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बरगढ़ से 25 मजदूर पैदल पहुंचे बागबाहरा समाज सेवियों ने बस की व्यवस्था कर भेजा

बरगढ़ से पैदल मध्यप्रदेश जा रहे 25 मजदूरों को जत्था मंगलवार की सुबह शहर की सड़कों पर दिखा। ये सभी मजदूर 165 किलोमीटर दूर बरगढ़ (ओडिशा) से पैदल आ रहे थे। स्टेशन चौक पर कुछ स्वयंसेवी लोगों ने उन्हें रोककर पूछताछ की और उन्हें नाश्ता कराया। इसकी जानकारी एसडीएम भागवत जायसवाल को दी घी। लेकिन उन्होंने आने से साफ इनकार करते हुए ओडिशा प्रशासन से बात कर मजदूरों को वापस ओडिशा भेजने की बात कही। इसके बाद एसडीओपी लितेश सिंह को सूचना मिलने के बाद उन्होंने सभी मजदूरों को थाने बुलवाया और स्थानीय लोगों के सहयोग से उनके खाने की व्यवस्था की गई। फिर बस की व्यवस्था कर सभी को मध्यप्रदेश के लिए रवाना कर दिया गया।
मजदूरों ने कहा कि वो मध्यप्रदेश की बड़वानी, कटनी, सतना जिले के विभिन्न गांवों के निवासी है। वे बरगढ़ क्षेत्र में नंदा कंस्ट्रक्शन कंपनी मे फोरलेन सड़क निर्माण में काम कर रहे थे। लेकिन पूरे देश मे लॉकडाउन की वजह से काम बंद हो गया। खाली बैठने की बजाय घर जाने का विचार किया और पैदल ही निकल गए। जत्थे को देखकर बरगढ़ कलेक्टर ने सभी मजदूरों को क्वारेंटाइन मे 28 दिन तक रखा और बाद में छोड़ दिया। क्वारेंटाइन पर रखे जाने का एक पत्र उन मजदूरों को दिया गया। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष ऑनलाइन आवेदन भी किया था, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। इसके बाद सभी मजदूर 3 मई को रेलवे ट्रैक के रास्ते पैदल चलते हुए बागबाहरा 5 मई की सुबह 8 बजे पहुंचे।
अंतरराज्यीय सीमा पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल : जिला प्रशासन ने कोरोना का संक्रमण अन्य राज्य से छत्तीसगढ़ में रोकने के लिए अंतर राज्य सीमा पर विभिन्न अधिकारियों एवं सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। उनकी तैनाती के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में मजदूर रेलवे ट्रैक से होते हुए बागबाहरा तक कैसे पहुंच गए। रास्ते में कोमाखान थाना भी पड़ता है उन्होंने भी इन्हें नहीं देखा। यह लापरवाही उन सबकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।
परमिशन है तो सबकी हरसंभव मदद की जाएगी
एसडीएम भागवत जायसवाल ने कहा कि उन मजदूरों के पास यदि, जहां से आ रहे हैं और वे जहां जा रहे हैं। दोनों राज्यों का परमिशन का कागज नहीं है। इसलिए मैं आफिशियली यही कहूंगा कि मुझे उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। स्थानीय स्तर पर कोई उनका सहयोग करना चाहे तो कर सकता है। राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक जिनके पास परमिशन का कागज है उन्हें ही हरसंभव मदद दी जाएगी।”
सारी जांच पड़ताल के बाद मजदूरों को भेजा गया
एसडीओपी लितेश सिंह ने बताया कि 25 मजदूर ओडिशा से बागबाहरा आ गए हैं। जन सहयोग से उनके भोजन एवं बस की व्यवस्था कर मध्यप्रदेश की सीमा में भेज दिया है। उन मजदूरों को बरगढ़ जिला प्रशासन की ओर से 28 दिनों तक क्वॉरेंटाइन में रखा गया था। उसका एक लेटर उन्होंने मुझे दिखाया है। सारी जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें भेजा गया ।



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25 workers from Bargarh arrived on foot, Bagbahara social workers sent the bus by arranging




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2 महिलाओं को भालुओं ने नोचा, सीएचसी में रैबिज के इंजेक्शन नहीं, महासमुंद रेफर

बागबाहरा के ग्राम दरबेकेरा व सुआरमाल जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ रही दो बुजुर्ग महिलाओं पर भालुओं ने हमला कर घायल कर दिया। दोनों महिलाओं को भालुओं ने कई जगह नोंच दिया। महिलाओं की आवाज सुनकर जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ रहे कुछ लोग आए और भालू को वहां से भगाकर महिलाओं को इलाज के लिए बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। हद तो तब हो गई, जब स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज के बाद रेबिज इंजेक्शन नहीं होने की बात कहते हुए महासमुंद रेफर कर दिया। फिलहाल घायल रनबाई को एक हजार व जगौतीन को 500 रुपए तात्कालिक सहायता राशि दे दी गई है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी जयकांत गंडेचा ने बताया कि बागबाहरा के दरबेकेरा निवासी रनबाई पति रेवा राम (55) सुबह तेंदूपत्ता तोडऩे जंगल की ओर गई थी। वहीं सुअरमाल निवासी जगौतीन बाई पति सुंदर सिंह ठाकुर (65) भी जंगल की ओर तेंंदूपत्ता तोडऩे के लिए गई थी। भालुओं ने दोनों महिलाओं पर हमला कर दिया।

बूढ़ादेव मंदिर के दरवाजे को भी भालुओं ने तोड़ा
घुंचापाली चंड़ी मंदिर के नीचे बूढ़ादेव मंदिर के दरवाजे को भालुओं ने तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि ये चंडी मंदिर में प्रसाद खाने के लिए आने वाले भालू है। लॉकडाउन के कारणा मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंच नहीं रहे हैं। इसलिए भालुओं को प्रसाद खाने नहीं मिल रहा है। इसलिए वह तलाश में भटक रहे हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी ने बताया कि तेल पीने के लिए तीन भालू ने बूढ़ादेव मंदिर के दरवाजे को तोड़ दिया था।। भालू ने मंदिर के अंदर रखे तेल पी लिया। सामानों को नष्ट किया.



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92 हजार कॉपियों की जांच हुई पूरी, बोर्ड को भेजने की तैयारी

पहले चरण के मूल्यांकन के लिए आई उत्तरपुस्तिकाओं का जांच पूरा हो गया है। मंगलवार से इन उत्तरपुस्तिाकाओं का कलेक्शन करना भी प्रारंभ हो गया है। शिक्षकों के घर-घर जाकर समन्वय केंद्र की टीम कलेक्ट करेगी है। इसके लिए सात रूट भी निर्धारित की गई है।
जिसके अनुसार टीम शिक्षकों के घर वाहनों से पहुंच रहे कर कॉपियां संग्रहित करेगी हैं। कलेक्ट करने के लिए भी सात रूट के साथ सात प्रभारी भी बनाए गए हे, जो बुधवार से कलेक्टर करेगी। इसके लिए समन्वय केन्द्र की ओर से गाडिय़ों की व्यवस्था भी की गई है। जिला समन्वयक केंद्र प्रभारी एस चंद्रसेन बताया कि बताया कि पहले चरण का मूल्यांकन पूरा हो गया है। अब उन्हें कलेक्ट कर बोर्ड को भेजी जाएगी। कलेक्शन का कार्य बुधवार से शुरु किया जाएगा। कलेक्शन होते ही आगामी तीन दिनों के भीतर इन्हें बोर्ड को भेज दिया जाएगा। इधर, दूसरे चरण में आई उत्तरपुस्तिकाओं की भी जांच शुरू हो गई है। सप्ताहभर बाद यह उत्तर पुस्तिकाएं भी जच जाएंगे। जनकारी के अनुसार पहले चरण में कुल 92 हजार 755 कॉपियां बोर्ड ने मूल्यांकन के लिए भेजी थी। इसमें से हाईस्कूल की 25 हजार 608 और हायर सेकेंडरी की 67 हजार 261 उत्तरपुस्तिका थी। इनमें सभी कॉपियों मूल्यांकन कर लिया गया हैं।
काॅपियों जांचने के लिए 600 शिक्षकों की नियुक्ति
दूसरे चरण में जिले से मूल्यांकन के लिए शिक्षकों के पास कुल 19 हजार 132 कॉपियां भेजी गई है। इनका मूल्यांकन आगामी एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसमें हाई स्कूल के 7954 व हायर सेकेंडरी के 11178 उत्तरपुस्तिका है। इनके मूल्यांकन के लिए जिलेभर में बोर्ड द्वारा करीब साढ़े 6 सौ शिक्षकों को नियुक्त किया गया है। हालांकि इनमें 214 शिक्षकों को ही मूल्यांकन के लिए कॉपियां दी गई है।
7 रूटों में दौड़ेंगे काॅपियों को एकत्र करने के लिए वाहन
जिला समन्वयक केंद्र प्रभारी ने बताया कि मूल्यांकन के लिए सात रूट बनाकर शिक्षकों को उत्तरपुस्तिकाएं पहुंचाई गई थी। अब इन उत्तरपुस्तिकाओं का कलेक्ट बुधवार से किया जाएगा। महासमुंद, बागबाहरा, बसना सरायपाली व पिथौरा इन पांचों ब्लॉक में सात रूट बने है। बोर्ड की गाड़ी आएगी और सात प्रभारियों के साथ जाकर निर्धारित रूट के हिसाब से उत्तरपुस्तिकाओं को कलेक्ट करेगी।



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Investigation of 92 thousand copies completed, preparations to send to board




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5 साल में 8 से 23 हुआ हाथियों का परिवार इसलिए सिरपुर क्षेत्र के दायरे से बाहर निकला उनका दल

करीब पांच साल से सिरपुर क्षेत्र में विचरण करने वाले जंगली हाथी अपने बच्चों को साथ लेकर नए विचरण क्षेत्र की तलाश में निकल गए हैं। हाथियों का दल पिछले पांच दिनों से महासमुंद, गरियाबंद और बागबाहरा रेंज में घूम रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो हाथियों का यह दल परिवार बढ़ने के कारण शायद ऐसे नए विचरण क्षेत्र की तलाश में हैं, जो उनके आहार-पानी और बच्चों सहित पूरे दल की सुरक्षा के लिहाज से अनुकूल हो। पिछले पांच दिन के उनके मूवमेंट पैटर्न पर नजर डालें तो यह बात सामने आ रही है कि वे नए विचरण क्षेत्र की तलाश में हैं। क्योंकि वे जहां-जहां पहुंचे वहां भरपूर पानी था, आसपास खेत और बाड़ियां थीं और पास ही जंगल था।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पांच साल पहले सिरपुर क्षेत्र में जब हाथियों की आमद हुई तो उनकी संख्या 8 थी। आहार-पानी भरपूर होने के कारण हाथियों ने इस क्षेत्र को अपना ठिकाना बना लिया। बच्चों का जन्म होता गया और धीरे-धीरे उनका परिवार बढ़ता गया। इस समय इस दल में हाथियों के 5 बच्चों सहित 23 हाथी हैं। उनका पूरा दल सिरपुर क्षेत्र से बाहर निकलकर उन क्षेत्रों की टोह ले रहा है, जिन इलाकों में दल सहित अब तक नहीं गए थे।

पिछले पांच दिनों में 23 हाथियों का दल कहां-कहां गया और उन्हें क्या मिला
1 मई - दल एनएच-53 और रेलवे लाइन पार कर निसदा बैराज के समीप महानदी किनारे बम्हनी के सीताफल कछार पहुंचा। यहां पूरा दिन रहने के बाद रात में चिंगरौद के पास नदी पार कर गरियाबंद जिले के हथखोज शक्ति लहरी मंदिर के करीब पहुंच गया। यहां उन्हें महानदी में भरपूर पानी, बाग-बगीचे, खेत और बाडि़यां मिलीं।
2 मई - सुबह हाथियों का दल गरियाबंद जिले में हथखोज से आगे बढ़ा और कोमा, धमनी के बीच से होते हुए किरवई के करीब पहुंच गया। परसदा, चांपाझर, पोखरा, चंपारण, रक्शा के करीब से होते हुए रात भर क्षेत्र में विचरण करता रहा। यहां उन्हें खेतों में लहलाती धान की फसलें, सब्जी बाडि़यां, जंगल और महानदी का पानी मिला।
3 मई - महानदी के रास्ते हाथी सुबह बम्हनी के सीताफल कछार लौट आए और रात तक वहीं जमे रहे। देर रात राजिम-पोखरा-महासमुंद मार्ग पर परसट्ठी के करीब पहुंच गए। फिर सूखा नदी को पार का चिंगरौद होते हुए बम्हनी लौट आए और रात भर यहां विचरण करते रहे। यहां नदी का पानी, जंगल और खेत-खलिहान मिले।
4 मई- तड़के पौने पांच बजे भलेसर, लभराखुर्द होते हुए महासमुंद शहर में सितली नाला के पास एनएच 353 को क्राॅस किया और शाम को गौरखेड़ा, उमरदा जंगल होते हुए रात में बकमा पहुंच गए। पानी, जंगल, फसल मिली।
5 मई - पचेड़ा के नजदीक बागबाहरा रोड एनएच 353 पार कर पचेड़ा खार से केशवा की ओर निकल गए। बागबाहरा रेंज के तुसदा बीट मे हिच्छा बांध के ऊपर पठार में विचरण करते रहे। जंगल, पठार, बांध का पानी मिला।



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The family of elephants grew from 8 to 23 in 5 years, so their party moved out of the purview of Sirpur region




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30 हजार किसानों के खातों में आए 23.58 करोड़ रुपए

खरीफ वर्ष 2019-20 आकस्मिक वर्षा से हुए फसल नुकसान की बीमा राशि किसानों के खाते में आ गई है। 5 माह बाद किसानों के खाते रुपए आए हैं। धमतरी जिले में 30 हजार 483 किसानों को फसल बीमा का फायदा मिला है। इनके खातों में 23 करोड़ 58 लाख 16 हजार 202 रुपए बीमा कंपनी ने जमा कराए हैं।
धमतरी ब्लॉक में 5 हजार किसानों के खाते में 5 करोड़ रुपए आए है। मगरलोड और कुरूद ब्लॉक में भी किसानों के खाते में 5-5 करोड़ रुपए आए। सबसे ज्यादा नगरी ब्लॉक के किसानों के खाते में रुपए डाले गए। यहां 7 करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में आए हैं। खरीफ में सबसे ज्यादा नुकसान नगरी ब्लॉक में हुआ है। यहां अधिक बारिश के कारण सबसे ज्यादा धान की फसल बर्बाद हुई थी। फसल पानी में डूबने से सड़ गई।
यहां ज्यादा नुकसान हुआ
धमतरी ब्लॉक के अर्जुनी, छाती, डोमा, शंकरदाह, तरसींवा, संबलपुर, दोनर, खरतुली, कुरूद ब्लॉक के ग्राम भखारा, दरबा, खोरपा, कोर्रा, मरौद, नारी, सिर्री, मगरलोड ब्लाक के ग्राम मेघा, मोहंदी, करेली बड़ी, भरदा, बनियातोरा, नगरी ब्लॉक के ग्राम सलोनी, दुगली, कुकरेल, सिहावा, बेलरगांव क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है।



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23.58 crore rupees in the accounts of 30 thousand farmers




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पहली बार संविदा में रखे केमिस्ट, रोज 20 सैंपल जांच रहे

रॉयपुर में पीलिया लगातार बढ़ रहा है। करीब 700 लोगों में अब तक पीलिया की शिकायत आ चुकी है। कुछ लोगों की मौत भी हो गई है। प्रदेश की राजधानी कोरोना के साथ ही पीलिया का रेड ज़ोन बन गया है। धमतरी पड़ोसी जिला है इसलिए यहां अफसर पहले से सतर्कता रख रहे हैं। कलेक्टर ने खुद सभी नगरों व गांव में साफ पानी देने के लिए जिम्मेदार अफसरों को हिदायत दी है। इसके बाद से सभी नगरों में शुद्ध पानी देने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। नगर निगम ने पानी की जांच के लिए संविदा पर कर्मचारी रखा है। हर रोज जांच की जा रही है।
वार्डों से प्रदूषित पानी की शिकायतों को दूर करने निगम ने एक केमिस्ट श्रेया जाचक को संविदा पर रखा है। ये सभी 9 ओवरहेड टंकियों के अलावा वार्डों में पानी सप्लाई और ट्रीटमेंट प्लांट से हर दिन 20 सैंपल ले रही हैं। सुबह-शाम क्लोरीन की मात्रा की जांच करती है। रिपोर्ट दे रही हैं। इनके अलावा पीएचई की टीम भी हफ्ते में दो दिन सैंपल उठाकर ले जाती है। इनकी रिपोर्ट 2 या 3 दिन बाद निगम को मिलती है।
सुबह-शाम 1.40 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई
शहर की 1 लाख 11 हजार की आबादी के लिए 40 वार्डों में 9 ओवर हैंड टंकियां है। सुबह-शाम इनसे राेज 1.40 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई हो रही है। 14 एमएलडी क्षमता के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से प्रति व्यक्ति 135 लीटर के हिसाब से हर दिन पानी दिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में नल से पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता, ऐसे मोहल्लों में टैंकर से पानी सप्लाई होती है।
दूर होगी पानी की समस्या
34 करोड़ रुपए से नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना है। नई टंकी बनाने के लिए प्रस्तावित स्थान की मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट आईआईटी मुंबई से आ गई है। प्लांट बनाने का काम मुंबई की मार्श कंपनी को मिला है, लेकिन लॉकडाउन के कारण काम फिलहाल शुरू नहीं हुआ है। नगर निगम के पास फिलहाल 14.7 एमएलडी का वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट है। इसी के बगल में ही नया प्लांट बनाया जाना है। अफसरों के मुताबिक लॉकडाउन हटने के बाद प्लांट का काम शुरू होगा।
रोज हो पानी की जांच इसलिए केमिस्ट रखे
नगर निगम धमतरी के कमिश्नर आशीष टिकरिहा ने बताया कि शहर में सुबह-शाम मिलकर रोज 1.40 करोड़ लीटर पानी सप्लाई हो रही है। हमारा उद्देश्य हर घर तक शुद्घ पानी पहुंचाना है। पानी की जांच समय पर हो, इसलिए संविदा में एक केमिस्ट को रखा गया है, जो हर दिन 20 जगह से सैंपल लेकर तुरंत जांच करतीं है। कहीं क्लोरीन की मात्रा कम या अधिक होने पर तुरंत सुधार भी किया जाता है। ये जांच लगातार जारी रहेगी।



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For the first time, chemists placed in contract, checking 20 samples daily




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2 की जगह सिर्फ एक किलो मिला चना, जून का चावल नहीं दिया गया

कोरोना संक्रमण के बीच गरीब परिवार को राहत देने के लिए लगातार राज्य और जिला प्रशासन कोशिश कर रही है, लेकिन इसका फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है। जून का चावल और चना मई में देने की खाद्य विभाग की कोशिश सफल नहीं हो पा रही है। तीन दिन पहले सर्वर ठप रहने से जहां लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया तो वहीं सोमवार को 2 की जगह केवल एक किलो चना मिला। वहीं चावल नहीं मिलने से लोग नाराज थे।
शहर के अंबेडकर और अन्य वार्ड में संचालित राशन दुकानों में सरकारी राशन लेने पहुंचे लोगों ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीब परिवारों को तीन महीने का चावल मुफ्त में देने की बात कही थी, लेकिन इसका लाभ प्राथमिकता और अंत्योदय राशन कार्डधारियों को मिल रहा है। इसमें भी जिस परिवार में चार या उससे अधिक सदस्य हैं उन्हें ही इसका लाभ मिल रहा है। बाकी लोगों को केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। नाराज लाेगों ने कहा कि सरकार ने गरीब परिवारों को हर महीने चना देने की बात कही है, लेकिन यह चना भी नहीं मिल रहा है। उन्हें इस समय प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। सहायक खाद्य अधिकारी दिव्या रानी ने कहा कि शासन से जारी निर्देश के तहत ही राशन गरीब परिवारों को दिया जा रहा है। इसमें कोई मनमानी राशन दुकानदारों द्वारा नहीं की जा रही है। निशक्तजन, एकल निराश्रित और अन्नपूर्णा राशन कार्ड परिवारों को अतिरिक्त राशन नहीं मिलेगा।
प्राथमिकता में सदस्यों के आधार पर मिलेगा चावल
प्राथमिकता राशनकार्ड परिवारों को मई में तीन माह का अतिरिक्त आवंटन 9 किलो प्रति सदस्य होगा। एक सदस्य वाले राशनकार्ड को 10 किलो, दो सदस्य वाले राशनकार्ड को 20 किलो, 3 सदस्य वाले को 35 किलो, 4 सदस्य वाले राशन कार्ड को 35 किलाे और अतिरिक्त 15 किलो, 5 सदस्य वाले परिवार को 35 किलो, अतिरिक्त 45 किलो, 6 सदस्य वाले राशन कार्ड को 42 किलो, अतिरिक्त 54 किलो जून का राशन मुफ्त में मिलेगा।



