की पहाड़ियों पर जहां नगा रहते हैं, वहां भारतीय कानून के तहत किसी के खिलाफ केस दर्ज नहीं किए जा सकते। नागा समुदाय अभी भी अपनी संप्रभुता को बचाए रखने के लिए भारतीय सरकार से बातचीत जारी रखे हुए हैं।छेड़छाड़ की रिपोर्ट इसलिए भी दर्ज नहीं हो पाती, क्योंकि इसे अभी भी शर्म माना जाता हैएनसीआरबी के 2017 के आंकड़े बताते हैं कि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा में महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस केवल तीन अंकों में हैं। यह पूरे भारत के आंकड़ों का 1% भी नहीं है। हर कोई जानता है कि मिजोरम में अपराध दर सबसे कम है, पर यह इसलिए है, क्योंकि यहां केस दर्ज नहीं किए गए। अपराध, दुष्कर्म और छेड़छाड़ की रिपोर्ट इसलिए भी दर्ज नहीं हो पाती, क्योंकि समाज में इसे शर्म की बात माना जाता है। इसके अलावा चर्च का प्रभुत्व भी महिलाओं द्वारा केस दर्ज कराने के रास्ते में मुश्किल बनता है।महिलाएं वोट करने में पुरुष से आगे हैं, पर विधानसभा पहुंचने में पीछेनॉर्थ-ईस्ट में मेघालय लैंगिक समानता के लिहाज से सबसे ज्यादा बेहतर है। यह बात आंकड़े साबित करते हैं। फिलहाल मेघालय की 60 सदस्यीय विधानसभा में 4 महिलाएं हैं, यह सदस्यों का 6.6 % है। असम के 126 विधायकों में 8 महिला हैं। यह कुल सदस्यों का 6.34% है। नगालैंड ओर मिजोरम में एक भी महिला विधायक नहीं हैं। मणिपुर में 60 विधायकों में 2 महिला हैं। त्रिपुरा के 30 विधायकों में से 3 महिला हैं। सिक्किम की 30 सदस्यीय विधानमंडल में 4 महिला विधायक हैं। ताजुब की बात यह है कि नॉर्थ-ईस्ट में हर चुनाव में महिला मतदाता पुरुषों से वोट करने में आगे रहती हैं। लेकिन सिर्फ राजनीति ही ऐसी जगह नहीं है, जहां महिलाएं हासिए पर हैं।असम के सिवाय इस क्षेत्र में एक दशक में साक्षरता दर में काफी सुधार हुआ हैसाक्षरता के मामले में जेंडर गैप बाकी देश की तुलना में इस क्षेत्र में कम है। 2001 और 2011 में राष्ट्रीय साक्षरता दर में जेंडर गैप क्रमशः 21.6% और 16.68% है। यह मिजोरम, मेघालय और नगालैंड के लिहाज से कम था। यहां अरुणाचल प्रदेश में साक्षरता दर में जेंडर गैप सबसे ज्यादा था। हालांकि पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में साक्षरता दर बहुत सुधार हुआ है। असम को छोड़कर इस क्षेत्र के सभी राज्यों में साक्षरता में जेंडर गैप कम हो गया है। हैरानी की बात कि यह गैप असम में बढ़ गया है।नॉर्थ-ईस्ट स्वास्थ्य और देखभाल के मामले में लगातार पिछड़ रहा हैनॉर्थ-ईस्ट स्वास्थ्य और देखभाल के मामले में लगातार पिछड़ रहा है। असम में मातृत्व मृत्यु दर सबसे ज्यादा है। यहां एक लाख बच्चों के जन्म में औसतन 300 मांओं की जान जाती है। जबकि देश में औसत दर 178 है। शिशु मृत्यु दर भी असम में सबसे ज्यादा है। यहां 1000 बच्चों में से 48 की मौत होती है। एनएसएसओ के 2017 के आंकड़ों के मुताबिक देश में यह दर 37 है।बदलाव के लिए आवाज उठानी होगी, क्योंकि हमें एक स्वस्थ लोकतंत्र और राजनीति चाहिएदुर्भाग्य है कि नॉर्थ-ईस्ट की सरकारों की खामियों को दूर करने में कई अड़चनें आ जाती हैं। यह उस समाज की ओर से आती हैं, जहां आवाजों को पहले परंपराओं द्वारा दबाया जाता है फिर धर्मों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। लोगों को लगता है कि उनकी आवाज कोई नहीं सुनता। कई इसलिए भी आवाज उठाने में संकोची हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं समाज के लोगों, उनके साथियों और परिवार द्वारा उनकी आलोचना न हो जाए।आवाज एजेंसी जैसी है और यह आवाज इसलिए जरूरी है, क्योंकि हमें एक स्वस्थ लोकतंत्र और राजनीति चाहिए। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today शिलॉन्ग स्थित सब्जी मार्केट, जिसे महिलाएं ही चलाती हैं। Full Article
