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लॉकडाउन में शराब की दुकान खोलने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को भेजा नोटिस, 12 तक मांगा जवाब

(संजीव शर्मा)।हाईकोर्ट ने कोविड: 19 के संक्रमण के चलते लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में शराब की दुकानों को खोलने व शराब की बिक्री करने के मामले में राज्य सरकार को शपथ पत्र सहित जवाब देने के लिए कहा है। कोर्ट ने सरकार से12 मई तक जवाब पेश करने को कहा है।सीजे इंद्रजीत महंति व जस्टिस एसके शर्मा की खंडपीठ ने यह निर्देश अधिवक्ता निखिलेश कटारा कि पीआईएल पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एजी एमएससिंघवी ने कहा कि शराब की दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना की जा रही है और हर दुकान पर आबकारी विभाग का गार्ड लगा दिया जाएगा। प्रार्थी की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार ने कॉलोनी की दुकानों को खोलने के लिए कहा था लेकिन राज्य सरकार ने सभी जगह पर शराब की दुकानों को खोल दिया है।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनकर मामले में सरकार से शपथ पत्र सहित जवाब देने के लिए कहा। गौरतलब है कि पीआईएल में सीएस, एसीएस होम, संयुक्त आबकारी सचिव व आबकारी आयुक्त को पक्षकार बनाते हुए लॉकडाउन के दौरान शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाने का आग्रह किया है।


यह कहा है पीआईएल में

पीआईएल में कहा है कि राज्य सरकार ने दो मई के आदेश से लॉकडाउन के दौरान प्रदेशभर में शराब की दुकानों को खोलने और शराब की बिक्री करने की स्वीकृति दी है। राज्य सरकार का यह फैसला डब्ल्यूएचओ की कोविड: 19 के संबंध में जारी गाइडलाइन्सका उल्लंघन है। डब्ल्यूएचओ ने गाइड लाइन में कोविड: 19 को फैलने से रोकने के लिए सोश्यल डिस्टेंसिंग की बात कही है। चारमई को जब राज्य में शराब की दुकानें खुलीं तो वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई।

इससे कई जगहों पर सोशलडिस्टेंसिंग का उल्लंघन हुआ। इससे कोरोना का संक्रमण प्रदेश में और भी बढ़ेगा। इसलिए राज्य सरकार लॉकडाउन के दौरान शराबों की दुकानों को बंद कर शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाए। वहीं शराब की बिक्री के लिए कोई वैकल्पिक होम डिलेवरी या अन्य कोई व्यवस्था करे। साथ ही राज्य सरकार को प्रदेश के लोगों के जीवन व स्वास्थ्य की रक्षा सहित पर्यावरण संरक्षण के संबंध में निर्देश दिए जाएं।



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राजस्थान में शराब की दुकानों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कई जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं हुई।




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उदयपुर में सबसे ज्यादा 59 नए पॉजिटिव केस सामने आए, जयपुर में 34 और चित्तौड़गढ़ में 10 संक्रमित; तीन की मौत

राजस्थान में कोरोना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को कोरोना के 152 नए पॉजिटिव मामले सामने आए। जिसमें उदयपुर में 59, जयपुर में 34, चित्तौड़गढ़ में 10,कोटा में 9, जोधपुर में 9, अजमेर में 9, राजसमंद में 6, पाली में 5, भीलवाड़ा में 4,अलवरऔरझालावाड़ में 2-2, सिरोही,करौली और सीकर में 1-1 संक्रमित मिला।जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या 3579 पहुंच गई।वहीं चार लोगों की मौत भी हो गई। जिसमें अजमेर में 2, जयपुर और जोधपुर में 1-1 की मौत हो गई। जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा 103पहुंच गया।

इससे पहले गुरुवार को कोरोना के 110 केस पॉजिटिव आए। जिसमें जोधपुर में 30 लोग संक्रमित मिले। वहीं जोधपुर में ही बीएसएफ के 12 जवान भी पॉजिटिव पाए गए। इसके साथ जयपुर में 21 चित्तौड़गढ़ में 16, पाली में 10, अजमेर मे 5, उदयपुर में 5, धौलपुर में 4, अलवर और कोटा में 2-2, जालौर, राजसमंद और सिरोही में 1-1 संक्रमित मिला।

33 में से 31 जिलों में पहुंचा कोरोना
प्रदेश में संक्रमण के सबसे ज्यादा केस जयपुर में हैं। यहां 1149(2 इटली के नागरिक) संक्रमित हैं। इसके अलावा जोधपुर में 898 (इनमें 47 ईरान से आए), कोटा में 232, अजमेर में 196, टोंक में 136,नागौर में 119, चित्तौड़गढ़ में 126,भरतपुर में 116, बांसवाड़ा में 66,पाली में 55, जैसलमेर में 49 (इनमें 14 ईरान से आए),झालावाड़ में 47, झुंझुनूं में 42,भीलवाड़ा में 43, बीकानेर में 38, मरीज मिले हैं। उधर,उदयपुर में 79, दौसा औरधौलपुर में 21-21, अलवर में 20,चूरू में 14,राजसमंद में 13, हनुमानगढ़ में 11, सवाईमाधोपुर, डूंगरपुर औरसीकर में 9-9,करौली में 5, प्रतापगढ़औरजालौर में 4-4, बाड़मेर में 3कोरोना मरीज मिल चुके हैं। सिरोही में 2, बारां में 1संक्रमित मिला है। वहीं जोधपुर में बीएसएफ के 42 जवान भी संक्रमित हैं।

अब तक 103लोगों की मौत
राजस्थान में कोरोना से अब तक 103लोगों की मौत हुई है। इनमें 10 कोटा, 2 भीलवाड़ा, 2 चित्तौड़गढ़ 56जयपुर (जिसमें दो यूपी से), 17जोधपुर, 4अजमेर, दो नागौर, दो सीकर, दो भरतपुर, एक करौली, एक प्रतापगढ़, एक अलवर, एक बीकानेर, एक सवाई माधोपुर और एक टोंक में हो चुकी है।

राजस्थान; 1 से 2 जिले संक्रमित होने में 17 दिन लगेे, 30 दिन में ही 20 और जुड़ गए

सिरोही में एक मरीज मिलने के साथ ही अब कोरोना 33 में से 31 जिलों में पहुंच चुका है। सिर्फ श्रीगंगानगर और बूंदी में ही अब तक कोई केस नहीं आया है। चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेश में सबसे पहले 2 मार्च को जयपुर में पहला रोगी मिला था और इसके 17 दिन बाद दूसरा जिला भीलवाड़ा संक्रमित हुआ था। मगर इसके बाद अगले 30 दिन के अंदर ही 20 जिले और कोरोना की चपेट में आ गए। 6 से 12 जिलों तक संक्रमण फैलने में मात्र 9 दिन लगे। एक से 5 अप्रैल तक मात्र 5 दिन में ही जिले 12 से बढ़कर 21 हो गए। जालोर-सिरोही में मिले पहले रोगी प्रवासी हैं।

67 दिन से सुरक्षित; श्रीगंगानगर-बूंदी में अभी तक कोई कोरोना रोगी नहीं
अब ग्रीन जोन में केवल दो जिले बचे हैं- श्रीगंगानगर और बूंदी। यहां अभी तक 67 दिन में कोई कोरोना रोगी नहीं मिला। हालांकि, संक्रमित होने वाले पांच जिले अब कोरोना मुक्त हो चुके हैं और दो जिलों में मात्र एक-एक रोगी बचा है। वह भी ठीक होने वाला है। ऐसे में 9 जिले संक्रमण फ्री होने की ओर हैं। चूरू, हनुमानगढ़, झुंझुनूं, करौली और सवाई माधोपुर में सभी रोगी ठीक हो चुके हैं। अब वहां एक भी नया रोगी नहीं है। बीकानेर और प्रतापगढ़ में एक-एक रोगी है। इस लिहाज से प्रदेश के 24 जिलों में रोगी हैं।



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तस्वीर जयपुर परकोटे की है। जहां पुलिस लगातार गश्त कर रही है।




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17 मई तक धारा 144 लागूउल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने नोवेल कोराना वायरस कोविड-19 के संक्रमण के बचाव सुरक्षा के लिए संपूर्ण जशपुर जिले में प्रभावशील धारा 144 को लाॅकडाउन की अवधि आगामी 17 मई तक के लिए लागू करने का आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से तथ्य परिलक्षित है कि कोरोना वायरस के संपर्क से पीड़ित संदेही से दूर रहने की सख्त हिदायत है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा यह भी निर्देशित किया गया है कि इससे बचने के लिए सभी संभावित उपाय अमल में लाए जाए। उन्होंने कहा है कि कोरोना कोविड-19 के संभावना प्रसार को देखते हुए इसको रोकने के लिए न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश में कड़े सामाजिक अलगाव को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि अद्यतन स्थिति में भी कोरोना वायरस संक्रामक बीमारी पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। अभी संक्रमण की स्थिति कई स्थानों पर संभावित है। संक्रमण के बचाव हेतु जिला जशपुर में स्वास्थगत आपातकालीन स्थिति को नियंत्रित में रखने के लिए यह उचित प्रतीत होता हैं। उन्होंने कहा है कि यह भी तथ्य ध्यान में रखने योग्य है कि इस आपात की स्थिति में व्यवहारिक तौर पर संभव नही है कि जशपुर जिले में निवासरत सभी नागरिकों को नोटिस की तामिल कराई जा सके। अतः एकपक्षीय कार्यवाई करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहित 1973 के अंतर्गत जशपुर जिले में पूर्व में लागू 144 धारा में वृद्धि करना उचित है।
कलेक्टर श्री क्षीरसागर ने माहामारी रोग अधिनियम तथा शासन द्वारा जारी आदेश के तहत कार्यालय, प्रतिष्ठानों, सेवाओं इत्यादि को दी गई इस आदेश में भी यथावत रहेगी। यह आदेश जशपुर जिले की संपूर्ण सीमा क्षेत्र के लिए 17 मई 2020 या आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगी। उक्त आदेश का उल्लंघन करने पर कार्यवाही भी की जाएगी।



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15 राज्यों में फंसे जिले के 350 लोग लौटेंगे इधर बार्डर पर जरूरी उपकरण व किट नहीं

स्वास्थ्य और पुलिस विभाग पर पूरे जिले को कोरोना वायरस से बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लॉकडाउन के तीसरे फेस तक इनके पास सुरक्षा के लिए कोई उपकरण नहीं है। बार्डर में बैरियर बनाकर स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के अफसर-कर्मियों को तैनात को कर दिया है, लेकिन उनके पास बीमारी के प्राथमिक लक्षण की पहचान करने तापमान मापक यंत्र तक नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मी सिर्फ सर्दी, खांसी और बुखार की ही जानकारी जुटा रहे हैं। वहीं अब दिल्ली, महराष्ट, गुजरात, पंजाब समेत 15 राज्यों से जिले में 350 से अधिक की लोगों के आने की संभावना है। वे खड़गवां धनपुर, कोड़ा और जरौंधा से दाखिल हो सकते हैं। कोरिया जिले से बाहर गए लोगों की जनपद द्वारा सूची तैयार कराई गई। इसमें अब तक 350 लोगों के खड़गवां ब्लाॅक की ओर से जिले में घुसने की संभावना है। इसे देखते हुए खडगवां के तीनों पंचायतों में बैरियर बनाया गया है और पकड़े जाने वालों को 77 पंचायतों में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। जिले को लॉकडाउन के तीसरे फेस में ग्रीन जोन में बनाए रखने जिले के स्वास्थ्य, पुलिस और सफाईकर्मियों के सामने बड़ी चुनौती है। यहां बता दें कि कोरिया जिला मध्यप्रदेश के सीधी, अनूपपुर, शहडोल समेत छग के सूरजपुर, कोरबा, पेंड्रा-गौरेला से लगा हुआ है। ऐसे में इन सीमाओं को पार कर हजारों लोग अपने गृह ग्राम में आना चाह रहे हैं।
कलेक्टर ने कहा- हमारे पास पर्याप्त संसाधन
लॉकडाउन-3 में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के सवाल पर कलेक्टर डोमन सिंह ने बताया कि हमारे पास पर्याप्त संसाधन है। जिले की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है। बिना अनुमति के कोई भी जिले के भीतर दाखिल नहीं हो सकता है। दूसरे राज्य और कोरिया जिले से लगे छग के अन्य जिले की सीमाओं में चौकसी बढ़ा दी गई है। बाहर से आने वालों को तत्काल क्वारेंटाइन सेंटर में भेजा जा रहा है।
धनपुर, कोड़ा और जरौंधा के रास्ते लौटने की संभावना
धनपुर, कोड़ा, जरौंधा के रास्ते दूसरे राज्यों से लोगों के आने की संभावना है। यहीं वजह है कि यहां बैरियर बनाकर स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के अफसर-कर्मियों को तैनात किया गया है। जिन अधिकारी-कर्मचारियों को जिले के साढ़े 6 लाख लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके ही पास इस वायरस के लक्षण की पहचान करने तापमान मापक यंत्र समेत अन्य जरूरी उपकरण और सामग्री उपलब्ध नहीं है।
मजदूरों की देखरेख करने वालों के पास नहीं था किट
गौरतलब है कि इससे पहले राजनांदगांव से रवाना हुए 46 मजदूरों में से 2 कोरोना पाॅजिटिव झारखंड की ओर भाग गए। उनके संपर्क में रहे सभी कर्मचारियों को इन दिनों मनेंद्रगढ़ के क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया है। यहां जो स्वास्थ्य कर्मचारी मजदूरों को सेवाएं दे रहे थे, उनके पास भी पीपीई किट नहीं था।
अब तक जिले में 223 लोगों को किया गया क्वारेंटाइन
बता दें कि रविवार और सोमवार को दूसरे जिले से आने वाले लोगों को धनपुर बैरियर में रोककर स्वास्थ्य परीक्षण समेत पूरी जानकारी इकट्‌ठा कर 233 लोगों को क्वारेंटाइन कर दिया गया। सामान्य और रेड जोन से आने वालों के लिए अलग-अलग सेंटर बनाए गए हैं। कोड़ा, धनपुर, जरौंधा नाके पर रेड जोन से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर नाके पर ही क्वारेंटाइन किया जा रहा है।
जिले के 350 से अधिक लोग दूसरे राज्यों में फंसे
संभावना जताई जा रही है कि धनपुर, कोड़ा, जरौंधा के रास्ते से आने वालें दिनों में 350 से अधिक लोग दाखिल होंगे। इसमें कर्नाटक 25, मध्यप्रदेश 37, झारखंड 26, केरल 9, महराष्ट्र 40, तमिलनाडू 25 और सबसे अधिक गुजरात में जिले से काम करने गए लोग लौटेंगे। इसके अलावा उड़ीसा, राजस्थान, बिहार, यूपी, असम, दिल्ली, पंजाब समेत पश्चिम बंगाल से भी लोग वापस आएंगे।
स्वास्थ्य कर्मियों के पास पीपीई किट भी नहीं
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी तापमान मापक यंत्र नहीं मिलने से बार्डर में सिर्फ सर्दी, खांसी और बुखार की ही जांच कर रहे हैं। जिनमें ये लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें सामुदायिक और जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। यहां तक कि स्वास्थ्य कर्मियों के पास पीपीई किट तक उपलब्ध नहीं है। जिससे बाहर से आने वालों के कारण इनमें भी संक्रमण फैलने की संभावना बनी हुई है।
बिना तापमान मापक यंत्र के बार्डर में तैनात स्वास्थ्य और पुलिस कर्मी। यहां पहुंचने वालों का सर्दी-खास
जिले में दाखिल होने के लिए खड़गवां का रास्ता सबसे आसान
तापमान मापक यंत्र नहीं होने से बढ़ा खतरा
गौरतलब है कि बगैर तापमान मापक यंत्र के ही अन्य जिले और प्रदेश से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बार्डर में तैनात अधिकारी-कर्मचारी किस तरह से जोखिम उठा रहे हैं। अन्य प्रदेश व छग के दूसरे जिले से कोरिया जिले में पहुंच रहे लोगों का बार्डर पर ही खानापूर्ति के साथ स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें सीधे 14 दिन के क्वारेंटाइन में भेजा रहा है।



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350 people from the trapped districts in 15 states will return, no necessary equipment and kits on the border




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100 बिस्तर वाले बीएसपी अस्पताल में 30 साल बाद सिर्फ 24 बिस्तर की सुविधा बची

भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा बीएसपी कर्मचारियोें काे तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को ध्यान में रखते हुए 100 बिस्तर अस्पताल की स्थापना की गई थी। जो अब मात्र 24 बिस्तर में सिमट रह गया है। डाॅक्टर व आवश्यक सुविधा नहीं हाेने से रेफर सेंटर बन कर रह गया है। लगभग 30 वर्ष पूर्व अस्पताल को सर्वसुविधायुक्त 100 बिस्तर अस्पताल बनाया गया था। जहां बीएसपी कर्मचारियों व मजदूरों का इलाज बेहतर तरीके से किया जाता था।
यहां पर पर्याप्त सर्जन, विशेषज्ञ चिकित्सक, सहायक चिकित्सक, नर्स, हेड नर्स, वार्ड बाय, ड्रेसर, फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारियों की पदस्थापना की गई थी, लेकिन धीरे-धीरे सभी सुविधाअाें में कटाैती हाे रही है। इस अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर है। पूर्व मेंकिसी भी प्रकार का बड़ा से बड़ा ऑपरेशन इसी अस्पताल में किया जाता था। यहां तक ऑपरेशन के लिए भिलाई सेक्टर 9 से चिकित्सकों को विशेष वाहन से बुलाया जाता था। माइंस क्षेत्र होने के कारण यहां पर आए दिन दुर्घटना व परिवार के सदस्यों को किसी न किसी तरह के बीमारी से ग्रसित होने से इलाज होता था।
यहां गायनोलाॅजिस्ट, आर्थोपेडिक, दंत चिकित्सक तक नहीं
बीएसपी अस्पताल में 7 चिकित्सकों की पदस्थाना है। जिसमें एक मेडिसिन चिकित्सक और अन्य एमबीबीएस चिकित्सक हैं। इतने बड़े अस्पताल में गायनोलाॅजिस्ट, आर्थोपेडिक, दंत चिकित्सक, सोनोग्राफी चिकित्सक की पदस्थाना नहीं की गई। जिससे संबंधित मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। पैथोलाॅजी लैब नाममात्र का रह गया है। लैब टेक्निशियन के अनुभव की कमी के चलते रिपोर्ट में त्रुटियां पाई जाती है जिससे मरीजों के जान को खतरा बना रहता है। इसके लिए मरीज निजी पैथालाॅजी से टेस्ट करा कर चिकित्सक से सलाह लेते हैं।
चिकित्सकों की भर्ती की जा रही: महाप्रबंधक
अस्पताल प्रबंधक मनोज डहरवाल से पूछे जाने पर इस संबंध में किसी प्रकार की चर्चा करने से इंकार कर दिया। खान मुख्य महाप्रबंधक तपन सूत्रधार ने बताया कि चिकित्सकों की नई भर्ती की जा रही है जिसमंे एक गायनोलाॅजिस्ट शामिल है। साथ ही दो नई एम्बुलेंस की खरीदी की जा रही है।
एक हाॅल में मरीजाें का जांच करते हैं डाॅक्टर
चिकित्सकों के लिए पर्याप्त कमरा होने के बावजूद वहां न बैठ कर एक हाॅल में सभी चिकित्सक बिना पर्दा के मरीजों की जांच करते हैं। वहीं जांच के दौरान चिकित्सक को सभी मरीज घेरे रहते हैं। जिस पर कई मरीज संकोच के कारण बिना जांच कराए वापस चले जाते हैं। कई अपनी गुप्त बीमारी को चिकित्सक के सामने साझा करने से कतराते हैं।
यहां की नर्स ठेका श्रमिकोंसे कराती हैं पूरा काम
हेड नर्स व नर्स कुर्सी में बैठे-बैठे इशारे से अपना सारा काम ठेका श्रमिकोंसे कराती हैं। यहां तक मरीजों की ईसीजी जैसे अनेक कार्य अकुशल ठेका श्रमिकोंद्वारा कराया जाता है। ईसीजी से दवाई वितरण केन्द्र में चिकित्सक के पहुंचने से पहले अपना काउन्टर बंद कर चले जाते हैं। जिससे कई मरीजों को दवाई लेने के दूसरे दिन वापस काउंटर में लाइन लगाकर लेना पड़ता है।
मरीजों को घंटाें करना पड़ता है इंतजार
छोटी बीमारी तक के लिए भिलाई रेफर कर देते हैं
धीरे-धीरे बीएसपी अस्पताल अब मात्र 24 बेड पर सिमट कर रह गया। 12 बिस्तर पुरुष व महिलाओं के 12 बिस्तर लगाया गया है। वर्तमान में महिला एवं पुरुष वार्ड में एक भी मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। मरीज को आपातकालीन स्थिति में चिकित्सक बिना जांच के रेफर कर देते हैं। जिसके कारण बेड खाली पड़ा रहता है। छोटी बीमारी के लिए भिलाई रेफर कर दिया जाता है।
एम्बुलेंस बीच रास्ते में ही कभी भी हो जाती है खराब
बीएसपी द्वारा संचालित एंम्बुलेंस कंडम हो चुकी है। जिसके सहारे मरीजों को सेक्टर 9 रेफर किया जाता है। एम्बुलेंस बीच रास्ते में ही खराब हो जाती है। जिससे मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। एक ओर प्रबंधन माइंस क्षेत्र में उत्पादन काे बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से नई-नई मशीन लगा रही है। लेकिन बीएसपी कर्मचारियों के लिए ठेके पर एम्बुलेंस चला रही है।
बीएसपी कर्मचारी अपना इलाज निजी अस्पतालों में कराने में विश्वास रखते हैं। केवल गरीब व मजदूर ही बीएसपी अस्पताल में पहुंचते हैं। उन्हें भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा भिलाई सेक्टर 9 रेफर करने की बात करते हैं। सेक्टर 9 अस्पताल पहुंचता है तो वहां के चिकित्सकों द्वारा जांच करते ही मरीज की हालत सामान्य हाेने पर वापस राजहरा भेज दिया जाता है। एक मात्र मेडिसिन चिकित्सक हेड बन कर बैठे हैं, जो अस्पताल मेें कभी भी समय पर उपस्थित नहीं रहता। इनके अनुशरण में अस्पताल के सभी कर्मचारी अपना टाइम टेबल व कर्तव्य भूल चुके हैं। अस्ताल में मरीजों को घंटाें इंतजार करना पड़ता है। इंताजर में अस्पताल बंद होने का समय आ जाता है जिससे बिना इलाज के मरीज लौट जाते हैं।