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Found only one kilo of gram instead of 2, June rice was not given




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कोंडागांव के 2 सहित तीनों संदिग्धों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव

अहमदाबाद से लौटे युवक और कोंडागांव के दोनों मजूदरों की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। सोमवार की देर शाम इन तीनों की रैपिड किट में एंटीबॉडी जांच पॉजिटिव आई थी। इसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। इसी बीच इन सभी संदिग्धों की कोरोना पीसीआर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। यहां सभी के नमूने लिए गए और नमूनों को जांच के लिए मेकॉज के लैब भेजा गया था। मंगलवार देर शाम को सभी की कोराेना रिपोर्ट आ गई है और सभी की रिपोर्ट निगेटिव है।
जनरेटर की रोशनी में रातभर स्वास्थ्य अमले ने किया 80 ग्रामीणों का रैपिड टेस्ट

कोंडागांव | कोंडागांव जिला ग्रीन जोन में है। सोमवार रात जिले के अंतिम छोर पर स्थित कोरमेल गांव की एक महिला को रैपिड टेस्ट में पॉजिटिव आने से प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। हालांकि जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में आरटी पीसीआर टेस्ट में दोनों ही कोरोना से संक्रमित नहीं पाए गए हैं। कोंडागांव जिले के अंतिम छोर पर स्थित मर्दापाल के पास कोरमेल गांव में एक पुरुष में सर्दी-खांसी के लक्षण के बाद रैपिड टेस्ट में उसे संदिग्ध पाते हुए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। जिसके बाद उस व्यक्ति के गांव कोरमेल में अन्य ग्रामीणों की जांच की गई। स्वास्थ्य अमला द्वारा अपने साथ लाए जनरेटर की रोशनी में ग्रामीणों का परीक्षण शुरू किया गया। कोरमेल में देर रात तक 80 लोगों की जांच की गई है। कोरोना की आशंका में पूरे गांव को सील कर दिया गया था।
गुरमेल में गत 8 मार्च को बिहार से आया एक व्यक्ति क्वारेंटाइन में था। वह सर्दी-खांसी की शिकायत के बाद वह तीरथा हॉस्पिटल पहुंचा। उसे भानपुरी चिकित्सालय भेज दिया गया। रैपिड टेस्ट में उससे कोरोना का संदिग्ध माना गया जिसके बाद फाइनल रिपोर्ट के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। कोरमेल में जिस महिला को रैपिड टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया, वह बिहार से आए व्यक्ति की भाभी है। पूरे परिवार का टेस्ट किया गया।



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Corona report of three suspects including 2 of Kondagaon negative




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झारखंड जाने नगरनार से पैदल निकले 25 मजदूर, पुलिस ने रोका, वापस प्लांट भेजा

नगरनार इस्पात संयंत्र में झारखंड के करीब 25 मजदूरों ने इकट्‌ठा होकर वापसी की फिराक में मुहिम चलाने की कोशिश की। इसके पीछे का कारण ये बताया जाता है कि कुछ मजदूरों को झारखंड से जगदलपुर लाया गया, जिसके बाद झारखंड के मजदूरों ने वापसी के लिए एकजुट होकर जाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि झारखंड से बसाें के अाने के बाद वे वापस जाने की फिराक में थे। लेकिन कोई इंतजाम न दिखा तो मंगलवार सुबह झारखंड के पलामू जिले के करीब 25 मजदूर इकट्‌ठा हुए और पैदल वापसी करने की तैयारी कर ली। इसके बाद उन्होंने जैसे ही वापसी के लिए पैदल चलना शुरू किया, गोरियाबहार नाले के पास उन्हें रोक लिया गया और नगरनार पुलिस उन्हें लेकर वापस चली गई।
मजदूराें ने ठेकेदारों पर वेतन नहीं दिए जाने का अाराेप लगाया। लेकिन इन मजदूरों को 22 मार्च तक का वेतन कंपनियों ने दे दिया था। इसके बाद लॉकडाउन के उन्हें पैसे नहीं दिए गए। मजदूर पीएम नरेंद्र मोदी के उस बयान को आधार बना रहे थे जिसमें उन्होंने मालिकों से किसी का भी पैसा न काटने की अपील की थी, लेकिन इस संबंध में सरकार द्वारा काेई आदेश जारी नहीं होने से कंपनियों ने इस पर कोई पहल नहीं की। एसडीएम जीअार मरकाम ने कहा कि वेतन अाैर एडवांस की रकम ठेकेदारों द्वारा काट लिए जाने पर मजदूराें काे आपत्ति थी, लेकिन इसका हल निकाल लिया गया है। मजदूर लाॅकडाउन की समयावधि का वेतन मांग रहे हैं जिस पर न ताे एनएमडीसी ने अाैर न ही कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने काेई निर्णय लिया है।

मजदूर बोले- वापसी के लिए कोई प्रयास नहीं हुए
मजदूर जोगेंद्र यादव, संजय, प्रमोद, विनय सहित अन्य ने बताया कि उन्हें एक महीने का वेतन भी नहीं दिया है। दरअसल उन्हें 22 मार्च तक का वेतन दिया गया था। कई मजदूरों ने एडवांस भी ले रखा था। ऐसे में ठेकेदार ने एडवांस की रकम भी काटी। ऐसे में पैदल ही निकल पड़े। मजदूरों ने बताया कि वापसी के लिए अपने प्रदेश के जिम्मेदारों तक बात पहुंचाने की कोशिश की पर कोई मदद नहीं मिली।
इधर मारकेल में रुके 12 मजदूरों पर खाने का संकट

इधर मारकेल में बने हटमेंट में भी कुछ लेबर रुके हुए हैं। ये 12 मजदूर सब स्टेशन में इलेक्ट्रीशियन का काम कर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन में रियायत मिलने के बाद भी कोई काम नहीं होने के कारण अब उन पर संकट खड़ा हो गया है। इन हालातों में जहां उन्हें खाना नहीं मिल पा रहा है और न ही जरूरत का सामान ही उन्हें मुहैया हो पा रहा है। ये मजदूर वापस जाना चाहते हैं।



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25 laborers on foot from Nagarnar to go to Jharkhand, police stopped, sent back to plant




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क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे 22 लोग, सोने को सिर्फ दरी मिली, बिस्तर व साबुन घर से मंगवाना पड़ रहा

रेंगाखार और समनापुर जंगल के जिस क्वारेंटाइन सेंटर में 6 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, वहां दूसरे राज्यों से आए मजदूरों को भी लाकर रखा गया है। लेकिन वहां न पर्याप्त खाने की सुविधा है और न ही सोने की। कोरोना से सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं है। भास्कर ने जब इन क्वारेंटाइन सेंटर की पड़ताल की तो हालात बदतर मिले।
बालक पूर्व माध्यमिक शाला रेंगाखार कला को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। यहां लगभग 22 लोगों को क्वारेंटाइन किया गया है। सुविधा के नाम पर सिर्फ दरी पट्टी दी गई है, वह भी उसी स्कूल का है। क्वारेंटाइन में रह रहे लोगों ने सोने के लिए अपने-अपने घरों से बिस्तर मंगाए हैं। नहाने व कपड़े धुलाई के लिए साबुन भी घर से मंगा रहे हैं। भोजन की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। क्वारेंटाइन में रह रहे मजदूरों ने बताया कि शुरुआत के दो दिन के लिए चावल-दाल मिला था, जो खत्म हो गया। एक-दो दिन तक घर से ही टिफिन में खाना मंगाए। फिर सूखा चावल-दाल लाकर छोड़ दिया गया। स्थिति एेसी है कि खाना बनाने वाला भी कोई नहीं है।अपने-अपने लिए खुद ही भोजन पकाते हैं और बर्तन साफ करते हैं।
रेंगाखार सेंटर में सर्वाधिक 80 लोग हैं
सेंटर क्वारेंटाइन लोग
रेंगाखार कला स्कूल व आश्रम 80
हाईस्कूल उसरवाही 65
प्राथमिक स्कूल भिंभौरी 50
प्राथमिक स्कूल पंडरिया 44
प्राथमिक स्कूल भेलवाटोला 42
प्राथमिक स्कूल खारा 34
प्राथमिक स्कूल सरईपतेरा 17
प्राथमिक स्कूल नेवासपुर 11
प्राथमिक स्कूल खम्हरिया 09
प्राथमिक स्कूल पंडरीपानी 08
आदिवासी बालक आश्रम समनापुर 06
प्राथमिक शाला बरेंडा 06
प्राथमिक स्कूल रोल 05
घानीखुंटा स्कूल 03
कोयलारझोरी स्कूल 03
प्राथमिक स्कूल तितरी 02
बोदा 47 स्कूल 01
बम्हनी स्कूल 01
तहसीलदार बोले- यहां पर खाना बनाने के लिए रसोइए तैयार नहीं, इसलिए समस्या
रेंगाखार के तहसीलदार राधेश्याम वर्मा का कहना है कि क्वारेंटाइन सेंटर में ठहराए गए लोगों के लिए चावल-दाल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सेंटर में भोजन पकाने के लिए रसोइए तैयार नहीं हो रहे हैं। इसलिए क्वारेंटाइन में रह रहे लोग ही अपना भोजन पकाते हैं। कुछ लोग अपने घर से टिफिन में खाना मंगवाए थे । पटवारी ने टिफिन में खाना देते 2 लोगों को पकड़ा था उन्हें पुलिस के हवाले किया गया है। यहां रह रहे लोगों की पूरी निगरानी की जा रही है।
सुविधा नहीं मिली तो हम लोग घर चले जाएंगे...
क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे ग्राम सुतिया के दो लोगों को राशन नहीं मिला है। बताया कि उन्हें 3 मई की शाम को यहां लाया गया था। पूरी रात व अगले दिनभर भूखे थे तो घर से टिफिन में खाना मंगाकर खाए। वहीं ग्राम चमारी के 11 लोगों भी यहीं क्वारेंटाइन में हैं। इनमें महिला-पुरुष और बच्चे शामिल हैं। इनका कहना है कि अगर सुविधा नहीं मिली तो वे अपने घर चले जाएंगे।
तहसीलदार, एसडीएम समेत संक्रमितों के संपर्क में आए 85 लोगों के सैंपल लिए
रेंगाखार कला व समनापुर जंगल में 6 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इनके संपर्क में आने वाले 85 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। सोमवार को पूरे दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम सैंपल लेने में जुटी रही। यही नहीं, रात लगभग 9 बजे सैंपलिंग का काम पूरा किया गया। सीएमएचओ डॉ. एसके तिवारी ने बताया कि एहतियात के तौर पर रेंगाखार पंचायत के सरपंच-सचिव, कोटवार, चौकीदार, तहसीलदार और एसडीएम का भी सैंपल लिया गया है। सभी सैंपल को जांच के लिए एम्स रायपुर भेजा गया है।



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22 people living in quarantine center, sleeping only got carpets, having to get bed and soap from home




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संग्राहकों को 2018 के लाभांश के 750 करोड़ रुपए नहीं मिले हैं

अंचल में हरा सोना अर्थात तेंदूपत्ता की तुड़ाई एवं खरीदी की शुरूआत मंगलवार से हो गई। बागबाहरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत लघु वनोपज सहकारी समिति सुखरीडबरी में इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर के साथ सांसद प्रतिनिधि एवं लघु वनोपज संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष हितेश चंद्राकर ने विधिवत पूजा-अर्चना कर खरीदी प्रक्रिया का शुभारंभ किया। वहीं दूसरी तरफ संग्राहकों को 2018 के लाभांश का 750 करोड़ रुपए तक नहीं मिला है। दीवाली के पूर्व ही संग्राहकों के खाता में पहुंच जाना था। जबकि यह राशि राज्य लघु वनोपज संघ में जमा है। संग्राहक-मजदूर दो साल से अपना हक लेने के लिए भटक रहे हैं।
तेंदूपत्ता संग्राहक भरी दोपहरी में परिवार सहित मिलकर तोड़े गए तेंदूपत्ता की गड्डी बनाकर शाम 4 बजे इसे फड़ में पहुंचाते हैं। इसके तहत उन्हें मिलने वाला संग्रहण दर की राशि नहीं मिल रहा है। जिले का लगभग 20 करोड़ सहित प्रदेशभर का लाभांश 750 करोड़ रुपए आज तक वितरण की बजाय अनावश्यक रूप से रोक कर रखा गया है। यह सरकार की मनमानी है। इस मौके पर सुखरीडबरी समिति के देवनारायण महोबिया, खेदु चक्रधारी, गोपाल ध्रुव, केशव ध्रुव आदि मौजूद रहे।
पूर्व मे संचालित योजनाओं को भी फिर से शुरू करें
सांसद प्रतिनिधि हितेश चंद्राकर ने कहा कि राज्य शासन द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को उनकी वाजिब हक की लाभांश राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। ताकि इस आपदा के समय उन्हें राहत मिल सके। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए जारी अनेक योजनाओं को बंद कर उनके साथ कुठाराघात किया गया है। प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को मिलने वाली प्रोत्साहन (छात्रवृत्ति) को भी बंद कर दिया गया है। तेंदूपत्ता मजदूरों को उनके कमाई मे से दिये जाने वाले लाभांश राशि सहित पूर्व मे संचालित योजनाओं को पुनः लागू किये जाने की मांग की गई है।



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Here collectors have not received ~ 750 crores of 2018 dividend




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प्रदेश में लौटेंगे सवा लाख मजदूर, क्वारेंटाइन क्षमता सिर्फ 2720 की, 4 लैब में ही जांच होने से वेटिंग लाइन में 956 सैंपल

राजधानी और आसपास कोरोना के नए मरीज फिर आने लगे हैं। रायपुर एम्स में मंगलवार को आधी रात तक 23 मरीज भर्ती हैं। कटघोरा संकट में एक साथ इतने मरीज भर्ती नहीं हुए। माना जा रहा है कि कोरोना जांच, मरीजों और संपर्क में आए लोगों की निगरानी (क्वारेंटाइन) और इलाज की अग्निपरीक्षा अब होगी। इन मुद्दों की पड़ताल करती भास्कर टीम की यह रिपोर्ट

कोरोना जांच छह में से केवल चार लैब में इसलिए वेटिंग की लाइन में 965 सैंपल

प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग के लिए छह लैब है, लेकिन केवल चार में जांच होने से वेटिंग बढ़ रही है। सोमवार को 935 सैंपल की रिपोर्ट आई थी, पिछले एक हफ्ते से यह आंकड़ा रोजाना औसतन 900 रिपोर्ट के आसपास है, लेकिन मंगलवार को केवल 517 सैंपलों की रिपोर्ट आई। यही वजह है कि बुधवार के लिए लंबित सैंपलों की संख्या 965 हो गई। इनमें से एम्स में 366, नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में 42 व जगदलपुर में 518 व रायगढ़ में 39 सैंपलों की रिपोर्ट पेंडिंग है।
प्रदेश में पहले से एम्स, नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर व सरकारी मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में कोरोना की जांच हो रही है। हाल ही में मेडिकल कॉलेज रायगढ़, टीबी रिसर्च सेंटर लालपुर को जांच के लिए अनुमति मिली है। एक निजी लैब एसआरएल को माहभर पहले ही अनुमति मिल गई थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण वहां जांच ही शुरू नहीं हो पाई है। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार टीबी रिसर्च सेंटर लालपुर में एक भी जांच नहीं हुई है। रायगढ़ में ट्रायल के बाद सोमवार को जांच शुरू हुई। मंगलवार को जांच की संख्या में अचानक कमी क्यों आ गई, इस पर प्रबंधन कुछ भी बोलने से इनकार कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जांच की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। ताकि रिपोर्ट जल्दी आ सके और मरीजों की पहचान हो सके। एम्स में अब तक 13594, नेहरू मेडिकल कॉलेज में 4287 व जगदलपुर में 3312 व रायगढ़ में 130 सैंपलों की जांच हो चुकी है। प्रदेश में अब तक 21323 सैंपलों में 20300 की रिपोर्ट नेगेटिव रही है।

अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है। सबसे ज्यादा मरीज कोरबा जिले में 28, दुर्ग में नौ, रायपुर में सात, कवर्धा में छह, सूरजपुर में छह, काेरिया में दो, बिलासपुर व राजनांदगांव में एक-एक मरीज मिला है। इनमें 36 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। 17896 लोग होम क्वारेंटाइन में है। जबकि सरकारी क्वारेंटाइन में 566 लोगों को रखा गया है। ये दूसरे राज्यों से आए मजदूर हैं या जो कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं, वो लोग हैं।

सवा लाख श्रमिक लौटेंगे, प्रदेश मेंसिर्फ 2720 क्वारेंटाइन क्षमता

प्रदेश के करीब सवा लाख मजदूरों की वापसी इसी हफ्ते शुरू होने लगेगी और 15 मई तक पूरी हो जाएगी। इनमें रायपुर जिले के ही 1557 श्रमिक हैं। रायपुर में आधा दर्जन क्वारेंटाइन सेंटर में पूरी क्षमता के साथ बमुश्किल 500 लोगों को ही रखा जा सकता है। जबकि राजधानी और प्रदेश में मिलाकर अब तक क्वारेंटाइन की जो क्षमता विकसित की गई है, वह केवल 2720 लोगों की ही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक हफ्ते में करीब सवा लाख लोगों के क्वारेंटाइन के पुख्ता इंतजाम मुश्किल हैं। यही नहीं, उतनी ही संख्या में टेस्ट किट की जरूरत भी पड़ने वाली है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अभी प्रदेशभर में लैब वाली केवल 15 हजार किट ही हैं, जिनसे कोरोना की पुष्टि हो रही है। रैपिड टेस्ट किट 70 हजार हैं, लेकिन कोरोना पाजिटिव निकला तो लैब वाली किट (आरटीपीसीआर) से जांच करनी ही होगी।
भास्कर को विशेषज्ञों ने बताया कि राजधानी समेत प्रदेश में श्रमिकों के जत्थों को जहां भी ले जाया जाएगा, क्वारेंटाइन करने से पहले सभीके स्वाब की जांच कराई जाएगी। सभी मजदूरों को क्वारेंटाइन सेंटर में रखना इसलिए जरूरी है, क्योंकि वे संक्रमित राज्यों से लौटेंगे। रायपुर के मरीजों काे कहां रखा जाएगा, यह तय नहीं है। क्वारेंटाइन सेंटर में पुलिस जवानों के साथ दूसरे स्टाफ की भी निगरानी के लिए जरूरत पड़ेगी। यह व्यवस्था भी आसान नहीं है। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक ने मजदूरों के लिए गांवाें के बाहर क्वारेंटाइन सेंटर बनाए जाने की बात कही है।
उन्होंने जरूरी व्यवस्था के लिए पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। क्वारेंटाइन सेंटर में प्रवासी मजदूरों की जांच, आवास, भोजन, स्नान, शौचालय, साफ-सफाई, बेरिकेडिंग की व्यवस्था की जानी है। सूत्रों के मुताबिक यह बड़ा अभियान है, जिसके लिए बड़े सिस्टम को अभी से ऑन करने की जरूरत है, वर्ना ऐन वक्त पर समस्याएं आसकती हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में जम्मू-कश्मीर से 24090 श्रमिक, महाराष्ट्र 18704, उत्तरप्रदेश 13172, तेलंगाना 12730, गुजरात 8071, कर्नाटक 3279, तमिलनाडु 2963, मध्यप्रदेश 2840, आंध्रप्रदेश 2392, हरियाणा 2008, दिल्ली 1967 और हिमाचल से 1665 श्रमिक 15 मई से पहले यहां पहुंचने की संभावना है।
जांच की क्षमता बढ़ानी होगी : नागरकर
"हम अभी रोज 500 सैंपल जांच रहे हैं, लेकिन श्रमिकों के आने के बाद 1000 सैंपल जांचने होंगे। मशीनें बढ़ानी होंगी।"
-डॉ. नितिन एम नागकर, डायरेक्टर एम्स

कई विभाग तैयारी में लगे हैं : त्रिपाठी
"मजदूरों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर व खाने की व्यवस्था पंचायत व राजस्व विभाग करेगा। हेल्थ विभाग इलाज की तैयारी में है।"
-डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी कोरोना सेल



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राजधानी की हर सड़क-गली में नियमों की ऐसी धज्जियां




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झारखंड जाने नगरनार से पैदल निकले 25 मजदूर, पुलिस ने वापस प्लांट भेजा