0 50 साल बाद का भारत हमारे बारे में क्या सोचेगा By Published On :: Wed, 11 Mar 2020 18:49:00 GMT प्रिय शिक्षक,हमें 2020 में भारत में रहने वाले हमारे दादा-दादी की पीढ़ी के बारे में लिखने का काम देने के लिए धन्यवाद। यह बहुत पुराना सा लगता है। अगर हमें यह काम नहीं दिया गया होता तो हमें यह अहसास ही नहीं होता कि हमें आज हमारे चारों ओर की चीजों को कैसे महत्व देना चाहिए।आज हम भारत को बहुत महत्व नहीं देते हैं। लगभग हर किसी के पास कार व घर है। लोगों को अच्छे अस्पताल व स्कूल उपलब्ध हैं। सड़कें अच्छी हैं और सार्वजनिक परिवहन निजी कार से भी बेहतर है। हमारी प्रति व्यक्ति आय 60 हजार डॉलर है। निश्चित ही यह हमारी औसत आय का उच्च स्तर है, जिससे अधिकतर भारतीयों को अच्छा जीवन मिल पाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं, 2020 में हमारी प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 2000 डॉलर थी। किसी समय, शायद हमारे माता-पिता के समय में भारत ने विकास पर ध्यान केंद्रित किया। हालांकि, हमारे दादा-दादी के समय 2020 में ऐसा नहीं हुआ।2020 में भारत कई दशकों में सबसे कम विकास दर का सामना कर रहा था। नौकरी पाना मुश्किल था और ऑटो से लेकर रियल एस्टेट व बैंक जैसे व्यापार भी संकट में थे। जरा अंदाजा लगाओ कि तब तक हमारे दादा-दादी ने किस बात पर फोकस किया होगा? हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर। निश्चित ही तब भारत में हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे को पसंद नहीं करते थे। राजनेता इसका इस्तेमाल लाेगों को बांटने और वोट पाने के लिए करते थे। बिल्कुल, अब यह सब पूरी तरह अवैध है। हकीकत में आज के भारत में हम सामाजिक रूप से उन लोगों को बहुत ही बुरी नजर से देखते हैं, जो बांटने वाली बात करते हैं। हमारे पास कानून हैं, जो भगवान और राष्ट्रवाद के नाम पर हिंसा नहीं होने देते। 2020 में तो यह सबके लिए आम था। हमारे दादा-दादी कम आय, खराब सड़कों और बुरी स्वास्थ्य सेवाओं की परवाह नहीं करते थे। मेरा मतलब है कि उनकी प्राथमिकता में यह बहुत नीचे था। जब वोट देने की बारी आती थी तो यह कोई मुद्दा नहीं होता था। सोचिए कि यह कितना मूर्खतापूर्ण रहा होगा?2020 में दो प्रमुख राजनीतिक दल थे। उनमें से एक भाजपा मजबूत थी और उसके पास बड़ा बहुमत भी था। वे लगातार जीत रहे थे, इससे साफ था कि लोग उन्हें चाहते थे। जब वे धर्म व राष्ट्रवाद की बात करते थे तो लोग पसंद करते थे। असल में उन्हांेने जब भी आर्थिक सुधारों की कोशिश की, लोगों ने इसे पसंद नहीं किया। उन्होंने इसे सूट-बूट की सरकार कहा। सूट-बूट की सरकार में गलत क्या है? क्या वे नहीं चाहते थे कि सभी भारतीयों के पास सूट-बूट हों, जैसे कि आज हमारे पास है। दूसरी पार्टी कांग्रेस ने लगातार दो चुनावों में हार का सामना किया। हालांकि, इसके बावजूद वह जरा नहीं बदली। देश के पहले प्रधानमंत्री की बेटी के बेटे का बेटा उनका प्रधानमंत्री पद का दावेदार था। इसलिए उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि लोग क्या चाहते हैं।