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दानदाता घटे सिर्फ 1 हजार राशन पैकेट्स बचे

लॉकडाउन 3 लगने के बाद राहत कोष में भी फूड पैकेट आने कम हो गए हैं। मंगलवार को पुलिस और निगम को सीधे 880 पैकेट भोजन वितरित करने को मिले। आकड़ों के अनुसार हर रोज 24 सौ लोगों को यह दिया जाता था। सामाजिक संस्थाएं लॉकडाउन 2 तक ही इसकी प्लानिंग की थी। फिलहाल अनाथालय स्थित कोष में अभी सिर्फ 1 हजार पैकेट सूखा राशन ही शेष रह गया है। बाजार खुलने और ज्यादा मजदूरों के काम पर लौटने के कारण दान का सामान कम आ रहा है। 40 दिनों में विभिन्न संस्थाओं के सहयोग के माध्यम से 11 हजार 800 पैकेट सूखा राशन लोगों तक पहुंचाए गए। इनमें से 35 सौ लोगों को साढ़े 7 किलो वाले पैकेट्स और 83 सौ लोगों को 5 किलो वाला वाले पैकेट्स बांटे गए। जिनमें चावल, दाल, प्याज, नमक और साबुन शामिल रहे।
लॉकडाउन 2 के बाद भी स्थिति नहीं है स्पष्ट
लॉकडाउन 2 की समाप्ति तक ही सामाजिक संस्थाओं ने राहत के लिए फूड पैकेट बनाने की व्यवस्था की थी। रोजाना जहां 2400 पैकेट के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक पका भोजन पहुंचाया जाता। लॉकडाउन 3 लगने के बाद अनाथालय स्थित राहत कोष में एक भी पैकेट भोजन नहीं पहुंच रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अब आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं है।



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जॉब कार्ड में नाम नहीं जोड़ा तो 2 गुटों में संघर्ष, 12 घायल, 46 पर मुकदमा

मनरेगा जॉब कार्ड में नाम दर्ज न करने और पुरानी रंजिश को लेकर रोजगार सहायक व गांव के एक गुट के बीच खूनी संघर्ष हो गया। मारपीट में रोजगार सहायक सहित 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने दोनों पक्षों के 46 लोगों के खिलाफ नामजद बलवा, मारपीट का अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
खरसिया थाना क्षेत्र के गांडाबोरदी निवासी उमेश राम ने पुलिस को बताया कि वह आश्रित गांव कलमीपाठ का रोजगार सहायक है। लॉक डाउन के बीच उसने जिला प्रशासन की अनुमति के बाद एक मई से तालाब में खुदाई का काम करा रहा था। जिन लोगों के नाम पंजीकृत नहीं थे वह लोग तालाब खुदाई का काम पंजीयन करने के बाद ही कराने का दबाव बना रहे थे। पंजीयन कराने के बाद ही काम देने की बात कहने पर घर चला आया। दोपहर 4 बजे के करीब गांव का भोला शंकर घर पर आकर गालियां देने लगा। विरोध करने पर भोला शंकर ने 50 लोगों के साथ धावा बोल दिया। उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की, इसी बीच किसी ने उसके सिर पर टांगी से वार कर घायल कर दिया। रोजगार सहायक ने भोलाशंकर सहित गांव के 39 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। दूसरे पक्ष से भोलाशंकर ने पुलिस को बताया कि रोजगार सहायक के भाई नैनदास भारद्वाज का उससे पुराना विवाद चल रहा है। इसी रंजिश में रोजगार सहायक उसका व उसके परिवार के साथ गांव के उन लोगों का नाम दर्ज नहीं करवा रहे जो उसके समर्थक है। मंगलवार शाम को वह उनके घर के पास से गुजर रहा था तभी किसी ने नैनदास के घर से पत्थर फेंक कर उसे मार दिया। पूछने पर उसके घर के सदस्यों ने गाली गलौज करने वहां से वह घटना को नजर अंदाज कर घर आ गया। थोड़ी ही देर बाद नैनदास, उमेश राम व उसके परिवार के 15 लोग घर में आकर हमला कर दिए। रोजगार सहायक की शिकायत पर 39 भोलराम की ओर से 7 नामजद लोगों के खिलाफ धारा 147,148, 149, 294, 323, 452, 506(बी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।



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56 हजार मजदूर लौटेंगे बिलासपुर, बहतराई स्टेडियम में होगा स्वास्थ्य जांच, इनके लिए 1066 क्वाॅरेंटाइन सेंटर बनाए गए

विभिन्न राज्यों में फंसे जिले के हजारों छत्तीसगढ़िया श्रमिकों के बिलासपुर पहुंचते साथ उनके स्वास्थ्य का परीक्षण कराने के लिए बहतराई स्टेडियम में व्यवस्था की जा रही है। 120 करोड़ की लागत से बने इस स्टेडियम में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने बेरिकेडिंग कराई जा रही है। श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए नगर निगम स्टाफ को स्वास्थ्य विभाग से समन्वय करने का जिम्मा दिया गया है। बता दें कि पूर्व में विभिन्न राज्यों में जिले के 72 हजार श्रमिकों के फंसे होने की खबर थी। श्रम विभाग ने पंजीयन के आधार पर आज बताया कि 56 हजार श्रमिक बाहर हैं, जिन्हें लाया जाएगा। संख्या इससे अधिक भी हो सकती है, परंतु प्रशासन को फिलहाल इतने ही लोगों को लाने के लिए बस, ट्रेन आदि की व्यवस्था करने कहा गया है।
शहर में 600 लोगों को रखेंगे
डिप्टी कमिश्नर खजांची कुम्हार ने बताया कि निगम के जोन कार्यालयों में 600 लोगों के नाम पते दर्ज कराए गए हैं, जो विभिन्न राज्यों में फंसे हैं। इन्हें वापस लाने के लिए ई पास तथा अन्य व्यवस्था शासन स्तर पर की जा रही है। इनके आने पर 13 सामुदायिक भवनों में 14 दिनों के लिए कोरेंटाइन किया जाएगा। जिन सेंटरों में ठहराने की व्यवस्था की जा रही है, उनमें मिनीमाता सांस्कृतिक भवन सकरी, अधिकारी कर्मचारी निवास कोटा रोड, यदुनंदन नगर सामुदायिक भवन, सिरगिट्टी सामुदायिक भवन, पुत्रीशाला सामुदायिक भवन तिलकनगर, सामुदायिक भवन जरहाभाठा, त्रिवेणी व्यापार विहार, रैन बसेरा व्यापार विहार, मनसुखलाल सोनी सामुदायिक भवन गोंड़पारा, शहीद विनोद चौबे सामुदायिक भवन, गुजराती समाज भवन टिकरापारा, शनि मंदिर सामुदायिक भवन राजकिशोर नगर शामिल है।

28 ट्रेनों से छत्तीसगढ़ आएंगे श्रमिक, इनमें 22 ट्रेनें आएंगी बिलासपुर

परिवहन रिपोर्टर | बिलासपुर
छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूरों को अलग-अलग राज्यों और शहरों से लाने के लिए छत्तीसगढ़ ने 28 ट्रेनों की मांग केंद्र सरकार से की है। ट्रेनों के संबंध में अभी कोई लिखित दस्तावेज जोनल हेड क्वार्टर तक नहीं पहुंचा है इसलिए ट्रेनें कब चलेंगी, कब आएंगी, कैसी व्यवस्था होगी, इसकी कोई तैयारी बिलासपुर में नहीं है।
छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूर दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, इलाहाबाद, हैदराबाद, विशाखापट्टनम, सूरत, अहमदाबाद, जयपुर एवं पटना सहित अन्य शहरों में फंसे हुए हैं। इनकी संख्या हजारों की तादात में है। इधर इस संबंध में कोई फैसला नहीं हो पाया है कि कहां से कितनी ट्रेनें चलाई जाएंगी। छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूरों की सूची भी तैयार हो रही है। उसके मुताबिक ही ट्रेनों के परिचालन की तिथि व स्थान तय हाेंगे। फिलहाल इस संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोनल मुख्यालय में कोई लिखित सूचना या कागज रेल मंत्रालय या बोर्ड से नहीं आया है। छत्तीसगढ़ राज्य के लिए ट्रेन चलने की सूचना रेलवे अफसरों को अवश्य है लेकिन कोई दस्तावेज नहीं होने से तैयारी भी नहीं की जा रही है कौन सी ट्रेन कहां से होकर गुजरेगीयह भी अभी तय नहीं है।
स्पेशल ट्रेनों से 36 हजार मजदूर आएंगे
मजदूरों के लिए चलाई जा रही स्पेशल ट्रेन में अधिकतम 1200 मजदूरों को भेजा जा रहा है इस हिसाब से अगर 28 ट्रेनें चलती हैं तो 36000 के लगभग मजदूर छत्तीसगढ़ आ सकेंगे।
कहां से कितनी ट्रेनें मांगी गई
जयपुर से रायपुर बिलासपुर 7 ट्रेनें
लखनऊ से रायपुर बिलासपुर तीन ट्रेन
कानपुर से रायपुर बिलासपुर दो ट्रेन
चेन्नई से रायपुर बिलासपुर एक ट्रेन
बेंगलुरु से रायपुर बिलासपुर एक ट्रेन
पुणे से रायपुर बिलासपुर एक ट्रेन

इलाहाबाद से बिलासपुर एक ट्रेन
दिल्ली से रायपुर बिलासपुर तीन ट्रेन
हैदराबाद सिकंदराबाद से रायपुर बिलासपुर तीन ट्रेन
विशाखापट्टनम से रायपुर एक ट्रेन
सूरत अहमदाबाद से रायपुर एक ट्रेन
कोलकाता से रायपुर एक ट्रेन
जयपुर से रायपुर एक ट्रेन
पटना से दुर्ग एक ट्रेन



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56 thousand laborers will return to Bilaspur, Bahtarai Stadium to have health checkup




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मनरेगा में 14 हजार 600 नए मजदूरों को जारी हुआ जॉब कार्ड

कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन के बीच जिले में मनरेगा का कार्य भी चल रहा है। राजनांदगांव जिला अन्य जिलों से मनरेगा के तहत काम दिलाने में नंबर एक पर है। जिले में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक 2 लाख 3 हजार 831 मजदूरों को मनरेगा अंतर्गत ग्रामीणों को अपने ही घर के आस-पास गांव के अंदर रोजगार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जिले में कुल 4 हज़ार 129 कार्य प्रगतिरत है। 11 हजार कार्य पूर्व से स्वीकृत है एवं कुल 772 पंचायतों में लगातार काम चल रहा है। वर्ष 2020 - 21 मे लॉकडॉउन के बावजूद भी लगभग 5 हजार से अधिक नवीन जॉब कार्ड बनाया गए हैं। इसके अंतर्गत लगभग 14,600 नवीन मजदूर रोजगार के लिएरजिस्टर्ड हुए हैं। राजनांदगांव जिले के 9 ब्लॉक जिसमें सबसे अधिक खैरागढ़ ब्लॉक आज 33,995 मजदूर, छुरिया ब्लॉक 32,946 मजदूर, राजनांदगांव ब्लॉक 28,639 मजदूर, अंबागढ़ चौकी ब्लॉक 19,372 मजदूर, डोंगरगढ़ ब्लॉक 21,165 मजदूर, मानपुर ब्लॉक 17,111 मजदूर, छुईखदान ब्लॉक 27,026 मजदूर, डोंगरगांव ब्लॉक 11,572 मजदूर, मोहला ब्लॉक 12,005 मजदूर को रोजगार प्रदान कर रहा है। जिला पंचायत सीईओ तनुजा सलाम ने बताया कि राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों का पालन करते हुए लगातार सोशल एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग, मास्क/गमछा का उपयोग, कार्यस्थल पर हाथ धुलवाने की व्यवस्था करने कहा है।



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Job card issued to 14 thousand 600 new laborers in MNREGA




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पानी चाहिए तो डायल करें 07763-223757 या फिर 18002330008

जिले में ग्रीष्मकाल के दौरान संभावित पानी की किल्लत से निपटने एवं हैंडपंपों को निरंतर चालू रखने के लिए जिले एवं उपखंड स्तर पर पानी निगरानी कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इसमें नियुक्त अधिकारी और कर्मी शिकायत मिलने पर तुरंत पानी की समस्या दूर करेंगे। इस कंट्रोल रूम की सेवा 30 जून तक अथवा मानसून आने तक मिलेगी। इसके लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम का नंबर 07763-223757 और राज्य स्तरीय टोल फ्री नंबर 18002330008 जारी किया है।
पीएचई से मिली जानकारी के अनुसार जिला स्तर पर पेयजल निगरानी कंट्रोल रूम प्रभारी का दायित्व होगा कि प्रतिदिन शाम 5.30 बजे तक टेलीफोन एवं अन्य किसी माध्यम से प्राप्त खराब हैंडपंपों एवं पानी संबंधी शिकायतोें का पंजीयन कर उनके समस्याओं के निराकरण संबंधी प्रतिवेदन दर्ज करेंगे।

अधिकारियों के मोबाइल में भी कर सकते हैं शिकायत
कंट्रोल रूम में जिलास्तरीय कंट्रोल रूम के प्रभारी अनुरेखक रामपप्रसाद लिमजे मोबाइल नंबर 7610652310 को नियुक्त किया है। इसी तरह उपखंडस्तर जशपुर में सहायक अभियंता उपखंड जशपुर कमल प्रसाद कंवर 8519064845, जशपुर के लिए उप अभियंता सुरेन्द्र कुमार साय,8319644924 एवं मनोरा के लिए उपअभियंता उत्पल यादव 9340108565 की ड्यूटी लगाई है। इसी प्रकार उपखंड स्तर कुनकुरी के लिए सहायक अभियंता कुनकुरी एनकेएस महतो 9303823121, फरसाबहार ब्लाक के लिए एनकेएस महतो 9303823121, दुलदुला के लिए उप अभियंता बसंत कुमार एक्का 8770748912 एवं कुनकुरी के लिए उपअभियंता प्रमोद कुमार महतो 9479087270 की ड्यूटी लगाई गई है। पत्थलगांव ब्लाक में उप अभियंता संतोष कुमार नायक 9754199570 की ड्यूटी लगाई गई है।



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7200 टन एक्स्ट्रा प्रोडक्शन का टार्गेट, अब हर दिन 21, 600 टन की हो रही है सप्लाई

डेढ़ महीने से लॉकडाउन पीरियड के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के लिए बीएसपी प्रबंधन ने उत्पादन को घटाकर आधा कर दिया है। स्थिति सामान्य होता देख प्रबंधन भी अब सामान्य उत्पादन की तैयारी में जुट गया है। बंद मिलों में रिपेयर के काम को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं भविष्य में आयरन ओर की कमी न हो इसके लिए दल्ली राजहरा में तीसरी पाली में भी माइनिंग का काम शुरू कर दिया गया है। दल्लीराजहरा में दो पाली में माइनिंग होने से 14,400 टन आयरन ओर की सप्लाई बीएसपी को की जा रही थी। अब माइंस प्रबंधन को 7200 टन अतिरिक्त उत्पादन करना होगा।
लॉकडाउन पीरियड लागू होने के बाद से बीएसपी में उत्पादन को क्षमता से आधा कर दिया गया है। इसके कारण बीते डेढ़ महीने से प्लेट मिल, मर्चेंट मिल, वॉयर एंड राड मिल में उत्पादन बंद है। ब्लास्ट फर्नेस में भी सात नंबर को ब्लो डाउन कर दिया गया है। फिलहाल फर्नेस-1 और 8 ही उत्पादन में है।
लॉकडाउन में 5 लाख टन आयरन ओर बीएसपी में जमा
लॉकडाउन के दौरान बीएसपी में उत्पादन आधा किए जाने से आयरन ओर की डिमांड भी घट गई थी। इस दौरान दल्ली से 2 और राजहरा माइंस से दो रैक आयरन ओर बीएसपी को प्रतिदिन सप्लाई किया गया। खपत कम होने से बीएसपी में 5 लाख टन आयरन ओर जमा है। इनमें 4 लाख टन फाइंस और एक लाख टन लंप्स जमा है।
दल्लीराजहरा में दो पाली में हुई माइनिंग शुरू
दल्ली राजहरा में दो पाली में माइनिंग होने से 14 हजार 400 टन आयरन ओर की सप्लाई प्रतिदिन बीएसपी को की जा रही थी। तीसरी पाली में माइनिंग शुरू करने के साथ ही सीईओ ने दो अतिरिक्त रैक की सप्लाई करने का भी टार्गेट माइंस प्रबंधन को दे दिया है। दो अतिरिक्त रैक आयरन ओर का मतलब अब माइंस प्रबंधन को 7200 टन अतिरिक्त उत्पादन करना होगा। इस प्रकार 21600 टन का उत्पादक प्रतिदिन हो रहा है। लॉकडाउन को देखते हुए 7200 का अतिरिक्त टार्गेट लिया गया है।
अधिक उत्पादन के लिए आयरन ओर की डिमांड
प्रत्येक मिलों में उत्पादन पहले से अधिक लेने की स्थिति में आयरन ओर की डिमांड भी बढ़ जाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए बीते सप्ताह सीईओ अनिर्बान दासगुप्ता ने माइंस अफसरों की बैठक ली। जिसमें आयरन ओर की माइनिंग बढ़ाने के लिए तीसरी पाली में भी उत्पादन शुरू करने के निर्देश दिए थे। 4 मई से इसे अमल में लाया गया है। इसे लेकर प्लानिंग की जा रही है।
हर मिलों में उत्पादन पहले से अधिक करने का लक्ष्य
डेढ़ महीने से उत्पादन आधा से भी कम होने की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 में उत्पादन बढ़ाने की योजना पर ग्रहण लग गया है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद प्रबंधन की योजना उस बैकलॉग को क्लियर करने के लिए प्रत्येक मिलों में पहले से अधिक उत्पादन लेने की है। एसएमएस-2 और 3, प्लेट मिल, रेल मिल व यूआरएम में कुछ अपग्रेडेशन भी किया है।
ब्लास्ट फर्नेस में लंप्स की कमी का संकट होगा दूर
आयरन ओर का उत्पादन दो पाली में होने की वजह से लंप्स के उत्पादन में भी कमी आ गई थी। ब्लास्ट फर्नेस के लिए लंप्स की कमी का सामना भविष्य में प्रबंधन को करना पड़ सकता था। दल्ली राजहरा के सीजीएम तपन सूत्रधार ने सीईओ को बताया कि तीसरी पाली में उत्पादन बढ़ने से लंप्स का उत्पादन भी बढ़ जाएगा। मान्यता प्राप्त यूनियन एसकेएमएस के राजेंद्र बेहरा के मुताबिक माइंस बीएसपी प्रबंधन के टार्गेट को पूरा करने के लिए तैयार है। इसे लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है। हमारी तैयारी भी पूरी है।
राजहरा में इस प्रकार आयरन ओर निकालने का काम किया जा रहा है।