नगरनार इस्पात संयंत्र में झारखंड के करीब 25 मजदूरों ने इकट्‌ठा होकर वापसी की फिराक में मुहिम चलाने की कोशिश की। इसके पीछे का कारण ये बताया जाता है कि कुछ मजदूरों को झारखंड से जगदलपुर लाया गया, जिसके बाद झारखंड के मजदूरों ने वापसी के लिए एकजुट होकर जाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि झारखंड से बसाें के आने के बाद वे वापस जाने की फिराक में थे। लेकिन कोई इंतजाम न दिखा तो मंगलवार सुबह झारखंड के करीब 25 मजदूर इकट्‌ठा हुए और पैदल वापसी की तैयारी कर ली। इसके बाद उन्होंने जैसे ही चलना शुरू किया, गोरियाबहार नाले के पास उन्हें रोक लिया गया और नगरनार पुलिस उन्हें लेकर वापस चली गई। मजदूराें ने ठेकेदारों पर वेतन नहीं दिए जाने का अाराेप लगाया। लेकिन इन मजदूरों को 22 मार्च तक का वेतन कंपनियों ने दे दिया था।
मजदूरों को लेकर ट्रेन धनबाद रवाना हुई
बिलासपुर|मजदूराें को लेकर दो स्पेशल ट्रेन एक के पीछे एक दोपहर बाद बिलासपुर रेलवे स्टेशन से होकर गंतव्य के लिए रवाना हुईं। इनमें से एक ट्रेन में भोजन व पानी की बोतल बिलासपुर रेलवे स्टेशन से चढ़ाया गया। दोनों ही ट्रेन में 12-12 सौ यात्री थे। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से किए गए लॉकडाउन में देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे झारखंड और बिहार के मजदूरों, छात्रों और पर्यटक को उनके राज्य वापस ले जाने के लिए स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया है। इसके तहत मंगलवार को दो स्पेशल ट्रेनें झारखंड और बिहार के लिए बिलासपुर होकर गुजरीं। दोनों ही ट्रेनें 15 से 20 मिनट के अंतराल में बिलासपुर से होकर गईं। पहली ट्रेन सिकंदराबाद से खगड़िया बिहार को गई।
झारखंड के 80 मजदूर आज पहुंचेंगे बासागुड़ा
बीजापुर | तेंलगाना के कोत्तागुड़ेम जिले के भैयारम्म में झारखंड के मजदूर एक उद्योग में कार्य करने गए थे। काम नहीं मिलने के कारण 80 मजदूर तेलंगाना के भैयारम्म गांव से पैदल छत्तीसगढ़ सीमा तक पहुंचे। इस दौरान मजदूरों को एक साथ पैदल चलते देख ट्रैक्टर चालक ने उनसे पूछताछ की। पूछताछ करने पर उन्होंने झारखंड के मजदूर होना बताया। जानकारी के अनुसार मजदूर ट्रैक्टर से पुसगुफा के रास्ते से होते हुए छत्तीसगढ़ के उसूर ब्लॉक के कोण्डापल्ली मार्ग से बुधवार को ग्राम बासागुड़ा पहुंचेंगे। उसूर तहसीलदार सीताराम कंवर ने बताया यदि मजदूर पहुंचे तो सबसे पहले इनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। फिर कलेक्टर और एसडीएम के आदेशानुसार आगे की व्यवस्था होगी।



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25 laborers on foot from Nagarnar to go to Jharkhand, police sent back plant




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टाइम चार बजे का, लेकिन 2 बजे ही सब बंद लोगों ने सिस्टम बदला तो दुकानों में भी ताले

करीब 47 दिन का लाॅकडाउन (19 मार्च से) अब धीरे से राजधानी की तस्वीर बदल रहा है। पहली बार रायपुर के लोग यह देख रहे हैं कि सारा कारोबार और खरीदारी 2 बजे से पहले ही लोग पूरी कर रहे हैं। पुलिस की गाड़ियां ढाई से 3 बजे के बीच सायरन बजाती हुई निकलती हैं, उससे पहले ही अधिकांश दुकानें और बाजार बंद हो जाते हैं और लोग भी घरों को लौट जाते हैं। शाम 4 बजे के बाद पुलिस की गैरमौजूदगी में भी सड़कों पर सन्नाटा रहने लगा है। हालात ये हैं कि जिन दुकानों को शाम 4 बजे तक की इजाजत है, ग्राहक नहीं होने से वह भी 2 बजे बंद की जा रही हैं। दिलचस्प मामला पेट्रोल पंपों का है, िजन्हें रात 8 बजे तक खोलने की इजाजत है। लेकिन कोई पेट्रोल-डीजल लेने वाला नहीं रहता इसलिए अधिकांश पंप 3 से 4 बजे के बीच ही बंद होने लगे हैं।
राजधानी के कारोबारी माल की डिलीवरी से लेकर बिक्री तक इस हिसाब से कर रहे हैं कि घड़ी का कांटा दोपहर 2 बजे के पार नहीं होता। भास्कर टीम ने बुधवार को शहर का जायजा लिया, कारोबारियों और लोगों से बातचीत भी की। पता चला कि लोगों ने भी ऐसा सिस्टम बना लिया है कि दोपहर 2 बजे तक वे पूरा काम समेट रहे हैं। इस नई आदत का असर शहर में दोपहर 3 बजे से दिखने लगता है, सन्नाटे के रूप में। प्रशासन का कहना है कि इसी वजह से अब पुलिस को पहले की तरह सख्ती भी नहीं करनी पड़ रही है, क्योंकि जो लोग भी बाहर निकल रहे हैं, उनके पास कोई न कोई पुख्ता और वाजिब कारण है।
बाजारों का सिस्टम बदला
राजधानी में कलेक्टर ने कुछ दुकानें दोपहर 2 बजे तक और कुछ शाम 4 बजे तक खोलने की अनुमति दी है। लेकिन बाजार बिना किसी दबाव के दोपहर से खुद ही बंद होने लगे हैं। अनाज, राशन सहित अति आवश्यक सेवा के कारोबारियों के शटर दोपहर 1.30 बजे से ही गिरने शुरू हो रहे हैं। पेट्रोल पंपों के सामने दोपहर 3 बजे से ही रस्सियां बंध रही हैं। कैट के प्रदेशाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि लॉकडाउन में लोगों को समय में काम करने की आदत हो गई है। व्यापारी भी इसमें ढल गए हैं। ऐसे में अब सभी तरह के कारोबार को अनुमति मिलनी चाहिए। भले ही इसका समय तय कर दिया जाए।
लोडिंग-अनलोडिंग में दिक्कतें
सबसे बड़े कारोबारी संगठन छत्तीसगढ़ चैंबर के अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा और कार्यकारी अध्यक्ष ललित जैसिंघ ने बताया कि शासन के लोडिंग-अनलोडिंग के नए आदेश ने समस्या खड़ी कर दी है। लोडिंग-अनलोडिंग का समय रात 9 से सुबह 6 बजे तक किया गया है। व्यापारी अपनी दुकानें दोपहर को बंद करके जाता है और रात में 9 बजे फिर से वापस आ तो रहा है, लेकिन रात में हमाल और लेबर नहीं मिल रहे हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू को चिट्ठी लिखी गई है। चैंबर ने अाग्रह किया है कि लोडिंग-अनलोडिंग या तो सुबह 6 से 10 बजे तक या शाम 4 से 8 बजे तक करवाई जाए।



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पंजीयन एक लाख से अधिक का, ऑनलाइन 932 छात्र ही पढ़ रहे

लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई में छात्र रूचि नहीं ले रहे हैं। सरकार द्वारा पहली से 12वीं के छात्रों के लिए शुरू की गई इस योजना में बलौदाबाजार जिला पीछे हो रहा है। इस योजना के तहत जिले के 2 लाख 58 हजार छात्रों में सिर्फ आधे छात्रों ने यानी सिर्फ 1 लाख 28 हजार छात्रों ने ही पंजीयन कराया है। मगर सिर्फ 932 विद्यार्थी की ऑऩलाइन पढ़ाई में रूचि ले रहे है।
बीआरसी के शिक्षक एमएल साहू से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 9019 शिक्षकों में से 95 प्रतिशत शिक्षकों का पंजीयन हो चुका है। जिले में 1 लाख 28 हजार छात्रों ने पंजीयन जरूर कराया है लेकिन महज 932 छात्र ही इस एप के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्र यहां के अधिकांश बच्चे पढ़ाई छोड़ क्रिकेट, गुल्ली, डंडा सहित अन्य खेलों में मस्त हैं। उल्लेखनीय है कि लाॅकडाउन की वजह से जिले के 1192 प्राइमरी, 643 मिडिल, 102 हाईस्कूल व 133 हायर सेंकंडरी, पांच अनुदान प्राप्त स्कूल, चार डीएव्ही, कस्तूरबा गांधी स्कूलों को मिलाकर कुल दो हजार 83 स्कूल बंद हैं। ऐसे में जिले में पहली से 12वीं तक के 2 लाख 58 हजार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए प्रदेश सरकार द्वारा ‘पढ़ाई तुहर द्वार‘ योजना के तहत् पढ़ाई कराई जा रही है। विद्यार्थियों द्वारा पंजीयन कराने के मामले में बलौदाबाजार जिले की स्थिति भले ही थोड़ी बेहतर है मगर इस योजना के तहत पढ़ाई में नेटवर्क तथा एंड्राइड मोबाइल की उपलब्धता तथा छात्रों के रूचि नहीं होने के कारण यह योजना वास्तविक उद्देश्यों से कोषों दूर दिखाई दे रही है।
बच्चे योजना समझ ही नहीं पाए, शिक्षकों में भी रुचि कम
यहां तो स्थिति ऐसी है कि बच्चों के पास एंड्राइड मोबाइल ही नहीं है, ऐसे में बच्चे पढ़ाई कैसे करेंगें। सूत्रों की मानें तो आज भी हजारों बच्चे इस योजना को समझ नहीं पाए हैं, योेजना के प्रति शिक्षकों का उत्साह भी कम दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों मेें बच्चे घूमते, खेलते नजर आ रहे हैं। लाॅकडाउन की वजह से लोग घरों में हैं, ऐसे में मोबाइल डाटा का उपयोग भी ज्यादा हो रहा है। वही वनांचल क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या ज्यादा है यही कारण है कि यहां एंड्राइड मोबाइल फोन व नेटवर्क की समस्या ज्यादा होने लगी है।



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Registration of more than one lakh, online only 932 students are studying




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20 लाख मजदूरों को दिया काम, 56 लाख को राशन

छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के संक्रमण को रोकने के लिये पूर्वानुमान लगाकर बेहतर तैयारी और कार्ययोजना के साथ इसका सामना किया इसके कारण अन्य राज्यों के मुकाबले छत्तीसगढ़ में संक्रमण को नियंत्रण में रखने में सफलता मिली। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने राहत भरे फैसले कर संकट में फंसे प्रदेशवासियों की हर संभव मदद की।
उक्त बातें विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर व जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रश्मि चंद्राकर ने कही है। उन्होंने जारी संयुक्त बयान में कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की जनता के नाम जारी अपने पहले ही संदेश में कह दिया था कि हम अपने राज्य में किसी को भूखा सोने नहीं देंगे और इस डेढ़ महीने से अधिक के लाॅकडाउन के दौरान धरातल पर उन्होंने ऐसा किया भी है। राज्य के 56.48 लाख गरीब परिवारों को अप्रैल, मई और जून 3 माह का राशन निःशुल्क प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
3 लाख मजदूरों की समस्याओं का निराकरण : उन्होंने कहा कि बिना राशनकार्ड वाले व्यक्तियों को भी प्रति व्यक्ति 5 किलो चांवल देने का निर्णय लिया गया। लाॅकडाउन में मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार देने में छत्तीसगढ़ अभी पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। देशभर में मनरेगा कार्यों में लगे कुल मजदूरों में से करीब 24 फीसदी अकेले छत्तीसगढ़ से हैं।
यह संख्या देश में सर्वाधिक है। प्रदेश की 9883 ग्राम पंचायतों में चल रहे विभिन्न मनरेगा कार्यों में अभी लगभग 20 लाख मजदूर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान राज्य एवं राज्य के बाहर के लगभग 3 लाख श्रमिकों की समस्याओं का सीधे तौर पर निराकरण किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य में श्रमिकों, मजदूरों और अन्य व्यक्तियों को आश्रय, भोजन और अन्य सुविधायें उपलब्ध कराई गई। अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों की समस्याओं को दूर करने के लिए वहां के मुख्यमंत्रियों, अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें भोजन, आश्रय इत्यादि उपलब्ध कराया गया। छत्तीसगढ़ के कुल एक लाख 24 हजार 205 श्रमिकों, देश के 21 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में लाॅकडाउन के कारण फंसे थे, अन्य राज्यों में संकट का सामना कर रहे 16,885 श्रमिकों को लगभग 66 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों और औद्योगिक क्षेत्रों में 81,669 श्रमिकों को पुनः रोजगार मिला।



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9.20 लाख से ठाकुर तालाब का होगा गहरीकरण, 2.13 लाख से घाट निर्माण

ग्राम पंचायत सेमरा के आश्रित ग्राम भाटखार में 9.20 लाख की लागत से ठाकुर देव तालाब गहरीकरण और निर्मला घाट निर्माण शुरू हो गया है। तालाब के गहरीकरण पर 7.7 लाख और निर्मला घाट बनाने पर 2.13 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। तालाब गहरीकरण रोजगार गारंटी कार्य जारी हैं। ग्राम पंचायत सेमरा में नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य मीना बंजारे सोमवार को सेमरा भाटखार ठाकुर देव तालाब गहरीकरण कार्य देखने गए। मजदूरों से मिले। उन्होंने सभी मजदूरों का हाल चाल जाना एवं सोशल डिस्टेंस बनाकर कार्य करने को कहा।
मजदूरों ने बताया कि ठाकुर देव तालाब में कार्य करने के लिए रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य करने के लिए मांग पत्र में अपना नाम एवं जाब कार्ड नंबर दर्ज कराया जा रहा हैं।इससे प्रति जाब कार्ड के प्रत्येक सदस्य को काम दिया जा रहा है। लॉकडाउन होने से लोगों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई हैं। मजदूरों को रोजी रोटी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत सेमरा में लगभग 1600 मजदूरों का 700 जाब कार्ड बना है। सेमरा ग्राम पंचायत बड़ा ग्राम पंचायत होने के कारण मजदूरों की संख्या अधिक है, जिससे मजदूरों को बारी-बारी से काम कराया जा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए हर दिन लगभग 150 से 200 मजदूर काम कर रहे हैं। सेमरा सरपंच श्रवण कुमार ध्रुव, कुशल राम साहू वार्ड पंच, उपसरपंच घनश्याम साहू ने सभी लोगों ने मजदूरों से सोशल डिस्टेंस बनाकर काम करने कहा।



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Thakur pond will be deepened from 9.20 lakhs, ghat construction from 2.13 lakhs




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टिकटॉक बनाने पर विवाद 2 भाइयों को पीटा, 5 पर केस

टिकटॉक बनाने पर सांकरा में दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। पिता-पुत्र सहित 5 लोगों ने घर में घुसकर 2 भाइयों पर प्राणघातक हमला किया। हमले में एक युवक को गंभीर चोट आई है। उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया है। पुलिस ने दोनों पक्षों पर केस दर्ज किया है। मामले की जांच कर रही है।
अर्जुनी पुलिस के अनुसार घटना बुधवार सुबह करीब 10 बजे की है। बीते रविवार को शिव गंगेले और गुलशन साहू के बीच टिकटॉक पर वीडियो बनाने पर विवाद हुआ था। धक्का-मुक्की में गुलशन को चोट आई थी। बुधवार को इलाज के लिए पैसा मांगने गुलशन, शिव गंगेले के घर गया तो दोनों के बीच कहासुनी हो गई। बात अपशब्दों तक पहुंच गई। इसके बाद गुलशन घर लौट गया। कुछ समय बाद शिव गंगेले, उसका भाई रमन, छन्नू, पिता मघन गंगेले व चाचा हेमंत गंगेले सभी गुलशन के घर में घुसे। लाठी-डंडे से मारपीट की। बीच बचाव में ओमन को गंभीर चोट आई। परिजन ने उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लाकर भर्ती किया। अर्जुनी थाना के एसआई लालासिंह राजपूत ने बताया कि सांकरा मारपीट मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ केस दर्ज कराया है।



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अंता में लगाए शिविर में युवाओं ने किया 32 यूनिट रक्तदान

हाड़ौती ब्लड डोनर सोसायटी अंता की ओर से लगाए शिविर में युवाओं ने 32 यूनिट रक्तदान किया। सोसायटी अंता के को-ऑर्डिनेटर पवन मोहबिया ने बताया कि कोटा एमबीएस ब्लड बैंक में रक्त की कमी से थैलेसीमिया के बच्चों, डिलेवरी वाली महिलाओं व गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बुधवार काे सुबह 11 बजे से राधिका मैरिज गार्डन के पास एमबीएस कोटा की मोबाइल वैन में शिविर लगाया गया। गत दिनों कश्मीर के हंदवाड़ा में शहीद हुए जवानों को यह रक्तदान शिविर समर्पित किया गया। शिविर के दौरान भारतीय सैनिकों के चित्र के समक्ष पालिका अंता के अधिशासी अधिकारी मनीष गौड़ ने दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान पालिका के कनिष्ठ अभियंता हरिमोहन प्रजापति, विमला शर्मा, पवन अदलक्खा, ममता सुमन, कमलेश गुप्ता, राजकुमार नन्दवाना, रजनीकांत मालव, रामप्रसाद प्रजापति, माणकचंद राठौर, भूपेंद्र राठौर, दीपक गोयल, अरविन्द गालव भाया, अखलाक खान, उस्मान खान, अजय गुर्जर, भुवनेश गौतम, रवि सोना, अनूप अरविंद, अनुराग त्रिवेदी, अंकुर रावत, तरुण पंजाबी, अतुल गौतम, ध्रुव मोहबिया, गोविंद मंगल सहित कई युवाओं व रक्तदाताओं ने शहीदों को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की। शिविर के दौरान दंपती रेखराज मीणा व सावित्री मीणा तथा देवेन्द्र, अरविंद व मंजू अरविंद एवं ममता गौड़ ने भी रक्तदान किया।
एमबीएस कोटा ब्लड बैंक टीम से आए डॉ. बृजबहादुर सुमन, मनीष सांवरिया, पल्लव चतुर्वेदी, शैलेन्द्र राय, अभिषेक पंवार, वैभव सिंह व गणेश बैरवा ने रक्त संग्रहित किया।



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Youth donated 32 units of blood in a camp in Anta




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संक्रमितों के संपर्क में आए 59 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव, 21 दिन रहेंगे क्वारेंटाइन

रेंगाखार और समनापुर जंगल में मिले 6 कोरोना संक्रमितों के सीधे संपर्क में आए 59 लोगों के सैंपल लिए गए थे । राहत की बात है कि सभी की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। फिर भी संबंधितों को 21 दिन तक क्वारेंटाइन में ही रखेंगे। इस दौरान उनकी दोबारा सैंपल लेकर जांच कराई जा सकती है, लेकिन अभी कोरोना का लक्षण बाद में भी दिख सकता है।
संक्रमितों के मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने उनके सीधे संपर्क में आए परिजन, पड़ोसियों और क्वारेंटाइन में रह रहे 59 लोगों के सैंपल लिए थे। साथ ही सरपंच-सचिव, कोटवार, चौकीदार, तहसीलदार और एसडीएम समेत 26 अन्य लोगों के सैंपल लिए गए थे। सभी के सैंपल 4 मई को ही एम्स रायपुर भेजी गई थी, जिनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है । रिपोर्ट से स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अब भी शेष 26 लोगों की रिपोर्ट आना है। ट्रैवल हिस्ट्री जुटाने पर पता चला है कि संक्रमित मिले 6 में से 3 लोग नागपुर (महाराष्ट्र) से पैदल राजनांदगांव होते हुए रेंगाखार पहुंचे थे। वहीं 3 अन्य लोग हैदराबाद (तेलंगाना) से अपने गांव लौटे थे।
संक्रमण के डर से लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे

कोरोना संक्रमितों के मिलने पर ग्राम रेंगाखार कला, समनापुर जंगल, चमारी, सुतिया और तितरी (वन गांव) को पूरी तरह से सील कर दिया गया है । कंटेनमेंट जोन में शामिल इन गांवों में पिछले 3 दिन से सन्नाटा पसरा हुआ है । संक्रमण के डर से लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे । गांवों में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। गांव से बाहर जाने और बाहर से अंदर आने वालों पर नजर रखी जा रही है। साप्ताहिक बाजार लगना बंद है। सिर्फ राशन व जरुरी वस्तुओं की दुकानें निर्धारित समय में खोली जा रही है।
हैदराबाद से पहुंचे मजदूर, बॉर्डर से लगे मोहगांव में उतरे