2020 में पूरी दुनिया कोरोना वायरस से डरी हुई थी। इसका चीन पर सबसे अधिक असर हुआ। इससे पूरी दुनिया में मंदी आ गई और इसका भारत पर भी असर पड़ा। इस वायरस के बाद दुनिया निर्माण के क्षेत्र में चीन से अपनी निर्भरता को कम करना चाहती थी, भारत इस अवसर को ले सकता था। लोगों ने उस समय अर्थव्यवस्था की बहुत कम चिंता की। लोग पूरे दिन हिंदू-मुस्लिम की बात करना चाहते थे। जैसे कि कौन अच्छा था और कौन बुरा। हालांकि, दोनों में ही अच्छे लोग भी थे और बुरे भी, लेकिन उन्होंने इसे कभी नहीं समझा। वे इतिहास से यह साबित करना चाहते थे कि मुस्लिम बुरे हैं या हिंदू बुरे हैं। यही प्राइम टाइम की बहस होती थी। हमारे दादा-दादी अपने भूतकाल से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। कई बार सड़कों पर दंगे होते थे और लोग मारे जाते थे। वे गरीब लोग होते थे और हमारे देश में तब बहुत थे, इसलिए मायने नहीं रखते थे। बाद में तेल की कीमतें गिर गईं, वायरस और फैल गया और भारतीय व्यापार को भारी क्षति पहुंच गई।जो कोई भी कहता था कि हमें अर्थव्यवस्था पर फोकस करना चाहिए, उसे उबाऊ कहा जाता था और कम महत्व दिया जाता था। दुर्भाग्य से जीडीपी का कोई धर्म नहीं था। कुछ लोगों ने स्वास्थ्य, विकास दर, रोजगार और शिक्षा जैसे वास्तविक मुद्दों पर बात करने की कोशिश की। हालांकि, वे संख्या में बहुत कम थे। वे एक सोशल मीडिया एप ट्विटर का इस्तेमाल करते थे, जो आज मौजूद भी नहीं है। इन लोगों को इसलिए नजरअंदाज कर दिया गया, क्योंकि ट्विटर पर लोग दिनभर हिंदू-मुस्लिम मसलों पर चर्चा करते थे।ईश्वर का शुक्र है कि किसी समय भारतीय जाग गए। उन्हें अहसास हो गया कि यह सब मूर्खता है और कुछ भी अच्छा नहीं करेगा। उन्हांेने बदलने का फैसला किया। उन्होंने कानून बनाए और ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना शुरू किया जो ऐसी मूर्खतापूर्ण बातें करते थे, जिनका भारत की प्रगति और संपन्नता से कोई सरोकार नहीं था। उन्होंने सिर्फ विकास का फैसला किया। हिंदू और मुसलमान दोनों ने ही अपने बच्चों को शिक्षित करने, उन्हें व्यापार, नेटवर्किंग सिखाने के साथ ही उनकी कम्युनिकेशन क्षमताओं को बढ़ाया। मतदाताओं ने नेताओं को सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर आंका। उन्होंने कहा कि अगले दो दशकों में हमें सिर्फ विकास करना है। अाज भारत अमीर और कीर्तिवान है। हम अमीर हैं, इसलिए हमें सौम्य माना जाता है। अब होली और दीपावली दुनियाभर में प्रसिद्ध है, क्योंकि भारत जैसा अमीर देश इन्हें मनाता है। यह वैसा ही है, जैसा 2020 में थैक्सगिविंग और हैलोवीन जैसे अमेरिकी त्योहार प्रसिद्ध थे। इससे हिंदू संस्कृति का विकास 2020 की तुलना में बेहतर हुआ है। मैं सोचता हूं कि हमारी पीढ़ी का क्या होता अगर भारत बदला न होता। वास्तव में हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हम आज 2070 में रह रहे हैं, न कि 2020 के भारत में। (यह लेखक के अपने विचार हैं।) Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रतीकात्मक फोटो। Full Article
0 भारत में साल भर में करीब 1 करोड़ टूरिस्ट आते हैं, उसका 20% तक मार्च-अप्रैल में आ जाते हैं; वीजा पर प्रतिबंधों से सरकार को 33 से 34 हजार करोड़ का नुकसान संभव By Published On :: Fri, 13 Mar 2020 05:44:21 GMT नई दिल्ली.कोरोनावायरस केडर से दुनिया सहमी हुई है। कोरोना को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 15 अप्रैल तक दुनियाभर के लोगों के वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया है। मतलब, 15 अप्रैल तक अब कोई भी विदेशी व्यक्ति भारत नहीं आ सकेगा। हालांकि, डिप्लोमैटिक और एम्प्लॉयमेंट वीजा को इस दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर टूरिज्म सेक्टर पर पड़ेगा। पर्यटन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत में सालभर में जितने विदेशी पर्यटक आते हैं, उनका करीब 15 से 20% अकेले मार्च-अप्रैल में ही आते हैं। 