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7200 tonne extra production target, now 21, 600 ton is being supplied every day




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पहले 80 हजार तक आता था खर्च, अब 10 हजार में हो रही शादी

लॉकडाउन ने गरीब परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने में भी मदद कर दी है। कोरोना वायरस के कारण शासन-प्रशासन कम लोगों की मौजूदगी में शादी की अनुमति दे रही है। ऐसे में शादी के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची पर तो रोक लग ही गई है तो वहीं सामान्य खर्च पर भी 75 से 80% तक कटौती हो गई है।
एक गरीब परिवार में भी जहां सामान्य शादी में 70 से 80 हजार रुपए तक खर्च हो रहे थे। वहां अब 5 से 10 हजार में भी शादी हो रही है। बालोद क्षेत्र में ही 65 शादियों की अनुमति मिल चुकी है। जिसमें अब तक 15 शादी हो चुकी है। मई और जून में भी शादियां होनी है। बाहर से मेहमान ना बुला कर घर के ही सदस्य शादी की सभी रस्में निभा रहे हैं। तेल, हरदी, मंडप सजावट, चुलमाटी इन सभी रिवाजों को कम लोगों की मौजूदगी में ही पूरा किया जा रहा है।
निषाद परिवार में हुई महज 7000 रुपएमें शादी
बालोद ब्लॉक के ग्राम रेवती नवागांव में दरबारी राम निषाद की बेटी हीना की शादी हुई। पिता मछली पकड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण उन्हें बहुत कम खर्च करना पड़ा। मेहमान नहीं बुलाए थे। घर के ही सदस्यों के बीच शादी हुई। जहां हम पहले 70 से 80 हजार रुपए खर्च का अनुमान लगा रहे थे। वहां लॉकडाउन के कारण भीड़ नहीं होने से 7000 में ही शादी निपट गई। पड़कीभाट से बारात आई थी, लेकिन दूल्हा भी बाइक से अपने पिता सहित छह रिश्तेदारों के साथ ही आया था। एक ही दिन में शादी कराई गई। तेल माटी चुल माटी सभी रस्में एक ही दिन में हुई।
इस तरह होती थी शादी के नाम पर फिजूलखर्ची
डीजे पर 15 से 20 हजार, बफे सिस्टम पर 1 लाख, बैंड बाजा धुमाल पर 15 से 20 हजार, सामूहिक भोज 30 हजार, बारात बस व अन्य साधन 25 हजार, माइक, टेंट 20 हजार, ड्रोन कैमरा 60 हजार, सामान्य कैमरा 25 हजार, शादी कार्ड 10 से 15 हजार रुपए खर्च होते थे। अब ना डीजे लगवा रहे, ना बफे सिस्टम ना बैंड बाजा और ना सामूहिक भोज।
कार्ड भी नहीं छपवा रहे
कई लोग पहले शादी टाल चुके हैं, उस समय शादी कार्ड भी कई परिवार छपवा चुके थे। अब मेहमानों को बुलाना भी नहीं है इसलिए आयोजक शादी कार्ड भी नहीं छपा रहे हैं। इससे कार्ड का भी खर्च बच रहा है।



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जुगेरा में घर के ही सदस्य हल्दी रस्म निभाते हुए




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जशपुर में 11 दिन में दूसरी बार गिरे ओले, आम और सब्जियों की फसल को नुकसान

पश्चिमी विक्षोभ के कारण हर रोज जिले में कहीं ना कहीं बादल बरस रहे हैं। जिले में 11 दिन मेंदूसरी ओलावृष्टि हुई। इससे फसल को नुकसान पहुंचा। इससे पहले 26 अप्रैल को ओलावृष्टि से किसानों के घरों को भारी नुकसान पहुंचा था।
मंगलवार की रात को शहर सहित जिले के पाठ इलाकों में आधे घंटे तक आंधी चली। हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि पेड़ों की डंगालें टूटी और शहर में लगे होर्डिंग्स भी उखड़ गए। आंधी के बाद बारिश हुई। इधर पाठ इलाकों में ओलावृष्टि भी खूब हुई है। पंडरापाठ, सुलेसा, महनई, चंपा सहित अन्य इलाकों में रात में गिरे ओले सुबह तक पिघल नहीं पाए।
मंगलवार को सुबह व शाम को आसमान में घने बादल छाए और दोपहर में हल्की धूप थी। रात करीब 10 बजे काले बादलों ने आसमान काे पूरी तरह ढंक लिया और तेज हवाएं चलने लगीं। आंधी के वक्त शहर में एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद कर दी। ग्रामीण इलाकों में तार टूटने से रातभर बिजली गुल रही। हवा की रफ्तार जैसे ही थमी बारिश होने लगी। पाठ इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। सन्ना, पंडरापाठ, सोनक्यारी, आस्ता, सुलेसा, महनई सहित अन्य इलाकों में खेती प्रभावित हुई है।

ओलावृष्टि से नुकसानपर मंत्री ने ली रिपोर्ट

महिला बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री अनिला भेंडिया ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से अपने प्रभार के जिले बेमेतरा और कवर्धा में कोरोना से बचाव, प्रवासी मजदूरों की वापसी की तैयारी पर रिपोर्ट ली। उन्होंने किसानो को असमय वर्षा, ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भी जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। कवर्धा जिले में फसल बीमा की राशि का भुगतान किसानों को कर दिया गया है। किसानों की मदद के लिए 8 करोड़ रुपए कवर्धा और 15 करोड़ रूपए बेमेतरा जिले को मिले हैं।

महासमुंद: अधिकतर हिस्से में बारिश, ओले भी गिरे

महासमुंद|चक्रीय चक्रवाती घेरे के साथ बने द्रोणिका के असर से जिले के अधिकांश हिस्सों में मंगलवार और बुधवार को बारिश हुई। साथ ही कई इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम में बदलाव के कारण मंगलवार की रात बसना विकासखंड के कई गांव तेज बारिश हुई। वहीं देर रात करीब 2 बजे महासमुंद शहर में तेज बारिश के साथ ओले गिरे। इसी तरह बुधवार को भी जिले के एक दो स्थानों में बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को भी हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि एक चक्रीय चक्रवाती घेरा 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के ऊपर स्थित है। दूसरा चक्रीय चक्रवाती घेरा पूर्वी विदर्भ और उसके आसपास स्थित है।

इसके साथ ही एक द्रोणिका 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर पूर्वी विदर्भ से तमिलनाडु तक स्थित है। इसी के असर से गुरुवार को बारिश की संभावना है।
कांकेर: अंधड़ से कई जगहों पर पेड़ गिरे, एक की मौत

मंगलवार की रात तेज आंधी-तूफान के बारिश हुई। आंधी-तूफान से जिले के कई जगहों पर बड़ी संख्या में पेड़ गिरे। वहीं कई जगहों पर घर के छप्पर उड गए। पेड़ बिजली तार पर गिरने से बड़ी संख्या में पोल टूट कर गिर गए हैं। इसके चलते रात से ही बिजली बंद रही। दूसरे दिन भी कई गांवों में बिजली बहाल नहीं हो पाई। तेज आंधी बारिश के चलते फसलों को भी नुकसान हुआ है। भानुप्रपातपुर के ग्राम पंचायत तरहुल सलिहापारा में खेत के महुआ पेड़ की बड़ी डंगाली बीते रात आई आंधी से टूटकर दूसरे पेड़ पर फंस गया था। बुधवार को खेत का मालिक जगन्नाथ तारम (60) पहुंचा और डंगाली को पेड़ से गिराने चढ़ा हुआ था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह नीचे गिर गया। इसके चलते उसकी मौके पर ही मौत हो गई।



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जशपुर में बुधवार सुबह तक खेत में नजर आए ओले।




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जशपुर में 11 दिन में दूसरी बार गिरे ओले आम और सब्जियों की फसल को नुकसान

पश्चिमी विक्षोभ के कारण हर रोज जिले में कहीं ना कहीं बादल बरस रहे हैं। जिले में 11 दिन मेंदूसरी ओलावृष्टि हुई। इससे फसल को नुकसान पहुंचा। इससे पहले 26 अप्रैल को ओलावृष्टि से किसानों के घरों को भारी नुकसान पहुंचा था।
मंगलवार की रात को शहर सहित जिले के पाठ इलाकों में आधे घंटे तक आंधी चली। हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि पेड़ों की डंगालें टूटी और शहर में लगे होर्डिंग्स भी उखड़ गए। आंधी के बाद बारिश हुई। इधर पाठ इलाकों में ओलावृष्टि भी खूब हुई है। पंडरापाठ, सुलेसा, महनई, चंपा सहित अन्य इलाकों में रात में गिरे ओले सुबह तक पिघल नहीं पाए।
मंगलवार को सुबह व शाम को आसमान में घने बादल छाए और दोपहर में हल्की धूप थी। रात करीब 10 बजे काले बादलों ने आसमान काे पूरी तरह ढंक लिया और तेज हवाएं चलने लगीं। आंधी के वक्त शहर में एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद कर दी। ग्रामीण इलाकों में तार टूटने से रातभर बिजली गुल रही। हवा की रफ्तार जैसे ही थमी बारिश होने लगी। पाठ इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। सन्ना, पंडरापाठ, सोनक्यारी, आस्ता, सुलेसा, महनई सहित अन्य इलाकों में खेती प्रभावित हुई है।

ओलावृष्टि से नुकसानपर मंत्री ने ली रिपोर्ट

महिला बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री अनिला भेंडिया ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से अपने प्रभार के जिले बेमेतरा और कवर्धा में कोरोना से बचाव, प्रवासी मजदूरों की वापसी की तैयारी पर रिपोर्ट ली। उन्होंने किसानो को असमय वर्षा, ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भी जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। कवर्धा जिले में फसल बीमा की राशि का भुगतान किसानों को कर दिया गया है। किसानों की मदद के लिए 8 करोड़ रुपए कवर्धा और 15 करोड़ रूपए बेमेतरा जिले को मिले हैं।

महासमुंद: अधिकतर हिस्से में बारिश, ओले भी गिरे

महासमुंद|चक्रीय चक्रवाती घेरे के साथ बने द्रोणिका के असर से जिले के अधिकांश हिस्सों में मंगलवार और बुधवार को बारिश हुई। साथ ही कई इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम में बदलाव के कारण मंगलवार की रात बसना विकासखंड के कई गांव तेज बारिश हुई। वहीं देर रात करीब 2 बजे महासमुंद शहर में तेज बारिश के साथ ओले गिरे। इसी तरह बुधवार को भी जिले के एक दो स्थानों में बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को भी हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि एक चक्रीय चक्रवाती घेरा 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के ऊपर स्थित है। दूसरा चक्रीय चक्रवाती घेरा पूर्वी विदर्भ और उसके आसपास स्थित है।

इसके साथ ही एक द्रोणिका 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर पूर्वी विदर्भ से तमिलनाडु तक स्थित है। इसी के असर से गुरुवार को बारिश की संभावना है।



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जशपुर में बुधवार सुबह तक खेत में नजर आए ओले।




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कोरिया में छेड़छाड़ का विरोध करने पर महिला की हत्या, कुछ दिन पहले ही जेल से छूट कर आया था आरोपी

कोरिया में छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक युवक ने महिला की हत्या का दी। इसके बाद फरार हो गया। आरोपी कुछ दिन पहले ही जेल से छूटकर आया था। इसके बाद से ही महिला को मारने के लिए घात लगाए हुए था। मौका मिलते ही उसने बच्चों के सामने ही उनकी मां को मार डाला। घटना सोनहत थाना क्षेत्र की है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, सोनहत के ग्राम मेंड्राकला निवासी ओम प्रकाश आए दिन गांव की ही सुनीता से छेड़छाड़ करता था। इस पर सुनीता ने पुलिस में शिकायत की तो उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। कुछ दिन पहले ही आेम प्रकाश जेल से छूटकर आया और तभी से सुनीता को धमकी दे रहा था। आरोपी ओम प्रकाश देर रात सुनीता के घर के बाहर झाड़ियों में घात लगाकर बैठ गया।


झाड़ियों में आरोपी को छिपे देख पति ने बुलाई पंचायत
इसी दौरान पड़ोस में जा रहे बच्चों की नजर पड़ी। झाड़ियों में जानवर होने की आशंका से उन्होंने परिजनों को सूचना दी। इस पर परिजनों ने टॉर्च से देखा तो आरोपी वहां से भाग निकला। इसके बाद सुनीता के पति ने सरपंच को घटना की जानकारी दी और पंचायत की बैठक बुलाई। इस दौरान आरोपी को भी बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आया। वहीं वार्ड 4 के पंच भी अनुपस्थित थे।


पंच को बुलाने के लिए जा रही सुनीता पर किया हमला
अनुपस्थित पंच का घर पास में होने के कारण उन्हें बुलाने के लिए सुनीता खुद ही चली गई। पंच के घर बच्चों ने बताया कि वे महुआ बीनने नदी के पास गए हैं। इस पर सुनते भी वहां चली गई, साथ में उसके दो बच्चे भी थे। इसी दौरान जंगल के पास आरोपी ओम प्रकाश ने सुनीता पर हमला कर दिया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात की सूचना मिलने पर पंच वहां पहुंचे, लेकिन आरोपी भाग चुका था।



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छत्तीसगढ़ के कोरिया में छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक युवक ने महिला की हत्या का दी। पहले भी आरोपी महिला से छेड़छाड़ के मामले में जेल गया था। वहां से छूटने के बाद वारदात को अंजाम दिया।




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फरीदनगर की पॉजिटिव महिला के संपर्क में आने वाले 13 लोगों की रिपोर्ट आई निगेटिव

फरीद नगर निवासी कोरोना पॉजिटिव महिला के क्लोज कांटेक्ट में रहने वाले 13 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। महिला को एम्स में शिफ्ट करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसके कांटेक्ट में आने वाले कुल 16 लोगों को डॉटा तैयार किया था।
इनमें से 13 की रिपोर्ट गुरुवार की शाम एम्स से जारी कर दी गई। शेष 3 की रिपोर्ट की शुक्रवार को आने की संभावना है। उसमें पॉजिटिव के परिवार के बच्चे और वृद्ध शामिल हैं। इससे पहले 3 अप्रैल को एक ही दिन मिले 8 पॉजिटिव के क्लोज कांटेक्ट में आने वाले करीब सभी की रिपोर्ट भी निगेटिव आ चुकी है। इसमें कुछ हेल्थ वर्कर और आश्रय स्थलों में तैनात कर्मचारियों की रिपोर्ट का अभी इंतजार है। पिछले 5 दिनों में जितने भी एक्टिव केस मिले उनके मातहतों ने सबकी कांटेक्ट हिस्ट्री तलाश ली गई है। जो भी अपनी ट्रैवलिंग हिस्ट्री छिपाएंगे, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत एक्टिव केस के पति पर अपराध दर्ज किया गया है।

फरीदनगर में 25 सैंपलों की जांच निगेटिव आई है
फरीदनगर की पॉजिटिव मरीज के आस-पास रहने वालों की स्क्रीनिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को शिविर लगाया। इसके तहत 25 संदेहास्पद लोगों की रैपिड किट से कोरोना की जांच की गई। इस जांच में सभी के सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

तीनों बार्डर पर आवाजाही करने वालों की स्क्रीनिंग
जिले के तीनों बार्डर क्रमश: अंजोरा, धमधा और कुम्हारी पर 8 मई से स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात रहेगी। सीएमएचओ ने तीनों टीमों को बनाकर जिम्मेदारी सौंप दी है। यहां दूसरे प्रदेशों से पैदल या किसी अन्य साधन से दुर्ग आने वालों को रोक लिया जाएगा।

कोरोना से संबधित तीन चिंताजनक खबरें भी आई
1 कोरोना के नोडल अफसर 6 दिन की छुट्टी पर

नोडल ऑफिसर इंचार्ज ऑफ कोविड-19 डॉ. आरके खंडेलवाल गुरुवार से 6 दिन की छुट्टी पर चले गए है। सीएमएचओ को भेजे पत्र में स्वास्थ्यगत कारणों को हवाला दिया है। खंडेलवाल नोडल के साथ आईडीएसपी, नर्सिंग होम एक्ट व एनसीडी का प्रभारी थे।

2 होम क्वारेंटाइन के लिए टीमें बुलाया, सूची नहीं दी

कैंप और रिसाली में बाहर से आने वालों की निगरानी के साथ ही होम क्वारेंटाइन करने के लिए जो दो टीमें बनाई गई जिम्मेदार उनको शाम तक उनकी सूची ही नहीं दे पाए। ऐसे में दोनों टीमों के एक-एक सदस्यों को शाम 5 बजे बिना काम के बैठना पड़ा। तीन टीमों ने 3 बजे सूची दी।
3 निर्णय लेने में देरी, पांच घंटे में लिया सैंपल

फिवर क्लीनिक में सैंपल देने जाने वालों को पांच से सात घंटे लग रहे हैं। संभावितों के बारे में निर्णय लेने लेटलतीफी की जा रही। दो वरिष्ठ डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन फिर भी सुधार नहीं हो पाया है।61 बाहर से आए, सभी को होम क्वारेंटाइन किया है
24 घंटे में बाहर से आने वाले 61 लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने ट्रेस किया है। प्रोटोकॉल के अनुसार सभी को होम क्वारेंटाइन करा दिया गया है। ग्रीन जोन से जिले में आए हैं। 355 से बढ़कर 414 हो गई है।

कोरोना नोडल का प्रभार दूसरे को दिया गया है
"स्वास्थ्य कारणों से कोरोना के नोडल इंचार्ज डॉ. आरके खंडेलवाल छह दिनों की छुट्टी पर चले गए है। उनकी जगह दूसरे डॉक्टर को प्रभार मैने दे दिया है।"
-डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ, दुर्ग



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Report of 13 people who came in contact with positive woman of Faridnagar came negative




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नया जिला अस्पताल 100 बेड का बनेगा, डाॅक्टरों व स्टाफ सहित 133 पद मंजूर

मेडिकल काॅलेज के अलावा अब जिले के लिए एक नया जिला अस्पताल भी बनेगा। इसके लिए शासन ने विशेषज्ञ डाॅक्टर सहित 133 पद स्वीकृत कर दिए हैं। इसके बजट के लिए डीडीओ एकाउंट भी शासन से जारी हो गया है।
अभी पुराने जिला अस्पताल के मेडिकल काॅलेज में समायोजित होने से यह कार्यरूप में नहीं रह गया था। यहां के पदस्थ डाॅक्टर व अन्य कर्मचारी भी मेडिकल काॅलेज का स्टाफ बन गए थे। इससे इनका वेतन भी मेडिकल कॉलेज के डीडीओ से निकलता है। नया जिला अस्पताल बनने से अब इसी के डीडीओ से इनका वेतन आने वाले समय में निकलेगा। नया जिला अस्पताल 100 बेड का होगा।
हालांकि नए जिला अस्पताल के पूरी तरह अस्तित्व में आने तक इसके डाॅक्टर व अन्य स्टाफ मेडिकल काॅलेज में अटैच रहेंगे, ताकि यहां का सेटअप में प्रावधान न हो। मेडिकल काॅलेज अस्पताल के एमएस सह सीएमएचओ डाॅ. पीएस सिसोदिया ने बताया कि जिला अस्पताल के लिए शासन का आदेश आ गया है।
10 स्पेशलिस्ट और 11 मेडिकल ऑफिसर होंगे

नए जिला अस्पताल में मेडिसिन, सर्जरी, शिशु रोग, गाइनिक, ईएनटी, निश्चेतना में विशेषज्ञ डाॅक्टर के दो-दो पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा 11 मेडिकल ऑफिसर व 45 नर्सिंग स्टाफ सहित 133 कर्मचारी रहेंगे। आने वाले समय में इसका ओपीडी शुरू होगा। संभव है एमसीएच में इसका अलग से सेटअप तैयार कर दिया जाए।