छग- मध्यप्रदेश बॉर्डर पर स्थित रेंगाखार व समनापुर जंगल में उस वक्त और हड़कंप मच गया, जब बॉर्डर से लगे ग्राम मोहगांव, मलाजखंड (मध्यप्रदेश) में मंगलवार को दो ट्रकों में भरकर 150 से ज्यादा मजदूर हैदराबाद (तेलंगाना) से पहुंचे। ट्रकों से उतरने के बाद मजदूर अपने-अपने गांवों की तरफ जाने लगे। इनमें छग के भी मजदूर शामिल थे। स्थानीय प्रशासन को जब इसका पता चला, तो हड़बड़ी में मजदूरों को रोकवाया। इसके बावजूद बहुत से मजदूर वहां से जा चुके थे। गंभीर बात तो यह है कि मलाजखंड के मोहगांव में जहां ट्रकों से मजदूर उतरे, वह समनापुर जंगल बॉर्डर से महज 15 से 16 किमी दूरी पर है। इससे इलाके के गांवों में लोगों की फिक्र और बढ़ गई।

क्वारेंटाइन सेंटर में घुसा शराबी, बिस्तर पर सोया अब हवालात में
ग्राम पंचायत टाटीकसा के क्वारेंटाइन सेंटर में मंगलवार रात एक शराबी घुस आया। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे मजदूरों के बिस्तर पर लेटा और शराब भी गिरा दिया। मजदूरों के शोर मचाने पर शराबी वहां से चला तो गया, लेकिन गांव में इधर-उधर घूमने लगा, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। घटना की जानकारी तहसीलदार रेखा चंद्रा से हुई, तो उन्होंने बाजार चारभाठा चौकी में शिकायत की। हरकत में आई पुलिस ने बुधवार को शराबी व्यक्ति को गांव से गिरफ्तार कर लिया है। चौकी प्रभारी गीतांजलि सिन्हा ने बताया कि आरोपी गोमती प्रसाद त्रिपाठी ग्राम टाटीकसा का रहने वाला है।

500 से ज्यादा सैंपल लिए, 235 की रिपोर्ट आई निगेटिव
संक्रमण की रोकथाम के लिए विदेश यात्रा और दूसरे राज्यों व जिलों से आए 500 से ज्यादा लोगों के सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से 235 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। अब भी 55 फीसदी लोगों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है। कोरोना पॉजिटिव मिलने पर सैंपलिंग में तेजी आई है। पिछले दो दिन में ही कंटेनमेंट जोन में शामिल गांवों से 211 लोगों के सैंपल लिए गए हैं ।
घटना के बाद पूरे गांव को सैनिटाइज कराया

घटना के बाद से ग्रामीण डरे हुए हैं । आरोपी गोमती प्रसाद को गांव से बाहर दूसरे जगह क्वारेंटाइन करने मांग की जा रही है । ताकि वह गांव में दहशत न फैलाए । इधर, घटना के बाद सरपंच ने पूरे गांव को सैनिटाइज कराया।



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Report of 59 people exposed to infected is negative, quarantine will remain for 21 days




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जिला प्रशासन का दावा- 80 बसें तैयार खुली पोल, तीन ट्रकों में पहुंचे 324 लोग

दंतेवाड़ा के 3000 से ज्यादा मजदूर दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं। लॉकडाउन में ढील दी गई तो दूसरे प्रदेशों से मजदूरों के आने का सिलसिला अब वाहनों के ज़रिए भी शुरू हो गया है। सोमवार को कोंटा बार्डर पर दंतेवाड़ा के करीब 100 मजदूर रोके गए। उन्हें लेने दंतेवाड़ा से बसों को प्रशासन ने रवाना किया। अब बुधवार को 3 ट्रकों में भरकर आंधप्रदेश और तेलंगाना से करीब 324 मजदूरों की वापसी हुई है। इस वापसी ने इस बात को उजागर कर दिया है कि कोरोना और लॉकडाउन की चुनौती के बीच दूसरे राज्यों व स्थानीय प्रशासन के बीच आपस में समन्वय ही नहीं है।
इधर जिला प्रशासन का दावा है कि दंतेवाड़ा में मजदूरों को लाने प्रशासन ने 80 बसें तैयार कर रखी हैं। चूंकि मजदूर दूसरे प्रदेशों में फंसे हैं, ऐसे में उन्हें लाने के लिए प्रशासन सरकार के निर्देश का इंतजार कर रही है। बताया जा रहा है पड़ोसी प्रदेशों के प्रशासन ने छत्तीसगढ़ सरकार या स्थानीय जिला प्रशासन को सूचना दिए बिना ही मजदूरों को ट्रकों तो पिकअप में भरकर भेज दिया है।
बुधवार को भी दंतेवाड़ा के करीब 300 से ज्यादा मजदूर ट्रकों और पिकअप के जरिए दंतेवाड़ा के अलग-अलग इलाके में पहुंचे। चिलचिलाती धूप में भेड़ बकरियों की तरह ट्रकों में सवार होकर मजदूर घर वापसी को मजबूर हैं। सोशल डिस्टेंसिंग तक नहीं थी। ऐसे में अगर एक भी व्यक्ति संक्रमित होता है तो ग्रीन जोन दंतेवाड़ा को नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस बात की जानकारी जब दंतेवाड़ा के अफसरों को पता चली तो हरकत में आ गए।
बसें भेजने के लिए शासन के आदेश का इंतजार
एसडीएम लिंगराज सिदार ने बताया कि ट्रकों में सवार होकर मजदूर को आंध्रप्रदेश से आए हैं। हमारे पास बसें तैयार हैं। सूचना मिलने पर हम कोंटा बॉर्डर भेज रहे हैं। लेकिन दूसरे राज्यों में बसें भेजने के लिए शासन स्तर से निर्देश मिलेंगे तभी होगा। मजदूरों को ट्रकों से भेजने की सूचना दंतेवाड़ा पहुंचने पर ही मिली। पहले पता होता तो बसें भेजते।
सभी को क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जाएगा
तहसीलदार विजय कोठारी ने बताया कि जो मजदूर आए हैं उनमें से अधिकतर ग्रामीण डब्बा, गुडसे, पालनार और तेलम के है। ये सभी तेलंगाना के ग्रीन जोन से लौटे हैं। इन सभी ग्रामीणों को ग्रीन जोन धनिकरका, बेंगलूर में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। शिक्षक से लेकर सचिव की ड्यूटी लगाई गई है।

जनवरी में हुआ था सबसे अधिक पलायन
स्थानीय स्तर पर काम नहीं मिलने से कटेकल्याण और कुआकोंडा के ग्रामीण हर साल बड़ी संख्या में तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में काम करने के लिए पलायन करते हैं। तहसीलदार ने बताया कि पलायन को लेकर पिछले चार महीने की तुलना की जाए तो सबसे अधिक पलायन जनवरी में हुआ था। यही लोग दूसरे राज्यों में काम करने के लिए गए थे जो अब वापस आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में कोरोना संक्रमण को लेकर जो क्वारेंटाइन सेंटन बनाए गए हैं उनमें भी ग्रीन, आरेंज और रेड जोन वाले सेंटर बनाए गए हैं जो जिस जोन से आएगा उसे उसी जोन में रखा जाएगा।



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District administration claims - 80 buses ready open pole, 324 people arrived in three trucks




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ऑनलाइन सब्जी कोई नहीं ले रहा, शराब के लिए 2 दिन में 250 ऑर्डर

राज्य सरकार ने सब्जी-फल बाजारों में जुट रही भीड़ से कोरोना के संक्रमण का खतरा दूर करने के लिए पूरे प्रदेश में सब्जी-फल की अॉनलाइन बुकिंग व होम डिलीवरी की सुविधा शुरू की हुई है।
तमाम कवायद के बाद भी सिर्फ 45 लोगों ने यहां पंजीयन कराया है। इसमें भी औसतन हर रोज 10-12 लोग ही सब्जी के लिए ऑर्डर कर रहे हैं। गत 14 अप्रैल से शुरू हुई इस योजना में जहां अब तक सब्जी व फल बेचने के लिए केवल 9 व्यापारी ही आगे आए हैं तो वहीं दूसरी ओर इस वेबसाइट के माध्यम से खरीदी के लिए 313 लोगों ने ही पंजीयन कराया हुआ है लेकिन इनमें से भी सिर्फ 45 ही एक्टिव है।
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक और इस योजना के नोडल अधिकारी अजय कुशवाहा ने कहा वेबपोर्टल के माध्यम से सब्जी बेचने के लिए व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा लोगों को जागरूकता का परिचय देते हुए सब्जी खरीदने के लिए कहा जा रहा है।

डिलिवरी चार्ज है मुसीबत
होम डिलीवरी चार्ज भी लोगों को ऑनलाइन सब्जी बाजार से दूर कर रहा है। पोर्टल में पंजीकृत व्यवसायियों ने बकायदा शर्तों के साथ इसमें अपनी जानकारी डिस्प्ले कर रखी है और लोगों को ऑनलाइन डिलीवरी करने के लिए कुछ व्यापारी व संस्थाएं जहां मुफ्त में तो वहीं कुछ लोग 5 से 10 प्रतिशत तक होम डिलवरी चार्ज लेने की बात कह रहे हैं। जिसका असर भी इस योजना पर पड़ रहा है।

शराब की होम डिलीवरी के लिए ऑर्डर पर ऑर्डर
सरकार ने शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलिवरी के लिए सरकार ने वेबपोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल पर लोग शराब के लिए ऑर्डर कर सकते हैं। लोगों ने ऑनलाइन घर पर शराब पाने के लिए बड़ी संख्या में अपने ऑर्डर बुक किए हैं। 2 दिनों में ही सिर्फ बस्तर जिले के लिए 249 लोगों ने ऑनलाइन शराब की मांग करते हुए अपने ऑर्डर बुक किए मंगलवार को 79 लोगों ने और बुधवार को एक साथ 70 लोगों ने शराब पाने के लिए बुकिंग की। बुधवार को इनमें से सिर्फ 17 लोगों को ही शराब मुहैया कराई जा सकी है। विभागीय अफसरों के मुताबिक ऑनलाइन शराब के डिलीवरी का जिम्मा प्राइम वन प्लेसमेंट एजेंसी प्राइम वन को है 24 घंटे में शराब के डिलीवरी करनी है लेकिन 48 घंटे में भी यदि डिलीवरी नहीं हुई तो प्लेसमेंट एजेंसी को फाइन भरना होगा। इधर कई लोग फॉल्स बुकिंग भी कर रहे है।

सिर्फ 15 किलोमीटर तक ही होगी सप्लाई
ऑनलाइन डिमांड पर सिर्फ 15 किमी तक ही शराब पहुंचा कर देने का प्रावधान है। होम डिलीवरी के लिए शराब की कीमत के अलावा 120 रुपए सर्विस चार्ज लेते हैं। आबकारी अफसरों का कहना है कि अधिकतर लोगों ने जिस ब्रांड की मांग की थी वह यहां उपलब्ध नहीं है एक व्यक्ति ने तो 60 किमी दूर मारडुम गांव से शराब के लिए बुकिंग की थी जिसे पहुंचाना संभव नहीं है।



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20 हजार लोगों काे क्वारेंटाइन करने सेंटर तैयार

लॉकडाउन के चलते कबीरधाम जिले के लगभग 7 हजार श्रमिक दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। उन्हें वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वापसी होने पर उन्हें क्वारेंटाइन करने के लिए सेंटर तैयार किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों की तुलना से ज्यादा 20 हजार लोगों को क्वारेंटाइन करने सेंटर बनाए जा चुके हैं ।
समाज कल्याण विभाग और जिले की प्रभारी मंत्री अनिला भेडि़या ने बुधवार को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए तैयारी की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि छग सरकार दूसरे राज्यांे में फंसे श्रमिकाें को वापस लाने प्रयास कर रही है। कबीरधाम जिले के श्रमिक जो लॉकडाउन से दूसरे राज्यों में फंसे हैं, उन सभी से संपर्क करते हुए उन्हें वापस लाना है। वापसी के दौरान उनका हेल्थ चेकअप करते हुए क्वारेंटाइन किया जाना है। कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने बताया कि दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों की तुलना से ज्यादा 20 हजार श्रमिकों को क्वारेंटाइन करने सेंटर बना लिए हैं। क्वारेंटाइन सेंटर्स की निगरानी का जिम्मा एसडीएम, पुलिस, जनपद पंचायतों के सीईओ और नगरीय निकायों के अधिकारियों को दिया है। ग्राम स्तर पर भी विशेष निगरानी की जाएगी।
मनरेगा में 1.36 लाख मजदूरों को दिया रोजगार
कलेक्टर शरण ने बताया कि कंटेनमेंट जोन में शामिल गांवों को छोड़कर पूरे जिले में मनरेगा के तहत 1.36 लाख पंजीकृत श्रमिकों को गांव स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराएं जा रहे हैं। कोविड- 19 से बचाव के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन बंद है। डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से अनौपचारिक शिक्षा गतिविधि संचालन की जा रही है । कुपोषण और एनीमिया मुक्त जिला बनाने का अभियान सुचारू रूप से चलाया जा रहा है। चिन्हांकित मरीजों के घर जाकर सूखा राशन उपलब्ध करा रहे हैं।
तेंदूपत्ता संग्रहण जारी
जिले में 40,800 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य है। इसे 16.32 करोड़ रुपए में 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा की दर से खरीदेंगे। जिले के 19 समितियों के अंतर्गत 252 फड़ों पर फड़ मुंशी के माध्यम से खरीदी होगी।
15 लाख रुपए भुगतान
डीएफओ दिलराज प्रभाकर ने बताया कि वन विभाग ने 450 क्विंटल चरौटा, 40 क्विं. चिरायता, 6 क्विंटल वन तुलसा, 11 क्विं. वन जीरा, 8 क्विं. बहेड़ा व 32 क्विंटल शहद खरीदा है। 15.11 लाख रुपए भुगतान हुआ।



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Center ready to quarantine 20 thousand people




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सर... 12वीं पास होना जरूरी है नहीं तो घर वाले शादी करवा देंगे

शहर के आदर्श कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल को माशिमं ने मूल्यांकन केन्द्र बनाया है, लेकिन इस बार इस केन्द्र में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं हो रहा। कोरोना संक्रमण की रोकथाम व सोशल डिस्टेंस को देखते हुए करीब 200 से अधिक मूल्यांकनकर्ता शिक्षकों के घर में उत्तरपुस्तिका भेजी गई। शिक्षक घर पर ही कक्षा 10वीं व 12वीं के विभिन्न विषयों की जांच कर रहे हैं।
जांच के दौरान उत्तरपुस्तिका में बच्चों ने पास होने कई मानवीय अपील की है। इसमें एक ने लिखा कि सर... आपसे निवेदन है कि मुझे इस साल 12वीं पास होना जरूरी है। पास नहीं हुई तो घर वाले शादी करा देंगे। ये बातें हायर सेकंडरी स्कूल के स्टूडेंट् ने अपनी उत्तरपुस्तिका में लिखी है।
उत्तरपुस्तिका की जांच के दौरान पढ़ाई में कमजोर छात्र पास होने अपील कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर मूल्यांकनकर्ता शिक्षक ने बताया कि कई बच्चे घरेलू परेशानी लिखे हैं, जैसे परीक्षा के एक दिन पहले मामा, नानी, दादी समेत परिवार के सदस्य की मृत्यु हो गई, इस कारण पढ़ नहीं सका। पास कर दिया तो स्टूडेंट की दुआ मिलेगी, समेत कई प्रकार की बातें लिखी मिल रही है। माशिमं ने पहले चरण में कक्षा 10वीं व 12वीं के 72 हजार 139 कॉपी भेजी है, जिसका मूल्यांकन पूरा हो गया है।
बीते साल तो उत्तरपुस्तिका से नोट निकला था: बच्चे पास होने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। बीते साल तो उत्तरपुस्तिका से नोट भी निकला था। इस बार घर पर ही मूल्यांकन होने के कारण नोट मिलने संबंधित जानकारी नहीं मिल पा रही है। केन्द्र में उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन के दौरान एक कमरे में करीब 20 से 25 शिक्षक होते हैं, ऐसे में उत्तरपुस्तिका से नोट मिलने की जानकारी उस कमरे के शिक्षकाें को मिल जाती थी। बीते वर्ष जांच में कई उत्तरपुस्तिकाओं से 100 से 500 रुपए तक का नोट मिला था। इसे संबंधित स्टूडेंट्स ने सेलाे टेप चिपकाया था, लेकिन इस तरह की मानवीय अपील व रुपए मिलने पर मूल्यांकनकर्ता शिक्षकों पर कोई असर नहीं हो रहा। शिक्षक ईमानदारीपूर्वक उत्तरपुस्तिका की जांच कर रहे हैं। स्टूडेंट्स ने अपनी उत्तरपुस्तिका में जो सही उत्तर लिखा है, उसी के अाधार पर शिक्षक जांच कर अंक दे रहे हैं।
सही उत्तर लिखने पर ही नंबर मिलते हैं: आरपी सिंह
बच्चों द्वारा मानवीय अपील के संबंध में मूल्यांकन केन्द्र प्रभारी आरपी सिंह ने बताया कि उत्तरपुस्तिका जांच के दौरान मानवीय अपील काम नहीं आती। परीक्षार्थी जिन प्रश्नों का सही उत्तर लिखता है, उसी के आधार पर नंबर दिए जाते हैं। पहले चरण अंतर्गत मूल्यांकन कार्य पूरा हो गया है। अब दूसरे चरण के तहत 26 हजार से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं की जांच की जा रही है। इसे 12 मई से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
हताश न हों छात्र, पास होने के कई मौके हैं आपके पास
अगर कोई स्टूडेंट्स बोर्ड परीक्षा में फेल हो जाता है तो उन्हें फिक्र करने या निराश होने की जरूरत नहीं है। बोर्ड परीक्षा पास करने ऐसे परीक्षार्थियों को तीन और अवसर मिलेंगे। शैक्षणिक सत्र-2015 से लागू सीजी बोर्ड की क्रेडिट योजना का लाभ उन्हें मिल सकेगा। शहर के करपात्री स्कूल के प्राचार्य डीएस जोशी ने बताया कि इस योजना के तहत मुख्य परीक्षा में अगर दसवीं के परीक्षार्थी एक से लेकर छह विषय या 12वीं के परीक्षार्थी एक, दो या सभी पांच विषय में असफल हो जाते हैं तो भी उन्हें फेल नहीं किया जाएगा। उन्हें सत्र 2020 की पूरक परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी जिन विषयों में वे फेल होंगे, उन्हें वर्ष 2021 की मुख्य परीक्षा व अंततः पूरक परीक्षा में पास होने का अंतिम अवसर प्रदान किया जाएगा।
अब दूसरे चरण अंतर्गत 26 हजार कॉपियां पहुंची
इस मूल्याकंन केन्द्र में दो चरणों में कक्षा 10वीं व 12वीं के उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन होना है। पहले चरण का मूल्यांकन कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं अब दूसरे चरण अंतर्गत मूल्यांकन कार्य होना है। दूसरे चरण में 26 हजार 547 उत्तरपुस्तिका माशिमं की अोर से भेजी गई है। इसे भी शिक्षकों के घर तक पहुंचा दी गई है। वैसे ज्यादातर शिक्षक कवर्धा शहर में रहते हैं। ऐसे में मूल्यांकन केन्द्र के अफसरों को शिक्षकों के घर तक उत्तरपुस्तिका देने परेशानी नहीं होती।



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Sir ... it is necessary to pass 12th, otherwise the family will get married




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एम्स से नर्सिंग कर्मचारी सहित दो लोगों को मिली छुट्‌टी, अब एक्टिव केस 21; संक्रमित महिला के साथ बच्चे नहीं जा सकेंगे अस्पताल

छत्तीसगढ़ में कोराेना संक्रमित दो और मरीज गुरुवार कोपूरी तरह से ठीक हो गए हैं। उन्हेंडिस्चार्ज करने की तैयारी की जा रही है। इस बात की पुष्टि एम्स की ओर से की गई है। इनमें से एक सूरजपुर से आया हुआ था, जबकि दूसरा एम्स का ही नर्सिंग स्टाफ है।प्रदेश में ​एक्टिव मरीजों की संख्या अब 21 हो गई है। अभी तक38 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