2019 में मार्च-अप्रैल के दौरान 17 लाख 44 हजार 219 विदेशी पर्यटक भारत आए थे। जबकि, पूरे सालभर में 1.08 करोड़ पर्यटकों ने भारत की यात्रा की थी। वीजा रद्द होने से सरकार को 33 से 34 हजार करोड़ रुपए का नुकसान भी हो सकता है। पिछले साल मार्च-अप्रैल में सरकार को टूरिज्म सेक्टर से 33 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई हुई थी।बिजनेस: 2019 में जितनी कमाई हुई, उसकी 16% अकेले मार्च-अप्रैल महीने में हुईटूरिज्म सेक्टर से सरकार को हर साल करीब 2 लाख करोड़ रुपए की कमाई होती है। 2019 में सरकार को विदेशी पर्यटकों से 2.10 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। इसमें से 16% यानी 33 हजार 186 करोड़ रुपए की कमाई अकेले मार्च-अप्रैल में हुई थी। पिछले 5 साल के आंकड़े भी यही कहते हैं कि सरकार को विदेशी पर्यटकों से सालभर में जितनी कमाई होती है, उसमें से 15 से 20% की कमाई अकेले मार्च-अप्रैल में ही हो जाती है। मार्केट एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यदि पिछले साल के आंकड़ों को देखें तो मार्च-अप्रैल में पर्यटकों के नहीं आने से सरकार को 33 हजार से 34 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। ये कमाई सरकार को फॉरेन करंसी में होती है।कोरोना की दहशत:इस साल जनवरी में पिछले 10 साल में सबसे कम रही पर्यटकों की ग्रोथकोरोना का असर दुनियाभर के टूरिज्म सेक्टर पर पड़ा है। दुनिया के प्रमुख पर्यटक स्थल सूने हो गए हैं। भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। पर्यटन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी में 11.18 लाख विदेशी पर्यटक ही आए, जबकि जनवरी 2019 में 11.03 लाख पर्यटक भारत आए थे। जनवरी 2019 की तुलना में जनवरी 2020 में विदेशी पर्यटकों की संख्या भले ही बढ़ी है, लेकिन ग्रोथ रेट 10 साल में सबसे कम रहा। जनवरी 2020 में विदेशी पर्यटकों का ग्रोथ रेट सिर्फ 1.3% रहा। जबकि, जनवरी 2019 में यही ग्रोथ रेट 5.6% था।10 साल में जनवरी में आने वाले पर्यटकों की संख्या और ग्रोथ रेट साल पर्यटकों की संख्या ग्रोथ रेट जनवरी 2020 11.18 लाख 1.3% जनवरी 2019 11.03 लाख 5.6% जनवरी 2018 10.45 लाख 8.4% जनवरी 2017 9.83 लाख 16.5% जनवरी 2016 8.44 लाख 6.8% जनवरी 2015 7.90 लाख 4.4% जनवरी 2014 7.57 लाख 5.2% जनवरी 2013 7.20 लाख 5.8% जनवरी 2012 6.81 लाख 9.4% जनवरी 2011 6.22 लाख 9.5% राहत की बात: जनवरी 2020 में विदेशी पर्यटकों से होने वाली कमाई 12.2% बढ़ीभारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की ग्रोथ रेट में भले ही कमी आई हो, लेकिन उनसे होने वाली कमाई बढ़ी है। जनवरी 2020 में सरकार को विदेशी पर्यटकों से 20 हजार 282 करोड़ रुपए की कमाई हुई, जो पिछले साल से 12.2% ज्यादा रही। जबकि, जनवरी 2019 में सरकार को 18 हजार 79 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी, जो जनवरी 2018 की तुलना में सिर्फ 1.8% ही ज्यादा थी। हालांकि, फरवरी के बाद कोरोनावायरस के मामले बढ़ने और मार्च-अप्रैल में वीजा पर प्रतिबंध लगने की वजह से विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी आनी तय है। इससे सरकार की आमदनी पर भी असर पड़ेगा।