शासन ने की थी घोषणा लेकिन पद अब हुए मंजूर

राज्य शासन ने अंबिकापुर में नया जिला अस्पताल के लिए घोषणा की थी, लेकिन पद अब तक स्वीकृत नहीं हुए थे। इसको लेकर एमएस सह सीएमएचओ डाॅ. पीएस सिसोदिया द्वारा शासन को पत्र लिखा गया था। फिर 4 मई को डीडीओ के लिए प्रस्ताव भेजा गया। इसके बाद शासन से पद भी स्वीकृत कर डीडीओ एकाउंट चालू कर दिया गया। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।



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11 सौ लोगों को सर्दी-खांसी की शिकायत किसी में नहीं मिले कोरोना संक्रमण के लक्षण

सरगुजा जिले में अभी तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर 35 हजार लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें लगभग 11 सौ सर्दी खांसी के पीड़ित मिले थ,े लेकिन कोरोना के लक्षण इनमें से किसी में नहीं मिले हैं। इससे सरगुजा जिला अब तक ग्रीन जोन में बना हुआ है। जो राहत वाली बात है।
वहीं लॉकडाउन से अलग-अलग क्षेत्रों में फंसे सरगुजा जिले के मजदूरों की घर वापसी गुरुवार से शुरू हो गई। 64 मजदूरों को प्रशासन द्वारा अलग-अलग बसों से अंबिकापुर लाया गया। ये छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा, बिलासपुर, सहित अलग-अलग शहरों में फंसे हुए थे। यहां सभी की बिशुनपुर स्थित सामुदायिक भवन में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर रैपिड किट से जांच की। राहत देने वाली बात ये रही कि इनमें से कोई भी पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं आई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सिर्फ तीन मजदूरों में सर्दी खांसी के सामान्य लक्षण मिले। हालांकि इनमें रैपिड टेस्ट में कोरोना नहीं पाया गया। जांच के बाद सभी मजदूरों को वाहन से उनके घर के लिए भेज दिया गया। ये अभी अपने घर के बजाय पंचायत में ही बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर में 14 दिन तक रहेंगे। इन पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नजर रखेगी। क्वारेंटाइन का समय पूरा होने के बाद ही सभी अपने घर जा सकेंगे।

पंचायतों में मजदूरों के लिए बनाए गए हैं क्वारेंटाइन सेंटर, डॉक्टर रखेंगे निगरानी
मजदूरों की घर वापसी को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर उनके संबंधित पंचायत में स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। जिला मुख्यालय में जांच के बाद ये मजदूर सेंटर में 14 दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में क्वारेंटाइन रहेंगे। भोजन आदि की सुविधा सेंटर में रहेगी। बीच-बीच में इनका स्वास्थ्य परीक्षण होगा। क्वारेंटाइन का समय पूरा होने व स्वास्थ्य सामान्य रहने पर ही उन्हें घर भेजा जाएगा।

सत्तीपारा में दिल्ली से लौटे परिवार के सभी 10 सदस्यों की रिपोर्ट भी आई निगेटिव है
सत्तीपारा में दिल्ली से लौटे एक परिवार की कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार परिवार के 10 सदस्यों का सैंपल लेकर जांच के लिए रायपुर भेजा गया था। सभी की रिपोर्ट निगेटिव है। परिवार की एक महिला दिल्ली में कोरोना से पीड़ित हो गई थी। हालांकि इलाज के बाद वे पूरी तरह ठीक होने के बाद अंबिकापुर लौटीं थी। इससे मोहल्ले में अफवाह फैल गई थी।
देश- विदेश से आए सभी लोगों का सैंपल लेकर रायपुर में कराई गई है कोरोना जांच
सरगुजा जिले में अब तक 483 लोगों का सैंपल लेकर जांच के लिए रायपुर भेजा गया है। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं जो विदेश व देश के दूसरे राज्यों से लौटे हैं। इसके अलावा रैंडम सैंपल भी लेकर भेजे गए हैं। इनमें से 393 की रिपोर्ट आ गई और सभी निगेटिव है। हालांकि 90 की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। एक दो दिनों में इनकी भी रिपोर्ट आने की उम्मीद है। फिलहाल अब तक आई रिपोर्ट निगेटिव होने से राहत है।
स्वास्थ्य विभाग हालात पर रखे हुए नजर, लोग बरतें सतर्कता
"स्वास्थ्य विभाग हालात पर नजर रखे हुए है। बाहर से लाए जाने वाले एक-एक व्यक्ति का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। अब तक कोई कोरोना संदिग्ध नहीं मिला है। लोग अपने-अपने स्तर पर सतर्कता बरतें और शासन व प्रशासन द्वारा बताए नियमों का पालन करें। कोरोना से बचाव का यह सबसे बेहतर तरीका है।"
-डाॅ. पीएस सिसोदिया, सीएमएचओ, सरगुजा



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11 hundred people did not get any symptoms of cold and cough, symptoms of corona infection




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अप्रैल-मई का अतिरिक्त चावल व चना 31 तक ले सकेंगे फ्री में

जिले के 442 राशन दुकानों में चावल लेने को लेकर लगाई गई बंदिशें हटा दी गई है। अब बीपीएल कार्डधारी कभी भी इस माह के अंदर चावल लेने पहुंच सकते हैं।
अप्रैल-मई का अतिरिक्त चावल पहुंच गया है। जिसे 31 मई तक मुफ्त में ले सकेंगे। जून का चावल इस माह नहीं ले जाएंगे तो अगले माह ले जा सकते हैं। पहले वार्डवार हितग्राहियों को बुलाकर चावल वितरित किया जा रहा था। जिसके कारण लोग जरुरी काम छोड़कर चावल लेने लाइन लगाने मजबूर थे लेकिन अब आवश्यकता अनुसार पहुंच सकते हैं। मास्क पहनना जरूरी है। इस माह से अप्रैल, मई और जून का अतिरिक्त चावल बांटा जा रहा है। इसके अलावा जून माह का आवंटन हिसाब से बांट रहे हैं।
अफसरों का कहना है कि लोगों में जागरुकता आने लगी है, भीड़भाड़ न हो इसलिए राशन दुकानों के सामने मार्किंग की गई है। इसी हिसाब से लोग अपने सुविधानुसार चावल लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
साबुन, बाल्टी, पानी की व्यवस्था की गई है ताकि हाथ धोकर लोग चावल लेने लाइन में लग सकें। इससे कोरोना का संक्रमण भी नहीं रहेगा। सोशल डिस्टेंस का पालन होगा। पहली बार चार ब्लॉक बालोद, गुरूर, गुंडरदेही व डौंडीलोहारा के बीपीएल परिवारों को चावल के साथ एक किलो चना भी दिया जा रहा है।
जिला खाद्य अधिकारी विजय किरण ने बताया कि अप्रैल-मई का अतिरिक्त चावल राशन दुकानों में पहुंच चुका है, कार्ड दिखाकर हितग्राही 31 मई तक ले जा सकते हैं। इसके बाद जून माह में उसी माह का आवंटन ले सकते हैं। इसमें किसी तरह की बाध्यता नहीं है। हमारा उद्देश्य यही है कि सभी को शासन के आदेश व आवंटन अनुसार चावल मिले।

जिनके पास कार्ड नहीं वे परेशान न हों, उन्हें पंचायतों व अन्न बैंक से मिलेगा चावल, नान से कर रहे हैं भंडारण
जिले के 8 शहरी और 435 ग्राम पंचायत क्षेत्र में जिन परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं है, उन्हें भी प्रत्येक सदस्य के हिसाब से 5-5 किलो चावल मिलेगा। ऐसे परिवारों के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में अलग-अलग व्यवस्था बनाई गई है। ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं शहरी क्षेत्र में अन्न बैंक के माध्यम से जरूरतमंदों को चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में आवंटन अनुसार बीपीएल व एपीएल परिवारों को चावल वितरण किया जा रहा है। जिला खाद्य अधिकारी विजय किरण ने बताया कि जिन परिवारों के पास कार्ड नहीं है, आवेदन लेकर राशन कार्ड बना रहे हैं। दरअसल शासन ने निर्णय लिया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन में प्रभावित राशनकार्ड विहीन परिवारों को भी खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराया जाए। सभी राशन दुकानों में चावल, चना का वितरण हो रहा है। शासन, खाद्य, नान विभाग की ओर से चावल, चना का भंडारण अब तक जारी है। ताकि सभी लोगों को सामग्री दी जा सके और कोई परेशानी न हो।



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Additional rice and gram of April-May can be taken up to 31 free




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15 दिन में महाराष्ट्र, हैदराबाद सहित दूसरे राज्यों से 424 लोग लौटे, परीक्षण के बाद हुए क्वारेंटाइन

कोरोना के कहर के बीच महाराष्ट्र, हैदराबाद सहित दूसरे राज्यों से अब तक जिले में लोगों के आने का सिलसिला जारी है। पिछले 15 दिन में 424 लोग यहां पहुंचे हैं। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सभी को गांव के स्कूल व भवन में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर में शिफ्ट किया गया है। दूसरे राज्यों से लौटने वाले बढ़ते जा रहे हैं। वहीं शासन की ओर से बाहर में फंसे लोगों को लाने की प्लानिंग भी बनी हुई है। ऐसे में यह आंकड़ा बढ़ते क्रम पर रहेगा।
जिलेवासी चिंतित हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ की अपेक्षा दूसरे राज्यों में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और वहीं से लोग आ रहे हंै। 22 अप्रैल काे 3529 लौटे थे। जो गुरुवार को बढ़कर 3953 पहुंच गया है। पहले जो दूसरे राज्य से आते थे, उन्हें 28 दिनों तक होम आइसोलेशन में रखते थे। कोरोना के केस बढ़ रहे तब आने वालों को क्वारेंटाइन सेंटर में शिफ्ट कर रहे हंै। सीएमएचओ डॉ. बीएल रात्रे ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग परीक्षण के अलावा रैपिड टेस्ट किट का उपयोग कर रही है ताकि संक्रमित मरीजों की जानकारी हो सके।

विदेश से आने वाले सभी 65 सुरक्षित, सैंपल रिपोर्ट भी निगेटिव, लगातार नजर रखी है
जिलेवासियों के लिए राहतभरी खबर है कि विदेश से पहुंचे जिले के सभी 65 लोग सुरक्षित हैं। हालांकि सभी को सुरक्षा के लिहाज से लॉकडाउन तक घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी गई है। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट अनुसार दूसरे राज्यों से लौटे 3 हजार 953 लोगों को चिह्नांकित किया गया है। जिसमें 3 हजार 507 का होम आइसोलेशन पूरा हो चुका है। वहीं 446 लोगों को अब तक विशेष निगरानी में रखा गया है। जिसमें बालोद ब्लॉक के 29, डौंडी के 38, डौंडीलोहारा के 253, गुरूर के 40, गुंडरदेही ब्लॉक के 86 लोग शामिल है। इनमें अधिकांश महाराष्ट्र से लौटे हैं।

कोटा से लौटे 31 छात्र 14 दिन के होम आइसोलेशन पर

कोटा (राजस्थान) से लौटे जिले के 31 छात्र-छात्राओं की घर वापसी के बाद इनका गुरुवार से होम आइसोलेशन शुरू हो गया है। इसके पहले बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने सभी छात्र-छात्राओं को हैंड सैनेटाइज कराकर स्वास्थ्य परीक्षण किया। विशेष निर्देशों के साथ उन्हें उनके पालकों को सौंपा गया। इससे पहले छात्र-छात्राओं को लेने उनके पालक सरदार वल्लभ भाई पटेल मैदान पहुंच गए थे। डिप्टी कलेक्टर एवं नोडल अधिकारी प्रेमलता चंदेल ने बताया कि सभी छात्र-छात्राओं को कोटा से वापसी के बाद बिलासपुर में स्वास्थ्य परीक्षण कराकर क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया था। उन्होंने कहा कि सभी छात्र-छात्राएं व उन्हें घर ले जाने आए पालक 14 दिनों तक अपने घर में होम आइसोलेशन में रहेंगे।

लॉकडाउन के पहले की स्थिति- जब पहुंचे थे 505
लॉकडाउन के पहले 23 मार्च तक विदेश से लौटने वाले 23 व देश के दूसरे राज्यों से लौटने वाले 482 (कुल 505) की पहचान की गई थी। ऐसे में लॉकडाउन लगने के बाद 3 हजार 448 लोगों की पहचान की गई है। जो दूसरे राज्यों से लौटे हैं। स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम घरों में पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ले रही है।

सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं: सीएमएचओ
सीएमएचओ डॉ. बीएल रात्रे ने बताया कि दूसरे राज्यों से लौटने वालों की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को संबंधित तक पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण करने निर्देश दिए है। अभी हमारे जिले में स्थिति सामान्य है। फिर भी जागरुकता जरुरी है, क्योंकि कई लोग दूसरे राज्यों से लौटने के बाद भी देरी से जानकारी दे रहे हंै। विभाग अलर्ट है।

एहतियात: 782 में से 766 लाेगाें की सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आई
जिले में ज्यादा लोगों को चिन्हित कर सैंपल लेकर भेजा जा रहा है। कोरोना जांच के लिए रायपुर एम्स व मेडिकल कॉलेज के कोविड लैब में 782 सैंपल भेजे जा चुके हैं। जिसमें 766 लोगों की रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य विभाग को मिल चुकी है। सभी निगेटिव है। 16 सैंपल का रिपोर्ट आना बाकी है। सीएमएचअाे डाॅ. बीएल रात्रे ने बताया कि जितनी सैंपल रिपोर्ट मिली है, वह निगेटिव है। मेडिकल कॉलेज में 14 व एम्स के कोविड लैब में 768 सैंपल भेज चुके हंै। आज भी भेजे हैं।



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424 people returned from other states including Maharashtra, Hyderabad in 15 days, quarantine after trial




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पिछले साल 48, इस वर्ष सिर्फ 47 दिन निर्माण, 2021 में भी बहतराई स्टेडियम पूरा होना मुश्किल

सरकारी दुर्दशा से जूझ रहा बहतराई स्टेडियम 12 साल बाद भी अधूरा है। 2019 और 2020 में जिस गति से निर्माण हुआ अगर निर्माण की गति यही रही तो स्टेडियम 2021 में भी पूरा होना मुश्किल है। पीडब्ल्यूडी के जानकार खुद इस बात को मान रहे हैं। वर्ष 2019 में सिर्फ 48 दिन निर्माण कार्य चला और फिर बंद हो गया। इसी तरह 2020 में सिर्फ 47 दिन निर्माण कार्य चला और अब 18 मार्च से बंद है। इस वर्ष तो लॉकडाउन में निर्माण नहीं करा पाने का बहाना अफसरों ने बता दिया। पिछले वर्ष गर्मी और फिर बारिश में निर्माण नहीं करा पाने का बहाना बताकर बच गए थे। लेकिन दैनिक भास्कर ने पीडब्ल्यूडी के जानकारों से पूछा कि जिस गति से निर्माण चल रहा है, इस हिसाब से स्टेडियम पूरा कम बनेगा? जानकारों ने कहा कि इस वर्ष तो पूरा नहीं होगा। अगर काम की रफ्तार नहीं बढ़ी तो 2021 में भी बहतराई स्टेडियम पूरा होने की संभावना नहीं है। 2008 से बिलासपुर और प्रदेश के खिलाड़ी स्टेडियम के पूरे होने की आस लेकर बैठे हैं लेकिन उनका इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। वर्ष 2018 में 8 महीने निर्माण चला और बारिश के कारण चार महीने बंद रहा। इस आठ महीनों में हॉकी स्टेडियम बनकर तैयार हो गया था लेकिन उसमें भी गैलरी और फ्लड लाइट नहीं लग पई। इसके अलावा इंडोर और आउटडोर में कुछ छोटे काम हुए।
2019 में इंडोर में एसी और हॉकी में लगा था गोल पोस्ट
बीते वर्ष 2019 में 31 मार्च से निर्माण कार्य शुरू हुआ और फिर 10 मई को पूरी तरह बंद हो गया। इन 48 दिनों में आउटडोर स्टेडियम में डामरीकरण का काम हो पाया था। इंडोर में एसी का काम पूरा हुआ। फायर फाइटिंग और एकास्टिंग का काम पूरा हो पाया। हॉकी मैदान में गोल पोस्ट लगाया गया था। इसके अलावा अन्य छोटे काम हुए।
2018 में हॉकी मैदान बनाया गया
वर्ष 2018 में शुरू से निर्माण कार्य चला और बीच में चार महीन ले बारिश में बंद रहा। इन आठ महीनों में हॉकी स्टेडियम पूरा बनकर तैयार हुआ लेकिन गोल पोस्ट लगाया और फिर इसे निकालना पड़ा। फिर 2019 में इसे व्यवस्थित तरीके से लगाया गया। इसी वर्ष इंडोर में कुछ छोटे मोटे काम हो पाए। लेकिन आउटडोर में कोई काम नहीं हुआ।
इस वर्ष सिर्फ सिंथेटिक का काम हो पाया
2020 में 1 फरवरी से आउटडोर में एथलेटिक ट्रैक पर सिंथेटिक गाेंद बिछाने का काम शुरू हुआ और 18 मार्च तक यह काम पूरा हो पाया। इसके बाद लॉकडाउन की घोषणा हो गई और निर्माण पूरी तरह बंद हो गया। दिल्ली से आए एक्सपर्ट की टीम ने ट्रैक पर सिंथेटिक बिछाया। अभी ट्रैक पर मार्किंग का काम बचा है तो दिल्ली की टीम ही करेगी। जानकारों ने बताया कि यह काम इस वर्ष पूरा होना मुश्किल है।
पैसों का इंतजार, मिलते ही जल्द होगा निर्माण
पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एके मंधाना स्टेडियम कब पूरा होगा यह बताने से पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तो लॉकडाउन में निर्माण रुका है। ठेकेदार का भुगतान नहीं हाेने के कारण कुछ काम रुके हैं। स्टीमेंट रिवाइज हुआ है, जिसकी स्वीकृति अभी तक शासन से नहीं मिली है। जब हमारे पास पैसे नहीं है तो निर्माण कैसे होगा। शासन की स्वीकृति हमारे हाथ में नहीं है। रह गई बात स्टेडियम की तो जो काम बचे हैं उन्हें जल्द किया जाएगा। स्टेडियम पूरा होने की निर्धारित निर्धारित तिथि इसलिए नहीं बता पा रहा हूं कि कुछ काम शासन स्तर के हैं जिन्हें पूरा होने में समय लगता है।



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Construction last year 48, just 47 days this year, completion of Bahtarai Stadium in 2021 is difficult




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जिले में लौटे 147,00 मजदूरों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं

दूसरे राज्यों से लौट रहे मजदूरों से कोराेना संक्रमण के खतरे के बीच राहत वाली खबर सामने आई है। जिले में अब तक लौटे 14 हजार 700 मजदूरों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं पाया गया है। इन मजदूरों को किसी तरह के सर्दी, खांसी या बुखार की भी शिकायत नहीं है। वहीं अब तक 9 हजार से अधिक लोगों ने 28 दिन का क्वारेंटाइन पीरियड भी पूरा कर लिया है। इनमें मजदूरों के अलावा ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो दूसरे राज्यों से जिले में लौटे हैं।
जिले में रोजाना बड़ी संख्या में मजदूरों की आमद जारी है। आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में 21 हजार से अधिक मजदूरों की इंट्री हो चुकी है। इन मजदूरों से संक्रमण के खतरे की आशंका भी बनी हुई है। लेकिन अब तक जिले में ऐसी स्थिति निर्मित नहीं हुई है। सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि दूसरे राज्यों से पहुंच रहे मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच लगातार जारी है। अब तक 14,700 मजदूरों की जांच की जा चुकी है। शेष मजदूरों की जांच भी जारी है। पंचायत लेवल में ही स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात है, शिकायत मिलने पर जांच कर रहे हैं।
अतिसंवेदनशील क्षेत्र को निरंतर सैनिटाइज करने कहा
राजनांदगांव जिला बागनदी बॉर्डर से लगा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 6 आवागमन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। जिले में महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों के साथ ही अन्य राज्य के मजदूर भी अपने राज्यों को जाने के लिए निरंतर आने लगे। उनका आश्रय स्थल रैनबसेरा बनाया गया। कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य रैनबसेरा जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस अतिसंवेदनशील क्षेत्र को निरंतर सैनिटाइज करने के लिए निर्देश दे रहे हैं। यहां स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जा रहा है।
गांव के भीतर एंट्री पर रोक, स्कूलों में क्वारेंटाइन किए
जिले में रोजाना मजदूरों की आमद जारी है। प्रशासनिक अमले ने अब तक 14 से अधिक मजदूरों की जांच तो कर ली है। लेकिन आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और दूसरे हिस्सों से आने वाले मजदूरों की संख्या 21 हजार के पार पहुंच गई हैं। इनकी जांच भी पंचायतों में जारी होने का दावा किया जा रहा है, सभी की निगरानी भी हो रही है। लेकिन जब तक इन मजदूरों की जांच की रिपोर्ट और स्वास्थ्य की स्थिति की पुष्टि नहीं हो जाती, संशय रहेगा। स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल यूनिट को अब तक किसी भी पंचायत से मजदूरों के सेहत बिगड़ने या रैपिड टेस्ट की स्थिति के लिए कॉल नहीं मिला है।
क्वारेंटाइन टाइम पूरा होते ही मिली राहत
मजदूरों सहित दूसरे राज्यों से लौटे लोगों को तत्काल क्वारेंटाइन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक अब तक ऐसे 9 हजार लोगों ने अपना 28 दिन का क्वारेंटाइन पीरियड पूरा कर लिया है। इन 28 दिनों में 9 हजार लोगों में किसी तरह की स्वास्थ्यगत कोई शिकायत सामने नहीं आई है। इससे भी स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली हैं। वर्तमान में जो क्वारेंटाइन सेंटर में मौजूद हैं, वहां भी सतत निगरानी जारी है, लेकिन अब तक किसी की सेहत नहीं बिगड़ी है। स्वास्थ्य अमला इन पर नजर रखे है।
गांव जाने की खुशी कहा अब जान में जान आई
हैदराबाद से आए श्रमिक गोवर्धन एवं उनकी पत्नी संतोषी की बातों से खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि हमर अपन गांव जाए के अब्बड़ खुशी लगथे। वहां सरकार मदद कर रही थी लेकिन परेशान होने लगे थे। कल वे विचारपुर रवाना होंगे। हैदराबाद से आए श्रमिक देवराज कोशले ने कहा कि अब जब वापस छत्तीसगढ़ आ गए हैं, तब जान में जान आई है। जैसे ही जानकारी मिली कि लॉकडाउन में वापस घर जा सकते हैं, पत्नी दृष्टि कोशले एवं अपनी नन्ही बच्ची नीतू कोशले को लेकर निकल पड़े। उन्होंने यहां की व्यवस्था को बेहतर बताया।

आप भी रहें अलर्ट
लापरवाही जारी जो बढ़ा सकती है दिक्कतें
मनमानी: गांवों में मजदूरों काे स्कूल या भवनों में क्वारेंटाइन किया गया है। लेकिन कई जगहों पर मजदूरों की मनमानी भी जारी है। क्वारेंटाइन सेंटर से बाहर निकल कर गांव में घूम रहे हैं। इसकी शिकायत भी पुलिस व प्रशासन तक पहुंच रही है। ऐसे मामले में एफआईआर तक हो चुकी है। ऐसी हरकतें संक्रमण का खतरा बढ़ा रही है।
अनदेखी: ग्रीन जोन के चलते बाजार में राहत दी गई है। लेकिन लोगों की भीड़ अब संक्रमण के खतरे की अनदेखी कर रही है। बाजार से लेकर सभी व्यावसायिक हिस्से में सामान्य दिनों की तरह भीड़ जुट रही है। पुलिस की समझाइश के बाद भी लोग बेवजह घरों से बाहर आ रहे हैं।
सूचना दें: शहर सहित जिले के कई हिस्सों में लोग दूसरे राज्यों से लौटने के बाद भी प्रशासन को सूचना नहीं दे रहे हैं। ऐसी कई शिकायतें हाल ही में सामने आ चुकी है।



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147,00 laborers returned to the district with no signs of corona




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मना करने के बाद भी उपसरपंच का प्रत्याशी उतारा, 11 परिवार बहिष्कृत

तीन महीने पहले हुए पंचायत चुनाव में मना करने के बावजूद उपसरपंच का प्रत्याशी उतारना सरपंच सहित गांव के 11 परिवारों को महंगा पड़ गया। गांव के कथित प्रमुखों ने सरपंच सहित 11 परिवार के सभी सदस्यों को गांव से बहिष्कृत कर दिया गया है। उन्हें इसके लिए 7 लाख रुपए का जुर्माना जमा करने का भी फरमान सुनाया गया है।
मामला डोंगरगढ़ ब्लाक के ग्राम पंचायत मुड़पार का है। इस पंचायत में छोटे मुड़पार नामक आश्रित ग्राम भी मौजूद है। पीड़िता सरपंच लता ठाकरे ने बताया कि चुनाव के पहले दोनों गांव के कुछ प्रमुखों ने सरपंच प्रत्याशी बड़े मुड़पार और उपसरपंच का प्रत्याशी छोटे मुड़पार से चुनने का फरमान जारी किया था, तब चुनाव में बड़े मुड़पार से वह जीतकर आई। इसके बाद उन्हीं के गांव के दूसरे व्यक्ति ने उपसरपंच का पर्चा भरा और सभी 11 परिवार ने उसके समर्थन में भी काम किया। इसी को फरमान नहीं मानने की सजा और मनमानी बताकर गांव के प्रमुखों ने सभी परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया है। सरपंच लता ठाकरे सहित पीड़ितों ने मामले की शिकायत पुलिस से की है। एएसपी जीएन बघेल ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से मामले नहीं सुलझाया जा सका था। जल्द ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। अन्यथा नियमत: कार्रवाई की जाएगी। चुनाव के बाद से ही इन परिवारों को गांव से बहिष्कृत कर दिया गया है। इन परिवार के किसी भी कार्यक्रम में गांव का कोई दूसरा सदस्य नहीं जा रहा है।
हुक्का-पानी बंद, गांव में मवेशी चरने नहीं दे रहे
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि गांव में सामान्य ढंग से जीवन यापन की वापसी के लिए उन्हें 7 लाख रुपए का जुर्माना जमा करने कहा गया है। इनमें अलग-अलग परिवार से 1 लाख से लेकर 2.50 लाख रुपए तक के जुर्माने की सूची दी गई है। पीडितों के मुताबिक वे पहले कई बार इन ग्राम प्रमुखों के पास जाकर विनती कर चुके है। हुक्का पानी बंद होने के चलते अब उनके मवेशियों को भी गांव के चारागाह में जाने नहीं दे रहे हैं।
23 लोगों के खिलाफ की गई नामजद शिकायत
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में 23 लोगों के खिलाफ नामजात शिकायत की है। पीड़ितों ने बताया कि ये खुद को दोनों गांव का प्रमुख बताते है, और खुद के फैसले को मानने के लिए सभी ग्रामीणों पर दबाव बनाते है। इनकी बातों की अनदेखी कर देने वालों को जुर्माना और गांव से बहिष्कृत कर देने की लगातार धमकी दी जाती है। ग्रामीणों ने पुलिस से मांग की है कि मामला दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवार ने अब पुलिस व प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।



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Even after refusing, Upasarpanch candidate landed, 11 families expelled




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सरकारी आदेश के खिलाफ प्राइवेट स्कूल संचालक पहुंचे हाईकोर्ट, कहा- ट्यूशन फीस लेने की मिले अनुमति 

छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों के फीस लेने पर लगाई गई रोक के खिलाफ प्रबंधकों ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया है कि उन्हें ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी जाए। इसको लेकर बिलासपुर के 22 प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों के संगठन ने हाईकोर्ट से राहत की मांग की है। याचिका अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव के माध्यम से प्रस्तुत की गई है।


प्राइवेट स्कूल के संचालकों के संगठन बिलासपुर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने संचालक लोक शिक्षण की ओर से जारी आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में संचालक ने कहा है कि निजी स्कूल लाॅकडाउन अवधि में स्कूल फीस स्थगित रखें। साथ ही आदेश दिया है कि संस्थान के सभी शिक्षक और कर्मचारियों को वेतन देना सुनिश्चित करें। संचालक ने शाला प्रबंधकों को अभिभावकों से फीस नहीं मांगने का आदेश दिया है।


इन आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत की गई है। याचिका में बताया गया है कि निजी स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हैं। उनकी तरफ से संचालक को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया है। इसमें जो अभिभावक सक्षम हैं उनसे ट्यूशन फीस लेने की अनुमति देने की भी मांग की गई है। अगर वे फीस नहीं ले पाएंगे तो कर्मचारियों और शिक्षकों का वेतन कहां से देंगे।



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कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में छत्तीसगढ़ के सभी प्राइवेट स्कूलों में फीस लेने पर रोक लगा दी गई है। इसको लेकर अब बिलासपुर के प्राइवेट स्कूलों के संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।




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सेल में 10000 अप्रेंटिसशिप भर्ती की ऑनलाइन प्रक्रिया हुई शुरू

बीएसपी सहित सेल की सभी इकाइयों में 10000 अप्रेंटिसशिप भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदकों को नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (एनएटीएस) के वेबसाइट में आवेदन की औपचारिकता पूरी करनी होगी। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने 29 अप्रैल को डायरेक्टोरेट आफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (डीपीई) को पत्र लिखकर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों में वर्तमान मैनपावर क्षमता का 10 से 15% अप्रेंटिसशिप भर्ती के लिए कहा है। जिसके मुताबिक, सेल में करीब 10000 अप्रेंटिस की भर्ती की जानी है। अप्रेंटिसशिप करने वालों को शैक्षणिक योग्यता के मुताबिक 5 से 9000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।



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शहर के 5 हजार छात्र 12वीं के बचे हुए एग्जाम देंगे

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 12वीं के बचे हुए पर्चे की तिथियां घोषित कर दी हैं। इस बार सीबीएसई पैटर्न के अंतर्गत 12वीं की परीक्षा में ट्विनसिटी से करीब 5 हजार बच्चे शामिल हो रहे हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह में लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद उनके बचे हुए विभिन्न विषयों के 29 पर्चे स्थगित हो गए थे।
इसमें भाषा और कुछ प्रमुख विषयों के पर्चे हैं। परीक्षाएं 1 से 15 जुलाई के बीच होंगी। परीक्षा पुराने समय के अनुसार होंगी। सिर्फ इसकी तिथियां बदली गई हैं। स्टूडेंट्स को एग्जाम के लिए 53 दिन ही मिलेंगे। ऐसे में स्टूडेंटस् को पूरी मेहनत के साथ और मन लगाकर पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी करनी होगी।

12वीं का सीएस, आईटी, भूगोल के पर्चे हैं बचे: क्षेत्रीय समन्वयक आरएस पांडेय ने बताया कि मार्च के अंतिम सप्ताह तक 12वीं के भी अधिकांश पर्चे हो चुके थे, लेकिन भाषा, रीजनल लेंग्वेज और कुछ प्रमुख विषय के पर्चे नहीं हो पाए थे। लॉकडाउन की घोषणा के बाद परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थी। नई समय सारणी के अनुसार अब बचे हुए 29 पर्चे होंगे। इसमें मुख्य विषय हैं बिजनेस स्टडी, कंप्यूटर साइंस, इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी, भूगोल आदि। परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों को भरपूर समय दिया गया है। इस दौरान वह पर्चों की अच्छे से तैयारी कर सकेंगे।

तैयारी के लिए मिल रहे हैं 53 दिन : 9 मई से 30 जून तक बच्चे परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। इस तरह उन्हें प्रिपरेशन के लिए 53 दिन मिलेंगे। स्थगित परीक्षाएं 1 जुलाई से होंगी। 15 जुलाई के बीच सारे बचे हुए पर्चे हो जाएंगे। इन दिनों मार्च में हुए पर्चों के मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। परीक्षाओं के दौरान ही उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया जाएगा, ताकि जल्दी से जल्दी नतीजे घोषित करने में किसी तरह की परेशानी न हो और बच्चे अपनी इच्छानुसार अकादमिक या प्रोफेशनल कॉलेजों में प्रवेश ले सकेंगे।
जबकि, बाहर जिलों से आए कई स्टूडेंट्स वापस चले गए हैं अपने घर
ट्विनसिटी में दुर्ग जिले समेत पूरे राज्य से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। उनके साथ ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के बच्चे भी ट्विनसिटी में ही रह कर 12वीं की परीक्षा के साथ प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश की तैयारी करते हैं। अभी सभी बच्चे छात्रावासों के बंद होने की वजह से अपने घर चले गए हैं। उनके बताए मोबाइल नंबरों पर परीक्षा की सूचना दी जाएगी। स्कूल के सूचना पटल पर भी समय सारणी चस्पा किया जाएगा। बता दें कि दुर्ग-भिलाई के स्टूडेंट्स ऑनलाइन क्लासेस से भी तैयारी कर रहे हैं।
10वीं के बचे सभी पेपर की होगी इंटरनल मार्किंग
10वीं के बचे हुए पर्चे नहीं होंगे। अधिकांश विषयों की परीक्षाएं हो चुकी हैं। सामान्य भाषा और संगीत के पर्चे बचे हैं। उसमें शामिल होने वाले बच्चों की इंटर्नल मार्किंग की जाएगी। यानी शिक्षा सत्र के दौरान यूनिट टेस्ट, हाफ ईयरली और मॉडल पेपर के साथ ही प्रैक्टिकल परीक्षा में जो मार्क्स मिले होंगे उसके अनुसार जिन विषयों की परीक्षाएं नहीं होंगी, उनमें छात्र-छात्राओं को अंक दिए जाएंगे। बताया जाता है कि अभी तक करीब 70 फीसदी कॉपियों का मूल्यांकन हो चुका है। सीबीएसई कॉपी चेक होने के बाद जल्द ही रिजल्ट भी जारी करेगा, ताकी आगे की पढ़ाई शुरू हो सके।



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बैंड-बाजा और बारात के बिना घर में ही होगी शादी, 11 परिवारों ने मांगी अनुमति

लॉकडाउन में ढील के साथ ही शादियों के लिए अनुमति मिलने लगी है, लेकिन सोशल डिस्टेसिंग के पालन जैसी शर्तों का कड़ाई से पालन करना होगा। सूरजपुर में कोरोना के केस मिल चुके हैं। इसलिए जिले में 20 लोगों को ही शादियों में शामिल होने की अनुमति दी जा रही है। जबकि ग्रीन जोन में शामिल अंबिकापुर में 50 लोग शामिल हो सकेंगे। अंबिकापुर में शादी की अनुमति के लिए 11 आवेदन अब तक आ चुके हैं और शर्तों के साथ अनुमति दी जा रही है। एसडीएम अजय त्रिपाठी ने बताया कि शादियों में सोशल और फिजिकल डिस्टेसिंग का पालन करना होगा। वहीं मास्क अनिवार्य हैं। शादी में शामिल होने वाले लोगों की अगले दिन सूची देनी होगी। शादियों के लिए जो आवेदन आए हैं, वे सरगुजा और इससे लगे जिलों के हैं।

कोरोना के कारण अब तक टल चुकी हैं दो सौ शादियां, अब नई डेट में होंगी
14 अप्रैल काे खरमास खत्म हाेते ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होनी थी। जिले भर में 15 अप्रैल से 29 मई तक होने वाली दाे साै से अधिक शादियां टल गईं थीं। इससे सराफा, बर्तन, किराना कैटर्स, मिठाई कारीगर, रिसोर्ट, बरातघर, बैंडबाजा वालाें से लेकर पंडितों का 30 करोड़ का लगभग कारोबार प्रभावित हुआ था। शहर में 18 बारात घरों में केवल अप्रैल में 50 शादियां कैंसिल हो गई थीं।

शादियां होंगी, लेकिन सार्वजनिक भवनों का नहीं किया जा सकेगा इनमें उपयोग
शादियों के लिए जिन शर्तों के साथ अनुमति दी जा रही है उनमें शादियां घर पर ही होंगी। बारात नहीं निकाली जाएंगी। वहीं सार्वजनिक भवन का शादियों के लिए उपयोग नहीं होगा। ध्वनि बैंड बाजे और डीजे आदि का उपयोग नहीं कर सकेंगे। वहीं सामूहिक भोज पर भी प्रतिबंध रहेगा। चार पहिया वाहन में ड्राइवर सहित चार लोगों को ही आवागमन की अनुमति होगी।

30 जून तक मुहूर्त, एक जुलाई से बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य
30 जून तक विवाह के लग्न मुहूर्त हैं। एक जुलाई को आषाढ़ शुक्ल एकादशी (हरिशयरी एकादशी है) इस दिन भगवान क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाते हैं और पुन: कार्तिक शुक्ल एकादशी देवोत्थान एकादशी के दिन जागते हैं जो 25 नवंबर को है। इन चार महीनों मे कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।

वर - वधू अलग-अलग जिले के निवासी होने के कारण आ रही थी दिक्कत
बलरामपुर-सूरजपुर जिले में शादियों के लिए अनुमति मिलने के बाद कई लोगों ने यहां आवेदन लगाया था। लकड़े वाले बलरामपुर के थे और लकड़ी वाले अंबिकापुर के। बलरामपुर जिला प्रशासन से अनुमति मिल गई थी और अंबिकापुर में अनुमति नहीं मिलने के कारण लोग परेशान थे। इसे देखते हुए यहां भी अनुमति दी जा रही है।



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एनसीसी कैडेट्स को दिया गया कोविड-19 का बेसिक प्रशिक्षण

कोविड-19 की रोकथाम व बचाव के लिए एनसीसी कैडेट्स को ऑनलाइन प्रशिक्षण मंगलवार को शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में दिया गया। महाविद्यालय के आर्मी सीनियर डिवीजन के 12 व सीनियर विंग के 16 कैडेट एवं नेवल सीनियर डिवीजन के 6 कैडेट्स ने प्रशिक्षण लिया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस ऑनलाइन प्रशिक्षण में एनएचएम श्वेता आडिल व जिला चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी कवर्धा डॉ.सुरेश तिवारी के संयोजन में आईपीएस राजेश अग्रवाल, डॉ.प्रशांत श्रीवास्तव एवं डॉ.अलका गुप्ता ने कोविड-19 सुरक्षा, बचाव व रोकथाम के बारे में बताया। कैडेट्स की शंकाओं का समाधान भी किया गया। प्रशिक्षण में एनसीसी अधिकारी आर्मी मेजर किरण दामले, प्रो. संजय देवांगन नेवल से प्रो. विकास काण्डे, महाविद्यालय के रजिस्ट्रार संजय पर्गणीया, 38 छत्तीसगढ़ एनसीसी बटालियन राजनांदगांव के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजेश अग्रवाल, सूबेदार मेजर मुखतार सिंह सहित सभी स्टाफ ने भाग लिया।



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Kovid-19 basic training given to NCC cadets




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कोरोना के बीच महाराष्ट्र में फंसे हैं बालाेद जिले के 1725 लोग

देश के 22 राज्यों में फंसे 4 हजार 227 लोगों ने ग्राम पंचायत में संपर्क कर और फोन से सूचना देकर घर वापसी के लिए जिला प्रशासन से लगाई गुहार है। जिसमें सिर्फ महाराष्ट्र राज्य में फंसे एक हजार 725 लोग शामिल हैं यानी जितने अब तक दूसरे राज्यों से पहुंचे है, उससे ज्यादा और पहुंचेंगे। जिला प्रशासन के अनुसार मार्च से 7 मई तक 3 हजार 953 लोग दूसरे राज्यों से पहुंचे हैं। वहीं 7 अप्रैल तक दूसरे राज्यों में फंसे 1308 लोगों की पहचान कर सूची तैयार की गई थी। इस हिसाब से एक माह में ही 2 हजार 919 लोगों की और पहचान हुई है। जो कोरोना के कहर के बीच घर वापस आना चाह रहे है।
स्थानीय अफसरों का कहना है कि जिले के कितने लोग दूसरे राज्यों में फंसे है, इसकी जानकारी राज्य शासन को रोजाना दी जा रही है। घर कब तक पहुंचेंगे, इस संबंध में राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। कोरोना को लेकर देशभर में महाराष्ट्र संवेदनशील है, यहां 18 हजार से ज्यादा पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। वहां फंसे लोग चाह रहे हैं कि जल्द गृह जिला पहुंचे। महाराष्ट्र के चिखलोली गांव में फंसे माहुद बी के तिलकराम, चितरंजन ने बताया कि किसी तरह भोजन मिल रहा है लेकिन अब हमें घर आना है, यहां केस बढ़ते ही जा रहे है, काम बंद है। प्रशासन, शासन से उम्मीद है कि जल्द हमें घर पहुंचाएंगे।
स्कूल, सामुदायिक भवन आश्रम में ठहराया जा रहा
दूसरे राज्यों से वापस आने वाले श्रमिकों एवं परिवार के सदस्यों को क्वारेंटाइन में रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां जिला स्तर पर चल रही है। ताकि संक्रमण का खतरा न रहें। ग्राम स्तर पर गांव से दूर उपयुक्त भवन जैसे स्कूल, सामुदायिक भवन, आश्रम, छात्रावास को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। मजदूरों की संख्या के आधार पर ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्र स्तर पर व्यवस्था की गई है। इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शहर में सीएमओ, ग्रामीण क्षेत्र में जिपं सीईओ नोडल अफसर

छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने कलेक्टर को पत्र भेजकर निर्देश दिए है कि घर वापसी के लिए इच्छुक लोगों की जानकारी उपलब्ध कराएं। ताकि आगे की कार्रवाई कर सकें। कितनी संख्या में लोग, किस प्रदेश के किस जिले से कब आ रहे हैं या आने की संभावना है। अन्य राज्यों से प्राप्त डाटा जानकारी को कलेक्टर तत्काल राज्य नोडल अधिकारी से साझा करेंगे। कार्य योजना बनाने एवं क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जिपं सीईओ को, शहरीक्षेत्र में नपा सीएमओ को नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।

स्वास्थ्य परीक्षण कर क्वारेंटाइन में रखेंगे
स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करें और क्वारेंटाइन सेंटर में रखें। श्रमिकों की अधिकता की स्थिति में प्रदेश की सीमा क्षेत्र या नजदीकी जिले के अन्य निर्धारित स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अपर कलेक्टर एके वाजपेयी ने बताया कि दूसरे राज्यों में 4 हजार से ज्यादा लोग फंसे है। जो घर वापस आना चाह रहे है। राज्य शासन के आदेशानुसार जरुरी कार्रवाई चल रही है।



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1725 people stranded in Balade district in Maharashtra between Corona




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कोरोना के बीच महाराष्ट्र में फंसे हैं बालाेद जिले के 1725 लोग

देश के 22 राज्यों में फंसे 4 हजार 227 लोगों ने ग्राम पंचायत में संपर्क कर और फोन से सूचना देकर घर वापसी के लिए जिला प्रशासन से लगाई गुहार है। जिसमें सिर्फ महाराष्ट्र राज्य में फंसे एक हजार 725 लोग शामिल हैं यानी जितने अब तक दूसरे राज्यों से पहुंचे है, उससे ज्यादा और पहुंचेंगे। जिला प्रशासन के अनुसार मार्च से 7 मई तक 3 हजार 953 लोग दूसरे राज्यों से पहुंचे हैं। वहीं 7 अप्रैल तक दूसरे राज्यों में फंसे 1308 लोगों की पहचान कर सूची तैयार की गई थी। इस हिसाब से एक माह में ही 2 हजार 919 लोगों की और पहचान हुई है। जो कोरोना के कहर के बीच घर वापस आना चाह रहे है।
स्थानीय अफसरों का कहना है कि जिले के कितने लोग दूसरे राज्यों में फंसे है, इसकी जानकारी राज्य शासन को रोजाना दी जा रही है। घर कब तक पहुंचेंगे, इस संबंध में राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। कोरोना को लेकर देशभर में महाराष्ट्र संवेदनशील है, यहां 18 हजार से ज्यादा पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। वहां फंसे लोग चाह रहे हैं कि जल्द गृह जिला पहुंचे। महाराष्ट्र के चिखलोली गांव में फंसे माहुद बी के तिलकराम, चितरंजन ने बताया कि किसी तरह भोजन मिल रहा है लेकिन अब हमें घर आना है, यहां केस बढ़ते ही जा रहे है, काम बंद है। प्रशासन, शासन से उम्मीद है कि जल्द हमें घर पहुंचाएंगे।
स्कूल, सामुदायिक भवन आश्रम में ठहराया जा रहा
दूसरे राज्यों से वापस आने वाले श्रमिकों एवं परिवार के सदस्यों को क्वारेंटाइन में रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां जिला स्तर पर चल रही है। ताकि संक्रमण का खतरा न रहें। ग्राम स्तर पर गांव से दूर उपयुक्त भवन जैसे स्कूल, सामुदायिक भवन, आश्रम, छात्रावास को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। मजदूरों की संख्या के आधार पर ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्र स्तर पर व्यवस्था की गई है। इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शहर में सीएमओ, ग्रामीण क्षेत्र में जिपं सीईओ नोडल अफसर

छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने कलेक्टर को पत्र भेजकर निर्देश दिए है कि घर वापसी के लिए इच्छुक लोगों की जानकारी उपलब्ध कराएं। ताकि आगे की कार्रवाई कर सकें। कितनी संख्या में लोग, किस प्रदेश के किस जिले से कब आ रहे हैं या आने की संभावना है। अन्य राज्यों से प्राप्त डाटा जानकारी को कलेक्टर तत्काल राज्य नोडल अधिकारी से साझा करेंगे। कार्य योजना बनाने एवं क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जिपं सीईओ को, शहरीक्षेत्र में नपा सीएमओ को नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।

स्वास्थ्य परीक्षण कर क्वारेंटाइन में रखेंगे
स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करें और क्वारेंटाइन सेंटर में रखें। श्रमिकों की अधिकता की स्थिति में प्रदेश की सीमा क्षेत्र या नजदीकी जिले के अन्य निर्धारित स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अपर कलेक्टर एके वाजपेयी ने बताया कि दूसरे राज्यों में 4 हजार से ज्यादा लोग फंसे है। जो घर वापस आना चाह रहे है। राज्य शासन के आदेशानुसार जरुरी कार्रवाई चल रही है।



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1725 people stranded in Balade district in Maharashtra between Corona




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कोरोना के बीच महाराष्ट्र में फंसे हैं बालाेद जिले के 1725 लोग

देश के 22 राज्यों में फंसे 4 हजार 227 लोगों ने ग्राम पंचायत में संपर्क कर और फोन से सूचना देकर घर वापसी के लिए जिला प्रशासन से लगाई गुहार है। जिसमें सिर्फ महाराष्ट्र राज्य में फंसे एक हजार 725 लोग शामिल हैं यानी जितने अब तक दूसरे राज्यों से पहुंचे है, उससे ज्यादा और पहुंचेंगे। जिला प्रशासन के अनुसार मार्च से 7 मई तक 3 हजार 953 लोग दूसरे राज्यों से पहुंचे हैं। वहीं 7 अप्रैल तक दूसरे राज्यों में फंसे 1308 लोगों की पहचान कर सूची तैयार की गई थी। इस हिसाब से एक माह में ही 2 हजार 919 लोगों की और पहचान हुई है। जो कोरोना के कहर के बीच घर वापस आना चाह रहे है।
स्थानीय अफसरों का कहना है कि जिले के कितने लोग दूसरे राज्यों में फंसे है, इसकी जानकारी राज्य शासन को रोजाना दी जा रही है। घर कब तक पहुंचेंगे, इस संबंध में राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। कोरोना को लेकर देशभर में महाराष्ट्र संवेदनशील है, यहां 18 हजार से ज्यादा पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। वहां फंसे लोग चाह रहे हैं कि जल्द गृह जिला पहुंचे। महाराष्ट्र के चिखलोली गांव में फंसे माहुद बी के तिलकराम, चितरंजन ने बताया कि किसी तरह भोजन मिल रहा है लेकिन अब हमें घर आना है, यहां केस बढ़ते ही जा रहे है, काम बंद है। प्रशासन, शासन से उम्मीद है कि जल्द हमें घर पहुंचाएंगे।
स्कूल, सामुदायिक भवन आश्रम में ठहराया जा रहा
दूसरे राज्यों से वापस आने वाले श्रमिकों एवं परिवार के सदस्यों को क्वारेंटाइन में रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां जिला स्तर पर चल रही है। ताकि संक्रमण का खतरा न रहें। ग्राम स्तर पर गांव से दूर उपयुक्त भवन जैसे स्कूल, सामुदायिक भवन, आश्रम, छात्रावास को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। मजदूरों की संख्या के आधार पर ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्र स्तर पर व्यवस्था की गई है। इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शहर में सीएमओ, ग्रामीण क्षेत्र में जिपं सीईओ नोडल अफसर

छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने कलेक्टर को पत्र भेजकर निर्देश दिए है कि घर वापसी के लिए इच्छुक लोगों की जानकारी उपलब्ध कराएं। ताकि आगे की कार्रवाई कर सकें। कितनी संख्या में लोग, किस प्रदेश के किस जिले से कब आ रहे हैं या आने की संभावना है। अन्य राज्यों से प्राप्त डाटा जानकारी को कलेक्टर तत्काल राज्य नोडल अधिकारी से साझा करेंगे। कार्य योजना बनाने एवं क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जिपं सीईओ को, शहरीक्षेत्र में नपा सीएमओ को नोडल अफसर नियुक्त किए हैं।

स्वास्थ्य परीक्षण कर क्वारेंटाइन में रखेंगे
स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करें और क्वारेंटाइन सेंटर में रखें। श्रमिकों की अधिकता की स्थिति में प्रदेश की सीमा क्षेत्र या नजदीकी जिले के अन्य निर्धारित स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अपर कलेक्टर एके वाजपेयी ने बताया कि दूसरे राज्यों में 4 हजार से ज्यादा लोग फंसे है। जो घर वापस आना चाह रहे है। राज्य शासन के आदेशानुसार जरुरी कार्रवाई चल रही है।



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रायकेरा की 100 एकड़ जमीन पर बनेगा मॉडल ऑर्गेनिक फार्म

सामुदायिक सहभागिता से किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके लिए मॉडल ऑर्गेनिक फार्म को विकसित करने की योजना तैयार कीहै। इसका जिले के किसानों को लाभ मिलेगा। रायकेरा में बेलजोरा व्यपवर्तन के कारण सिंचाई की बेहतर सुविधा है। किसानों की सहमति से लगभग 100 एकड़ कृषि योग्य भूमि में फलदार पौधे, औषधीय पौधे विभिन्न किस्म की सब्जियां आदि लगाई जाएगी, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह पर माडल सफल होने पर इसको जिले के अन्य जिलों पर लागू किया जाएगा।

जिले के लिए बनेगा एक मॉडल

कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने बताया कि किसानों के भूमि में शासन की योजनाओं के तहत कार्य कराया जाएगा और रायकेरा में मॉडल ऑर्गेनिक फार्म विकसित करने के योजना बनाई है। रायकेरा गांव मे पर्याप्त भूमि है और सिंचाई की भी व्यवस्था है। मार्च 2021 तक इसे मूर्त रूप दे दिया जाएगा। इस मॉडल ऑर्गेनिक फार्म से किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जिला पंचायत के सीईओ केएस मंडावी ने कहा कि इस मॉडल ऑर्गेनिक उद्यान के विकास में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में भी काम कराया जाएगा। किसानों की भूमि खेती के लिए योग्य बनाया जाएगा। योजनबद्ध तरीके से तालाब डबरी कुआं बनाए जाएंगे।

मॉडल उद्यान में लगेंगे औषधीय पौधे
वनमंडलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव ने कहा कि यह उपयुक्त स्थल है, जिसे मॉडल उद्यान के रूप में विकसित किया जा रहा है इस जिले में औषधीय पौधे के लिए अनुकूल मौसम है। विभिन्न औषधीय वन तुलसी, बेल, तेजपत्ता, पुर्ननवा, गिलोय, मुनगा तेजबल लेमनग्रास भुईंनीम, आंवला केसर, सफेद मूसली हर्रा, बेहरा, हड़जोड़ जैसे अनेक औषधि है। इनको उद्यान के रूप में विकसित कर उसका व्यवसायिक उत्पादन करने से किसानों को लाभ होगा।वनविभाग की योजनाओं के तहत इनके विकास में सहयोग किया जाएगा।

जगह का अफसरों ने किया निरीक्षण
कुनकुरी ब्लाक के रायकेरापंचायत में उद्यानिकी एवं वानिकी के प्रोत्साहन के लिए मॉडल आर्गेनिक फार्म विकसित करने के लिए कुनकुरी विधायक यूडी मिंज, कलेक्टर , डीएफओ , जिला पंचायत सीईओ एवं उप संचालक कृषि समेत अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया और कार्ययोजना को तैयार करने पर चर्चा की ताकि कृषि,वानिकी एवं उद्यानिकी के बड़े प्रोजेक्ट माध्यम से एक मॉडल तैयार कर ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ कटाई रोकी जा सके।



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Model Organic Farm to be built on 100 acres of Raikera land




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मई में 45 मीटर तक रहने वाला जल स्तर 17 पर

लॉकडाउन के चलते पहली बार जिले में वाटर लेवल अपने सबसे बेहतर स्थिति में है। पीएचई के मुताबिक वर्तमान में जिले में 17 से 30 मीटर में पानी मौजूद है। जबकि दूसरे वर्षों में मई के दौरान वाटर लेवल की स्थिति 45 से 50 मीटर तक गिर जाती थी। इसे कोरोना का पॉजिटिव इफेक्ट माना जा रहा है।
दरअसल लॉकडाउन की वजह से जिलेभर में उद्योग धंधे बंद रहे, निर्माण कार्य भी पूरी तरह बंद रहा है। खेतों में भी किसानों ने काम न के बराबर किया है। इसके चलते भू-जल का इस्तेमाल इस बार पूरी तरह बंद रहा। उद्योग और निर्माण कार्य के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल भू-जल का किया जाता है। नलकूपों से पानी खींचकर ही उद्योग संचालित होते हैं। लेकिन लॉकडाउन के चलते इस बार ऐसी स्थिति नहीं बनी। इसी के चलते अब तक जिले में वाटर लेवल सबसे बेहतर स्थिति में है। पीएचई के ईई एसएन पांडे ने बताया कि वर्तमान में वाटर लेवल की स्थिति 17 से 30 मीटर पर है। इसके चलते खासकर ग्रामीण इलाकों में जलसंकट की स्थिति निर्मित नहीं हुई है। उम्मीद है कि इस साल जिले के ज्यादातर हिस्सों में पानी की किल्लत नहीं होगी। वर्तमान स्थिति काे देखते हुए पानी के लिए हर साल होने वाली मशक्कत से भी ग्रामीणों और अफसरों को राहत मिली है।
ग्रामीण इलाकों में भी नहीं होगी समस्या

जिले में 17 हजार हैंडपंप, गिनती के ही बंद हुए: जिले में 17 हजार से अधिक हैंडपंप मौजूद हैं। हर साल मई में करीब 1500 से 2500 हैंडपंप काम करना बंद कर देते है। साल 2019 में यह आंकड़ा 3500 के पार पहुंच गया था, इस बार ऐसी स्थिति नहीं बनी है। पीएचई के ईई पांडे ने बताया कि ज्यादातर हैंडपंप काम कर रहे हैं।

350 से ज्यादा उद्योग बंद रहे, 400 से अधिक निर्माण कार्य: जिले बड़े उद्योगों के अलावा पानी पाउच, बर्फ, आईसक्रीम, आरओ वाटर, कोल्डड्रिंक्स सहित अन्य 350 से अधिक छोटे-छोटे उद्योग मौजूद है। इन उद्योगों में पूरी तरह नलकूपों से ही पानी का इस्तेमाल होता है। लेकिन इस बार ये सभी बंद रहे। जिले में निर्माण कार्य भी बंद रहे।

सप्लाई में खर्च होने वाले लाखाें रुपए भी बचे

3-4 साल से जिले में पानी की किल्लत अधिक बढ़ने लगी थी, ग्रामीण इलाके इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे थे। जिसे देखते हुए जनपद पंचायत के मदों से गांव में पीएचई के माध्यम से पानी की सप्लाई टैंकरों से हो रही थी। जिले के कई गांव टैंकर पर आश्रित हो गए थे, लेकिन इस बार वाटर लेवल सही होने के चलते ये समस्या भी खत्म हो गई है। इससे वाटर सप्लाई में खर्च होने वाले लाखों रुपए भी बच गए हैं।



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सीटी स्कैन मशीन बंद, 18 घंटे इंतजार के बाद किया रेफर, युवक की मौत

मेडिकल कॉलेज हास्पिटल की अव्यवस्था ने फिर एक युवक की जान ले ली। हॉस्पिटल में सीटी स्कैन बंद होने के बाद भी इसके इंतजार में उसे 18 घंटे तक दाखिल रखा गया, इसके बाद मेकाहारा रिफर किया गया। जहां उसकी मौत हो गई।
डोंगरगांव ब्लाक के कोपपुर निवासी 32 वर्षीय खेमू राम को अचेत अव्यवस्था में गुरुवार रात मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में दाखिल किया गया। खेमू की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रात करीब 9 बजे कैजुअल्टी में दाखिल कर इलाज शुरू किया गया। डॉक्टरों ने रात में ही खेमू के सिटी स्कैन की पर्ची लिखी। लेकिन हॉस्पिटल में मौजूद सिटी स्कैन की मशीन बंद पड़ी हुई है। इसकी जानकारी होने के बाद भी उसे सिटी स्कैन के लिए न तो बाहर भेजा गया और न ही रायपुर रिफर किया गया। खेमू की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसे शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक इसी तरह दाखिल रखा गया और दोपहर बाद उसे मेकाहारा के लिए रिफर किया गया। जहां सिटी स्कैन होने के कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई।मलेरिया और टाइफाइड मस्तिष्क पर चढ़ा: रायपुर मेकाहारा में सिटी स्कैन के बाद पता चला कि खेमू को मलेरिया और टाइफाइड है। जो बढ़ने की वजह से उसके मस्तिष्क पर असर कर गया है। पूरे मामले को लेकर हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. बेक ने इस घटना की जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने डॉक्टरों से पूरे मामले की जानकारी लेने का दावा किया है।



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गर्मी के कारण 549 हैंडपंप का भूजलस्तर गिरा, 718 बंद

गर्मी में लोगों को जलसंकट से राहत नहीं मिल पा रही है। पीएचई विभाग जिले में बंद पड़े हैंडपंप को नहीं सुधार पा रहा है। गांव में लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने 4610 हैंडपंप लगाए हैं। जिले में वर्तमान में 718 हैंडपंप बंद पड़े हैं। इनमें से जलस्तर गिरने के कारण 549 बंद हो गए हैं। 169 हैंडपंप में आईतकनीकी खराबी को सुधारने का कार्य किया जा रहा है। पिछले वर्ष यही संख्या मई के महीने में दोगुनी हो गई थी।
जिले में नल जल प्रदाय योजना के तहत 168 फॉलो राइट रिमूवल प्लांट योजना संचालित है। इसमें से 159 चालू हैं। वहीं 9 बंद पड़े हुए हैं। सात अन्य कारणों से लंबे समय से बंद हैं। इसी तरह से 59 स्थानों पर स्पॉट सोर्स से पानी की सप्लाई होनी है, इनमें से 18 बंद हैं। सभी में सुधार कार्य जारी है। लेकिन पूरी तरह से जल स्रोत के अभाव में यह बंद हो गए हैं। बंद पड़े हुए सरकारी हैंडपंप जल स्रोत और नल-जल योजना के बंद होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। जिले में एकमात्र फॉलो राइट रिमूवल प्लांट ग्राम धौराभाठा में है। वह चालू हालत में है।
नल-जल योजना के कई काम भी बंद : जिले में इस साल गर्मी में हो रही बारिश से भूजल स्तर स्थिर है। फिलहाल ज्यादातर गांवों में वर्तमान में जल संकट की समस्या नहीं है। सरकारी हैंडपंप और सिंगल पावर पंप के माध्यम के अलावा ग्राम पंचायतों में सरपंचों द्वारा पेयजल के लिए पावर पंप से पानी की सप्लाई की जा रही है। लेकिन पीएचई विभाग द्वारा बंद पड़े हैंडपंप को शुरू करने की दिशा में अभी तक प्रयास नहीं किया गया है। अनेक गांवों में नल जल प्रदाय योजना के तहत लाखों रुपए की योजना भी बंद है। इसके चलते आने वाले समय में गंभीर पेयजल संकट का सामना लोगों को करना पड़ सकता है।
पावरपंप से तालाबों को भरने की योजना फेल: तालाबों को निस्तारी योग्य बनाने के लिए बेमेतरा, नवागढ़, साजा क्षेत्र में पावर पंप के माध्यम से तालाबों को भरने की योजना पर फिलहाल पंचायतों में कोई काम नहीं हो पा रहा है। ग्राम पंचायत चुनाव के कुछ दिनों बाद ही लॉक डाउन व कोरोना वायरस संक्रमण काल के आ जाने से पंचायतों में सामान्य सभा की बैठक भी आयोजित नहीं हो पा रही है। इसके चलते ग्राम पंचायतों में हैंडपंप मरम्मत व सुधार कराने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। हैंडपंप सुधारने को जनप्रतिनिधि बैंकों में पैसा निकालने भटक रहे हैं।