प्रदेश में काेरोना संक्रमण

  • छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के अब तक 59 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें क्वारैंटाइन सेंटर से भागे झारखंड के पॉजिटिव दो मजदूरों को जाेड़ दें तो यह संख्या 61 होती है।
  • संक्रमितों में अब तक सबसे ज्यादा कोरबा जिले से 28, सूरजपुर 6, रायपुर 7, दुर्ग 9, कवर्धा 6, राजनांदगांव और बिलासपुर से एक-एक पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं।
  • प्रदेश में अब एक्टिव केस की संख्या 21है। अब सूरजपुर के 5, दुर्ग के 9, कवर्धा के 6 और रायपुर के एक मरीजका इलाज एम्स में चल रहा है।
  • कटघोरा में 16 अप्रैल के बाद कोई नया केस नहीं आया है। वहां के मरीज 4 अप्रैल से भर्ती होना शुरू हुए और सभी 27 की छुट्‌टी हो चुकी है।

हर हफ्ते तय होंगे रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के जिले

अब हफ्ते जिलों के रेड, ग्रीन या ऑरेंज जोन को लेकर सूची तैयार की जाएगी। नए केस मिलने और संक्रमितों के स्वस्थ होने के आधार पर निर्धारण किया जाएगा। इसी आधार पर व्यापारिक औरअन्य गतिविधियां शुरू करने या सख्ती का निर्णय लिया जा सकेगा। वहीं, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एसीएस) सुब्रत साहू ने बताया कि रायपुर को अभी रेड जोन से निकालने के संबंध में केंद्र सरकार से कोई निर्देश नहीं मिला है।

यह तस्वीर बिलासपुर की है। राजनांदगांव और आसपास के इलाकों से आए ये मजदूर एक ऑटो में भरकर अशोकनगर जा रहे थे। पुलिस ने इन्हें रोका। पुरूष मजदूरों को उतारा गया और सिर्फ महिलाओं और बच्चों को ऑटो से भेजा। बाद में ऑटो जब्त की गई।

बच्चा पॉजिटिव, तभी जा पाएगा संक्रमित मां के साथ अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग ने मां के कोरोना संक्रमित मिलने पर उनके साथ छोटे बच्चे को अस्पताल नहीं भेजने के निर्देश दिए। अगर जांच में बच्चे की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो ही उसे मां के साथ अस्पताल भेजा जाए। विभाग ने निर्देश दिया है-परिवार के अन्य सदस्य अगर बच्चे को नहीं रखना चाहते तो उसे सखी सेंटर या पालना घर क्वारैंटाइन के निर्देशों का पालन करते हुए भेजें औररखें। बच्चे की देखरेख के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ता या सहायिका की ड्यूटी लगाई जाए।

क्वारैंटाइन जोन में सेल्फी : ये तस्वीर दुर्ग जिले की है। यहांके 138 स्टूडेंट्स कोटा से लौटे। सभी बिलासपुर में ठहरे थे। बीआईटी दुर्ग में सभी को उनके पैरेंट्स ने रिसीव किया। इस दौरान छात्राओं ने वहां भी सेल्फी ली। अब ये अपने-अपने घरों में क्वारैंटाइन रहेंगे।

    गुजरात से 2500 श्रमिक लेकर दो ट्रेनें 8 और9 मई को आएंगी
    छत्तीसगढ़ के 1156 मजदूरों को लेकर गुजरात के खेड़ा और नडियाड से पहली ट्रेन गुरुवार शाम 6 बजे रवाना होगी और शुक्रवार शाम को बिलासपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी के अगले दिन यानी शुक्रवार एक और ट्रेन 1200 मजदूरों को लेकर इन्हीं स्टेशनों से रवाना होगी और शनिवार को बिलासपुर आएगी। छत्तीसगढ़ के अन्य राज्यों से मजदूरों की वापसी शुक्रवार से शुरू हो रही है।


    अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर एम्स के काेराेना वार्ड में करेंगे ड्यूटी
    अंबेडकर अस्पताल के सभी विभागों के सीनियर और जूनियर डाक्टर अब एम्स के कोरोना वार्ड में ड्यूटी करेंगे। उनके अलावा नर्सिंग स्टाफ को भी गुरुवार से वहां ड्यूटी करनी होगी। इनकी चार बैच बनाई गई है। एक-एक बैच हफ्तेभर एम्स में ट्रीटमेंट का सिस्टम देखेगी। शेड्यूल खत्म होने के बाद उन्हें अगले ही दिन माना स्थित कोरोना अस्पताल में ड्यूटी करनी होगी, फिर 14 दिनों के लिए क्वारैंटाइन किया जाएगा।

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया आदेश

    • एचओडी, जूनियर डॉक्टर समेत 75 नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसमें सात विभागों के एचओडी व 18 प्रोफेसर व एसोसिएट प्राेफेसरों के नाम हैं।
    • इनके अलावा 25 जूडो व इतने ही नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। कोरोना वार्ड में ड्यूटी के लिए चार बैच बनाए गए हैं।
    • बैच ए में शामिल डाक्टर्स और स्टाफ 7 से 13 मई तक ड्यूटी करेंगे। इनमें तीन एचओडी, एक एसोसिएट प्रोफेसर, चार जूडो व चार नर्सिंग स्टाफ शामिल हैं।
    • यही बैच 14 से 20 मई तक माना स्थित कोरोना अस्पताल में सेवाएं देगा। इसी तरह बैच बी में चार एचओडी समेत जूडो व नर्सिंग स्टाफ को 14 से 20 मई एम्स में ड्यूटी करनी होगी।
    • ड्यूटी का शेड्यूल खत्म होने के अगले ही दिन 21 से 27 मई तक सभी को माना के कोविड अस्पताल में ड्यूटी करनी होगी। हालांकि वहां अभी एक भी मरीज नहीं है।

    रायपुर : शहर के कुकुरबेड़ा के जिस कूलर मैकेनिक कोकोरोना पॉजिटिव पाया गया, उसके साथ रहने वाले बुजुर्ग माता-पिता और लगातार संपर्क वाले दोस्तों और पड़ोसियों समेत 16 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई। उसके संपर्क में आए 38 और लोगों का सैंपल लिया गया है, जिसकी रिपोर्ट रात तक आएगी। कूलर मैकेनिक 24 साल के युवक के परिजन और 16 करीबियों को निमोरा में क्वारैंटाइन किया गया है।

    जगदलपुर : एटीएम में सैनिटाइजर नहीं होने के कारण जगदलपुर कलेक्टर ने बैंकों के प्रबंधकों को नोटिस जारी किया है। बैंक और एटीएम को प्रतिबंधात्मक से छूट इस शर्त पर दी गई थी कि वो अपने यहां सैनिटाइजर की व्यवस्था करें, लेकिन जगदलपुर शहर के आसपास के एटीएम का जिला प्रशासन के निरीक्षण में पाया गया कि एटीएम में सैनिटाइजर की व्यवस्था नहीं की गई है। अब ऐसा मिला तो कार्यवाही की जाएगी।

    भिलाई : फरीदनगर की जिस महिला की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई, उसके साथ उसका पति भी महाराष्ट्र के धुलिया से लौटा था। दोनों साथ-साथ लौटे, लेकिन पति ने पूरी कहानी बदल दी। सिर्फ पत्नी को लेकर ही जानकारी दी। खुद की ट्रेवल हिस्ट्री छिपाकर वह दो दिनों तक फरीदनगर व आसपास इलाकों में घूमता रहा। पुलिस ने कोरोना पॉजिटिव महिला के पति नईम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

    लॉकडाउन की वजह से ट्रेनें बंद हैं। रेलवे ने सुपेला और ठगड़ाबांध उतई रोड स्थित रेलवे क्रासिंग के चार किमी लंबी ट्रैक पर बुधवार रात से मेंटेनेंस शुरू कर दिया है, जो गुरूवार सुबह 10 बजे तक चलेगा। इधर, सुपेला में भी रातभर मेंटेनेंस कार्य चला। सभी कर्मियों ने मास्क पहने रखा। ग्लब्स का भी उपयोग किया।

    बिलासपुर : खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत जिला प्रशासन ने बिना पंजीयन और लाइसेंस के भोज्य और तरल खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाईकरने केनिर्देश दिए हैं। दुकानों, ठेलों में भीड़ रोकने औरसोशल डिस्टेंसिंग के लिए कड़ाई से पालन करने कहा है। सहायक खाद्य औरऔषधि नियंत्रक ने बताया कि 12 लाख और उससे अधिक टर्नओवर वाले विक्रेताओं को लाइसेंस अनिवार्य है। कम वाले दुकानों को पंजीयन अनिवार्य है।


    रायगढ़ : जांजगीर-चांपा में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए बिना अनुमति आवागमन को प्रतिबंधित किया गया है। ऐसे में जिले के 8 प्रवेश मार्गाें पर नाकाबंदी की गई है। इनमें अकलतरा-बिलासपुर फोरलेन, बलोदा-कोरबा, कनकी बैरियर कोरबा बॉर्डर, शिवरीनारायण शबरी पुल, चंदली चौक चंद्रपुर रायगढ़ सीमा, कुटीघाट-बिलासपुर बॉर्डर, महानदी पुल मंदिर तिराहा और मसानिया कला सक्ती रायगढ़ बॉर्डर शामिल हैं।

    यह तस्वीर रायगढ़ के दानसरा की है। कोरोना संक्रमण के डर से ग्रामीण में बच्चों की खेलकूद की स्टाइल भी बदल गई है। गांव के खेत में गिरे एक पेड़ पर बुधवार को इस तरह झूला झूलते दिखे बच्चे, दूर-दूर बैठे, बारी आने पर ही करीब आए।


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    छत्तीसगढ़ के 1156 मजदूरों को लेकर गुजरात के खेड़ा और नडियाड से पहली ट्रेन शुक्रवार शाम को बिलासपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसको लेकर तैयारियाें का जायजा लेने स्टेशन पर प्रशासनिक अधिकारी व रेलवे का अमला गुरुवार दोपहर को पहुंचा। हालांकि इस दौरान वे खुद ही सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए।




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    तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 32 नग हीरे के साथ मैनपुर का पूर्व पंच गिरफ्तार

    जिले के पुलिस ने हीरे की तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इसके तहत ग्राम पंचायत मैनपुर के पूर्व पंच रूपेश कश्यप को पकड़ा गया है। आरोपी के पास से 32 नग हीरे मिले हैं। इनकी कीमत 4 लाख 50 हजार रूपये है। थाना प्रभारी भूषण चन्द्राकर की टीम गुरूवार को सूचना मिली थी कि नेशनल हाईवे पर मैनपुर से महज 2 किमी दूर ग्राम गौरघाट में हीरा बेचने की फिराक में पंच किसी का इंतजार कर रहा था। पुलिस मौके पर गई और रुपेश की तलाशी लेने हीरे मिले।

    इस इलाके में हीरे की खाने हैं, पिछले कुछ दिनों में रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते मिट्‌टी में नमी है। तस्करी से जुड़े लोग चोरी छिपे प्रतिबंधित इलाकों में जाकर खुदाई कर रहे हैं। पिछले महीने यहां से एक पूर्व सरकारी को भी पकड़ा गया था। यह युवक भी इसी तरह हीरे निकालने में कामयाब हो चुका था। यहां से हीरे को बेचा जाता है। आभूषणों के कारोबार से जुड़े लोग यहां इस तरह मिले हीरों को तराशकर उन्हें ऊंची कीमतों पर बेचते हैं।



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    तस्वीर मैनपुर थाने की है, आरोपी के खिलाफ मायनिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।




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    अरनपुर क्वारैंटाइन सेंटर से 20 ग्रामीण भागे, आंध्रप्रदेश से आए लोगों को नहाड़ी आश्रम में रखे जाने का विरोध भी

    जिले में आंध्रप्रदेश की ओर से लौटने वाले मजदूर प्रशासन के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। नहाड़ी इलाके में बने क्वारैंटाइन सेंटर से 20 मजदूर भाग गए। भागे हुए मजदूरों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। क्षेत्र के आश्रमों में बने क्वारैंटाइन सेंटर का रहवासी विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि ऐसे में वहां संक्रमण का जोखिम बढ़ेगा। मजदूरों को छोटे वाहनों में भरकर लाया जा रहा है। इनमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हो रहा। जिन वाहनों की क्षमता 10 लोगों की है, उसमें 20 लोग आ रहे हैं।


    आंध्र प्रदेश के कुनावरम में मिर्च के खेतों में तुड़ाई का काम करने हर बार मजदूर जाते हैं। करीब 46 लोग वहीं से लौटे हैं। क्वारैंटाइन सेंटर का विरोध कर रहे ग्रामीणों को कुआकोंडा के सीईओ एसके टंडन ने समझाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। हंगामा बढ़ने की वजह से मजदूरों को पालनार आश्रम में ले जाया गया । भागे हुए 20 ग्रामीण 5 मई को कवारैंटाइन किया गया था। इन्हें तलाशने के लिए पंचायत सचिव सहित दूसरे कर्मचारियों को जिम्मा सौंपा गया है।



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    तस्वीर उस वक्त ली गई थी जब इन मजदूरों को क्वारैंटाइन किया जा रहा था दो दिन पहले, यही मजदूर भाग निकले।




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    10वीं व 12वीं की 92 हजार कॉपियां जांच कर बोर्ड भेजे

    पहले चरण के मूल्यांकन के लिए आई 92 हजार उत्तरपुस्तिकाओं की जांच पूरी होते ही माध्यमिक शिक्षा मंडल की टीम ने बुधवार को जमा कर बोर्ड ले गई। इधर, दूसरे चरण में मूल्यांकन के लिए आई उत्तरपुस्तिकाओं की जांच जारी है। शिक्षक अपने घरों में गोपनीयता बनाते हुए मूल्यांकन कर रहे हैं। लॉकडाउन के चलते हुए भी मूल्यांकन का काम बड़ी सावधानियां से पूरा हो रहा है।
    जिला समन्वयक केंद्र प्रभारी एस चंद्रसेन का कहना है कि पहले चरण में मूल्यांकन के लिए आए उत्तरपुस्तिकाओं का जांच पूरा हो गया है और से बोर्ड को सौंप कर दिया गया है। दूसरे चरण का मूल्यांकन कार्य भी सप्ताहभर के भीतर पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण मे 19 हजार 132 कॉपियां भेजी गई है। इनका मूल्यांकन आगामी एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसमें हाई स्कूल के 7954 व हायर सेकेंडरी के 11178 उत्तरपुस्तिका है। बता दें कि जिले में बोर्ड परीक्षा के उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए एक ही केंद्र जिला मुख्यालय स्थित आदर्श उच्चतर माध्यमिक शाला को बनाया गया है।

    बोर्ड की दोनों कक्षाओं की परीक्षा अभी बाकी
    जानकारी के अनुसार अभी भी बोर्ड कक्षाओं की परीक्षा बाकी है। पहले व दूसरे चरण की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद तीसरे चरण की भी उत्तरपुस्तिकाएं जांच के लिए केंद्र आएगी। अभी दसवीं व बारहवीं की परीक्षा बाकी है। लॉकडाउन के चलते परीक्षा संपन्न नहीं हो पा रही है। 4 मई से बोर्ड के शेष विषयों की परीक्षा होनी थी, लेकिन तीसरे चरण का लॉकडाउन बढ़ते ही परीक्षा को स्थगित करना पड़ा। अभी नया आदेश नहीं आया है। जिला शिक्षा अधिकारी राबट मिंज ने बताया कि अब लॉकडाउन के बाद ही परीक्षा संपन्न कराई जाएगी।



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    12 मजदूर पहुंचे घर, 6 मई को धमतरी से हुए थे रवाना

    पुलिस हाउसिंग बोर्ड रुद्री धमतरी में दूसरे जिले से मजदूर आए थे, लॉकडाउन में धमतरी में ही फंस गए। लॉकडाउन नहीं खुला, तब 4 मई को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामू रोहरा के नेतृत्व में जिला प्रशासन से घर वापस जाने की अनुमति मांगने के बाद वाहन की व्यवस्था की गई। 6 मई शाम को जिला प्रशासन द्वारा वाहन की व्यवस्था कर सभी को उनके घर भेज दिया गया।
    बिलासपुर, मुंगेली, बलौदाबाजार से कार्य करने 12 मजदूर धमतरी जिले में आए थे। 25 मार्च को लॉकडाउन के बाद उन्हें धमतरी में रुकना पड़ा। 25 मार्च से 14 अप्रैल तक लाॅकडाउन खुलने का इंतजार करते रहे। काम से जो कुछ रुपए कमाए थे, वह राशन में खत्म हो रहे थे। 14 अप्रैल के बाद फिर 3 मई तक लॉकडाउन की तारीख बढ़ा दी गई। जब मजदूरों का राशन खत्म हो गया, तब उन्होंने पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रामू रोहरा से मिलकर अपनी व्यथा बताई। रामू रोहरा ने जिला प्रशासन से मजदूरों काे घर वापस भिजवाने के लिए ज्ञापन दिया। घर जाने के पूर्व रामू रोहरा ने मजदूरों को कुछ रुपए भी दिए।

    इन्हें पहुंचाया घर
    मुंगेली, बिलासपुर, बलौदाबाजार के भोलाराम कैवर्त, वीरेंद्र यादव, देवचरण यादव, शोभाराम केंवट, दीपक पटेल, बलदेव कैंवट, भास्कर पटेल, संजय यादव, शोभित, जितेंद्र, परसनाथ, कार्तिकमती ठेकेदार के साथ रुद्री आए थे। सभी वापस अपने घर पहुंच गए।



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    24 घंटे में 10 मिमी बारिश, 4 डिग्री गिरा तापमान

    मई में भी बारिश का सिलसिला रुका नहीं है। बीती रात जिले में गरज चमक के साथ बारिश हुई। गुरुवार को इसका असर अधिकतम तापमान पर पड़ा। बुधवार का अधिकतम तापमान 41 डिग्री से गिरकर गुरुवार को 37 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार को भी सुबह6से8बजे के बीच हल्की बूंदाबांदी हुई। बीते24घंटे में10.7मिमी औसत बारिश जिले में हुई है। धमतरी,नगरी व कुरूद ब्लॉक में ही बारिश हुई। मगरलोड ब्लॉक सूखा रहा। बीते साल मई के अंतिम सप्ताह में बारिश हुई थी।
    गर्मी के इस सीजन में6मई को तापमान41.2डिग्री दर्ज हुआ था।3अलग-अलग चक्रवात के कारण दिनभर सूर्य तपने के कारण शाम4बजे तेज आंधी चली। हल्की बूंदाबांदी हुई। रात में ठंडी हवा के कारण तापमान गिरा और आधी रात के मौसम बदला तो बारिश हुई। गुरुवार तड़के 3से5बजे के बीच हुई तेज बारिश के बाद तापमान कम हो गया। सुबह8बजे फिर बारिश हुई।20अप्रैल को बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से धमतरी ब्लॉक के17गांवों व कुरूद के13गांव के1535.250हेक्टेयर फसल खराब हुई।

    आज बारिश की संभावना
    मौसम वैज्ञानिक डॉ.एचपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका दक्षिण तमिलनाडु तक0.9किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। इसके प्रभाव से8मई को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश,गरज-चमक के साथ छींटे या फिर ओलावृष्टि की संभावना है।



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    10 mm of rain in 24 hours, 4 degrees dropped




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    रेड जोन में शादी पर पाबंदी लेकिन हम ग्रीन जोन में इसलिए 10 शर्तों के साथ 291 शादियों की अनुमति

    कोरोना संक्रमण के कारण रेड जोन में विवाह करने की भी अनुमति नहीं है। लेकिन हमारा जिला ग्रीन जोन में है इसलिए यहां शादी के लिए सशर्त अनुमति मिल रही है। मई में शादी के लिए अब तक जिले में 291 परिवारों को अनुमति मिली है। यह सभी विवाह संबंध ग्रीन जोन में हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन 1 और 2 की अवधि में इस साल रामनवमीं, अक्षय तृतीया और विवाह मुहूर्त में करीब 500 शादियां टल गईं। अब लॉकडाउन 3.0 में जिला प्रशासन ने शादी करने वालों को सशर्त अनुमति दी है। जिले के धमतरी, कुरूद और नगरी ब्लॉक के एसडीएम ने करीब 291 लोगों को शादी की सशर्त अनुमति अब तक दी हैं। 10 शर्तो में सामूहिक भोज, सड़क पर बारात निकालने, आतिशबाजी पर रोक लगाई है। शादी में मौजूद हर व्यक्ति सैनिटाइजर और मास्क का हर हाल में उपयोग करेगा। ऐसे में अब लोग बगैर तामझाम के शादी कर रहे हैं। रेड जोन से बारात आने वाले किसी भी को अनुमति नहीं दी है।