पांच साल में जनवरी महीने में सरकार को पर्यटन सेक्टर से होने वाली आमदनी साल कमाई ग्रोथ रेट जनवरी 2020 20,282 12.2% जनवरी 2019 18,079 1.8% जनवरी 2018 17,755 9.9% जनवरी 2017 16,135 18% जनवरी 2016 13,671 13% सबसे ज्यादा पर्यटक दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते हैं, लेकिन घूमने के लिए तमिलनाडु पसंदीदा जगहपर्यटन मंत्रालय की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों से आने वाले पर्यटक सबसे ज्यादा दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते हैं। 2018 में दिल्ली एयरपोर्ट पर 30.43 लाख पर्यटक उतरे थे। लेकिन पर्यटकों को घूमने के लिए तमिलनाडु सबसे पसंदीदा जगह है। 2018 में 60.74 लाख विदेशी पर्यटक तमिलनाडु गए थे। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र और तीसरे पर उत्तर प्रदेश है।5 एयरपोर्ट या इंटरनेशनल चेक पोस्ट, जहां सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक उतरते हैं एयरपोर्ट/ इंटरनेशनल चेक पोस्ट पर्यटकों की संख्या दिल्ली 30.43 लाख मुंबई 16.36 लाख हरिदासपुर 10.37 लाख चेन्नई 7.84 लाख बेंगलुरु 6.08 लाख Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today India Tourist Visa | Coronavirus India Tourist Visas Ban Latest Updates On India ForeignTourist Arrivals Research and Statistics Full Article
0 आखिरकार दुष्कर्मियों को कल सुबह 5:30 बजे होगी फांसी, मौत की सजा से एक दिन पहले दोषियों की 5 याचिकाएं खारिज By Published On :: Thu, 19 Mar 2020 14:08:12 GMT नई दिल्ली. निर्भया को न्याय मिलते-मिलते आखिरकार मिल ही गया। उसके चारों दुष्कर्मियों- मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर ने मौत से एक दिन पहले तक बचने के लिए सारी तिकड़में लगा दीं, लेकिन कोर्ट ने उनकी फांसी नहीं टाली। गुरुवार को एक ही दिन में दोषियों की 5 याचिकाएं खारिज हो गईं। पवन-अक्षय ने दूसरी बार दया याचिका भेजी, वो भी खारिज हो गई। मुकेश ने वारदात वाले दिन दिल्ली में नहीं होने का दावा किया था, वो भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। फांसी पर रोक लगाने के लिए भी याचिका लगाई थी, लेकिन पटियाला हाउस कोर्ट ने इसे भी नहीं माना। अब शुक्रवार सुबह 5:30 बजे चारों दुष्कर्मियों को तिहाड़ की जेल नंबर-3 में फांसी मिल जाएगी।तलाक की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन फांसी नहीं रोक सकेफांसी रोकने के लिए दोषी अक्षय की पत्नी पुनीता ने 18 मार्च को औरंगाबाद की एक कोर्ट में तलाक की अर्जी भी लगाई थी। उसने दलील दी थी कि वो विधवा की तरह नहीं जीना चाहती। लेकिन उसके बाद भी दोषियों की फांसी नहीं रुक सकी। इसका कारण भी था। 35 साल तक तिहाड़ में लॉ अफसर रहे सुनील गुप्ता और वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने दैनिक भास्कर से बातचीत में पहले ही कह दिया था कि तलाक की अर्जी लगी होने के बाद भी दोषियों की फांसी रोकने की गुंजाइश न के बराबर है। क्योंकि तलाक सिविल मामलों में आता है और फांसी क्रिमिनल मामलों में। और क्रिमिनल मामलों पर सिविल मामले असर नहीं डालते। भास्कर आर्काइव से: 23 साल 7 महीने पहले इंदौर में हत्या के दोषी को दी गई फांसी की आंखों देखी रिपोर्टलेकिन दोषियों के वकील कहते रहे- पुनीता को न्याय मिलना चाहिएबार-बार फांसी टलवा रहे दोषियों के वकील एपी सिंह को जब इस बार फांसी टलवाने का कोई कारण नहीं मिला, तो उन्होंने कहा कि उसे (अक्षय की पत्नी) न्याय मिलना चाहिए। एपी सिंह ने भास्कर से फोन पर बात करते हुए कहा था- "वो (अक्षय की पत्नी) पीड़िता है। उसका अधिकार है। अगर उसको (अक्षय) फांसी दे दोगे, तो उसकी पत्नी के अधिकारों का क्या होगा? वो तो विधवा हो जाएगी। वो तो जवान लड़की थी। उसकी एक साल पहले ही शादी हुई थी और दो महीने का बच्चा था। तबसे अक्षय जेल में है।' एपी सिंह ने ये भी बताया था कि दोषियों की जितनी भी लीगल रेमेडिज बाकी थी, वो सब लगा दी थी।