चिन्हांकित गांवों में नहीं पहुंच पा रहा पानी
खारे पानी से निजात दिलाने के लिए समूह जल प्रदाय योजना अंतर्गत जिले के चिह्नांकित गांव में फिल्टर पानी की आपूर्ति वैकल्पिक रूप से की जा रही है। लेकिन अधिकांश गांव में सप्लाई नहीं हो रही है। समय रहते ऐसे गांवों को समूह जल प्रदाय योजना से नहीं जोड़ा गया, तो गंभीर पेयजल संकट का सामना करना होगा।
जानकारी देने के बाद भी बंद पड़े हैंडपंप नहीं सुधारे

करीब 3 महीने से नगर व अंचल में हो रही बारिश के कारण भू जलस्तर बना हुआ है। भूजल स्तर में गर्मी के समय सीजन में होने वाले गिरावट में काफी कमी आई है। इसके चलते इस साल पिछले वर्ष की तुलना में सरकारी हैंडपंप 50% कम मरम्मत योग्य हैं। निस्तारी तालाबों में पानी उपयोग के लिए भरा हुआ है। इससे भूजल स्तर में गिरावट नहीं आई है। पीएचई विभाग द्वारा मैदानी कर्मचारियों को बंद पड़े हैंडपंप में अतिरिक्त पाइप डालकर चालू करने के निर्देश दिए हैं। सचिव, सरपंचों द्वारा निरंतर इस संबंध में विभाग द्वारा रिपोर्ट ली जा रही है। उसके बाद भी बंद पड़े हैंडपंप को विभाग द्वारा सुधारा नहीं जा सका है। पीएचई ईई बेमेतरा आशा लता गुप्ता ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल जिले में गंभीर पेयजल संकट किसी भी गांव में नहीं है। 718 बंद पड़े हैंडपंप को फिर से शुरू करने का कार्य किया जा रहा है।



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शहर में 1.35 करोड़ रुपए की लागत से बनेगी सड़क विधायक छाबड़ा ने किया शुभारंभ

विधायक आशीष छाबड़ा ने शुक्रवार को नगर में 1.35 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले सड़क डामरीकरण रिनुवल कार्य का नारियल फोड़कर शुभारंभ किया। शहर के पियर्स चौक से लेकर जिला सत्र न्यायालय से होकर भगवान परशुराम चौक होते हुए दुर्ग रोड तक सीमेंट सड़क पर डामरीकरण किया जाना है। सड़क पर डामरीकरण कार्य हो जाने से बेमेतरा शहर की आंतरिक मार्गों का भी सौंदर्यीकरण हो जाएगा। इससे लोगों को सड़कों पर बने गड्ढे से राहत मिलेगी। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष शकुंतला मंगत साहू, सभापति मनोज शर्मा, नगर पालिका उपाध्यक्ष पंचू साहू, पार्षद रानी सेन, प्रांजल तिवारी, प्रवीण राजपूत, सीएमओ होरी सिंह ठाकुर, कार्यपालन अभियंता निर्मल सिंह, अनुविभागीय अधिकारी दलगंजन साय, उपअभियंता सचिन शर्मा, राकेश वर्मा मौजूद थे।



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MLA Chhabra inaugurates ~ 1.35 crore road in the city




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बिजली विभाग के ठेका कर्मियों ने कहा-15 से जाएंगे हड़ताल पर

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ठेका कर्मचारियों से कोरोना वायरस जैसी महामारी में भी काम लिया जा रहा है, लेकिन ठेका कर्मचारियों को विभाग द्वारा कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है। इन्हें न ही दुर्घटना बीमा के दायरे में रखा गया और न ही कल्याण योजना का लाभ दिया जा रहा है। परेशान 33 व 11 केवी ठेका कर्मचारियों ने 15 मई से हड़ताल में जाने की चेतावनी बिजली बोर्ड व सरकार को दी है। ठेका कर्मचारी मजदूर संघ के अध्यक्ष गुलेन्द्र यादव ने कहा कि विद्युत आपूर्ति का बड़ा कार्य सौंप दिया गया, पर उन्हें सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। संरक्षक नरोत्तम धृतलहरे ने कहा कि विद्युत विभाग निरंतर बिजली आपूर्ति के लिए ठेका कर्मचारियों के ऊपर निर्भर है, किन्तु कर्मचारी कल्याण योजना में शामिल नहीं किया है। जबकि मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश की सरकार ने सभी कोरोना योद्धाओं को कल्याण योजना में शामिल किया है।



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साइकिल, मोपेड और बाइक से 10 परिवार के 40 लोग निकले, हजार किमी की यात्राकर पहुंचेंगे अपने घर

सड़क पर लूना और साइकिल से पत्नी व बच्चों को बैठाकर जा रहे ये लोग वो ठेले और खोमचे वाले हैं, जाे लगभग 20 साल से शहर में रोजी-रोटी कमाते थे। गर्मी में ठंडी कुल्फी और बर्फ तो बाकी दिनों में गुपचुप और चाट बेचते थे। कोरोना से इतने बेबस हुए कि यहां कमाया हुआ सब कुछ बेचकर 1000 किलोमीटर दूर झांसी के लिए निकलना पड़ा। रविवार की रात 2 बजे भास्कर की टीम को असहाय हुए इन लोगों का काफिला घरघोड़ा रोड पर उर्दना के नजदीक दिखा।
कोई साइकिल पर टूटी आस लिए चल रहा था तो कोई लूना पर तीन लोगों बैठाकर जाते नजर आया। झांसी से दो दशक पहले आए 10-12 परिवार के 40 महिला, पुरुष, बच्चे इंदिरा नगर में रहते थे। कोरोना ने काम छीन लिया और अब कोई उम्मीद भी नहीं बची। बिना धंधे के गुजारा संभव नहीं लगा। यहां पसीना बहाकर 2 रोटी कमाते और अपने बूढे मां-पिता के लिए कुछ रुपए भी भेजते थे। कई दिनों से काम बंद था। रास्ते में खाने के लिए पैसों की जरूरत होगी, इसलिए अपने सामान भी बेच दिए। मजबूरी कहिये या हौसला, कहते हैं कुछ महीनों में सब ठीक होगा तो वापस आएंगे। यूपी के झांसी जिले के ये लोग फरवरी से जून तक गांव-गांव जाकर आइसक्रीम बचते थे। सितंबर से दिसंबर तक गुपचुप बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। 10 दिनों तक घर जाने की अनुमति मांगते रहे। प्रशासन ने आवेदन तक नहीं लिया तो मजबूर होकर अपने देश निकल पड़े।
गांव पहुंच जाएंगे तो पड़ोसी हमें खाने को तो दे ही देंगे
नईम कहते हैं कि यहां मां बहन, भाई के साथ रहता हूं। हर तरफ दौड़ लिया कहीं से खाने को नहीं मिल रहा है। पिछले 45 दिनों में केवल 5 किलो का राशन मिला, जो कब खत्म हो गया मालूम नहीं। घर से बूढ़े पिता से पैसे 2 बार लिया, अब तो वह भी असमर्थ है। यूपी में अपने जनपद जालौन चले जाएंगे तो लोग खाने के लिए दे ही देंगे।
भाेजन की व्यवस्था में बेचनी पड़ी पुरानी बाइक
रफीक बताते हैं कि वह 10 साल से आइसक्रीम और गुपचुप बेच रहे है। उनके साथ परिवार के पांच सदस्य बहन, 2 भाई, भतीजे रहते है। यूपी में घर पर पत्नी बच्चे, मां बाप की सेवा करती है। खाने की परेशानी बढ़ी तो पुरानी बाइक को चार हजार में बेच दी। साइकिल से किसी तरह घर पहुंच गया तो वहां खेती-किसानी या कुछ भी कर लेंगे।
साहब... और रुकते तो बिन खाए ही मर जाते
जब भास्कर की टीम ने उनसे पूछा तो साइकिल रोक कर कहने लगे, साहब। आप नहीं जानते है। एक दिन बीत रहा था तो लग रहा एक साल हो गया। दो दिन बिन खाएं भी रहना पड़ा। किसी दिन सुबह नमक चावल खा लिया पर इन छोटे बच्चों को क्या खिलाएं जहां खाना ही देने वाला कोई नहीं। कलेक्टर ऑफिस, नगर निगम, सिटी कोतवाली हर जगह अपनी लाचारी बयान की, पर किसी ने सुना नहीं। यहां भूखों मरने से अच्छा है, घर जाते हुए मर जाएंगे। और पहुंच गए तो घर पर भूखे भी रह लेंगे।
क्यों बनी ऐसी मजबूरी
परदेस में कमाने आये इन लोगों पर 2 परिवारों की जिम्मेदारी है। यहां पेट भरकर घर के लिए भी पैसे भेजते हैं। इनका व्यवसाय बंद हुआ। लॉकडाउन में दूसरा रोजगार भी नहीं मिला। कुछ रोज घर पर रखा अनाज खा लिया। फिर दूसरों के भरोसे हो गए। सरकारी व्यवस्था इनका पेट नहीं भर सकती। बड़े साहबों के पास जाकर खाने के लिए बोला तो कहते है कि हम कहां से दें। दफ्तरों में कोई यह नहीं बता सका कि उनको घर भेजने का कोई इंतजाम कब होगा।



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40 people of 10 families left by bicycle, moped and bike, will travel to their home after traveling thousands of km




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ओले से प्रभावित 529 को मिली 21 लाख 48 हजार की सहायता

राजस्व विभाग ओलावृष्टि से प्रभावितों को मुआवजा बांट रहा है। एसडीएम राजपूत ने बताया कि पत्थलगांव ब्लाक में ओलावृष्टि से लगभग 60 गांव में 2 हजार 720 मकान तथा 120 हेक्टेयर क्षेत्र पर खड़ी धान, मक्का, साग-सब्जी की फसल व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं। इसमे से 529 लोगों को 21 लाख 48 हजार से अधिक की राहत राशि बांटी गई है। कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर ने राजस्व अमले के साथ 27 अप्रैल को पत्थलगांव में ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों का आकस्मिक निरीक्षण करके प्रभावित हितग्राहियों से मकान एवं फसल क्षति के बारे में तत्काल जानकारी ली थी। उन्होंनें राजस्व अमला को प्रभावितों के लिए मुआवजा राशि का प्रकरण बनाने के लिए निर्देश थे। जिस पर पत्थलगांव एसडीएम दशरथ सिंह राजपूत ने पटवारी, आरआई की टीम के साथ किसानों के खेतों में क्षति का आंकलन किया।



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 थार के रेगिस्तान में आसमान से बरसने लगे अंगारे, लू के थपेड़ों ने झुलसाया, 45 डिग्री के पास पहुंचा तापमान 

अपनी प्रकृति के अनुरूप थार का रेगिस्तान एक बार फिर तपना शुरू हो गया है। आसमान से बरसती आग और अंगारों के समान तपती धरा पर लोगों के लिए बाहर निकलना दुभर हो गया है। मौसम में आए बदलाव के कारण लगातार हो रही बारिश के कारण गर्मी को अपना रौद्र रूप दिखाने का अवसर ही नहीं मिल पा रहा था, लेकिन मौसम साफ होते ही प्रचंड गर्मी का दौर शुरू हो गया है। इस मौसम में पहली बार बाड़मेर-जैसलमेर में तापमापी का पारा 45 डिग्री के निकट पहुंच गया। वहीं जोधपुर में 43 डिग्री की गर्मी में लू के थपेड़े तन को झुलसा रहे है।

अप्रैल के पहले पखवाड़े में गर्मी बढ़ने लगी थी, लेकिन दो-दो दिन के अंतराल से हो रही बारिश के कारण तापमान पर ब्रेक लगा हुआ था। इस कारण अब तक लू के प्रकोप से राहत मिली हुई थी। लेकिन अब मौसम साफ होते ही तापमापी का पारा तेजी से उछाल मारता नजर आ रहा है। जैसलमेर में गुरुवार को तापमान इस गर्मी के मौसम में पहली बार पारा 45 डिग्री के पास 44.9 पहुंच गया है। गुरूवार का दिन अब तक का सबसे गर्म दिन रहा। वहीं बाड़मेर में 44.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। जबकि जोधपुर में 42.8 डिग्री तापमान रहा।

लॉक डाउन के कारण बहुत कम लोग ही घरों से बाहर निकल रहे है। जैसलमेर व बाड़मेर में सुबह से आसमान से अंगार बरसना शुरू हो जाते है। दोपहर तक सड़कें तवे के समान तप जाती है और लू के थपेड़ों के कारण घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिन तक गर्मी का असर बरसरार रहने के आसार है। तापमान बढ़ने के साथ लू के थपेड़े चलेंगे।

फोटो एल देव जांगिड़



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जोधपुर में भीषम गर्मी में छतरी पकड़ सड़कों पर डटे है पुलिस के जवान।




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राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- दुष्कर्म पीड़िता को मुआवजा दिए जाने के बाद उसके पक्षद्रोही होने पर क्या किया, 13 मई तक जवाब देने का आदेश

(संजीव शर्मा)। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि दुष्कर्म मामले में पीड़िता को मुआवजा राशि देने के बाद में उसके पक्षद्रोही होने पर सरकार दिए गए मुआवजे की वसूली के लिए क्या कार्रवाई करती है? जस्टिस एसपी शर्मा ने यह अंतरिम निर्देश दुष्कर्म के आरोपी रिंकू की जमानत अर्जी पर दिया। वहीं, अदालत ने इस संबंध में सरकार से 13 मई को रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।

आरोपी ने यह कहा याचिका में
आरोपी ने याचिका में कहा कि नाबालिग पीड़िता के पिता ने 31 अक्टूबर को भरतपुर के भुसावर पुलिस थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में दुकान का शटर गिराकर पीड़िताके साथ दुष्कर्म करने की बात कही थी, लेकिन ट्रायल में पीड़िता ने दुष्कर्म से इनकार कर दिया और कोर्ट ने उसे पक्षद्रोही घोषित कर दिया,इसलिए उसे जमानत दी जाए।

इसके विरोध में सरकार ने कहा कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों में अपराध को दोहराया था,इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दें। जिस पर कोर्ट ने सरकार से पूछा कि दुष्कर्म मामलों में सरकार पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत जो मुआवजा राशि देती है यदि पीड़िता पक्षद्रोही हो जाती है तो वह दिए मुआवजे की वसूली के लिए क्या करती है।



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Rajasthan High Court on Ashok Gehlot Govt Over Bharatpur Bhusawar case




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युवक की संदिग्धावस्था में मौत, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका; शव से 200 फीट दूर मिलीं चप्पलें, शरीर पर कई जगह घाव

(अशोक भारती)। तहसील के गांव बल्लभगढ़ निवासी एक युवक शुक्रवार तड़के गाय चराने जंगल में गया। सुबह 11 बजे उसका शव जंगल में संदिग्ध अवस्था में मिलने पर क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवाया।


प्रथम दृष्टया मृतक के शरीर पर जगह-जगह घाव होने तथा उसकी चप्पल काफी दूर मिलने पर ग्रामीणों ने हत्या का शक जताया। हांलाकि पुलिस जांच में जुटी है और एफएसएल टीम ने मौके से सबूत जुटाए है। वहीं मृतक के बड़े भाई ने हत्या की आशंका जाहिर करते हुए परिवाद दिया है।


गांव बल्लभगढ़ के ग्रामीणों ने बताया कि धर्मेन्द्र जाट (25) पुत्र फत्ते सिंह जाट प्रतिदिन गाय-भैंस चराने जंगल में जाता था। शुक्रवार को ग्रामीण महिलाओं ने धर्मेंद्र जाट के घर सूचना दी कि वह जंगल में एक खेत की मेढ़ पर पड़ा है।

सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे तब तक क्षेत्र में सनसनी फैल गई। परिजन पुलिस को सूचित करते उसे अस्पताल लेकर गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को मोर्चरी पर रखवाया। एफएसएल टीम को सूचित किया और जांच में जुट गई।


थाना प्रभारी राजेश खटाना ने बताया कि बल्लभगढ़ निवासी वीरेन्द्र सिंह जाट ने दिए परिवाद में बताया कि घर पर कुछ महिलाएं आईं उन्होंने बताया कि उसका भाई धर्मेन्द्र बलवीर मीना के खेत की मेढ़ पर पड़ा है। सूचना मिलते ही परिजन के साथ वह धर्मेंन्द्र को अस्पताल लेकर गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृतघोषित कर दिया। उसके शरीर पर जगह-जगह निशान मिले हैं। उन्हें उसकी हत्या की आशंका है। पुलिस जांच में जुटी है। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है।



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Corona Lockdown In Bharatpur Updates; Man dies in suspicious condition In Rajasthan Ballabhgarh




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मिर्धा अपहरण कांड के अभियुक्त आतंकी हरनेक सिंह को हाईकोर्ट से मिली 28 दिन की विशेष पैरोल, 2007 से जयपुर जेल में बंद है 

(संजीव शर्मा)। कोर्ट ने राजेन्द्र मिर्धा अपहरण केस में जयपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी अभियुक्त हरनेक सिंह को सशर्त 28 दिन की विशेष पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया है। वहीं राज्य सरकार के 17 अप्रैल 2020 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिमें अभियुक्त को 13 अप्रैल को दी गई विशेष पैरोल पर रिहा करने का आदेश निरस्त कर दिया था।

सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस एसके शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश शुक्रवार को हरनेक सिंह की आपराधिक याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि अभियुक्त 13 साल से ज्यादा की सजा काट चुका है और पूर्व में मिली पैरोल के तय समय में वापस आ गया था। उसे भी 13 अप्रैल के आदेश से 147 अन्य कैदियों के साथ राज्य स्तरीय पैरोल कमेटी की सिफारिश पर विशेष पैरोल मिली थी, लेकिन उसे पैरोल पर नहीं छोड़ा और बाद में 17 अप्रैल को पैरोल आदेश रद्द कर दिया। इस दौरान न तो परिस्थतियों में कोई बदलाव हुआ और न ही पैरोल रद्द करने का कोई उचित कारण दिया है। ऐसी स्थिति में प्रार्थी अभियुक्त को पैरोल मंजूर करने व राज्य सरकार का 17 अप्रैल का आदेश रद्द किया जाता है।

प्रार्थी के अधिवक्ता विश्राम प्रजापति ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने केवल इस आधार पर हरनेक की मंजूर की गई विशेष पैरोल को रद्द कर दिया था कि वह बाहरी राज्य का है और राजेन्द्र मिर्धा अपहरण कांड का अभियुक्त है। कानूनी रूप से दी गई पैरोल रद्द करने के लिए यह कोई आधार नहीं है। इसलिए प्रार्थी अभियुक्त को विशेष पैरोल पर रिहा किया जाए। हरनेक सिंह फरवरी 2007 से ही जयपुर जेल में बंद है।

यह है मामला

प्रदेश में चर्चित रहे इस मामले में कांग्रेस के तत्कालीन वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेन्द्र मिर्धा का 17 फरवरी, 1995 को सी-स्कीम स्थित घर से अपहरण हुआ था। आतंकियों ने मिर्धा का अपहरण खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट के मुखिया देवेन्द्रपाल सिंह भुल्लर को रिहा करने के लिए किया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जयपुर के मॉडल टाउन कॉलोनी में मकान नंबर बी-117 पर छापा मारा और गोलीबारी की।

पुलिस कार्रवाई में आतंकी नवनीत सिंह कांदिया मारा गया जबकि दयासिंह लाहौरिया व उसकी पत्नी सुमन सूद और हरनेक सिंह फरार हो गए थे। बाद में लाहौरिया व सुमन सूद अमेरिका भाग गए थे। इन दोनों को तीन फरवरी, 1997 को प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया।