    बाइक से आया दूल्हा, सिर्फ 13 लोग शामिल हुए

    रावां में 13 लोगों की मौजूदगी मे बुधवार को 1 घंटे में शादी हो गई। भैसबोड़ निवासी युवराज पिता खेलन ढीमर अपने पिता और 3 और रिश्तेदार के साथ बाइक से रांवा बारात लेकर आया। पं. संतोष पाठक ने पुनारद ढीमर की बेटी पूर्णिमा की शादी युवराज के साथ कराई। विवाह की रस्म के दौरान सभी लोग मास्क पहने थे। सैनिटाइज का उपयोग किया। लॉकडाउन में बगैर तामझाम के करीब 15 हजार में शादी हो गई। दूल्हा-दुल्हन के पिता खेलन ढीमर, पुनारद ढीमर ने बताया कि उन्होंने शादी कार्ड भी नहीं छपवाए थे। लॉकडाउन में खर्च कम हुआ। शादी भी सादगी के साथ हुई।

    कार्ड भी नहीं छपवा रहे, फिजूलखर्च भी रुका
    शादी के लगभग सभी मुहूर्त खत्म हो गए। ऐसे में अधिकतर लोगों ने शादियां टाल दी हैं। जो लोग शादी कर भी रहे हैं, उन्हें पहले प्रशासन से अनुमति लेकर मुश्किल से 15 लोग को बुलाना होगा। कई लोग शादी कार्ड भी नहीं छपवा रहे है। कार्ड का खर्च बच रहा है। डीजे, पॉर्टी, बैंड बाजा-धुमाल, सामूहिक भोज, बारात, माइक टेंट, कैमरे का भी खर्च बच रहा है।
    नियम के विरुद्ध शादी करने पर होगी एफआईआर
    कुरूद एसडीएम योगिता देवांगन, नगरी एसडीएम सुनील शर्मा ने बताया कि जिन लोगों ने आवेदन कर अपने विवाह की अनुमति मांगी है। उनमें ज्यादातर वे शादियां हैं, जो कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन 1 और लॉकडाउन 2 की अवधि में टाल दी गई थीं। विवाह के लिए महीनेभर में 291 आवेदन आए हैं। इनमें कुरूद में सबसे ज्यादा 225, नगरी में 16 और धमतरी में 50 आवेदन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नियम विरुद्ध शादी की सूचना पर तुरंत एफआईआर की जाएगी।
    ये शर्तें... सामूहिक भोज भी नहीं होगा

    • शादी समारोह में वर-वधु, पंडित सहित दोनों पक्षों के अधिकतम 15 व्यक्ति शामिल होंगे।
    • शादी समारोह के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य हैं।
    • सड़क पर बारात निकालने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। ध्वनि विस्तारक यंत्र की अनुमति नहीं होगी।
    • विवाह में सामूहिक भोज पर प्रतिबंध होने के साथ ही आतिशबाजी पर रोक है।
    • चार पहिया वाहन में ड्राइवर सहित 3 या 4 लोगों से ज्यादा को बैठाने की अनुमति नहीं है।
    • सैनिटाइजर और मास्क लगाना अनिवार्य है।
    • विवाह में शामिल होने वाले व्यक्तियों की जानकारी थाना, ग्राम व नगरीय निकाय में देना जरूरी हैं।
    • अस्वस्थ व्यक्ति को विवाह में शामिल नहीं किया जा सकता है।
    • दूसरे जिलों से आने वाले लोगों को संबंधित जिला प्रशासन से अनुमति लेकर आना होगा।
    • डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन का पालन कराने की बात भी लिखी गई है।

    नवंबर- दिसंबर के बाद करना होगा 3 महीने इंतजार
    ज्योतिषी पं. होमन शास्त्री के अनुसार 29 मई तक 5 और 30 जून तक 8 दिन मुहूर्त हैं। नवंबर में देवउठनी पर 26 व 27 को व दिसंबर में 1, 2, 6, 7, 8, 9 व 11 को मुहूर्त हैं। जिनके विवाह इन तिथियों में नहीं हो पाएंगे, उन्हें 3 माह बाद 22 अप्रैल 2021 तक रुकना पड़ेगा। 16 फरवरी 2021 को बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त के कारण विवाह हो सकते हैं।
    अगले साल तक शादी की तारीख टली
    शहर में ज्यादातर लोगों ने अब नए साल में शादी करने इस साल शादी को रद्द कर दिया है। होटल संचालकों एवं मैरिज लॉन के मालिकों के अनुसार सारी बुकिंग कैंसिल होने के बाद लॉकडाउन के बीच सरकार की गाइडलाइन के बाद भी मई, जून में लोग शादी नहीं करना चाह रहे है। ज्यादातर लोगों धूमधाम से अगले साल शादी करेंगे।



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    Ban on marriage in red zone but we allow 291 marriages in green zone with 10 conditions




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    पश्चिम बंगाल में फंसे जेएनवी के 25 बच्चे कवर्धा लौटे

    जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) उडियाकला में कक्षा 9वीं के 25 बच्चों को तीसरी भाषा की पढ़ाई के लिए इस साल बीरभूम (पश्चिम बंगाल) भेजा गया था, लेकिन लॉकडाउन के चलते एक महीने से बच्चे वहीं फंसे थे। गुरुवार को सभी बच्चे सकुशल लौट आए।
    बस के जरिए बच्चों को वापस कवर्धा लाया गया। जवाहर नवोदय स्कूल पहुंचने पर लोहारा की मेडिकल टीम ने बच्चों की स्क्रीनिंग की। सभी स्वस्थ पाए गए हैं। फिर भी एहतिहात के तौर पर सभी बच्चों को 14 दिन तक स्कूल में ही क्वारेंटाइन किया जाएगा। साथ ही शिक्षक व बस चालक भी क्वारेंटाइन में रहेंगे। बच्चों से उनके पालकों को मिलने की अनुमति नहीं है। आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई भी हो सकती है। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि बच्चों को बाहर रखने की बजाय कठिन प्रयास से स्कूल में ही रखने की अनुमति मिली है। पालकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी स्थिति में अपने बच्चों के मिलने के लिए स्कूल न आएं।

    बंगाली भाषा के अध्ययन के लिए भेजे थे बच्चों को
    देशभर में प्रत्येक जिले से बच्चे तीसरी भाषा के अध्ययन के लिए शाला प्रबंधन व शासन की ओर से अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं। इस साल जवाहर नवोदय विद्यालय उड़ियाकला के 25 बच्चे बंगाली भाषा के अध्ययन के लिए वीरभूम (पश्चिम बंगाल) भेजे गए थे। 18 मार्च को पेपर खत्म होने के बाद ये सभी वापस आने वाले थे, तभी लॉकडाउन होने से ये सभी 25 बच्चे वहीं फंस गए थे। इस बीच उनके परिजन बच्चों को वापस लाने मांग कर रहे थे।



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    25 children of JNV stranded in West Bengal returned to Kawardha




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    पहले 16 कोरोना मरीज मिले 23 दिन में अब इतने 5 दिन में ही

    राजधानी में रामनगर के बाद कुकुरबेड़ा में मिले कोरोना मरीजों को संक्रमण किससे लगा, यह अब तक साफ नहीं हो सका है। सरकारी एजेंसियों का मानना है कि दोनों को किसी न किसी से संक्रमण मिला, अर्थात शहर में कोरोना के कैरियर हो सकते हैं जो अभी प्रशासन की नजर में नहीं हैं। इसलिए राजधानी में एक बार फिर अलग-अलग एजेंसियों ने मिलकर मरीजों की खोज की बड़ी मुहिम छेड़ी है। डाक्टरों की दूसरी चिंता ये है कि प्रदेश में पहले 16 मरीज 23 दिन में अाए थे लेकिन अंति 16 मरीज पिछले 5 दिन में ही निकल गए हैं। उनका कहना है कि अब कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसलिए अब जांच में तेजी जरूरी हो गई है।
    प्रदेश में दूसरे राज्यों की तुलना में मरीज बहुत कम हैं। अभी तक किसी मरीज की मौत भी नहीं हुई है, इस लिहाज से छग सुरक्षित है। लेकिन बावजूद पिछले चार दिनों में 16 मरीज मिलने को अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। इस तरह, एक दिन में चार मरीजों का औसत है, हालांकि ये प्रवासी मजदूर हैं। लेकिन रायपुर के दो मरीजों को लेकर प्रशासन में भारी संशय है। रामनगर के बाद कुकुरबेड़ा का संक्रमण भी डाक्टरों की समझ से बाहर है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों ही युवक किसी न किसी कोरोना पॉजीटिव मरीज के संपर्क में आया हो। बिना संपर्क में आए कोई बीमार नहीं पड़ सकता। इसलिए तलाश जरूरी हो गई है।
    टीमें 800 घरों में पहुंचीं, डेढ़ हजार परिवारों की होगी जांच
    बिना स्त्रोत वाले दो मरीजों के मिलने के बाद कड़ियां जोड़ने के लिए हेल्थ विभाग की 20 टीमों ने केवल कुकुरबेड़ा कंटेनमेंट एरिया के 800 से ज्यादा घरों में सर्वे किया है। हेल्थ विभाग सर्वे के साथ कोरोना जैसे लक्षणों की सूरत में सैंपल भी कलेक्ट कर रही है। वहीं नगर निगम का स्वास्थ्य अमला पूरे इलाके को सेनिटाइज करने और ब्लीचिंग पाउडर छिड़काव के अभियान में जुटा है। हेल्थ विभाग ने डेढ़ हजार घरों तक सर्वे करने का टारगेट रखा है। इसके अलावा कंटेनमेंट जोन के बाहर भी संपर्क मिलने पर सर्वे सैंपल लिए जाएंगे। हेल्थ विभाग सर्वे के साथ लोगों के टेस्ट भी कर रहा है। एएनएम और मितानिनों की 20 टीमों में 60 हेल्थ वर्कर हैं।
    भास्कर नॉलेज : संक्रमण की तलाश इस तरह

    किसी भी मामले में जब कोरोना पॉजिटिव केस की पुष्टि हो जाती है। तो संबंधित शख्स से उसके एक से दो हफ्ते के बीच में आए लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जाती है। कई बार मरीज को याद नहीं रहता, इसलिए ऐसी स्थिति में उसके बताए लोगों के जरिए बाकी लोगों तक पहुंचा जाता है। कोरोना के नियंत्रण में ट्रेसिंग और ट्रेकिंग की अहम भूमिका होती है। इसके माध्यम से ही संपर्क में सभी लोगों तक पहुंचने की कोशिश होती है।

    ऐसी टीम

    सैंपल लेने वाली टीम करीब 12 (एक टीम में औसतन दो से तीन लोग)
    जानकारी जुटाने वाली टीम 20 (एक टीम में औसतन तीन लोग)

    गर्मी का असर दिखा तो नहीं
    पिछले एक हफ्ते में जिस तरह कोरोना के मरीज बढ़े हैं, उससे विशेषज्ञों की इस थ्योरी को धक्का पहुंचा है कि ज्यादा तापमान में कोरोना के वायरस मर जाएंगे। प्रदेश में रविवार को 14, सोमवार व मंगलवार को एक-एक मरीज मिला। ये मरीज दुर्ग, भिलाई व कवर्धा के हैं। सभी क्वारेंटाइन में दुर्ग में थे और वहां का तापमान 41 डिग्री से ज्यादा था। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान के भरोसे ज्यादा रहने के बजाय अब सोशल डिस्टेंसिंग के साथ जरूरी सावधानी अपनानी होगी।

    "शुरुआती दिनों की तुलना में नए मरीज तेजी से मिल रहे हैं। ऐसे में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। तापमान के भरोसे न रहें। बाहर से आने वाले मजदूर कोई समस्या न बनें, इसके लिए जांच जरूरी है।"
    -डॉ. आरके पंडा, चेस्ट विशेषज्ञ व सदस्य कोर कमेटी कोरोना सेल



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    First 16 corona patients were found in 23 days, now in only 5 days




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    47 दिनाें बाद जिले में खुले पंजीयन कार्यालय दो दिन में मिला 20 लाख रुपए का राजस्व

    जमीनों की रजिस्ट्री के लिए जिले के उप पंजीयक कार्यालय बुधवार यानी 6 मई से शुरू हो गए हैं। दो अलग-अलग दिनों में दफ्तर खुलते ही 67 लोगों ने जमीनों की रजिस्ट्री कराई। इससे 20 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। ये पक्षकारों को रजिस्ट्री कराने के लिए ई-अपाइंटमेंट लेना पड़ा था तब जाकर उनकी रजिस्ट्री हो पाई है।
    कोरोना वायरस के चलते ये दफ्तर 47 दिनों तक बंद थे। ग्रीन जोन जिला घोषित होने के बाद पक्षकारों को जमीनों की रजिस्ट्री कराने राहत दी गई है। इसमें भी अधिक रजिस्ट्री वाले जिले को ए, बी व सी केटेगरी में बांटा गया है। जिला पंजीयक अधिकारी दीपक मंडावी का कहना है कि अ वर्ग वाले उप पंजीयक प्रतिदिन खुलेंगे। बी वर्ग वाले सप्ताह में दो दिन एवं सी वर्ग वाले एक दिन खुलेंगे। बुधवार व शुक्रवार को दफ्तर खुलते ही 67 पक्षकारों ने रजिस्ट्री कराई है। रजिस्ट्री कराने के पूर्व सोशल डिस्टेंसिंग व हस्ताक्षर करने के पूर्व सैनिटाइजर कराया जा रहा है। वहीं दफ्तर खुलने के पूर्व कार्यालय को सैनिटाइज किया जाता है। साथ ही एक पंजीयन के समय एक-एक करके पक्षकारों को हस्ताक्षर के लिए बुलाया जाता है। इसके पूर्व उसे सैनिटाइज किया जाता है। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के कारण क्रेता और विक्रेता अपनी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे थे।



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    सीता नदी अभयारण्य से रेत का परिवहन, 2 ट्रैक्टर जब्त

    सीतानदी अभयारण्य से दो ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ पकड़े गए है। दोनों को ही निमयानुसार राजसात करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीतानदी रिसगांव परिक्षेत्र आरक्षित वन क्रमांक 254 दक्षिण एकवारी परिसर में स्थित चिखलीपानी नाला के बगैर अनुमति के अवैध परिवहन के लिए दो ट्रैक्टर ट्रॉली रेत भरी जा रही थी।
    दोनों ट्रैक्टर सीजी- 05 G 8501 व सीजी 23 0932 कई दिनों से सीता नदी अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत निकासी कर रहे थे। यह इलाका ओडिशा से लगा हुआ है। अवैध निकासी की जानकारी अफसरों को मिली तो मौके पर जाकर कार्रवाई की गई। सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व के वन अमला ने वन प्राणी संरक्षण नियम 1972 की धारा 27, 29 ,31 ,51 (1)एवं 52 और भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है। ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ जब्त कर रिसगांव परिक्षेत्र के मुख्यालय सांकरा में लाकर रखा गया है।
    रिसगांव परिक्षेत्र के अधिकारी भोपाल सिंह राजपूत ने रेत से भरे ट्रैक्टर को अपने निवास स्थान पर खड़ा कराया। इस संबंध में अफसरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर की सुरक्षा के लिए ऐसा किया गया। अपने निवास सिरसिदा में रखा हुआ है। संबंधित अफसर से पूछने पर उन्होंने साकंरा के रिसगांव क्षेत्र के कार्यालय में 7 मई की शाम ट्रैक्टर को लाया गया। अफसर का एक ट्रैक्टर को साकंरा कार्यालय में रखना एवं दूसरी गाड़ी को जब्त कर अपने निवास में रखना संदिग्ध है।
    आरोपी आदतन अपराधी
    सहायक संचालक सीतानदी अभयारण्य के अफसर राजस्त ने बताया की दोनों ट्रैक्टर को राजसात करने की सूचना न्यायालय नगरी को दी गई है। राजसात करने की कार्यवाही चल रही है। प्रकरण पीओआर 1426 / 16 दिनांक 21 /11 /2017 से संबंधित है। आरोपी जितेंद्र कुमार साहू पिता लक्ष्मीनाथ साहू ग्राम पोस्ट कोदांई तहसील रायघढ़ जिला नवरंगपुर ओडिशा का है। आरोपी आदतन अपराधी है। कार्रवाई में एसडीओ सीता नदी अभ्यारण के रायस्थ के नेतृत्व में वन परिक्षेत्र अधिकारी भोपाल सिंह राजपूत, अनिल पात्र वनपाल, रामकृष्ण साहू गेम गार्ड स्थानीय अग्नि रक्षक शामिल थे।



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    Sand transport from Sita River Sanctuary, 2 tractors seized




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    रेडक्रॉस वॉलंटियर्स ने 352 पंचायतों में मजदूरों को कोरोना से बचने बताए उपाय

    इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी ने विश्व रेडक्राॅस दिवस को मनाया। इस अवसर पर जिले के मनरेगा मजदूरों को सोशल डिस्टेंस का पालन कराकर कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया। जिले के सभी रेडक्रॉस वॉलंटियर्स ने लोगों को सोशल डिस्टेंस, फिजिकल डिस्टेंस बनाने, मास्क लगाकर काम करने, हाथ धोते रहने की शपथ दिलाई। इस दौरान तालियां बजाकर लोगों का उत्साहवर्धन किया। लोगों ने रेडक्रॉस वॉलंटियर्स का सम्मान तालियां बजाकर किया।
    शताब्दी समारोह में जिले के 352 ग्राम पंचायतों में 1 लाख 90 हजार 675 परिवार रोजगार गारंटी के तहत काम कर रहे हैं। पंचायतों में गांव के स्कूल व कालेज के वॉलंटियर्स ने जाकर सुबह से ही लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया। गांव में बाहरी व्यक्तियों को प्रवेश न देने, संदिग्ध व्यक्ति मिलता है, तो तत्काल पुलिस को सूचना देने कहा। रेडक्राॅस वालंटियर्स ने गीत, गजल, कविता, स्लोगन, कहानी, नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर लोगों में कोरोना से बचने जागरूकता अभियान चलाया। इसके अलावा मनरेगा मजदूरों को प्राथमिक उपचार करने के तरीके भी बताए। काम के दौरान बेहोश होने की स्थिति, हार्ट अटैक आने पर, मिरगी आने पर, दुर्घटना होने पर, सांप के काटने, हड्डी टूटने पर, ब्लीडिंग होने पर किस प्रकार से मरीजों को तत्काल सहायता दी जा सकती है, इसका डेमो कराया।
    मजदूरों ने रेडक्राॅस काउंसलर सत्यप्रकाश प्रधान, आकाश गिरि गोस्वामी, खोमनलाल साहू, अवधराम साहू, खूबलाल साहू, रूपेश कुमार नापित से प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण भी लिया। ग्राम पंचायत अर्जुनी एवं ग्राम पंचायत खपरी में माही नर्सिग कालेज के वॉलेंटियर्स दामिनी, शैल नेताम, खेमचंद साहू ने नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। इस अवसर पर जनपद पंचायत सीईओ अमित दुबे, गोविंद साहू, मूलसंजीवन, लोकेश बाघमार समेत पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित थे।
    कीप क्लैपिंग फॉर वॉलंटियर्स थीम पर मनाया शताब्दी वर्ष
    जिला संगठक प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि रेडक्रॉस के स्वयंसेवक असहाय एवं पीड़ित मानवता की सहायता के लिए काम करते आ रहे हैं। भारत में वर्ष 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के तहत इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी का गठन हुआ। तब से रेडक्रॉस के स्वयं सेवक विभिन्न प्रकार के आपदाओं में निरंतर निस्वार्थ भावना से अपनी सेवाए दे रहे हैं। 100 वर्ष पूर्ण होने पर विश्वव्यापी आपदा कोविड-19 के चलते इस वर्ष राष्ट्रीय रेडक्रॉस का थीम-कीप क्लैपिंग फाॅर वॉलेंटियर्स नारा दिया है। विश्व के लगभग 189 देश किसी एक विचार पर सहमत है, तो वह है रेडक्रास के विचार हैं। युद्ध के मैदान में घायल सैनिकों की चिकित्सा के साथ प्रकृति के महाविनाश के बीच फंसे लोगों की मदद के लिए हमेशा डटे रहते हैं।रेडक्रॉस को चार बार नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।



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    Red Cross volunteers told workers in 352 panchayats to avoid Corona




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    रेड जोन उज्जैन से 28 नाके पार कर 2 बाइक से 9 लोग आए, किसी ने नहीं रोका, 4 तो वापस भी भागे