दोषियों की फांसी नहीं टल सकी, उसके दो कारण1) 14 दिन का समय खत्म : सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन कहती है कि डेथ वॉरंट और फांसी की तारीख में 14 दिन का अंतर होना चाहिए। दोषियों का डेथ वॉरंट 5 मार्च को जारी हुआ था।2) सारे कानूनी रास्ते भी खत्म : फांसी की सजा में दोषी को सारे कानूनी रास्ते इस्तेमाल करने का अधिकार होता है और चारों दोषियों ने अपने सारे कानूनी अधिकार इस्तेमाल भी कर लिए हैं। चारों की रिव्यू पिटीशन, क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका भी खारिज हो चुकी है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Nirbhaya Convicts Hanging Latest News: Nirbhaya Rapists Lawyer and Tihar Jail Officer Speaks To Dainik Bhaskar On Delhi Gang Rape And Murder Case Convicts Akshay Kumar Singh, Pawan, Vinay Kumar Sharma, Mukesh Kumar Full Article
0 निर्भया के दोषियों को सुबह जेल स्टाफ ने चाय और नाश्ते की पेशकश की, सुबह 5:30 बजे सुपरिंटेंडेंट का इशारा मिलते ही चारों को फांसी दी गई By Published On :: Fri, 20 Mar 2020 11:31:29 GMT भास्कर रिसर्च टीम. 16 दिसंबर 2012... ये वो तारीख है, जिस दिन दिल्ली की सड़कों पर रात के अंधेरे में चलती बस में निर्भया के साथ 6 दरिंदों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं। इन 6 में एक ने जेल में आत्महत्या कर ली। उसका नाम राम सिंह था, जो बस ड्राइवर और मुख्य आरोपी था। एक नाबालिग था, जो 3 साल की सजा काटकर 20 दिसंबर 2015 को रिहा हो चुका है और कहीं चैन से अपनी जिंदगी जी रहा है। बचे चार। इनके नाम थे- मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर। इन दोषियों को उनके गुनाह की सजा 7 साल 3 महीने और 4 दिन बाद मिली। चारों दोषियों को तिहाड़ की जेल नंबर-3 में 20 मार्च की सुबह साढ़े 5 बजे फांसी पर लटकाया गया। फांसी देने के लिए जल्लाद पवन 17 तारीख को ही तिहाड़ पहुंच चुका था। लेकिन फांसी से कुछ घंटे पहले इन दरिंदों के साथ क्या-क्या हुआ? फांसी पर चढ़ाने की पूरी प्रोसेस क्या है? इसे जानते हैं…दोषियों को फांसी सुबह 5:30 बजे हुई, लेकिन तैयारी रात से ही शुरू हुई।दोषियों को नहलाया। उन्हें पहनने के लिए साफ और नए कपड़े मिले।उसके बाद उन्हें नाश्ता दिया गया।फांसी से एक घंटे पहले जेल सुपरिटेंडेंट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट, डीएम या एडीएम और मेडिकल ऑफिसर इन दोषियों से मिले।दोषियों को जेल नंबर-3 में ले जाया गया।दोषियों के सामने हिंदी में डेथ वॉरंट पढ़ा गया।जल्लाद आया। दोषियों के पैरों को कसकर बांधा। उनकी गर्दन पर फांसी का फंदा भी जल्लाद ने ही डाला। सुपरिटेंडेंट ने जल्लाद को इशारा किया और जल्लाद ने लीवर खींच दिया। चारों दोषी नीचे लटक गए।इन दोषियों को फंदे पर तब तक लटके रहने दिया गया, जब तक मेडिकल ऑफिसर इनके मरने की पुष्टि नहीं की।किस-किस ने देखीइन चारों दोषियों की फांसी?