कोर्ट ने लाहौरिया को उम्रकैद व सुमन को पांच साल कैद की सजा दी। इस दौरान पंजाब पुलिस ने हरनेक सिंह को 2004 में गिरफ्तार किया और 26 फरवरी 2007 को राजस्थान पुलिस के सुपुर्द किया। मिर्धा अपहरण कांड में महानगर की एडीजे कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2017 को हरनेक सिंह को उम्रकैद की सजा दी।



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Rajendra Mirdha kidnapping case accused harnek singh gets 8 days parole




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रात पौने 12 बजे कराहती गर्भवती महिला को निजी गाड़ी से दो पुलिसकर्मियों ने अस्पताल पहुंचाया, परिजनों ने कहा- दोनों फरिश्ता बनकर आए

राजधानी जयपुर में कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के दौरान गश्त पर मौजूद दो पुलिसकर्मियों ने दर्द से तड़प रही गर्भवती महिला की मदद की। रात पौने 12 बजेइन दोनों पुलिसकर्मियों नेमहिला की मदद कर निजी कार से उसे महिला चिकित्सालय पहुंचाया। वहीं, महिला के आस-पड़ोस में रहने वाले लोग उसकी मदद के लिए आगे नहीं आए। पुलिसकर्मियों की इस मदद की लोग सराहना कर रहे हैं।

यह है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के नार्थ जिले में जालुपरा थाने में मौजूद एएसआई सुनील कुमार रात्रिकालीन जाब्ता चेकिंग के इनचार्ज की ड्यूटी कर रहे थे। करीब पौने 12 बजे जालुपूरा निवासी साबिर की गर्भवतीपत्नी को तेज दर्द उठाऔर उसकी तबियत बिगड़ गई। ऐसे में परिवार के लोग घबरा गए।साबिर ने पड़ोसियोंसे मदद के लिए गाड़ी मांगी। ताकि वह अपनी पत्नी को जल्द से जल्द महिला चिकित्सालय पहुंचा सके,लेकिन किसी ने उन्हें अपनी गाड़ी नहीं दी।ऐसे में किसी तरह साबिर अपनी पत्नी को लेकरपरिवार के सदस्यों के साथकरीम होटल तक पहुंचे।

घर से करीब 200 मीटर दूर तक पहुंचते वक्त बिगड़ गई हालत

ड्यूटी प्वाइंट पर एएआई सुनील कुमार व हेडकांस्टेबल दुर्गाप्रसाद नजर आए। होटल तक पहुंचने में गर्भवती महिला की तबियत और बिगड़ गई थी,तब उनके परिजनों नेपुलिसकर्मियों से किसी तरह अस्पताल पहुंचाने में मदद की गुहार लगाई,लेकिन वहां कोई गाड़ी नजर नहीं आई। ऐसे में एएसआई सुनील कुमार ने खुद अपनी निजी कार से गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि महिला अपने पति के साथ बाइक पर बैठकर हॉस्पिटल पहुंचने की स्थिति में नहीं थी।

एएसआई सुनील कुमार नेसाथी हेडकांस्टेबल दुर्गाप्रसाद के साथ तत्काल महिला को कार से चांदपोल स्थित जनाना हॉस्पिटल पहुंचाया। जहां महिला का उपचार शुरू किया गया।एएसआई सुनील ने महिला के पति को किसी भी तरह की मदद के लिए अपने मोबाइल नंबर भीदिए। इसके बाद पुलिसकर्मियों की इस मानवीय मदद की चर्चा सुबह तक इलाके में पहुंच गई। परिवार के सदस्यों ने भी कहा- जब मदद के लिए पड़ोसीआगे नहीं आए,तब जालुपुरा थाने के ये दोनों पुलिसकर्मी फरिश्ता बनकर आए।



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जालूपूरा थाने के एएसआई सुनील कुमार व हेडकांस्टेबल दुर्गाप्रसाद, जिन्होंने रात 12 बजे दर्द से कराह रही गर्भवती महिला को कार से अस्पताल पहुंचाया।




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संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बीच एक साथ 71 जने कोरोना का मात देकर लौटे अपने घर

शहर में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या से बने दहशत भरे माहौल के बीच शुक्रवार शाम एक अच्छे समाचार ने सभी का हौसला बढ़ा दिया। एक साथ 71 लोग कोरोना को मात देकर खुशी-खुशी अपने घर के लिए विदा हुए। इस तरह शहर में अब तक मिले 851 कोरोना संक्रमितों में से 339 लोग अस्पताल से एकदम स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके है। इन सभी लोगों को इनका इलाज करने वाले डॉक्टरों व अन्य चिकित्साकर्मियों ने तालियां बजाकर विदा किया।

आज कोरोना को पराजित कर घर लौटने वालों में 45 पुरुष व 26 महिलाएं शामिल है। इनमें सबसे अधिक 84 वर्ष के घोड़ा का चौक निवासी राधा किशन व सबसे कम महज नौ माह की इनायत भी शामिल है। इसके अलावा डेढ़ वर्ष की वैदिका भी कोरोना से ठीक होकर आज अपने परिजनों के साथ घर के लिए रवाना हुई। आज डिस्चार्ज हुए लोगों में 11 जने 60 वर्ष से अधिक व 17 जने 20 वर्ष से कम आयु के है।

कोविड केयर सेंटर बोरानाडा से आज 44 व्यक्ति स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। जिला प्रभारी अधिकारी कोविड-19 व उपनिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉक्टर सुनील कुमार सिंह बिष्ट ने उन सभी को शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर ब्लॉक सीएमएचओ डॉक्टर मोहन दान देथा, डॉ विष्णु अग्रवाल, डॉ दिनेश व्यास ,डॉक्टर पंकज सहित भंवरलाल ग्वाला, गिरधारी व सभी नर्सिंग स्टाफ ने उनको शुभकामनाएं दी। डिस्चार्ज होने वालों ने सभी डॉक्टर्स व नर्सेज एवं अन्य कार्मिकों का आभार जताया।

सबसे ज्यादा एक्टिव केस जोधपुर में

आंकड़ों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से प्रदेश में सबसे ज्यादा राेगी जोधपुर में ही मिल रहे हैं, जिससे जोधपुर में एक्टिव केस भी बढ़ गए हैं। जोधपुर ने एक्टिव केस के मामले में जयपुर को भी पीछे छोड़ दिया है। जोधपुर में 851 मरीजों में 523 एक्टिव केस हैं ताे जयपुर में 1137 केसों में 407 एक्टिव केस हैं, जाे जोधपुर से 116 कम हैं। अजमेर 130 एक्टिव केस के साथ तीसरे नंबर पर है, लेकिन ये आंकड़ा जोधपुर से चार गुना कम है। चौथे नंबर पर चित्तौड़गढ़ में 114 एक्टिव केस हैं।

फोटो एल देव जांगिड़



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जोधपुर में शुक्रवार को कोरोना से ठीक होकर अपने घर लौटते लोग।




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जिले में 2 गर्भवती सहित 12 नए काेराेना पॉजिटिव

अजमेर जिले में शुक्रवार काे दाे गर्भवतियाें सहित 12 नए काेराेना पॉजिटिव सामने आए। इसमें से अजमेर शहर से 5, नसीराबाद से 3, ब्यावर, गेगल, घूघरा घाटी और नागाैर का एक-एक युवक शामिल है। इसके साथ ही अजमेर जिले में काेराेना पाॅजिटिव का आंकड़ा बढ़कर 199 पर पहुंच गया है।

जानकारी के अनुसार आदर्श नगर स्थित सैटेलाइट हॉस्पिटल में गुरुवार रात काे दाे गर्भवती महिलाएं भर्ती हुई थीं।दाेनाें की प्रसव पूर्व कराई गई जांच में ये काेराेना पॉजिटिव निकली। इसका समाचार मिलते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में दाेनाें काे जनाना अस्पताल रेफर किया गया। पूरे अस्पताल काे सेनिटाइज्ड करवाने के साथ फ्यूमीगेशन किया गया।

अस्पताल में आम दिन की तरह ही शनिवार से फिर से काम शुरू हाेगा। इधर दाे दिन पूर्व नया बाजार हाेलीदड़ा निवासी वृद्ध की काेराेना पॉजिटिव से माैत हाेने के बाद उसके बेटे-बेटी की शुक्रवार काे आई जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव निकली। इसके साथ ही हाेलीदड़ा क्षेत्र में अब तक चार पॉजिटिव सामने आ चुके हैं। अभी वृद्ध की पत्नी की रिपोर्ट आना बाकी है। इसके अलावा वृद्ध के बाबू माेहल्ला, केसरगंज निवासी एक रिश्तेदार की रिपोर्ट भी पाॅजिटिव आई है। इसके बाद प्रशासन ने पूरे केसरगंज क्षेत्र काे सीज कर दिया है।

एक सप्ताह बाद फिर पूरे जिले के लिए ब्लैक फ्राइडे बन गया शुक्रवार

अजमेर जिले के लिए एक सप्ताह बाद शुक्रवार का दिन ब्लैक फ्राइडे के रूप में सामने अाया। शुक्रवार काे एक ही दिन में 12 पॉजिटिव सामने अाए। इससे पहले 29 अप्रैल काे 15 और 30 अप्रैल काे 10 पॉजिटिव एक ही दिन में सामने आ चुके हैं। एक सप्ताह बाद शुक्रवार काे 11 पॉजिटिव मिलने के बाद अजमेर का आंकड़ा 199 तक पहुंचा दिया है। जेएलएन मेडिकल काॅलेज में नागाैर व पाली के एक-एक युवक का उपचार चलने से दाे मरीजों की संख्या बढ़ गई। इसलिए अजमेर जिले के लिए यह आंकड़ा 199 दर्शाया जा रहा है।

आंकड़ाें की जुबानी

- जेएलएन अस्पताल के काेविड-19 वार्ड में भर्ती पॉजिटिव मरीजों की हालत में लगातार सुधार हाे रहा है। शुक्रवार काे पांच और मरीजों की तबीयत सही हाेने पर उन्हें अस्पताल से छुटटी मिल गई। अब तक अस्पताल से 69 मरीजों के दाेनाें सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव अाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया है।
- काेविड-19 सस्पेक्ट वार्ड में 179 मरीज भर्ती हैं। नए मरीजों की जांच के सैंपल एकत्र किए गए हैं।
-अस्पताल प्रशासन ने गुरुवार काे 460 मरीजों के जांच के सैंपल लिए थे। इस रिपोर्ट में 12 पॉजिटिव मिले हैं।



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12 new Carena positive including 2 pregnant in the district




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महालक्ष्मीपुरम में भी 15 मई तक कर्फ्यू लागू

बारां राेड पर स्थित महालक्ष्मीपुरम में एक व्यक्ति के काेराना पाॅजिटव मिलने के बाद कलेक्टर ने यहां के लाेगाें की सुरक्षा काे देखते हुए कर्फ्यू लागू कर दिया है। 15 मई काे सुबह 6 बजे तक यहां पर लाेगाें के आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
जारी आदेश के अनुसार बाेरखेड़ा थाना क्षेत्र के बारां राेड पर स्थित महालक्ष्मीपुरम में जयहिंद पारेता के मकान ईएस-101 काे केन्द्र बिन्दु मानते हुए उसके चाराें ओर के क्षेत्र काे पक्की बाउण्ड्रीवाॅल व मेन गेट काे जीराे माेबिलिटी क्षेत्र मानते हुए कर्फ्यू लागू किया गया है। यहां पर आवागमन पूरी तरह से बंद रहेगा, जिसकी पालना सख्ती से की जाएगी। यहां जिस व्यक्ति के काेराना पाॅजिटिव मिला है वह काेटा थर्मल में ऑपरेटर के रूप में काम करता है तथा सिविल मेंटीनेंस के लिए थर्मल काॅलाेनी में तैनात है। उसने चीफ इंजीनियर सहित अन्य अधिकारियाें के यहां काम किया था। इसके बाद थर्मल के लगभग 27 कर्मचारियों को क्वारेंटाइन किया गया है। गौरतलब है कि लगातार कोरोना के नए मरीज मिलने की वजह से शहर के लगभग 11 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा है। परकोटे में एक महीने से कर्फ्यू से परेशान लोगों ने गुरुवार रात को मकबरा और कैथूनीपोल थाने का घेराव भी किया था। हालांकि यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने आश्वासन दिया है कि जिन इलाकों से नए मरीज नहीं आ रहे हैं वहां से कर्फ्यू हटाया जाएगा।



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7 मरीज चंद्रघटा के; इस इलाके में 1 महीने से कर्फ्यू फिर भी 232 में 143 पॉजिटिव यहीं से

काेटा में एक बार फिर काेराेना संक्रमित नए मरीजाें की संख्या में वृद्धि हुई है। शुक्रवार काे एक ही दिन में 9 नए मरीज आए हैं। इसी के साथ काेटा में कुल मरीजाें का आंकड़ा 232 पहुंच गया है। नए मरीजाें में छह चंद्रघटा, एक इंदिरा मार्केट, एक बाेरखेड़ा के महालक्ष्मीपुरम व एक लाडपुरा के विक्रम चाैक का निवासी है। महालक्ष्मीपुरम में रहने वाला 35 वर्षीय व्यक्ति काेटा थर्मल का कर्मचारी है, जाे थर्मल की आवासीय काॅलाेनी में सिविल मेंटीनेंस का काम देखता है और अपनी ड्यूटी के तहत उसका कर्मचारियाें की क्वार्टराें में आना-जाना रहता है। इसकी सूचना मिलने के बाद थर्मल प्रबंधन में भी हड़कंप मच गया और चीफ इंजीनियर ने उन सभी लाेगाें की सूची बनाकर चिकित्सा विभाग काे भेज दी, जाे बीते कुछ दिनाें में उक्त कार्मिक के संपर्क में आए हैं। इसके संपर्क में आए कुछ सहकर्मियाें और इंजीनियराें काे भी आइसाेलेट किया गया है। यह कार्मिक संक्रमित कैसे हुआ? इसे लेकर चिकित्सा विभाग पड़ताल कर रहा है, इतना जरूर सामने आया है कि वह नियमित ड्यूटी जा रहा था।

कम सैंपलिंग भी वायरस फैलने की वजह
कोटा में कम सैंपलिंग भी संक्रमण फैलने की बड़ी वजह है। टेस्टिंग कम होने से समय पर मरीजों का पता नहीं लगता। इस दौरान वे अन्य लोगों को संक्रमित कर देते हैं। हालांकि पिछले 2 दिनों से सैंपलिंग की संख्या बढ़ी है।

पैरेलल इन्वेस्टिगेशन:परकोटे में काेराेना आउटब्रेक के दाे बड़े कारण

1.तंग गलियाें वाले इस इलाके में कर्फ्यू की पालना नहीं हाे रही है।

2.राशन और दूध की लाइन में भी मिल रहा वायरस का इंफेक्शन

2 मृतकों के 7 परिजन और किराएदार मिले पॉजिटिव

नए आए मरीजाें में 7 उन 2 परिवाराें से संबंधित हैं, जिनके सदस्याें का काेराेना से निधन हाे गया था। इसमें इंदिरा मार्केट निवासी सर्राफा व्यवसायी की पत्नी (54) भी पाॅजिटिव आई है। सर्राफा व्यवसायी 4 मई काे पाॅजिटिव आए थे और उनकी 5 मई काे ही माैत हाे गई थी। वहीं, मकबरा निवासी जिस 76 वर्षीय वृद्ध की गुरुवार को मौत हुई थी, उनके परिवार से 42 वर्षीय पुरुष, 16 वर्षीय बच्चा, 35 वर्षीय महिला, 39 वर्षीय पुरुष, 40 वर्षीय पुरुष और 52 साल की महिला शामिल है। इनमें से कुछ किराएदार हैं।

किराने की दुकान चलाता है लाडपुरा का मरीज

विक्रम चौक लाडपुरा निवासी 60 वर्षीय वृद्ध कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। वे किराने की दुकान चलाते हैं। अभी उनको बीमारी के लक्षण नहीं हैं। इसकी दुकान पर दिनभर लोग सामान लेने आते-जाते रहते हैं। इस वजह से कई लोगों को इंफेक्शन की संभावना है।

चंद्रघटा में एक माह से कर्फ्यू है, लेकिन इसके बावजूद इस एरिया में वायरस कंट्राेल नहीं हो रहा। भास्कर ने काेटा में अब तक आ चुके 232 मरीजाें का विश्लेषण किया ताे सामने आया कि इनमें से 143 मरीज काे अकेले चंद्रघटा एरिया से ही हैं। यानी कुल मरीजाें का 61.63 प्रतिशत। चंद्रघटा में सबसे पहले 6 अप्रैल काे यहां का रहने वाला एक टैक्सी ड्राइवर पाॅजिटिव आया था, उसी दिन से यहां कर्फ्यू लगा दिया गया था।
मेन राेड पर ताे पुलिस तैनात है, लेकिन गलियाें में लाेग आराम से टहल रहे हैं। इस इलाके की गलियां इतनी तंग हैं कि साेशल डिस्टेंसिंग की पालना भी नहीं हाे रही। इस वजह से संक्रमण फैल रहा है।
इस इलाके में जरूरी सामान की किल्लत है। इस वजह से सामान की वैन आते ही भीड़ लग जाती है। पुलिस साेशल डिस्टेंसिंग की सख्ती से पालना नहीं कराती इस वजह से लाेग आसपास ही खड़े रहते हैं और आसानी से संक्रमित हाे जाते हैं।



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11 दिन में दोगुने हो रहे थे केस, 21 अप्रैल के बाद रफ्तार घटी, पिछले 18 दिन में 1844 रोगी ही बढ़े

राजस्थान में कोरोना मरीजों की संख्या 3579 हो गई है लेकिन इस बीच राहत देने वाले कुछ आंकड़े भी सामने आए हैं।
प्रदेश में अब कोरोना के नए केसों की रफ्तार या तो घट रही है या स्थिर है। पहले केसों के दोगुने होने की रफ्तार 11 दिन थी, लेकिन पिछले 18 दिन से इसमें लगाम लग गई है।
आंकड़ों के अनुसार 14 अप्रैल तक प्रदेश में 1000 कोरोना मरीज थे लेकिन 11 दिन बाद ही 25 अप्रैल को कोरोना केस 2000 के पार पहुंच गए।
इस हिसाब से अगले 11 दिन यानी 6 मई को ही प्रदेश में कुल कोरोना केस 4000 के पार पहुंचने चाहिए थे, लेकिन अभी कुल संख्या 3579 ही है।
21 अप्रैल तक प्रदेश में कुल एक्टिव केसों की संख्या 1435 थी। इसके बाद बीते 18 दिन में प्रदेशभर में केवल 1844 केस ही बढ़े हैं। अब 1465 एक्टिव केस ही बचे हैं।

जयपुर की रिकवरी रेट से प्रदेश का औसत सुधरा

राजधानी जयपुर में प्रदेश के सबसे अधिक 1145 रोगी हैं, लेकिन इनमें से अब 720 रिकवर हो चुके हैं। यानी प्रदेश के कुल मरीजों के 20 फीसदी। जयपुर की ही बात करें तो यहां अब तक 63 फीसदी रोगी रिकवर हो चुके हैं।

21 अप्रैल के बाद 9 दिन ऐसे थे जब मरीजों की संख्या पिछले दिन के मुकाबले घटी। मरीज बढ़ने की रफ्तार स्थिर भी रहती तो अब तक 3960 रोगी होते।



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11 बिहारी मजदूर क्वारेंटाइन, कंटेनर को किया जब्त

पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान गुरुवार रात्रि को खाद्य सामग्री का बैनर लगे एक कंटेनर को रुकवा कर उसके अंदर बैठे 11 बिहारी मजदूरों को क्वारेंन्टाइन किया गया है। यह 11 मजदूर ट्रक में सवार होकर बिना अनुमति के अपने गांव बिहार की ओर गुपचुप तरीके से निकल रहे थे। पुलिस द्वारा कंटेनर को जब्त कर लिया गया है।
रात्रि को देवली थाना पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान खाद्य सामग्री का बैनर लगे एक कंटेनर को रुकवाया। कंटेनर की जांच की गई तो उसके अंदर 11 मजदूर यात्रा करते मिले। पुलिस द्वारा कंटेनर को जब्त कर लिया गया है वहीं चिकित्सा टीम ने सभी 11 मजदूरों को क्वारिन्टाइन कर दिया है। पूछताछ में पता चला कि यह सभी मजदूर निंबाहेड़ा से बिहार के पटना बिना अनुमति के ही जा रहे थे। मेडिकल टीम ने सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग की तथा सभी को क्वारिन्टाइन सेंटर में भर्ती कर दिया है।



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11 Bihari workers quarantine, container seized