    सरकारों और अफसरों का दावा है कि लॉकडाउन में राज्य व जिले की सीमाएं सील हैं। कोई नहीं आ जा सकता है लेकिन सच्चाई अलग है। यहां लोग रेड जोन से भी आ-जा रहे हैं लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। ऐसे ही 9 लोग मध्यप्रदेश के रेड जोन उज्जैन से करीब 800 किमी से दो बाइक पर शुक्रवार को धमतरी आए। 4 दिन में 28 से 30 नाके पार किए।
    मध्यप्रदेश से छतीसगढ़ में प्रवेश किया लेकिन किसी ने नहीं रोका। इन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी समझी और जिला अस्पताल जांच कराने आए। यहां से सभी को क्वारेंटाइन किया जा रहा था इसी बीच उज्जैन से 5 लोगों को छोड़ने आए 4 लोग वापस भाग गए। 5 लोगों को पथर्रीडीह में क्वारेंटाइन किया गया है। इनका सैंपल लेने करीब 3 घंटे तक अफसर इधर-उधर होते रहे। स्वास्थ्य विभाग ने किसी का सैंपल जांच के लिए नहीं लिया। ये सभी लोग उज्जैन से आए हैं वहां 220 कोरोना संक्रमित मरीज हैं।
    3 घंटे अस्पताल में बैठे, मौका मिलते ही 4 भागे

    जानकारी के अनुसार शहर के नवागांव वार्ड के करीब 5 लोग 16 मार्च को अपने रिश्तेदार के यहां उज्जैन गए थे। लॉकडाउन के कारण सभी 2 महीने से वहीं फंसे थे।ये गुरुवार को अपने 4 रिश्तेदारों के साथ धमतरी पहुंचे, जिला अस्पताल में 11 बजे आए। यहां शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके साहू ने सभी 9 लोगों की जांच की। चूंकि सभी रेड जोन उज्जैन से आए थे इसलिए डॉक्टर ने बगैर जोखिम उठाए तय नियम के मुताबिक सभी को पथर्रीडीह में 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन करने के निर्देश दिए। एंबुलेंस और जांच टीम के इंतजार में करीब 3 घंटे जिला अस्पताल में बैठे रहे। इस दौरान इन लोगों ने बार-बार डॉक्टर से घर में क्वारेंटाइन करने और उज्जैन से आए 4 लोगों को वापस घर जाने देने का अनुरोध किया। इस बीच 4 लोग भाग गए। 5 लोगों को 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन किया गया।

    इस तरह 4 दिन में किया 800 किमी सफर
    बीते 4 मई को उज्जैन के पिपली से 9 लोग 2 बाइक से निकले। गुरुवार को 11 बजे धमतरी आए। इस दौरान उज्जैन, देवास, हरदा, होशंगाबाद, बैतुल, सिवनी, कवर्धा, राजनांदगांव, बालोद होते धमतरी आए। करीब 800 किमी का सफर बाइक से तय किया। रास्ते में 28 से 30 नाके पड़े। राज्य की सीमा भी पार की।
    सभी स्वस्थ हैं, 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन किए

    जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. विजय फूलमाली ने बताया कि उज्जैन से 9 लोग बाइक से धमतरी आए हैं। जिला अस्पताल से 4 लोग भाग गए। इनकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई है। 5 लोगों को पथर्रीडीह में 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन किया है। फिलहाल सभी स्वस्थ हैं इसलिए किसी का सैंपल नहीं लिया है।

    कुरूद, पथर्रीडीह में कुल 73 लोग क्वारेंटाइन

    हॉट स्पॉट और अन्य प्रदेशों से आने वाले लोगों को क्वारेंटाइन करने कुरूद के पंचायत भवन व कुकरेल के पथर्रीडीह में सेंटर है। अभी कुल 73 लोग क्वारेंटाइन में है। कुरूद में 43 व पथर्रीडीह में 30 लोग हैं। ये सभी आंध, इंदौर, पंजाब, हरियाणा, पुणे, उज्जैन से आए हैं। कोटा से आए 9 छात्रों को भी कुरूद में क्वारेंटाइन किया है।
    4 साल का बच्चा बगैर मां के 14 दिन रहेगा क्वारेंटाइन
    उज्जैन से धमतरी आए 9 लोगों में 3 बच्चे भी हैं। यह सभी दो बाइक पर बेहद मुश्किल से बैठकर आए। इनमें से उज्जैन निवासी एक युवक, उसकी पत्नी, एक 8 साल का बच्चा और इनका एक साथी वापस लौट गए हैं। पथरीडीह में 5 लोगों को क्वारेंटाइन किया है। इनमें एक युवक, उसकी पत्नी, मां व बहन है। इनके साथ में चार महीने का बच्चा है। इनके अलावा 4 साल का भी है। यह बगैर मां के बुआ व दादी के साथ उज्जैन चला गया था। लौटने पर मां के मिलने की उम्मीद थी, अब 14 दिन और मां से दूर रहकर क्वारेंटाइन पूरा करना होगा। इन लोगों का कहना था कि वार्ड पार्षद से पूछा था तो उन्होंने आने के लिए कह दिया था। बताया था कि घर में ही रहना होगा। इसलिए आ गए।



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    9 people came from 2 bikes, crossed 28 blocks from Red Zone Ujjain, no one stopped, 4 even ran back




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    छोटेबेठिया क्षेत्र में चालीस पोल गिरे, बिजली सुधारने में लगेंगे 2 दिन

    अंचल में पिछले दो दिन से हो रही आंधी-बारिश के चलते, जहां किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं आंधी से क्षेत्र में बिजली व्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित हो है। आंधी के चलते छोटेबेठिया क्षेत्र में अब तक 40 से अधिक बिजली खंभे गिर चुके हैं। इसमें मरम्मत का काम चल रहा है। इस कारण कुछ इलाकों की बिजली अब भी बंद है। अंचल में पूरी तरह बिजली सप्लाई करने में अभी दो दिन का समय चल सकता है।
    क्षेत्र में विगत दो दिनों से क्षेत्र में आंधी के साथ हो रही बारिश से क्षेत्र के किसानों को काफी नुकसान हुआ है। वर्तमान में क्षेत्र में मक्के की फसल लगी हुई है और इस वर्षा ने इस फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। पहले ही किसान मक्के का रेट गिर जाने से परेशान थे। इस बारिश ने उनकी फसल खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। किसानों ने बताया खड़े मक्के की फसल में लगे दाने भींग जाने के कारण दानों में काला पन आ जाता है, जिस कारण कोचिए मक्का लेने से कतराते हैं। इसके चलते दाम और कम हो जाता है।
    बिजली विभाग को भी इस आंधी ने काफी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के करीब 40 खंभे गिरे हंै, जिसके चलते क्षेत्र के कई इलाकों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है। इन खंभों को बदलने और गांव-गांव की लाइन चालू करने में दिन-रात विभाग के कर्मचारी जुटे हुए हैं। आंधी से सबसे अधिक पोल बडग़ांव व छोटेबेठिया इलाके के गिर हैं।
    कर्मचारी सुधार कार्य में लगे : पखांजूर विद्युत विभाग के ईई रामकुमार चौहान ने कहा आंधी का सबसे बुरा प्रभाव बड़गांव और छोटे बेठिया क्षेत्र में रहा है। आंधी से गिरे बिजली पोल में अधिकांश इसी क्षेत्र में गिरे हैं। विभाग के पास पर्याप्त खंभे हंै। कर्मचारी सुधार कार्य में लगे हुए हैं। इसके बाद भी व्यवस्था दुरुस्त करने में दो दिन लग जाएंगे।



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    Forty poles fell in small area, it will take 2 days to improve electricity




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    हर माह घरेलू उत्पीड़न के 20 केस आते थे लेकिन लॉकडाउन में दस मामले ही आए

    सिंगारभाठ के सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू उत्पीड़न सहित अन्य केस आते हैं। यहां घरेलू उत्पीड़न और अन्य केस का निराकरण परामर्श के माध्यम से किया जाता है, लेकिन लाॅकडाउन की वजह से दूरस्थ जगह से आने वाले लोग पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। लाॅकडाउन की अवधि में घरेलू उत्पीड़न के 10 नए केस आए, जबकि सेंटर में हर माह 20 केस पहुंचते थे। लॉकडाउन खत्म होने के बाद केस बढ़ने की संभावना है।
    सखी वन स्टॉप सेंटर का संचालन मार्च 2017 से हो रहा है। यहां घरेलू हिंसा सहित अन्य केस से पीड़ित महिलाओं को कुछ माह का आश्रय दिया जाता है और संस्था के परामर्श केंद्र में उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाता है। अभी तक 504 प्रकरण आ चुके हैं, जिसमें 351 केस का निराकरण हुआ है और 153 केस लंबित है। 22 मार्च से लाॅकडाउन लगा है।
    फिर भी सखी वन स्टाॅप सेंटर कार्यालय खुल रहा है, लेकिन अभी शिकायत करने वालों के साथ पुराने केस का निपटारा कराने काफी कम लोग पहुंच रहे हैं। लाॅकडाउन के दौरान 32 केस के पक्षकारों को बुलाया गया था, लेकिन इसमें से सिर्फ 7 पक्षकार ही पहुंचे। 25 केस में परामर्श के लिए कोई पक्षकार नहीं पहुंचा। इसमेें पखांजूर, केशकाल, चारामा, भानुप्रतापपुर, कोरबा के लोगों को पहुंचना था। उन्हें मार्च और अप्रैल में बुलाया गया था, लेकिन दूरी अधिक होने व लॉकडाउन के चलते नहीं पहुंच पाए।
    आसपास गांव के लोग पहुंच रहे, फोन से ही समझाइश दे रहे : सखी वन स्टॉप की आईटी वर्कर प्रीति निर्मलकर ने कहा आसपास गांव के लोग जरूर पहुंच रहे हैं, लेकिन दूरस्थ गांव से पहुंचने वाले लोग लाॅकडाउन की वजह से नहीं पहुंच पा रहे हैं। फिर भी उन्हें फोन से ही उचित समझाइश दी जा रही है। शहर और आसपास गांव के लोग ही सेंटर के परामर्श केंद्र में अपनी समस्या का निराकरण कराने पहुंच रहे हैं।
    अब सिर्फ 2 को ही अनुमति
    किसी भी पक्ष में अब दो ही लोगों को बुलाया जा रहा है। पहले किसी मामले में काफी सारे लोग सखी वन स्टॉप सेंटर पहुंचते थे, लेकिन अब दो ही लोगों को पहुंचना है। इसमें लोगों को मास्क लगाकर काम करना है और सैनिटाइजर भी कार्यालय में रखा गया है। सखी सेंटर पहुंचने वाले लोगों का हाथ सैनिटाइजर से धुलाया जा रहा है।



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    ट्रक से 210 किमी तक लाने के वसूले 8 साै, फिर रास्ते में छोड़ा

    आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से बड़ी संख्या में यहां के मजदूरों का वापस आना जारी है। सरकार इन्हें वापसी के लिए साधन मुहैया कराने का दावा कर रही है। लेकिन असलियत कुछ और बयां कर रही है। इन्हें आने के लिए बस की कोई व्यवस्था नहीं है। ये लोग सामान के साथ किसी तरह ट्रकों और पिकअप वाहन में बैठकर यहां पहुंच रहे हैं। इसमें भी इन मजदूरों से मनमाना किराया भी वसूल किया गया है। गुरुवार रात को आंध्रप्रदेश के तेलीपाका से 1 ट्रक, 2 मैजिक वाहन और 2 पिकअप वाहन से नकुलनार लौटे 164 मजदूरों से हर व्यक्ति का 8 सौ रुपए किराया वसूला गया, जबकि तेलीपाका से नकुलनार की दूरी करीब 200 किलोमीटर ही है।
    88 मजदूर 1 ट्रक और 2 मैजिक वाहन से नकुलनार पहुंच गए थे जिन्हें प्रशासन ने पोंदुम के क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया गया। लेकिन बाकी 76 मजदूरों को 2 पिकअप वाहन के चालक कुछ किलोमीटर पहले ही जंगल में छोड़कर वापस चले गए। ये 76 मजदूर रातभर नकुलनार के अासपास जंगल में ही भटक रहे थे। सुबह ही इन मजदूराें काे ठिकाना मिल सका और इन्हें कुआकाेंडा के पाेटाकेबिन-2 में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर में शिफ्ट किया गया। ये सभी मजदूर टेटम, कोटरीपाल और ऐटेपाल गांव के हैं जो आंध्रप्रदेश में मजदूरी करने गए थे।

    76 मजदूरों ने जंगल में बिताई रात, सुबह सिर पर सामान लादकर पैदल गांव तक आए

    आसपास के जंगल में भटक रहे टेटम पंचायत के गंगा, काेसा, पांडू, मंगलू और साेमड़ू ने बताया कि ट्रक वाले ने हर व्यक्ति का किराया 8-8 साै रुपए वसूल किया है। इसके बाद भी उन्हें रास्ते पर ही छाेड़ दिया। जहां से उन्हें सिर पर सामान काे लादे पैदल ही गांव तक आना पड़ा। रात में हितावर के हुर्रापारा के जंगल में उन्होंने रात बिताई और सुबह उन्हें ठिकाना मिल सका। तहसीलदार विद्याभूषण साव ने बताया कि इन सभी मजदूरों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था कराई गई है। रात में कोंटा बार्डर पार करने पर रोक लगाई जाएगी।
    सूचना मिलने पर कोंटा बॉर्डर भेजी जा रही बसें
    कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि मजदूरों को सीधे दूसरे राज्यों से वापस लाने शासन स्तर से ही निर्णय लिया जा रहा है। वहां से जो भी निर्देश मिलेंगे कार्रवाई होगी। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना की सरकारें व ठेकेदार ट्रकों व पिकअप वाहनों में मजदूरों को कोंटा बॉर्डर पर लाकर छोड़ रहे हैं। सूचना मिलने पर दंतेवाड़ा से बसें भेजी जा रही हैं। कोंटा बॉर्डर पर तहसीलदार व एसडीएम यह देख रहे हैं कि ये किन जिलों के हैं। पास के साथ मजदूरों को उन्हीं गाड़ियों में दंतेवाड़ा भेज रहे हैं।



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    8 sacks recovered from the truck for 210 km, then left on the way




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    एमपी-छग बॉर्डर पर डालामौहा में लगाए बैरियर, 24 घंटे खुद ग्रामीण दे रहे पहरा

    मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव की संख्या 3 हजार से अधिक हो चुकी है। ऐसे में मध्यप्रदेश-छग बॉर्डर से लगे कबीरधाम जिले के ग्राम डालामौहा में ग्रामीणों ने बैरियर लगा दिया है, जहां वे 24 घंटे पहरा देते हैं। ताकि मध्यप्रदेश की ओर से कोई आ न सके। शुक्रवार को पंडरिया ब्लॉक के गांवों में संक्रमण से बचाव की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने बैरियर पर गाड़ी रोकवाई।
    कलेक्टर ने जब ग्रामीणों के बनाए बैरियर को देखा, तो गाड़ी रोककर उनके हाल जानने लगे। उन्होंने पहरा दे रहे ग्रामीणों के काम को सराहा। बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि वायरस के रोकथाम के लिए गांव के बाहर स्वयं से बैरियर लगाए हैं। यह मार्ग मध्यप्रदेश को जोड़ती है, इसलिए अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को गांव की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। इसके बाद कलेक्टर शरण ने अंचल के ग्राम कुकदूर, कामठी, तेलियापानी, भाकुर, पोलमी का निरीक्षण किया। यहां बनाए गए क्वारेंटाइन सह राहत शिविरों का अवलोकन किया।
    144 गांवों में क्वारेंटाइन सेंटर: दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। संक्रमण से बचाने के लिए पंडरिया ब्लॉक के 144 गांवों में सभी शासकीय भवन, स्कूल, आश्रम-छात्रावास को क्वारेंटाइन सेंटर सह राहत शिविर बनाया गया है। सभी क्वारेंटाइन सेंटरों में भोजन की व्यवस्था के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही सरपंच और ग्राम पटेल को भी जिम्मेदारी दी गई है।



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    Barrier installed in Damaha on MP-Chg border, guarded by villagers giving themselves 24 hours




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    छूट मिली तो 6 दिन में हो गए 12 से ज्यादा हादसे

    लॉकडाउन में जब लोगों का घर से निकलना बंद हुआ तो सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आ गई थी, लेकिन जैसे ही 20 अप्रैल के बाद हल्की छूट मिलने लगी और लॉकडाउन 2.0 खत्म होते तक थोड़ी ज्यादा रियायतें मिली तो दुर्घटनाओं के आंकड़े भी बढ़ने लगे हैं।
    पिछले 6 दिन में जिले में 15 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें गमावाड़ा में एक ग्रामीण व जारम की घटना में एक महिला की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। इन आंकड़ों ने ट्रैफिक विभाग को एक बार भी परेशानी में डाल दिया है, जबकि लॉकडाउन के वक्त 21 अप्रैल तक सिर्फ एक ही सड़क दुर्घटना हुई थी। अब हर दिनघटनाएं हो रही हैं।
    इसलिए बढ़ रहे हादसे

    लॉकडाउन 1 और 2 में बंिदश होने के कारण लोग घरों में बंद थे लेकिन लॉकडाउन 3 में छूट मिलने के बाद लोग बाहर निकल रहे है और इन कारणों से हादसे हो रहे है।

    • तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना।
    • गाड़ी का किसी और कारण से अनियंत्रित होना।
    • शराब पीकर गाड़ी चलाना।

    1 से 6 मई के बीच हुईं सड़क दुर्घटनाओं का ब्योरा
    एक मई 2020- मई के पहले ही दिन दो जगह सड़क दुर्घटना में फूलनार के मंगलूराम व चितालूर की चैती गंभीर रूप से घायल हुई।
    2 व 4 मई 2020 - दो मई को चितालूर के बामदेव व 4 तारीख को हीरानार के साधुराम सड़क दुर्घटना में घायल हो गए।
    5 मई 2020 - एक ही दिन में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 3 दुर्घटनाओं में 3 लोग घायल हुए। इनमें बालूद में हुई सड़क दुर्घटना में हिड़मा, मारेंगा रोड़ में हुई दुर्घटना में सुखदेव व घोटपाल नागुल चौक में हुई घटना में अजय घायल हुआ है।
    6 मई 2020- इस दिन 4 दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें ग्रामीण की मौत हो गई। वहीं लच्छू घायल हो गया। बालूद में सोमाराम जबकि बचेली में हुई घटना में रजनीश नवनीत जार्ज सहित दो युवक घायल हुए। बागमुंडी पनेडा में हुई घटना में भी एक युवक घायल हुआ।



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    More than 12 accidents occurred in 6 days if discounted




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    27 मई हर तरह के कार्यों के लिए शुभ क्योंकि इस दिन गुरुपुष्य योग, 27 नक्षत्रों में यह आठवां और सर्वश्रेष्ठ

    इस महीने के आखिरी गुरुवार को पुष्य योग का बेहद महत्वपूर्ण योग बन रहा है। ज्योतिष विज्ञान में इस योग की बहुत महत्ता बताई गई है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस योग के समय किए गए कार्यों में सफलता मिलती है और शुभता में वृद्धि भी होती है। साथ ही व्यक्ति को सकारात्मक फलों की प्राप्ति होती है।
    ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के मुताबिक इस तरह का संयोग बहुत कम ही बनता है। इस बार यह संयोग 27 मई की सुबह 5.57 बजे से 28 मई (गुरुवार) की सुबह 5.53 बजे तक रहेगा। यह पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र है, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र के साथ गुरुवार का दिन होना इसके महत्व को और भी बढ़ा देता है। माना जाता है कि इस नक्षत्र में जो भी कार्य किए जाते हैं, उसका परिणाम बेहतर ही होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति उदार, सहनशील और परोपकारी होते हैं। धर्म-कर्म में इनकी गहरी आस्था होती है, लेकिन बचपन में इन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता है।
    राहत देने वाला होगा: अप्रैल का महीना संकट भरा रहा है। गुरुपुष्य और गुरु और शनि का वक्री होना देश दुनिया के लिए कुछ राहत देने वाला हो सकता है। कई अटकी योजनाएं और कार्य मई में बनेंगे। चिकित्सा के क्षेत्र में भी सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के परिणाम देखने को मिल सकते हैं। लोगों में क्षमताओं को बढ़ाने का जोश और उत्साह बढ़ेगा।

    गुरु को मंत्री का दर्जा, मिलेंगे स्थायी फल

    पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में श्रेष्ठ माना जाता है, जो स्थायी होता है। अर्थात इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में स्थायित्व का भाव मौजूद होता है। यदि आपको कुछ ऐसे काम करने हैं, जिनमें आप जल्द से बदलाव की इच्छा न रखते हैं और उसकी स्थिरता चाहते हों तो इस नक्षत्र में कार्य करना बेहतर होगा। साथ ही गुरु (बृहस्पति) को ग्रहों में मंत्री का स्थान प्राप्त है और गुरु की दृष्टि को गंगाजल के समान पवित्र भी माना गया है।
    गुरुपुष्य में ये कर सकते हैं