जेल सुपरिंटेंडेंट, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर मौजूद रहे। उनके अलावा डीएम या एडीएम भी रहे, जिन्होंनेवॉरंट पर साइन किया।इन सबके अलावा कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल या वॉर्डनभी थे। जब तक इन दोषियों की फांसी की प्रोसेस पूरी नहीं हुई, तब तक जेल में रह रहे सभी कैदी अपनी-अपनी सेल में ही बंद रहे।(दिल्ली प्रिजन मैनुअल 2018 में फांसी की प्रोसेस और फांसी वाले दिन क्या-क्या होता है, इस बारे में बताया गया है। ये स्टोरी भी प्रिजन मैनुअल के आधार पर ही तैयार की गई है)इसी के साथ आप ये खबरें भी पढ़ सकते हैं...1.निर्भया मुस्कुराई : 7 साल, 3 महीने और 4 दिन बाद निर्भया को इंसाफ मिला; तिहाड़ में चारों दुष्कर्मियों को फांसी पर लटकाया गया2. फांसी लाइव भास्कर आर्काइव से : 23 साल 7 महीने पहले इंदौर में हत्या के दोषी को दी गई फांसी की आंखों देखी रिपोर्ट3. निर्भया के इंसाफ के 5 सबसे अहम किरदार: कुछ शब्द और कुछ इशारों के साथ जब उसने कहा- नहीं! फांसी नहीं... सभी को जिंदा जला देना चाहिए4. निर्भया के गांव से: दरिंदों को फांसी की हर अपडेट लेते रहे परिजन; गांव में जश्न का माहौल5. निर्भया के गांव से: दरिंदों को फांसी की हर अपडेट लेते रहे परिजन; गांव में जश्न का माहौल Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Nirbhaya Rapists Convicts Hanging | Nirbhaya Case Convicts Hanging Latest Updates Delhi Gang Rape And Murder Case; Know What What happens on day of Hanging Full Article
0 अमेरिका के कॉर्पोरेट सेक्टर पर कुल ऋण स्तर उसकी जीडीपी का 75%, 2008 से भी ज्यादा By Published On :: Fri, 20 Mar 2020 17:57:00 GMT दुनियाभर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में आक्रामक कटौती कर रहे हैं, लेकिन इससे बाजार को शायद ही कोई लाभ हो रहा हो। अब कोरोना वायरस ने 12 साल पहले की आर्थिक मंदी की तुलना में विश्व अर्थव्यवस्था में बहुत ही संवेदनशील वित्तीय संक्रमण के फैलने का खतरा पैदा कर दिया है। पिछले संकट की तुलना में दुनिया इस बार कर्ज में अधिक गहरे डूबी हुई है। दुनियाभर में इस बार सबसे जोखिमभरा कर्ज का बड़ा हिस्सा घरों व बैंकों से हटकर कॉर्पोरेशनों के पास चला गया है। नगदी के प्रवाह में अचानक रोक की संभावनाओं से निपटने वाले व्यवसायों में अधिकांश नई पीढ़ी की वे कंपनियां हैं, जो पहले से ही अपने ऋण चुकाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। इस वर्ग में वे जॉम्बी (प्रेत) कंपनियां हैं, जो इतना कम कमाती हैं कि अपने ऋण पर ब्याज भी नहीं चुका सकतीं, ये सिर्फ हर बार नया ऋण लेकर ही चल रही हैं। यह महामारी जितनी लंबी चलेगी, वित्तीय संकट के उतना ही गहराने का खतरा उत्पन्न होगा और साथ ही इन जॉम्बी कंपनियों के एक के बाद एक डिफॉल्टर होने की शुरुआत हो जाएगी।पिछली एक शताब्दी में मंदी हमेशा ही ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने से शुरू हुई। कभी भी वायरस की वजह से नहीं। दुनिया की अर्थव्यवस्था को इस संक्रमण से होने वाला नुकसान तीन महीने से अधिक तो नहीं चलेगा। लेकिन, अब सदी में एक बार होने वाली यह वैश्विक महामारी रिकॉर्ड कर्ज के बोझ से दबी दुनिया को चोट पहुंचा रही है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक महसूस रहे हैं कि नगदी की कमी एक और वित्तीय संकट को जन्म दे सकती है। जिस तरह से फेड ने 2008 की तरह आक्रामक उपाय किए, ताकि बाजार में डर को दूर किया जा सके, लेकिन अब यह जांच का विषय है कि वित्तीय सिस्टम फिर भी इतना संवेदनशील क्यों दिख रहा है। 1980 के आसपास दुनिया में कर्ज का तेजी से बढ़ना शुरू हुआ, क्योंकि ब्याज दरों में कमी हो रही थी और विनियमन की वजह से ऋण देना आसान हो गया था। 2008 के संकट के शुरू होने से ठीक पहले कर्ज अपनी ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया था। तब यह दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था का तीन गुना हो गया था। संकट के दौरान यह कर्ज गिरा और दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने वसूली में तेजी की उम्मीद में ब्याज दरों को न्यूनतम स्तर पर ला दिया। जैसे-जैसे आर्थिक विस्तार होता रहा, उधार देने वाले बहुत ही शिथिल हो गए और उन कंपनियों को भी सस्ते ऋण देने लगे जिनकी आय को लेकर सवाल थे। आज भी दुनिया पर कर्ज का भार अब तक का सबसे अधिक है।अमेरिका के कॉर्पोरेट सेक्टर पर ऋण का कुल स्तर देश की जीडीपी का 75 फीसदी है, यह 2008 से भी अधिक है। इस 16 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के भीतर भारी संकट की आशंका छिपी हुई है। इनमें कई जॉम्बी कंपनियां भी हैं। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट के अनुसार अमेरिका में ऐसी जॉम्बी कंपनियां सार्वजनिक कंपनियों का 16 फीसदी और यूरोप में 10 फीसदी से अधिक हैं। ट्रांसपोर्ट, ऑटो और तेल क्षेत्र में तनाव के लक्षण लगातार बढ़ रहे हैं। अधिक आपूर्ति और वायरस की वजह से मांग में कमी के डर से तेल की कीमत 35 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ गई है। यह कई तेल कंपनियों के लिए इतनी कम है कि वे अपना कर्ज भी नहीं चुका सकते।जब बाजार गिरता है तो निवेशक कम समृद्धि महसूस करते हैं और अपने खर्चों में कमी करने लगते हैं। इससे अर्थव्यवस्था धीमी हो जाती है। बड़े बाजारों पर इसका अधिक नकारात्मक असर होता है। वॉलस्ट्रीट में तेजड़िए आज भी चीन को लेकर उम्मीदों से भरे हैं कि यह बुरी स्थिति जल्द ही गुजर सकती है। चीन में वायरस का पहला मामला 31 दिसंबर को सामने आया और नए मामले आने की दर सिर्फ सात हफ्ते बाद 13 फरवरी को चरम पर पहुंच गई। शुरुआती नुकसान के बाद चीन के स्टॉक मार्केट ने दोबारा उछाल मारी और अर्थव्यवस्था पहले जैसी ही दिख रही है। लेकिन रिटेल बिक्री और निवेश के ताजा डाटा से पता चलता है कि इस तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है।जैसे-जैसे वायरस दुनिया में फैल रहा है, एक बार फिर इस बात का डर है कि निर्यात की मांग घटने से संकट फिर चीन के चारों ओर आ सकता है। पिछले एक दशक में चीन का कॉर्पोरेट कर्ज चार गुना बढ़कर 20 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। आईएमएफ का अनुमान है कि इस कर्ज का दसवां हिस्सा जॉम्बी कंपनियों में है, जो जिंदा रहने के लिए सरकार निर्देशित कर्ज के भरोसे हैं। दुनियाभर में मांग उठ रही है कि कमजोर कॉर्पोरेशनों को सरकारें इसी तरह का समर्थन दें। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि नीति निर्धारक क्या करते हैं। परिणाम तो इस बात पर निर्भर है कि कितनी जल्दी कोरोना वायरस अपने चरम पर पहुंचता है। यह मौजूदा गति से जितने अधिक समय तक फैलता रहेगा, संभव है कि जॉम्बी कंपनियों की मौत शुरू हो जाए, जो बाजार को और अधिक हताश करेगा और इसे वित्तीय संक्रमण के और बढ़ने की आशंका उत्पन्न हो जाएगी। (यह लेखक के अपने विचार हैं।) Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today US corporate sector total debt level of 75% of its GDP, more than 2008 Full Article