    यात्रा का आरंभ करना, विद्या ग्रहण करना, नए शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेना हो या फिर गुरु से मंत्र शिक्षा पाना, आध्यात्मिक उन्नति, धार्मिक अनुष्ठान, राजकीय कार्यों में सफलता दिलाने के साथ ही यह नक्षत्र नेतृत्व की संभावना को बढ़ाता है। इस योग को अपनाने से पूर्व चंद्रमा कमजोर नहीं होना चाहिए। साथ ही गुरु शुक्र ग्रहों का अस्त होना, ग्रहण काल, श्राद्ध पक्ष इत्यादि पर भी ध्यान देने के बाद ही इस योग को ग्रहण करना लाभदायक होता है।

    इस योग में हर कार्य शुभ सिवाय विवाह करने के
    पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है जो स्थायित्व प्रदान करने वाला ग्रह है। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक गुरूवार के दिन जब पुष्य नक्षत्र आता है तब बड़ा ही उत्तम योग बनता है। विवाह को छोड़कर इस योग में हर शुभ कार्य किए जा सकते हैं। गुरू स्वर्ण, धन एवं मांगलिक कार्यों के कारक हैं। इसलिए गुरू पुष्य योग में सोना, वाहन अथवा स्थायी संपत्ति खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो भी धन अर्जित करते हैं वह स्थायी रहता है। मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र को एक शाप मिला है इसलिए इस नक्षत्र में विवाह कार्य नहीं किया जाता है। पुष्य नक्षत्र आमतौर पर शुभ होता है लेकिन शुक्रवार के दिन अथवा बुधवार के दिन यह नक्षत्र हो तब कोई नया काम कभी नहीं करना चाहिए और न ही खरीदारी करनी चाहिए।



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    May 27 is auspicious for all kinds of tasks because on this day Gurupusya Yoga, it is the eighth and best among the 27 Nakshatras




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    धान की प्रोत्साहन राशि इसी माह से, प्रदेश में आज से हफ्ते में 2 दिन का पूर्ण लॉकडाउन

    लॉकडाउन में भूपेश सरकार प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ी राहत देते हुए धान की अंतर राशि इसी महीने यानी मई में ही देने का फैसला किया है। ये राशि सीधे खाते में जाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि पहली किस्त के रूप में सरकार किसानों को 350 रुपए देगी। इससे 18 लाख 34 हजार किसान लाभान्वित होंगे। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत दी जाने वाली इस राशि के लिए बजट में 6100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस बीच शनिवार और रविवार को प्रदेश में पूर्ण लॉकडाउन रहेगा। दाे दिन सिर्फ सब्जी, दूध-दवा, पेट्रोल ही मिलेगा।
    राज्य सरकार ने किसानों से 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की दर से धान की खरीदी का वादा किया है, लेकिन केन्द्र की रोक के कारण ऐसा नहीं कर पाई। किसानों को सामान्य धान के लिए 1815 रुपए और ग्रेड-1 के लिए 1835 रुपए की दर से भुगतान करना पड़ा। इस हिसाब से किसानों को 665 और 685 रुपए की अंतर राशि दी जाएगी। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे का कहना है कि लॉकडाउन के कारण प्रदेश में उद्योग-व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है, ऐसे में अंतर राशि मिलने से किसानों को आगामी खेती के काम को सुचारू रूप से जारी रखने में भी मदद मिलेगी। धान की दूसरी किस्त जुलाई-अगस्त में दी जाएगी।
    मजदूरों को वापस लाने सरकारबसों की भी कर रही व्यवस्था
    लॉक डाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों की वापसी के लिए भूपेश सरकार स्पेशल ट्रेनों के साथ ही बसों की भी व्यवस्था कर रही है। केंद्र सरकार की एडवायजरी के तहत मजदूरों की वापसी के बाद उन्हें क्वारेंटाइन में रखने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में सेंटर भी बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ के करीब सवा लाख मजदूर दूसरे राज्यों में काम के लिए गए थे वे वहीं पर फंसे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। छत्तीसगढ़ के 8 स्टेशनों बिलासपुर, चांपा, विश्रामपुर, जगदलपुर, भाटापारा, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में श्रमिकों की स्पेशल ट्रेनों के स्टापेज को प्रस्तावित किया है।

    अब 9 के बजाए 25 लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, ताकि रोजगार बढ़ सके
    राज्य में पहली बार 25 लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी का निर्णय लिया गया है। वन मंत्री मो. अकबर ने बताया कि राज्य में साल 2018 तक मात्र 7 लघु वनोपजों की खरीदी की जाती थी। सरकार ने बड़ी संख्या में वनवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने लघु वनोपजों की संख्या बढ़ाकर 23 कर दी। अब गिलोय और भेलवा की भी खरीदी समर्थन मूल्य पर करने का निर्णय लिया गया है। अब राज्य में कुल 25 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी। बता दें कि पहले खरीदी की जाने वाली 23 लघु वनोपजों में साल बीज, हर्रा, ईमली बीज सहित, चिरौंजी गुठली, महुआ बीज, कुसुमी लाख, रंगीनी लाख, काल मेघ, बहेड़ा, नागरमोथा, कुल्लू गोंद, पुवाड़, बेल गुदा, शहद तथा फूल झाडू, महुआ फूल (सूखा), जामुन बीज (सूखा), कौंच बीज, धवई फूल (सूखा), करंज बीज, बायबडिंग और आंवला (बीज सहित) तथा फूल ईमली (बीज रहित) की खरीदी की जा रही थी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा कुसुमी लाख, रंगीनी लाख और कुल्लू गोंद की खरीदी में समर्थन मूल्य के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।



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    Promotion of paddy from this month, complete lockdown of 2 days a week from today in the state




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    कोरोना मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 29.6%, छत्तीसगढ़ में यह 62.2 फीसदी

    कोरोना के मामले में अब तक छत्तीसगढ़ कई राज्यों के मुकाबले काफी राहत में है। जहां देश में कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की दर 29.36 फीसदी है, छत्तीसगढ़ में यह दोगुनी से ज्यादा यानी 62.29 फीसदी है। महत्वपूर्ण यह भी है कि देश में कोरोना से मृत्यु दर 3.6 फीसदी है, जबकि छत्तीसगढ़ में अभी कोरोना से मृत्यु तो दूर, कोई मरीज गंभीर हालत में भी नहीं पहुंचा है। यही नहीं पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, झारखंड व ओडिशा से कम मरीज हैं। प्रदेश में कोरोना के 61 मरीज मिले हैं। इनमें 85 फीसदी से ज्यादा मरीजों में बीमारी का कोई लक्षण नहीं था। फेफड़े में इंफेक्शन नहीं होने के कारण ज्यादातर मरीज छह से 16 दिनों में डिस्चार्ज हो गए।
    एम्स में 21 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं 38 मरीज स्वस्थ हो गए हैं। इनमें 10 को छोड़कर बाकी का क्वारेंटाइन भी पूरा हो गया है। प्रदेश में कोरोना का पहला मामला 18 मार्च को आया था। इसके बाद 31 मार्च तक नौ मरीज हो गए थे। 30 अप्रैल तक 42 मरीज हुए। वहीं 8 मई तक मरीजों की कुल संख्या 61 पहुंच गई है। इनमें दो मरीज झारखंड के पलामू के हैं, जो रिपोर्ट आने के पहले चले गए थे। आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि मार्च के 13 दिनों में नौ, अप्रैल में 33 मरीज व मई में पिछले आठ दिनों में 19 मरीज मिले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कटघोरा में पहला केस 4 अप्रैल को आया। वहां केवल 10 दिनों में 27 मरीज हो गए थे। मरीजों में ऐसी वृद्धि किसी जिले में नहीं हुई थी। दरअसल एक 16 वर्षीय बालक के कारण बाकी कोरोना से संक्रमित हुए। रायपुर की बात करें तो 18 मार्च को पहला मरीज व अब तक का आखिरी मरीज 4 मई को आया है। 14 अप्रैल के बाद कटघोरा में कोई नया मरीज नहीं आया है। यह बड़ी राहत की बात है। 3 मई को दुर्ग में आठ व कवर्धा में छह मरीज एक साथ मिले। ये प्रवासी मजदूर हैं। इसके बाद 6 मई को भिलाई की एक महिला कोरोना से संक्रमित मिली। सूरजपुर में छह व कोरिया में दो मरीज 30 अप्रैल को मिले थे।

    28 में 21 जिले कोरोना फ्री
    प्रदेश के 28 में 21 जिले कोरोना फ्री हैं। जिन जिलों में मरीज मिले हैं, वे रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा, बिलासपुर, कोरबा, सूरजपुर व कोरिया जिला है। रायपुर में सात, कोरबा में 28, दुर्ग में 10, कवर्धा में छह, सूरजपुर में छह, कोरिया में दो, राजनांदगांव, बिलासपुर में एक-एक मरीज मिला है। इनमें केवल दुर्ग के नौ, सुरजपुर के पांच, कवर्धा के छह व रायपुर के एक मरीज का इलाज एम्स में चल रहा है। बाकी जिलों में संदिग्ध तो मिले हैं, लेकिन कोई मरीज नहीं मिला। शुक्रवार को 645 सैंपलों की रिपोर्ट आई, जो नेगेटिव रहे। 1061 सैंपलों की जांच चल रही है। इसमें एम्स में 387, नेहरू मेडिकल कॉलेज में 97, जगदलपुर में 515 व टीबी रिसर्च सेंटर रायपुर में 62 सैंपल की रिपोर्ट आना बाकी है।

    ठीक होने की दर 100 फीसदी- नागरकर
    "छत्तीसगढ़ में कोरोना के मरीजों के स्वस्थ होने की दर फिलहाल 62 फीसदी से ज्यादा है। कुछ दिनों पहले यह 100 फीसदी थी। जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, वे सभी खतरे से बाहर है। ऐसे में उम्मीद है कि वे जल्द स्वस्थ होकर घर चले जाएंगे। किसी मरीज के फेफड़े में इंफेक्शन न होना बताता है कि उनके शरीर में वायरल लोड कम था। इसलिए वे गंभीर भी नहीं हुए।"
    - डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर एम्स



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    National rate of recovery of corona patients 29.6%, 62.2% in Chhattisgarh




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    दो राज्यों में समन्वय के अभाव में बिहार के 12 प्रवासी रातभर भूखे-प्यासे परेशान रहे

    दो राज्यों की पुलिस के सहयोग के अभाव में बिहार के 12 लोग रात भर भूखे प्यासे परेशान रहने पर मजबूर हाे गए। ज्ञात हो कि जामताड़ा जिले के महेशमुंडा चौक स्थित झारखंड बंगाल बॉर्डर पर बंगाल तथा झारखंड पुलिस के बीच आपसी समन्वय के अभाव का खामियाजा बिहार से 12 यात्रियों को रात भर भूखे प्यासे झेलना पड़ा। सुबह लगभग 10:30 बजे जामताड़ा जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सभी यात्रियों का थर्मल स्कैनिंग के उपरांत झारखंड होते हुए बिहार भेजा गया। यात्रियों ने बताया कि वे लोग कोलकाता से बिहार के समस्तीपुर जिला के रोसड़ा जा रहे हैं। सोमवार रात को वे लोग बंगाल बॉर्डर क्रॉस कर झारखंड सीमा में प्रवेश करने लगे, तभी झारखंड पुलिस ने यह कहते हुए रोक दिया कि बंगाल पुलिस झारखंड के लोगों को प्रवेश करने नहीं देती है, इसलिए हम लोग भी किसी को झारखंड में प्रवेश करने नहीं देंगे।

    आप लोग पुनः वापस बंगाल लौट जाएं। जब वे लोग पुन: लौटकर बंगाल सीमा में जाने लगे तो तो बंगाल पुलिस ने यह कह कर रोक दिया की आप लोग एक बार बंगाल सीमा से निकल चुके हैं। इसलिए अब आपको दुबारा प्रवेश करने नही दिया जाएगा। जिस कारण रात भर सभी यात्री कभी बंगाल सीमा तो कभी झारखंड सीमा पर भटकते रहे। सुबह जब जामताड़ा डीडीसी को इस बात की जानकारी मिलने पर उन्होंने यात्रियों के कागजातों की जांच करवाने के बाद स्कैनिंग तथा वाहन को सैनिटाइज करवाने के बाद बिहार भेज दिया। वहीं इस संबंध में पूछे जाने पर मौके पर मौजूद पुलिस अवर निरीक्षक रामदुलाल नंदी ने बताया कि सभी को बिहार भेजा जा रहा है।



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    Due to lack of coordination in two states, 12 migrants from Bihar remained hungry and thirsty overnight




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    सूरत से 1200 मजदूर पहुंचे धनबाद, श्रमिकों ने कहा- ट्रेन में टिकट के पैसे देने पड़े

    सूरत से 1200 मजदूरों को लेकर एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन बुधवार सुबह धनबाद पहुंची। सभी मजदूरों की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाते हुए स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद उनके संबंधित जिलों के लिए बसों से रवाना कर दिया गया। इस दौरान मजदूरों ने बताया कि उन्हें ट्रेन में टिकट खरीदकर बैठना पड़ा। इधर, धनबाद में पुलिस-प्रशासन लॉकडाउन को सख्ती से लागू कराने में जुटी हुई है। हालांकि कई जगहों पर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करते हुए भी नजर आए।

    बुधवार काे सूरत से स्पेशल ट्रेन संख्या से प्रवासी श्रमिक सुबह धनबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे। स्पेशल ट्रेन में कुल 22 बाेगियां थी, जिसमें विभिन्न जिलाें के प्रवासी मजदूर थे। इधर, पुलिस की सख्ती जारी है। सड़क पर बिना वजह निकलने वालों से जुर्माना वसूला गया।

    सूरत से धनबाद पहुंचे मजदूरों ने बताया कि उन्हें टिकट खरीदने में 720 रुपए खर्च करने पड़े।

    इधर, इलाहाबाद और रांची से अलग-अलग ट्रेन से मंगलवार को 46 श्रमिक धनबाद पहुंचे थे। 16 श्रमिक प्रयागराज से धनबाद पहुंचे, जबकि 30 मजदूर रांची से आएं। गाेल्फ ग्राउंड में सभी की मेडिकल जांच कराई गई। जांच के बाद उन्हें हाेम क्वारैंटाइन की स्याही लगाकर बस से घर भेज दिया गया।

    रणधीर वर्मा चौक पर वाहनों की जांच करती पुलिस।


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    ट्रेन का टिकट दिखाता श्रमिक।




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    जिले का दूसरा कोरोना संक्रमित भी हुआ स्वस्थ, प्रशासन ने 24 दिनों तक होम क्वारैंटाइन में रहने को कहा

    जिले का दूसरा कोरोना संक्रमित मरीज भी स्वस्थ्य हो गया है। महिला मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बुधवार शाम को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने विदाई दी। महिला मरीज का बदडीहा स्थित एएनएम हॉस्टल में बनाए गए आइसोलेशन सेंटर में इलाज चल रहा था। मौके पर डीसी राहुल कुमार सिन्हा, एसपी सुरेंद्र कुमार झा, सिविल सर्जन डॉक्टर अवधेश कुमार सिन्हा सहित कई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

    इस दौरान डीसी ने वस्त्र, बुके और फल, तथा एसपी ने कुरान भेंट किया। महिला ने विदाई के दौरान उपस्थित सभी लोगों का आभार जताया। कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद महिला ने कहा कि 23 दिनों तक स्वास्थ्य कर्मियों ने उनकी देखभाल की। इस पल को वो जीवनभर नहीं भूल पाएंगी। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि लॉकडाउन का पालन करें और जिन्हें बुखार या अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं वे तत्काल चिकित्सक से राय लें और खुद को होम क्वारैंटाइन करें, ताकि आपका परिवार स्वस्थ रह सके।

    24 दिनों तक होम क्वारैंटाइन में रहेगी
    डीसी राहुल कुमार सिन्हा ने कहा कि 55 वर्षीय महिला का रिपोर्ट 24 घंटे में दूसरी बार निगेटिव आयी। अब गिरिडीह जिला ग्रीन जोन में आ गया है। कहा कि महिला को बुधवार को उनके घर जेहनाडीह भेजा जा रहा हैं। उन्हें अपने घर मे 24 दिनों तक क्वारैंटाइन में रहने के लिए कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी दूसरे प्रदेश से प्रवासी मजदूरों का आने का सिलसिला जारी है। इस वजह से अभी सतर्क रहने की जरूरत है। कहा कि गिरिडीह पहुंचने वाले प्रवासी मजदूरों का सैम्पल लेने के बाद होम क्वारैंटाइन में रहने की सलाह दी जा रही है। बिना सैम्पल लिए किसी को भी घर जाने की इजाजत नही दी जा रही है।

    बेटे के संपर्क में आने के बाद हुई थी पॉजिटिव
    कोरोना की जंग जीतने वाली धनवार प्रखंड के जेहनाडीह की महिला का बेटा पहले कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। 23 मार्च को वह मुंबई से लौट था। 11 अप्रैल को कोडरमा में जांच के बाद वह पॉजिटिव पाया गया था। उसके बाद गिरिडीह जिला प्रशासन के द्वारा जेहनाडीह गांव को सील कर दिया गया था और उसके संपर्क में आये परिवार का सैम्पल जांच के लिए भेजा गया था। 13 अप्रैल को उसकी मां की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी थी। 5 और 6 मई को कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद जिला प्रशासन के द्वारा उन्हें घर भेज दिया गया।



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    महिला ने स्वस्थ्य होने के बाद संदेश दिया कि लॉकडाउन का पालन करें और जिन्हें बुखार या अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं वे तत्काल चिकित्सक से राय लें और खुद को होम क्वारैंटाइन करें, ताकि आपका परिवार स्वस्थ रह सके।




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    अगले 24 घंटे में गरज के साथ होगी बारिश, पूरे सप्ताह छाए रहेंगे बादल

    बुधवार को दिन में बादलों के छाए रहने और हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से गर्मी से राहत मिली है। दिन के तापमान में एक और रात में दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का मानना है कि पूरे सप्ताह बादल छाए रहेंगे। अगले 24 घंटे दिन में तेज हवा के साथ बादल गरजेंगे और बारिश होगी।


    इधर, 10 मई तक लगातार तेज बारिश और बिजली चमकने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार अफगानिस्तान के ऊपर एक किमी ऊंचाई पर पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ लाइन के रूप में सक्रिय है। इससे बंगाल की खाड़ी के ऊपर मजबूत चक्रवात बना हुआ है। इन दोनों के बीच से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है, जिससे आने वाले 24 घंटे क्षेत्र में 20 किमी प्रति घंटा से अधिक रफ्तार से तेज आंधी चलेगी और ओलावृष्टि हो सकती है।



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    बाड़ेदा के 211 ग्रामीणों को दिया 10-10 किग्रा चावल

    कोरोना वायरस से बचाव को लेकर किए गए लॉक डाउन में गरीबों को राहत पहुंचाने के लिए बुधवार को फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के सुदूरवर्ती जंगलों के बीच में बसे गाँव बाड़ेदा में 211 गरीब ग्रामीणों के बीच 10-10 किलोग्राम चावल विधायक रामदास ने एमओ सिद्धेश्वर पासवान के उपस्थिति में वितरण किया। इससे ग्रामीणों के चेहरे में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस संबंध में विधायक रामदास सोरेन ने बताया कि लॉक डाउन में गरीबों को काफी मुश्किल हो रही है। ऐसे सुदूरवर्ती गाँव के ग्रामीणों को पिछले सरकार ने राशन कार्ड से वंचित कर दिया था। जिससे गरीबों को राशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। जबकि मुसाबनी प्रखंड में कुल 3,346 ग्रामीणों ने राशन कार्ड बनवाने को लेकर ऑन लाईन पंजीकरण कराया है। वहीं फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के 211 ग्रामीणों ने भी राशन कार्ड बनाने हेतु पंजीकरण कराया है।

    लेकिन इन लोगों को राशन की सुविधा नहीं मिल रही थी। इस अवसर पर विधायक रामदास सोरेन के सौजन्य से 100 ग्रामीणों को फेस मास्क और छोटे छोटे बच्चों को बिस्कुट का भी वितरण किया गया। चावल वितरण कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रखंड प्रमुख पान मुनी मुर्मू,झामुमो नेता कान्हू सामंत, के बी फरीद,प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन,जिप सदस्य बाघराय मार्डी,जिला उपाध्यक्ष सागेन पूर्ति,सोमाय सोरेन,गोरांगो माहाली,कानू टुडू,राम चन्द्र मुर्मू,रविन्द्र नाथ मार्डी,पंसस पावर्ती सिंह,सुनील किस्कु,लखी हाँसदा,सुनील हाँसदा,प्रियनाथ बास्के,गोविंद बास्के सहित ग्रामीण उपस्थित थे।



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    211 villagers given 10-10 kg rice to Badeda